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तालिबान से बचकर अमेरिका पहुंचे अफगानी अब लौटेंगे अपने देश, 2 नवंबर को रवाना हो सकती है पहली फ्लाइट

 न्यूयॉर्क अमेरिका में रह रहे अफगानियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. वहां हिरासत में लिए गए 150 से अधिक अफगान प्रवासियों को ट्रंप प्रशासन निर्वासित करने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि इन लोगों को जबरन अफगानिस्तान भेजा जाता है तो उन्हें तालिबान शासन में उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।  'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इन लोगों को पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान भेजने की योजना बना रहा है. यदि इस प्लान को अमल में लाया जाता है तो अमेरिका से अफगान नागरिकों के यह सबसे बड़ा निर्वासन अभियान होगा।  इन लोगों में उन लोगों के रिश्तेदार भी शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी सेना के साथ काम किया था. एक समलैंगिक भी इसमें शामिल है, जिसे अफगानिस्तान लौटने पर कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।  अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पहली उड़ान 2 नवंबर को रवाना हो सकती है. इसके तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पहले पाकिस्तान ले जाया जाएगा. फिर सीमा पार कराकर अफगानिस्तान भेजा जाएगा।  यह योजना ट्रंप प्रशासन को अफगान नागरिकों को सीधे निर्वासित करने में आने वाली बड़ी बाधा से बचने का रास्ता देती है. अमेरिका का तालिबान सरकार के साथ राजनयिक संबंध नहीं है. ऐसे में राजनयिक माध्यमों से निर्वासन संभव नहीं है।  इसके अलावा, अमेरिका में कुछ अफगान नागरिकों को अदालतों से कानूनी संरक्षण मिला है, क्योंकि उन्हें अपने देश लौटने पर उत्पीड़न का खतरा हो सकता है।  हैरानी की बात है कि अमेरिका ने इस अभियान की सार्वजनिक रूप से घोषणा नहीं की है. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने वकीलों और अमेरिका के तीन अधिकारियों से बातचीत के आधार पर इस योजना का खुलासा किया है।  रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में देशभर के अलग-अलग आव्रजन हिरासत केंद्रों से अफगान नागरिकों को लुइसियाना स्थित हिरासत केंद्रों में लाया गया है।  पाकिस्तान के रास्ते निर्वासन की प्रस्तावित योजना बनाने के पीछे भी खास वजह है. दरअसल अमेरिकी कानून किसी भी सरकार को ऐसे देशों में लोगों को निर्वासित करने से रोकता है, जहां कोर्ट ने यह निर्धारित किया हो कि उन्हें उत्पीड़न का सामना करने की आशंका है।   

त्योहारी सीजन में घर जाना होगा आसान, दिवाली और छठ के लिए रेलवे ने शुरू कीं 6 स्पेशल ट्रेनें

