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Maruti Suzuki ला रही सस्ती इलेक्ट्रिक कार, कीमत 10 लाख से कम; शानदार रेंज से मचेगा मुकाबला

मुंबई  Maruti Suzuki जल्द ही भारत में एक छोटी और किफायती इलेक्ट्रिक कार लाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV की कीमत 10 लाख रुपये से कम रखने की कोशिश की जा रही है. अगर ऐसा होता है तो ये Maruti की e Vitara के बाद कंपनी की दूसरी इलेक्ट्रिक कार होगी. अच्छी बात है कि ये ज्यादा अफोर्डेबल भी होगी. नई इलेक्ट्रिक कार को अगले दो साल के अंदर लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत करीब 8.5 लाख रुपये से 10.5 लाख रुपये के बीच हो सकती है. यानी इसके एक या दो वैरिएंट 10 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च हो सकते हैं. हालांकि, कीमत को लेकर फिलहाल हमें इंतजार करना होगा. आइए आपको Maruti Suzuki की इस अपकमिंग ईवी के बारे में पूरी डिटेल्स बताते हैं।  315 Km तक मिल सकती है रेंज रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई Maruti EV की रेंज Tata Tiago EV के आसपास हो सकती है. इसमें बैटरी और वैरिएंट के आधार पर करीब 250 से 315 किलोमीटर तक की रेंज मिलने की उम्मीद है. फिलहाल कंपनी ने इसकी बैटरी कैपेसिटी, मोटर आउटपुट या लॉन्च डेट की भी जानकारी नहीं दी है।  e Vitara से काफी अलग हो सकती है नई EV आपको बता दें कि Maruti की पहली इलेक्ट्रिक कार e Vitara एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV के तौर पर बाजार में उपलब्ध है. हालांकि, इसकी कीमत भी काफी ज्यादा है. इसके मुकाबले नई EV को शुरुआत से ही अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. इसी वजह से इसमें छोटी बैटरी दिए जाने की उम्मीद है. ऐसे में 250 से 315 किलोमीटर की क्लेम्ड रेंज वाली Maruti EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV के करीब खड़ी होगी।  डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म पर होगी तैयार इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका डेडिकेटेड इलेक्ट्रिक आर्किटेक्चर हो सकता है. यानी इसे किसी पेट्रोल कार के प्लेटफॉर्म को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करके तैयार करने के बजाय इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन को ध्यान में रखकर बनाया जा सकता है. इससे बैटरी, केबिन और मोटर को बेहतर तरीके से पैकेज करने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV का प्रोडक्शन Maruti Suzuki के गुजरात स्थित हंसलपुर प्लांट में किया जा सकता है. यही प्लांट e Vitara का भी प्रोडक्शन करता है और Maruti के लिए एक अहम एक्सपोर्ट हब है।  Arena नेटवर्क से हो सकती है बिक्री नई किफायती EV को Maruti के Arena नेटवर्क के जरिए बेचे जाने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो इसे Nexa तक सीमित नहीं रखा जाएगा. इससे नई इलेक्ट्रिक कार को WagonR और Swift जैसे मास-मार्केट मॉडल्स के साथ कंपनी के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क का फायदा मिलेगा. किफायती EV को बड़े पैमाने पर बेचने के लिए सिर्फ बड़े शहरों के ग्राहकों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. छोटे शहरों और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाना जरूरी होगा. Maruti इस EV की कीमत कम रखने के लिए लोकलाइजेशन पर भी काफी जोर दे सकती है।  Tata Tiago EV और Punch EV से होगा मुकाबला भारत में अफोर्डेबल इलेक्ट्रिक कारों का सेगमेंट अभी भी काफी छोटा है. खासकर 15 लाख से 30 लाख रुपये वाले EV सेगमेंट के मुकाबले 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों के ऑप्शन काफी कम हैं।  आपको बता दें कि Tata Tiago EV की शुरुआती कीमत करीब 8 लाख रुपये है, जबकि Tata Punch EV की शुरुआती कीमत 9.69 लाख रुपये के आसपास है. MG Comet EV भी एक सस्ता ऑप्शन है. लेकिन इसका छोटा टू-डोर सिटी-कार फॉर्मेट इसे बाकी कारों से अलग बनाता है. ऐसे में Maruti की नई EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV और Punch EV जैसे मॉडल्स को चुनौती दे सकती है. हालांकि, फिलहाल इसकी लॉन्च के आपको इंतजार करना होगा. लेकिन, अगर आप इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो टाटा के ऑप्शन के साथ जा सकते हैं। 

Vaibhav Suryavanshi रचेंगे इतिहास! भारत में डेब्यू करते ही बनाएंगे बड़ा रिकॉर्ड, उम्र सिर्फ 15 साल

