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शंभू रेलवे ब्लास्ट में पाकिस्तान कनेक्शन! NIA ने 6 आरोपियों को लेकर चार्जशीट में किया खुलासा

पटियाला. शंभू रेलवे ब्लास्ट केस को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इस केस में NIA ने 6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की है। NIA ने दावा किया है कि केस के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। मोहाली कोर्ट में 6 आरोपियों गुरजिंदर सिंह उर्फ बेअंत बाबा, सतनाम सिंह, प्रदीप सिंह उर्फ खालसा, कुलविंदर सिंह उर्फ बग्गा, गुरप्रीत सिंह गोपी और मंजीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई है। फाइल की गई चार्जशीट के मुताबिक, ये सभी आरोपी पंजाब की शांति भंग करने और आतंक फैलाने की बड़ी साजिश रच रहे थे। गौरतलब है कि 27 अप्रैल, 2026 को शंभू और राजपुरा के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की रेल लाइन पर एक बड़ा ब्लास्ट किया गया था। इस घटना में विस्फोटक सामान प्लांट कर रहे हसमन जगरूप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस केस की जांच NIA कर रही है। यह धमाका 27 अप्रैल 2026 को पंजाब में शंभू और राजपुरा रेलवे स्टेशनों के बीच हुआ था. घटना के दौरान रेलवे लाइन पर विस्फोटक तैयार करते समय खालिस्तानी ऑपरेटिव जग्रूप सिंह की मौत हो गई थी. इसी मामले की जांच के बाद NIA ने छह लोगों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है. छह लोगों को बनाया गया आरोपी इस मामले में गुरजिंदर सिंह उर्फ बिएंत बाबा, सतनाम सिंह, प्रदीप सिंह उर्फ खालसा, कुलविंदर सिंह उर्फ बग्गा, गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी और मनजीत सिंह को आरोपी बनाया गया है. NIA के मुताबिक, इन लोगों की भूमिका रेलवे ट्रैक पर हुए विस्फोट की साजिश में थी. एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, रेलवे एक्ट, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं. NIA ने KZF की साजिश का आरोप लगाया NIA के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर विस्फोट की साजिश प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए रची गई थी. एजेंसी का दावा है कि इस साजिश का मकसद खालिस्तानी विचारधारा को बढ़ावा देना, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और पंजाब में कानून-व्यवस्था को अस्थिर करना था. पाकिस्तान में बैठे रंजीत सिंह नीता का नाम जांच के दौरान पाकिस्तान स्थित रंजीत सिंह उर्फ नीता की भूमिका भी सामने आने की बात NIA ने कही है. वह KZF से जुड़ा है और इस साजिश का मास्टरमाइंड था. रंजीत सिंह उर्फ नीता को भारत में नामित व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया जा चुका है. इस पर NIA का कहना है कि यह साजिश पंजाब में अस्थिरता फैलाने के मकसद से रची गई थी. हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है. छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद इस मामले की जांच जारी है. अब अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी.

सीमा पार से ग्रेनेड भेजने वाले आतंकी नजीर को बड़ा झटका, NIA कोर्ट ने घोषित किया भगोड़ा

जम्मू  जम्मू की विशेष NIA अदालत ने पाकिस्तान में छिपे एक वांछित आतंकी को भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया है। कोर्ट ने यह आदेश NIA की अर्जी पर दिया है। भगोड़ा घोषित किया गया नजीर हुसैन पुंछ जिले के हरी गांव का रहने वाला है। वह अली खान, नासिर, नजीरू और शाहीन के नाम से भी जाना जाता है। NIA उसे एक आतंकी साजिश के मामले में तलाश रही है। सुरनकोट ग्रेनेड बरामदगी मामले में बड़ा खुलासा जांच के अनुसार, अक्टूबर 2024 में पुंछ के सुरनकोट इलाके में एक ओवरग्राउंड वर्कर से कई ग्रेनेड बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि ग्रेनेड की यह खेप नजीर हुसैन ने ही सीमा पार से धमाके करने की साजिश के तहत भेजी थी। विशेष न्यायाधीश (NIA) प्रेम सागर ने 1 अक्टूबर को सुनवाई के बाद उसे भगोड़ा घोषित किया। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि आरोपित के खिलाफ पहले गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वह अपने घर पर नहीं मिला। NIA के मुताबिक पाकिस्तान भागा आरोपी NIA की रिपोर्ट के अनुसार वह पाकिस्तान भाग गया है। अखबारों और सरकारी गजट में नोटिस प्रकाशन के बाद भी वह हाजिर नहीं हुआ, जिससे स्पष्ट है कि वह जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है।  