चंदौली दीपावली और छठ पूजा का त्यौहार नजदीक आ रहा है. ऐसे में बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने तीन जोड़ी नई स्‍पेशल ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया है. इन ट्रेनों के परिचालन से दिल्ली से यूपी बिहार आने जाने वालों को काफी राहत मिलेगी।  इन ट्रेनों के बारे में बताते उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ शिवम शर्मा ने बताया कि रेल प्रशासन द्वारा दीपावली और छठ के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रेनों के संचालन किया जाएगा.उन्होंने बताया कि रेल प्रशासन यात्रियों से अनुरोध करता है कि यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व संबंधित ट्रेन की ताज़ा स्थिति की जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, एनटीईएस और रेलवे हेल्पलाइन से ले सकते हैं।  गाड़ी संख्या 04058/04057 आनंद विहार टर्मिनल–छपरा–आनंद विहार टर्मिनल आरक्षित फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस- गाड़ी संख्या 04058 आनंद विहार टर्मिनल से शुक्रवार एवं मंगलवार को दिनांक 03.11.2026 से 17.11.2026 तक कुल 05 फेरे लगाएगी. गाड़ी संख्या 04057 छपरा से शुक्रवार एवं मंगलवार को दिनांक 03.11.2026 से 17.11.2026 तक कुल 05 फेरे लगाएगी।  गाड़ी संख्या 04058 आनंद विहार टर्मिनल–छपरा विशेष गाड़ी आनंद विहार टर्मिनल से 00:20 बजे प्रस्थान कर इसके बाद 03:50–03:52 बजे टुंडला जंक्शन, 07:20–07:25 बजे गोविंदपुरी, 10:35–10:40 बजे प्रयागराज जंक्शन पहुंचेगी. प्रयागराज जंक्शन से यह गाड़ी प्रयागराज रामबाग होकर 11:43–11:45 बजे ज्ञानपुर रोड, 13:15–13:25 बजे वाराणसी, 13:55–13:57 बजे सारनाथ, 14:28–14:30 बजे औड़िहार जंक्शन, 15:35–15:45 बजे गाजीपुर सिटी, 16:53–16:55 बजे पेफना जंक्शन, 17:10–17:12 बजे बलिया, 17:50–17:52 बजे रेवती, 18:09–18:11 बजे सुरेमनपुर और 19:20 बजे छपरा पहुंचेगी।  वापसी मे गाड़ी संख्या 04057 छपरा–आनंद विहार टर्मिनल विशेष गाड़ी छपरा से 22:10 बजे प्रस्थान कर 22:48–22:50 बजे सुरेमनपुर, 23:05–23:07 बजे रेवती, 23:53–23:55 बजे बलिया, 00:13–00:15 बजे पेफना जंक्शन, 01:15–01:25 बजे गाजीपुर सिटी, 02:28–02:30 बजे औड़िहार जंक्शन, 02:53–02:55 बजे सारनाथ, 03:35–03:45 बजे वाराणसी, 04:48–04:50 बजे ज्ञानपुर रोड तथा 05:55–06:00 बजे प्रयागराज जंक्शन पहुंचेगी। इसके बाद 08:50–08:55 बजे गोविंदपुरी, 12:10–12:12 बजे टुंडला जंक्शन और 16:30 बजे चिपियाना बुजुर्ग से पास होकर 17:20 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।  गाड़ी संख्या 05087/05088 मऊ–आनंद विहार टर्मिनल–मऊ विशेष गाड़ी       गाड़ी संख्या 05087 मऊ से 03.11.2026 एवं 10.11.2026 को कुल 02 फेरे  और गाड़ी संख्या 05088 आनंद विहार टर्मिनल से 04.11.2026 एवं 11.11.2026 को कुल 02 फेरे के लिए चलाई जाएगी।  