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मुख्यमंत्री बुधवार को करेंगे राजकीय महिला शरणालय भवन का लोकार्पण, ₹8 करोड़ की लागत से बना

राजकीय महिला शरणालय भवन का बुधवार को लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री 8 करोड़ रुपये की लागत से 100 महिलाओं की क्षमता का बना है शरणालय निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का निरीक्षण भी करेंगे सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर में, महिला कल्याण विभाग की तरफ से संचालित होने वाले राजकीय महिला शरणालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर वह निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का भी निरीक्षण करेंगे। चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप 8 करोड़ 5 लाख 42 हजार रुपये की लागत से राजकीय महिला शरणालय के भवन का निर्माण कराया गया है। इस भवन की क्षमता 100 महिलाओं के रहने की है। इसमें आवासीय सुविधा के साथ आवश्यक सहायक सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 10 डारमेट्री कक्ष, 4 अध्ययन कक्ष, रोगी कक्ष, क्रेच रूम, डाइनिंग हॉल, किचन, स्टोर, शौचालय एवं स्नानघर जैसी आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। प्रशासनिक एवं संचालन संबंधी कार्यों के लिए वर्कशॉप, वार्डन कक्ष एवं कार्यालय की व्यवस्था की गई है। संवासनियों के अध्ययन एवं ज्ञानवर्धन हेतु पुस्तकालय भी बना है। राजकीय महिला शरणालय, महिला कल्याण विभाग के अधीन संचालित एक संरक्षणात्मक एवं आवासीय संस्था है। इन शरणालयों की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य घरेलू हिंसा, जरूरतमंद, संकटपूर्ण परिस्थितियों, भटकाव अथवा अन्य सामाजिक एवं पारिवारिक कठिनाइयों से प्रभावित महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, संरक्षण एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करना है।  राजकीय महिला शरणालय का लोकार्पण करने से पहले मुख्यमंत्री, किशोरों के लिए निर्माणाधीन संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण करेंगे। चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप ही राजकीय संप्रेषण गृह (किशोर) का निर्माण 14 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इसकी क्षमता 100 किशोरों के रहने की होगी। इसी परिसर में किशोर न्याय बोर्ड के लिए पृथक ब्लॉक का प्रावधान किया गया है। इसका निर्माण फरवरी 2027 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का मुख्य उद्देश्य कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों को सुरक्षित, संरक्षित, बाल-अनुकूल एवं सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराते हुए उनकी समुचित देखभाल, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहयोग, कौशल विकास एवं पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इस गृह में ऐसे बालकों को रखा जाता है जिन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया हो तथा जिनके संबंध में बोर्ड द्वारा विधि के अनुरूप आवश्यक आदेश पारित किए गए हों।   गोरखनाथ मंदिर में होने वाले सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री बुधवार (23 सितंबर) को गोरखपुर दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर में सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ कार्यक्रम में भी सम्मिलित होंगे। यह कथा ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। प्रख्यात कथावाचक वृंदावन के मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे।

ग्वालियर में ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस की तैयारी पूरी, सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट के जज होंगे शामिल

