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प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर

सेवा संकल्प अभियान 2026 : सेवा की कहानी कभी बैनर की दीवारों के बीच गुजरती थी जिंदगी, आज पक्के आशियाने में संवर रहे आशा के सपने प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा आवास योजनाओं का लाभ वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों के लिए कर रही हैं बचत, सुरक्षित भविष्य की दिशा में बढ़ाए कदम रायपुर,  कभी सड़क किनारे बैनर से बनी दीवारें ही उनके घर का सहारा थीं। न पक्की छत थी और न ही सुरक्षित आशियाना। हर दिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने की चिंता और बेहतर भविष्य की उम्मीद के बीच जिंदगी गुजर रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। नवा रायपुर के सेक्टर-7 स्थित ग्राम चीचा की आशा के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना नई खुशियां लेकर आई है। कभी बैनर की दीवारों के बीच रहने वाली आशा आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रह रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानियों से मिली राहत, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया आधार है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और आम नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से आशा जैसे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल रहा है। बैनर की दीवारों से पक्के घर तक का सफर आशा के लिए अपना पक्का घर होना कभी एक बड़ा सपना था। सीमित संसाधनों के कारण उन्हें सड़क किनारे बैनर की दीवारों से बने अस्थायी घर में रहना पड़ता था। ऐसे घर में परिवार के साथ जीवन गुजारना आसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब उनके पास अपना पक्का आशियाना है, जहां वे परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रही हैं। आशा के लिए घर मिलने की खुशी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनके परिवार के भविष्य को लेकर एक नई शुरुआत है। जिस परिवार के पास कभी रहने के लिए स्थायी ठिकाना नहीं था, आज उसके पास अपना घर है। आशा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। अब बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटीं आशा अपना घर मिलने के बाद आशा अब अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। एक मां के रूप में उनकी इच्छा है कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और भविष्य में आत्मनिर्भर बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत अपनी बेटियों के लिए बचत शुरू की है। वे अपनी बच्चियों के खातों में ढाई-ढाई सौ रुपये जमा कर रही हैं। आशा के लिए यह बचत भले ही छोटी राशि से शुरू हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक मां के बड़े सपने जुड़े हैं। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में बेटियों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास आर्थिक सहारा हो। नियमित बचत के माध्यम से वे आज ही अपनी बेटियों के बेहतर कल की नींव रख रही हैं। एक योजना से मिला आशियाना, दूसरी से बेटियों के भविष्य को सहारा आशा की कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से आम परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से वे बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक बचत कर रही हैं। इन दोनों योजनाओं ने उनके जीवन की दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को नई दिशा दी है। पहली, परिवार के लिए सुरक्षित घर और दूसरी, बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक तैयारी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और उन्हें बेहतर जीवन के अवसर मिलें। वहीं वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विजन के अनुरूप आवासीय विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हो सके। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की प्रेरक कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आशा की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव लेकर आता है। कभी बैनर की दीवारों के सहारे जीवन गुजारने वाली आशा आज अपने पक्के घर में रह रही हैं और अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आशा की जिंदगी में आया यह बदलाव केवल एक परिवार को आवास मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के संघर्ष, उम्मीद और सपनों के साकार होने की कहानी है। कभी उनकी सबसे बड़ी चिंता परिवार के लिए सुरक्षित छत थी, आज वे उस चिंता से आगे बढ़कर बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। बैनर की अस्थायी दीवारों से शुरू हुआ आशा का सफर आज पक्के घर की मजबूत दीवारों तक पहुंच चुका है। अब इसी घर में उनकी बेटियों के सुनहरे भविष्य के सपने भी आकार ले रहे हैं। आशा की यह कहानी बताती है कि जब जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलता है, तो केवल उनकी वर्तमान परिस्थितियां ही नहीं बदलतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की उम्मीदें भी मजबूत होती हैं।

सीएम योगी ने क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोरके दिए निर्देश

एयर शो की तैयारियों को लेकर सीएम योगी ने की समीक्षा,नमो घाट पर व्यवस्थाओं का किया स्थलीय निरीक्षण  क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर पार्किंग, रूट डायवर्जन, लाइफ जैकेट और ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देश 22, 24 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है,एयर शो 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने का कार्यक्रम वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे और एयर शो के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोजन के दौरान आमजन को किसी तरह की परेशानी न हो। बैठक में वायुसेना के अधिकारी भी मौजूद थे। समीक्षा बैठक से पहले मुख्यमंत्री  नमो घाट पहुंचकर प्रस्तावित एयर शो की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने नमो घाट पर स्थलीय निरीक्षण कर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली, निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और सेना के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को तैयारियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने परियोजना के मानचित्र के माध्यम से प्रस्तावित व्यवस्थाओं और आयोजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी ,सीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान नमो घाट के साथ गंगा के अन्य प्रमुख घाटों पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।नमो घाट पर 22, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को एयर शो आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। कार्यक्रम के अंतिम दिन, 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का  शामिल होना प्रस्तावित है।     यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश मुख्यमंत्री ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और रूट डायवर्जन की प्रभावी योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त पार्किंग स्थलों की व्यवस्था करने के साथ वहां स्पष्ट साइनेज भी लगाए जाएं, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा हो। आयोजन स्थल और घाटों पर समुचित बैरिकेडिंग के साथ पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार रखा जाए। घाटों पर पर्याप्त मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में आयोजित होने वाले विभिन्न त्योहारों और कार्यक्रमों को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की समुचित योजना बनाई जाए। एयर-शो जैसे बड़े आयोजन में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों, युवक मंगल दल और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए। उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए। पार्किंग स्थलों पर पुलिस, यातायात पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए। घाटों की सफाई और शहर के सौंदर्यीकरण पर जोर मुख्यमंत्री ने नगर निगम को घाटों की विशेष सफाई कराने के साथ शहर में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने नमो घाट से अस्सी घाट तक घाटों की पेंटिंग कराने को कहा। इसके साथ ही एयरपोर्ट से शहर तक आने वाले प्रमुख मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण सड़कों पर लगे विद्युत खंभों पर स्पाइरल लाइट लगाने तथा प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण कराने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। प्रशासन और पुलिस ने प्रस्तुतीकरण के जरिए बताईं तैयारियां बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की तैयारियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि घाटों पर सिल्ट की सफाई कराई जा रही है। इसके अलावा 300 मोबाइल टॉयलेट और 400 वाटर टैंकर की व्यवस्था के साथ ही तीन हजार सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बैठक में जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद बैठक में प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, स्टाम्प राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु', एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, सौरभ श्रीवास्तव और डॉ. सुनील पटेल, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह और जगदीश पटेल, जिलाध्यक्ष रामशकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, एडीजी जोन नवीन अरोड़ा, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा, डीआईजी वैभव कृष्ण, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, सीडीओ प्रखर कुमार, वायुसेना के अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