गाड़ी संख्या 05087 मऊ–आनंद विहार टर्मिनल विशेष गाड़ी मऊ से 22:30 बजे प्रस्थान कर 22:53–22:55 बजे मुहम्मदाबाद (MMA), 23:25–23:30 बजे आजमगढ़ (AMH), 00:10–00:12 बजे खोरासन रोड (KRND), 01:10–01:15 बजे शाहगंज (SHG), 01:53–01:55 बजे जौनपुर जंक्शन (JNU), 02:58–03:00 बजे जंघई जंक्शन (JNH), 05:20–05:22 बजे प्रयाग (PRG) और 05:40–05:45 बजे प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) पहुंचेगी. 08:40–08:45 बजे गोविंदपुरी, 11:58–12:00 बजे टुंडला जंक्शन, 16:21–16:23 बजे गाजियाबाद तथा 17:00 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।      वापसी मे गाड़ी संख्या 05088 आनंद विहार टर्मिनल–मऊ विशेष गाड़ी आनंद विहार टर्मिनल से 19:15 बजे प्रस्थान कर 19:48–19:50 बजे गाजियाबाद, 23:30–23:32 बजे टुंडला जंक्शन, 02:30–02:35 बजे गोविंदपुरी तथा 05:50–05:55 बजे प्रयागराज जंक्शन पहुंचेगी। 09:03–09:05 बजे जंघई जंक्शन, 10:18–10:20 बजे जौनपुर जंक्शन, 10:52–10:54 बजे शाहगंज, 11:55–11:57 बजे खोरासन रोड, 12:40–12:45 बजे आजमगढ़, 13:15–13:17 बजे मुहम्मदाबाद तथा 14:00 बजे मऊ पहुंचेगी।      गाड़ी संख्या 05091/05092 गोरखपुर–बांद्रा टर्मिनस–गोरखपुर साप्ताहिक विशेष गाड़ी- गाड़ी संख्या 05091 गोरखपुर से 09.11.2026 एवं 16.11.2026 को कुल 02 फेरे और गाड़ी संख्या 05092 बांद्रा टर्मिनस से 11.11.2026 एवं 18.11.2026 को कुल 02 फेरे के लिए चलाई जाएगी।  गाड़ी संख्या 05091 गोरखपुर–बांद्रा टर्मिनस ट्रेन गोरखपुर जंक्शन से सोमवार को 21:55 बजे प्रस्थान कर 23:20–23:22 बजे बस्ती, 01:10–01:15 बजे गोंडा जंक्शन, 04:00–04:02 बजे बादशाहनगर तथा 04:50–05:00 बजे ऐशबाग पहुंचेगी. 07:20–07:25 बजे कानपुर सेंट्रल, 11:30–11:35 बजे टुंडला जंक्शन, 12:45–12:50 बजे ईदगाह आगरा, 16:05–16:10 बजे गंगापुर सिटी, 18:15–18:20 बजे कोटा जंक्शन, 19:26–19:28 बजे भवानी मंडी, 21:35 बजे नागदा जंक्शन से पास होकर 22:25–22:30 बजे रतलाम जंक्शन, 01:25 बजे गोधरा जंक्शन से पास होकर 04:10–04:15 बजे वडोदरा जंक्शन, 06:40–06:45 बजे सूरत, 08:00–08:02 बजे वापी, 11:08–11:10 बजे बोरीवली तथा बुधवार को 12:00 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी।  वापसी मे गाड़ी संख्या 05092 बांद्रा टर्मिनस–गोरखपुर ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से बुधवार को 13:45 बजे प्रस्थान कर 14:20–14:22 बजे बोरीवली, 15:51–15:53 बजे वापी, 17:00–17:05 बजे सूरत, 18:40–18:45 बजे वडोदरा जंक्शन, 20:55 बजे गोधरा जंक्शन से पास होकर 23:30–23:35 बजे रतलाम जंक्शन, 00:20 बजे नागदा जंक्शन से पास होकर 01:58–02:00 बजे भवानी मंडी, 03:30–03:40 बजे कोटा जंक्शन, 06:06–06:11 बजे गंगापुर सिटी, 07:40 बजे बयाना जंक्शन से पास होकर 09:10–09:15 बजे ईदगाह आगरा, 10:55–11:00 बजे टुंडला जंक्शन, 15:10–15:15 बजे कानपुर सेंट्रल, 17:30–17:40 बजे ऐशबाग, 18:00–18:02 बजे बादशाहनगर, र 20:40–20:45 बजे गोंडा जंक्शन, 22:16–22:18 बजे बस्ती तथा गुरुवार को 23:55 बजे गोरखपुर जंक्शन पहुंचेगी। 