मुंबई  अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है. टी-20 टीम में वैभव सूर्यवंशी का भी नाम है, हाल ही में वैभव ने इंग्लैंड दौरे पर टी-20 टीम में खेलकर भारत के लिए डेब्यू किया था. ऐसा कर वैभव भारत की ओर से सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने हैं. वैभव ने सचिन तेंदुलकर के सालों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. तेंदुलकर ने साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच 16 साल और 75 दिन की उम्र में खेला था. वहीं, वैभव ने साल 2026 में इग्लैंड के खिलाफ जब अपना पहला मैच खेला तो वैभव की उम्र 15 साल और 99 दिन थी।  अब एक बार फिर वैभव इतिहास रचने वाले हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज में जैसे ही वैभव कोई मैच खेलेंगे तो वह भारत में भारत की ओर से सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल मैच खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी बन जाएंगे. इस समय यह कारनामा पीयूष चावला के नाम है. पीयूष ने अपना डेब्यू भारत में ही खेलकर दिया था. पीयूष चावला ने जब अपना पहला मैच खेला था तो उनकी उम्र 17 साल और 75 दिन थी. पीयूष ने मोहाली में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपना पहला मैच भारत में खेला था।    भारत में सबसे कम उम्र में पहला मैच खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी     पीयूष चावला 17 साल 75 दिन- मोहाली में, 9 मार्च, 2006 vs इंग्लैंड (टेस्ट)      हरभजन सिंह- 17 साल 265 दिन- बेंगलुरु, 25 मार्च 1998 vs ऑस्ट्रेलिया(टेस्ट)     विजय मेहरा- 16 साल 265 दिन- मुंबई, 2 दिसंबर 1955 vs न्यूजीलैंड (टेस्ट) अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, नितीश कुमार रेड्डी*, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर*, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह*, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा

देशविरोधी गतिविधियों की जांच में बड़ा खुलासा, भोपाल से जुड़े तार कई राज्यों तक; NIA संभाल सकती है केस

भोपाल मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा इसी वर्ष जून में दर्ज किए गए देशविरोधी गतिविधियों के आरोप के मामले जांच के लिए एनआइए अपने हाथ में ले सकती है। इनका अंतरराष्ट्रीय और कई राज्यों से जुड़ाव पाए जाने के कारण ऐसा किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने एटीएस से मामले से जुड़े दस्तावेज लिए हैं। इसके पहले पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में भी एनआईए शामिल रही। मालूम हो कि पिछले सप्ताह कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले में कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश एटीएस की प्रशंसा की थी। भोपाल से शुरू हुई गिरफ्तारी, तीन राज्यों तक पहुंची जांच एटीएस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। सबसे पहले भोपाल के काजी कैंप से फराज को पकड़ा गया। उससे पूछताछ के आधार पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। इनसे मिले साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी के रहने वाले इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क का आरोप चारों आरोपित फिलहाल जेल में हैं। आरोप है कि ये सभी एक पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर अविवाहित मुस्लिम युवकों का ब्रेन वाश कर उन्हें कट्टर बना रहे थे। एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि ये पाकिस्तानी हैंडलर से इतने प्रभावित थे कि उसके कहने पर कुछ भी कर सकते थे। इसे 'लोन वुल्फ अटैक' मॉड्यूल कहा जाता है। इसमें आरोपित किसी बड़े आतंकी संगठन के निर्देश के बिना अकेले ही योजना बनाकर घटना को अंजाम देता है। आरोपितों में प्रमुख है इजहार-उल-हक एटीएस मामले में जब्त किए गए डिजिटल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस पर काम कर रही है। इनकी फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच की जाएगी। अभी तक की पूछताछ में पता चला है कि चारों आरोपितों में प्रमुख इजहार-उल-हक है। वही तीनों को कट्टरपंथी आडियो, वीडियो और पढ़ने की सामग्री उपलब्ध कराता था। भोपाल के फराज का सबसे अधिक करीबी नईम अब्दुल्ला था। नईम भोपाल में उसके घर में आकर भी रुका था। वह फराज से लश्कर-ए-तैयबा के मारे गए आतंकवादी खालिद सैफुल्लाह की तरह बनने के लिए कहता था। बता दें सैफुल्लाह रामपुर में सीआरपीएफ कैंप, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू और नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय में हुए हमले का आरोपित भी था।

जबलपुर में BPL राशन का बड़ा फर्जीवाड़ा, कंपनी डायरेक्टर से GST भरने वालों तक 4,998 परिवार पकड़े गए

