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लखपति दीदी भानुकला बैगा की सफलता को मंत्री ने सराहा, योजनाओं से बदली ग्रामीणों की जिंदगी

सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल पीएम जनमन आवास के हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात,  लखपति दीदी भानुकला बैगा की सफलता को सराहा जनकल्याणकारी योजनाओं से बदली जिंदगी, सेवा संकल्प अभियान में सामने आईं सफलता की कहानियां रायपुर,   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की समर्पित जनसेवा के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर हितग्राहियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली पहुंचकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित परिवारों से मुलाकात की और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली। मंत्री अग्रवाल ने पीएम जनमन आवास योजना के हितग्राही कार्तिक राम बैगा एवं धीरपाल सिंह बैगा के नवनिर्मित आवासों का अवलोकन किया। उन्होंने दोनों परिवारों से चर्चा कर आवास मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जाना। हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। सेवा संकल्प अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल ने धीरपाल सिंह बैगा की पत्नी श्रीमती भानुकला बैगा की सफलता की कहानी भी जानी। श्रीमती भानुकला बैगा ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं और बकरी पालन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। स्वसहायता समूह से जुड़कर निरंतर मेहनत और आजीविका गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से उन्होंने लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल की है। मंत्री अग्रवाल ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रीमती भानुकला बैगा को आगे भी अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया। आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही से जाना योजना का लाभ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद की कड़ी में मंत्री राजेश अग्रवाल ने आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही नेमचंद गुर्जर से भी मुलाकात की। उन्होंने गुर्जर एवं उनके परिवार से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और आयुष्मान भारत योजना से मिले लाभ के बारे में जाना। नेमचंद गुर्जर ने बताया कि उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का लाभ लिया है। उन्होंने रेबीज का टीकाकरण भी कराया है। मंत्री अग्रवाल ने योजना से मिले लाभ की जानकारी लेते हुए परिवार के स्वास्थ्य का हालचाल जाना। ग्रामीणों की आत्मीयता से अभिभूत हुए मंत्री अग्रवाल मुलाकात के दौरान गुर्जर परिवार ने मंत्री राजेश अग्रवाल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें गरमा-गरम स्वादिष्ट भुट्टा खिलाया। ग्रामीण परिवार के इस सहज और आत्मीय आतिथ्य के लिए मंत्री अग्रवाल ने परिवार का धन्यवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों और मंत्री के बीच सहज संवाद का वातावरण बना रहा। मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामीणों से सेवा संकल्प अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने ग्रामीणों से ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर अभियान से जुड़ने और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लाभार्थी अपने अनुभव साझा कर दूसरे लोगों को भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सेवा संकल्प अभियान इसी जनभागीदारी और सेवा भावना को व्यापक बनाने का माध्यम है। इस अवसर पर विधायक प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुसमीरा पैकरा, कलेक्टर विजय दयाराम के., जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इंदौर लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में लायन तिलोकचंद बरडिया को चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति 5 सितम्बर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई। मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ द्वारा लायन तिलोकचंद बरडिया को यह जिम्मेदारी प्रदान करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लायन बरडिया अपनी लगन, निष्ठा, नेतृत्व क्षमता एवं अनुभव के माध्यम से इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे। इस अवसर पर लायन तिलोकचंद बरडिया ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ एवं मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि Leo एवं युवा नेतृत्व को सशक्त बनाना, युवाओं को Lions की सेवा गतिविधियों से जोड़ना तथा Lions और Leo सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। ‘LEO-Lion Liaison’ की भूमिका के अंतर्गत Lions और Leo सदस्यों के बीच संवाद एवं समन्वय को मजबूत करने, युवाओं को नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने, नेतृत्व विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा Leo से Lion बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। Lions Clubs International के अनुसार यह एक वर्षीय liaison भूमिका युवा नेतृत्व को Lions संगठन के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने और Leo कार्यक्रम को मजबूत करने में सहयोग करती है। लायनतिलोकचंद बरडिया लंबे समय से Lions गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा कार्यों से जुड़े रहे हैं। नई जिम्मेदारी के साथ उनसे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में युवा नेतृत्व को नई दिशा देने और Lions तथा Leo समुदाय के बीच मजबूत सहभागिता विकसित करने की अपेक्षा है। लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मिली यह जिम्मेदारी लायन तिलोकचंद बरडिया के सामाजिक एवं संगठनात्मक दायित्वों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। लायन राहुल अग्रवाल  सेकटरी  लायन क्लब सेंट्रल रायपुर छत्तीसगढ़

