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सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता: श्रीनगर में दो संदिग्ध आतंकी पकड़े गए, पिस्टल और आतंकी पोस्टर मिले

 श्रीनगर जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. बाबादेम इलाके में नाका चेकिंग के दौरान पुलिस ने बाइक पर सवार दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान दोनों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े पोस्टर बरामद किए गए हैं. इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान फैसल अहमद भट और फैसल अहमद गुरू के रूप में हुई है. दोनों श्रीनगर के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध बाइक पर सवार होकर इलाके से गुजर रहे थे, तभी नाका चेकिंग के दौरान उन्हें रोका गया. तलाशी लेने पर उनके पास से कई आपत्तिजनक सामान बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, तीन मैगजीन और 21 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा दो मोबाइल फोन और 10 LeT पोस्टर भी जब्त किए गए. बरामद पोस्टरों को लेकर जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों किसी आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे या फिर किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में थे। इस मामले में श्रीनगर के एमआर गंज पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 26/2025 दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ UAPA और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. फिलहाल, दोनों से पूछताछ जारी है और पुलिस उनके नेटवर्क तथा अन्य संभावित संपर्कों की जांच कर रही है।

एक ही दिन बड़े बेटे की वर्दी और छोटे बेटे की तिरंगे में लिपटी लाश, दिल दहला देने वाली घटना

 बागपत उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. यह कहानी सिर्फ एक परिवार के दर्द की नहीं, बल्कि उस विडंबना की भी है, जिसमें खुशियां और गम एक ही दिन, एक ही घर में टकरा गए. जिस दिन एक बेटे ने अपने सपनों को साकार करते हुए पुलिस सेवा में कदम रखा, उसी दिन दूसरे बेटे ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी।  बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव के निवासी अग्निवीर सोहित चौहान की अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, रविवार को आए बर्फीले तूफान के दौरान एक पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर सोहित गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा इतना भयानक था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।  सोहित 2023 में अग्निवीर के तहत हुआ था भर्ती सोहित चौहान वर्ष 2023 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर यूनिट में भर्ती हुए थे. वह अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे. परिवार में माता-पिता, एक बड़ा भाई और एक बहन है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले सोहित ने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर सेना में जगह बनाई थी. उनके परिवार को उन पर गर्व था और गांव के युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन चुके थे।  लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन सोहित की मौत की खबर आई, उसी दिन उनके बड़े भाई मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हो रहे थे. उस दिन उनकी पासिंग आउट परेड थी, जिसे देखने के लिए उनके पिता मोहर सिंह भी गए हुए थे. घर में जश्न का माहौल था, हर कोई खुश था कि परिवार का एक बेटा पुलिस में भर्ती हो गया है. लेकिन इसी खुशी के बीच अचानक आई दुखद खबर ने सब कुछ बदल दिया।  जैसे ही परिवार को सोहित की मौत की सूचना मिली, खुशी का माहौल मातम में बदल गया. पिता, जो बड़े बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे, अचानक छोटे बेटे की मौत की खबर सुनकर टूट गए।. मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. एक ही दिन में परिवार ने जीवन का सबसे बड़ा सुख और सबसे बड़ा दुख दोनों देख लिया।  सोहित की अंतिम विदाई में हर आंख हुई नम जब सोहित चौहान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. गांव की गलियों, सड़कों और घरों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा. अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सोहित को विदाई दी. उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सलामी दी गई.यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी ने अपने इस वीर बेटे को नम आंखों से विदा किया।  इस दुखद घटना के बाद कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके परिवार को उचित मुआवजा तथा पेंशन दी जाए. ग्रामीणों का कहना है कि सोहित ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई है, इसलिए उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए।  सांसद बोले परिवार देश परिवार के साथ सोहित के पिता मोहर सिंह ने बताया कि उनका बेटा बहुत मेहनती और जिम्मेदार था. वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था और इसी उद्देश्य से सेना में भर्ती हुआ था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन उसका इस तरह चले जाना असहनीय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे आगे का जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें. वहीं दुख की इस घड़ी में परिवार से मिलने पहुंचे सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा कि सोहित के परिवार के साथ पूरा देश खड़ा है. सरकार उनके साथ है. जो भी मदद होगी हर संभव मदद दिलाई जाएगी. उनकी अंतिम यात्रा में हर दल का आदमी शामिल हुआ. उनका योगदान देश याद  रखेगा। 

भारत-रूस समझौता: 3000 सैनिक एक-दूसरे की ज़मीन पर तैनात, जेट और युद्धपोत भी होंगे शामिल