ट्रंप के समर्थन में फिर खुला एलन मस्क का खजाना, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ी तैयारी

न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपबल्किन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में जिताने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते है। इस बार वे पिछले चुनाव से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर तक के 3 महीने में ही रिपब्लिकन पार्टी को 276 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,600 करोड़ रुपए से ज्यादा चंदा दिया गया है। इतना पैसा अब तक किसी शख्स ने मिडटर्म चुनाव में खर्च नहीं किया। मस्क ने अकेले इतना चंदा दिया कि डेमोक्रेटिक पार्टी को उस तिमाही में अपने सभी चंदा देने वालों से मिलाकर भी इतनी रकम नहीं मिली। पिछले चुनाव से ₹700 करोड़ ज्यादा मदद दी मस्क ने 2025-26 में अब तक रिपब्लिकन पार्टी को करीब 366 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपए) दिए हैं। यह रकम 2023-24 के चुनाव में दिए गए उनके करीब 290 मिलियन डॉलर (करीब 2800 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। मस्क की दी नई रकम से मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को आर्थिक बढ़त मिली है। वहीं इसके मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई भी अरबपति चंदा देने वाला व्यक्ति मस्क जितना पैसा खर्च नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट लीडरशिप फंड को 158 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका PAC को 76 मिलियन डॉलर दिए। यह राजनीतिक समूह रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करता है और कई चुनावी क्षेत्रों में पार्टी के पक्ष में अभियान चलाता है। मस्क ने 2024 में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने के लिए अमेरिका PAC की स्थापना की थी।अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो के मुताबिक, इस तरह के बड़े आर्थिक योगदान से रिपब्लिकन पार्टी को अपना संदेश मतदाताओं तक पहुंचाने में मदद मिलती है। हालांकि, चुनाव में किसी पार्टी की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का रुख शामिल हैं। मस्क की राजनीतिक सक्रियता के पीछे उनके कारोबारी हितों को लेकर भी चर्चा होती रही है। उनकी कंपनी स्पेसएक्स को अमेरिकी सरकार से बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद उनके प्रशासन में मस्क की भूमिका को लेकर भी बहस हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक सांसद मस्क के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) में उनकी भूमिका की जांच की मांग करते रहे हैं।गौरतलब है कि ट्रंप और मस्क के बीच पिछले साल गंभीर मतभेद सामने आए थे। हालांकि, बाद में दोनों के संबंध फिर बेहतर हुए। ट्रंप ने मस्क को नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया और उन्हें आज के दौर का एडिसन बताया।अब अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में मस्क की भारी फंडिंग ने राजनीतिक चंदे और बड़े कारोबारियों के प्रभाव को लेकर बहस तेज कर दी है। आने वाले चुनावों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिपब्लिकन पार्टी को मिले इस आर्थिक समर्थन का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है। मस्क के चंदे से यह भी साफ हुआ है कि वे अमेरिकी राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहना चाहते हैं। मई 2025 में उन्होंने कहा था कि भविष्य में वे राजनीतिक खर्च काफी कम कर देंगे। ट्रम्प की मस्क से फिर नजदीकी बढ़ी मस्क के पास कई बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें से कुछ को अमेरिकी सरकार से बड़े ठेके भी मिले हैं। पिछले साल ट्रम्प के साथ विवाद के बाद से मस्क ने अपने राजनीतिक कामकाज को लेकर काफी कम सार्वजनिक बयान दिए थे। बता दें कि, दोनों के बीच पिछले साल विवाद इतना बढ़ गया था कि ट्रम्प ट्विटर छोड़ ट्रुथ पर अपना बयान जारी करने लगे। पिछले साल जनवरी में ट्रंप ने सरकारी खर्च कम करने के लिए मस्क को ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ (DOGE) का इंचार्ज बनाया था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच गंभीर मतभेद पनप गए. हालांकि बाद में मस्क ट्रंप के खेमे में लौट आए और उनके करीबी बने हुए हैं. ट्रंप ने मस्क को प्रतिष्ठित ‘नेशनल मेडल ऑफ साइंस’ से सम्मानित किया. SpaceX के प्रमुख और पांच अन्य टेक्नोलॉजी लीडर्स को सम्मान देने के समारोह में ट्रंप ने मस्क को “आज के दौर का एडिसन” बताया था।  हालांकि, चुनाव नजदीक आने के बाद अब दोनों के रिश्ते फिर सुधरते दिख रहे हैं। पिछले दो हफ्तों में दोनों तीन कार्यक्रमों में साथ दिखाई दिए और एक-दूसरे की तारीफ भी की। ट्रम्प मस्क को अपने साथ चीन के दौरे पर भी लेकर गए थे। मस्क के इतना पैसा खर्च करने से जाहिर है कि वे दक्षिणपंथी राजनीति के साथ अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहते हैं। 3,000 लोगों की टीम घर-घर जाकर वोट मांग रही रिपब्लिकन पार्टी को ज्यादातर चंदा मस्क के बनाए राजनीतिक संगठन अमेरिका PAC के जरिए मिलता है। यह संगठन रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करता है। अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो ने कहा कि अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी चुनाव जीत जाती है तो अमेरिका का कम्युनिष्ट, वोक और बिना सीमा वाला देश बनने का खतरा है। उन्होंने कहा कि मस्क के बड़े निवेश से रिपब्लिकन पार्टी को अपना पक्ष लोगों तक पहुंचाने का मौका मिला है, ताकि वह चुनाव में इतिहास के रुझान को बदलने की कोशिश कर सकें। मस्क सिर्फ बेहिसाब पैसा खर्च नहीं कर रहे, बल्कि उनकी टीम के 3000 लोग घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रहे हैं। वे उन मतदाताओं को वोट डालने के लिए तैयार कर रहे हैं, जो आमतौर पर चुनाव में कम हिस्सा लेते हैं। टेक्सास में सबसे बड़ा दांव, एक उम्मीदवार पर ₹1500 करोड़ खर्च मस्क के चुनावी अभियान का सबसे दिलचस्प हिस्सा टेक्सास का सीनेट चुनाव है। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन में करीब 1500 करोड़ रुपए के विज्ञापन अभियान की शुरुआत हुई है। मस्क के लिए टेक्सास का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि वे राज्य की राजधानी ऑस्टिन में रहते हैं और यहां उनका बड़ा कारोबारी निवेश है। उनकी टीम सिर्फ टीवी विज्ञापनों के जरिए प्रचार नहीं कर रही, बल्कि घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रही है। प्रचारक लोगों के दरवाजों पर पर्चे लगा रहे हैं। इन पर्चों में दावा किया जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पूरे अमेरिका में चुनाव जीत रहे हैं और टेक्सास … Read more

