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भिलाई के गीतांश बामनिया की बड़ी कामयाबी, Rentomojo ला रही ₹1,266 करोड़ का IPO

भिलाई   शहर के कारोबारी गीतांश बामनिया ने अपनी कंपनी रेंटोमोजो का 1,266 करोड़ का आइपीओ बाजार में उतारकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेंटोमोजो की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 9 सितंबर को खुली और 11 सितंबर को बंद हुई। कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है। बता दें कि रेंटोमोजो एक प्रमुख भारतीय आनलाइन रेंटल प्लेटफार्म है। यह कंपनी ग्राहकों को घर और आफिस के उपयोग के लिए फर्नीचर, घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन) और इलेक्ट्रानिक्स सामान मासिक किराए या सब्सक्रिप्शन माडल पर उपलब्ध कराती है। भिलाई में पले-बढ़े, दो स्टार्टअप रहे असफल     गीतांश भिलाई में ही पले-बढ़े हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-10 इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गीतांश ने आइआइटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।  इसके बाद उन्होंने केपीएमजी और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। फिर उन्होंने खुद उद्यमी बनने का निर्णय लिया, दो स्टार्टअप भी शुरू किए, जो असफल रहे।     असफलता से सीखते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में ‘रेंटोमोजो’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई। असफलताओं से मिली सीख बनी कारोबार की ताकत     रेंटोमोजो के सफर में गीतांश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।  कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने माडल में बदलाव किए और बाजार की जरूरत के अनुरूप कंपनी को आगे बढ़ाया। अब 1,266 करोड़ रुपये के आइपीओ के जरिए कंपनी ने पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए पेश किए हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री बाजार में की जा सकेगी। पिता से कारोबार की प्रेरणा, मां चिकित्सा क्षेत्र में रहीं अग्रणी गीतांश अपने कारोबारी दृष्टिकोण के लिए परिवार से मिली प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके पिता जगदीश बामनिया भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद करीब 10 वर्षों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के व्यवसाय से जुड़े रहे। उनकी मां डॉ. मीरा बामनिया बीएसपी के जेएलएन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर सेक्टर-नौ में बाल एवं शिशु रोग विभाग की प्रमुख रहीं और वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुईं।

2017 कांस्टेबल भर्ती मामला: 400 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, SC ने SLP की खारिज

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती के सैकड़ों प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में 2259 कांस्टेबल पदों की भर्ती से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। इससे 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत कांस्टेबल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद बढ़ गई है। मामला प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरे जाने के अधिकार को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। हाई कोर्ट ने सुनाया था अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला     मामला पारस राम ध्रुव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम, 2007 के नियम 13(2) के तहत वैध प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरा जा सकता है। हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन अथवा अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों को केवल इस आधार पर प्रतीक्षा सूची से बाहर नहीं किया जा सकता कि वे प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों के पद नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की एसएलपी     हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को 47 सफल अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके साथ ही हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की संभावना मजबूत हो गई है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली उपस्थित रहीं। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रुचि नागर और एओआर देवाशीष तिवारी ने पैरवी की। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल के. नटराज उपस्थित हुए। वर्षों से नियुक्ति का इंतजार     2017 की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में चयन और प्रतीक्षा सूची को लेकर विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। हाई कोर्ट के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।     अब एसएलपी खारिज होने से 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया और रिक्त पदों की संख्या के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।  

कला, विज्ञान और वाणिज्य के गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट अब ऑनलाइन, विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा फायदा

उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट अब डिजिटल माध्यम से घर बैठे पढ़ सकेंगे विद्यार्थी, ई-ज्ञानसेतु पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान होंगे उपलब्ध 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार की जा रही डिजिटल अध्ययन सामग्री भोपाल  मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ई-कंटेंट वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। तैयार किए गए वीडियो विद्यार्थियों को विभाग के e-GyanSetu YouTube Channel पर मिलेंगे। विभाग की इस पहल से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम से विभिन्न विषयों की अध्ययन सामग्री का लाभ ले सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। ई-कंटेंट वीडियो को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स और डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया जा रहा है। वीडियो की विषयगत एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ई-कंटेंट प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किया जा रहा है। Validation Board करेगा ई-कंटेंट का परीक्षण एवं सत्यापन ई-कंटेंट की प्रमाणिकता, विषयवस्तु और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार वीडियो का Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जा रहा है। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद ही सत्यापित ई-कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जा रहा ई-कंटेंट ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी एवं संस्कृत सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुंचाने में सुविधा होगी। अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकेंगे विद्यार्थी e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। विद्यार्थी आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु को दोहरा सकेंगे, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझ सकेंगे और अपनी सीखने की गति के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे। सत्यापन के बाद चरणबद्ध रूप से प्रकाशित होंगे वीडियो ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।  

