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Thailand के Pattaya पहुंचे 5000 अमेरिकी सैनिक, मौज-मस्ती की पूरी छूट नहीं; इन गतिविधियों पर बैन

पटाया  मिडिल ईस्ट में लंबे और मुश्किल मिशन के बाद USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर बुधवार सुबह आखिरकार थाईलैंड पहुंच गया. पश्चिम एशिया के समंदर में 200 दिन गुजारने के बाद ये अमेरिकी सैनिकों के लिए राहत और रिलैक्स होने की बात है. इस जहाज से लगभग 5000 अमेरिकी सैनिक थाइलैंड पहुंचे हैं. इन सैनिकों का ठिकाना थाईलैंड का पटाया शहर है. ये सैनिक यहां रिलैक्स और रिफ्रेश तो हो सकते हैं, लेकिन यहां इन पर कई तरह की रोक रहेगी। थाइलैंड के अखबार बंकॉक पोस्ट के अनुसार हजारों सैनिकों के आने से पास के रिज़ॉर्ट शहर पटाया में आर्थिक तेज़ी की उम्मीदें जगी हैं. यह शहर लंबे समय से सेक्स टूरिज़्म डेस्टिनेशन के तौर पर भी जाना जाता है।  पटाया के मेयर पोरामासे न्गाम्पिचेस ने बताया कि लगभग 40 बसों का एक बेड़ा सैनिकों को पटाया और लैम चाबांग बंदरगाह के बीच ले जाएगा, जहां जहाज रुकेंगे।  द नेशन ने थाई अधिकारियों के अनुसार बताया है कि समुद्र में 200 से ज़्यादा दिन बिताने के बाद लगभग 5,000 नाविकों और मरीन को आराम करने और तरोताज़ा होने के लिए किनारे पर आने की छुट्टी (शोर लीव) दी जाएगी।  पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस का अनुमान है कि थाईलैंड में अमेरिकी सैनिकों की इस भीड़ से होटलों, रेस्तरां, बार, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, खुदरा विक्रेताओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को फ़ायदा होने की उम्मीद है।  टूरिज्म एसोसिएशन के अनुसार पटाया में रहने की जगह के बाज़ार में 3,00,000 से ज़्यादा कमरे उपलब्ध हैं।  पटाया में ये काम नहीं कर पाएंगे अमेरिकी सैनिक पटाया में ये सैनिक आराम और रिफ्रेश तो कर पाएंगे, लेकिन इन पर कुछ प्रतिबंध भी होंगे।  अमेरिकी सैनिकों को होटलों में रात बिताने या अपने जहाज़ों पर लौटने की इजाज़त होगी. लेकिन उन्हें कुछ टूरिस्ट गतिविधियों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं होगी. जैसे ये सैनिक जेट स्की राइडिंग और पैरासेलिंग जैसे वॉटरस्पोर्ट्स में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा ये सैनिक पटाया में गांजे का भी सेवन नहीं कर पाएंगे।  थाईलैंड में हाल की घटनाओं के बाद गांजे से जुड़ी नीति में बदलाव दिख रहा है. वहां का जन स्वास्थ्य मंत्रालय भांग के इस्तेमाल को सिर्फ़ मेडिकल मक़सद तक सीमित करने की दिशा में कदम उठा रहा है।  इधर अमेरिकी सैनिकों की आमद के बाद पटाया में टूरिस्ट पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है. सर्विलांस कैमरों की जांच की जा रही है और हॉटलाइन 1155 मदद के लिए तैयार है. मेयर ने कहा कि स्थानीय कारोबारियों को पर्यटकों से ज़्यादा पैसे न लेने के लिए कहा गया  है।  सोमवार को पटाया के मेयर के सेक्रेटरी बांचा कुल्लावानिच और असिस्टेंट मेयर कियातिसाक श्रीवोंगचाई ने अमेरिकी नौसेना के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा उपायों पर चर्चा की।  बैठक में यह तय हुआ कि नाविक पटाया वॉकिंग स्ट्रीट जा सकते हैं, लेकिन उन्हें रात 2 बजे तक वह इलाका छोड़ना होगा।  अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि पटाया में वेश्यावृत्ति गैर-कानूनी है।  बता दें कि आमतौर पर अमेरिकी नौसैनिक तैनाती छह से नौ महीने के लिए होती है, लेकिन संघर्ष के समय इसे बढ़ाया जा सकता है. ईरान वॉर के समय ये सैनिक 200 दिनों से पश्चिम एशिया के समंदर में तैनात थे। 

राजस्थान निकाय चुनाव में बगावत का सैलाब, BJP को 9 हजार तो कांग्रेस को 8 हजार बागियों से चुनौती