CERT-In की सलाह, ऑनलाइन अकाउंट को हैकिंग से बचाने के लिए तुरंत एक्टिवेट करें टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन

 नई दिल्ली आज के समय में डिजिटल सेफ्टी बहुत ही जरूरी है. भारतीयों की सेफ्टी के लिए सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने जरूरी जानकारी शेयर की है. एजेंसी ने सभी की यूजर्स को अपने सभी अकाउंट पर सिक्योरिटी के लिए डबल लेयर लगाने को कहा है। CERT-In के मुताबिक, यूजर्स अपने सभी अकाउंट पर मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को इनेबल करने की सलाह दी है. जहां ये फीचर उपलब्ध है, वहां पर इसका जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।  CERT-In ने यह एडवाइजरी ऐसे समय पर जारी है, जब एजेंसी अक्टूबर 2026 को नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथन के रूप में मना रही है. इस साल की थीम 'साइबर हाइजीन की संस्कृति विकसित करें' पर है।  CERT-In ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके साइबर सिक्योरिटी जागरूकता पोस्टर शेयर किया है. साथ ही MFA की अहमियत को बताया है और SMS के जरिए मिलने वाले वेरिफिकेशन कोड की जगह ऑथेंटिकेटर ऐप्स और हार्डवेयर सिक्योरिटी इस्तेमाल करने की सलाद दी गई है. अनजान ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को अप्रूव करने से बचना चाहिए।  सेफ्टी के लिए फॉलो करें ये टिप्स  CERT-In के जागरुकता पोस्टर के मुताबिक, यूजर्स को उन जगह पर MFA को जरूर ऑन करना चाहिए, जहां वह सुविधा पहले से मौजूद है. इस प्रोसेस के तहत यूजर्स को पासवर्ड के अलावा ऑथेंटिकेशन का एक और स्टेप पूरा करना होता है. इससे अकाउंट डबल सिक्योरिटी लेयर में आ जाता है।  CERT-In ने SMS के जरिए मिलने वाले कोड की जगह पर ऐसे ऑथेंटिकेटर ऐप्स का इस्तेमाल करने का सलाह दी है, जो असल में टाइम बेस्ड वन टाइम पासवर्ड जनरेट करते हैं. साथ ही सिक्योरिटी हार्डवेयर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।   अनजान नोटिफिकेशन को अप्रूव नहीं करना चाहिए  CERT-In ने बताया है कि यूजर्स को अनजान MFA पुश नोटिफिकेशन से बचना चाहिए. साथ ही भूलकर भी ऐसे ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को अप्रूव करने से बचना चाहिए. सिर्फ उन्हें ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को मंजूरी दें, जिन्हें उन्होंने खुद शुरू किया है।  CERT-In के पोस्टर में बताया है कि यूजर्स साइबर संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए CERT-In पर रिपोर्ट कर सकते हैं. इसके लिए  incident@cert-in.org.in पर भी ईमेल कर सकते हैं। 