 नई दिल्ली भारत और रूस ने हाल ही में एक बहुत महत्वपूर्ण सैन्य समझौता किया है. इस समझौते का नाम है इंडो-रूसी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट यानी RELOS. फरवरी 2025 में साइन हुए इस समझौते को जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया है. अब दोनों देश एक-दूसरे के इलाके में ज्यादा से ज्यादा 3000 सैनिक, 10 एयरक्राफ्ट यानी हवाई जहाज और 5 वॉरशिप यानी युद्धपोत तैनात कर सकते हैं।  यह समझौता 5 साल के लिए है. अगर दोनों पक्ष चाहें तो इसे और 5 साल बढ़ाया भी जा सकता है. समझौते में साफ नियम बनाए गए हैं कि दोनों देश अपने सैनिकों, जहाजों और हवाई जहाजों को कैसे सपोर्ट करेंगे. इसका मुख्य मकसद संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय मदद और आपदा राहत जैसे कामों को आसान बनाना है।  समझौता क्या है और इसमें क्या-क्या शामिल है? यह RELOS समझौता दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स यानी सप्लाई और सपोर्ट का आदान-प्रदान करने वाला है. पहले भारत और अमेरिका के बीच भी ऐसा ही LEMOA समझौता हुआ था. अब रूस के साथ भी यही हुआ है. समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और एयरबेस पर सैनिक, जहाज और एयरक्राफ्ट रख सकते हैं।  अधिकतम 3000 सैनिक एक साथ रह सकते हैं. 10 फाइटर प्लेन या ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 5 युद्धपोत भी एक साथ तैनात किए जा सकते हैं. समझौते में लिखा है कि तैनात सैनिकों को ईंधन, मरम्मत, खाना, स्पेयर पार्ट्स और हर तरह का टेक्निकल सपोर्ट दिया जाएगा. यह सिर्फ युद्ध के लिए नहीं है बल्कि मुख्य रूप से संयुक्त ट्रेनिंग, अभ्यास और मदद के कामों के लिए है. रूस की संसद ने दिसंबर 2025 में इसे पास किया और अब यह पूरी तरह लागू हो चुका है।  भारत और रूस यह सैन्य आदान-प्रदान क्यों कर रहे हैं? भारत और रूस बहुत पुराने दोस्त हैं. दोनों देश 70 साल से ज्यादा समय से सैन्य साझेदारी कर रहे हैं. भारत रूस से ज्यादातर हथियार और सैन्य उपकरण खरीदता है. अब दुनिया की स्थिति बदल रही है. चीन के साथ भारत की सीमा पर तनाव है. रूस यूक्रेन युद्ध में लगा है और अमेरिका-चीन के बीच भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।  ऐसे में दोनों देश चाहते हैं कि उनकी दोस्ती और मजबूत हो. यह समझौता इसलिए किया गया है ताकि संयुक्त अभ्यास आसानी से हो सके. पहले अभ्यास के लिए सैनिक और सामान लाना-ले जाना बहुत महंगा और मुश्किल होता था. अब दोनों देश एक-दूसरे के बेस इस्तेमाल करके जल्दी और सस्ते में काम कर सकेंगे।  भारत को रूस के आर्कटिक क्षेत्र और फार ईस्ट के बेस मिलेंगे जहां ठंडे इलाकों में ट्रेनिंग हो सकेगी. रूस को भारतीय महासागर के बंदरगाह मिलेंगे जहां उसके जहाज रुक सकेंगे. साथ ही मानवीय मिशन जैसे बाढ़, भूकंप या बचाव कार्य में मदद मिलेगी. यह दोनों देशों की सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए है।  इस समझौते से दोनों देशों को क्या फायदा होगा? इस RELOS समझौते से दोनों देशों को बहुत फायदा होगा. सबसे बड़ा फायदा लॉजिस्टिक्स सपोर्ट का है. मतलब अगर भारतीय सैनिक रूस में अभ्यास करें तो वहां उन्हें रूस का बेस, ईंधन और मरम्मत मिल जाएगी. उसी तरह रूसी सैनिक भारत आएं तो भारतीय बेस पर सब कुछ उपलब्ध होगा. इससे समय और पैसे की बचत होगी।  संयुक्त अभ्यास जैसे INDRA ज्यादा बेहतर और बार-बार हो सकेंगे. आपदा राहत में भी तेजी आएगी. उदाहरण के लिए अगर रूस में कोई प्राकृतिक आपदा हो तो भारतीय सैनिक और जहाज जल्दी मदद पहुंचा सकेंगे. भारत की नेवी को रूस के उत्तरी इलाकों तक पहुंच मिलेगी जो भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकता है।  रूस को भारतीय समंदर में मजबूत पकड़ मिलेगी. कुल मिलाकर दोनों देश अपनी सेनाओं को और मजबूत और तैयार रख सकेंगे. यह समझौता सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।  यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है और आगे क्या होगा? यह समझौता भारत-रूस दोस्ती का नया अध्याय है. दोनों देश लंबे समय से साथ हैं. दुनिया में कई देश ऐसे समझौते कर रहे हैं ताकि अपनी सेनाएं मजबूत रहें. भारत के लिए यह इसलिए खास है क्योंकि वह रूस पर निर्भर है हथियारों के लिए और अब लॉजिस्टिक्स भी आसान हो जाएगी. रूस के लिए भी भारत जैसे मजबूत साथी का बेस मिलना महत्वपूर्ण है. समझौता 5 साल बाद बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल दोनों देश इसे लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। 