NIA का हाफिज सईद पर शिकंजा, आतंकी गतिविधियों में भूमिका सामने आने के बाद फिर जारी हुआ वारंट

नईदिल्ली  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (ANI) ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज सईद के खिलाफ एक और कामयाबी मिली है। स्पेशल कोर्ट ने हाफिज के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि भारत का सबसे वॉन्टेड आतंकी और लश्कर का संस्थापक पाकिस्तान में है। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों को हथियार, फंडिंग और निर्देश देने से जुड़े एक मामले में लश्कर चीफ के खिलाफ दो महीने में दूसरा गैर जमानती वारंट हासिल किया गया है। स्पेशल कोर्ट एनआईए की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और घोषित आतंकवादी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में पाकिस्तान के पंजाब के सरगोधा के रहने वाले हाफिज सईद को फरार आरोपी बताया गया। नकीब भट की गिरफ्तारी से हुआ था खुलासा आपको बता दें कि श्रीनगर में चेकिंग के दौरान मोहम्मद नकीब भट की गिरफ्तारी हुई थी। उसके पास से चीन में बना ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। जकूरा पुलिस स्टेशन में UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद हुई जांच में एक आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की छापेमारी में लश्कर और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े कई और आतंकवादियों और दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई। NIA ने कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई। गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी आतंकवादी उससे जुड़े पाए गए। NIA ने कोर्ट को बताया, "सईद पाकिस्तान से काम कर रहा है और कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है। जानकारी मिली है कि आतंकवादी अभी पाकिस्तान में है और कानून की पकड़ से बचने के लिए जान-बूझकर अपनी गिरफ्तारी से बच रहा है।" जज ने सुनाया फैसला एनआईए की दलील सुनने के बाद NIA एक्ट के तहत स्पेशल जज प्रेम सागर ने 8 सितंबर को कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई है और वह आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है। वह फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य तरीके से पेश करने में कामयाब नहीं हो पाई है, इसलिए हाफिज सईद के खिलाफ एक सामान्य गैर जमानती वारंट जारी किया गया।

देशविरोधी गतिविधियों की जांच में बड़ा खुलासा, भोपाल से जुड़े तार कई राज्यों तक; NIA संभाल सकती है केस

भोपाल मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा इसी वर्ष जून में दर्ज किए गए देशविरोधी गतिविधियों के आरोप के मामले जांच के लिए एनआइए अपने हाथ में ले सकती है। इनका अंतरराष्ट्रीय और कई राज्यों से जुड़ाव पाए जाने के कारण ऐसा किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने एटीएस से मामले से जुड़े दस्तावेज लिए हैं। इसके पहले पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में भी एनआईए शामिल रही। मालूम हो कि पिछले सप्ताह कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले में कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश एटीएस की प्रशंसा की थी। भोपाल से शुरू हुई गिरफ्तारी, तीन राज्यों तक पहुंची जांच एटीएस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। सबसे पहले भोपाल के काजी कैंप से फराज को पकड़ा गया। उससे पूछताछ के आधार पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। इनसे मिले साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी के रहने वाले इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क का आरोप चारों आरोपित फिलहाल जेल में हैं। आरोप है कि ये सभी एक पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर अविवाहित मुस्लिम युवकों का ब्रेन वाश कर उन्हें कट्टर बना रहे थे। एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि ये पाकिस्तानी हैंडलर से इतने प्रभावित थे कि उसके कहने पर कुछ भी कर सकते थे। इसे 'लोन वुल्फ अटैक' मॉड्यूल कहा जाता है। इसमें आरोपित किसी बड़े आतंकी संगठन के निर्देश के बिना अकेले ही योजना बनाकर घटना को अंजाम देता है। आरोपितों में प्रमुख है इजहार-उल-हक एटीएस मामले में जब्त किए गए डिजिटल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस पर काम कर रही है। इनकी फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच की जाएगी। अभी तक की पूछताछ में पता चला है कि चारों आरोपितों में प्रमुख इजहार-उल-हक है। वही तीनों को कट्टरपंथी आडियो, वीडियो और पढ़ने की सामग्री उपलब्ध कराता था। भोपाल के फराज का सबसे अधिक करीबी नईम अब्दुल्ला था। नईम भोपाल में उसके घर में आकर भी रुका था। वह फराज से लश्कर-ए-तैयबा के मारे गए आतंकवादी खालिद सैफुल्लाह की तरह बनने के लिए कहता था। बता दें सैफुल्लाह रामपुर में सीआरपीएफ कैंप, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू और नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय में हुए हमले का आरोपित भी था।