 ग्वालियर  ग्वालियर में आगामी दिनों में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस होने जा रही है। न्यायिक शिक्षा के बढ़ते आयाम विषय पर इसका आयोजन 26 से 27 सितंबर तक विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित दंतोपंत्त ठेंगड़ी सभागार में किया जाएगा। कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायमूर्तिगण सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होंगे। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश भी इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के 60 से ज्यादा न्यायामूर्तिगण व जिला न्यायालयों के बड़ी संख्या में न्यायाधीश शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर के प्रमुख होटलों में कमरों का आरक्षण किया जा रहा है। साथ ही एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इससे पहले इंदौर में हुआ था सम्मेलन बता दें कि, इससे पहले इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की देखरेख में और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था। सीजेआई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। अब ग्वालियर में रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था व लाइजनिंग को लेकर तैयारियां की जा रहीं हैं, बड़ी संख्या में अधिकारियों की डयूटी इसमें लगाई जा रही है। यह है प्रस्तावित शेडयूल… 26 सितंबर 2026 सत्र एक समय दोपहर 12 बजे से एक बजे तक विषय: न्यायिक शिक्षा की आवश्यकताएं। उभरती पद्धतियां, गुणवत्ता मानक और संस्थागत उत्कृष्टता। बदलती कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक शिक्षा का विकास। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक शिक्षा मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण। न्यायिक शिक्षा ऑडिट संस्थागत शक्तियों, चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना। न्यायिक प्रशिक्षण के लिए मापने योग्य प्रदर्शन संकेतक और गुणवत्ता मानक विकसित करना। सत्र दो समय: दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक। न्यायिक शिक्षा में नवाचार। साझाकरण के माध्यम से सीखना। चर्चा का प्रस्तावित दायरा व्यस्क शिक्षा के सिद्धांत और योग्यता-आधारित न्यायिक शिक्षा। केस स्टडी (मामलों के अध्ययन), न्यायिक अनुकरण (सिमुलेशन) और भूमिका निर्वहन (रोल प्ले) अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक सीख। न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समस्या-आधारित और परिदृश्य-संचालित शिक्षण। संवादात्मक (इंटरैक्टिव) और प्रतिभागी-केंद्रित न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करना। सत्र तीन समय: दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक। विषय: संकाय उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना। नेतृत्व, पाठ्यक्रम नवाचार और भविष्य के लिए तैयार न्यायिक अकादमियां। चर्चा का प्रस्तावित दायरा: ट्रेन-द-ट्रेनर (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) कार्यक्रमों के माध्यम से अत्यधिक सक्षम न्यायिक संकाय (फैकल्टी) का एक कैडर तैयार करना। समकालीन कानूनी विकास और न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम में नवाचार। न्यायिक शिक्षा में अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को शामिल करना। परिणाम-आधारित मूल्यांकन और निरंतर फीडबैक तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता की निगरानी करना। 27 सितंबर 2026 सत्र चार समय: सुबह 10 से 11:30 बजे तक। विषय: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल परिवर्तन अवसर, चुनौतियां और आगे की राह। चर्चा का प्रस्तावित दायरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता और न्यायिक निर्णय लेने पर इसके प्रभाव। साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में न्यायिक दक्षता। प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति और इसके संभावित उपयोग के मामले। जेनरेटिव एआई समर्थित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से न्यायिक शिक्षा को बदलना। भौतिक (फिजिकल), आभासी (वर्चुअल) और स्व-गतिशील (सेल्फ-पेस्ड) शिक्षा को मिलाने वाले ब्लेंडेड लर्निंग माडल। सत्र पांच समय: दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक। विषय: उत्तरदायी और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक दक्षताओं का निर्माण। चर्चा का प्रस्तावित दायरा: सामाजिक संदर्भ में न्यायनिर्णयन समावेशी और न्यायसंगत न्याय को बढ़ावा देना। न्याय करने में निष्पक्षता और तटस्थता। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए न्यायिक क्षमता को बढ़ाना। न्यायिक नैतिकता, सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक जिम्मेदारी को मजबूत करना। आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), न्यायिक तर्क और निर्णय लेने के कौशल का विकास करना। फीडबैक और ऑडिट: दोपहर 1:30 से 1:40 बजे तक (प्रतिभागियों द्वारा पाठ्यक्रम का फीडबैक और ऑडिट)।  

EPFO का नया नियम: ₹25 हजार बेसिक लिमिट के बाद 30-40-50 हजार सैलरी वालों पर क्या असर?

