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‘बदला हुआ भारत’ दिखाएगी BJP की सोशल मीडिया टीम, Gen Z को रील्स के जरिए बताएगी सरकार के काम

भोपाल  भाजपा अब Gen Z तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए सरकार के काम और योजनाओं से हुए बदलाव की कहानियां लोगों तक पहुंचाई जाएंगी। अभियान के तहत हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लाभ लेने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। कार्यकर्ता लाभार्थियों से संपर्क कर उनके अनुभव रिकॉर्ड करेंगे। वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, योजना और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स दिखाएंगे ‘बदला हुआ भारत’ अभियान में देशभर के इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों से बदलाव दिखाई देता है। क्रिएटर्स मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो तैयार करेंगे। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाएगी, जहां जीवन, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजगार के अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों के चयन का प्रस्ताव है। हर शक्ति केंद्र से बनेंगी कम से कम 10 रील अभियान के तहत भाजपा के हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लोगों की जिंदगी में आए बदलाव को दिखाया जाएगा। पार्टी का फोकस सिर्फ योजनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उनके असर को लोगों की असली कहानियों के जरिए सामने लाने पर होगा। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों से संपर्क करेंगे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उनकी कहानी वीडियो में रिकॉर्ड की जाएगी। रील में लाभार्थी का नाम, जगह, जिला, योजना का नाम और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स खुद मौके पर जाकर दिखाएंगे बदलाव इस अभियान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के कारण जमीन पर बदलाव दिखाई देता है। इन्फ्लुएंसर्स वहां जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो बनाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं तक विकास कार्यों की जानकारी ऐसे तरीके से पहुंचाना है, जिसे वे सोशल मीडिया पर आसानी से देख और समझ सकें। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने को कहा जाएगा, जहां सुरक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या लोगों के लिए नए अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों को चुने जाने का प्रस्ताव है। ‘कहानी बदलाव की’ में दिखेंगी कहानियां अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘कहानी बदलाव की’ नाम से डिजिटल सीरीज होगी। इसमें सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियां दिखाई जाएंगी। इस योजना के तहत करीब 25 लाख लोगों की कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को आगे के लिए चुना जाएगा। इसके बाद करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार करने की योजना है। चुनी गई रील्स को राज्यों और जिलों के सोशल मीडिया अकाउंट से भी शेयर किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये वीडियो पहुंच सकें। WhatsApp से Instagram और YouTube तक फोकस भाजपा के इस अभियान में सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। Instagram और YouTube के लिए 60 सेकंड तक की रील्स बनाने की योजना है। सभी वीडियो में एक जैसे हैशटैग, फ्रेम और अभियान की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यकर्ताओं को सिर्फ वीडियो रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वे खुद भी रील बनाएंगे और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। ‘आशीर्वाद का दीया’ से जुड़ेगा डिजिटल अभियान अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी शामिल है। 17 सितंबर की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपने घरों पर दीप जलाने की अपील की जाएगी। पार्टी के अनुसार, इस दीप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबे समय की जनसेवा के प्रति आभार और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा। बूथ कार्यकर्ता लाभार्थियों के घर जाकर उन्हें दीप जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। दीप जलाते हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर #आशीर्वाद_का_दीया के साथ शेयर किए जाएंगे। इन्फ्लुएंसर्स, मंत्री और मुख्यमंत्री भी इस डिजिटल अभियान में शामिल हो सकते हैं। ‘सेवा मेरा योगदान’ में लोग खुद करेंगे सेवा अभियान के दूसरे हिस्से ‘सेवा मेरा योगदान’ में आम लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके तहत 25 अलग-अलग सेवा गतिविधियों में से कोई एक चुनकर कम से कम 25 मिनट सेवा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा से पहले और बाद का वीडियो बनाकर उसे My Bharat Portal पर अपलोड करने की योजना है। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा। 25 लाख लोगों की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘कहानी बदलाव की’ अभियान के तहत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से करीब 25 हजार कहानियां शॉर्टलिस्ट की जाएंगी और लगभग 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इन वीडियो को भाजपा के जिला, प्रदेश और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा। WhatsApp से Instagram तक डिजिटल कनेक्ट अभियान में सोशल मीडिया शेयरिंग पर भी खास जोर रहेगा। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 17 सितंबर की शाम घर-घर दीप जलाने की अपील की जाएगी। इससे जुड़े फोटो और वीडियो #आशीर्वाद_का_दीया के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक में कम से कम 25 मिनट योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा गतिविधि का पहले और बाद का वीडियो बनाकर My Bharat Portal पर रील अपलोड करने की व्यवस्था होगी। इसके बाद डिजिटल सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक कई कार्यक्रम अभियान के तहत स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं, गांवों में ‘नमो सेवा गाथा’ के नुक्कड़ नाटक, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन का … Read more