पाकिस्तान समर्थित साजिश का खुलासा, लश्कर के इशारे पर खड़ा हुआ नेटवर्क; NIA ने कसी नकेल

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में रहने वाला अंकुश कपूर पूरी तरह पाकिस्‍तान की कठपुतली बन चुका था. पाकिस्‍तान में बैठे आकाओं के इशारे पर उसने अमृतसर में नार्को-टेरर की पूरी लंका तैयार कर ली थी. उसकी इस लंका के तार सिर्फ अमृतसर या पंजाब तक सीमित नहीं थे, बल्कि उसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक फैल चुका था. अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने उसकी इस लंका के दहन की पूरी तैयारी कर ली है. इसकी सिलसिले में एनआईए ने अंकुश के अमृतसर स्थिति बंगले को जब्‍त कर लिया है।  एनआईए का दावा है कि इस बंगले को नार्को-टेरर की काली कमाई से तैयार किया गया था. जांच में सामने आया है कि आरोपी अंकुश कपूर ही लश्‍कर-ए-तैयबा के नार्को-टेरर नेटवर्क को भारत में संभाल रहा था. अंकुश कपूर के संबंध दुबई में बैठे उन लोगों से थे, जिनके तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे. एनआईए का मानना है कि यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद ड्रग्स से होने वाली कमाई को आतंकी गतिविधियों तक पहुंचाना भी था।  सूत्रों के अनुसार, पाकिस्‍तान ड्रग से होने वाली कमाई का इस्‍तेमाल आतंक की जड़ों को मजबूत करने के लिए करता आया है. आरोपी अंकुश कपूर भी इसी कड़ी का एक अहम चेहरा था. वह लश्‍कर के इशारे पर ड्रग्‍स की तस्करी के साथ स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में अहम भूमिका निभाता था. एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के तार सिर्फ भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं थे. इसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तक फैला हुआ था।  जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की कमाई को अगल अगल तरीके से विभिन्न देशों में भेजा जाता था. बाद में, इसी कमाई का इस्‍तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था. मंगलवार को जिस मकान को जब्त किया गया, उसे यूएपीए के तहत आतंक से अर्जित संपत्ति माना गया है. जांच एजेंसी के अनुसार, अंकुश कपूर को टेरर फंडिंग, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों के तहत गिरफ्तार किया गया था. उस पर एनडीपीएस एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीएस) की विभिन्न धाराओं के तहत भी मामले दर्ज हैं. इस पूरे मामले में अब तक 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। 