स्कूल शिक्षा में MP की ऐतिहासिक प्रगति, प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य पर पहुंची

प्राथमिक शिक्षा में स्तर का ड्रॉप आउट दर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिल रही नई दिशा स्कूल शिक्षा में मध्यप्रदेश में हुई ऐतिहासिक प्रगति 23 साल बाद शून्य पर साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है। साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं। ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है। व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया। वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है। बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा। स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान पीएमएवं … Read more

पंजाब चुनाव 2027 में होगी नेताओं के व्यक्तिगत जनाधार की परीक्षा

जालंधर  पंजाब की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पुरानी सियासी विरासत और नए चेहरों के बीच भी दिखाई दे रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव ने पंजाब की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया था, जिसमें दशकों से सत्ता और संगठन पर प्रभाव रखने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक परिवारों के दिग्गज चुनाव हार गए और ऐसे चेहरे विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें चुनाव से कुछ समय पहले तक राज्य की राजनीति में बहुत कम लोग जानते थे।  आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत स्थापित राजनीतिक ताकतों को करारा झटका दिया। कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल महज तीन सीटों तक सिमट गया। 2022 में मिले थे चाैंकाने वाले नतीजे 2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके। प्रकाश सिंह बादल को भी अपेक्षाकृत नए उम्मीदवार से हार मिली। मजीठिया को अमृतसर ईस्ट में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनज्योत कौर ने शिकस्त दी। यानी 2022 में लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं रही, बल्कि मतदाता ने स्थापित राजनीतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को भी चुनौती दी। राजनीति विशेषज्ञ प्रोफेसर कुणाल मेहता के अनुसार, “2022 का जनादेश पंजाब की पारंपरिक राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका था। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल परिवार का नाम और राजनीतिक विरासत अब चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। 2027 में इन राजनीतिक परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई विश्वसनीयता और जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। अब देखना यह है कि पुरानी विरासत खुद को बदलते पंजाब की राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ पाती है या नए चेहरे इस बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाते हैं।” परिवारवाद का स्वरूप बदला पंजाब में परिवारवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। बादल परिवार, जाखड़ परिवार, बेअंत सिंह परिवार और दूसरे राजनीतिक घरानों की अगली पीढ़ियां अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। कुछ पुराने नेता सत्ता से बाहर हैं, कुछ ने राजनीतिक दल बदल लिए हैं और कुछ नए राजनीतिक गठबंधनों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। 2027 में इन सभी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उनकी पारंपरिक पहचान आज भी मतदाता को प्रभावित करती है या पंजाब का वोटर अब उम्मीदवार की व्यक्तिगत कार्यक्षमता, स्थानीय पकड़ और नए राजनीतिक विकल्प को ज्यादा महत्व देता है। 2027 में अलग होंगी परिस्थितियां 2022 के चुनाव ने यह साबित कर दिया था कि पंजाब का मतदाता बड़े नामों को भी हराने का फैसला कर सकता है। लेकिन 2027 में परिस्थितियां अलग होंगी। अब आम आदमी पार्टी के पास पांच साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड होगा और उसे अपने कामकाज तथा वादों का हिसाब जनता को देना होगा। कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, अकाली दल अपनी खोई हुई पंथक और ग्रामीण जमीन वापस लेने के लिए मैदान में होगा और भाजपा पंजाब में अपने स्वतंत्र राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेगी। ऐसे में पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे 2022 की हार को भुलाकर मतदाता के बीच अपनी नई स्वीकार्यता पैदा कर सकें। यही वजह है कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव केवल आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस, अकाली दल बनाम भाजपा का मुकाबला नहीं होगा। इसके भीतर एक और बड़ी लड़ाई चलेगी राजनीतिक विरासत बनाम नए चेहरे, पुराने नाम बनाम नई स्वीकार्यता और परिवारवाद बनाम व्यक्तिगत जनाधार। 2022 में जिन नेताओं को जनता ने सत्ता से बाहर किया था, उनके सामने अब वापसी का मौका है, लेकिन इस बार केवल परिवार का नाम पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे बदलते पंजाब की नई राजनीतिक जरूरतों को समझते हैं और पुराने राजनीतिक ढर्रे से आगे निकल चुके हैं। पंजाब की राजनीति में इसलिए 2027 का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन सा परिवार कितनी सीटें जीतता है, बल्कि यह होगा कि क्या पंजाब का मतदाता 2022 में शुरू हुई राजनीतिक पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या फिर पुराने राजनीतिक घरानों को अपनी खोई हुई जमीन वापस सौंप देता है। 2022 में बड़े-बड़े सियासी किलों की दीवारें गिर गई थीं; 2027 में फैसला होगा कि वे किले दोबारा खड़े होते हैं या पंजाब की राजनीति में नए चेहरों का दौर स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है।   विरासत बचाने की लड़ाई यही वजह है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए केवल सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई भी बनता दिखाई दे रहा है। करीब पांच साल बाद वही नेता और उनके राजनीतिक परिवार फिर अपनी जमीन तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के सामने अकाली दल को दोबारा मजबूत करने के साथ-साथ बादल परिवार की राजनीतिक पकड़ को बचाने की चुनौती है। 2022 की करारी हार के बाद अकाली दल तीन सीटों तक सिमट गया था और अब पार्टी अपने पारंपरिक पंथक तथा ग्रामीण आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2027 से पहले अकाली दल की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि बादल परिवार अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती कांग्रेस के लिए भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी 2022 में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर मैदान में उतरे थे, लेकिन दोनों सीटों से हार गए। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त नहीं हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी को दोबारा उम्मीद दी। अब 2027 में कांग्रेस पुराने चेहरों, नए नेतृत्व और … Read more

