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मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए तीन किस्तों में लिया जाएगा ₹4,000 करोड़ का ऋण

भोपाल  प्रदेश सरकार तीन नवंबर को एक बार फिर बाजार से चार हजार करोड़ रुपये का ऋण लेगी। यह तीन किस्तों में अलग-अलग अवधि के लिए लिया जाएगा। इस राशि का उपयोग सिंचाई, बिजली, सड़क और एक्सप्रेस-वे जैसी विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत निवेश बढ़ाने पर जोर वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार के ऋण लेने की सीमा 87 हजार करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 44 हजार 900 करोड़ रुपये का बाजार ऋण लिया गया है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूंजीगत निवेश लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस वर्ष यह एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जो ऋण लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रावधान की सीमा में है। प्रदेश के ऊपर सवा पांच लाख करोड़ रुपये का ऋण है।  

Rules Change From 1 November: गैस सिलेंडर से मोबाइल तक बड़े बदलाव, आज से लागू हुए नए नियम

नई दिल्ली देश में वित्तीय नियमों में रविवार 1 नवंबर से बदले। GST काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग और रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए कदम उठाए हैं। इससे कारोबारियों को टैक्स नोटिस और रिफंड में राहत मिलेगी। साथ ही SEBI भी म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाने जा रहा है। जीएसटी कानून में बदलाव जीएसटी काउंसिल ने कई तरह के सुधारों की सिफारिश की है। इनके लिए कानून में संशोधन की जरूरत नहीं है। इन्हें 1 नवंबर से लागू किया जा सकता है। वहीं, कानून से जुड़े कुछ बदलावों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को myGov पोर्टल पर GSTR-1, GSTR-1A और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) के ड्राफ्ट फॉर्म आम जनता की सलाह के लिए डालेगा। इन संशोधित फॉर्म्स को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। योग्य GST रिफंड का ऑटोमेटेड अप्रूवल 1 नवंबर के बाद शुरू होने की उम्मीद है। कॉल करने वाले का नाम दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने आदेश दिया है कि सभी टेलीकॉम ऑपरेटर 1 नवंबर, 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी) सेवा को लागू करें। इस सेवा का लाभ उठाने वाले मोबाइल उपयोगकर्ताओं को इनकमिंग कॉल पर कॉल करने वाले का नाम और नंबर दोनों दिखाई देंगे। इससे कॉल की पहचान करना आसान हो जाएगा और इसका मुख्य उद्देश्य सटीकता और सुरक्षा में सुधार लाना है। इस पहल के तहत, टेलीकॉम कंपनियों ने पहले से ही 4जी और उससे अधिक तकनीकों पर इसकी टेस्टिंग कर ली है। म्यूचुअल फंड में बदलाव सेबी भी बड़ा बदलाव करते हुए 1 नवंबर से असेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के डिजिटल प्लैटफॉर्म्स पर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान को बाय डिफॉल्ट ऑप्शन बनाने जा रहा है। इसका मतलब है कि अगर कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है, तो उसे इसके ज्यादा एक्सपेंस रेशियो (लागत) के बारे में पहले जानकारी दी जाएगी। सेबी नियमों को सरल बनाने की कोशिशों के तहत लिस्टिंग और डिस्क्लोजर के नियमों की समीक्षा कर रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। इससे खासकर 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बदलाव हो सकता है। 1 सितंबर को इसकी कीमत में बढ़ोतरी की गई थी। फिलहाल दिल्ली में इसकी कीमत 2810 रुपये है जबकि बिना सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जीवन प्रमाण पत्र पेंशनर्स को हर साल जीवन प्रमाण पत्र देना पड़ता है। 80 साल से कम उम्र वाले पेंशनर 1 नवंबर से अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं। अमूमन इसकी डेडलाइन 30 नवंबर तक होती है। इसे जमा नहीं करने पर आपकी पेंशन स्थायी रूप से रोकी जा सकती है। लाइफ सर्टिफिकेट जमा होने पर पेंशन फिर से चालू हो जाती है। आप घर बैठे मोबाइल से अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, रिपोर्ट के बाद होंगे ये 5 अहम बदलाव?