जबलपुर  जबलपुर में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वालों के लिए बनी राशन योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिले में पांच हजार से अधिक ऐसे संपन्न परिवार पकड़े गए हैं, जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक होने के बावजूद वे सालों से सरकारी राशन डकार रहे थे। प्रशासन ने अब सख्ती दिखाते हुए इन सभी अपात्र लोगों के कार्ड निरस्त कर दिए हैं और उन्हें नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। लखपति और कंपनी डायरेक्टर भी ले रहे थे मुफ्त राशन     जांच के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 4,998 परिवारों की वार्षिक आमदनी छह लाख रुपये से ज्यादा पाई गई है। हद तो तब हो गई जब 525 ऐसे परिवारों की पहचान हुई जिनके सदस्य बाकायदा पंजीकृत कंपनियों में डायरेक्टर या अन्य ऊंचे पदों पर काबिज हैं। इसके अलावा 40 से 45 परिवार ऐसे भी मिले जो सालाना 25 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं और अपने व्यापार का जीएसटी (GST) तक भरते हैं, लेकिन फिर भी वे गरीबी रेखा के कार्ड का फायदा उठा रहे थे। एसडीएम के सामने पेश होकर देनी होगी सफाई प्रशासन ने अपात्र पाए गए इन सभी हितग्राहियों के नाम आधिकारिक पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस मिलने के बाद इन लोगों को एसडीएम (SDM) के सामने पेश होना होगा। उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने किस आधार पर अब तक बीपीएल कार्ड का इस्तेमाल किया, साथ ही अपनी वर्तमान आय से जुड़े पुख्ता दस्तावेज भी दिखाने होंगे। जवाब संतोषजनक न मिलने पर प्रशासन आगे की दंडात्मक कार्रवाई करेगा। केंद्र के निर्देश पर अगस्त 2025 से चल रही थी जांच     फर्जी कार्डधारकों को बाहर करने का यह अभियान केंद्र सरकार के निर्देशों पर अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। इस सर्वे में उन लोगों को चिह्नित किया गया, जिनकी आर्थिक स्थिति बीते वर्षों में सुधर गई, जिन्हें अच्छी नौकरियां मिल गईं या जिनका कारोबार चल पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद आगे आकर अपना नाम बीपीएल सूची से नहीं कटवाया।     डिप्टी कलेक्टर आर.एस. मरावी के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर अपात्रों के नाम विलोपित कर दिए गए हैं और इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। शासन के निर्देश के बाद ही इनसे वसूली या अन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1998 के बाद से समय-समय पर सर्वे किए जाते रहे हैं, इसके बावजूद अपात्र लोगों के नाम सूची में बने रहे। पात्रों के नाम कटने की शिकायतों पर भी नजर     इस बड़ी कार्रवाई के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां कथित तौर पर वास्तविक और पात्र बीपीएल परिवारों के नाम भी सूची से काट दिए गए हैं। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और ऐसे मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी हकदार गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।     बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के तहत जबलपुर जिले में 1,008 शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के जरिए 3,85,153 राशन कार्डधारी परिवारों (कुल 14,41,765 हितग्राही) को प्रति व्यक्ति 5 किलो प्रतिमाह की दर से राशन बांटा जाता है।  

ग्वालियर रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, 7 ट्रेनों के बदले रूट; तीसरी रेल लाइन का काम शुरू

