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मणिमहेश में शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, रात 12:14 बजे तक रहेगा शुभ मुहूर्त

मणिमहेश 

उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान शिव के धाम मणिमहेश पहुंच रहे श्रद्धालु पवित्र ‘डल झील’ में सुबह से ही आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस मौके पर हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मणिमहेश यात्रा 2026 आधिकारिक तौर पर 19 सितंबर तक चलेगी।

मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है। जिला चंबा प्रशासन के अनुसार, कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 18,564 फीट है। मणिमहेश को भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ माना जाता है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पवित्र डल झील में स्नान के लिए पहुंचते हैं।

हड़सर से 13 किलोमीटर पैदल चढ़ाई
मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हड़सर से करीब 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। हड़सर तक वाहन पहुंचते हैं। इसके बाद यात्रा पैदल शुरू होती है। रास्ते में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं। इसके आगे चढ़ाई पार कर मणिमहेश डल झील तक पहुंचा जाता है।

झील से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं। मान्यता के अनुसार, गौरी कुंड और शिव क्रोत्री में क्रमश: माता पार्वती और भगवान शिव ने स्नान किया था। ज्यादातर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, मगर काफी लोग हेलीटैक्सी से भी मणिमहेश पहुंचते हैं। प्रशासन ने इस बार चार हेलीटैक्सी के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए करार किया है।

राधाष्टमी पर होगा बड़ा शाही स्नान
जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर राधाष्टमी पर होने वाले बड़े शाही स्नान पर है। यह 18 और 19 सितंबर को होगा। मणिमहेश यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

इस बार मौसम भी दे रहा साथ
यात्रा के दौरान इस बार मौसम श्रद्धालुओं का साथ दे रहा है। मौसम अनुकूल रहने से पैदल ट्रैक पर आवाजाही सुगम बनी हुई है। प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर निगरानी कर रहा है। एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि जन्माष्टमी के शाही स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं।

डल झील में शाही स्नान चल रहा है। पिछले साल भारी बारिश और बादल फटने के कारण मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी मुश्किलें आई थीं। 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु भरमौर से मणिमहेश के रास्ते में फंस गए थे।

यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य
प्रशासन ने इस बार मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया है। श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण कराने और उसकी रसीद साथ रखने की सलाह दी गई है। हड़सर बेस कैंप पर स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे यात्रा की अनुमति दी जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, टॉर्च और उचित जूते साथ रखने की अपील की है।

यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान शिव के धाम मणिमहेश में पवित्र डल झील में स्नान है। जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब 18-19 सितंबर को होने वाले बड़े शाही स्नान को लेकर भी प्रशासन और श्रद्धालुओं में उत्साह है।

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