मणिपुर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, भारत-म्यांमार बॉर्डर के पास 4 उग्रवादी पकड़े गए

 इंफाल मणिपुर में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जहां अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, ये कार्रवाई दो अलग-अलग जिलों में की गई. इस ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की भी अहम भूमिका रही. खास बात यह है कि इनमें से कुछ गिरफ्तारियां भारत-म्यांमार सीमा के पास हुई हैं, जो लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों का संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश गया है।  पुलिस के बयान के अनुसार, शनिवार को सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित यांगौबुंग गांव के आसपास से दो उग्रवादियों को गिरफ्तार किया. इनकी पहचान थोखचोम इंगोचा सिंह (31) और थोखचोम रघुनाथ मेइती (48) के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि ये दोनों अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए थे और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में थे. इस इलाके में अक्सर उग्रवादी गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं।  इसी दिन एक अन्य कार्रवाई में इम्फाल ईस्ट जिले के पैलेस कंपाउंड इलाके से एक और उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया. इस आरोपी की पहचान लैशराम इनाओटोम्बा सिंह (19) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, यह युवक भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ था और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था. सुरक्षा एजेंसियों को उसके बारे में पहले से इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर उसे पकड़ने की योजना बनाई गई थी।  इसके बाद रविवार को भी सुरक्षा बलों ने अभियान जारी रखा और इम्फाल ईस्ट जिले के संजेनबाम खुनौ इलाके में एक और उग्रवादी को उसके घर से गिरफ्तार किया गया. हालांकि पुलिस ने इस आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन शुरुआती जांच में उसके भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने की बात सामने आई है. इस तरह दो दिनों में चार अलग-अलग उग्रवादियों की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।  पीटीआई के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से राज्य में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियां अब इन आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क, फंडिंग और अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं. मणिपुर में लंबे समय से उग्रवाद एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि आम लोगों में भी भरोसा बढ़ता है।   

उरी में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में पाकिस्तानी आतंकी ढेर, भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

 जम्मू जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में सुरक्षाबलों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया है. 'ऑपरेशन डिग्गी 2' (OP DIGGI 2) के तहत चलाए गए एक संयुक्त अभियान में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक पाकिस्तानी आतंकवादी को मार गिराया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर 14 और 15 मार्च 2026 की दरमियानी रात उरी सेक्टर के बुच्छर (Buchhar) इलाके में सेना और पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। घने जंगलों का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों को सतर्क जवानों ने समय रहते भांप लिया. जब आतंकी को रुकने की चुनौती दी गई, तो उसने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में एक पाकिस्तानी आतंकी ढेर हो गया। मारे गए आतंकी के पास से एक एके-राइफल (AK Rifle), पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस सहित युद्ध जैसे अन्य सामान बरामद हुए हैं. सुरक्षाबलों का मानना है कि यह आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से सीमा पार से आया था. फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और आतंकी छिपे न हों। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में मुठभेड़ जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के पास सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया. इस दौरान एक संदिग्ध आतंकी मारा गया, जबकि उसके एक साथी की तलाश जारी है. सेना के अनुसार यह घटना मंगलवार 10 मार्च को हुई. इंडियन आर्मी को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ लोग सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं. इसके बाद सेना ने इलाके में निगरानी और तलाशी अभियान शुरू किया. जम्मू स्थित रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि दो संदिग्ध आतंकियों को दोपहर करीब 3 बजे झांगर के पास देखा गया. यह इलाका नौशेरा सेक्टर में LoC के करीब है। खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुआ ऑपरेशन भारतीय सेना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस से घुसपैठ की संभावित कोशिश को लेकर मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर 14 और 15 मार्च 2026 की दरमियानी रात उरी सेक्टर के बुच्छर इलाके में संयुक्त अभियान चलाया गया. ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया. इसी दौरान सैनिकों ने झाड़ियों के पास एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि देखी, जिसके बाद उसे चुनौती दी गई। आतंकवादी ने की अंधाधुंध फायरिंग सुरक्षा बलों द्वारा चुनौती दिए जाने पर संदिग्ध व्यक्ति ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इसके जवाब में सेना और पुलिस के जवानों ने भी मोर्चा संभाला और मुठभेड़ शुरू हो गई. कुछ देर चली गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादी को मार गिराया। सुरक्षा बलों  के साथ मुठभेड़ सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. इस दौरान एक संदिग्ध आतंकी मारा गया. दूसरे आतंकी की तलाश के लिए इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सेना के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल पूरे इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और घुसपैठिया छिपा हुआ न हो।