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। बीते अक्टूबर महीने में वेतन आयोग ने बेंगलुरु और मुंबई में 2 अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों के बाद अब तक वेतन आयोग के नए शेड्यूल का अपडेट नहीं आया है। ऐसे में ज्यादातर लोग अब ये मान रहे हैं कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। हालांकि, इसके बारे में आधिकारिक तौर पर किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई है लेकिन एक सच ये जरूर है कि वेतन आयोग को अगले साल की पहली छमाही में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देनी है। अब सवाल है कि क्या सिफारिशों को सौंपे जाने के तुरंत बाद इसे लागू कर दिया जाएगा? आइए समझ लेते हैं कि आखिर वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद क्या कुछ होगा। इन 5 चरणों से गुजरेगी प्रक्रिया सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी: 8वें वेतन आयोग द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद केंद्र सरकार इसकी समीक्षा करेगी और फिटमेंट फैक्टर, मूल वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा से जुड़ी शर्तों जैसे पहलुओं पर दी गई सभी सिफारिशों को बारिकी से समझेगी। सिफारिशों पर विचार: इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि 8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) में दिए गए नियमों और विनियमों के दायरे में रहते हुए, किन प्रस्तावों, सुझावों और शिकायतों को स्वीकार किया जाए। इसके अलावा, सरकार को ही यह तय करना है कि किन सिफारिशों में बदलाव किया जाएगा या किसे खारिज कर दिया जाएगा। यह निर्णय प्रशासनिक, वित्तीय और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। मुद्दों की गहन जांच: कुछ सिफारिशों, विशेष रूप से भत्तों, पेंशन या उन्हें लागू करने से जुड़ी चिंताओं के मामले में अतिरिक्त जांच या किसी समिति द्वारा समीक्षा की जरूरत हो सकती है। लागू करने का निर्णय: अंतिम निर्णय लिए जाने के बाद केंद्र सरकार एक नई अधिसूचना और जरूरी आदेश जारी करेगी। इसमें संशोधित वेतन संरचना, लागू होने वाले नियम-कानून और प्रभावी तारीखों का विवरण होगा। तारीख तय: केंद्र सरकार एक तारीख तय करेगी और संबंधित कर्मचारी यूनियनों, संघों और पेंशनभोगियों को इसकी सूचना देगी। इसी तारीख से 8वां वेतन आयोग आधिकारिक तौर पर लागू माना जाएगा। इसके बाद, संबंधित विभाग पात्र कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतन और पेंशन लाभों की गणना करेंगे। फिर, सरकारी आदेशों के अनुसार बकाया राशि (एरियर) का भुगतान किया जाएगा। अभी कितना इंतजार करना होगा? बता दें कि 8वें वेतन आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। इस हिसाब से रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा करीब 3 मई 2027 बनती है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आयोग मई 2027 के आसपास अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है।

नक्सलवाद के खौफ से बाहर निकल रहे गांव, अब ग्रामीणों की समस्याएं जानने पहुंच रही प्रशासनिक टीमें