ग्वालियर  आने वाले दिनों में अगर आप ट्रेन से यात्रा करने का प्लान बना रहे है तो ये खबर आपके काम की है। मध्य रेलवे के पुणे एवं हडपसर यार्ड में हडपसर-पुणे-जीसीएमसी तीसरी रेल लाइन की कमीशनिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा। इस कारण सितंबर और अक्टूबर में कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। इसका सीधा असर एमपी में ग्वालियर से चलने वाली ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस (22194) और दौंड-ग्वालियर एक्सप्रेस (22193) पर पड़ेगा। ग्वालियर होकर चलने वाली हजरत निजामुद्दीन मिरज एक्सप्रेस (12494) और वापसी में मिरज-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12493) भी प्रभावित रहेंगी। वहीं ट्रेन संख्या 22194 ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस 19 सितंबर को पुणे के बजाय खडकी स्टेशन पर आंशिक रूप से समाप्त होगी। इसके अगले दिन ट्रेन संख्या 22193 दौड-ग्वालियर एक्सप्रेस 20 सितंबर को पुणे के बजाय खडकी स्टेशन से रात 12.30 बजे दौंड के लिए रवाना होगी। इन ट्रेनों के मार्ग भी बदले 11078 जम्मू तवी-पुणे एक्सप्रेस 21 सितंबर को मनमाड-इगतपुरी-कल्याण-पनवेल-करजत-लोनावला होते हुए पुणे पहुंचेगी। 12780 हजरत निजामुद्दीन-वास्को-द-गामा एक्सप्रेस 22 सितंबर और 3 अक्टूबर को मनमाड-काष्टी-दौंड-कुईवाडी पंढरपुर-मिरज होकर चलेगी। 11077 पुणे-जम्मू तवी एक्सप्रेस 20 सितंबर को पुणे-लोनावला करजत-पनवेल-कल्याण-इगतपुरी-मनमाड होकर चलेगी। 12147 कोल्हापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 22 सितंबर को कोल्हापुर-मिरज-कुडूवाडी-दौंड-अहिल्यानगर-मनमाड होकर चलेगी। 18519 विशाखापत्तनम–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस : 2 अक्टूबर को दौंड–अहिल्यानगर–मनमाड–इगतपुरी–कल्याण होकर चलेगी 22686 चंडीगढ़–यशवंतपुर एक्सप्रेस: 3 अक्टूबर को मनमाड–काष्टी–दौंड–कुर्डूवाडी–पंढरपुर–मिरज मार्ग से चलेगी। झेलम पुणे से देरी से होगी रवाना ट्रेन 11077 पुणे-जम्मू तवी के पुणे से रवाना होने के समय में भी कुछ तिथियों पर बदलाव किया गया है। 19 सितंबर-शाम 5.50 बजे रवाना होगी, निर्धारित समय से 30 मिनट देरी। 23 सितंबर-शाम 5.50 बजे रवाना होगी, 30 मिनट देरी से। 3 अक्टूबर-शाम 6.45 बजे रवाना होगी, 1.25 घंटे देरी से। 4 अक्टूबर-शाम 7.30 बजे रवाना होगी, 2.10 घंटे देरी से 1 सितंबर से नहीं होगा 20 ट्रेनें का स्टॉपेज यात्रियों को जानकारी के लिए बता दें कि 12138 पंजाब मेल, 20986 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-कोटा साप्ताहिक एक्सप्रेस, 11450 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-जबलपुर एक्सप्रेस, 16032 अंडमान एक्सप्रेस और 16318 हिमसागर एक्सप्रेस 31 अगस्त से 14 अक्टूबर तक फरीदाबाद नहीं रुकेंगी। वहीं 19326 अमृतसर इंदौर एक्सप्रेस, 11842 कुरुक्षेत्र-खजुराहो एक्सप्रेस, 19020 हरिद्वार-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस, 12920 मालवा एक्सप्रेस, 14622 फिरोजपुर-नांदेड एक्सप्रेस, 22918 हरिद्वार-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस और 19308 ऊना हिमाचल-इंदौर एक्सप्रेस का ठहराव 1 सितंबर से 15 अक्टूबर तक नहीं होगा।

बाढ़ से कितने घर डूबेंगे, अब पहले बताएगा ‘गरुड़’, 413 निकायों का GIS डेटा तैयार करने वाला MP पहला राज्य

