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बाढ़ से कितने घर डूबेंगे, अब पहले बताएगा ‘गरुड़’, 413 निकायों का GIS डेटा तैयार करने वाला MP पहला राज्य

भोपाल  मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी 413 नगरीय निकायों के हर घर और शहरी व्यवस्थाओं का GIS डेटा तैयार किया गया है। ‘गरुड़ MP’ (GARUD MP) सिस्टम के जरिए अब बाढ़ आने से पहले ही संभावित खतरे का पता लगाया जा सकेगा। इंदौर, भोपाल समेत सभी छोटे-बड़े शहरों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने पर प्रभावित होने वाले इलाकों, घरों और आबादी का पहले ही नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे राहत और बचाव की तैयारी समय रहते की जा सकेगी। जलस्तर बढ़ते ही दिखेगा असर गरुड़ ऐप में अलग-अलग जलस्तर के आधार पर सिमुलेशन की सुविधा विकसित की गई है। पानी तय स्तर से ऊपर बढ़ने पर सिस्टम नक्शे पर बता सकेगा कि कौन सा वार्ड प्रभावित होगा, कितने घर और संपत्तियां पानी की चपेट में आ सकती हैं और कितनी आबादी प्रभावित होगी। इसके साथ ही संभावित बाढ़ की चपेट में आने वाले स्कूल, अस्पताल और दूसरी जरूरी सुविधाओं की भी पहचान की जा सकेगी। इससे प्रशासन राहत और बचाव की तैयारी पहले से कर सकेगा। 413 निकायों का डेटा एक सिस्टम में मध्यप्रदेश ने सभी 413 नगरीय निकायों के भौगोलिक आंकड़ों को एक ही सिस्टम में जोड़ा है। इसमें इंदौर, भोपाल समेत बड़े शहरों और छोटे कस्बों के घरों के साथ सड़क, पानी की पाइपलाइन, सीवरेज, जलाशय और जमीन के उपयोग से जुड़ी जानकारी शामिल है। इस डेटा के जरिए किसी इलाके को उसके वास्तविक स्थान और आसपास की शहरी व्यवस्थाओं के साथ देखा जा सकेगा। टैक्स और अवैध निर्माण की भी निगरानी गरुड़ का इस्तेमाल सिर्फ बाढ़ प्रबंधन के लिए नहीं होगा। इसके जरिए संपत्ति कर की वसूली, अवैध निर्माण, मास्टर प्लान के उल्लंघन, पानी और सीवरेज की पाइपलाइन की निगरानी तथा झुग्गी बस्तियों के सर्वे का काम भी किया जाएगा। सरकारी जमीनों के रखरखाव, शहर में वृक्षारोपण और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को भी इसी GIS मैप से जोड़ा गया है।    सबकुछ होगा ऑनलाइन, 24 सेवाओं में खत्म होगी झंझट मध्यप्रदेश के 413 शहरों के लोगों को बड़ी सुविधा मिल रही है। लोगों की सहूलियत के लिए यहां ई-नगर पालिका 2.0 विकसित की जा रही है। ई-नगर पालिका के अपग्रेडेशन से इन शहरों में सबकुछ ऑनलाइन हो जाएगा, नागरिकों की झंझटें खत्म होंगी, उन्हें पूरी 24 सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इन सभी शहरों को कम्प्यूटरीकृत करने के उद्देश्य से वेब आधारित ई-नगर पालिका योजना प्रारंभ की गई है। ई-नगर पालिका के माध्यम से सभी शहरों में समस्त नागरिक सेवाओं, जन शिकायत सुविधाओं से लेकर निकायों की आंतरिक कार्य प्रणाली, समस्त भुगतान और बजट प्रक्रिया को एकीकृत कर ऑनलाइन सुविधा देने का प्लान बनाया गया है। देश में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों को एक सिंगल पोर्टल पर लाया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 को डेटाबेस के साथ प्लेटफार्म पर विकसित किया गया। वर्तमान में ई-नगर पालिका के माध्यम से 22 नागरिक सेवाएं प्रदाय की जा रही हैं, इसमें 15 मॉड्यूल शामिल हैं। अब इसके द्वितीय चरण का विकास किया जा रहा है। ई-नगर पालिका को उद्योग, राजस्व, पंजीयन विभाग जैसे विभिन्न विभागों के साथ भारत सरकार के महत्वपूर्ण मोबाइल एप उमंग से भी एकीकृत किया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 पोर्टल के माध्यम से दी जा रही सभी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-नगर पालिका परियोजना के दूसरे चरण का विकास कराने का निर्णय लिया गया है। ई-नगर पालिका 2.0 के अंतर्गत 16 मॉड्यूल और 24 नागरिक सेवाएं शामिल होंगी। इसमें जीआईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा। ई-नगर पालिका 2.0 में भौतिक संरचना को क्लाउड सेवाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। ई-नगर पालिका 2.0 का कॉमन सर्विस सेंटर, एम ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर और भुगतान गेटवे के साथ एकीकरण किया जायेगा। खास बात यह है कि इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं।