मध्यप्रदेश की जेलों में राशन खरीदी पर सख्ती, रेट में अंतर और गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था

भोपाल   मध्य प्रदेश जेल विभाग में वर्षों से खाद्यान्न सप्लाई का टेंडर कॉर्टेल चलाने वालों पर विभाग लगाम लगाने जा रहा है। सालाना 2400 करोड़ के कॉर्टेल को खत्म करने नई टेंडर पॉलिसी बनाई है। सभी जेलों को केंद्र के खरीद पोर्टल (जेम) से खरीदी करना अनिवार्य किया है। अभी सभी जेलों में अपने स्तर पर टेंडर किए जाते हैं। शिकायतें आ रही थी कि कुछ अफसर मिलीभगत कर एक ही फर्म या संबंधित फर्मों को ठेका दे रहे हैं। इस नीति से इस पर अंकुश लगेगा। यह नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा। फल-सब्जियां खरीद सकेंगे प्रदेश की जेलों में एक माह में करीब 200 करोड़ की खाद्यान्न सामग्री लगती है। नई नीति के अनुसार उप जेलें टेंडर अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी। उन्हें जिला या सेंट्रल जेल से सप्लाई की जाएगी। वे सिर्फ रोजमर्रा की सामग्री जैसे फल, दूध, सब्जियों की खरीदी अपने स्तर पर कर सकेंगे। इसलिए बदली नीति ओवर बिलिंगः जेल मुख्यालय ने पांच साल के सभी जेलों के सलाना टेंडर की जांच की तो कई खाद्य सामग्री में ओवर बिलिंग के मामले सामने आए। रेट असमानताः खाद्यान्न सामग्री के रेट में भी बड़ी असमानताएं मिलीं। चावल, दाल और गेहूं में 50 प्रतिशत तक का अंतर मिला। गुणवत्ताः गुणवत्ता की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं। शिकायतों के बाद बदली गई नीति अच्छा खाना देना हमारी प्राथमिकता है। लंबे समय से खाद्यान्न सामग्री की ओवर बिलिंग और गुणवत्ता की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए नई नीति बनाई है।-वरुण कपूर, डीजी, जेल एमपी में जेल की रसोई पर AI की नजर मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

पाकिस्तान में पानी की किल्लत बढ़ी, पंजाब-सिंध में सिंचाई पर संकट; भारत पर आरोपों के बीच नई रिपोर्ट

 नई दिल्ली पाकिस्तान में खेती के लिए पानी की भारी कमी का अंदेशा जताया जा रहा है. देश के पानी संबंधी संस्था ने रबी सीजन यानी सर्दियों की फसलों के समय पंजाब और सिंध में सिंचाई के लिए 22 प्रतिशत पानी की कमी बताई है. इससे गेहूं जैसी मुख्य फसल पर असर पड़ सकता है. खाने की दिक्कत हो सकती है. पाकिस्तानी नेता भारत पर आरोप लगा रहे हैं कि सिंधु जल संधि रोकने से यह समस्या आई है. लेकिन उनके अपने विभाग की रिपोर्ट कुछ और कहती है।   रबी सीजन अक्टूबर से मार्च तक चलता है. इसमें गेहूं, जौ, सरसों, चना जैसी फसलें बोई जाती हैं. पाकिस्तान की सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण यानी IRSA ने बताया है कि पंजाब और सिंध में 22 प्रतिशत पानी कम मिलेगा. पंजाब देश का सबसे बड़ा खेती वाला इलाका है. सिंध भी महत्वपूर्ण है।  पाकिस्तान की 80% से ज्यादा खेती सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है. इसलिए पानी कम होने से फसलें कम होंगी. पिछले साल भी गेहूं का उत्पादन लक्ष्य से कम रहा था. देश को दो मिलियन टन से ज्यादा गेहूं की कमी झेलनी पड़ी थी और एक मिलियन टन आयात का ऑर्डर दिया गया. इस साल पानी और कम होने से स्थिति बिगड़ सकती है।  IRSA ने किसे जिम्मेदार ठहराया पाकिस्तान की अपनी संस्था IRSA ने साफ कहा है कि कमी की वजह भारत नहीं बल्कि देश के अंदर की समस्याएं हैं. नदी में आने वाला पानी अनुमान से 8 प्रतिशत कम रहा और पिछले साल से 22% कम. जलाशयों में पानी का भंडारण भी कम है. 30 सितंबर को 9.343 मिलियन एकड़ फीट पानी था जबकि उम्मीद 12.014 मिलियन एकड़ फीट की थी।  तरबेला बांध पर निर्माण के कारण पानी भरने की पाबंदी लगी हुई थी जिससे तीन मिलियन एकड़ फीट से ज्यादा पानी जमा नहीं हो सका. टनल 4 और टनल 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है. ये मार्च 2025 तक पूरे होने थे लेकिन अभी तक नहीं हुए. इससे खरीफ सीजन में भी कमी रही।  तरबेला से पानी कम छोड़ने की वजह से मंगला बांध से ज्यादा पानी छोड़ा गया जिससे वह भी ठीक से नहीं भर पाया. अक्टूबर के शुरू में हुई बैठक में पंजाब और सिंध के लिए 22 प्रतिशत कमी मंजूर की गई. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को छूट दी गई।  भारत पर आरोप और सच्चाई पाकिस्तानी नेता बार-बार कहते हैं कि भारत सिंधु का पानी रोक रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पानी मोड़ने की कोशिश युद्ध का ऐलान माना जाएगा. विदेश मंत्री इशाक डार ने भी चेतावनी दी. लेकिन सच्चाई यह है कि भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित किया था।  उस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. संधि स्थगित करने का मतलब पानी रोकना नहीं है. नदियां पहले की तरह पाकिस्तान की तरफ बह रही हैं. सिर्फ आंकड़े बांटने और अग्रिम सूचना देने जैसे नियम रुक गए हैं. पानी का प्रवाह जारी है. IRSA की रिपोर्ट में भारत का नाम तक नहीं लिया गया. कमी की वजह घरेलू है।  पानी कम मिलने से गेहूं की बुआई और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती है. पिछले साल बिना पानी की कमी के भी उत्पादन कम रहा था. इस साल जलाशयों में पानी पिछले साल से 27 प्रतिशत कम है. गेहूं पाकिस्तान की मुख्य फसल है और ज्यादातर लोगों का खाना है. कमी होने पर आयात बढ़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।  चना, मसूर, तंबाकू, जौ जैसी दूसरी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं. खेती पर निर्भर लाखों किसानों की आय कम हो सकती है. देश की खाद्य सुरक्षा और कमजोर पड़ सकती है।  समस्या का असली कारण क्या है पाकिस्तान में पानी की व्यवस्था लंबे समय से ठीक नहीं चल रही. बांधों और नहरों का रखरखाव कमजोर है. नए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं होते. बर्फ और ग्लेशियर पिघलने तथा बारिश पर निर्भर प्रवाह कम हो रहा है. जलवायु परिवर्तन का असर भी दिख रहा है. इसके बावजूद राजनीतिक नेता दोष दूसरों पर डालते रहते हैं।  अपने आंतरिक जांच में 26 प्रतिशत तक कमी का अनुमान था लेकिन सिंध के विरोध के बाद इसे 22 प्रतिशत कर दिया गया. यह दिखाता है कि समस्या घरेलू प्रबंधन की है. पानी की किल्लत सिर्फ पाकिस्तान की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की चिंता है. नदियों का सही इस्तेमाल और भंडारण हर देश की जिम्मेदारी है. पाकिस्तान अगर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे करे और भंडारण बढ़ाए तो कमी कम हो सकती है।  भारत पर आरोप लगाने से समस्या हल नहीं होगी क्योंकि पानी तो बह रहा है. किसानों और आम लोगों को सही जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे समय रहते तैयारी कर सकें. खाद्य सुरक्षा हर देश के लिए जरूरी है. लंबे समय में जलवायु और प्रबंधन दोनों पर ध्यान देना होगा. फिलहाल पाकिस्तान की अपनी रिपोर्ट साफ कहती है कि कमी अंदरूनी वजहों से आई है। 