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के सामने मुकाबला सिर्फ एक-दूशरे से नहीं है. दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने खुद के ही लोग बन गए हैं. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बड़ी संख्या में निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों पार्टियों के बीच ऐसे लोग हैं जो ये समझने में मुश्किल हालात बना रहे कि कौन जीत दर्ज कर सकता है. आंकड़ों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में मोटे तौर पर बीजेपी के करीब 9 हजार और कांग्रेस के 8 हजार से ज्यादा बागी चुनाव मैदान में हैं. दोनों पार्टियों के पास अभी सभी निकायों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आंकड़ों को मोटा अनुमान माना जा रहा है. लेकिन संख्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि इन बागियों में केवल सामान्य दावेदार ही नहीं हैं. कई पुराने पार्टी पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले नेता भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद अब दोनों दलों की पूरी रणनीति बदलती दिखाई दे रही है. पहले टिकट देने की लड़ाई थी, अब टिकट बचाने के बाद वोट बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है किन इलाकों में सबसे ज्यादा बागी पार्टी    बागियों की अनुमानित संख्या    सबसे ज्यादा चर्चा वाले इलाके बीजेपी    करीब 9 हजार    श्रीगंगानगर, बालोतरा, निम्बाहेड़ा, कोटपूतली, जैसलमेर कांग्रेस    8 हजार से ज्यादा    बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर, टपूतली, सीसवाली, कुचेरा, झालरापाटन यहां सबसे अहम बात यह है कि यह पूरे प्रदेश का मोटा अनुमान है. दोनों पार्टियों के पास अभी हर निकाय का पूरा आंकड़ा नहीं है. इसलिए इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द श्रीगंगानगर बीजेपी की बगावत में श्रीगंगानगर सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है. यहां नगर परिषद में 70 बागी मैदान में हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष किस स्तर तक पहुंचा है. इसके बाद बालोतरा में 57, निम्बाहेड़ा में 37, कोटपूतली में 35, जैसलमेर में 30 और पदमपुर में 25 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बाड़मेर में 23, बारां में 22, सीसवाली में 24 और भीलवाड़ा में 21 बागियों ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. बीकानेर नगर निगम में 15, सादुलशहर में 17 और श्रीविजयनगर में 12 बागी मैदान में हैं. बीजेपी के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    बीजेपी के बागी श्रीगंगानगर    70 बालोतरा    57 निम्बाहेड़ा    37 कोटपूतली    35 जैसलमेर    30 पदमपुर    25 सीसवाली    24 बाड़मेर    23 बारां    22 भीलवाड़ा    21 सादुलशहर    17 बीकानेर    15 श्रीविजयनगर    12 बीजेपी में सिर्फ दावेदार नहीं, बड़े नाम भी मैदान में बीजेपी की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई जगह बगावत करने वालों की स्थानीय पहचान मजबूत है. डीग में बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश कौशिक निर्दलीय मैदान में हैं. बूंदी में नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी ने भी मोर्चा खोल दिया है. सादड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घीसाराम जाट और बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष नारायण राइका निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. राजसमंद में पूर्व पार्षद गोवर्धन लड्ढा, सुरेश माली और हिम्मत मेहता भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं. यह सामान्य टिकट नाराजगी से थोड़ा अलग मामला है. ऐसे नेताओं के अपने समर्थक और स्थानीय संपर्क होते हैं. अगर ये लोग चुनाव तक मैदान में टिके रहते हैं तो बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार को सीधे नुकसान पहुंच सकता है. कांग्रेस की कहानी भी बहुत अलग नहीं कांग्रेस में भी बगावत का आंकड़ा बड़ा है. श्रीगंगानगर में कांग्रेस के 45 बागी मैदान में हैं. बालोतरा में 34, जैसलमेर में 24 और बाड़मेर में 21 बागी कांग्रेस प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर रहे हैं. सीसवाली और कुचेरा में 21-21 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. झालरापाटन में 19 और पिड़ावा में 18 बागी मैदान में हैं. कोटपूतली और पदमपुर में कांग्रेस के 25-25 बागी बताए जा रहे हैं, जबकि बीकानेर में 13 बागियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ा है. कांग्रेस के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    कांग्रेस के बागी श्रीगंगानगर    45 बालोतरा    34 कोटपूतली    25 जैसलमेर    24 बाड़मेर    21 सीसवाली    21 कुचेरा    21 झालरापाटन    19 पिड़ावा    18 पदमपुर    25 बीकानेर    13 मान लीजिए किसी वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों पार्टियों का अपना मजबूत वोट बैंक है. इसी बीच बीजेपी का कोई मजबूत स्थानीय दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ता है. ऐसे में वह वोट सीधे कांग्रेस को नहीं देता, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार के वोट जरूर काट सकता है. इसलिए बागी उम्मीदवार कई सीटों पर जीतने के लिए नहीं, बल्कि अधिकृत प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. निकाय चुनाव में कई वार्डों में जीत और हार का अंतर बहुत कम रहता है. ऐसे में कुछ सौ वोट भी पूरा चुनाव पलट सकते हैं. अगर किसी मजबूत बागी को एक-दो हजार वोट मिल जाते हैं तो वह अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की जीत का रास्ता रोक सकता है. अब दोनों पार्टियों का फोकस एक ही है , बागी बैठाओ नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की कोशिश अब यही है कि प्रभावशाली बागियों को किसी तरह चुनाव मैदान से हटाया जाए. पार्टी के नेता ऐसे दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं. उन्हें समझाया जा रहा है कि चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाने से संगठन को नुकसान होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि कई बागी सिर्फ टिकट के लिए नाराज नहीं हैं. वे लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चुनाव जीतने की स्थिति में होने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया. ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यह कहना कि पार्टी का फैसला मानिए, काफी नहीं होगा. यहीं से मान-मनुहार की राजनीति शुरू होती है. वापसी की आखिरी कोशिश क्यों जरूरी है? पार्टी नेतृत्व के … Read more