Semicon India 2026 का आज होगा आगाज, 600+ प्रदर्शक और 300 ग्लोबल कंपनियां जुटेंगी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  यहां तीन दिवसीय सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे. इसमें वैश्विक चिप निर्माता, नीति निर्माता और निवेशक और प्रौद्योगिकी कंपनियां एक साथ आएंगी, क्योंकि भारत अपने सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन करेगा।  द्वारका के यशोभूमि में 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' थीम के तहत हो रहा यह इवेंट इस बात पर जोर देता है कि भारत अब यह नहीं पूछ रहा है कि वह चिप्स बना सकता है या नहीं, बल्कि अब वह यह पूछ रहा है कि वह अपने आस-पास सब कुछ कितनी तेजी से बना सकता है।  तीन दिनों में 600 से अधिक प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां 15,000 वर्ग मीटर स्थान को भर देगी और 150 से अधिक प्रसिद्ध वक्ता ज्ञान और बुद्धिमत्ता को साझा करेंगे. छह देश मंडप और 12 राज्य मंडप एक स्टार्टअप शोकेस, एक छात्र हैकथॉन, एक श्रमिक विकास मंडप और महिला फोरम के साथ बैठेंगे. इनमें से प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र की एक छोटी झलक जिसे भारत ने पांच साल में बनाया है देखा जा सकता है. एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है।  गौरतलब है कि चिप को डिजाइन करने में सालों और बनाने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन इसका असर हर फोन, हर कार, हर अस्पताल के उपकरण पर लंबे समय तक रहता है. आज हमारे जीवन का हर उपकरण इस बात पर निर्भर करता है कि किसी ने, कहीं न कहीं, उस चिप को पहले बनाया है।  चिप्स अब एक आला उत्पाद नहीं हैं. वे कारों, ड्रोन, हवाई जहाज, एमआरआई मशीनों और उपग्रहों के अंदर होते हैं. फिलहाल, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का मूल्य लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर है और यह तेजी से बढ़ रहा है. सेमीकंडक्टर इस बढ़ते ढांचे के ठीक आधार पर हैं, इसकी नींव बनाते हैं. ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर से लेकर डिफेंस तक हर दूसरा उद्योग इस बात पर निर्भर करता है कि चिप फैब्रिकेशन प्लांट से क्या निकलता है. यही बात सेमीकंडक्टर को एक आधारभूत उद्योग बनाती है. बयान में कहा गया है।  दुनिया ने यह मुश्किल तरीके से सीखा. उदाहरण के लिए कोविड महामारी के दौरान कार फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा. स्टील या लेबर की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि उन्हें चिप्स नहीं मिल पा रहे थे. जिन देशों ने दशकों तक सेमीकंडक्टर को किसी और की समस्या माना था, वे अचानक अपनी कैपेसिटी बनाने के लिए दौड़ पड़े. महामारी ने चिप्स की रेस नहीं लगाई. इसने बस सभी को और तेज दौड़ने पर मजबूर कर दिया,' इसमें कहा गया।  