2.20 करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल का सरेंडर, झारखंड पुलिस करेगी पूछताछ

रांची झारखंड से माओवादियों का सफाया हो चुका है, जो बचे-खुचे हैं वे दूसरे राज्यों में भाग रहे हैं। इन्हीं भागे हुए माओवादियों में झारखंड का इकलौता एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज उर्फ दीपक उर्फ राकेश ने गुरुवार को कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उसके विरुद्ध ओडिशा सरकार ने भी 1.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। यानी कुल मिलाकर उसपर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला था। उसके विरुद्ध विभिन्न थानों में कुल 55 कांडों की जानकारी सामने आई है। वह माओवादियों के लिए कुख्यात क्षेत्र सारंडा में सर्वाधिक सक्रिय था। राज्य में केंद्रीय बलों व झारखंड पुलिस के चल रहे माओवादी विरोधी अभियान की बदौलत माओवादी अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी राज्यों में भागे हैं। झारखंड लगभग पूरी तरह माओवादियों से खाली हो चुका है। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के ही बांकुड़ा जिले में असीम मंडल दस्ते के तीन कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इन माओवादियों में 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य राम प्रसाद मार्डी, उसकी पत्नी जोनल कमांडर सह दस लाख की इनामी मीता उर्फ नयनतारा व एक अन्य सदस्य गौरी शामिल थी। अब असीम मंडल के भी पुलिस के सामने आने के बाद झारखंड पुलिस के अधिकारियों की एक टीम कोलकाता जाएगी, जहां असीम मंडल से पूछताछ करेगी। उससे उसके अन्य बचे हुए साथियों, हथियारों आदि की जानकारी जुटाई जाएगी। जरायकेला व तुंबाहाका में असीम के दस्ते ने सुरक्षा बलों को पहुंचाया था नुकसान मिली जानकारी के अनुसार एक करोड़ के इनामी कुख्यात असीम मंडल के दस्ते ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के तुंबाहाका व जरायकेला में सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाया था। एक मार्च 2026 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र के मारांगपोंगा में उसके दस्ते से मुठभेड़ में 209 कोबरा बटालियन के सहायक समादेष्टा सहितदो सुरक्षा बल जख्मी हो गए थे। इसी तरह 12 अप्रैल 2025 को जरायकेला थाना क्षेत्र राधापोरा में झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हो गया था। चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका में 11 जनवरी 2023 को 209 कोबरा बटालियन के 9 सुरक्षा बल जख्मी हो गए थे। यहां मुठभेड़ व आइईडी विस्फोट हुआ था। असीम मंडल दस्ते के हमले में 31 मार्च 2020 को चाईबासा के कराईकेला थाना क्षेत्र के जोन्वा में एक जवान शहीद हो गया था। एक जुलाई 2018 में पूर्वी सिंहभूम के एमजीएम थाना क्षेत्र के झाटी पहाड़ी पर इसके दस्ते के हमले में एक जवान शहीद हो गया था।  

सरकारी कार्यालयों में 2 अक्टूबर से चलेगा विशेष अभियान 6.0, पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ होंगे निस्तारित

