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Tata Curvv Series X हुई लॉन्च, ₹10 लाख से कम कीमत में मिलेंगे धांसू फीचर्स

 नई दिल्ली टाटा ने अपनी दमदार एसयूवी कर्व की नई रेंज को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने कर्व सीरीज एक्स रेंज को इंट्रोड्यूस किया है. कर्व एक्स रेंज मौजूदा स्टैंडर्ड वर्जन को रिप्लेस करेगा. ब्रांड की मानें, तो नई रेंज में कंज्यूमर्स को बेहतर वैल्यू मिलेगी. आसान भाषा में कहें, तो इस कार में कंज्यूमर्स को एक्स्ट्रा वैल्यू मिलेगी।  कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में उपलब्ध होगी. टाटा ने नई रेंज में वेरिएंट लाइनअप को रिशफल किया है. इसके लिए कम कीमत में कंपनी ने हायर वेरिएंट्स के फीचर्स को जोड़ा है, जिससे लोगों को ज्यादा बेहतर वैल्यू मिलेगी. आइए जानते हैं नई रेंज की डिटेल्स।    कितनी है कीमत?  कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में आती है, जिसमें स्मार्ट एक्स, प्योर एक्स, प्योर एक्स प्लस, क्रिएटिव एक्स प्लस, एकॉम्प्लिश एक्स और एकॉम्प्लिश एक्स प्लस का विकल्प मिलता है. कंज्यूमर्स 5 कलर ऑप्शन- प्रिस्टीन वॉइट, प्योर ग्रे, नाइट्रो क्रिमसन, ओपेरा ब्लू और ऑब्सीडियन ब्लैक में कार को खरीद पाएंगे।  टाटा कर्व सीरीज एक्स की कीमत 9.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत स्मार्ट एक्स वेरिएंट की है. वहीं प्योर एक्स वेरिएंट की कीमत 11 लाख रुपये से शुरू होती है. सीरीज का टॉप वेरिएंट एकॉम्प्लिश एक्स प्लस 18.50 लाख रुपये और इसका डार्क एडिशन 18.75 लाख रुपये एक्स शोरूम पर आता है।  क्या होगा कार में खास?  कर्व सीरीज एक्स के लोअर वेरिएंट्स में ज्यादा फीचर्स मिलते हैं. कार में 10.25 इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन प्योर एक्स वेरिएंट से मिलना शुरू हो जाएगी. इसके अलावा सीरीज में वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कार प्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, पुश बटन स्टार्ट और ऑटो फोल्डिंग ओआरवीएम्स मिलेंगे।  हायर वेरिएंट्स में 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, मल्टीपल ड्राइव मोड्स, फ्रंट और रियर यूएसबी पोर्ट और एक कूल्ड ग्लफबॉक्स मिलता है. कैबिन में लाइटर इंटीरियर दिया गया है, जिससे इंटीरियर ज्यादा एयरी फील होता है. रियर पैसेंजर्स के लिए कार में अलग से एसी वेंट्स, रियर आर्मरेस्ट और रिक्लाइनिंग रियर सीट्स मिलती हैं।  अन्य फीचर्स की बात करें, तो कार में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है. कार में पैनोरोमिक सनरूफ, ब्लाइंड व्यू मॉनिटर, रेन सेंसिंग वाइपर और ऑटोमेटिक हेडलैम्प्स मिलेंगे. सेफ्टी की बात करें, तो कार में 6 एयरबैग, ईपीएस, हिल-होल्ड कंट्रोल, एबीएस, ईबीडी और रियर पार्किंग सेंसर मिलते हैं. कार के इंजन ऑप्शन में कोई बदलाव नहीं है. ये कार तीन इंजन ऑप्शन में आएगी।   

पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने रचा नया कीर्तिमान, पहली बार सफलतापूर्वक हुई ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’

पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने पहली बार सफलतापूर्वक किया ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’ सतपुड़ा ताप विद्युत गृह और इंदिरा सागर जल विद्युत परियोजना का संयुक्त अभ्यास ब्लैकआउट के बाद बिजली बहाली की क्षमता को परखा  भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने अपने इतिहास में पहली बार ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी और इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना, खंडवा के संयुक्त अभ्यास में संभावित पूर्ण अथवा आंशिक ब्लैकआउट के बाद विद्युत उत्पादन प्रणाली को सुरक्षित एवं चरणबद्ध तरीके से पुनः संचालित करने की तैयारियों का परीक्षण किया गया। यह महत्वपूर्ण तकनीकी अभ्यास भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (IEGC)-2023 के प्रावधानों के अनुरूप आयोजित किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन स्थिति में विद्युत ग्रिड के पुनर्बहाली तंत्र, विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था तथा निर्धारित पुनर्स्थापना प्रक्रिया की व्यावहारिक जांच की गई। इंदिरा सागर से सतपुड़ा ताप विद्युत गृह को दी गई बिजली सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में आयोजित यह मॉक ड्रिल प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 1:51 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। अभ्यास के दौरान आयलैंडिंग व्यवस्था के माध्यम से इंदिरा सागर जल विद्युत गृह से विद्युत आपूर्ति लेकर MPPGCL के 500 मेगावाट (2×250 मेगावाट) क्षमता वाले सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की आपातकालीन स्टार्ट-अप क्षमता का परीक्षण किया गया। इस दौरान 400 केवी प्रणाली को चार्ज करने, स्टेशन ट्रांसफॉर्मर को ऊर्जीकृत करने तथा आवश्यक सहायक विद्युत प्रणालियों को निर्धारित क्रम में बहाल करने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। पूरे अभ्यास के दौरान विद्युत प्रणाली के प्रमुख तकनीकी मानकों की सतत निगरानी की गई। मॉक ड्रिल निर्धारित समय-सीमा और तकनीकी मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक पूरी हुई। क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल ब्लैक स्टार्ट ऐसी विशेष प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में विद्युत उत्पादन केंद्र को बाहरी ग्रिड आपूर्ति उपलब्ध न होने पर भी चरणबद्ध तरीके से पुनः प्रारंभ किया जाता है। इसके लिए स्व-प्रारंभ क्षमता वाले विद्युत स्रोतों की सहायता से पहले आवश्यक सहायक प्रणालियों को ऊर्जा उपलब्ध कराई जाती है और इसके बाद क्रमशः बड़ी उत्पादन इकाइयों को चालू किया जाता है। इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपातकालीन स्थिति में विद्युत उत्पादन केंद्रों, लोड डिस्पैच केंद्रों और अन्य संबद्ध एजेंसियों के बीच समन्वय, संचार तथा ग्रिड पुनर्बहाली क्षमता का परीक्षण करना है। ग्रिड पुनर्बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में पहली बार आयोजित इस ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की सफलता को कंपनी की परिचालन एवं तकनीकी तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अभ्यास से आपात स्थिति में विभिन्न तकनीकी टीमों के बीच समन्वय और विद्युत आपूर्ति की चरणबद्ध बहाली की क्षमता का प्रभावी परीक्षण हुआ। मॉक ड्रिल में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC), इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना तथा सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के अभियंताओं और तकनीकी कार्मिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विद्युत गृह प्रमुख मुख्य अभियंता एस.के. लिल्हौरे, अधीक्षण अभियंता यशवंत वराठे सहित अन्य अभियंता उपस्थित थे।  

पंजाब का अजब विरोधाभास: विदेश पलायन के बीच वोटरों की संख्या में 45 लाख का इजाफा

चंडीगढ़   पंजाब में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। राज्य के गांवों और शहरों से युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश जा रहे हैं। इसके बावजूद पंजाब की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यह स्थिति राज्य के बदलते सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है। 2009 से 2024 के बीच पंजाब में मतदाताओं की संख्या में करीब 45 लाख की वृद्धि हुई। यह संख्या 1.69 करोड़ से बढ़कर 2.14 करोड़ से अधिक हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में 1,69,58,380 मतदाता थे। 2022 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा 2,14,99,804 तक पहुंच गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदाता आधार करीब 2.15 करोड़ रहा। हालांकि, इसी दौरान मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 78.60 फीसदी मतदान हुआ था। यह 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 62.80 फीसदी रह गया। मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का उत्साह कम हुआ है। विदेश जाने की होड़ इसी अवधि में पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की होड़ तेज हुई है। प्रवासन अध्ययनों के अनुसार कुल विदेश प्रवासन का 73.16 फीसदी हिस्सा 2016 के बाद का है। कनाडा 41.88 फीसदी के साथ पंजाबियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य है। दुबई 16.25 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 9.63 फीसदी के साथ अन्य प्रमुख गंतव्य हैं। 2016 के आसपास 75 हजार विद्यार्थी सालाना कनाडा जाते थे, जो 2022 से 2024 के बीच बढ़कर 1.35 लाख से 1.50 लाख हो गए। उच्च शिक्षा पर असर और आर्थिक बोझ विदेश जाने की इस दौड़ का असर राज्य की उच्च शिक्षा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की कमी आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 14,342 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए 5,636 करोड़ रुपये की कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां बेची गईं। एक बच्चे को विदेश भेजना कई परिवारों के लिए लाखों रुपये की परियोजना बन चुका है। इसके बावजूद विदेश जाने की चाह लगातार बढ़ी है। मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण राजनीति के विशेषज्ञ प्रो कुणाल ने इस विरोधाभास पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि हजारों युवा विदेश जा रहे हैं, पर पंजाब की जनसांख्यिकी बदली है। चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों में हिमाचल और जेएंडके के लोगों की संख्या बढ़ी है। लुधियाना, फतेहगढ़ साहब और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों में बाहरी प्रदेशों से लोग आकर बसे हैं। मतदाता सूची में नाम होना और चुनाव में मतदान करना अलग बातें हैं। विदेश में रहने वाले भारतीयों की मतदाता पात्रता कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।   

Indus Water Treaty: पाकिस्तान दिखा रहा हेग कोर्ट का कागज, भारत ने ठुकराया फैसला; जानें पूरा विवाद