सेमीकंडक्टर में भारत की दिलचस्पी उससे भी पुरानी है जितना ज़्यादातर लोग सोचते हैं. दशकों की चुपचाप कोशिशें, छोटी शुरुआत, और मुश्किल से सीखे गए सबक. लंबे समय से यह इच्छा थी, लेकिन इसके आस-पास का इकोसिस्टम कभी ठीक से नहीं बन पाया. यह एक अलग नजरिए से बदल गया. विदेशी निवेश, टैक्स और कस्टम में सुधारों ने इसके लिए दरवाजे खोल दिए. ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने धीरे-धीरे भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइनें लगानी शुरू कर दी और इसके नतीजों को नकारना मुश्किल है।  सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार 2014-15 में भारत ने लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन किया. 2025-26 तक यह संख्या 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो सात गुना वृद्धि है. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया जो ग्यारह गुना वृद्धि है।  मोबाइल फोन एक और भी तीखी कहानी बताते हैं. उत्पादन 33 गुना बढ़ा 18,000 करोड़ रुपये से 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया. निर्यात 165 गुना बढ़ा, लगभग 1,500 करोड़ रुपये से 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया. 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात किए गए सामानों में स्मार्टफ़ोन भी शामिल नहीं थे।  वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट किया जाने वाला कमोडिटी बन गया. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड ज्वेलरी से भी आगे. भारत अब अपने इस्तेमाल होने वाले 99.2 फीसदी फोन खुद बनाता है, और मोबाइल के नेट इंपोर्टर से नेट एक्सपोर्टर बन गया है. यह पूरा मैन्युफैक्चरिंग इंजन अब 2.5 मिलियन नौकरियों को सपोर्ट करता है, ऐसा कहा गया।  एक देश जो कभी इलेक्ट्रॉनिक्स में गलत शुरुआत के लिए जाना जाता था, अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है. भारत का सेमीकंडक्टर पुश अब सिर्फ एक घरेलू कहानी नहीं है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पाँचवें दिन, भारत औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका कोएलिशन में शामिल हो गया. इसमें कहा गया है कि यह कोएलिशन अमेरिका और दूसरे पार्टनर देशों को एक साथ लाता है, जो ग्लोबल सिलिकॉन सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर फोकस करता है।  बयान में आगे कहा गया, 'इसका लक्ष्य जरूरी मिनरल और फैब्रिकेशन से लेकर एडवांस्ड एआई सिस्टम और डिप्लॉयमेंट इंफ़्रास्ट्रक्चर तक पूरे 'सिलिकॉन स्टैक' को सुरक्षित करना है. मिशन आसान है. जरूरी सामान का प्रोडक्शन और डिलीवरी सिर्फ कुछ कंपनियों, देशों या लोगों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. आर्थिक दबाव का विरोध करें. इस सदी को तय करने वाली टेक्नोलॉजी को खुले, लोकतांत्रिक देशों के हाथों में रखें. भारत के लिए यह इस बात का सबूत है कि उसके सेमीकंडक्टर के सपने अब उसकी अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक पहुँच गए हैं। 