अंबाला  सरकारी कार्यालयों में सफाई अभियान अब सिर्फ झाड़ू-पोंछे और चमकते कमरों तक सीमित नहीं रहेगा। धूल में दबी फाइलें, वर्षों से लंबित मामले, बेकार रिकॉर्ड, अनुपयोगी सामान, कबाड़ और ई-कचरा सबकी छंटाई होगी। कबाड़ को निस्तारित कर सरकार 4967.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुकी है। अब इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार विभागों में विशेष अभियान 6.0 शुरू करेगी। 15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण के बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य चरण चलेगा। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की गाइडलाइन के अनुसार अभियान का फोकस सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को स्थायी व्यवस्था बनाने के साथ लंबित मामलों के निपटारे, पुराने रिकार्ड की छंटाई, ई-कचरा के विज्ञानी निस्तारण और खाली हुई जगह के बेहतर प्रयोग पर रहेगा। हर मंत्रालय और विभाग में कम से कम संयुक्त सचिव स्तर के नोडल अधिकारी को कमान सौंपी जाएगी। रुकी फाइलों का भी हिसाब होगा। प्रतिदिन होगी निगरानी विशेष अभियान 6.0 में लंबित मामलों को अलग से चिह्नित कर उनके निस्तारण की रोजाना निगरानी होगी। इनमें सांसदों के संदर्भ, राज्य सरकारों के मामले, प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े संदर्भ, अंतर-मंत्रालयीय मामले, तीन महीने से अधिक पुराने संसदीय आश्वासन तथा जन शिकायतें और अपीलें शामिल होंगी। शेष अभियानों के दौरान पुराने कबाड़ के निस्तारण से सरकार को बड़ा राजस्व मिला है। 2021 से जून 2026 तक कबाड़ की बिक्री से 4967.78 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि में 178.63 लाख अनुपयोगी फाइलों की छंटाई/ई-फाइलों को बंद किया गया, जबकि देश-विदेश स्थित भारतीय मिशनों समेत 24.16 लाख स्थानों को स्वच्छता अभियान के दायरे में लाया गया। कबाड़ हटाने के साथ उसकी बिक्री से मिली राशि का ब्योरा दर्ज करना होगा। सफाई के बाद कितनी जगह खाली हुई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसका रिकॉर्ड भी पोर्टल पर दर्ज होगा। 15 दिन तैयारी, 30 दिन कार्रवाई 15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण में मंत्रालयों, विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को अपने-अपने लक्ष्य तय करने होंगे। इसमें सफाई स्थलों, लंबित मामलों, पुरानी फाइलों, कबाड़ और ई-कचरा की पहचान की जाएगी। इसके बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य कार्रवाई चरण चलेगा। नोडल अधिकारी और विभागीय स्तर के अधिकारी रोजाना प्रगति की समीक्षा करेंगे। अभियान की प्रगति केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और समेकित रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी। अभियान समाप्त होने के बाद 10 नवंबर तक स्व-मूल्यांकन भी किया जाना है। भवनों का भी बदलेगा स्वरूप सरकारी भवनों के बाहरी हिस्सों और साझा क्षेत्रों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी को उनके रखरखाव वाले भवनों के बाहरी हिस्सों में सफाई और सुधार कार्य कराने के निर्देश हैं। बाहरी दीवारों, कॉमन एरिया और भवनों के स्वरूप को बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। अभियान के बाद स्वतंत्र जांच विशेष अभियान 6.0 खत्म होने के बाद इसके जमीनी असर का आकलन भी किया जाएगा। 16 से 30 नवंबर के बीच स्वतंत्र थर्ड पार्टी टीम द्वारा अभियान के परिणामों का मूल्यांकन किए जाने का प्रविधान है। साथ ही नियमित समीक्षा होगी।  

राज्यपाल रमेन डेका से मंत्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल  रमेन डेका से मंत्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में उच्च शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री  टंकराम वर्मा ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