त्योहारी भीड़ के बीच कासगंज डिपो का बड़ा फैसला, दीपावली पर नहीं रुकेगी बसों की सेवा

कासगंज  दीपावली पर यात्रियों की बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए रोडवेज ने बसों के संचालन की तैयारी शुरू कर दी है। डिपो की सभी 107 बसों को ऑनरूट रखने की योजना बनाई गई है। इसके लिए एआरएम ने वर्कशॉप कर्मियों को बसों की मरम्मत और रखरखाव का काम समय से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। त्योहार पर नौकरीपेशा लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में अन्य यात्री अपने घरों और गंतव्य तक पहुंचने के लिए रोडवेज बसों का सहारा लेते हैं। ऐसे में बसों की उपलब्धता बनाए रखना विभाग के सामने चुनौती रहती है। इसे देखते हुए डिपो प्रशासन ने पहले से ही व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। वर्कशॉप कर्मचारियों के अवकाश रहेंगे निरस्त डिपो में कुल 107 बसें हैं। एआरएम ने निर्देश दिए हैं कि दीपावली के दौरान कोई भी बस अनावश्यक रूप से वर्कशॉप में खड़ी न रहे। जिन बसों में तकनीकी खराबी है, उनकी मरम्मत प्राथमिकता से कराई जाए, ताकि सभी बसें यात्रियों के लिए उपलब्ध रहें। बसों की नियमित जांच और रखरखाव पर भी ध्यान देने को कहा गया है। त्योहार पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए डिपो ने शुरू की तैयारी प्रभारी एआरएम नीरज कुमार ने बताया कि त्योहार के दौरान बसों का संचालन बाधित न हो, इसके लिए वर्कशाप कर्मचारियों के अवकाश भी निरस्त कर दिए गए हैं। कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। रोडवेज का प्रयास है कि उपलब्ध बसों का पूरा उपयोग हो और दीपावली पर यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी न उठानी पड़े।  

सोनम रघुवंशी कहां हैं और अब क्या होगा? जमानत पर रोक लगाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई

इंदौर  'सोनम रघुवंशी कहां हैं?' यह सवाल हाल फिलहाल आपके मन में भी आया होगा। पिछले दिनों नीचे ड्रम कांड की आरोपी मुस्कान और साहिल पर कोर्ट का फैसला आने के बाद इंदौर से लेकर मेघालय तक यह सवाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बहुचर्चित हनीमून हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपी सोनम रघुवंशी इस समय कहां और किस हाल में है। फिलहाल शिलॉन्ग में है सोनम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि सोनम रघुवंशी जेल से रिहाई के बाद वर्तमान में शिलॉन्ग में ही मौजूद है। ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत की कानूनी शर्तों के तहत उसे शिलॉन्ग में ही रहने का निर्देश दिया गया है, और वह उन्हीं शर्तों का पालन कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने साल 2025 में मेघालय के सोहरा क्षेत्र में अपने व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान साजिश के तहत हत्या करवा दी थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि उसने किराए के हत्यारों की मदद से इस वारदात को अंजाम दिया था। पति का शव 2 जून 2025 को एक गहरी खाई से बरामद हुआ था, जिसके बाद जून के अंत में उसे गिरफ्तार किया गया था। 29 जून को कोर्ट ने दी जमानत इस मामले में 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी थी। इसके विरोध में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुक्रवार को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने मामले की सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल ने उठाए थे सवाल राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सोनम के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और उसे केवल तकनीकी आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता। हालांकि, बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन यह नोट किया कि आरोपी पहले ही जेल से रिहाई पा चुकी है और जमानत की शर्तों के अनुसार शिलॉन्ग में रह रही है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के दोबारा खुलने पर तय की है।  

नेशनल हेराल्ड की बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक अधर में, BDA को कोर्ट से झटका