नई दिल्ली  पाकिस्तान के आतंकवादी कृत्यों की सजा देने के लिए भारत ने जब सिंधु जल समझौता रद्द किया, तो शहबाज शरीफ को भी नहीं उम्मीद रही होगी कि इस बार उसे वाकई अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आंसू बहाने पड़ जाएंगे. हैरानी की बात ये है कि उसने इसके खिलाफ सबसे बड़ा हथकंडा नीदरलैंड में मौजूद मध्यस्थता न्यायालय यानि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में भारत की शिकायत करके अपनाया. इस पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने कह दिया कि 1960 के सिंधु जल समझौते को लागू रखना चाहिए. अब पाकिस्तान इसी जजमेंट को लेकर जगह-जगह अपना रोना रो रहा है, हालांकि भारत साफ कर चुका है कि वो इस कोर्ट को मान्यता नहीं देता, ऐसे में इसका फैसला उसके लिए कागज के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं।  अब पाकिस्तान ने भारत के उस फैसले का औपचारिक विरोध किया है, जिसमें उसने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration-PCA) के हालिया आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है. ये आदेश 1960 की सिंधु जल संधि से जुड़े विवाद को लेकर दिए गए हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत को संधि का पूरी तरह पालन करना चाहिए. इस्लामाबाद का कहना है 60 साल पुरानी जल-बंटवारे की संधि अब भी कानूनी रूप से बाध्यकारी है और कोई भी देश एकतरफा तरीके से इसके प्रावधानों में बदलाव नहीं कर सकता. वो शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन में भी इस मुद्दे को उठा चुका है, लेकिन भारत का रुख साफ है कि वो इस फैसले को नहीं मानता।  भारत ने सिंधु जल संधि को किया रद्द भारत का रुख पाकिस्तान से बिल्कुल अलग है. नई दिल्ली ने सिंधु जल संधि को पूरी तरह स्थगित रखा है. भारत का कहना है कि इस पर दोबारा विचार तभी किया जाएगा, जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को स्थायी और सत्यापन योग्य तरीके से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए. भारत ने PCA की कार्यवाही को भी मूल रूप से गलत और कानूनी रूप से अमान्य बताया है. भारत इस मामले में हेग स्थित इस न्यायिक मंच की कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ. भारत का तर्क है कि इस आर्बिट्रल का गठन संधि में तय विवाद निपटाने की मूल व्यवस्था के खिलाफ हुआ है, इसलिए भारत PCA के आदेश या अंतरिम फैसले उसकी संप्रभु नीतियों पर लागू नहीं होते।  पाकिस्तान जगह-जगह पीट रहा छाती  पाकिस्तान लगातार बातचीत की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के फैसलों का हवाला दे रहा है. इसके पीछे मुख्य चिंता यह है कि भारत के फैसलों से पाकिस्तान को मिलने वाले पानी पर असर पड़ सकता है. इस्लामाबाद थर्ड पार्टी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के जरिए भारत को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि भारत का स्टैंड साफ है कि वो द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी का दखल नहीं चाहता. सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की कोशिशों के बीच उसकी व्यापक कूटनीतिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. पाकिस्तान ने कहा है कि चीन के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी पर भारत और चीन के बदलते संबंधों का कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन बिश्केक में पाकिस्तान के सिंधु के पानी का रोना रोने पर शी जिनपिंग ने कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी थी।  क्यों भारत ने रोका सिंधु का पानी? अप्रैल, 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगन में डाल दिया था. इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष नागरिकों, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे, की हत्या कर दी थी. इसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक सीमा पार आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक संधि से जुड़े दायित्वों पर पुनर्विचार किया जाएगा. क्या है सिंधु जल संधि? सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी. इसके तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का पूरा अधिकार दिया गया, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिलता है. भारत को इन नदियों पर सीमित गैर उपभोगीय उपयोग, जैसे जलविद्युत उत्पादन, की अनुमति है. भारत का रुख अब बिल्कुल स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते. जब तक हालात नहीं सुधरते, तब तक सिंधु जल संधि से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय आदेश को वह स्वीकार नहीं करेगा।  भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं, खासकर सीमा पार आतंकवाद, को इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण आधार मान रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यस्थता के जरिए दबाव बनाने की पाकिस्तान की कोशिशों का भारत पर अब तक सीमित असर दिखाई दे रहा है. दोनों देशों के बीच जल विवाद फिलहाल कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव का एक अहम मुद्दा बना हुआ है। 

VinFast India में प्रोडक्शन पर लगा ब्रेक! कार निर्माण रोकने की खबरों के बीच कंपनी ने बताई वजह