मध्यप्रदेश से बढ़ेगी हवाई कनेक्टिविटी, 17 शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने की योजना; 8 इंटरनेशनल उड़ानें भी प्रस्तावित

भोपाल सरकार देश-विदेश में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है तो दूसरी ओर नई उड़ानें के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में एविएशन डायरेक्टोरेट ने फ़्लाइट ऑपरेटर कंपनियों से देश के 17 शहरों और विदेश के 8 स्थानों के लिए वायु सेवा शुरू करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। इनमें घरेलू में केरल, तिरुपति, अंडमान तो अंतरराष्ट्रीय में सिंगापुर, कुवालालंपुर मलेशिया, बैंकॉक थाइलैंड के लिए उड़ानें शुरू करने की तैयारी की जा रही है। एक साल में चौथी बार यह कवायद की जा रही है। ऑपरेटर्स को उनके मार्केट असेसमेंट, ऑपरेशनल और कमर्शियल व्यवहार्यता के आधार पर घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय सेक्टर के नए रूट की पहचान करने व उनका प्रस्ताव देने की छूट भी दी है। जिन जगहों से नई फ़्लाइट चालू होंगी उनमें भोपाल भी शामिल है। यहां के राजा भोज एयरपोर्ट से कई इंटरनेशनल फ़्लाइट के लिए कोशिश की जा रही है। सरकार ऑपरेटर्स को मप्र सिविल एविएशन पॉलिसी 2025 के तहत एक हजार प्रति किलोमीटर का इंसेंटिव भी देगी। एविएशन डायरेक्टोरेट ने विमानन कंपनियों से इसके लिए 15 सितंबर तक प्रस्ताव मांगे हैं। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां और देशी- विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जीआइएस के आयोजन से भी इसमें तेजी आई है। इसलिए मध्य प्रदेश को भारत और विदेशों के प्रमुख आर्थिक और पर्यटन केंद्रों से जोडऩे की ज़रूरत महसूस करते हुए सरकार अब राज्य के एयरपोट्र्स की कनेक्टिविटी को अलग-अलग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्थलों से जोडऩे पर काम कर रही है। इस पहल से बिजऩेस के लिए यात्रा करने वालों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही तेज़ होगी। अभी प्रदेश में आठ कमर्शियल एयरपोर्ट इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सतना, खजुराहो और दतिया में हैं। इसके साथ 20 एयर स्ट्रिप भी हैं। नए प्रस्ताव में ऑपरेटर को घरेलू उड़ानों के लिए कम से कम 50 या उससे अधिक सीटों और अंतरराष्ट्रीय स्थलों के लिए कम से कम 180 या उससे अधिक सीटों वाले विमानों का संचालन करना होगा। सरकार देगी इंसेंटिव और वीजीएफ प्रदेश से नई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने वाले ऑपरेटर्स को सरकार इंसेंटिव और वायबिलिटी गैप फंडिंग करेगी। घरेलू उड़ानों के लिए 750 किमी तक की उड़ान के लिए प्रति किमी 1 हजार और अधिकतम 7.5 लाख तक दिया जाएगा। 750 किमी से अधिक दूरी के लिए यह राशि अधिकतम 10 लाख तक होगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1000 किमी तक 1 हजार प्रति किमी और अधिकतम 10 लाख प्रति राउंड ट्रिप और 1 हजार किमी से अधिक के लिए अधिकतम 15 लाख तक इंसेंटिव और वीजीएफ का भुगतान किया जाएगा। सरकारी सहायता 6 महीने के लिए दी जाएगी, हालांकि परफॉर्मेंस के आधार पर सरकार इसे 6 माह और बढ़ाने पर भी विचार कर सकेगी। किसी नए घरेलू या अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन को जोडऩे वाले शेड्यूल्ड ऑपरेटर को राउंड ट्रिप के 'वन-वे स्टेज-लेंथ' के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। राउंड ट्रिप पूरी करने पर भी यह इंसेंटिव दिया जाएगा। मप्र से इन 17 घरेलू उड़ानों का प्रस्ताव रायपुर, लखनऊ, वाराणसी, पटना, जम्मू, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, गोवा, भुवनेश्वर, बागडोगरा पश्चिम बंगाल, कोच्चि या त्रिवेंद्रम केरल, तिरुपति आंध्रप्रदेश, पोर्ट ब्लेयर अंडमान और निकोबार आयरलैंड, रांची, अमृतसर, चंडीगढ़। 8 स्थानों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का प्रस्ताव: सिंगापुर, कुवालालंपुर मलेशिया, बैंकॉक थाइलैंड, दोहा कतर, यूएई में जेद्दा, अबू धाबी, दुबई, शारजाह।  