 नई दिल्ली जब से सरकार ने पीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये महीने किया है. तब से इस बात की चर्चा हो रही है कि जिनकी बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये से ज्यादा है, उनके लिए क्या नियम है।   सरकार का कहना है कि इससे पहले 2014 में बदलाव हुआ था. अब नए बदलाव से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर PF, पेंशन और मुफ्त जीवन बीमा के दायरे में आ गए हैं. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है. हालांकि, पीएफ कटौती बढ़ने के कारण टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी।  पहले अगर कोई कर्मचारी 15,000 रुपये महीने से अधिक के बेसिक सैलरी पर पहली बार नौकरी में जुड़ता था, तो उसके लिए अनिवार्य रूप से पीएफ खाता खोलना जरूरी नहीं था।  महंगाई और न्यूनतम वेतन में तालमेल  दरअसल, साल 2014 से अब तक देश में औसत वेतन और न्यूनतम वेतन में काफी बढ़ोतरी हुई है. कई राज्यों में न्यूनतम वेतन ही 15,000 रुपये के आसपास पहुंच गया है. ऐसे में पुरानी सीमा प्रासंगिक नहीं रह गई थी. अनिवार्य अंशदान की सीमा बढ़ने से कर्मचारियों की मासिक बचत में इजाफा होगा, जिससे लंबी अवधि में उनका रिटायरमेंट फंड काफी बड़ा बनेगा।  अनिवार्य न्यूनतम योगदान पुरानी सीमा (15,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान)= 1,800 रुपये/माह नई सीमा (25,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान) = 3,000 रुपये/माह इसमें कंपनी और कर्मचारी दोनों की तरफ से 12-12% का योगदान दिया जाता है. ऐसे में 25,000 रुपये की सीलिंग पर कर्मचारी की सैलरी 1200 रुपये कम मिल सकती है, क्योंकि योगदान राशि 1800 रुपये से बढ़कर 3000 रुपये हो गई।  अब तमाम कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर उनकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 रुपये है, तो उन पर क्या नियम लागू होगा? नियम कहता है कि कंपनी कानूनी तौर पर केवल 25,000 रुपये की सीमा पर ही अपना हिस्सा 3,000 रुपये देने के लिए बाध्य है. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं. राकेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और उनकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है. राकेश की कंपनी CTC स्ट्रक्चर पर काम करती है, ऐसे में वो अपनी पूरी बेसिक (50,000 रुपये का 12%= 6,000 रुपये) पीएफ में कटवा सकते हैं. कंपनी भी 6000 रुपये ही जमा करेगी. लेकिन वह पैसा राकेश की ही CTC पैकेज से एडजस्ट होगा, जिससे राकेश की Take-Home सैलरी कम हो जाएगी. क्योंकि कंपनी केवल 25,000 रुपये की सीमा तक का ही दायित्व 3000 रुपये उठाएगी।  अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 40 हजार रुपये मंथली है, तो क्या विकल्प है?  पहला विकल्प: अधिकतर निजी कंपनियां अनिवार्य वैधानिक सीमा पर ही पीएफ काटती हैं. इस हिसाब से कर्मचारी का योगदान 25,000 रुपये का 12%= 3,000 रुपये प्रति माह बनता है.   नियोक्ता का योगदान (12%): कुल 3000 रुपये, जो दो हिस्सों में बंटेगा- EPS (पेंशन फंड- 8.33%): 25 हजार रुपये का 8.33%= 2,083 रुपये/माह EPF (भविष्य निधि- 3.67%): ₹917/माह ऐसे में बेसिक 40 हजार रुपये होने के बावजूद कर्मचारी के वेतन से केवल 3,000 प्रति माह कटेंगे.  दूसरा विकल्प: पूरी बेसिक सैलरी यानी 40 हजार रुपये पर PF काटना.  अगर आपकी कंपनी और आप सहमत हैं, तो आप अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ का योगदान दे सकते हैं.  कर्मचारी का योगदान: ₹40,000 का 12% = ₹4,800 प्रति महीने नियोक्ता का योगदान: कुल ₹4,800 प्रति माह EPS (पेंशन फंड): अधिकतम 25,000 की सीमा पर ही रहेगा, जो कि 2,083 रुपये महीने (अगर उच्च पेंशन का विकल्प नहीं चुना गया है.) EPF (भविष्य निधि): बचा हुआ पूरा हिस्सा यानी 2,717 रुपये/माह. ऐसे में कर्मचारी के वेतन से 4,800 रुपये प्रति माह कटेंगे और इतना ही योगदान कंपनी की तरफ से कुल पीएफ/पेंशन में जाएगा. लेकिन ऐसी स्थिति में इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। 