नई दिल्ली भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक कार बाजार में पैर जमाने की कोशिश कर रही वियतनामी कंपनी VinFast को लेकर एक बड़ी ख़बर सामने आई है. बताया जा रहा है कि, कंपनी ने अचानक भारत में तीन इलेक्ट्रिक SUV की लोकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े काम को फिलहाल रोक दिया था. इनमें VF 3, VF 6 और VF 7 शामिल हैं. एक साल से भी कम समय में यूं अचानक कारों के प्रोडक्शन बंद होने की खबर ने कार बाजार में हलचल मचा दी है. अब इस मामले में कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरा मामला साफ किया है।  क्या है मामला दरअसल, Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अपने सप्लायर्स को इन तीनों प्रोजेक्ट पर सभी एक्टिविटीज को अस्थायी तौर पर रोकने का निर्देश दिया है. बताया जा रहा है कि VinFast इस समय इन प्रोजेक्ट्स की लागत और अपने स्ट्रेटजी को फिर से रिव्यू कर रही है. VinFast ने जिन तीन मॉडलों से जुड़े काम को रोका है, उनमें VF 3 सबसे ज्यादा चर्चा में है. यह दो दरवाजों वाली छोटी इलेक्ट्रिक SUV है और इसे भारत में कंपनी का सबसे किफायती और प्रतिस्पर्धी मॉडल माना जा रहा था. हालांकि अभी इसे लॉन्च नहीं किया गया है। इसके अलावा VF 6 और VF 7 एसयूवी के प्रोडक्शन को भी हाल्ट करने की चर्चा थी. फिलहाल इन दोनों मॉडलों को कंपनी वियतनाम से किट के रूप में भारत लाकर यहां असेंबल करती है. मीडिया रिपोर्ट में जुलाई में सप्लायर्स को भेजे गए एक मेमो का हवाला दिया गया था. जिसमें कंपनी ने VF 3, VF 6 और VF 7 से जुड़े सभी डेवलपमेंट काम को "temporarily" रोकने की बात कही थी।  VinFast ने पिछले साल भारत में अपनी पहली फैक्ट्री शुरू की थी. कंपनी ने देश में करीब 2 अरब डॉलर निवेश करने की बात भी कही थी. दरअसल, विनफास्ट का टार्गेट भारत को दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस के तौर पर डेवलप करना था. ऐसे में अचानक से तीन इलेक्ट्रिक कारों की लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर रोक लगने ने इस मामले को और भी तूल दे दिया।  कंपनी ने कहा- भारत में जारी रहेगा कारोबार कारों के प्रोडक्शन हाल्ट की खबर सामने आने के बाद VinFast ने सफाई देते हुए कहा कि, भारत में फिलहाल बिक रहे मॉडल्स की प्रोडक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. VF 6 और VF 7 की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली जारी है. कंपनी तमिलनाडु के थूथुकुडी प्लांट में इन मॉडल्स की CKD असेंबलिंग करती रहेगी. भारत में एंट्री के बाद कंपनी ने कई मार्केट रिसर्च और कार क्लीनिक कैपेंन आयोजित किए हैं, जिनके जरिए VF 6 और VF 7 जैसे मॉडल्स को लेकर भारतीय ग्राहकों की जरूरत, पसंद और उम्मीदों को समझा गया. इन फीडबैक के आधार पर कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स में जरूरी बदलाव किए हैं।  कंपनी का दावा है कि ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट तैयार करने की इस स्ट्रेटजी का फायदा उसे भारत में मिल रहा है. VinFast के मुताबिक, वह भारतीय बाजार में ग्लोबल मार्केट से लाए गए गाड़ियों को असेंबल कर बेचने के बजाय, यहीं भारत में यहां के ग्राहकों के जरूरतों के अनुसार कार डेवलप करना चाहती है।  कंपनी का कहना है कि, विनफास्ट भारतीय बाजार में लगातार टॉप-5 सबसे ज्यादा बिकने वाले EV ब्रांड्स में शामिल रही है. प्रोडक्शन स्ट्रेटजी में किया गया बदलाव भविष्य के मॉडलों से जुड़ा है. कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत में पहले से बेची जा रही VF 6 और VF 7 को वह वियतनाम से किट के रूप में लाकर देश में असेंबल करती रहेगी. कंपनी ने यह भी कहा कि वह भारत के लिए खास तौर पर तैयार किए गए नए मॉडल डेवलप करने पर फोकस कर रही है।   

चेहरे, बाल और नाखूनों में दिखें ये बदलाव तो रहें सतर्क, AIIMS भोपाल के विशेषज्ञों ने बताई वजह