भोपाल   राजधानी भोपाल के एमपी नगर स्थित प्रेस कांप्लेक्स में नेशनल हेराल्ड की जमीन को लेकर भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) को करारा झटका लगा है. भोपाल जिला अदालत ने बीडीए के दावे को खारिज कर दिया है. बीडीए ने बेदखली के लिए केस लगाया था. प्रेस कॉम्प्लेक्स में 1981 में ये 1.14 एकड़ जमीन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को आवंटित हुई थी. बीडीए ने जमीन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।  बीडीए ने दायर किया था बेदखली का केस भोपाल जिला अदालत ने बीडीए की ओर से दायर बेदखली का सिविल केस खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद भी जमीन पर बनी इमारत के स्वामित्व, उसके अलग-अलग हिस्सों की खरीद-बिक्री और संपत्ति के कथित दुरुपयोग से जुड़े विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं. इनसे संबंधित कुछ अन्य मामले अदालत में विचाराधीन हैं. नेशनल हेराल्ड की जमीन पर हिंदी दैनिक 'नवजीवन' का प्रकाशन किया जाता था. वर्ष 1992 में अखबार का प्रकाशन बंद हो गया. इसके बाद कर्मचारियों के वेतन और अन्य देयकों के भुगतान से जुड़ा मामला जबलपुर हाई कोर्ट में विचाराधीन रहा।  जमीन के इस्तेमाल को लेकर उठा विवाद अखबार का प्रकाशन बंद होने के बाद इस जमीन पर निर्माण और उसके उपयोग को लेकर विवाद सामने आया. आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2001 में कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर गंगा एंटरप्राइजेज, नई दिल्ली के नरेंद्र कुमार मित्तल ने यहां बड़ी इमारत का निर्माण कराया. बाद में इमारत के विभिन्न हिस्से अलग-अलग लोगों को बेचे जाने की बात सामने आई. भोपाल में हरमहेंद्र सिंह बग्गा और संजय सिन्हा के नाम भी इस पूरे मामले से जुड़े रहे हैं. संजय सिन्हा का कार्यालय भी इसी इमारत में बताया जाता है।  साल 2014 में BDA ने जारी किया था नोटिस जमीन के कथित दुरुपयोग को लेकर BDA ने वर्ष 2014 में AJL को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन मोतीलाल वोरा की ओर से जवाब दिया गया, लेकिन प्राधिकरण उससे संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद BDA ने आवंटन निरस्त करने और जमीन से बेदखली की मांग करते हुए सिविल अदालत में मामला दायर किया. लंबी सुनवाई के बाद शनिवार को विशेष सत्र न्यायधीश शीला मैना यादव ने BDA का बेदखली संबंधी दावा खारिज कर दिया।  इमारत के खरीदारों ने भी किया मालिकाना हक का दावा इमारत के अलग-अलग हिस्से खरीदने वाले लोगों ने भी संपत्ति पर अपने-अपने अधिकारों का दावा किया. कुछ खरीदारों ने हाई कोर्ट से स्थगन आदेश हासिल किए थे. इसके चलते संपत्ति के स्वामित्व और कब्जे से संबंधित विवाद अलग-अलग स्तर पर जारी रहे. नेशनल हेराल्ड की संपत्ति और मशीनरी हड़पने के आरोपों से संबंधित आपराधिक मामला भी भोपाल की अदालत में विचाराधीन है. इस मामले में नरेंद्र कुमार मित्तल को अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है।  बिल्डिंग पर विवाद जारी, अदालत पर नजरें मित्तल के पूर्व पार्टनर और इस आपराधिक मामले के आरोपी हरमहेंद्र सिंह बग्गा ने इमारत में खरीदे गए हिस्से का मालिक घोषित किए जाने की मांग करते हुए अलग सिविल मुकदमा दायर किया है. इसके अलावा दो अन्य खरीदारों ने भी अपने मालिकाना हक की घोषणा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. फिलहाल, BDA का बेदखली संबंधी दावा खारिज होने के बावजूद प्रेस कॉम्प्लेक्स की इस संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. इमारत के स्वामित्व, खरीदारों के दावों और संपत्ति से जुड़े आपराधिक मामले में अदालतों के आगामी फैसले इस विवाद की आगे की दिशा तय करेंगे। 

संघर्ष से सफलता तक का सफर, IAS प्रीति मैथिल केंद्र में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए एंपैनल्ड