चांदी के आभूषण खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, अक्टूबर से Hallmarking जरूरी! बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहक सुरक्षित

नई दिल्ली सरकारी अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण और नियामक निगरानी को बढ़ाने के लिए अक्टूबर से चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने जा रही है।इस फैसले से चांदी के आभूषण अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे के करीब आ गए हैं। बीआईएस ने सबसे पहले 2000 में सोने के लिए एक स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना शुरू की थी, जिसे सरकार ने जून 2021 में कम से कम एक मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) वाले 256 जिलों में अनिवार्य कर दिया था। छह चरणों में लागू की गई अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग अब भारत के 782 जिलों में से लगभग 400 जिलों तक विस्तारित हो चुकी है। चांदी की हॉलमार्किंग भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। यह कदम सरकार द्वारा चांदी की वस्तुओं के लिए परीक्षण और प्रमाणीकरण बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ छह अंकों की विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) प्रणाली की शुरुआत के बाद उठाया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो ( बीआईएस ) वर्तमान में 102 जिलों में फैले 341 चांदी परख और हॉलमार्किंग केंद्रों का संचालन करता है, जिसके अंतर्गत 25,000 चांदी के आभूषण विक्रेता पंजीकृत हैं। बीआईएस चांदी के आभूषणों के लिए शुद्धता के सात ग्रेड मान्यता देता है, जो 800 से 999 भाग प्रति हजार तक होते हैं। चांदी की हॉलमार्किंग पर सरकार की मंशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के महानिदेशक संजय गर्ग के मुताबिक, चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग की मांग खुद उद्योग की ओर से आ रही है. हालांकि, इसे लागू करने से पहले BIS नियामकीय ढांचे और जरूरी बुनियादी ढांचे का आकलन कर रहा है. इसमें टेस्टिंग क्षमता, असेइंग मानक और लैब नेटवर्क की उपलब्धता जैसे पहलू शामिल हैं. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि व्यवस्था लागू होने पर उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को परेशानी न हो।  HUID सिस्टम से मिल रही पारदर्शिता फिलहाल चांदी की हॉलमार्किंग भले ही स्वैच्छिक हो, लेकिन अगर कोई ज्वेलर अपने उत्पाद पर हॉलमार्क लगाता है तो उस पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर देना अनिवार्य है. यह छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिससे ग्राहक BIS के डेटाबेस में जाकर चांदी की शुद्धता और ट्रेसेबिलिटी जांच सकता है. सितंबर 2025 से HUID का नियम लागू होने के बाद चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।  बढ़ती कीमतें और बढ़ता भरोसा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग 2024 में 31 लाख आर्टिकल से बढ़कर 2025 में 51 लाख तक पहुंच गई है. अब तक 20 लाख से ज्यादा चांदी के आर्टिकल HUID नंबर के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि चांदी की कीमतों में हालिया उछाल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते शुद्धता और मानकीकरण का मुद्दा ज्यादा अहम हो गया है. इसी वजह से सरकार सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग के अनुभव से सीख लेकर चांदी के लिए रणनीति बना रही है।  भारत में चांदी की खपत और आगे की राह भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है. देश में सालाना चांदी की मांग करीब 5,000 से 7,000 टन के बीच आंकी जाती है, जबकि घरेलू उत्पादन इसका छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाता है. आभूषण और चांदी के बर्तन इस खपत का बड़ा भाग हैं, साथ ही औद्योगिक इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. फिलहाल सरकार ने चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि उद्योग से व्यापक सलाह-मशविरा और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।  भारत में अक्टूबर 2005 से स्वैच्छिक आधार पर चांदी की हॉलमार्किंग उपलब्ध है, जिससे बीआईएस-पंजीकृत जौहरी मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्रों पर अपने गहनों को प्रमाणित करवा सकते हैं। हालांकि, सितंबर 2025 से, हॉलमार्किंग से गुजरने वाली किसी भी चांदी की वस्तु पर बीआईएस द्वारा जारी छह अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी होना अनिवार्य है। इस पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन से पहले उद्योग की तैयारियों का आकलन करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को एचयूआईडी पोर्टल लॉन्च होने के बाद से अब तक 77 लाख से अधिक चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग हो चुकी है। इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक हॉलमार्क वाली वस्तु पर बीआईएस मानक चिह्न, 'सिल्वर' शब्द, उसकी शुद्धता श्रेणी और उसका विशिष्ट एचयूआईडी प्रदर्शित होना अनिवार्य है, जिससे उपभोक्ता बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से उत्पाद के विवरण को डिजिटल रूप से ट्रैक और सत्यापित कर सकें।  

MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा अपडेट, 18 हजार से ज्यादा पदों पर नई वैकेंसी; पुरानी भर्ती में पद नहीं बढ़ेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए नई भर्ती को लेकर बड़ी खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के 18,088 रिक्त पदों पर नई भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग जुलाई 2027 तक रिक्तियों की गणना कर रहा है। इसके बाद नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। नई भर्ती की तैयारी के बीच वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 की मौजूदा भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लगातार 15वें दिन जारी है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी वर्तमान भर्ती में अतिरिक्त पद जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद विज्ञापित पदों की संख्या बढ़ाई या घटाई नहीं जा सकती। यानी मौजूदा भर्ती में नए पद जोड़ने के बजाय उन्हें अगली भर्ती में शामिल किया जाएगा। 18 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती, वर्ग-1 से 3 तक मौका उच्च माध्यमिक शिक्षक: 4,769 पद 3,219 बैकलॉग,1,530 नए पद माध्यमिक शिक्षक: 5,504 पद 2,504 बैकलॉग, 3,000 नए पद प्राथमिक शिक्षक: 7,815 पद, 2,315 बैकलॉग, 5,500 नए पद इन पदों के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग के 13 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े 3,990 पद भी रोके गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक नई भर्ती के लिए कुल 18,088 रिक्त पद चिन्हित किए गए हैं। इनमें बैकलॉग और नए रिक्त पद दोनों शामिल हैं। विभाग में 72,901 पद खाली स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों और अन्य पदों को मिलाकर बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। विभाग में कुल 3,38,787 स्वीकृत पद हैं। इनमें 2,65,886 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 72,901 पद खाली हैं। इनमें से 59,073 पद पदोन्नति से और 13,828 पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। विभाग का कहना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध होने वाले पदों पर भी भर्ती की जाएगी। पुरानी भर्ती में अब नहीं बढ़ेंगे पद पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ा झटका है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती का परिणाम जारी होने के बाद विज्ञापित पदों की संख्या में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसलिए नए रिक्त पदों को वर्तमान भर्ती में जोड़ने के बजाय नई भर्ती में शामिल किया जाएगा। आरक्षित पदों पर भी विभाग ने स्थिति साफ की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर संबंधित वर्ग के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें अनारक्षित या अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जाएगा। ऐसे पदों को अगली भर्ती में फिर शामिल किया जाएगा। वर्तमान भर्ती में उच्च माध्यमिक शिक्षक के 3,436, माध्यमिक शिक्षक के 2,463 और प्राथमिक शिक्षक के 1,199 आरक्षित पदों पर संबंधित वर्ग के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने की जानकारी विभाग ने दी है।  पदोन्नति अटकी, टीईटी का पेंच विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया भी लंबित है। विभाग के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में राय ली गई है और इसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों की ही पदोन्नति किए जाने की बात कही गई है। इसी वजह से पदोन्नति की कार्रवाई फिलहाल लंबित है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को अब नई भर्ती का इंतजार वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 की मौजूदा भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब विभाग के स्पष्टीकरण के बाद वर्तमान भर्ती में पद बढ़ने की उम्मीद कम हो गई है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया बंद नहीं की जा रही, बल्कि नए रिक्त पदों को अगली भर्ती में शामिल किया जाएगा। 

चीन के ‘महा प्रोजेक्ट’ से भारत की बढ़ी टेंशन, ब्रह्मपुत्र के पानी पर खतरे की आशंका; खेती पर भी असर