भोपाल  मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी 413 नगरीय निकायों के हर घर और शहरी व्यवस्थाओं का GIS डेटा तैयार किया गया है। ‘गरुड़ MP’ (GARUD MP) सिस्टम के जरिए अब बाढ़ आने से पहले ही संभावित खतरे का पता लगाया जा सकेगा। इंदौर, भोपाल समेत सभी छोटे-बड़े शहरों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने पर प्रभावित होने वाले इलाकों, घरों और आबादी का पहले ही नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे राहत और बचाव की तैयारी समय रहते की जा सकेगी। जलस्तर बढ़ते ही दिखेगा असर गरुड़ ऐप में अलग-अलग जलस्तर के आधार पर सिमुलेशन की सुविधा विकसित की गई है। पानी तय स्तर से ऊपर बढ़ने पर सिस्टम नक्शे पर बता सकेगा कि कौन सा वार्ड प्रभावित होगा, कितने घर और संपत्तियां पानी की चपेट में आ सकती हैं और कितनी आबादी प्रभावित होगी। इसके साथ ही संभावित बाढ़ की चपेट में आने वाले स्कूल, अस्पताल और दूसरी जरूरी सुविधाओं की भी पहचान की जा सकेगी। इससे प्रशासन राहत और बचाव की तैयारी पहले से कर सकेगा। 413 निकायों का डेटा एक सिस्टम में मध्यप्रदेश ने सभी 413 नगरीय निकायों के भौगोलिक आंकड़ों को एक ही सिस्टम में जोड़ा है। इसमें इंदौर, भोपाल समेत बड़े शहरों और छोटे कस्बों के घरों के साथ सड़क, पानी की पाइपलाइन, सीवरेज, जलाशय और जमीन के उपयोग से जुड़ी जानकारी शामिल है। इस डेटा के जरिए किसी इलाके को उसके वास्तविक स्थान और आसपास की शहरी व्यवस्थाओं के साथ देखा जा सकेगा। टैक्स और अवैध निर्माण की भी निगरानी गरुड़ का इस्तेमाल सिर्फ बाढ़ प्रबंधन के लिए नहीं होगा। इसके जरिए संपत्ति कर की वसूली, अवैध निर्माण, मास्टर प्लान के उल्लंघन, पानी और सीवरेज की पाइपलाइन की निगरानी तथा झुग्गी बस्तियों के सर्वे का काम भी किया जाएगा। सरकारी जमीनों के रखरखाव, शहर में वृक्षारोपण और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को भी इसी GIS मैप से जोड़ा गया है।    सबकुछ होगा ऑनलाइन, 24 सेवाओं में खत्म होगी झंझट मध्यप्रदेश के 413 शहरों के लोगों को बड़ी सुविधा मिल रही है। लोगों की सहूलियत के लिए यहां ई-नगर पालिका 2.0 विकसित की जा रही है। ई-नगर पालिका के अपग्रेडेशन से इन शहरों में सबकुछ ऑनलाइन हो जाएगा, नागरिकों की झंझटें खत्म होंगी, उन्हें पूरी 24 सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इन सभी शहरों को कम्प्यूटरीकृत करने के उद्देश्य से वेब आधारित ई-नगर पालिका योजना प्रारंभ की गई है। ई-नगर पालिका के माध्यम से सभी शहरों में समस्त नागरिक सेवाओं, जन शिकायत सुविधाओं से लेकर निकायों की आंतरिक कार्य प्रणाली, समस्त भुगतान और बजट प्रक्रिया को एकीकृत कर ऑनलाइन सुविधा देने का प्लान बनाया गया है। देश में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों को एक सिंगल पोर्टल पर लाया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 को डेटाबेस के साथ प्लेटफार्म पर विकसित किया गया। वर्तमान में ई-नगर पालिका के माध्यम से 22 नागरिक सेवाएं प्रदाय की जा रही हैं, इसमें 15 मॉड्यूल शामिल हैं। अब इसके द्वितीय चरण का विकास किया जा रहा है। ई-नगर पालिका को उद्योग, राजस्व, पंजीयन विभाग जैसे विभिन्न विभागों के साथ भारत सरकार के महत्वपूर्ण मोबाइल एप उमंग से भी एकीकृत किया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 पोर्टल के माध्यम से दी जा रही सभी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-नगर पालिका परियोजना के दूसरे चरण का विकास कराने का निर्णय लिया गया है। ई-नगर पालिका 2.0 के अंतर्गत 16 मॉड्यूल और 24 नागरिक सेवाएं शामिल होंगी। इसमें जीआईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा। ई-नगर पालिका 2.0 में भौतिक संरचना को क्लाउड सेवाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। ई-नगर पालिका 2.0 का कॉमन सर्विस सेंटर, एम ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर और भुगतान गेटवे के साथ एकीकरण किया जायेगा। खास बात यह है कि इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं।

सीहोर में पावर ट्रांसफॉर्मर निर्माण को मिलेगी रफ्तार, CM मोहन यादव 4 सितंबर को करेंगे पहला ट्रांसफॉर्मर रोल-आउट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर का करेंगे रोल-आउट देश की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण सुविधा में 1200 केवी तक के ट्रांसफॉर्मर बनेंगे सीहोर में 2000 से अधिक रोजगार के अवसर होंगे सृजित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी (क्रॉम्पटन एंड ग्रीव्स) पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ करेंगे। करीब 50 एकड़ में स्थापित यह इकाई एक ही स्थान पर स्थित भारत की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण सुविधा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगस्त 2025 में इस संयंत्र का भूमि-पूजन किया था और अब करीब 13 से 14 महीने में यहां उत्पादन प्रारंभ हो गया है। सीहोर में स्थापित यह आधुनिक इकाई देश में बढ़ती विद्युत जरूरतों को देखते हुए उच्च क्षमता वाले पॉवर ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां 220 केवी से लेकर 1200 केवी श्रेणी के पॉवर ट्रांसफॉर्मर बनाए जाएंगे। इकाई की उत्पादन क्षमता हर माह 35 पॉवर ट्रांसफॉर्मर तैयार करने की होगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली सुविधा एक ही स्थान पर स्थापित होने से देश में उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन उपकरणों के निर्माण को मजबूती मिलेगी। सीहोर में तैयार होने वाले उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ वैश्विक बाजारों तक भी पहुंचेंगे। इकाई में तैयार होने वाले ट्रांसफॉर्मर विद्युत क्षेत्र के साथ डेटा सेंटर, रेलवे, नवकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस तथा ट्रांसमिशन अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं में उपयोग किए जाएंगे। मध्यप्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को तेजी से धरातल पर उतारने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उद्योगों में बदलने और उनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। सीजी की इस इकाई से सीहोर में 2000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सीजी पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड विद्युत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करीब नौ दशकों से कार्य कर रही है। कंपनी ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, इंडक्शन मोटर्स, ड्राइव्स, ट्रैक्शन मोटर्स और अन्य विद्युत उपकरणों का निर्माण करती है। सीहोर की नई इकाई कंपनी की पॉवर ट्रांसफॉर्मर निर्माण क्षमता को बड़े स्तर पर विस्तार देगी। सीहोर में बनने वाले बड़े और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर से जहां देश की विद्युत जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं इनके निर्यात से सीहोर और मध्यप्रदेश की औद्योगिक पहचान को भी नई दिशा मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ इस इकाई से जुड़े अन्य कारोबारों के लिए भी अवसर बढ़ेंगे।  