वेस्ट टू वंडर से बदले सागर के गली-मोहल्ले, कबाड़ से तैयार हो रहीं कलाकृतियां

सागर   स्वच्छ भारत संकल्प के तहत सागर नगर निगम ने 'वेस्ट टू वंडर' कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत नगर निगम के पास जितना भी कबाड़ आता है, उससे शहर के चौराहों और पार्क में सौंदर्यीकरण किया जाता है. इसके तहत पानी की प्लास्टिक की बोतल से पार्क में प्लास्टिक दानव की प्रतिमा बनाकर प्लास्टिक कचरे के नुकसान बताए गए, तो वहीं चौराहों पर कबाड़ से सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं, जिनमें स्वच्छता के नायक, रेडियो और कई तरह की सुंदर प्रतिमाएं चौराहों की शोभा बढ़ा रही हैं. सागर नगर निगम की इस पहल को केंद्र और राज्य सरकार ने सराहा है।  वेस्ट टू वंडर बना बदलाव की मिसाल स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्मार्ट सिटी सागर को खूबसूरत बनाने और प्लास्टिक के कचरे के साथ दूसरे कबाड़ का उपयोग कर सुंदर-सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं।  सबसे पहले लाखा बंजारा झील किनारे बने विशाल अटल पार्क में प्लास्टिक की बोतल से प्लास्टिक दानव बनाया गया, जो प्लास्टिक से होने वाले नुकसान बताने के साथ ये बताता है कि इसी तरह प्लास्टिक का उपयोग होता रहा, तो ये कचरा दानव बनकर मानव के लिए परेशानी पैदा करेगा।  कबाड़ से चौराहों का सौंदर्यीकरण इसी कड़ी में नगर निगम द्वारा साफ सफाई में आने वाले कबाड़ से सुंदर-सुंदर कलाकृतियों से चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया है. शहर के वाणिज्यकर चौराहे पर एक विशाल रेडियो की कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है।  वहीं, स्वच्छता के नायकों को सम्मान देने के लिए बस स्टेंड़ के नजदीक तीनमढ़िया पर स्वच्छता के नायकों की प्रतिमाएं कबाड़ से बनाई गई है. इसके अलावा संजय ड्राइव पर गदा कलाकृति और चित्रगुप्त चौराहे पर कलम-दवात की कलाकृति कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है. राहतगढ़ ब्रिज के पास तोप और शहीद कालीचरण चौराहे पर ब्रह्मोस मिसाइल की कलाकृति स्थापित की गई है।  क्या कहना है नगर निगम का नगर निगम की महापौर संगीता सुशील तिवारी कहती हैं, '' स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्लास्टिक और कबाड़ को कम करने, उनके रीसाइकिल करने और फिर से इस्तेमाल के उद्देश्य के साथ शहर में कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं. प्लास्टिक के उपयोग को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अटल पार्क मेंप्लास्टिक का दानव और इसी तरह शहर के अलग-अलग चौराहों पर सुंदर कलाकृतियां कबाड़ से बनाई गई हैं, जो चौराहों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ कबाड़ के रीसाइकिल करने के उद्देश्य को सार्थक कर रही हैं। 