बालाघाट  कभी बंदूक और हिंसा की दहशत झेलने वाले बालाघाट के 100 गांवों में अब विकास की नई सुबह लाने की तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन दूरदराज के नक्सल प्रभावित इलाकों के कायाकल्प के लिए एक विशेष मेगा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रशासनिक अमला सीधे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं का समाधान कर रहा है। गांवों में 14 दिनों तक आवश्यकताओं का आकलन करेंगे प्रदेश सरकार ने बालाघाट जिले के 100 नक्सल प्रभावित गांवों के विकास के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। यह अभियान 29 अक्टूबर को शुरू हुआ और इसका उद्देश सरकारी योजनाओं का फायदा ग्रामीणों तक पहुंचाना है। इस योजना के तहत, विभिन्न विभागों के कर्मचारी इन गांवों में 14 दिनों तक जाकर यहां की आवश्यकताओं का आकलन करेंगे और विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे। सरकार ने 100 गांवों को चार समूहों में बांटा है। अधिकारियों ने बताया कि 'ग्रामीणों की मूल जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और विकास की संभावनाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।' इस जानकारी के आधार पर, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाए और रोजगार से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर, 26 अक्टूबर को एक टीम ने गांवों का दौरा किया। इस टीम में लंजी के उप-जिला मजिस्ट्रेट आदित्य नारायण तिवारी शामिल थे, जिन्होंने कल सेवर, कट्टीपर, सतना व बारगुड़ गांवों का दौरा किया। वहीं, बाइहर के एसडीएम अनिकेत शांडिल्य ने दादेक्सा, बिलालकासा और अन्य गांवों का दौरा किया। इसी क्रम में, ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा के कार्यकारी इंजीनियर मनोज धुर्वे ने किरनपुर क्षेत्र में ग्रामीणों से बातचीत की। मूलभूत सुविधाओं की डिमांड सबसे ज्यादा 28 अक्टूबर को, कलेक्टर आदित्य सिंह ने गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान गांवों में सड़कों, पुलों, पीने के पानी, सिंचाई, स्कूल भवन, आंगनवाड़ी भवन और बिजली की सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया। 'सरकारी सुविधाओं के स्तर के आधार पर आवश्यक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे,' एक अधिकारी ने बताया। सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका से संबंधित अवसर उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि गांवों में रोजगार के अवसरों को विकसित करने के लिए एक योजना तैयार की जाए। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बालाघाट के कलेक्टर आदित्य सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित 14 दिनों के भीतर चुने गए गांवों का दौरा पूरा करें और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। 'इन 100 नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, युवाओं और आदिवासी समुदायों को शिक्षा, रोजगार और आत्म-रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं,' ऐसा अधिकारी ने कहा। इस तरह से, मध्य प्रदेश की सरकार इन गांवों को विकास की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर रही है। यह अभियान यह सुनिश्चित करेगा कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और उनकी जिंदगी में सुधार हो।

रवि पुष्य योग में 1 नवंबर को करें प्रॉपर्टी और सोने की खरीदारी, कारोबार शुरू करने का भी मौका