दिल्ली घुमाने का झांसा देकर पटना लाया, चलती ट्रेन से किशोरी को फेंककर आरोपी फरार

पटना फुलवारीशरीफ रेलवे स्टेशन के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग प्रेमिका को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। किशोरी भोजपुर जिले की रहने वाली है और पिछले कुछ महीनों से आरोपी के साथ हाजीपुर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। प्रेमी उसे दिल्ली और हिल स्टेशन घुमाने के बहाने पटना जंक्शन लाया और लोकल ट्रेन में बैठाया। फुलवारीशरीफ स्टेशन के पास पहुंचते ही उसने किशोरी को दरवाजे पर बुलाकर नीचे धक्का दे दिया। पीड़िता बुरी तरह घायल है और जीआरपी आरोपी की तलाश में जुटी है। लिव-इन रिलेशनशिप, फिर घुमाने का झांसा पीड़िता के अनुसार, वो भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की निवासी है और हाजीपुर में प्रेमी के साथ रह रही थी। आरोपी युवक बुधवार को उसे दिल्ली जाने और वहां से किसी हिल स्टेशन पर घूमने की बात कहकर पटना जंक्शन लाया था। दरअसल, जीआरपी पटना के प्रभारी एसएचओ मनोज कुमार के मुताबिक भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने अपने बयान में कहा है कि वह पिछले कई महीनों से हाजीपुर में अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। बुधवार को उसका 19 वर्षीय प्रेमी दिल्ली जाने और वहां से किसी हिल स्टेशन पर घूमने की बात कहकर हाजीपुर से पटना जंक्शन लेकर आया था।     आरोपी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन जाने के बहाने शाम 6 बजे की लोकल ट्रेन में बैठाया।     उसने किशोरी से कहा कि वे आगे चलकर दिल्ली की ट्रेन में सवार होंगे।     ट्रेन जैसे ही फुलवारीशरीफ स्टेशन के पास पहुंची, आरोपी उसे ट्रेन के गेट पर ले गया।     आरोपी ने अचानक किशोरी को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया और फरार हो गया। भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने अपने बयान में कहा है कि वह पिछले कई महीनों से हाजीपुर में अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। पीछा छुड़ाने की नीयत से रची साजिश गंभीर रूप से घायल किशोरी के चेहरे और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़िता ने आशंका जताई है कि युवक उससे पीछा छुड़ाना चाहता था, इसलिए उसने यह जानलेवा कदम उठाया। दरअसल, कथित प्रेमी ने चलती ट्रेन से फेंक दिया। हादसे में किशोरी बुरी तरह से घायल हो गई है। उसके चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। जीआरपी पटना ने किशोरी के बयान पर मामला दर्ज किया है। लड़की के परिजनों से संपर्क की कोशिश जीआरपी पटना के प्रभारी एसएचओ मनोज कुमार ने बताया कि किशोरी के बयान पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता के परिजनों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