उत्तर प्रदेश में 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित, सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य

योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर उत्तर प्रदेश में 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित, सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम लखनऊ,   प्रधानमंत्री सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना ने उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली की तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र लग चुके हैं और कुल 2,769.59 मेगावाट क्षमता स्थापित हो चुकी है, जिससे हर दिन लगभग 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बन रही है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश घरेलू छत आधारित (रूफटॉप) सौर ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।    औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के आधार पर यह उत्पादन ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से हर दिन लगभग ₹8.10 करोड़ मूल्य की बिजली के बराबर बैठता है। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब ₹2,956 करोड़ की बचत या आर्थिक लाभ का अनुमान है, जो सीधे आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच रहा है। सवा लाख से अधिक घरों का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक   प्रधानमंत्री सूर्य घर उपभोक्ता बिल विवरण के अनुसार जून 2026 में प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा। यानी इन परिवारों को उस महीने बिजली का कोई भुगतान नहीं करना पड़ा या उनके खाते में क्रेडिट दर्ज हुआ। ऋणात्मक बिल की स्थिति तब बनती है, जब उपभोक्ता ग्रिड से ली गई बिजली की तुलना में अधिक बिजली ग्रिड को देता है और यह अतिरिक्त बिजली उसके आगामी बिलों में समायोजित होती है। ₹7,300 करोड़ से अधिक की सहायता बनी संबल    योजना के अंतर्गत प्रदेश के उपभोक्ताओं को अब तक ₹5,400 करोड़ से अधिक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को ₹1,900 करोड़ से अधिक का राज्य अनुदान मिला है। कुल ₹7,300 करोड़ से अधिक की इस सहायता ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर संयंत्र लगाना कहीं अधिक सुलभ और किफायती बना दिया है। हर साल 36.6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत     स्थापित 2,769.59 मेगावाट क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो करीब 16.5 करोड़ परिपक्व वृक्षों द्वारा एक वर्ष में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा के बराबर है। छत आधारित मॉडल के कारण लगभग 10,617 एकड़ भूमि बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों में लगने से बच रही है और कृषि, आवासीय तथा अन्य उत्पादक उपयोगों के लिए सुरक्षित बनी हुई है। 85 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार का आधार   इस योजना से प्रदेश में 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार हुआ है और स्थापित क्षमता बढ़ने के साथ ये अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। अभियंताओं, तकनीशियनों, विद्युतकर्मियों, सर्वेक्षकों, पर्यवेक्षकों, आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े कर्मियों तथा अनुरक्षण सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं। प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सौर विक्रेताओं (वेंडर) का नेटवर्क उपभोक्ताओं तक सर्वेक्षण, डिजाइन, स्थापना, विद्युत संयोजन, निरीक्षण, संयंत्र चालू करने और अनुरक्षण जैसी सेवाएं पहुंचा रहा है।   इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसी अवधि में आवेदन से लेकर संयंत्र की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान तक की सभी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इन चरणों में समय लगता है, इसलिए अंतिम समय का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।   इच्छुक घरेलू उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर अथवा अपने विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर के माध्यम से शीघ्र आवेदन करें, ताकि केंद्र सरकार की सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त अनुदान का पूरा लाभ समय रहते लिया जा सके। जितनी जल्दी संयंत्र लगेगा, उतने ही अधिक महीनों तक मुफ्त बिजली और बिल में बचत का लाभ मिलेगा।

MP में मानसून का आखिरी दौर, 4.3 इंच बारिश से पूरा होगा सीजन का कोटा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। ऐसे में सितंबर के आखिरी दौर में सक्रिय होने वाला मौसम तंत्र प्रदेश के लिए अहम रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है। तंत्र मजबूत रहा तो मानसून का सामान्य कोटा पूरा हो सकता है। प्रदेश में मंगलवार तक 33 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब करीब 4.3 इंच बारिश और चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 6% कम बारिश हुई है। 17 से 19 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश में बारिश का एक और दौर ला सकता है। इसकी ताकत और सक्रियता पर यह निर्भर करेगा कि मानसून के विदा होने से पहले प्रदेश में कितनी बारिश होती है।मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी बनी रहीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन में धूप खिली रही। मैहर में शाम के समय तेज बारिश हुई। 17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि के अधिक व्यापक होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव रहा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी भी देखने को मिली, लेकिन प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल में धूप खिली रही। इंदौर, उज्जैन में भी ऐसा ही मौसम रहा। अब तक कोटे की 88.5% बारिश बता दें कि मानसूनी सीजन को अब 14 दिन बाकी बचे हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी, 88.5% बारिश हुई है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इन जिलों में अब जो भी बारिश होगी, वह बोनस रहेगी। 18 जिलों में भोपाल, राजगढ़्र, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी शामिल हैं। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में तो सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। 88.5% बारिश पूरी, 14 दिन बाकी मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश  सामान्य आंकड़े से अतिरिक्त होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले सामान्य बारिश से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। इसके उलट निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है।  जून की कमी ने बिगाड़ा पूरा हिसाब इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हुआ और बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती महीनों की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन खत्म होने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से 6% पीछे है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इसके मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के बीच है।