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर रविवार, 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र पूरे दिन रहने से सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, बर्तन, जमीन, प्लॉट और मकान सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए दिनभर शुभ अवसर रहेगा।इस दिन नए व्यापार और व्यवसाय की शुरुआत के साथ धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान भी किए जा सकेंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, रविवार को पुष्य नक्षत्र होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। रविवार और सप्तमी तिथि, दोनों का संबंध सूर्यदेव से माना जाता है। वहीं, शनि और गुरु की स्थिति भी इस संयोग को विशेष बना रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य नक्षत्र में किए गए शुभ कार्य स्थायी समृद्धि देने वाले माने जाते हैं। वर्ष 2026 में 06 नवंबर को त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का अद्भुत संयोग बनने से धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले पुष्य नक्षत्र का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस बार 01 नवंबर 2026 (रविवार) को पुष्य नक्षत्र पड़ने के कारण अति दुर्लभ और महाफलदायी 'रवि पुष्य योग' का निर्माण हो रहा है। इस दिन खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत करना अक्षय फल प्रदान करता है। ग्रहों का संयोग बढ़ाएगा दिन का महत्व कार्तिक मास में पुष्य नक्षत्र का संयोग विशेष माना जाता है। इस बार शनि बृहस्पति की राशि मीन में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य और ग्रहों की स्थिति का यह संयोग खरीदारी, निवेश और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल है। इन चीजों की खरीदारी मानी जाती है शुभ रवि पुष्य नक्षत्र पर परंपरागत रूप से कई तरह की खरीदारी की जाती है। इस दिन लोग अपनी जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार सोना-चांदी से लेकर संपत्ति तक खरीदने की योजना बनाते हैं। पुष्य नक्षत्र की तिथि और समय आरंभ: 01 नवंबर 2026, रविवार (सुबह 05:39 बजे से) समाप्त: 02 नवंबर 2026, सोमवार (सुबह 04:30 बजे तक) तिथि: कार्तिक माह, कृष्ण पक्ष (अष्टमी तिथि) खरीदारी एवं शुभ कार्य के महामुहूर्त रवि पुष्य योग (दिनभर का महामुहूर्त): 01 नवंबर, सुबह 05:39 बजे से 02 नवंबर, सुबह 04:30 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग: 01 नवंबर, सुबह 06:33 बजे से 02 नवंबर, सुबह 04:30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त (दोपहर की खरीदारी के लिए): दोपहर 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक गोधूलि मुहूर्त (शाम की खरीदारी के लिए): शाम 05:36 बजे से शाम 06:02 बजे तक रवि पुष्य नक्षत्र में क्या खरीदना रहेगा शुभ? ज्योतिष शास्त्र और ग्रहों के प्रभाव के अनुसार, इस महासंयोग पर निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी और निवेश करना अत्यंत लाभप्रद माना गया है: सोना (Gold): पुष्य नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इस दिन सोना खरीदना या सोने के आभूषण बनवाना अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक होता है। चांदी एवं नए बर्तन: चंद्रमा का प्रभाव रहने के कारण चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या रसोई के नए बर्तन खरीदना घर में सुख-शांति लाता है। वाहन एवं मशीनरी: शनिदेव के प्रभाव के कारण इस दिन कार, बाइक, लोहा या भारी मशीनरी खरीदना बेहद फलदायी माना जाता है। प्रॉपर्टी व अन्य निवेश: नए बही-खाते, बही-पुस्तके, नए वस्त्र, घर की उपयोगी वस्तुएं तथा जमीन, मकान या रियल एस्टेट में निवेश करना अक्षय समृद्धि प्रदान करता है। नोट: पुष्‍य नक्षत्र के दिन यदि आप सोना, चांदी, वाहन या कोई महंगी वस्तुएं नहीं खरीद पा रहे हैं तो पूजा का सामान, चंदन की बट्टी, इत्र या लक्ष्मी चिन्ह खरीद सकते हैं। जैसे कौड़ियां, शंख, स्वास्तिक, मिट्टी का दीपक, श्री यंत्र आदि वस्तुएं खरीद सकते हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज को दूसरी तिमाही में बड़ा फायदा, मुनाफे में 40.64% का उछाल; रेवेन्यू भी बढ़ा