मुंबई इंडियंस में बड़ा बदलाव संभव! IPL 2027 में रोहित शर्मा संभाल सकते हैं कप्तानी की कमान

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आगामी सीजन 2027 से पहले मुंबई इंडियंस (MI) की तरफ से एक धमाकेदार खबर सामने आ रही है. लगातार गिरते प्रदर्शन और कप्तानी के विवादों से जूझने के बाद पांच बार की चैम्पियन मुंबई इंडियंस एक बार फिर अपने सबसे सफल कप्तान रोहित शर्मा के पास वापस लौटने की तैयारी में है।  सूत्रों के मुताबिक फ्रेंचाइजी का टॉप मैनेजमेंट 2027 सीजन के लिए रोहित शर्मा को दोबारा कप्तानी सौंपने का मन बना चुका है. रोहित शर्मा ने अपनी कप्तानी में मुंबई इंडियंस को 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में पांच IPL खिताब दिलाए थे।  लेकिन 2024 सीजन से ठीक पहले गुजरात टाइटन्स से लौटे हार्दिक पंड्या को अचानक कप्तानी सौंप दी गई थी. हार्दिक की कप्तानी में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. 2024 में टीम सबसे निचले पायदान पर रही और 2025 में प्लेऑफ तक पहुंचने के बावजूद मुंबई ट्रॉफी से दूर रह गई।  इसके अलावा ड्रेसिंग रूम के माहौल, खिलाड़ियों के बीच आपसी तालमेल और टीम भावना को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे. सूर्याकुमार यादव और युवा तिलक वर्मा जैसे विकल्प मौजूद होने के बावजूद मुंबई का प्रबंधन रोहित के अनुभव और उनके साथ जुड़े 5 ट्रॉफियों के ट्रैक रिकॉर्ड पर दांव लगाना चाहता है ताकि टीम में स्थिरता वापस लौट सके।  हार्दिक पंड्या का क्या होगा?  रोहित के कप्तानी में लौटते ही हार्दिक पंड्या के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. खबरें हैं कि हार्दिक को किसी दूसरी फ्रेंचाइजी में ट्रेड किया जा सकता है, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के नाम सबसे आगे आ रहे हैं।  क्या यशस्वी की होगी टीम में एंट्री चर्चा तो यह भी है कि मुंबई और राजस्थान के बीच हार्दिक पंड्या के बदले यशस्वी जायसवाल को मुंबई लाने की बातचीत चल रही थी. रोहित शर्मा की उम्र को देखते हुए मुंबई की टीम यशस्वी के रूप में एक भविष्य का विस्फोटक भारतीय सलामी बल्लेबाज अपने साथ जोड़ना चाहती है. हालांकि, अभी तक इस ट्रेड डील की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