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण-बलराम-सुदामा के लिए तैयार खास पोशाक; भव्य पूजा की तैयारी

उज्जैन  भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन का गुरु सांदीपनि आश्रम जन्माष्टमी के अवसर पर एक बार फिर आस्था और भक्ति के रंग में रंगने जा रहा है. 4 सितंबर को जन्माष्टमी के महापर्व पर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान श्रीकृष्ण के विशेष श्रृंगार की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस बार भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए विशेष नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं. इन वस्त्रों की खासियत यह है कि सभी के वस्त्र एक ही रंग की थीम पर तैयार किए जा रहे हैं।  भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा उज्जैन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित गुरु सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने यहां 64 दिनों में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया था. भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा भी शिक्षा ग्रहण करते थे. यही वजह है कि उज्जैन का सांदीपनि आश्रम भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. जन्माष्टमी के अवसर पर यहां होने वाले आयोजन का विशेष धार्मिक महत्व है।  चार महीने पहले शुरू हो जाता है वस्त्रों का काम जन्माष्टमी के लिए भगवान के वस्त्र तैयार करने की प्रक्रिया एक-दो सप्ताह पहले नहीं, बल्कि करीब चार महीने पहले से शुरू हो जाती है. आश्रम में भगवान के लिए किस तरह का कपड़ा, किस रंग का वस्त्र और किस प्रकार की कारीगरी की जाएगी, इसका चयन काफी पहले कर लिया जाता है।  सांदीपनि आश्रम के पुजारी ने बताई पूरी प्रक्रिया सांदीपनि आश्रम के पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास ने बताया, "जन्माष्टमी की तैयारियां काफी समय पहले शुरू हो जाती है. कच्चा सामान और विशेष कपड़ों का चयन करने में समय लगता है. करीब चार महीने पहले यह तय किया जाता है कि इस बार भगवान के लिए मखमली कपड़े इस्तेमाल किए जाएंगे या सूती कपड़े. इसके साथ ही कपड़ों के रंग क्या होंगे और उन पर किस रंग के रेशमी व जड़ाऊ धागों से कारीगरी की जाएगी। जयपुर, कोलकाता और सूरत से आया विशेष मोती उन्होंने आगे बताया, " भगवान के कपड़ों के लिए सूरत, जयपुर और कोलकाता सहित अलग-अलग स्थानों से कपड़े, मोती और कारीगरी का सामान मंगवाया जाता है. इस बार विशेष रूप से मखमली कपड़े का चयन किया गया है. इसमें रंग-बिरंगे जड़ाऊ और रेशमी धागों से कारीगरी की जा रही है. मोती और धागों का चयन जयपुर और कोलकाता से किया गया है, जबकि कुछ विशेष मोती सूरत से भी मंगवाए गए हैं।  इस रंग के होंगे कृष्ण, बलराम और सुदामा के कपड़े इस बार सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के वस्त्रों में एकरूपता दिखाई देगी. सभी के लिए नीले रंग के वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं. वस्त्रों पर आकर्षक कढ़ाई, रेशमी धागों और मोतियों से सजावट की जा रही है।  लड्डू गोपाल के लिए सफेद-गुलाबी पोशाक पंडित कीर्ति रूपम व्यास के अनुसार, भगवान के वस्त्रों के साथ मुकुट, हार और अन्य श्रृंगार सामग्री भी तैयार की जा रही है. जन्माष्टमी से एक दिन पहले यानी 3 सितंबर तक इन सभी तैयारियों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया जा सके।  जहां श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा और गुरु परिवार के लिए नीले रंग के वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं, वहीं पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए इस बार अलग रंग की पोशाक तैयार की जा रही है. लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के वस्त्रों का चयन किया गया है. इन वस्त्रों को मोतियों की कारीगरी से सजाया जा रहा है. जन्माष्टमी की रात जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, तब पालने में विराजमान लड्डू गोपाल का यह विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा। 

पंजाब में नए वोटर्स के लिए जरूरी खबर, 12 सितंबर तक कर सकते हैं अप्लाई; SIR पर भी दर्ज कराएं आपत्ति