मुंबई  मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 40.64 फीसदी बढ़कर ₹25,548 करोड़ हो गया. पिछले साल इसी अवधि में रिलायंस को ₹18,165 करोड़ का मुनाफा हुआ था।  कंपनी की कमाई में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस बीच रिलायंस की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने भी अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं. जियो का रेवेन्यू 11.3 फीसदी बढ़कर ₹47,485 करोड़ रहा. इसके अलावा रिलायंस ने ₹15,000 करोड़ तक जुटाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।  रिलायंस की कमाई और मुनाफे में बढ़ोतरी रिलायंस इंडस्ट्रीज का परिचालन से होने वाला रेवेन्यू (Revenue from Operations) दूसरी तिमाही में 28.57 फीसदी बढ़कर ₹3,32,861 करोड़ पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹2,58,898 करोड़ था. यानी कंपनी की कमाई में एक साल के भीतर ₹73,963 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है. परिचालन से प्राप्त राजस्व वह कुल आय है जो कोई कंपनी अपनी मुख्य, रोज़मर्रा की व्यावसायिक गतिविधियों से अर्जित करती है. कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को अपने तिमाही नतीजों की जानकारी दी. मुनाफे और रेवेन्यू दोनों में बढ़ोतरी से कंपनी के कारोबार में मजबूती का संकेत मिलता है।  ₹15,000 cr जुटाने की तैयारी में रिलायंस तिमाही नतीजों के साथ रिलायंस ने फंड जुटाने की योजना का भी ऐलान किया है. कंपनी के बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके लिए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी किए जाएंगे. आसान भाषा में समझें तो NCD एक तरह का कर्ज होता है. कंपनी इसे निवेशकों को जारी करके उनसे पैसा जुटाती है और तय शर्तों के मुताबिक ब्याज देती है. ये डिबेंचर शेयरों में नहीं बदले जा सकते. रिलायंस इन्हें प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए एक या अधिक चरणों में जारी करेगी. ये डिबेंचर सुरक्षित या असुरक्षित हो सकते हैं।  जियो प्लेटफॉर्म्स का रेवेन्यू ₹47,485 करोड़ रिलायंस की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी दूसरी तिमाही में अच्छी ग्रोथ दर्ज की है. कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.3 फीसदी बढ़कर ₹47,485 करोड़ रहा. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें अच्छी बढ़ोतरी हुई है. जियो का EBITDA भी 16.6 फीसदी बढ़कर ₹21,879 करोड़ पहुंच गया. EBITDA किसी कंपनी की कमाई को समझने का एक पैमाना है. इसमें ब्याज, टैक्स और कुछ अन्य खर्चों को घटाने से पहले की कमाई देखी जाती है. इससे कंपनी के मुख्य कारोबार की कमाई और कामकाज की स्थिति समझने में मदद मिलती है।  जियो के कनेक्टिविटी कारोबार यानी मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं से होने वाले रेवेन्यू में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, डिजिटल सर्विसेज से कमाई 16 फीसदी बढ़ी. कंपनी के मुताबिक, कारोबार से होने वाली कमाई बढ़ने और खर्चों को बेहतर तरीके से संभालने से EBITDA में करीब 17 फीसदी की ग्रोथ हुई. इस दौरान कंपनी का मार्जिन भी सालाना आधार पर 2.5 फीसदी नहीं, बल्कि 250 बेसिस पॉइंट यानी 2.5 प्रतिशत अंक बेहतर हुआ।  जियो का फ्री कैश फ्लो 98% बढ़ा जियो ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान ₹32,130 करोड़ का फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) दर्ज किया. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 98 फीसदी ज्यादा है. फ्री कैश फ्लो का मतलब है कि कारोबार से कमाई और जरूरी निवेश पर खर्च के बाद कंपनी के पास कितना पैसा बचा. यहां इसकी गणना EBITDA में से नकद कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) घटाकर की गई है।  जियो के 5G ग्राहकों की संख्या 30 करोड़ के पार जियो ने दूसरी तिमाही में ग्राहक संख्या के मामले में भी दो बड़े आंकड़े पार किए. कंपनी का 5G मोबाइल ग्राहकों का आधार 30 करोड़ से ज्यादा हो गया है. वहीं, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यानी घर और ऑफिस में इंटरनेट कनेक्शन लेने वाले ग्राहकों की संख्या भी 3 करोड़ के पार पहुंच गई. कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस 54.24 करोड़ रहा. पिछले 12 महीनों में जियो के साथ 3.6 करोड़ नए ग्राहक जुड़े हैं. इसके अलावा जियो का एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) बढ़कर ₹218.8 हो गया. ARPU का मतलब है कि कंपनी हर ग्राहक से औसतन कितनी कमाई कर रही है. इस आंकड़े में बढ़ोतरी का मतलब है कि प्रति ग्राहक कंपनी की कमाई बेहतर हुई है।  जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग को बताया ऐतिहासिक रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग को कंपनी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि जियो के आईपीओ को 22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला और लिस्टिंग के दौरान शेयर में अच्छी बढ़त देखने को मिली. इससे निवेशकों का जियो के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा दिखाई देता है. अंबानी ने कहा कि जियो अब भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।  उन्होंने इसे रिलायंस की वैल्यू बढ़ाने की यात्रा का एक अहम पड़ाव बताया. साथ ही कहा कि कंपनी के संस्थापक चेयरमैन धीरूभाई अंबानी ने 1977 में रिलायंस के आईपीओ के जरिए आम निवेशकों को शेयर बाजार से जोड़ने की जो शुरुआत की थी, उसे जियो की लिस्टिंग ने नई मजबूती दी है. जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,188 करोड़ का आईपीओ 28 अक्टूबर 2026 को पूरा हुआ था. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है।