सीहोर में पावर ट्रांसफॉर्मर निर्माण को मिलेगी रफ्तार, CM मोहन यादव 4 सितंबर को करेंगे पहला ट्रांसफॉर्मर रोल-आउट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर का करेंगे रोल-आउट देश की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण सुविधा में 1200 केवी तक के ट्रांसफॉर्मर बनेंगे सीहोर में 2000 से अधिक रोजगार के अवसर होंगे सृजित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी (क्रॉम्पटन एंड ग्रीव्स) पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ करेंगे। करीब 50 एकड़ में स्थापित यह इकाई एक ही स्थान पर स्थित भारत की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण सुविधा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगस्त 2025 में इस संयंत्र का भूमि-पूजन किया था और अब करीब 13 से 14 महीने में यहां उत्पादन प्रारंभ हो गया है। सीहोर में स्थापित यह आधुनिक इकाई देश में बढ़ती विद्युत जरूरतों को देखते हुए उच्च क्षमता वाले पॉवर ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां 220 केवी से लेकर 1200 केवी श्रेणी के पॉवर ट्रांसफॉर्मर बनाए जाएंगे। इकाई की उत्पादन क्षमता हर माह 35 पॉवर ट्रांसफॉर्मर तैयार करने की होगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली सुविधा एक ही स्थान पर स्थापित होने से देश में उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन उपकरणों के निर्माण को मजबूती मिलेगी। सीहोर में तैयार होने वाले उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ वैश्विक बाजारों तक भी पहुंचेंगे। इकाई में तैयार होने वाले ट्रांसफॉर्मर विद्युत क्षेत्र के साथ डेटा सेंटर, रेलवे, नवकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस तथा ट्रांसमिशन अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं में उपयोग किए जाएंगे। मध्यप्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को तेजी से धरातल पर उतारने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उद्योगों में बदलने और उनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। सीजी की इस इकाई से सीहोर में 2000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सीजी पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड विद्युत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करीब नौ दशकों से कार्य कर रही है। कंपनी ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, इंडक्शन मोटर्स, ड्राइव्स, ट्रैक्शन मोटर्स और अन्य विद्युत उपकरणों का निर्माण करती है। सीहोर की नई इकाई कंपनी की पॉवर ट्रांसफॉर्मर निर्माण क्षमता को बड़े स्तर पर विस्तार देगी। सीहोर में बनने वाले बड़े और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर से जहां देश की विद्युत जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं इनके निर्यात से सीहोर और मध्यप्रदेश की औद्योगिक पहचान को भी नई दिशा मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ इस इकाई से जुड़े अन्य कारोबारों के लिए भी अवसर बढ़ेंगे।  

मोदी कैबिनेट की ओवरहॉलिंग की तैयारी? 17 नए चेहरों की एंट्री, वैष्णव-गडकरी को लेकर भी चर्चा

 नई दिल्ली बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है. संगठन में हुए बदलावों के बाद से मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर ओवरहॉलिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं. मंत्रिमंडल से कई दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है तो युवा और नए चेहरों को एंट्री मिल सकती है. मोदी कैबिनेट बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।  मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर 'आजतक रेडियो' के कार्यक्रम 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' (Reporters On Air) में चर्चा हुई. मंत्रिमंडल विस्तार में कौन से नए चेहरे आएंगे और कौन जाएंगे के मुद्दे पर सियासी गलियारों और बीजेपी के कॉरिडोर में क्या बातें हो रही हैं, उसे लेकर सबने अपनी-अपनी बातें रखीं।  