बंगाल में NIA का ताबड़तोड़ एक्शन, बम धमाके की जांच में 9 स्थानों पर रेड

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के भांगर में चुनावी हिंसा के दौरान हुए विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा एक्शन लिया है. NIA की टीम ने आज पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक शौकत मुल्ला (Shaukat Mollah) के आवास पर छापेमारी की है।  सूत्रों के अनुसार, विस्फोट की घटना के पीछे छिपे पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए एनआईए एक साथ 9 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. संदिग्धों के घरों और ठिकानों को खंगालकर ब्लास्ट से जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है. 19 मार्च को भांगर इलाके में हुए बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. जांच एजेंसी इस घटना को चुनावी हिंसा से जोड़कर देख रही है।  इसी क्रम में NIA ने आज शौकत मुल्ला के घर पर छापेमारी की है. इस छापेमारी के दौरान NIA की टीमें मौके से महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स और डिजिटल सबूतों को खंगालने में जुटी हुई हैं. अधिकारियों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से भांगर ब्लास्ट केस में बहुत जल्द कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।  इस बड़ी कार्रवाई के बीच शौकत मोल्लाह की पत्नी सायरा बानू मोल्लाह का भी बयान सामने आया है. उनका कहना है कि उन्हें एनआईए द्वारा बुलाया गया था, इसके अलावा उन्हें कोई और जानकारी नहीं दी गई।  दरअसल, 19 मार्च को भांगर में हुए विस्फोट की घटना चुनावी हिंसा के दौरान हुई थी. इस ब्लास्ट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल भी हुए थे. NIA ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और इसमें चुनावी हिंसा व विस्फोट के बीच संभावित कनेक्शन की गहन छानबीन कर रही है।  NIA की इस कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है. शौकत मुल्ला TMC के पूर्व विधायक हैं और भांगर इलाका लंबे वक्त से राजनीतिक हिंसा के लिए जाना जाता रहा है। 

अजमेर पर आतंकी नजर: पिछले दो दशकों की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

अजमेर  लगभग दो दशकों से आतंकी संगठनों की नजर अजमेर पर है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन आईएसआई और आईएसआईएस से जुड़े मॉड्यूल पहले भी रैकी कर चुके हैं। बीते तीन माह में दूसरी बार युवक की आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आई है। बीते मार्च में हरियाणा एटीएस ने लौंगिया मोहल्ला निवासी अली अकबर उर्फ बाबू को पकड़ा था। अब एनआइए ने परमेश मीणा को पकड़ा है। इससे खुफिया एजेंसियां और पुलिस अलर्ट मोड पर हैं। पुलिस को अली अकबर और परमेश के अलावा भी अजमेर में पाक आतंकी शहजाद भट्टी के किसी संगठन से जुड़ाव की आशंका है। एआइए ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की। इसमें परमेश के ऑनलाइन लूडो गेम खेलने की जानकारी मिली। कुछ लोगों ने रिकवरी के कामकाज की जानकारी भी दी। उसके अजमेर में कहीं कारोबार अथवा नौकरी करने की कोई सूचना नहीं मिली। बंद कमरे में पूछताछ के बाद टीम परमेश को लेकर दिल्ली रवाना हो गई। पहले पकड़ा गया था ऑटोरिक्शा चालक बीती 15 मार्च में अंबाला में हरियाणा एटीएस ने पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी से संपर्क रखने के आरोप में दो साथियों को 2 किलो आरडीएक्स सहित पकड़ा था। इनमें दरगाह लौंगिया गली नम्बर-1 निवासी ऑटो रिक्शा चालक अली अकबर उर्फ बाबू भी शामिल था। अली अकबर मूलत: अजमेर के पीसांगन थाना क्षेत्र के गोविन्दगढ़ का निवासी है। उसके पिता मोहम्मद रमजान रोडवेज से सेवानिवृत्त हैं। बड़ा भाई अली असगर गेस्ट हाउस में नौकरी करता है। आतंकी अशरफ रहा था दो साल अक्टूबर 2021 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ भी पत्नी के साथ देहली गेट क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल पर दो साल तक रहा। वह झाड़-फूंक करने की आड़ में इलाके की गतिविधियों पर नजर रखता रहा। अशरफ ने अजमेर में फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए थे। शहर में आतंकी गतिविधियों की प्रमुख घटनाएं 2003 – आतंकी डेविड कॉलमैन हेडली ने पुष्कर के यहूदी धर्मस्थल बेदखबाद की रैकी की। 2006 – गेगल थाना पुलिस ने हथियारों का जखीरा लेकर जा रहे आतंकी मोहम्मद शब्बीर को गिरफ्तार किया। 2007 – अजमेर दरगाह परिसर में बम विस्फोट हुआ, जिसमें तीन लोगों की मौत और कई घायल हुए। 2010 – कर्नाटक एटीएस ने आतंकी युसूफ उर्फ उमर को गिरफ्तार किया। उसने दरगाह और पुष्कर क्षेत्र की रैकी करना कबूला। 2016 – आईएसआईएस टेरर मॉड्यूल के सदस्य मोहम्मद इब्राहिम राजदानी और हबीब मोहम्मद इलियासी दरगाह क्षेत्र के धानमंडी इलाके में चार दिन होटल में ठहरे। बाद में वे इंदौर के रास्ते लौटते समय एनआइए के हत्थे चढ़े। 2021 – दिल्ली में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ के अजमेर में दो साल तक छिपकर रहने का खुलासा हुआ।