राधा या रुक्मिणी, कौन हैं कृष्ण के सबसे करीब? जानें दोनों से जुड़े पौराणिक रहस्य

 भगवान श्रीकृष्ण का नाम आते ही सबसे पहले राधा रानी का स्मरण होता है. राधा को जहां कृष्ण की प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं रुक्मिणी को उनकी अर्धांगिनी के रूप में पूजा जाता है. भगवान कृष्ण इन दोनों से अलग-अलग रूपों में प्रेम करते थे. लेकिन क्या आपको पता है कि राधा और रुक्मिणी से जुड़े कई ऐसे पौराणिक रहस्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? क्या राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के ही अलग-अलग स्वरूप माना जाता है? और क्या राधा-कृष्ण का विवाह वास्तव में हुआ था? आइए, आज जानते हैं राधा, रुक्मिणी और भगवान कृष्ण से जुड़ी इन पौराणिक कथाओं को. रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को बनाया था अपना पति पौराणिक कथा के अनुसार, रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं. वह भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और व्यक्तित्व से प्रभावित थीं और मन ही मन उन्हें अपना पति मान चुकी थीं. लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे. जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला, तो उन्होंने भगवान कृष्ण को संदेश भेजकर अपनी इच्छा बताई. कथा के अनुसार, विवाह से पहले ही भगवान कृष्ण रुक्मिणी को लेकर चले गए और बाद में दोनों का विवाह हुआ. इसी वजह से रुक्मिणी को भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नियों में सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है. राधा और रुक्मिणी को लक्ष्मी का स्वरूप क्यों माना जाता है? वैष्णव परंपरा में भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. इसी परंपरा में रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. राधा रानी के स्वरूप को लेकर अलग-अलग वैष्णव परंपराओं में अलग व्याख्याएं मिलती हैं. गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधा को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति यानी उनकी दिव्य आनंद-शक्ति माना जाता है. इसी वजह से राधा रानी और श्रीकृष्ण का संबंध केवल सांसारिक प्रेम के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर और उनकी शक्ति के आध्यात्मिक संबंध के रूप में भी समझाया जाता है. क्या राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था? राधा-कृष्ण के विवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्ग संहिता से जुड़ी परंपराओं में राधा-कृष्ण विवाह का वर्णन मिलता है. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ब्रज के भांडीर वन में ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था. इस मान्यता से जुड़ा भांडीर वन आज भी ब्रज क्षेत्र में धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थान माना जाता है. इसलिए यह कहना उचित होगा कि राधा-कृष्ण के विवाह की कथा कुछ धार्मिक परंपराओं में स्वीकार की गई है, जबकि सभी प्रमुख ग्रंथों में इसका एक जैसा वर्णन नहीं मिलता. सीता और रुक्मिणी के संबंध की कथा राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ने वाली मान्यताओं के साथ रामायण की कुछ कथाएं भी जोड़ी जाती हैं. एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ के दौरान माता सीता की अनुपस्थिति में उनके स्थान पर उनकी स्वर्ण प्रतिमा स्थापित की गई थी. यह कथा भगवान राम की पत्नी के रूप में सीता के महत्व को दर्शाती है. बाद की पौराणिक परंपराओं में सीता, रुक्मिणी और लक्ष्मी के स्वरूपों को एक-दूसरे से जोड़कर भी देखा गया है. हालांकि, इन कथाओं के स्रोत और विवरण अलग-अलग ग्रंथों में अलग मिलते हैं. राधा-कृष्ण का प्रेम संबंध और रुक्मिणी का वैवाहिक संबंध राधा रानी और रुक्मिणी को समझने के लिए उनके संबंधों को एक ही दृष्टि से देखना जरूरी नहीं है. राधा-कृष्ण का संबंध भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी-कृष्ण का संबंध पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते के रूप में सामने आता है. इसलिए कृष्ण के जीवन में राधा और रुक्मिणी की भूमिकाएं अलग होते हुए भी दोनों का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है. कृष्ण और राधा के वियोग की कथाएं राधा और कृष्ण के वियोग को लेकर भी कई पौराणिक और भक्तिपरक कथाएं प्रचलित हैं. श्री कृष्ण के वृंदावन छोड़कर मथुरा और फिर द्वारका चले जाने के बाद दोनों के अलग होने की कथा भक्ति साहित्य में बेहद महत्वपूर्ण बन गई. कुछ परंपराओं में श्रीकृष्ण के वियोग को अलग-अलग श्रापों और पौराणिक घटनाओं से जोड़कर समझाया गया है. हालांकि, इन कथाओं के विवरण सभी ग्रंथों में समान नहीं हैं. राधा-कृष्ण का यह वियोग भक्त और भगवान के बीच उस प्रेम का प्रतीक माना जाता है, जिसमें मिलने से ज्यादा भगवान की स्मृति और भक्ति को महत्व दिया जाता है. रुक्मिणी और श्री कृष्ण के अलग होने की कथा रुक्मिणी और श्रीकृष्ण से जुड़ी एक अन्य कथा ऋषि दुर्वासा से संबंधित है. विभिन्न पुराणिक परंपराओं में इस प्रसंग के अलग-अलग रूप मिलते हैं. इस कथा में ऋषि दुर्वासा के आतिथ्य और उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी से जुड़ी घटनाओं का वर्णन मिलता है. कुछ लोककथाओं में इसी प्रसंग को दोनों के लंबे समय तक अलग रहने से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, इस कथा के अलग-अलग संस्करणों में घटनाओं और अवधि को लेकर अंतर मिलता है, इसलिए इसे एक निश्चित ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं, बल्कि पौराणिक परंपरा के रूप में देखना चाहिए. राधा रानी और रुक्मिणी, दोनों का अपना अलग महत्व भगवान कृष्ण के साथ राधा और रुक्मिणी के संबंधों को भारतीय धार्मिक परंपरा में अलग-अलग भावों से समझाया गया है. राधा को प्रेम, भक्ति और कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी को पत्नी, गृहस्थ धर्म और देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ा जाता है. इसलिए राधा और रुक्मिणी की तुलना करने के बजाय दोनों के धार्मिक स्वरूप और उनसे जुड़ी अलग-अलग परंपराओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है. भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं में प्रेम, भक्ति, त्याग और समर्पण के कई रूप दिखाई देते हैं. यही वजह है कि आज भी राधा-कृष्ण और रुक्मिणी-कृष्ण की पूजा करोड़ों भक्त श्रद्धा के साथ करते हैं.