'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रमोशन मिल सकता है तो नितिन गडकरी का मंत्रालय बदला जा सकता है. यही नहीं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है तो 16 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  कैबिनेट के कई दिग्गज नेताओं की होगी छुट्टी मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर ऐश्वर्या पालीवाल ने बताया कि कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक कॉरिडोर में काफी चर्चा है. मंत्रिमंडल में किसे एंट्री मिलनी है, यह बात तब पता चलती है जब पीएम मोदी चाय पर बुलाते हैं. कुछ ऐसे मंत्रालय हैं, जिनके ऊपर मंथन चल रहा है. इस बार बीजेपी में एक बात स्पष्ट है, वो है मंत्री का परफॉर्मेंस. एक-एक मंत्री के कामकाज पर मंथन किया जा रहा है।  ऐश्वर्या पालीवाल आगे कहती हैं कि बीजेपी जानती है कि नई टीम के साथ 2027 के चुनाव में जाना है. उत्तर प्रदेश का चुनाव आसान नहीं है, पंजाब की लड़ाई भी आसान नहीं है और इससे भी बड़ा 2029 का चुनाव है, जो बीजेपी के लिए काफी अहम है. बीजेपी चुनाव जीत रही है, बहुमत से जीत रही है, लेकिन ग्राउंड पर कनेक्ट कम हो रहा है. पिछले दिनों जो कैबिनेट मीटिंग हुई थी, उसमें पीएम मोदी ने यह बात साफ तौर पर अपने सारे मंत्रियों से कही थी कि आप लोग ग्राउंड पर काम कीजिए. ऐसी ही बातें नितिन नवीन की नई टीम के संदर्भ में भी कही गई हैं।  टॉप फाइव मिनिस्ट्री के अंदर भी दिखेगा बदलाव? ऐश्वर्या पालीवाल बताती हैं कि कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कई सारे नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. वह कहती हैं कि मोदी कैबिनेट के टॉप फाइव मंत्रालयों में से किसी एक मिनिस्ट्री के अंदर भी बदलाव दिख सकता है. यह इसलिए नहीं कि काम खराब था, बल्कि किसी और को मौका देने के लिए हो सकता है. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि मोदी कैबिनेट में जो बढ़िया काम कर रहे हैं, उन्हें कोई और मिनिस्ट्री दी जा सकती है।  वह कहती हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह बहुत बड़ी मिनिस्ट्री है, तो आपको वहां पर भी बदलाव करना पड़ेगा. इसके अलावा कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास तीन-चार मंत्रालयों का जिम्मा है. इसीलिए उनसे कुछ विभाग लेकर दूसरे मंत्रियों में बांटे जाएंगे।  . कैबिनेट में 14 मंत्री ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं. 14 बहुत बड़ा नंबर होता है और प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. मोदी कैबिनेट में फिलहाल 69 मंत्री हैं. इस लिहाज से 12 मंत्री पद खाली हैं।  अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है कैबिनेट में प्रमोशन ऐश्वर्या पालीवाल को बीच में टोकते हुए राहुल गौतम कहते हैं कि राज्यसभा से आने वाले मंत्री मुझे लगता है थोड़े ज्यादा दिखेंगे. मंत्रियों के पास अधिक विभागों की जो बात हो रही है, उसमें अश्विनी वैष्णव के पास तीन मंत्रालय हैं. तीनों बड़े-बड़े मंत्रालय हैं- रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी मंत्रालय. ऐसे में उनसे कुछ मंत्रालयों का जिम्मा लिया जा सकता है. मेरे लिहाज से अश्विनी वैष्णव का काम अच्छा रहा है, जिसके चलते उनका प्रमोशन कर टॉप फाइव मंत्रियों में लाया जा सकता है।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि कई सारे ऐसे मंत्री हैं जिनके पास भारी-भरकम मंत्रालय हैं. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बना दिया गया है, यह मंत्रालय सीधे-सीधे Gen-Z से जुड़ा हुआ है. संजय शर्मा भी बीच में टोकते हुए कहते हैं कि अश्विनी वैष्णव के बारे में सुन रहे हैं कि शायद उनको प्रमोशन मिल जाए. वह मोदी सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में से एक हो सकते हैं।  नितिन गडकरी का बदला जा सकता है मंत्रालय 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में संजय शर्मा ने पूछा कि सियासी गलियारों में चर्चा नितिन गडकरी को लेकर है कि कैबिनेट से उनकी छुट्टी हो सकती है. इस पर ऐश्वर्या पालीवाल ने कहा कि मैंने उनके बयान को बहुत ध्यान से देखा है. वह बहुत सहज और अच्छे तरीके से अपनी बात रखते हैं. वह युवा पीढ़ी को आगे लाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अपना मंत्री पद छोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं।  वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा संकेत है कि कैबिनेट विस्तार होगा तो उनकी मिनिस्ट्री किसी और को दी जा सकती है. उनके पास जो मंत्रालय है, उसमें फेरबदल किया जा सकता है. आगे उनके पास इतनी हैवी मिनिस्ट्री न दिखे, जिसे लेकर चर्चा चल रही है. इसके बाद संजय शर्मा ने पीयूष मिश्रा से पूछा कि गडकरी को लेकर क्या चर्चा है।  पीयूष कहते हैं कि नीट (NEET) की बात हो या ई-20 (E-20) की, जिसे लेकर बहुत बखेड़ा हुआ है. मुझसे एक शख्स बोल रहे थे कि ई-20 तो पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, फिर नितिन गडकरी का नाम क्यों आ रहा है? उनके पास ट्रांसपोर्ट मंत्रालय है. इस पर संजय शर्मा कहते हैं कि वह खुद तमाम इंटरव्यू में ई-20 को लेकर बयान दे रहे थे, लेकिन जब मामला विवादों में आया तो सफाई दी।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय पहले … Read more

पुरुष और महिलाओं में डायबिटीज के खतरे अलग-अलग! रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें

नई दिल्ली डायबिटीज का असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ता है. इससे दिल, किडनी और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है. अब एक बड़ी स्टडी में सामने आया है कि डायबिटीज से होने वाली दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं पुरुषों और महिलाओं में एक जैसी नहीं होतीं है. इस रिसर्च को PLOS मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है।  इस रिसर्च में यूके के 28,720 ऐसे मरीजों का हेल्थ रिकॉर्ड निकाला गया, जिनमें हाल ही में टाइप-2 डायबिटीज की पहचान हुई थी. मरीजों में समय के साथ डायबिटीज के कारण होने वाली दूसरी समस्याओं का भी आकलन किया गया. इसमें देखा गया है महिलाओं में क्या समस्याएं हो रही है और इनमें ऐसी कौन सी हैं जो पुरुषों से अलग हैं।  डायबिटीज में महिलाओं को मेंटल हेल्थ की समस्याओं का ज्यादा खतरा  स्टडी के अनुसार, डायबिटीज का जैसे ही पता चलता है उसके बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होने की आशंका अधिक होती है, जबकि पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।  शोधकर्ताओं ने कहा कि महिला और पुरुष इन स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव अलग-अलग तरह से करते हैं, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लिंग और उम्र के आधार पर बीमारी के बढ़ने के तरीके के बारे में अभी तक कोई शोध नहीं किया गया है।  महिलाओं और पुरुषों पर अलग-अलग प्रभाव  बताते चलें कि ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी एवं अन्य शोधकर्ताओं के अध्ययन का निष्कर्ष प्लोस मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसने साल 2010 से 2020 के बीच टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने वाले लगभग 28,720 पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया। रोग का पता चलने के बाद के वर्षों में प्रतिभागियों में से 39 प्रतिशत ने कम से कम एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य घटना का अनुभव किया, जिसमें पाया गया कि घटना की प्रगति और समय लिंग के अनुसार अलग-अलग थी।  पुरुषों में हाई बीपी और किडनी की बीमारी का जोखिम  इसके बाद शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि बीमारी का पता चलने के बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका अधिक थी जो कि 5.3 प्रतिशत की तुलना में 8.1 प्रतिशत है और उनकी स्थिति ऐसी होती गई जिससे अंत में मौत हो गई। जबकि पुरुषों में हृदय रोग (5.3 प्रतिशत के मुकाबले 8.4 प्रतिशत), अंतिम चरण की गुर्दे की बीमारी और हाइपरटेंशन की उच्च दरें थीं।  पुरुषों में दिल और किडनी पर ज्यादा असर स्टडी के मुताबिक पुरुषों में डायबिटीज के साथ हार्ट और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा महिलाओं की तुलना में ज्यादा था, खास बात यह रही कि पुरुषों में ये समस्याएं डायबिटीज होने के बाद कम उम्र में ही होने लगीं थी. डायबिटीज लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर के कारण नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. शुगर लेवल बढ़ने से आंखों की समस्याएं भी हो सकती हैं।  