NIA की जांच में बड़ा खुलासा: रांची में पल रहे ISIS के संभावित सदस्य

रांची  भारत में कट्टरपंथ के जरिए आईएसआईएस आतंकी संगठन की विचाराधार फैलाने से जुड़े केस में एनआईए को महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। रांची एनआईए ने आईएसआईएस मॉडयूल से जुड़े केस की जांच में पाया है कि मध्यप्रदेश का रतलाम निवासी राहुल सेन उर्फ उमर बहादुर ने धर्म परिवर्तन के बाद सनातन समेत कई नामों से भी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाई थी। इसका एडमिन वह खुद था। इस प्रोफाइल्स पर आईएसआईएस का प्रोपगेंडा वीडियो डालकर भ्रम फैलाता था। ISIS के वीडियो से युवाओं को बनाना था कट्टरपंथी एनआईए को मिले तथ्यों के अनुसार, राहुल उर्फ उमर आईएसआईएस के वीडियो को एडिट कर अपलोड करता था। उसका उद्देश्य इन वीडियो के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था। एनआईए को राहुल के मोबाइल फोन से कई चैट मिले हैं। जिसमें वह युवाओं को आईएसआईएस से जुड़ने की सलाह दे रहा है। एनआईए ने पाया है कि राहुल ने महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, यूपी, पंजाब और बिहार में नेटवर्क बनाए थे। 14 सितंबर 2023 से उमर राहुल उर्फ उमर जेल में है। सिरिया के अबू उमर से जुड़ा था उमर उर्फ राहुल एनआईए ने जांच में पाया है कि राहुल सेन उर्फ उमर सिरिया के आईएस आतंकी अबू उमर से जुड़ा हुआ था। दोनों इंस्टाग्राम में एक-दूसरे से मुसाफिर नाम की आईडी से जुड़े थे। पूछताछ में उमर ने खुलासा किया है कि उसकी इच्छा सिरिया जाकर आईएस से जुड़ने की थी। इससे पूर्व राहुल सेन के सहयोगी फैजान अंसारी के पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में होने की पुष्टि एनआईए की जांच में हुई थी। राहुल ने सनातनी, मुसाफिर, राहुल ओ, राहुल सेन नाम से इंस्टाग्राम, जबकि उमर बहादुर, खालिद, दाईसी, ओसाम बिन लादेन, बकिया, दवाला जैसे नामों से टेलीग्राम चैनल बनाए थे। सनातनी आरएस नाम के एक चैनल पर उसने हथियार व मैगजीन बेल्ट के साथ तस्वीर भी लगाई थी। जन्नत, जिहाद और पैसा- कट्टरपंथियों की कहानी राहुल सेन उर्फ उमर लोहरदगा निवासी फैजान अंसारी से जुड़े नेटवर्क में अहम कड़ी था। जिन युवाओं को कट्टरपंथी संगठन से जोड़ने की कोशिश हुई थी, उसमें से 38 की गवाही एनआईए ने ली है। एनआईए ने जांच में पाया है कि आईएसआईएस संगठन सीधी लड़ाई के बजाय प्रोपगेंडा के प्रसार में जुटा है। इसके लिए ऑडियो, वीडियो, पीडीएफ माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तल्हा जरनैल नाम के डिजिटल मार्केटिंग कर्मी ने एनआईए को बताया है कि फैजान अंसारी ने उसे आईआईएस से जुड़ने को कहा था, इसके लिए उसे जन्नत मिलने की बात कही थी। फैजान ने तल्हा को राहुल सेन के द्वारा धर्मांतरण करने और जेहाद में शामिल होने का उदाहरण भी दिया था। बम बनाकर पैसे कमाने की बात भी फैजान ने कही थी।