भोपाल  केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT ने मध्य प्रदेश कैडर की 2009 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रीति मैथिल को केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव या उसके समकक्ष स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए हरी झंडी दे दी है। उनकी फाइल को पहले 'लेफ्ट-ओवर' कैटेगरी में रखा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। इस नए प्रशासनिक विकास के साथ ही वह केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में वरिष्ठ नीति निर्माण और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए पात्र हो गई हैं। वर्तमान में प्रीति मैथिल मध्य प्रदेश क्षेत्र के लिए भोपाल स्थित ट्राइफेड (Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India) में महाप्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनका यह वर्तमान असाइनमेंट नॉन-सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम पद के अंतर्गत आता है। संघर्ष से सफलता तक का सफर प्रीति मैथिल की यह उपलब्धि उनके संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का एक अनूठा उदाहरण है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में 5 जुलाई 1985 को जन्मीं प्रीति का शुरुआती जीवन आर्थिक तंगी के बीच बीता। उनके पिता संतोष कुमार ने पहले भोपाल शुगर मिल में दैनिक वेतन भोगी मजदूर के रूप में काम किया और नौकरी छूटने के बाद परिवार का भरण-पोषण करने के लिए छोटे पैमाने पर खेती का सहारा लिया। तमाम वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की शिक्षा पर पूरा जोर दिया। कृषि की पढ़ाई में मिला है गोल्ड मेडल उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा शारदा विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से संबद्ध सीहोर के राफ अहमद किदवई कृषि कॉलेज से कृषि विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की, जहां उन्हें उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। अपनी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के दम पर उन्होंने साल 2008 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में मात्र 23 वर्ष की आयु में ऑल इंडिया रैंक 92 हासिल की और आईएएस के लिए चुनी गईं। कई जिलों में रही कलेक्टर और डीएम आईएएस बनने के बाद प्रीति मैथिल ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अपनी प्रशासनिक छाप छोड़ी है। उन्होंने सागर, रीवा और मंडला जिलों में बतौर कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट सफलतापूर्वक काम किया है। इसके अलावा उन्होंने राज्य शासन में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में कमिश्नर-सह-डाइरेक्टर और सचिव स्तर की जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। इसके अतिरिक्त वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के अपर सचिव के रूप में भी उच्च स्तरीय प्रशासनिक समन्वय और नीतिगत निर्णय लेने का कार्य कर चुकी हैं। संयुक्त सचिव एंपैनल्मेंट का क्या है मतलब? केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव या समकक्ष पदों के लिए एंपैनल्मेंट होना वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है। इस प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में नीति निर्माण, कार्यक्रम क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय के लिए योग्य अधिकारियों का चयन किया जाता है। हालांकि, एंपैनल्मेंट का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी को तुरंत किसी विशेष मंत्रालय में पदस्थ कर दिया गया है; इसके लिए अलग से आधिकारिक नियुक्ति आदेश जारी किया जाता है। बहरहाल, इस ताजा आदेश के साथ ही प्रीति मैथिल का केंद्र सरकार में वरिष्ठ पदों पर सेवा देने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए तीन किस्तों में लिया जाएगा ₹4,000 करोड़ का ऋण

भोपाल  प्रदेश सरकार तीन नवंबर को एक बार फिर बाजार से चार हजार करोड़ रुपये का ऋण लेगी। यह तीन किस्तों में अलग-अलग अवधि के लिए लिया जाएगा। इस राशि का उपयोग सिंचाई, बिजली, सड़क और एक्सप्रेस-वे जैसी विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत निवेश बढ़ाने पर जोर वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार के ऋण लेने की सीमा 87 हजार करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 44 हजार 900 करोड़ रुपये का बाजार ऋण लिया गया है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूंजीगत निवेश लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस वर्ष यह एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जो ऋण लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रावधान की सीमा में है। प्रदेश के ऊपर सवा पांच लाख करोड़ रुपये का ऋण है।  

Rules Change From 1 November: गैस सिलेंडर से मोबाइल तक बड़े बदलाव, आज से लागू हुए नए नियम