मोदी कैबिनेट की ओवरहॉलिंग की तैयारी? 17 नए चेहरों की एंट्री, वैष्णव-गडकरी को लेकर भी चर्चा

 नई दिल्ली बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है. संगठन में हुए बदलावों के बाद से मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर ओवरहॉलिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं. मंत्रिमंडल से कई दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है तो युवा और नए चेहरों को एंट्री मिल सकती है. मोदी कैबिनेट बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।  मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर 'आजतक रेडियो' के कार्यक्रम 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' (Reporters On Air) में चर्चा हुई. मंत्रिमंडल विस्तार में कौन से नए चेहरे आएंगे और कौन जाएंगे के मुद्दे पर सियासी गलियारों और बीजेपी के कॉरिडोर में क्या बातें हो रही हैं, उसे लेकर सबने अपनी-अपनी बातें रखीं।  'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रमोशन मिल सकता है तो नितिन गडकरी का मंत्रालय बदला जा सकता है. यही नहीं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है तो 16 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  कैबिनेट के कई दिग्गज नेताओं की होगी छुट्टी मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर ऐश्वर्या पालीवाल ने बताया कि कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक कॉरिडोर में काफी चर्चा है. मंत्रिमंडल में किसे एंट्री मिलनी है, यह बात तब पता चलती है जब पीएम मोदी चाय पर बुलाते हैं. कुछ ऐसे मंत्रालय हैं, जिनके ऊपर मंथन चल रहा है. इस बार बीजेपी में एक बात स्पष्ट है, वो है मंत्री का परफॉर्मेंस. एक-एक मंत्री के कामकाज पर मंथन किया जा रहा है।  ऐश्वर्या पालीवाल आगे कहती हैं कि बीजेपी जानती है कि नई टीम के साथ 2027 के चुनाव में जाना है. उत्तर प्रदेश का चुनाव आसान नहीं है, पंजाब की लड़ाई भी आसान नहीं है और इससे भी बड़ा 2029 का चुनाव है, जो बीजेपी के लिए काफी अहम है. बीजेपी चुनाव जीत रही है, बहुमत से जीत रही है, लेकिन ग्राउंड पर कनेक्ट कम हो रहा है. पिछले दिनों जो कैबिनेट मीटिंग हुई थी, उसमें पीएम मोदी ने यह बात साफ तौर पर अपने सारे मंत्रियों से कही थी कि आप लोग ग्राउंड पर काम कीजिए. ऐसी ही बातें नितिन नवीन की नई टीम के संदर्भ में भी कही गई हैं।  टॉप फाइव मिनिस्ट्री के अंदर भी दिखेगा बदलाव? ऐश्वर्या पालीवाल बताती हैं कि कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कई सारे नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. वह कहती हैं कि मोदी कैबिनेट के टॉप फाइव मंत्रालयों में से किसी एक मिनिस्ट्री के अंदर भी बदलाव दिख सकता है. यह इसलिए नहीं कि काम खराब था, बल्कि किसी और को मौका देने के लिए हो सकता है. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि मोदी कैबिनेट में जो बढ़िया काम कर रहे हैं, उन्हें कोई और मिनिस्ट्री दी जा सकती है।  वह कहती हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह बहुत बड़ी मिनिस्ट्री है, तो आपको वहां पर भी बदलाव करना पड़ेगा. इसके अलावा कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास तीन-चार मंत्रालयों का जिम्मा है. इसीलिए उनसे कुछ विभाग लेकर दूसरे मंत्रियों में बांटे जाएंगे।  . कैबिनेट में 14 मंत्री ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं. 14 बहुत बड़ा नंबर होता है और प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. मोदी कैबिनेट में फिलहाल 69 मंत्री हैं. इस लिहाज से 12 मंत्री पद खाली हैं।  अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है कैबिनेट में प्रमोशन ऐश्वर्या पालीवाल को बीच में टोकते हुए राहुल गौतम कहते हैं कि राज्यसभा से आने वाले मंत्री मुझे लगता है थोड़े ज्यादा दिखेंगे. मंत्रियों के पास अधिक विभागों की जो बात हो रही है, उसमें अश्विनी वैष्णव के पास तीन मंत्रालय हैं. तीनों बड़े-बड़े मंत्रालय हैं- रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी मंत्रालय. ऐसे में उनसे कुछ मंत्रालयों का जिम्मा लिया जा सकता है. मेरे लिहाज से अश्विनी वैष्णव का काम अच्छा रहा है, जिसके चलते उनका प्रमोशन कर टॉप फाइव मंत्रियों में लाया जा सकता है।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि कई सारे ऐसे मंत्री हैं जिनके पास भारी-भरकम मंत्रालय हैं. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बना दिया गया है, यह मंत्रालय सीधे-सीधे Gen-Z से जुड़ा हुआ है. संजय शर्मा भी बीच में टोकते हुए कहते हैं कि अश्विनी वैष्णव के बारे में सुन रहे हैं कि शायद उनको प्रमोशन मिल जाए. वह मोदी सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में से एक हो सकते हैं।  नितिन गडकरी का बदला जा सकता है मंत्रालय 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में संजय शर्मा ने पूछा कि सियासी गलियारों में चर्चा नितिन गडकरी को लेकर है कि कैबिनेट से उनकी छुट्टी हो सकती है. इस पर ऐश्वर्या पालीवाल ने कहा कि मैंने उनके बयान को बहुत ध्यान से देखा है. वह बहुत सहज और अच्छे तरीके से अपनी बात रखते हैं. वह युवा पीढ़ी को आगे लाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अपना मंत्री पद छोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं।  वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा संकेत है कि कैबिनेट विस्तार होगा तो उनकी मिनिस्ट्री किसी और को दी जा सकती है. उनके पास जो मंत्रालय है, उसमें फेरबदल किया जा सकता है. आगे उनके पास इतनी हैवी मिनिस्ट्री न दिखे, जिसे लेकर चर्चा चल रही है. इसके बाद संजय शर्मा ने पीयूष मिश्रा से पूछा कि गडकरी को लेकर क्या चर्चा है।  पीयूष कहते हैं कि नीट (NEET) की बात हो या ई-20 (E-20) की, जिसे लेकर बहुत बखेड़ा हुआ है. मुझसे एक शख्स बोल रहे थे कि ई-20 तो पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, फिर नितिन गडकरी का नाम क्यों आ रहा है? उनके पास ट्रांसपोर्ट मंत्रालय है. इस पर संजय शर्मा कहते हैं कि वह खुद तमाम इंटरव्यू में ई-20 को लेकर बयान दे रहे थे, लेकिन जब मामला विवादों में आया तो सफाई दी।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय पहले … Read more