NIA ने दायर किया आरोपपत्र, पहलगाम आतंकी हमले की परत-दर-परत कहानी आई सामने

जम्मू-कश्मीर  पहलगाम हमले के लगभग 8 महीने बाद जम्मू की विशेष अदालत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। एनआईए की जांच में पाया गया कि इस हमले में सीधे तौर पर शामिल तीन आतंकवादी सेना के ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे। इन आतंकवादियों के नाम सुलेमान शाह (उर्फ फैजल जट्ट या हाशिम मूसा), हमजा (उर्फ हमजा अफगानी) और जिब्रान (उर्फ जिब्रान भाई) थे। इसके अलावा, हमले से एक दिन पहले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, पनाह और भोजन उपलब्ध कराने वाले बशीर अहमद जोठर, परवेज अहमद जोठर और मोहम्मद यूसुफ कटारी के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। चार्जशीट में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) का भी नाम लिया गया है। एनआईए की जांच में पता चला कि बशीर और परवेज स्थानीय निवासी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों ने आतंकियों को 21 अप्रैल की रात हिल पार्क इलाके के एक ढोक (झोपड़ी) में ठहराया था। इन दोनों भाइयों को हमले के लगभग दो महीने बाद 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, जोठर भाइयों के फोन से कुछ पाकिस्तानी नंबर मिले थे। एनआईए के अनुसार, इन व्यक्तियों पर उन तीन आतंकवादियों को शरण देने का आरोप है जिन्हें जुलाई में भारतीय सेना ने मार गिराया था। गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों (परवेज अहमद जोठर और बशीर अहमद जोठर) ने इन तीन हमलावरों की पहचान पाकिस्तान के नागरिकों के रूप में की थी जो प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। गौरतलब है कि पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालयों तथा प्रशिक्षण केंद्रों सहित नौ स्थानों को निशाना बनाया गया था, जहां से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई जाती थी।

NIA की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली ब्लास्ट के चार आरोपी कोर्ट में पेश, 12 दिन की जेल हिरासत

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में हुए ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को चार आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। आरोपियों में डॉक्टर मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद शामिल हैं। इन सभी चारों आरोपियों को पिछली कस्टडी पूरी होने के बाद अदालत में पेश किया गया। अदालत ने इन सभी चार आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। एनआईए ने कोर्ट को बताया कि आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी, आदिल अहमद, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान और इरफान अहमद मिलकर एक बड़ी साजिश रच रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य राजधानी में बड़े स्तर पर अशांति फैलाना और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाना था। जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर नबी ने ही कार में विस्फोट किया था। चारों मुख्य आरोपियों को एनआईए की हिरासत समाप्त होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनके खिलाफ जुटाए गए प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की गई। अदालत ने गंभीरता को देखते हुए सभी को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस मामले के पांचवें आरोपी बिलाल नासिर को भी अदालत लाया गया, लेकिन उसे पेश करने का उद्देश्य अलग था। एनआईए ने उससे वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी है, ताकि कथित साजिश से जुड़े इंटरसेप्टेड कॉल्स और डिजिटल सबूतों का मिलान किया जा सके। जांच एजेंसी की मानें तो यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इससे जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। बता दें कि दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए आतंकी विस्फोट से पूरा देश सहम गया था। शाम करीब 6:52 बजे हाई ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी सफेद हुंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना भयानक था कि कई गाड़ियां जलकर राख हो गईं, पास की दुकानों के शीशे बिखर गए। इस विस्फोट में 11 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। इस पूरे मामले की जांच एनआईए कर रही है, जिसमें सुसाइड बॉम्बिंग का भी खुलासा हुआ। मुख्य आरोपी डॉ. उमर (अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा), पुलवामा का रहने वाला था, जो आईएसआईएस से प्रेरित बताया जा रहा है।