भोपाल  त्वचा पर दाग, रंग में बदलाव, नाखून की असामान्यता या बालों का झड़ना सामान्य लग सकता है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसे बदलाव के पीछे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी छिपी हो सकती है। ऐसे सूक्ष्म बदलावों की पहचान में आधुनिक तकनीक मददगार बन रही है। एम्स भोपाल में आयोजित सीएमई कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डर्मोस्कोपी के जरिए त्वचा रोगों की बेहतर पहचान और उपचार की योजना बनाने के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने त्वचा पर अधिक या कम रंगत, सूजन वाले और ग्रैनुलोमेटस रोग, नाखूनों की समस्याओं तथा बाल झड़ने की अलग-अलग स्थितियों में डर्मोस्कोपी के उपयोग के बारे में चर्चा की। डर्मोस्कोपी निभाएगी अहम भूमिका- विशेषज्ञ डॉ. पायल चौहान, डॉ. सौमिल खरे और डॉ. कृति दीवान ने बताया कि कैंसर से जुड़ी त्वचा संबंधी असामान्यताओं और कैंसरकारी त्वचा रोगों की पहचान में डर्मोस्कोपी भूमिका निभाएगी। संदिग्ध बदलावों की बारीकी से जांच कर आगे की चिकित्सकीय रणनीति तय करने में यह उपयोगी होगी। दैनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस में डर्मोस्कोपी का समावेशन के बारे में भी बताया। कार्यर म में प्रोफेसर डॉ. रजनीश जोशी, डॉ. नितिन पंड्या डॉ. प्रशंसा जायसवाल और डॉ. मनीष खंडारे ने भी हिस्सा लिया। आंखों से न दिखने वाले बदलाव भी पकड़ में डर्मोस्कोपी विशेष उपकरण से त्वचा को करीब से देखने की तकनीक है। इससे त्वचा के ऐसे सूक्ष्म पैटर्न और बदलाव स्पष्ट होते हैं, जिन्हें खुली आंखों से पहचानना मुश्किल होता है। इससे डॉक्टर को बीमारी के आकलन और आगे के उपचार का निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। एमपी का पहला अस्पताल जिसमें होगी रोबोटिकी सर्जरी प्रोस्टेट, किडनी, गर्भाशय और कोलन कैंसर जैसी सर्जरी में रोबोटिक तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसमें परंपरागत ऑपरेशन की तुलना में छोटा चीरा लगाया जाता है। इससे रक्तस्राव और दर्द कम होने के साथ मरीज के जल्दी रिकवर होने की संभावना रहती है। दा विंची रोबोट स्थापित होने के बाद एम्स मध्य प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होगी। त्वचा कैंसर क्या है? त्वचा कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा के ऊतकों में असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं। सामान्य तौर पर, त्वचा की कोशिकाएं बूढ़ी होकर मरने लगती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं बन जाती हैं। लेकिन जब यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती तो कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं।

PM Modi Birthday: BJP की देशभर में बड़ी तैयारी, एक महीने तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू करने जा रही है। एक महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत भाजपा देश भर में सेवा और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसका मकसद केंद्र सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक जीवन में पीएम मोदी के 25 साल के सफर की अहम उपलब्धियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। पीएम मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित इस अभियान का उद्देश्य उनके सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि इस देशव्यापी अभियान के दौरान भाजपा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग (युवा, महिलाएं और किसान) तक पहुंचेगी। सरकार के प्रमुख के तौर पर इस साल 25 वर्ष पूरे बता दें कि भाजपा हर साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर पूरे देश में पखवाड़े भर चलने वाला 'सेवा पखवाड़ा' मनाती है लेकिन इस बार इसका दायरा बढ़ाकर एक महीने कर दिया गया है और थीम 'सेवा पखवाड़ा' से बदलकर सेवा संकल्प अभियान कर दिया गया है।। तावड़े ने कहा, ''मोदी का व्यक्तित्व ऐसा है कि वे हर पल सेवा के लिए समर्पित रहते हैं।'' उन्होंने कहा, ''मोदी इस साल 17 अक्टूबर को (सरकार के प्रमुख के तौर पर) 25 साल पूरे करने जा रहे हैं। उन्होंने पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसलिए हमने इस 25 साल के अहम पड़ाव को ध्यान में रखते हुए एक महीने तक चलने वाला देशव्यापी 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू करने का फैसला किया है।'' 13 बड़े कार्यक्रम तय भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में 'सेवा की भावना' (जो मोदी के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है) पर केंद्रित विभिन्न गतिविधियां शामिल होंगी। पार्टी ने इस अभियान के तहत 13 बड़े कार्यक्रम तय किए हैं, जिनमें जनभागीदारी, युवाओं की भागीदारी, समाज सेवा और सांस्कृतिक गौरव पर ध्यान दिया जाएगा। सेवा संकल्प अभियान के तहत 13 कार्यक्रम क्या? 1. आशीर्वाद का दीया: अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को देश भर के हर घर में दीया जलाकर होगी। इसमें उज्जैन के महाकाल महालोक में एक खास कार्यक्रम भी शामिल होगा, जो आभार व्यक्त करने का एक तरीका होगा। 2. वडनगर से वाराणसी यात्रा: पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर को उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जोड़ने वाली एक खास 'जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा' आयोजित की जाएगी, जिसमें दस-दस लोगों के समूह अलग-अलग रास्तों से होते हुए लोगों से बातचीत करेंगे। 3. विकसित भारत संकल्प यात्रा: इन्फ्लुएंसर विकास की प्रमुख जगहों की यात्रा करेंगे और विकास की जमीनी कहानियाँ देश के सामने लाएंगे। 4. आंगन का उत्सव: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और योजनाओं का लाभ उठाने वाली माताओं को सम्मानित किया जाएगा, साथ ही पोषण और मातृ कल्याण योजनाओं पर बातचीत होगी। 5. 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत: 'विकसित भारत' थीम पर देशभर में छात्रों के लिए ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 6. नमो सेवा गाथा: संगीत वाले नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए जनसेवा और बदलाव की कहानियाँ दिखाई जाएंगी। 7. सेवा ज्योति यात्रा: जनभागीदारी को बढ़ावा देने और सेवा के संकल्प को दोहराने के लिए स्थानीय स्तर पर यात्राएँ। 8. कहानी बदलाव की: सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने वाले नागरिक असल बदलाव की अपनी प्रेरणादायक कहानियाँ साझा करेंगे। 9. सेवा मेरा योगदान: बड़े पैमाने पर सामाजिक सेवा गतिविधियाँ आयोजित करने की योजना है, जिनमें रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, वृक्षारोपण और डिजिटल साक्षरता अभियान शामिल हैं। 10. सेवा सेतु अभियान: पात्र लाभार्थियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए हर ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। 11. रंगोली राष्ट्र: एक ही दिन देश भर की प्रमुख जगहों पर स्थानीय कला शैलियों में 'मानव रंगोली' बनाना। 12. राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज: युवाओं और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय इनोवेशन प्रतियोगिताएं। 13. जनसेवक महाकुंभ: इस अभियान का समापन 17 अक्टूबर को पंचायत से लेकर संसद तक के जन-प्रतिनिधियों के एक विशाल सम्मेलन के साथ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सभा को संबोधित करेंगे। इस मौके पर, पार्टी 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों को एक साथ गाकर *गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड* बनाने की कोशिश करेगी। बीजेपी ने कहा कि यह अभियान सिर्फ एक जश्न नहीं है, बल्कि सेवा की भावना को हर नागरिक तक पहुंचाने का संकल्प है।