नई दिल्ली देश में वित्तीय नियमों में रविवार 1 नवंबर से बदले। GST काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग और रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए कदम उठाए हैं। इससे कारोबारियों को टैक्स नोटिस और रिफंड में राहत मिलेगी। साथ ही SEBI भी म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाने जा रहा है। जीएसटी कानून में बदलाव जीएसटी काउंसिल ने कई तरह के सुधारों की सिफारिश की है। इनके लिए कानून में संशोधन की जरूरत नहीं है। इन्हें 1 नवंबर से लागू किया जा सकता है। वहीं, कानून से जुड़े कुछ बदलावों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को myGov पोर्टल पर GSTR-1, GSTR-1A और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) के ड्राफ्ट फॉर्म आम जनता की सलाह के लिए डालेगा। इन संशोधित फॉर्म्स को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। योग्य GST रिफंड का ऑटोमेटेड अप्रूवल 1 नवंबर के बाद शुरू होने की उम्मीद है। कॉल करने वाले का नाम दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने आदेश दिया है कि सभी टेलीकॉम ऑपरेटर 1 नवंबर, 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी) सेवा को लागू करें। इस सेवा का लाभ उठाने वाले मोबाइल उपयोगकर्ताओं को इनकमिंग कॉल पर कॉल करने वाले का नाम और नंबर दोनों दिखाई देंगे। इससे कॉल की पहचान करना आसान हो जाएगा और इसका मुख्य उद्देश्य सटीकता और सुरक्षा में सुधार लाना है। इस पहल के तहत, टेलीकॉम कंपनियों ने पहले से ही 4जी और उससे अधिक तकनीकों पर इसकी टेस्टिंग कर ली है। म्यूचुअल फंड में बदलाव सेबी भी बड़ा बदलाव करते हुए 1 नवंबर से असेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के डिजिटल प्लैटफॉर्म्स पर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान को बाय डिफॉल्ट ऑप्शन बनाने जा रहा है। इसका मतलब है कि अगर कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है, तो उसे इसके ज्यादा एक्सपेंस रेशियो (लागत) के बारे में पहले जानकारी दी जाएगी। सेबी नियमों को सरल बनाने की कोशिशों के तहत लिस्टिंग और डिस्क्लोजर के नियमों की समीक्षा कर रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। इससे खासकर 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बदलाव हो सकता है। 1 सितंबर को इसकी कीमत में बढ़ोतरी की गई थी। फिलहाल दिल्ली में इसकी कीमत 2810 रुपये है जबकि बिना सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जीवन प्रमाण पत्र पेंशनर्स को हर साल जीवन प्रमाण पत्र देना पड़ता है। 80 साल से कम उम्र वाले पेंशनर 1 नवंबर से अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं। अमूमन इसकी डेडलाइन 30 नवंबर तक होती है। इसे जमा नहीं करने पर आपकी पेंशन स्थायी रूप से रोकी जा सकती है। लाइफ सर्टिफिकेट जमा होने पर पेंशन फिर से चालू हो जाती है। आप घर बैठे मोबाइल से अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, रिपोर्ट के बाद होंगे ये 5 अहम बदलाव?

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। बीते अक्टूबर महीने में वेतन आयोग ने बेंगलुरु और मुंबई में 2 अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों के बाद अब तक वेतन आयोग के नए शेड्यूल का अपडेट नहीं आया है। ऐसे में ज्यादातर लोग अब ये मान रहे हैं कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। हालांकि, इसके बारे में आधिकारिक तौर पर किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई है लेकिन एक सच ये जरूर है कि वेतन आयोग को अगले साल की पहली छमाही में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देनी है। अब सवाल है कि क्या सिफारिशों को सौंपे जाने के तुरंत बाद इसे लागू कर दिया जाएगा? आइए समझ लेते हैं कि आखिर वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद क्या कुछ होगा। इन 5 चरणों से गुजरेगी प्रक्रिया सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी: 8वें वेतन आयोग द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद केंद्र सरकार इसकी समीक्षा करेगी और फिटमेंट फैक्टर, मूल वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा से जुड़ी शर्तों जैसे पहलुओं पर दी गई सभी सिफारिशों को बारिकी से समझेगी। सिफारिशों पर विचार: इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि 8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) में दिए गए नियमों और विनियमों के दायरे में रहते हुए, किन प्रस्तावों, सुझावों और शिकायतों को स्वीकार किया जाए। इसके अलावा, सरकार को ही यह तय करना है कि किन सिफारिशों में बदलाव किया जाएगा या किसे खारिज कर दिया जाएगा। यह निर्णय प्रशासनिक, वित्तीय और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। मुद्दों की गहन जांच: कुछ सिफारिशों, विशेष रूप से भत्तों, पेंशन या उन्हें लागू करने से जुड़ी चिंताओं के मामले में अतिरिक्त जांच या किसी समिति द्वारा समीक्षा की जरूरत हो सकती है। लागू करने का निर्णय: अंतिम निर्णय लिए जाने के बाद केंद्र सरकार एक नई अधिसूचना और जरूरी आदेश जारी करेगी। इसमें संशोधित वेतन संरचना, लागू होने वाले नियम-कानून और प्रभावी तारीखों का विवरण होगा। तारीख तय: केंद्र सरकार एक तारीख तय करेगी और संबंधित कर्मचारी यूनियनों, संघों और पेंशनभोगियों को इसकी सूचना देगी। इसी तारीख से 8वां वेतन आयोग आधिकारिक तौर पर लागू माना जाएगा। इसके बाद, संबंधित विभाग पात्र कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतन और पेंशन लाभों की गणना करेंगे। फिर, सरकारी आदेशों के अनुसार बकाया राशि (एरियर) का भुगतान किया जाएगा। अभी कितना इंतजार करना होगा? बता दें कि 8वें वेतन आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। इस हिसाब से रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा करीब 3 मई 2027 बनती है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आयोग मई 2027 के आसपास अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है।