चंडीगढ़  मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पंजाब और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026' (SIR) का काम तेजी से चलाया जा रहा है। अगर आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, या फिर आप 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल के हो रहे हैं, तो आप आवेदन कर सकते है।  फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, नया वोटर कार्ड बनवाने और ड्राफ्ट वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर 12 सितंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती, गलत नाम, पते में सुधार या किसी फर्जी/अयोग्य वोटर का नाम हटाने को लेकर यदि कोई दावे और आपत्तियां हैं, तो इन्हें 13 सितंबर तक संबंधित कार्यालयों या ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करवाया जा सकता है। यदि किसी नागरिक का नाम ड्राफ्ट रोल में छूट गया है या वोटर आईडी में संशोधन की आवश्यकता है, तो आयोग की ओर से अलग-अलग प्रकार के फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। यह अभियान राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। नए मतदाता बनने, NRI वोटर के रूप में पंजीकरण कराने, नाम कटवाने या पते में सुधार के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाया गया है। फर्स्ट टाइम वोटर्स कैसे कर सकते हैं आवेदन जानिए…     चुनाव आयोग की अपील : चुनाव आयोग ने फर्स्ट टाइम वोटर्स बनने वाले युवाओं से अपील की है कि जो भी वोटर्स बनने की शर्तों को पूरा करते हैं वो अपनी वोट जरूर बनवाएं। 12 सितंबर तक वो ऑनलाइन या ऑफ लाइन सिस्टम को अपनाकर अपना नाम फाइनल मतदाता सूची में शामिल करवाएं ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो मतदान कर सकें।     ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया: सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं या अपने स्मार्टफोन में ECINet App (वोटर हेल्पलाइन ऐप) डाउनलोड करें। पोर्टल या ऐप पर मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करना होगा।     फार्म-6 भरना होगा: आन लाइन रजिस्ट्रेशन करते हुए फर्स्ट टाइम वोटर्स को फार्म-6 का विकल्प चुनना होगा। उसके बाद फार्म में जो जानकारियां मांगी गई सभी भरनी अनिवार्य होंगी। फार्म भरते समय नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, वर्तमान व स्थाई पता आदि ध्यानपूर्वक भरें ताकि बाद में किसी तरह का बदलाव न करवाना पड़े।     दस्तावेज अपलोड: फार्म नंबर छह के साथ आवेदक को पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं का सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल, राशन कार्ड, बैंक पासबुक आदि) की कॉपी अपलोड करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिससे आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।     ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया: जो युवा ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा ERO के दफ्तर जाकर हार्ड कॉपी में फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म को पूरी तरह भरकर आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी सेल्फ अटेस्ट करके BLO या ERO दफ्तर में 12 सितंबर 2026 से पहले जमा कराएं।

Maruti Suzuki ला रही सस्ती इलेक्ट्रिक कार, कीमत 10 लाख से कम; शानदार रेंज से मचेगा मुकाबला