Janmashtami 2026: भोपाल में भव्य जन्माष्टमी उत्सव, 21 स्थानों पर मटकी फोड़ और राजा भोज देंगे पर्यावरण संदेश

भोपाल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार, 4 सितंबर को राजधानी में भक्ति और संस्कृति का रंग देखने को मिलेगा। शहर में अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक आयोजन होंगे। श्री हरिहर महोत्सव समिति की ओर से 14वीं बार भव्य जन्माष्टमी शोभायात्रा निकाली जाएगी, वहीं इस्कॉन पटेल नगर में विशेष जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होगा। दोनों आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 21 जगह माखन-मटकी फोड़ेंगे श्रीकृष्ण श्री हरिहर महोत्सव समिति की शोभायात्रा श्रीजी मंदिर लखेरापुरा से दोपहर 12:30 बजे शुरू होगी। शोभायात्रा में 21 स्थानों पर श्रीकृष्ण ग्वालों के साथ माखन-मटकी फोड़ते नजर आएंगे। कैलाश पर्वत पर शिव-पार्वती, झूले पर राधा-कृष्ण और वासुदेव द्वारा श्रीकृष्ण को ले जाते हुए झांकियां भी शामिल होंगी। राजा भोज की जीवंत झांकी देगी पर्यावरण बचाने का संदेश इस बार शोभायात्रा का खास आकर्षण राजा भोज की जीवंत झांकी होगी। इसमें राजा भोज पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश देते नजर आएंगे। झांकी के जरिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। शोभायात्रा में भगवान श्रीजी की प्रतिमा के साथ मंडला-डिंडोरी की नृत्य टोलियां, नरसिंहगढ़ और ब्यावरा के बैंड, 21 ढोल, डीजे बैंड, घोड़ा-बग्गी और दुलदुल घोड़ी भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन रास्तों से निकलेगी शोभायात्रा शोभायात्रा श्रीजी मंदिर लखेरापुरा से शुरू होकर चौक बाजार, लोहा बाजार, जुमेराती गेट, छोटे भैया कॉर्नर, घोड़ा निक्कास, मां कर्मा देवी रोड, मंगलवारा चौराहा, जैन मंदिर रोड, इतवारा चौराहा, इलेक्ट्रिकल मार्केट, चिंतामण चौराहा, पीपल चौक और लखेरापुरा होते हुए भवानी चौक, सोमवारा पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा। शुभारंभ से पहले पंडित हेमकांत शर्मा ‘मुखिया जी’ के सानिध्य में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना होगी। इस्कॉन में एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद दूसरी ओर इस्कॉन पटेल नगर, हरे कृष्ण लैंड, रायसेन रोड पर भी 4 सितंबर को भव्य जन्माष्टमी महोत्सव होगा। आयोजकों के मुताबिक करीब एक लाख श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना है। यहां श्री श्री गौर राधा वल्लभ जी के विशेष दर्शन और भव्य श्रृंगार होंगे। मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जाएगा। थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूल भी सजावट का हिस्सा होंगे।  महामंत्र कीर्तन से लेकर रुक्मिणी कल्याणम् तक इस्कॉन परिसर में लगातार हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन, श्रीकृष्ण कथा और भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति ‘रुक्मिणी कल्याणम्’ प्रमुख आकर्षण रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की जाएगी। शहर में दिखेगा भक्ति और संस्कृति का संगम जन्माष्टमी के दोनों बड़े आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। एक ओर लखेरापुरा से निकलने वाली शोभायात्रा में श्रीकृष्ण की लीलाएं, झांकियां और लोक कला आकर्षण रहेंगी, वहीं इस्कॉन में भव्य श्रृंगार, कीर्तन, कथा और नाट्य प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल देंगी। शहर में कई जगह आयोजन किए जाएंगे। 