मध्यप्रदेश की जेलों में AI से होगी खाने की निगरानी, खराब भोजन मिलने पर कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी रिपोर्ट

इंदौर  मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इंदौर जेल डीजी द्वारा इसकी पुष्टि की गई है। नई व्यवस्था में जेल के अंदर खाना बनाने वाले कैदी भोजन तैयार होने के बाद उसे निर्धारित तरीके से कैमरे के सामने रखेंगे। कैमरे से मिली तस्वीरों को एआइ आधारित सॉफ्टवेयर जांचेगा। सिस्टम भोजन के रंग, स्थिति और दिखाई देने वाले अन्य मानकों का विश्लेषण करेगा। मसलन रोटी जली तो नहीं है, दाल ठीक तरह से बनी है या नहीं, सब्जी में पानी अधिक तो नहीं है जैसे ङ्क्षबदुओं पर जांच की जाएगी। हर दिन बनेगी रिपोर्ट भोजन की जांच केवल शिकायत आने के बाद नहीं होगी, बल्कि रोजाना की जाएगी। सॉफ्टवेयर से तैयार रिपोर्ट जेल मुख्यालय के कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी। वहां तैनात अधिकारी अलग- अलग जेलों से आने वाली रिपोर्ट की निगरानी करेंगे। इससे किसी एक दिन की शिकायत के बजाय लगातार खराब हो रही भोजन व्यवस्था की पहचान करना आसान होगा। एक-दो बार गलती माफ, लगातार गड़बड़ी तो कार्रवाई इस संबंध में इंदौर जेल डीजी वरुण कपूर ने बताया कि कंट्रोल रूम में अधिकारी भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट की लगातार निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी जेल में महीने में एक-दो बार गुणवत्ता से जुड़ी कमी सामने आती है तो उसे सामान्य गलती मानकर देखा जा सकता है, लेकिन किसी जेल में लगातार खराब गुणवत्ता की रिपोर्ट आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जेलों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में दिखेगा ओलंपियन्स का दम, दिग्गज खिलाड़ी संभालेंगे टीमों की कमान

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग : टीमों की अगुवाई करेंगे हॉकी ओलंपियन्स ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुtनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल राज्य के युवाओं को अनुभवी खिलाड़ियों और ओलंपियन्स के साथ खेलने का मिलेगा मौका, लीग के दौरान अनुभवी प्रशिक्षकों से कोचिंग भी मिलेगी अजय कुमार, अजितेश राय, मोहम्मद रियाज, देवेश चौहान, राजेन्दर सिंह जूनियर और रजनीश मिश्रा होंगे टीमों के मुख्य प्रशिक्षक रायपुर. रायपुर में होने वाले छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए सभी छह फ्रेंचाइजी टीमों के मुख्य प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों का चयन कर लिया गया है। ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से खेल चुके प्रतिष्ठित और अनुभवी हॉकी खिलाड़ियों को प्रत्येक टीम में मार्की (Marquee) खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। लीग में खेलने वाले वरिष्ठ खिलाड़ियों के सानिध्य में राज्य के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में टीमें खिताब के लिए दावेदारी करेंगी। इस दौरान नामी प्रशिक्षकों से राज्य के खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सीखने के साथ ही बड़े मुकाबलों के दबाव से निपटने की कला भी सीखने मिलेंगी। प्रतियोगिता के सभी मुकाबलों का विधिवत आयोजन हॉकी इंडिया के ऑफिशल्स और अधिकारी करेंगे। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की टीमों में राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ के अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। लीग में राज्य की प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच मिलने के साथ ही घरेलू हॉकी के ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। लीग के सभी मैच 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर के बीच रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे। पहला मुकाबला शाम साढ़े पांच बजे और दूसरा मुकाबला शाम साढ़े सात बजे शुरू होगा। दोनों मैचों के बीच प्रतिदिन मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जो दर्शक स्टेडियम नहीं पहुंच पाएंगे, वे भी मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे। लीग का लाइव प्रसारण जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर किया जाएगा। स्टेडियम में दर्शकों का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित की जा रही छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है। इन टीमों के मुख्य प्रशिक्षक और खिलाड़ी इस प्रकार हैं –  न्यायधानी नाइट्स मुख्य प्रशिक्षक – मोहम्मद रियाज खिलाड़ी – सुरेंद्र कुमार (Marquee), राहुल ठाकुर, मोहम्मद अनीश रजा, लवी मानिकपुरी, अमित टोप्पो, अश्विन कुजूर, रोहित रजक, सागर सूर्यवंशी, सैय्यद समीर अली, कश्मीर मिंज, अभिजीत श्रीवास, सोनू निषाद, सुखवेद निर्मलकर, शादाब अहमद खान, अरबाज अली, ओम रुद्र नामदेव, अमन वर्मा, आदर्श राज सिंह, प्रिंस महतो, केतन कुशवाहा, रोहित कुल्लू, चिराग  मैनपाट टाइटन्स मुख्य प्रशिक्षक – अजय कुमार  खिलाड़ी – प्रदीप मोर (Marquee), अल्फ़ाज़ खान, सौर्य वर्मा, अजय तांडी, रेहान खान, प्रवीण यादव, साहिल ज़ाक्सा, मोहित नायक, अर्पण टोप्पो, आदित्य मेश्राम, अकविनाश तिग्गा, नरेंद्र निषाद, संदीप ठाकुर, प्रिंस भगत, राहुल पन्नू, प्रांजल यादव, नेहाल बरेठ, मनीष वट्टी, दक्ष चौबे, प्रह्लाद, आनंद लकड़ा, अवि मानिकपुरी  चक्रधर चैंपियंस मुख्य प्रशिक्षक – अजितेश राय खिलाड़ी – एस.वी. सुनील (Marquee), असीम हंश, वैभव सिंह चंदेल, विष्णु यादव, अविनाश तिर्की, करण कुमार साहू, अर्जुन यादव, प्रेम राव, मोहित कश्यप, अनुज जाल्क्सो, शैलेन्द्र वर्मा, गगन बाकवाले, खोगेश्वर बाग, कार्तिक यादव, हार्दिक आहूजा, भेद चौरे, भावेश धनकड़, मनीष मौर्य, बलदेव कवासी, युवराज वाल्मिकी, परमप्रीत, अद्रोहित एक्का  राजधानी रॉयल्स मुख्य प्रशिक्षक – राजेन्दर सिंह जूनियर  खिलाड़ी – ललित कुमार उपाध्याय (Marquee), हिमांशु मलिक, विनोद यादव, जुनैद अहमद, संदीप यादव, सुमित मिंज, तौफिक अहमद, अनिकेत कुजूर, ओंकार यादव, अविनाश एक्का, श्रेयांश चौरसिया, योगेश मेश्राम, जुबैर मोहम्मद, खुशाल यादव, कुणाल सेंद्रे, योगेश यादव, चिंता राम, अर्पण लकड़ा, पीयूष कुमार साहू, संजीत तिर्की, प्रेमचंद सोय, रौशन कुमार  संस्कारधानी स्ट्राइकर्स मुख्य प्रशिक्षक – रजनीश मिश्रा  खिलाड़ी – शमशेर सिंह (Marquee), आदित्य कुमार नेताम, रोशन राजपूत, झकमक लकड़ा, मानस पटेल, सोमदेव सूर्यवंशी, निशांत तिर्की, तरूण यादव, जीतू हेमला, कुशल यादव, सोमनाथ यादव, मुहुर्त कौशिक, ओम कुमार यादव, प्रकाश पटेल, सारिख अहमद, मुनीस्वर कुमार, महेंद्र सिंह नाग, अभिषेक यादव, आयुष साहू, आर्यन जेस, शाहरुख, आशीष तानी पूर्ति  बैलाडीला बुल्स मुख्य प्रशिक्षक – देवेश चौहान  खिलाड़ी – चिंगलेनसाना सिंह कंगुजाम (Marquee), दलेश्वर यादव, संतोष मौर्य, रोबिट एक्का, गुलशन कौशिक, प्रह्लाद तांडी, आनंद सूर्यवंशी, निहाल हुसैन, विशाल किस्पोट्टा, चन्द्रशेखर कुसवाहा, प्रभात सिंह, प्रीतम कुजूर, गणेश यादव, आदित्य मेरावी, करण वर्मा, तोमन साहू, हिमेश बंशोद, गोपाल पैकरा, अमन नाग, जसकरण सिंह, राहुल यादव, करण धानुक