सीमा पर तनाव: पुंछ में दिखा पाक ड्रोन, भारतीय सेना की ताबड़तोड़ फायरिंग

जम्मू रविवार तड़के जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर भारतीय सीमा में घुसे एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सेना के जवानों ने मार गिराने के लिए फायरिंग की। हालांकि, ड्रोन कुछ देर तक दिगवार इलाके में मंडराने के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की ओर लौट गया। जानकारी के मुताबिक, यह पिछले तीन दिनों में दूसरी बार है जब सीमा पार से ड्रोन की गतिविधि का पता चलने पर सैनिकों ने फायरिंग की। सेना के जवानों ने सुबह करीब 6.10 बजे दुश्मन ड्रोन को देखा और उसे नीचे गिराने के लिए एक दर्जन से अधिक राउंड गोलियां चलाईं। इसके बावजूद, ड्रोन गोलियों से बच निकला और तुरंत पाकिस्तान की ओर लौट गया। इस घटना के बाद, सेना ने यह सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है कि ड्रोन द्वारा किसी भी प्रकार के हथियार या नशीले पदार्थों की एयरड्रॉपिंग न की गई हो। 27 फरवरी को भी सैनिकों ने इसी इलाके में एक पाकिस्तानी ड्रोन पर गोलीबारी की थी।

वायुसेना का जबरदस्त शो! राफेल और तेजस के साथ पोखरण में गूंजेगी भारत की दहाड़

जैसलमेर  भारतीय वायुसेना 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण रेंज में अपनी युद्धक क्षमता का ऐतिहासिक प्रदर्शन करने जा रही है। 'वायुशक्ति-2026' नामक इस युद्धाभ्यास में वायुसेना 'ऑपरेशन सिंदूर' की तर्ज पर अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाएगी। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दुश्मन पर त्वरित हमले, रणनीतिक बढ़त और 'आत्मनिर्भर भारत' की स्वदेशी शक्ति का प्रदर्शन करना है। आसमान में दिखेगी 'बाज' जैसी पैनी नजर इस बार के अभ्यास में एक नया एयरक्राफ्ट और आधुनिक तकनीक विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे, जो आसमान में बाज की तरह मंडराकर पलक झपकते ही सटीक हमला करने में सक्षम हैं। वायुसेना इस दौरान दिन, शाम और रात के समय कठिन मिशनों को अंजाम देने की अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करेगी। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन और संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी (HADR) में वायुसेना की भूमिका का भी सजीव चित्रण किया जाएगा। बेड़े में शामिल होंगे ये आधुनिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर वायुशक्ति-26 में भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लगभग सभी प्रमुख विमान हिस्सा लेंगे…     लड़ाकू विमान: राफेल, तेजस (स्वदेशी), सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29 और हॉक।     परिवहन विमान: C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस और स्वदेशी C-295।     हेलिकॉप्टर: अपाचे (अटैक), चिनूक (हैवी लिफ्ट), प्रचंड (LCH), ध्रुव (ALH MK-IV) और एमआई-17।     अटैक ड्रोन्स: रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA) और लॉइटरिंग मुनिशन्स। स्वदेशी हथियार प्रणालियों का 'अभेद्य' प्रदर्शन 'अचूक, अभेद्य और सटीक' के मंत्र के साथ वायुसेना अपनी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करेगी…     मिसाइल सिस्टम: स्वदेशी 'आकाश' और 'स्पाइडर' मिसाइल प्रणालियों से सटीक मार का प्रदर्शन।     ड्रोन रोधी तकनीक: काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (CUAS) की टेस्टिंग।     लॉइटरिंग मुनिशन्स: नई तकनीक वाले 'कामिकेज़' ड्रोन्स जो लक्ष्य को खोजकर नष्ट करते हैं।  

सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार टकराने से सेना के 4 जवानों की गई जान

जगदलपुर/मेदिनी नगर/पलामू. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में 201 कोबरा बटालियन के चार जवानों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम खपरी बाईपास के समीप हुआ। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार ट्रक के नीचे जा घुसी और उसकी छत पूरी तरह उखड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोबरा बटालियन के जवान जगदलपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तेज रफ्तार डिजायर कार खपरी बाईपास पर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सीधे ट्रक के नीचे फंस गई और उसमें सवार जवान बुरी तरह अंदर जकड़ गए। कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और राहत दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला। चार जवानों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल जवान को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू मृतकों में झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत रानीदेवा गांव निवासी मुकेश कुमार भी शामिल हैं। जैसे ही गांव में उनके निधन की सूचना पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, मुकेश मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव के थे। उनके असमय निधन से गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े ट्रक से अचानक टकराव हादसे का कारण बना। इस हृदयविदारक घटना से सुरक्षाबलों के साथ-साथ पलामू जिले में भी गहरा शोक व्याप्त है।

उधमपुर मुठभेड़: सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को किया समाप्त, इलाके में कड़ी सुरक्षा

 उधमपुर   जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बंसंतगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ J&K पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जोफर रामनगर क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) शुरू किया था। तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की भी सूचना है।  जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जोफर इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो सक्रिय कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की ज्‍वाइंट टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका पिछले करीब एक महीने से उनके रडार पर था और यहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार उनकी निगाह बनी हुई थी. यह 15 दिसंबर के बाद उधमपुर में दूसरी मुठभेड़ थी, जब सौन गांव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे। जनवरी में कठुआ जिले में तीन और किश्तवाड़ के चतरू वन क्षेत्र में चार मुठभेड़ें हुईं जिनके परिणामस्वरूप कठुआ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान को ढेर किया गया और किश्तवाड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया। ये मुठभेड़ जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे गहन अभियानों के बीच हुईं। उस्मान उसी गिरोह का हिस्सा था जो उधमपुर जिले में फंसा हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से उस क्षेत्र में सक्रिय था। 'ऑपरेशन केया' के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया. मंगलवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली, जिसके बाद एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में पहुंचे, आतंकियों ने घने जंगलों में छिपकर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मुठभेड़ में ढेर  सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया और इलाके में एडिशनल फोर्स डिप्लॉइड की गई.  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन की निगरानी की. रात तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने में आखिरकार कामयाबी हासिल की.  सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन केया' नाम दिया, जो खुफिया सूचना पर आधारित था. इलाके में ऑपरेशन के बाद भी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटा जा सके.

पहला स्वदेशी ऑटोनॉमस रोबोट ‘डैगर’ जयपुर में बना, दिल्ली में परेड में दिखेंगे मेड इन इंडिया के 3 रोबोट