मुंबई  Maruti Suzuki जल्द ही भारत में एक छोटी और किफायती इलेक्ट्रिक कार लाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV की कीमत 10 लाख रुपये से कम रखने की कोशिश की जा रही है. अगर ऐसा होता है तो ये Maruti की e Vitara के बाद कंपनी की दूसरी इलेक्ट्रिक कार होगी. अच्छी बात है कि ये ज्यादा अफोर्डेबल भी होगी. नई इलेक्ट्रिक कार को अगले दो साल के अंदर लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत करीब 8.5 लाख रुपये से 10.5 लाख रुपये के बीच हो सकती है. यानी इसके एक या दो वैरिएंट 10 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च हो सकते हैं. हालांकि, कीमत को लेकर फिलहाल हमें इंतजार करना होगा. आइए आपको Maruti Suzuki की इस अपकमिंग ईवी के बारे में पूरी डिटेल्स बताते हैं।  315 Km तक मिल सकती है रेंज रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई Maruti EV की रेंज Tata Tiago EV के आसपास हो सकती है. इसमें बैटरी और वैरिएंट के आधार पर करीब 250 से 315 किलोमीटर तक की रेंज मिलने की उम्मीद है. फिलहाल कंपनी ने इसकी बैटरी कैपेसिटी, मोटर आउटपुट या लॉन्च डेट की भी जानकारी नहीं दी है।  e Vitara से काफी अलग हो सकती है नई EV आपको बता दें कि Maruti की पहली इलेक्ट्रिक कार e Vitara एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV के तौर पर बाजार में उपलब्ध है. हालांकि, इसकी कीमत भी काफी ज्यादा है. इसके मुकाबले नई EV को शुरुआत से ही अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. इसी वजह से इसमें छोटी बैटरी दिए जाने की उम्मीद है. ऐसे में 250 से 315 किलोमीटर की क्लेम्ड रेंज वाली Maruti EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV के करीब खड़ी होगी।  डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म पर होगी तैयार इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका डेडिकेटेड इलेक्ट्रिक आर्किटेक्चर हो सकता है. यानी इसे किसी पेट्रोल कार के प्लेटफॉर्म को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करके तैयार करने के बजाय इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन को ध्यान में रखकर बनाया जा सकता है. इससे बैटरी, केबिन और मोटर को बेहतर तरीके से पैकेज करने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV का प्रोडक्शन Maruti Suzuki के गुजरात स्थित हंसलपुर प्लांट में किया जा सकता है. यही प्लांट e Vitara का भी प्रोडक्शन करता है और Maruti के लिए एक अहम एक्सपोर्ट हब है।  Arena नेटवर्क से हो सकती है बिक्री नई किफायती EV को Maruti के Arena नेटवर्क के जरिए बेचे जाने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो इसे Nexa तक सीमित नहीं रखा जाएगा. इससे नई इलेक्ट्रिक कार को WagonR और Swift जैसे मास-मार्केट मॉडल्स के साथ कंपनी के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क का फायदा मिलेगा. किफायती EV को बड़े पैमाने पर बेचने के लिए सिर्फ बड़े शहरों के ग्राहकों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. छोटे शहरों और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाना जरूरी होगा. Maruti इस EV की कीमत कम रखने के लिए लोकलाइजेशन पर भी काफी जोर दे सकती है।  Tata Tiago EV और Punch EV से होगा मुकाबला भारत में अफोर्डेबल इलेक्ट्रिक कारों का सेगमेंट अभी भी काफी छोटा है. खासकर 15 लाख से 30 लाख रुपये वाले EV सेगमेंट के मुकाबले 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों के ऑप्शन काफी कम हैं।  आपको बता दें कि Tata Tiago EV की शुरुआती कीमत करीब 8 लाख रुपये है, जबकि Tata Punch EV की शुरुआती कीमत 9.69 लाख रुपये के आसपास है. MG Comet EV भी एक सस्ता ऑप्शन है. लेकिन इसका छोटा टू-डोर सिटी-कार फॉर्मेट इसे बाकी कारों से अलग बनाता है. ऐसे में Maruti की नई EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV और Punch EV जैसे मॉडल्स को चुनौती दे सकती है. हालांकि, फिलहाल इसकी लॉन्च के आपको इंतजार करना होगा. लेकिन, अगर आप इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो टाटा के ऑप्शन के साथ जा सकते हैं। 

Vaibhav Suryavanshi रचेंगे इतिहास! भारत में डेब्यू करते ही बनाएंगे बड़ा रिकॉर्ड, उम्र सिर्फ 15 साल

मुंबई  अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है. टी-20 टीम में वैभव सूर्यवंशी का भी नाम है, हाल ही में वैभव ने इंग्लैंड दौरे पर टी-20 टीम में खेलकर भारत के लिए डेब्यू किया था. ऐसा कर वैभव भारत की ओर से सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने हैं. वैभव ने सचिन तेंदुलकर के सालों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. तेंदुलकर ने साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच 16 साल और 75 दिन की उम्र में खेला था. वहीं, वैभव ने साल 2026 में इग्लैंड के खिलाफ जब अपना पहला मैच खेला तो वैभव की उम्र 15 साल और 99 दिन थी।  अब एक बार फिर वैभव इतिहास रचने वाले हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज में जैसे ही वैभव कोई मैच खेलेंगे तो वह भारत में भारत की ओर से सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल मैच खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी बन जाएंगे. इस समय यह कारनामा पीयूष चावला के नाम है. पीयूष ने अपना डेब्यू भारत में ही खेलकर दिया था. पीयूष चावला ने जब अपना पहला मैच खेला था तो उनकी उम्र 17 साल और 75 दिन थी. पीयूष ने मोहाली में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपना पहला मैच भारत में खेला था।    भारत में सबसे कम उम्र में पहला मैच खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी     पीयूष चावला 17 साल 75 दिन- मोहाली में, 9 मार्च, 2006 vs इंग्लैंड (टेस्ट)      हरभजन सिंह- 17 साल 265 दिन- बेंगलुरु, 25 मार्च 1998 vs ऑस्ट्रेलिया(टेस्ट)     विजय मेहरा- 16 साल 265 दिन- मुंबई, 2 दिसंबर 1955 vs न्यूजीलैंड (टेस्ट) अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, नितीश कुमार रेड्डी*, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर*, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह*, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा

देशविरोधी गतिविधियों की जांच में बड़ा खुलासा, भोपाल से जुड़े तार कई राज्यों तक; NIA संभाल सकती है केस