इंदौर एयरपोर्ट के सामने जमीन के नीचे उतरेगी TBM नर्मदा, मेट्रो टनल का काम शुरू

इंदौर  इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी। शुरुआती दौर में धीमी रहेगी रफ्तार     जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' के तहत बेहद धीमी गति से चलाया जाएगा।     भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली 'मिक्स्ड फेस शील्ड' टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी। आसपास की इमारतों की 24 घंटे होगी निगरानी     चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।     जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी। खुदाई के बाद डलेगी रिंग सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर खुदाई करती है। यह मशीन 'थ्री-टियर सिस्टम' पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं- पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) डालना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।     काम की गति: काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिए हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद रिंग लगा दी जाएगी।     रूट और मशीन: टीबीएम 'नर्मदा' एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है। भोपाल की तर्ज पर काम और मलबे का बेहतरीन इंतजाम     जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम ही रखी जाएगी।  टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर हटाया जाएगा। शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को नियंत्रित रखा जा रहा है।  

UPITS 2026 बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ग्लोबल मंच, खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे यूपी के उद्यमी

यूपीआईटीएस 2026 : डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार निवेशकों और खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे उत्तर प्रदेश के उद्यमी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने का सशक्त मंच बनेगा यूपीआईटीएस मछली पालन से दुग्ध उत्पादन तक दिखेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर देश-विदेश के खरीदारों से रूबरू होंगे डेयरी क्षेत्र से जुड़े 14 प्रमुख स्टेकहोल्डर्स और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ीं आठ प्रमुख कंपनियां लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में प्रदेश के डेयरी व मत्स्य क्षेत्र की उपलब्धियों, संभावनाओं और उद्यमिता की नई तस्वीर देखने को मिलेगी। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में मत्स्य एवं डेयरी को प्रमुख फोकस सेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की विविध क्षमताओं को देश-विदेश के खरीदारों, निवेशकों और कारोबारियों के सामने प्रस्तुत करना है। बड़े बाजार से जुड़ेंगे डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स डेयरी और मत्स्य क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्वरोजगार से सीधे जुड़े हैं। ट्रेड शो में इन क्षेत्रों से संबंधित सरकारी योजनाओं, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों और उद्यमिता के अवसरों को व्यापक मंच मिलेगा। इससे किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्वयं सहायता समूहों व उद्यमियों को अपने कार्य और उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा। प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन में विकसित होंगे उद्यमिता के अवसर मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं को भी सामने लाया जाएगा। यूपीआईटीएस 2026 में मछली पालन, इससे जुड़े उत्पादन, फीड, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे मत्स्य पालकों और उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह पशुधन, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े व्यवसायों की पूरी श्रृंखला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। ट्रेड शो के माध्यम से इन गतिविधियों में उपलब्ध संभावनाओं और कारोबार के अवसरों को भी व्यापक बाजार के सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। एक मंच पर प्रदर्शित होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विविधता यूपीआईटीएस में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, घरेलू बी2बी खरीदारों, घरेलू बी2सी ग्राहकों के माध्यम से मत्स्य व डेयरी क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों और सेवाओं को नए खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डेयरी और मत्स्य विभाग की सरकारी योजनाओं एवं नीतियों के साथ निजी क्षेत्र, उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। मत्स्य और पशुपालन जैसे कृषि-संबद्ध क्षेत्रों की भागीदारी से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत और विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन में नए कारोबारी संपर्क विकसित होने की संभावनाएं बनेंगी।   यूपीआईटीएस में मत्स्य विभाग की ओर से इन्हें मिलेगा मंच 👉पीवीआर एक्वा – गाजियाबाद 👉 ग्रोवेल फीड – लखनऊ 👉 देवी फीड्स – बाराबंकी 👉 फिश व्हाइट – वाराणसी 👉 मणि एग्रो हब – मुरादाबाद 👉 एबिस ग्रुप – अयोध्या 👉 दयाल ग्रुप – लखनऊ 👉 एडवांस फिश फार्म – मेरठ डेयरी क्षेत्र की देश-प्रदेश की 14 कंपनियों की रहेगी मौजूदगी 👉 नमस्ते इंडिया 👉 गंगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड 👉 भारत एसकेवाईआर एंड दूध प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड 👉 सिंहानिया मिल्क प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (मलाई धारा) 👉 वीआरएस फूड्स लिमिटेड 👉 क्रीमी फूड्स लिमिटेड 👉 सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (ज्ञान डेयरी) 👉 भोले बाबा मिल्क 👉 अमूल (गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड) 👉 न्यू एरा डेयरी इंजीनियर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड 👉 ज्यूड्स मिल्क 👉 अल्फा मिल्क फूड 👉 श्याम डेयरी 👉 पराग डेयरी वर्जन  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण (25 से 29 सितंबर) के आयोजन में डेयरी व मत्स्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अतिथि व आगंतुक दुग्ध-मत्स्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति से रूबरू होंगे। आयोजन में दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्टेक होल्डर्स, कंपनियों आदि की भी सहभागिता रहेगी। दोनों विभागों की तैयारी पूरी हो गई है। धनलक्ष्मी के.  दुग्ध आयुक्त/महानिदेशक, मत्स्य उत्तर प्रदेश