पुरुष और महिलाओं में डायबिटीज के खतरे अलग-अलग! रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें

नई दिल्ली डायबिटीज का असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ता है. इससे दिल, किडनी और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है. अब एक बड़ी स्टडी में सामने आया है कि डायबिटीज से होने वाली दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं पुरुषों और महिलाओं में एक जैसी नहीं होतीं है. इस रिसर्च को PLOS मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है।  इस रिसर्च में यूके के 28,720 ऐसे मरीजों का हेल्थ रिकॉर्ड निकाला गया, जिनमें हाल ही में टाइप-2 डायबिटीज की पहचान हुई थी. मरीजों में समय के साथ डायबिटीज के कारण होने वाली दूसरी समस्याओं का भी आकलन किया गया. इसमें देखा गया है महिलाओं में क्या समस्याएं हो रही है और इनमें ऐसी कौन सी हैं जो पुरुषों से अलग हैं।  डायबिटीज में महिलाओं को मेंटल हेल्थ की समस्याओं का ज्यादा खतरा  स्टडी के अनुसार, डायबिटीज का जैसे ही पता चलता है उसके बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होने की आशंका अधिक होती है, जबकि पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।  शोधकर्ताओं ने कहा कि महिला और पुरुष इन स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव अलग-अलग तरह से करते हैं, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लिंग और उम्र के आधार पर बीमारी के बढ़ने के तरीके के बारे में अभी तक कोई शोध नहीं किया गया है।  महिलाओं और पुरुषों पर अलग-अलग प्रभाव  बताते चलें कि ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी एवं अन्य शोधकर्ताओं के अध्ययन का निष्कर्ष प्लोस मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसने साल 2010 से 2020 के बीच टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने वाले लगभग 28,720 पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया। रोग का पता चलने के बाद के वर्षों में प्रतिभागियों में से 39 प्रतिशत ने कम से कम एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य घटना का अनुभव किया, जिसमें पाया गया कि घटना की प्रगति और समय लिंग के अनुसार अलग-अलग थी।  पुरुषों में हाई बीपी और किडनी की बीमारी का जोखिम  इसके बाद शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि बीमारी का पता चलने के बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका अधिक थी जो कि 5.3 प्रतिशत की तुलना में 8.1 प्रतिशत है और उनकी स्थिति ऐसी होती गई जिससे अंत में मौत हो गई। जबकि पुरुषों में हृदय रोग (5.3 प्रतिशत के मुकाबले 8.4 प्रतिशत), अंतिम चरण की गुर्दे की बीमारी और हाइपरटेंशन की उच्च दरें थीं।  पुरुषों में दिल और किडनी पर ज्यादा असर स्टडी के मुताबिक पुरुषों में डायबिटीज के साथ हार्ट और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा महिलाओं की तुलना में ज्यादा था, खास बात यह रही कि पुरुषों में ये समस्याएं डायबिटीज होने के बाद कम उम्र में ही होने लगीं थी. डायबिटीज लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर के कारण नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. शुगर लेवल बढ़ने से आंखों की समस्याएं भी हो सकती हैं।  महिलाओं में चिंता और डिप्रेशन का खतरा रिसर्च में पता चला कि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अधिक देखने को मिलीं. जबकि पुरुषों में ये डायबिटीज से होने के बाद कम देखी गईं.  यह भी पाया गया कि डायबिटीज के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर मौत का जोखिम बढ़ सकता है।  डॉक्टरों के लिए भी जरूरी संकेत शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों की निगरानी करते समय केवल ब्लड शुगर के आंकड़ों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा. पुरुषों में दिल और किडनी की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, जबकि महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को भी इलाज का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। 