शनि की वक्री चाल से 3 राशियों पर साढ़ेसाती का असर, कुंभ वालों को मिल सकती है राहत

 ज्योतिष में शनि देव को कर्म और न्याय का कारक माना जाता है. शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. यही वजह है कि शनि की चाल में होने वाला बदलाव ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और फिलहाल वक्री अवस्था में हैं. शनि 27 जुलाई 2026 को वक्री हुए थे और 11 दिसंबर 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे. किन राशियों पर चल रही है साढ़ेसाती? शनि के मीन राशि में गोचर के कारण इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभाव में माने जाते हैं. इनमें कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण, मीन राशि पर दूसरा यानी चरम चरण और मेष राशि पर पहला चरण चल रहा है. साढ़ेसाती करीब साढ़े सात साल की अवधि होती है.  यह तब शुरू होती है जब शनि जन्म राशि यानी चंद्र राशि से एक राशि पहले गोचर करते हैं.  इसके बाद शनि चंद्र राशि और फिर उससे अगली राशि में गोचर करते हैं.  इस तरह इसके तीन चरण पूरे होते हैं. कुंभ राशि वालों के लिए राहत के संकेत कुंभ राशि के जातक इस समय साढ़ेसाती के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं.  ऐसे में पहले की तुलना में परिस्थितियों में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है.  करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में स्थिरता लाने के अवसर मिल सकते हैं. हालांकि अंतिम चरण का मतलब यह नहीं है कि सभी परेशानियां अचानक खत्म हो जाएंगी. शनि इस दौरान व्यक्ति को आर्थिक अनुशासन, जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देने की सीख देते हैं. इसलिए खर्चों पर नियंत्रण और सोच-समझकर फैसले लेना फायदेमंद हो सकता है. मीन राशि पर साढ़ेसाती का चरम चरण मीन राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है.  ज्योतिष में इसे साढ़ेसाती का सबसे प्रभावशाली चरण माना जाता है.  इस दौरान काम का दबाव, जिम्मेदारियां और जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव महसूस हो सकते हैं. करियर में मेहनत के बावजूद परिणाम मिलने में समय लग सकता है. आर्थिक मामलों में भी जल्दबाजी से बचने और बजट बनाकर चलने की सलाह दी जाती है.  हालांकि शनि का प्रभाव केवल परेशानियां देने वाला नहीं माना जाता. यह समय व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और अपनी गलतियों से सीखने का अवसर भी देता है. मेष राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का पहला चरण मेष राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. इस दौरान खर्च, कामकाज में बदलाव, मानसिक दबाव या भविष्य को लेकर असमंजस जैसी स्थितियां बन सकती हैं. इस समय अनावश्यक खर्चों से बचना, काम को व्यवस्थित तरीके से करना और किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी न करना बेहतर माना जाता है.  शनि की इस अवधि में धैर्य और निरंतर मेहनत को महत्वपूर्ण माना जाता है. 11 दिसंबर तक क्यों महत्वपूर्ण है शनि का वक्री रहना? शनि 27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 तक मीन राशि में वक्री रहेंगे.  ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल के दौरान पुराने काम, अधूरे मामले और पहले लिए गए फैसलों की दोबारा समीक्षा की स्थिति बन सकती है. करियर, धन और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में देरी महसूस हो सकती है. ऐसे में इस अवधि को जल्दबाजी में नए फैसले लेने के बजाय अपनी योजनाओं को दोबारा जांचने और कमजोर पक्षों को सुधारने के समय के तौर पर देखा जा सकता है. किसे मिल सकती है राहत? कुंभ राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है, इसलिए इन्हें धीरे-धीरे राहत और स्थिरता के संकेत मिल सकते हैं. वहीं मीन राशि वालों के लिए अभी साढ़ेसाती का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक माना जा रहा है.  मेष राशि वालों के लिए यह शुरुआत का चरण है, इसलिए उन्हें आने वाले समय में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत होगी.