नक्सलवाद के खौफ से बाहर निकल रहे गांव, अब ग्रामीणों की समस्याएं जानने पहुंच रही प्रशासनिक टीमें

बालाघाट  कभी बंदूक और हिंसा की दहशत झेलने वाले बालाघाट के 100 गांवों में अब विकास की नई सुबह लाने की तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन दूरदराज के नक्सल प्रभावित इलाकों के कायाकल्प के लिए एक विशेष मेगा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रशासनिक अमला सीधे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं का समाधान कर रहा है। गांवों में 14 दिनों तक आवश्यकताओं का आकलन करेंगे प्रदेश सरकार ने बालाघाट जिले के 100 नक्सल प्रभावित गांवों के विकास के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। यह अभियान 29 अक्टूबर को शुरू हुआ और इसका उद्देश सरकारी योजनाओं का फायदा ग्रामीणों तक पहुंचाना है। इस योजना के तहत, विभिन्न विभागों के कर्मचारी इन गांवों में 14 दिनों तक जाकर यहां की आवश्यकताओं का आकलन करेंगे और विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे। सरकार ने 100 गांवों को चार समूहों में बांटा है। अधिकारियों ने बताया कि 'ग्रामीणों की मूल जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और विकास की संभावनाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।' इस जानकारी के आधार पर, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाए और रोजगार से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर, 26 अक्टूबर को एक टीम ने गांवों का दौरा किया। इस टीम में लंजी के उप-जिला मजिस्ट्रेट आदित्य नारायण तिवारी शामिल थे, जिन्होंने कल सेवर, कट्टीपर, सतना व बारगुड़ गांवों का दौरा किया। वहीं, बाइहर के एसडीएम अनिकेत शांडिल्य ने दादेक्सा, बिलालकासा और अन्य गांवों का दौरा किया। इसी क्रम में, ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा के कार्यकारी इंजीनियर मनोज धुर्वे ने किरनपुर क्षेत्र में ग्रामीणों से बातचीत की। मूलभूत सुविधाओं की डिमांड सबसे ज्यादा 28 अक्टूबर को, कलेक्टर आदित्य सिंह ने गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान गांवों में सड़कों, पुलों, पीने के पानी, सिंचाई, स्कूल भवन, आंगनवाड़ी भवन और बिजली की सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया। 'सरकारी सुविधाओं के स्तर के आधार पर आवश्यक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे,' एक अधिकारी ने बताया। सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका से संबंधित अवसर उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि गांवों में रोजगार के अवसरों को विकसित करने के लिए एक योजना तैयार की जाए। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बालाघाट के कलेक्टर आदित्य सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित 14 दिनों के भीतर चुने गए गांवों का दौरा पूरा करें और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। 'इन 100 नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, युवाओं और आदिवासी समुदायों को शिक्षा, रोजगार और आत्म-रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं,' ऐसा अधिकारी ने कहा। इस तरह से, मध्य प्रदेश की सरकार इन गांवों को विकास की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर रही है। यह अभियान यह सुनिश्चित करेगा कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और उनकी जिंदगी में सुधार हो।