‘बदला हुआ भारत’ दिखाएगी BJP की सोशल मीडिया टीम, Gen Z को रील्स के जरिए बताएगी सरकार के काम

भोपाल  भाजपा अब Gen Z तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए सरकार के काम और योजनाओं से हुए बदलाव की कहानियां लोगों तक पहुंचाई जाएंगी। अभियान के तहत हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लाभ लेने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। कार्यकर्ता लाभार्थियों से संपर्क कर उनके अनुभव रिकॉर्ड करेंगे। वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, योजना और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स दिखाएंगे ‘बदला हुआ भारत’ अभियान में देशभर के इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों से बदलाव दिखाई देता है। क्रिएटर्स मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो तैयार करेंगे। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाएगी, जहां जीवन, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजगार के अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों के चयन का प्रस्ताव है। हर शक्ति केंद्र से बनेंगी कम से कम 10 रील अभियान के तहत भाजपा के हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लोगों की जिंदगी में आए बदलाव को दिखाया जाएगा। पार्टी का फोकस सिर्फ योजनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उनके असर को लोगों की असली कहानियों के जरिए सामने लाने पर होगा। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों से संपर्क करेंगे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उनकी कहानी वीडियो में रिकॉर्ड की जाएगी। रील में लाभार्थी का नाम, जगह, जिला, योजना का नाम और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स खुद मौके पर जाकर दिखाएंगे बदलाव इस अभियान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के कारण जमीन पर बदलाव दिखाई देता है। इन्फ्लुएंसर्स वहां जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो बनाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं तक विकास कार्यों की जानकारी ऐसे तरीके से पहुंचाना है, जिसे वे सोशल मीडिया पर आसानी से देख और समझ सकें। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने को कहा जाएगा, जहां सुरक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या लोगों के लिए नए अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों को चुने जाने का प्रस्ताव है। ‘कहानी बदलाव की’ में दिखेंगी कहानियां अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘कहानी बदलाव की’ नाम से डिजिटल सीरीज होगी। इसमें सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियां दिखाई जाएंगी। इस योजना के तहत करीब 25 लाख लोगों की कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को आगे के लिए चुना जाएगा। इसके बाद करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार करने की योजना है। चुनी गई रील्स को राज्यों और जिलों के सोशल मीडिया अकाउंट से भी शेयर किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये वीडियो पहुंच सकें। WhatsApp से Instagram और YouTube तक फोकस भाजपा के इस अभियान में सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। Instagram और YouTube के लिए 60 सेकंड तक की रील्स बनाने की योजना है। सभी वीडियो में एक जैसे हैशटैग, फ्रेम और अभियान की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यकर्ताओं को सिर्फ वीडियो रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वे खुद भी रील बनाएंगे और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। ‘आशीर्वाद का दीया’ से जुड़ेगा डिजिटल अभियान अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी शामिल है। 17 सितंबर की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपने घरों पर दीप जलाने की अपील की जाएगी। पार्टी के अनुसार, इस दीप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबे समय की जनसेवा के प्रति आभार और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा। बूथ कार्यकर्ता लाभार्थियों के घर जाकर उन्हें दीप जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। दीप जलाते हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर #आशीर्वाद_का_दीया के साथ शेयर किए जाएंगे। इन्फ्लुएंसर्स, मंत्री और मुख्यमंत्री भी इस डिजिटल अभियान में शामिल हो सकते हैं। ‘सेवा मेरा योगदान’ में लोग खुद करेंगे सेवा अभियान के दूसरे हिस्से ‘सेवा मेरा योगदान’ में आम लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके तहत 25 अलग-अलग सेवा गतिविधियों में से कोई एक चुनकर कम से कम 25 मिनट सेवा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा से पहले और बाद का वीडियो बनाकर उसे My Bharat Portal पर अपलोड करने की योजना है। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा। 25 लाख लोगों की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘कहानी बदलाव की’ अभियान के तहत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से करीब 25 हजार कहानियां शॉर्टलिस्ट की जाएंगी और लगभग 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इन वीडियो को भाजपा के जिला, प्रदेश और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा। WhatsApp से Instagram तक डिजिटल कनेक्ट अभियान में सोशल मीडिया शेयरिंग पर भी खास जोर रहेगा। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 17 सितंबर की शाम घर-घर दीप जलाने की अपील की जाएगी। इससे जुड़े फोटो और वीडियो #आशीर्वाद_का_दीया के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक में कम से कम 25 मिनट योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा गतिविधि का पहले और बाद का वीडियो बनाकर My Bharat Portal पर रील अपलोड करने की व्यवस्था होगी। इसके बाद डिजिटल सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक कई कार्यक्रम अभियान के तहत स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं, गांवों में ‘नमो सेवा गाथा’ के नुक्कड़ नाटक, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन का … Read more