8वां वेतन आयोग: OPS-NPS पर क्या होगा फैसला? कर्मचारियों ने रखी मांग

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वां वेतन आयोग इस समय वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार कर रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और करीब 10 महीने बीत भी चुके हैं। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर संगठनों और अन्य एसोसिएशनों से उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकें हो चुकी हैं। सितंबर में आयोग ने 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16 से 18 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में बैठकें कीं। अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है। फिटमेंट फैक्टर से लेकर पेंशन तक पर चर्चा आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, वेतन संशोधन, पेंशन में सुधार और विभिन्न भत्तों में बदलाव समेत कई मांगें रखी गई हैं। हालांकि, इनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) का मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। 2004 के बाद भर्ती हुए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। OPS की बहाली की मांग कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा अंशदायी पेंशन व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए निश्चित पेंशन व्यवस्था जरूरी है। सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 फीसदी के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है। वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी परिभाषित लाभ वाली पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है। रेलवे सीनियर सिटिजनंस सोसाइटी ने भी न्यूनतम गारंटीड पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा की मांग उठाई है। 8वें वेतन आयोग में आगे क्या होगा? इन संगठनों की मांगें उनके संबंधित ज्ञापनों के माध्यम से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई हैं। दूसरे कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने भी फिटमेंट फैक्टर, पेंशन समानता और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने समेत कई सुझाव दिए हैं। अब आयोग इन मांगों और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन करेगा। इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। उपलब्ध समयसीमा के अनुसार अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना बताई जा रही है।

राज्यसभा की 10 सीटों पर यूपी में सियासी हलचल, सपा को 2 सीटों की उम्मीद

लखनऊ यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है।  लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे।  बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है।  तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