जयपुर में कांग्रेस का क्लीन स्वीप, कोटा में BJP ने जीते दो वार्ड; जोधपुर में हेमाराम विजयी

जयपुर  राजस्थान में निकाय चुनाव के तहत पुनर्मतदान वाले वार्डों के परिणाम सामने आ गए हैं। जयपुर नगर निगम के शेष चार वार्डों के परिणाम भी घोषित हो गए हैं। चारों वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। जयपुर नगर निगम के वार्ड 9 से कांग्रेस की कैलाशी देवी, वार्ड 18 से कांग्रेस की बंदिता शर्मा, वार्ड 25 से कांग्रेस की रेखा देवी और वार्ड 34 से कांग्रेस के सुरेश विजयी रहे। कोटा में 3 वार्डों के नतीजे कोटा नगर निगम में पुनर्मतदान वाले तीन वार्डों के परिणाम भी जारी हो गए हैं। वार्ड 11 में कांग्रेस की कमलेश कुमारी, जबकि वार्ड 44 में भाजपा के प्रेम सिंह और वार्ड 87 में भाजपा की पुष्पा चौधरी ने जीत दर्ज की। कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। अब भाजपा के 57 पार्षद, कांग्रेस के 39 पार्षद हैं, जबकि 4 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। भाजपा के 57 सीटों पर पहुंचने के बाद कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है। अब महापौर के नाम को लेकर शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर मंथन चल रहा है। वार्ड 4 सुकेत नगर पालिका में कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद रफीक आर्मी 117 वोट से विजयी हुए। जोधपुर वार्ड 50 में भाजपा की जीत जोधपुर नगर निगम के वार्ड 50 का मतगणना परिणाम भी घोषित कर दिया गया है। यहां भाजपा के हेमाराम चौधरी ने कांग्रेस के युवराज सिंह को 83 मतों से हराया। हेमाराम चौधरी को कुल 1,725 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के युवराज सिंह को 1,642 वोट मिले। युवराज सिंह के वोटों में 1,641 ईवीएम और 1 डाक मतपत्र का वोट शामिल है। अन्य प्रत्याशियों में निर्दलीय रिंकू मेवाड़ा को 540 वोट, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के दीपक जांगिड़ को 155 वोट और निर्दलीय देशराज सिंह को 113 वोट मिले। वहीं 82 मतदाताओं ने NOTA का विकल्प चुना। वार्ड 50 के बूथ संख्या 338 की ईवीएम खराब होने के कारण पहले मतगणना नहीं हो पाई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने बुधवार को यहां पुनर्मतदान कराया था। पुनर्मतदान के बाद हुई मतगणना में भाजपा के हेमाराम चौधरी विजयी रहे। जोधपुर नगर निगम में भाजपा के 45 पार्षद, कांग्रेस के 44 पार्षद, RLP का एक और 10 निर्दलीय पार्षद हो गए हैं।