भोपाल मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा इसी वर्ष जून में दर्ज किए गए देशविरोधी गतिविधियों के आरोप के मामले जांच के लिए एनआइए अपने हाथ में ले सकती है। इनका अंतरराष्ट्रीय और कई राज्यों से जुड़ाव पाए जाने के कारण ऐसा किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने एटीएस से मामले से जुड़े दस्तावेज लिए हैं। इसके पहले पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में भी एनआईए शामिल रही। मालूम हो कि पिछले सप्ताह कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले में कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश एटीएस की प्रशंसा की थी। भोपाल से शुरू हुई गिरफ्तारी, तीन राज्यों तक पहुंची जांच एटीएस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। सबसे पहले भोपाल के काजी कैंप से फराज को पकड़ा गया। उससे पूछताछ के आधार पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। इनसे मिले साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी के रहने वाले इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क का आरोप चारों आरोपित फिलहाल जेल में हैं। आरोप है कि ये सभी एक पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर अविवाहित मुस्लिम युवकों का ब्रेन वाश कर उन्हें कट्टर बना रहे थे। एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि ये पाकिस्तानी हैंडलर से इतने प्रभावित थे कि उसके कहने पर कुछ भी कर सकते थे। इसे 'लोन वुल्फ अटैक' मॉड्यूल कहा जाता है। इसमें आरोपित किसी बड़े आतंकी संगठन के निर्देश के बिना अकेले ही योजना बनाकर घटना को अंजाम देता है। आरोपितों में प्रमुख है इजहार-उल-हक एटीएस मामले में जब्त किए गए डिजिटल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस पर काम कर रही है। इनकी फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच की जाएगी। अभी तक की पूछताछ में पता चला है कि चारों आरोपितों में प्रमुख इजहार-उल-हक है। वही तीनों को कट्टरपंथी आडियो, वीडियो और पढ़ने की सामग्री उपलब्ध कराता था। भोपाल के फराज का सबसे अधिक करीबी नईम अब्दुल्ला था। नईम भोपाल में उसके घर में आकर भी रुका था। वह फराज से लश्कर-ए-तैयबा के मारे गए आतंकवादी खालिद सैफुल्लाह की तरह बनने के लिए कहता था। बता दें सैफुल्लाह रामपुर में सीआरपीएफ कैंप, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू और नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय में हुए हमले का आरोपित भी था।

जबलपुर में BPL राशन का बड़ा फर्जीवाड़ा, कंपनी डायरेक्टर से GST भरने वालों तक 4,998 परिवार पकड़े गए

जबलपुर  जबलपुर में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वालों के लिए बनी राशन योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिले में पांच हजार से अधिक ऐसे संपन्न परिवार पकड़े गए हैं, जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक होने के बावजूद वे सालों से सरकारी राशन डकार रहे थे। प्रशासन ने अब सख्ती दिखाते हुए इन सभी अपात्र लोगों के कार्ड निरस्त कर दिए हैं और उन्हें नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। लखपति और कंपनी डायरेक्टर भी ले रहे थे मुफ्त राशन     जांच के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 4,998 परिवारों की वार्षिक आमदनी छह लाख रुपये से ज्यादा पाई गई है। हद तो तब हो गई जब 525 ऐसे परिवारों की पहचान हुई जिनके सदस्य बाकायदा पंजीकृत कंपनियों में डायरेक्टर या अन्य ऊंचे पदों पर काबिज हैं। इसके अलावा 40 से 45 परिवार ऐसे भी मिले जो सालाना 25 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं और अपने व्यापार का जीएसटी (GST) तक भरते हैं, लेकिन फिर भी वे गरीबी रेखा के कार्ड का फायदा उठा रहे थे। एसडीएम के सामने पेश होकर देनी होगी सफाई प्रशासन ने अपात्र पाए गए इन सभी हितग्राहियों के नाम आधिकारिक पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस मिलने के बाद इन लोगों को एसडीएम (SDM) के सामने पेश होना होगा। उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने किस आधार पर अब तक बीपीएल कार्ड का इस्तेमाल किया, साथ ही अपनी वर्तमान आय से जुड़े पुख्ता दस्तावेज भी दिखाने होंगे। जवाब संतोषजनक न मिलने पर प्रशासन आगे की दंडात्मक कार्रवाई करेगा। केंद्र के निर्देश पर अगस्त 2025 से चल रही थी जांच     फर्जी कार्डधारकों को बाहर करने का यह अभियान केंद्र सरकार के निर्देशों पर अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। इस सर्वे में उन लोगों को चिह्नित किया गया, जिनकी आर्थिक स्थिति बीते वर्षों में सुधर गई, जिन्हें अच्छी नौकरियां मिल गईं या जिनका कारोबार चल पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद आगे आकर अपना नाम बीपीएल सूची से नहीं कटवाया।     डिप्टी कलेक्टर आर.एस. मरावी के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर अपात्रों के नाम विलोपित कर दिए गए हैं और इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। शासन के निर्देश के बाद ही इनसे वसूली या अन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1998 के बाद से समय-समय पर सर्वे किए जाते रहे हैं, इसके बावजूद अपात्र लोगों के नाम सूची में बने रहे। पात्रों के नाम कटने की शिकायतों पर भी नजर     इस बड़ी कार्रवाई के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां कथित तौर पर वास्तविक और पात्र बीपीएल परिवारों के नाम भी सूची से काट दिए गए हैं। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और ऐसे मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी हकदार गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।     बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के तहत जबलपुर जिले में 1,008 शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के जरिए 3,85,153 राशन कार्डधारी परिवारों (कुल 14,41,765 हितग्राही) को प्रति व्यक्ति 5 किलो प्रतिमाह की दर से राशन बांटा जाता है।  