किशाऊ समझौते से पंजाब बाहर, यमुना के पानी पर सरकार ने उठाए सवाल

चंडीगढ़  किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंजाब सरकार अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। छह राज्यों के बीच हुए समझौते से पंजाब को बाहर रखा गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने यह जानकारी दी। गर्ग ने कहा कि पंजाब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उनका कहना है कि यमुना के पानी में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। 15 सितंबर को नई दिल्ली में यह समझौता हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। पंजाब इस समझौते का हिस्सा नहीं बना। पंजाब को इस प्रक्रिया से बाहर रखना स्वीकार्य नहीं है। 1954 में पंजाब के यमुना संबंधी अधिकार स्वीकार किए गए थे। पंजाब पुनर्गठन के बाद भी ये अधिकार खत्म नहीं माने जा सकते। पंजाब की आपत्ति और कानूनी आधार गर्ग ने बताया कि पंजाब की गैरमौजूदगी में उसके हितों को प्रभावित करने वाला फैसला नहीं हो सकता। पंजाब को यमुना में उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। 1954 के समझौते की अनदेखी का कोई कानूनी आधार नहीं है। पंजाब को विश्वास में नहीं लेना आपत्तिजनक है। यह मामला अब नए कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। क्या है किशाऊ बांध परियोजना किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस परियोजना में 1,562 दस लाख घन मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी। समझौते के तहत हरियाणा को 633 एमसीएम पानी मिलेगा। उत्तर प्रदेश को 411 एमसीएम, राजस्थान को 124 एमसीएम और दिल्ली को 80 एमसीएम पानी आवंटित किया गया है। परियोजना के लाभ और केंद्र का सहयोग परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट होगी। इससे सालाना करीब 1,476 दस लाख यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है। लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।  केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसके वित्तीय बोझ का करीब 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी। यह परियोजना लंबे समय से अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मतभेदों के कारण अटकी हुई थी।  किस राज्य को कितना पानी मिलेगा? परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है। क्या है किशाऊ परियोजना     किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित की जाने वाली एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है।     टोंस नदी यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है।     इस परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का गुरुत्व बांध बनाया जाएगा।     निर्माण कार्य पूरा होने पर यह टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा।     इस बांध से 660 मेगावॉट हरित ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा।     करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1561.91 मिलियन घन मीटर है।     परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है।     राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। क्या है किशाऊ परियोजना का उद्देश्य? हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी। परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है। यमुना को कैसे मिलेगा लाभ? किशाऊ बांध से बिजली और पानी के अलावा यमुना की सफाई करने में भी मदद मिलेगी। इससे मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। गर्मी के मौसम में टोंस और आगे चलकर यमुना नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा, जिससे यमुना नदी को साफ करने के अभियान में मदद मिल सकेगी। छह दशक से क्यों अटका था किशाऊ? किशाऊ परियोजना स्थापित करने की योजना करीब छह दशक पहले बनी। परियोजना को लेकर शुरुआती स्तर पर स्थल, भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन हुआ। इसके बाद डीपीआर, लागत, जल बंटवारे और छह राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सामने आते गए। परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी मिला, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति का पेंच नहीं सुलझ पाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने आगे बढ़कर संयुक्त उपक्रम बनाया, मगर परियोजना को वास्तविक गति देने के लिए छह राज्यों के बीच व्यापक सहमति जरूरी थी। अब यही सबसे बड़ा अड़ंगा दूर होता दिखाई दे रहा है। किशाऊ में कितना पानी जमा होगा? नई डीपीआर ने परियोजना की तस्वीर काफी बदल दी है। बांध की ऊंचाई घटाकर 232.6 मीटर की गई है, लेकिन जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1561.91 एमसीएम कर दी गई है। पहले यह क्षमता करीब 1324 एमसीएम थी। यानी नई व्यवस्था में लगभग 237.81 एमसीएम अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। लीटर में समझें तो यह करीब 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी है। यही अतिरिक्त भंडारण मानसून के दौरान पानी को रोकने और गैर-मानसूनी महीनों में उसका इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाएगा। किशाऊ के आंकड़े एक नजर में बांध की ऊंचाई : 232.6 मीटर जीवंत भंडारण क्षमता : 1561.91 एमसीएम अतिरिक्त भंडारण : 237.81 एमसीएम स्थापित बिजली क्षमता : 422 मेगावाट औसत वार्षिक बिजली उत्पादन : 1457 मिलियन यूनिट पुराने मुकाबले अतिरिक्त उत्पादन : 78 मिलियन यूनिट प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र : लगभग 97,076 हेक्टेयर एमओयू में राज्य : छह