‘द वन’ का रहस्यमयी मंदिर असल में बिहार का वन देवी मंदिर, 400 साल पुरानी हैं मान्यताएं

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का ट्रेलर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच एक्साइटमेंट बढ़ गई है. घने जंगल, रहस्यमयी शक्तियां और एक ऐसा मंदिर, जहां सूर्यास्त के बाद जाने की मनाही है. ट्रेलर के इन दृश्यों ने फिल्म की कहानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए. अब मेकर्स ने साफ किया है कि फिल्म में दिखाया गया मंदिर बिहार के पटना जिले के बिहटा के पास स्थित प्रसिद्ध वन देवी मंदिर से प्रेरित है. बिहटा के आनंदपुर इलाके में स्थित मां वन देवी मंदिर को करीब 350 से 400 साल पुराना माना जाता है. ये मंदिर घने जंगलों और ग्रामीण परिवेश के बीच स्थित है. स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर कई लोककथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ लोगों का मानना है कि पुराने समय में यह पूरा क्षेत्र घने वन से घिरा हुआ था, इसलिए यहां विराजमान देवी को ‘वन देवी’ कहा जाने लगा. एक लोककथा के अनुसार, किसी साधक को सपने में देवी के दर्शन हुए थे. देवी के निर्देश पर जब उस स्थान की खुदाई की गई, तो वहां से देवी की प्रतिमा या पवित्र निशान मिलने की बात कही जाती है. इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर मंदिर का निर्माण कराया. हालांकि इन कथाओं का कोई आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन स्थानीय आस्था में इनका खास महत्व है. 'वन देवी' मंदिर से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता सूर्यास्त के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश को लेकर है. कहा जाता है कि शाम होते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पुजारी भी वहां से चले जाते हैं. रात के समय मंदिर और आसपास के जंगल में किसी को रुकने की अनुमति नहीं होती. स्थानीय लोग मानते हैं कि सूर्यास्त के बाद वन देवी जंगल में विचरण करती हैं. यही लोकविश्वास ‘द वन’ की कहानी का सबसे अहम आधार बना है. फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार इस प्रतिबंधित इलाके में प्रवेश करता दिखाई देता है. इसके बाद शुरू होता है रहस्य, डर और अलौकिक शक्तियों से सामना. हालांकि फिल्म लोककथा से प्रेरित है, लेकिन इसकी कहानी को सिनेमाई रूप दिया गया है. मेकर्स ने ग्रामीणों से की बातचीत फिल्म के निर्माता अरुणाभ कुमार ने बताया कि उन्हें इस कहानी का विचार पटना के पास स्थित वन देवी मंदिर जाने के बाद आया. उन्होंने स्थानीय लोगों, पुजारियों और ग्रामीणों से मंदिर की परंपराओं और उससे जुड़ी पुरानी कहानियों के बारे में बातचीत की. निर्देशक दीपक मिश्रा ने इस लोकविश्वास को एक बड़े सिनेमाई अनुभव में बदलने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है. ये भी कहा जा रहा है कि द वन का ट्रेलर रिलीज होने के बाद वन देवी मंदिर को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अब पहले से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए जाने लगे हैं. इस तरह ‘द वन’ केवल एक हॉरर या फैंटेसी फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय लोककथाओं, आस्था और जंगल से जुड़े रहस्यों को बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश है. फिल्म 25 सितंबर को रिलीज होने वाली है. बता दें कि फिल्म में ना सिर्फ  वन देवी मंदिर की कहानी देखने को मिलेगी, बल्कि पर्दे पर पहली बार महापर्व छठ को भी दिखाया जाएगा.