महिलाओं में चिंता और डिप्रेशन का खतरा रिसर्च में पता चला कि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अधिक देखने को मिलीं. जबकि पुरुषों में ये डायबिटीज से होने के बाद कम देखी गईं.  यह भी पाया गया कि डायबिटीज के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर मौत का जोखिम बढ़ सकता है।  डॉक्टरों के लिए भी जरूरी संकेत शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों की निगरानी करते समय केवल ब्लड शुगर के आंकड़ों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा. पुरुषों में दिल और किडनी की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, जबकि महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को भी इलाज का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। 

Saudi Economy पर दबाव! मोहम्मद बिन सलमान ने मांगा ₹75,876 करोड़ का कर्ज, जानें क्यों पड़ी जरूरत

दुबई  सऊदी अरब का जिक्र होते ही रियाल, तेल, ऐश और रईसी ही सबके जेहन में आता है। गगनचुंबी इमारतें और रॉकेट की रफ्तार से चलती लग्जरी कारों के देश की पहचान धनकुबेर वाले देशों के रूप में की जाती है। दुनियाभर के कई लोगों का सपना होता है कि वे सऊदी अरब में जाकर काम करें और तगड़ा पैसा कमाकर वापस लौटें। इन सब के अलावा जब भी किसी देश को पैसे की जरूरत होती है तो ज्यादातर सऊदी अरब की तरफ रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ा उलट है। दुनिया के कई देशों को लोन की हेल्प करने वाले सऊदी को अब खुद लोन की जरूरत पड़ रही है। सऊदी को पड़ी 8 अरब डॉलर की जरूरत सऊदी अरब लंबे समय से दुनियाभर में तेल की सप्लाई करने और मध्य पूर्व का वित्तीय महाशक्ति रहा है। सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिये सऊदी अरब दुनिया भर में पैसे निवेश करता रहा है और विकासशील देशों को मदद और लोन मुहैया कराता रहा है। लेकिन शेखों के देश में एक अलग मोड आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वक्त सऊदी अरब का नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर (NDMC) लगभग 8 अरब डॉलर के नए सिंडिकेटेड लोन के लिए बैंकों से चर्चा कर रहा है। इसे भारतीय मुद्रा में बदलने पर ₹7.6 खरब होते हैं। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको भी इसी तरह के फाइनेंसिंग विकल्पों पर बातचीत कर रही है। ईरान युद्ध से टूटी सऊदी के इकॉनमी की रफ्तार अब सवाल ये है कि मिडिल ईस्ट में धाक रखने वाले सऊदी को आखिर इतने पैसों की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल ईरान में चल रहे युद्ध ने सऊदी अरब की इकोनॉमी पर तगड़ा असर डाला है। इस वॉर ने तेल के इंपोर्ट, सप्लाई के प्रमुख रास्तों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, इसकी वजह से सऊदी अरब के तेल निर्यात में कमी आई है। इसके अलावा तेहरान ने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सऊदी तेल की ब्रिकी में कमी आई है तो वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोहियों की वजह से बाब अल मंदेब भी बंद रहता है। इन हमलों की वजह से तेल सेक्टर में लगभग 25% की गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद से दूसरी तिमाही में सऊदी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। सऊदी को क्यों चाहिए इतने पैसे? सऊदी अरब का जिक्र होते ही पैसे ही पैसे नजर आते हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तस्वीर कुछ और ही बन गई है है। दरअसल सऊदी अरब को इतने मोटे पैसे की जरूरत की वजह उसका विजन 2030 है। बता दें कि साल 2016 में MBS द्वारा शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य तेल निर्भरता कम करके टूरिज्म, इंटरटेनमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर के माध्यम से अर्थव्यवस्था को कई क्षेत्रों में ले जाना है। क्राउन प्रिंस सलमान का मानना कि जब सऊदी का कच्चा तेल कम होगा या खत्म होने की कगार पर आएगा तो उसे अचानक आर्थिक समस्याओं का सामना ना करना पड़े। इसलिए अभी से ही देश की अर्थव्यवस्था को और क्षेत्रों के लिए खोलना चाहते हैं।