चांदी के आभूषण खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, अक्टूबर से Hallmarking जरूरी! बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहक सुरक्षित

नई दिल्ली सरकारी अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण और नियामक निगरानी को बढ़ाने के लिए अक्टूबर से चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने जा रही है।इस फैसले से चांदी के आभूषण अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे के करीब आ गए हैं। बीआईएस ने सबसे पहले 2000 में सोने के लिए एक स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना शुरू की थी, जिसे सरकार ने जून 2021 में कम से कम एक मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) वाले 256 जिलों में अनिवार्य कर दिया था। छह चरणों में लागू की गई अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग अब भारत के 782 जिलों में से लगभग 400 जिलों तक विस्तारित हो चुकी है। चांदी की हॉलमार्किंग भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। यह कदम सरकार द्वारा चांदी की वस्तुओं के लिए परीक्षण और प्रमाणीकरण बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ छह अंकों की विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) प्रणाली की शुरुआत के बाद उठाया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो ( बीआईएस ) वर्तमान में 102 जिलों में फैले 341 चांदी परख और हॉलमार्किंग केंद्रों का संचालन करता है, जिसके अंतर्गत 25,000 चांदी के आभूषण विक्रेता पंजीकृत हैं। बीआईएस चांदी के आभूषणों के लिए शुद्धता के सात ग्रेड मान्यता देता है, जो 800 से 999 भाग प्रति हजार तक होते हैं। चांदी की हॉलमार्किंग पर सरकार की मंशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के महानिदेशक संजय गर्ग के मुताबिक, चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग की मांग खुद उद्योग की ओर से आ रही है. हालांकि, इसे लागू करने से पहले BIS नियामकीय ढांचे और जरूरी बुनियादी ढांचे का आकलन कर रहा है. इसमें टेस्टिंग क्षमता, असेइंग मानक और लैब नेटवर्क की उपलब्धता जैसे पहलू शामिल हैं. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि व्यवस्था लागू होने पर उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को परेशानी न हो।  HUID सिस्टम से मिल रही पारदर्शिता फिलहाल चांदी की हॉलमार्किंग भले ही स्वैच्छिक हो, लेकिन अगर कोई ज्वेलर अपने उत्पाद पर हॉलमार्क लगाता है तो उस पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर देना अनिवार्य है. यह छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिससे ग्राहक BIS के डेटाबेस में जाकर चांदी की शुद्धता और ट्रेसेबिलिटी जांच सकता है. सितंबर 2025 से HUID का नियम लागू होने के बाद चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।  बढ़ती कीमतें और बढ़ता भरोसा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग 2024 में 31 लाख आर्टिकल से बढ़कर 2025 में 51 लाख तक पहुंच गई है. अब तक 20 लाख से ज्यादा चांदी के आर्टिकल HUID नंबर के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि चांदी की कीमतों में हालिया उछाल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते शुद्धता और मानकीकरण का मुद्दा ज्यादा अहम हो गया है. इसी वजह से सरकार सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग के अनुभव से सीख लेकर चांदी के लिए रणनीति बना रही है।  भारत में चांदी की खपत और आगे की राह भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है. देश में सालाना चांदी की मांग करीब 5,000 से 7,000 टन के बीच आंकी जाती है, जबकि घरेलू उत्पादन इसका छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाता है. आभूषण और चांदी के बर्तन इस खपत का बड़ा भाग हैं, साथ ही औद्योगिक इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. फिलहाल सरकार ने चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि उद्योग से व्यापक सलाह-मशविरा और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।  भारत में अक्टूबर 2005 से स्वैच्छिक आधार पर चांदी की हॉलमार्किंग उपलब्ध है, जिससे बीआईएस-पंजीकृत जौहरी मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्रों पर अपने गहनों को प्रमाणित करवा सकते हैं। हालांकि, सितंबर 2025 से, हॉलमार्किंग से गुजरने वाली किसी भी चांदी की वस्तु पर बीआईएस द्वारा जारी छह अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी होना अनिवार्य है। इस पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन से पहले उद्योग की तैयारियों का आकलन करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को एचयूआईडी पोर्टल लॉन्च होने के बाद से अब तक 77 लाख से अधिक चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग हो चुकी है। इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक हॉलमार्क वाली वस्तु पर बीआईएस मानक चिह्न, 'सिल्वर' शब्द, उसकी शुद्धता श्रेणी और उसका विशिष्ट एचयूआईडी प्रदर्शित होना अनिवार्य है, जिससे उपभोक्ता बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से उत्पाद के विवरण को डिजिटल रूप से ट्रैक और सत्यापित कर सकें।