भारत का नया हवाई निगरानी सिस्टम HAPS, 20 KM की ऊंचाई पर किया सफल ट्रायल; जानें कैसे करेगा काम

बेंगलुरु सौ बात की एक बात ये कि भारत रक्षा क्षेत्र में बहुत कुछ बना रहा है ये तो कई लोग अब जानने लग गए हैं लेकिन जो लेटेस्ट चीज भारत ने बनाई है वो जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बहुत कम देश हैं जो ये बना पाए हैं. भारत ने एक एयरशिप बनाई है. एयरशिप. एयरशिप मतलब क्या? कोई हवाई जहाज है? कोई शिप है जो हवा में उड़ती है? नहीं, असल में एयरशिप मतलब एक बड़ा गुब्बारा. भारत ने जो अभी टेस्ट किया है उसका साइज तो नहीं बताया गया लेकिन एयरशिप वाले गुब्बारे 50 से 100 मीटर या उससे भी लंबे होते हैं. यानी कई मंजिलों वाली इमारत जितने लंबे और बहुत मोटे होते हैं. जैसे हवा में कोई बड़ी-सी बस तैर रही हो जैसे. गैस भरी जाती हैं इसमें, ऐसी गैस जो हवा से हल्की होती है, इसलिए ये आसमान में तैरता रहता है।  जैसे बच्चों के गैस वाले गुब्बारे होते हैं उसी सिद्धांत पर एयरशिप हवा में तैरती है. लेकिन एयरशिप में इंजन भी लगे होते हैं. एयरशिप को ऊपर भेजने का मुख्य काम गैस करती है. उसके बड़े गुब्बारे वाले हिस्से में हीलीयम जैसी हवा से हल्की गैस भरी जाती है. गैस हल्की होने से पूरा प्लैटफॉर्म ख़ुद ही ऊपर उठ जाता है, जैसे गुब्बारा उड़ता है. फिर एक बार ऊंचाई पर पहुंच जाने के बाद उसे वहीं टिकाए रखने और जरूरत पड़ने पर आगे-पीछे या इधर-उधर करने के लिए इंजन और प्रोपेलर का इस्तेमाल होता है. ये इंजन आमतौर पर बिजली से चलते हैं. ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाकर दिन में बिजली बनाई जाती है और बैटरी में स्टोर कर के रखी जाती है गुब्बारे के अंदर, ताकि रात में भी काम चल सके. सब कुछ नीचे जमीन से कंट्रोल होता है।  आसमान में क्या करेंगे ये एयरशिप तो इसको क्यों भेजते हैं ऊपर आसमान में? मुख्य तौर पर निगरानी करने के लिए. अभी जो भारत ने उड़ा कर टेस्ट किया है, उसमें कई तरह के जांच करने वाले उपकरण लगे थे. जैसे दिशा और गति नापने वाला सेंसर, GPS सिस्टम लगा है ग़ुब्बारे के अंदर ही जिससे पता चलता है कि ये कहां पर है, और इसमें लगे होते हैं कई तरह के कैमरे. जो नीचे की तस्वीरें और वीडियो बनाते रहते हैं. ये सब उपकरण इसलिए लगे होते हैं ताकि देखा जा सके कि ये सही तरीक़े से ऊपर जा रहा है, ऊपर टिक रहा है और सारी जानकारियां जमीन तक वापस पहुंचा पा रहा है या नहीं. तो एक तरह से इस तरह की एयरशिप को लॉन्च करने का मक़सद होता है कि ये बहुत ऊंचाई पर लंबे समय तक टिकी रहे, तैरती रहे और नीचे एक बड़े इलाक़े को देखती रहे, निगरानी करती रहे।  ड्रोन भी ये काम करते हैं लेकिन वो ज्यादा देर तक नहीं उड़ते. सैटेलाइट से भी यही काम किया जाता है लेकिन वो बहुत महंगी पड़ती हैं एयरशिप के मुक़ाबले में. ये एयरशिप यूं समझ लो कि ड्रोन और सैटेलाइट, दोनों के बीच का काम करती है. सीमाओं पर नजर रखने के लिए, दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए, या आपदा के समय जब जमीन के किसी हिस्से का बाक़ी नेटवर्क से अगर संपर्क टूट जाए तब ये बहुत काम आ सकती है. यानी आसमान में एक चौकीदार बैठा है ये समझ लो. भारत में हथियारों पर रिसर्च करने वाले संस्थान DRDO ने ये नई एयरशिप बनाई है. इसको कहते हैं HAPS, हाई ऑल्टीट्यूड प्लैटफ़ॉर्म सिस्टम. इसकी उड़ान का परीक्षण किया गया और ये आसमान में इतनी ऊंचाई पर पहुंच गई कि आम विमान वहां तक नहीं जा सकते. समुद्र तल से 21 km की ऊंचाई तक ये गई, और फिर 20 km की ऊंचाई पर ये तीस मिनट से ज्यादा समय तक टिकी रही. उसके बाद जमीन से कंट्रोल सेंटर से आदेश दिया गया और ये एयरशिप सुरक्षित नीचे आ गई।  आसमान से चौकीदारी पूरी उड़ान के दौरान इसकी तस्वीरें और सारी जानकारियां रीयल टाइम में जमीन पर कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचती रहीं. यानी लाइव तस्वीरें आती रहीं. आगरा में DRDO की लैब है ADRDE, एरियल डिलिवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, उसने इसको बनाया है. इसी लैब में पैराशूट और हल्के हवाई सिस्टम वगैरह बनते हैं. अब एयरशिप भी बना ली है. पिछले साल मई में मध्य प्रदेश के श्योपुर से इसकी पहली टेस्ट उड़ान हुई थी. तब ये 17 km की ऊंचाई तक गई थी और लगभग 62 मिनट हवा में रही थी. उस बार इसके दबाव और एमरजेंसी सिस्टम की जांच हुई थी. अबकी बार ये 4km और ऊपर गयी है और ऊंचाई पर टिकने की क्षमता भी दिखाई है. ड्रोन जो होते हैं वो क़रीब 12 km की ऊंचाई तक उड़ते हैं और ज्यादा देर तक एक जगह नहीं टिक पाते।  सैटेलाइट जो होती हैं वो तो अंतरिक्ष में होती हैं यानी बहुत ही ऊपर होती हैं, सैकड़ों किलोमीटर दूर जमीन से, और उन्हें वहां भेजना महंगा पड़ता है. ये एयरशिप इन दोनों के बीच का रास्ता है. 20 km की ऊंचाई का मतलब है कि ये बादलों और ज्यादातर विमानों से ऊपर रहती है. और लगभग एक ही जगह टिक सकती है. और इस वजह से वहां से ये एक बड़े इलाक़े को लंबे समय तक देख सकती है. ऐसे समझ लीजिए कि जैसे कोई वॉच टावर आसमान में तैर रहा हो।  ड्रोन-सैटेलाइट भी तो यही करते हैं सैटेलाइट की तुलना में ये काफ़ी सस्ता पड़ता है और कुछ दिक़्क़त आ जाए तो इसको नीचे उतारकर ठीक भी किया जा सकता है. भारत की लंबी सीमाओं को देखते हुए ऐसी चीज बहुत उपयोगी है. पाकिस्तान बॉर्डर है, चीन का बॉर्डर है, पहाड़ी इलाकों में लगातार नजर रखना मुश्किल होता है. समुद्री सीमा पर भी ये काम आ सकती है. कई दिनों या हफ्तों तक एयरशिप आसमान में एक जगह टिकी रह सकती है।  अभी तो बस छोटा-सा टेस्ट किया गया है आधे घंटे का. असली चुनौती है लंबे समय तक ऊपर टिकना, ज्यादा वजन ढोना और तरह-तरह के मौसम से लड़ना. लेकिन भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो एयरशिप बनाने पर काम कर रहे हैं. लंबे समय तक टिकने वाला सिस्टम अभी … Read more