Saudi Economy पर दबाव! मोहम्मद बिन सलमान ने मांगा ₹75,876 करोड़ का कर्ज, जानें क्यों पड़ी जरूरत

दुबई  सऊदी अरब का जिक्र होते ही रियाल, तेल, ऐश और रईसी ही सबके जेहन में आता है। गगनचुंबी इमारतें और रॉकेट की रफ्तार से चलती लग्जरी कारों के देश की पहचान धनकुबेर वाले देशों के रूप में की जाती है। दुनियाभर के कई लोगों का सपना होता है कि वे सऊदी अरब में जाकर काम करें और तगड़ा पैसा कमाकर वापस लौटें। इन सब के अलावा जब भी किसी देश को पैसे की जरूरत होती है तो ज्यादातर सऊदी अरब की तरफ रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ा उलट है। दुनिया के कई देशों को लोन की हेल्प करने वाले सऊदी को अब खुद लोन की जरूरत पड़ रही है। सऊदी को पड़ी 8 अरब डॉलर की जरूरत सऊदी अरब लंबे समय से दुनियाभर में तेल की सप्लाई करने और मध्य पूर्व का वित्तीय महाशक्ति रहा है। सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिये सऊदी अरब दुनिया भर में पैसे निवेश करता रहा है और विकासशील देशों को मदद और लोन मुहैया कराता रहा है। लेकिन शेखों के देश में एक अलग मोड आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वक्त सऊदी अरब का नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर (NDMC) लगभग 8 अरब डॉलर के नए सिंडिकेटेड लोन के लिए बैंकों से चर्चा कर रहा है। इसे भारतीय मुद्रा में बदलने पर ₹7.6 खरब होते हैं। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको भी इसी तरह के फाइनेंसिंग विकल्पों पर बातचीत कर रही है। ईरान युद्ध से टूटी सऊदी के इकॉनमी की रफ्तार अब सवाल ये है कि मिडिल ईस्ट में धाक रखने वाले सऊदी को आखिर इतने पैसों की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल ईरान में चल रहे युद्ध ने सऊदी अरब की इकोनॉमी पर तगड़ा असर डाला है। इस वॉर ने तेल के इंपोर्ट, सप्लाई के प्रमुख रास्तों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, इसकी वजह से सऊदी अरब के तेल निर्यात में कमी आई है। इसके अलावा तेहरान ने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सऊदी तेल की ब्रिकी में कमी आई है तो वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोहियों की वजह से बाब अल मंदेब भी बंद रहता है। इन हमलों की वजह से तेल सेक्टर में लगभग 25% की गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद से दूसरी तिमाही में सऊदी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। सऊदी को क्यों चाहिए इतने पैसे? सऊदी अरब का जिक्र होते ही पैसे ही पैसे नजर आते हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तस्वीर कुछ और ही बन गई है है। दरअसल सऊदी अरब को इतने मोटे पैसे की जरूरत की वजह उसका विजन 2030 है। बता दें कि साल 2016 में MBS द्वारा शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य तेल निर्भरता कम करके टूरिज्म, इंटरटेनमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर के माध्यम से अर्थव्यवस्था को कई क्षेत्रों में ले जाना है। क्राउन प्रिंस सलमान का मानना कि जब सऊदी का कच्चा तेल कम होगा या खत्म होने की कगार पर आएगा तो उसे अचानक आर्थिक समस्याओं का सामना ना करना पड़े। इसलिए अभी से ही देश की अर्थव्यवस्था को और क्षेत्रों के लिए खोलना चाहते हैं।