ग्वालियर रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, 7 ट्रेनों के बदले रूट; तीसरी रेल लाइन का काम शुरू

ग्वालियर  आने वाले दिनों में अगर आप ट्रेन से यात्रा करने का प्लान बना रहे है तो ये खबर आपके काम की है। मध्य रेलवे के पुणे एवं हडपसर यार्ड में हडपसर-पुणे-जीसीएमसी तीसरी रेल लाइन की कमीशनिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा। इस कारण सितंबर और अक्टूबर में कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। इसका सीधा असर एमपी में ग्वालियर से चलने वाली ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस (22194) और दौंड-ग्वालियर एक्सप्रेस (22193) पर पड़ेगा। ग्वालियर होकर चलने वाली हजरत निजामुद्दीन मिरज एक्सप्रेस (12494) और वापसी में मिरज-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12493) भी प्रभावित रहेंगी। वहीं ट्रेन संख्या 22194 ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस 19 सितंबर को पुणे के बजाय खडकी स्टेशन पर आंशिक रूप से समाप्त होगी। इसके अगले दिन ट्रेन संख्या 22193 दौड-ग्वालियर एक्सप्रेस 20 सितंबर को पुणे के बजाय खडकी स्टेशन से रात 12.30 बजे दौंड के लिए रवाना होगी। इन ट्रेनों के मार्ग भी बदले 11078 जम्मू तवी-पुणे एक्सप्रेस 21 सितंबर को मनमाड-इगतपुरी-कल्याण-पनवेल-करजत-लोनावला होते हुए पुणे पहुंचेगी। 12780 हजरत निजामुद्दीन-वास्को-द-गामा एक्सप्रेस 22 सितंबर और 3 अक्टूबर को मनमाड-काष्टी-दौंड-कुईवाडी पंढरपुर-मिरज होकर चलेगी। 11077 पुणे-जम्मू तवी एक्सप्रेस 20 सितंबर को पुणे-लोनावला करजत-पनवेल-कल्याण-इगतपुरी-मनमाड होकर चलेगी। 12147 कोल्हापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 22 सितंबर को कोल्हापुर-मिरज-कुडूवाडी-दौंड-अहिल्यानगर-मनमाड होकर चलेगी। 18519 विशाखापत्तनम–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस : 2 अक्टूबर को दौंड–अहिल्यानगर–मनमाड–इगतपुरी–कल्याण होकर चलेगी 22686 चंडीगढ़–यशवंतपुर एक्सप्रेस: 3 अक्टूबर को मनमाड–काष्टी–दौंड–कुर्डूवाडी–पंढरपुर–मिरज मार्ग से चलेगी। झेलम पुणे से देरी से होगी रवाना ट्रेन 11077 पुणे-जम्मू तवी के पुणे से रवाना होने के समय में भी कुछ तिथियों पर बदलाव किया गया है। 19 सितंबर-शाम 5.50 बजे रवाना होगी, निर्धारित समय से 30 मिनट देरी। 23 सितंबर-शाम 5.50 बजे रवाना होगी, 30 मिनट देरी से। 3 अक्टूबर-शाम 6.45 बजे रवाना होगी, 1.25 घंटे देरी से। 4 अक्टूबर-शाम 7.30 बजे रवाना होगी, 2.10 घंटे देरी से 1 सितंबर से नहीं होगा 20 ट्रेनें का स्टॉपेज यात्रियों को जानकारी के लिए बता दें कि 12138 पंजाब मेल, 20986 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-कोटा साप्ताहिक एक्सप्रेस, 11450 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-जबलपुर एक्सप्रेस, 16032 अंडमान एक्सप्रेस और 16318 हिमसागर एक्सप्रेस 31 अगस्त से 14 अक्टूबर तक फरीदाबाद नहीं रुकेंगी। वहीं 19326 अमृतसर इंदौर एक्सप्रेस, 11842 कुरुक्षेत्र-खजुराहो एक्सप्रेस, 19020 हरिद्वार-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस, 12920 मालवा एक्सप्रेस, 14622 फिरोजपुर-नांदेड एक्सप्रेस, 22918 हरिद्वार-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस और 19308 ऊना हिमाचल-इंदौर एक्सप्रेस का ठहराव 1 सितंबर से 15 अक्टूबर तक नहीं होगा।