इंदौर जू में दिखेगी पानी के भीतर की दुनिया, 35 करोड़ में बनेगा आधुनिक एक्वेरियम

इंदौर इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रदेश का पहला अंडरवाॅटर फिश एक्ववेरियम का काम शुरू हो चुका है। यह करीब डेढ़ एकड़ में बनेगा। इसके लिए प्राणी संग्रहालय में पांच फीट गहराई में खुदाई भी हो चुकी है। डेढ़ साल में इसके निर्माण को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दस करोड़ रुपये से अधिक पहले चरण में खर्च किए जाएंगे। दर्शक जब अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम में प्रवेश करेंगे तो उन्हें अपने सिर के उपर से मछलियां और समुद्री जीव तैरते हुए दिखाई देंगे। इसकी योजना चार साल पहले नगर निगम ने बनाई थी, लेकिन अब उसे मूर्त रुप दिया जा रहा है। नगर निगम के बजट में भी इसकी घोषणा की गई है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम के बनने से चिडि़याघर के प्रति शहरवासियों का आकर्षण और बढ़ेगा। मनोरंजन शहवासियों को मिलेगा और नगर निगम की आय भी इससे बढ़ेगी। इसके अलावा नगर निगम में 14 डी थिएटर का निर्माण भी जल्दी शुरू होगा। इंदौर के प्राणी संग्रहालय (जू) में घूमने का मजा अब दोगुना होने वाला है। जल्द ही शहरवासियों को यहां समुद्र जैसी गहरी और खूबसूरत जलीय दुनिया का अहसास होगा। शहर के जू में एक आधुनिक अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम बनाने की रुकी हुई योजना ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है। नगर निगम इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार करने जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये के बजट वाले इस भव्य प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को सिर्फ रंग-बिरंगी मछलियां ही नहीं, बल्कि पेंगुइन, टच पूल और स्नॉर्कलिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी मिलेंगे। पानी के बीच से गुजरती पारदर्शी टनल     इस पूरे प्रोजेक्ट की जान इसका 'अंडरवॉटर टनल' होगा, जिसके डिजाइन के लिए लगभग 128 वर्गमीटर की जगह तय की गई है। जब दर्शक इस पारदर्शी टनल से गुजरेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे खुद पानी के भीतर चल रहे हों और मछलियां उनके चारों ओर तैर रही हों।     टनल में स्पष्ट रूप से देखने के लिए खास एक्रेलिक पैनल वाली खिड़कियां लगाई जाएंगी। जलीय जीवों को उनके अनुकूल माहौल देने के लिए पानी को लगातार फिल्टर करने, ऑक्सीजन की सप्लाई, और तापमान नियंत्रित करने वाले बेहद आधुनिक सिस्टम यहां काम करेंगे। मनोरंजन के साथ शिक्षा का भी बनेगा केंद्र     नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट और बाद में इसके रखरखाव व संचालन के लिए किसी अनुभवी एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक, इस बार नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है ताकि काम करने वाली एजेंसी आसानी से मिल सके।     इस पूरे प्रोजेक्ट को एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि यह एक्वेरियम सिर्फ मछलियां देखने की जगह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे मीठे और समुद्री पानी के जीवों के बारे में जानकारी देने वाले एक बड़े मनोरंजन और शिक्षा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। पेंगुइन से लेकर स्नॉर्कलिंग तक, मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं इस नए कॉम्प्लेक्स में पर्यटकों के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी:     5 एक्वेरियम हॉल: यहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों और जलीय जीवों को करीब से निहारने की सुविधा होगी।     पेंगुइन प्रदर्शनी: 75 वर्गमीटर के एक खास क्षेत्र में पेंगुइन देखने की व्यवस्था की जाएगी।     टच पूल और स्नॉर्कलिंग जोन: जलीय दुनिया को छूकर महसूस करने के लिए 'टच पूल' और पानी के भीतर का जीवन देखने के लिए 'स्नॉर्कलिंग जोन' भी बनाया जाएगा।     अन्य आकर्षण: इसके अलावा परिसर में 125 वर्गमीटर का एक पूल वाला तालाब, बेहतरीन तस्वीरों के लिए 'सेल्फी पॉइंट', आगंतुकों के खाने-पीने के लिए 'रेस्टोरेंट' और यादगार तोहफे खरीदने के लिए 'सुवेनियर शॉप' भी मौजूद रहेगी।