 जयपुर  भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के खिलाफ हुए सफल ऑपरेशन में मानवरहित रोबोट ‘जीना’ ने मुख्य भूमिका निभाई। करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगलों के बीच छिपे भारी हथियारों से लैस तीन आतंकियों का पता लगाने और उन्हें ढेर करने में इस एआई-लेस रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से बिना किसी मानवीय क्षति के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। स्वदेशी ‘डैगर’ भारतीय सेना की 50 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल किया गया ‘डैगर’ देश का पहला पूरी तरह से स्वदेशी और नेक्स्ट-जेन ऑटोनॉमस रोबोट है। यह रोबोट न केवल युद्ध क्षेत्र में रीयल-टाइम निगरानी करता है, बल्कि भीषण गोलीबारी के बीच घायलों को सुरक्षित स्थान तक निकालने में भी सक्षम है। ‘डैगर’ को राइफल, लाइट मशीन गन (LMG) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस किया जा सकता है। यह 450 किलो तक वजन उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों पर 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव इन अत्याधुनिक रोबोट्स को जयपुर की कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स द्वारा ‘सीतापुरा’ क्षेत्र में डिजाइन और तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा और डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा के अनुसार, डैगर को पूरी तरह से भारत में विकसित करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है। रक्षा रोबोटिक्स के अलावा, कंपनी ने ‘कृष्णा’ नामक रोबोट भी बनाया है जो खतरनाक आग बुझाने और केमिकल प्लांट्स जैसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने में सक्षम है। राजपथ पर दिखेगा पराक्रम आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देश की राजधानी दिल्ली में इन स्वदेशी रोबोट्स का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सेना की तकनीकी निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किए गए ये रोबोट अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के लिए ‘कवच’ का काम करेंगे। इनकी मदद से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए मिलिट्री ऑपरेशन करना संभव होगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इन खूबियों से लैस हैं ये व्हीकल यूजीवी डैगर : नाइट विजन के साथ अत्याधुनिक फीचर इसे जमीन पर सहायता के लिए ह्यूमन कंट्रोल से लैस किया गया है। मल्टी यूजीवी कॉर्डिनेट मूवमेंट के लिए कॉन्वॉय फॉलोइंग मोड का विकल्प भी है। मजबूत मिलिट्री-ग्रेड ऑल-टेरेन मोबिलिटी यूजीवी डैगर दूसरे रोबोट्स की तुलना में अधिक मजबूत है। इसमें नाइट विजन के साथ रीयल टाइम आईएसआर जैसे अत्याधुनिक फीचर भी हैं। डैगर युद्ध क्षेत्र में घायलों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की खूबी रखता है। यह आईएसआर मिशन के लिए टेथर्ड ड्रोन को सपोर्ट करता है। इस अत्याधुनिक रोबोट को आरसीडब्ल्यूएस के अनुकूल किया गया है। इससे यह राइफल, लाइट मशीन गन (एलएमजी), मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर (एजीएल) के साथ काम करने में भी सक्षम है। इसकी खासियत से सैनिकों को उबड़-खाबड़ रास्तों व खतरे वाले स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होगी और जान का खतरा नहीं होगा। जीना : ऊंचाई और मुश्किल इलाकों के लिए बनाया यह एक मिनी वेपनाइज्ड मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। इसे विशेष तौर पर ऊंचाई और मुश्किल इलाकों में टेक्निकल निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किया है। यह दिन के साथ रात में भी कैमरा पेलोड और रिमोट वेपन स्टेशन इंटीग्रेशन को सपोर्ट करता है। इससे सुरक्षित दूरी से बिना किसी खतरे के मिलिट्री ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन रक्षा मिशन के लिए तेज डिप्लॉयमेंट, उच्च स्थिरता और मजबूत मोबिलिटी सुनिश्चित करता है। अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ जीना रोबोट अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानव रहित रोबोट 'जीना' का इस्तेमाल किया गया था। वहां करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल में आतंकवादियों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल किया था। इस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस तीनों आतंकवादी मारे गए थे। कृष्णा : आग लगने की जगह पानी-फोम फेंककर बुझाने में सक्षम यह एडवांस्ड एआई लैस फायर फाइटिंग यूजीवी है। इसे औद्योगिक और तेल व गैस, केमिकल प्लांट, आयुध और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे उच्च जोखिम वाले आग वाले वातावरण के लिए बनाया गया है। यह ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसर से रियल-टाइम निगरानी के साथ रिमोट फायर सप्रेशन को सक्षम बनाता है। आपातकालीन टीमों के लिए डिजाइन किया गया कृष्णा रोबोट खतरनाक स्थितियों में इंसान की जान के जोखिम को कम करते हुए अत्यधिक प्रेशर से पानी/फोम फेंकने में सक्षम है। अत्यधिक गर्मी या धुएं वाला वातावरण भी इसको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स की डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा ने बताया- यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम है। इसे 30 किलोमीटर की रेंज में ऑटोनॉमस नेविगेशन से ऑपरेट किया जा सकता है। गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक्स को युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन करने की काबिलियत रखता है। भारत में डिजाइन, डेवलप हैं ये रोबोट क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा ने कहा- हमें गर्व है कि हमने यूजीवी डैगर को पूरी तरह से भारत में डिजाइन, डवलप और निर्मित किया है। इससे यह सही मायने में पूरी तरह से स्वदेशी रोबोट है। टीम ने 'मेक इन इंडिया' अभियान में योगदान देने की कोशिश की है। यह कदम भारतीय सेना के रक्षा रोबोटिक्स में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माइलस्टोन है। उल्लेखनीय है कि क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स भारत की रक्षा और अग्निशमन रोबोटिक्स इनोवेटर कंपनी है। इसके द्वारा राइजिंग राजस्थान में किए एमओयू के तहत देश की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में स्थापित की जा रही है।