नई दिल्ली नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कितना गंभीर है. इसी बीच चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में से एक बना रहा है. इस प्रोजेक्ट में एक विशाल बांध (सुपर डैम) बनाया जा रहा है. ब्रह्मपुत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यारलुंग त्सांगपो के नाम से भी जाना जाता है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट से बेहद गंभीर नुकसान की आशंका पैदा हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट हिमालय के उस भूकंपीय इलाके में है, जहां दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं. इस क्षेत्र में पहले भी कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं।  नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर एमेरिटस ब्रह्मा चेल्लानी ने ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट' के लिए लिखे एक लेख में कहा कि इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा चिंता की बात अब विदेशी आलोचकों की चेतावनी नहीं, बल्कि चीन के अपने वैज्ञानिकों की चेतावनी है।  चेल्लानी ने बीजिंग से जुड़े एक चीनी भाषा के जर्नल ‘सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' में हाल ही में छपे एक रिसर्च पेपर का हवाला दिया. इस पेपर में बांध बनाए जा रहे इलाके में गंभीर भूगर्भीय खतरों की बात कही गई है।  सुपर डैम से 'वॉटर बम' बनने का खतरा क्यों है?  पेपर में वैज्ञानिकों ने बताया कि वहां की जमीन की बनावट ढीली है और चट्टानों व मिट्टी के बीच पकड़ कमजोर है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जमीन के अंदर मौजूद फॉल्ट में हलचल हुई या भूकंप आया, तो बड़े इलाके में जमीन अस्थिर हो सकती है. इससे बांध का जलाशय और आसपास बना बुनियादी ढांचा खतरे में पड़ सकता है. वैज्ञानिकों ने खतरा कम करने के लिए जलाशय के आसपास की ढलानों को मजबूत करने, उन्हें संभालने वाली संरचनाएं लगाने और प्रोजेक्ट के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को दोबारा डिजाइन करने की सलाह दी है, ताकि किसी बड़ी तबाही का खतरा कम किया जा सके।  चेल्लानी ने कहा कि जब कम्युनिस्ट शासन के तहत काम करने वाले चीन के वैज्ञानिक भी ऐसी चेतावनी दे रहे हैं, तो पूरी दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए।  भारत के लिए खतरा क्यों? भारत के पूर्वोत्तर के लिए ब्रह्मपुत्र बेहद महत्वपूर्ण नदी है. यह खेती, मछली पालन और आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) यानी पानी वाली प्राकृतिक जमीनों के लिए जरूरी है. इस नदी पर लाखों लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी निर्भर है. आगे चलकर यही नदी बांग्लादेश में जाती है, जहां यह देश के लिए मीठे पानी का सबसे बड़ा स्रोत है।  ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मेकांग नदी पर बनाई गई बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की तरह यह विशाल बांध भी सीमा पार नदी के पानी के बहाव को बदल सकता है. इससे नीचे की ओर जाने वाली वह उपजाऊ मिट्टी और गाद भी कम हो सकती है, जिसमें कई पोषक तत्व होते हैं. यह गाद नदी के पर्यावरण और नदी किनारे की खेती के लिए बेहद जरूरी है. यहां तक ​​कि इसके सामान्य रिपेयर के काम से भी नदी के बहाव की दिशा में मौजूद इकोसिस्टम, खेती, तलछट के बहाव और बाढ़ के पैटर्न पर असर पड़ सकता है।  चेल्लानी ने लिखा कि इससे भी ज्यादा खतरनाक स्थिति तब बन सकती है, अगर भूकंप की वजह से बांध का ढांचा टूट जाए या बांध को नुकसान पहुंचने के बाद अचानक बहुत ज्यादा पानी छोड़ना पड़े. ऐसी स्थिति में नीचे भारत और बांग्लादेश की ओर बसे घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों में बिना ज्यादा चेतावनी के भयंकर बाढ़ आ सकती है।  उनके मुताबिक, तिब्बत में शुरू हुई ऐसी इंजीनियरिंग से जुड़ी दुर्घटना आगे चलकर एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन सकती है, जिसका असर बांग्लादेश तक पहुंच सकता है. बांग्लादेश दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में से एक है।  चीन तिब्बत को बना रहा युद्ध का क्षेत्र? रिपोर्ट में कहा गया कि पर्यावरणीय खतरा इस पूरी कहानी का केवल एक हिस्सा है. चीन तिब्बत के पठार पर अपने नियंत्रण को धीरे-धीरे एक रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. तिब्बत का पठार एशिया की कई बड़ी नदियों का स्रोत है. चीन ने सीमा पार बहने वाली नदियों पर एक के बाद एक कई बांध बनाए हैं. तनाव के समय उसने नदियों से जुड़े पानी और बहाव के आंकड़े देने से भी इनकार किया है. इसके अलावा चीन ने नीचे की ओर बसे देशों के साथ पानी बांटने की किसी संधि में शामिल होने से भी इनकार किया है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह पानी भी चीन की दबाव बनाने वाली रणनीति का एक और हथियार बन गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक तरह से यह विडंबना है कि हाल की जानकारी से पता चलता है कि चीन के वैज्ञानिक शायद इस प्रोजेक्ट के खतरों को वहां के राजनीतिक नेतृत्व से ज्यादा साफ तौर पर समझते हैं।  चीन के अपने भूवैज्ञानिक वैज्ञानिक जब खतरे की चेतावनी दे रहे हैं, तब रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग को पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह मानना चाहिए कि इस नदी का पानी सिर्फ चीन का मामला नहीं है. बांध के ऊपर की ओर बन रहा यह संभावित 'वॉटर बम' बनने से पहले चीन को अपनी सीमा के बाहर पड़ने वाले देशों की जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए। 

पंजाब चुनाव में CM फेस का कितना असर? 1997 से 2022 तक के नतीजे दे रहे बड़ा संकेत

चंडीगढ़ पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले सीएम चेहरा घोषित करने का भी ट्रेंड रहा है। यह पैटर्न असरदार तो रहता है मगर इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मजबूत सीएम फेस के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और अनुकूल राजनीतिक माहौल भी जीत के लिए बड़ा आधार बनते हैं। कमजोर चेहरों और पार्टी विरोधी लहर की वजह से दलों ने नुकसान भी झेला है। साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे। इसके अलावा दलों ने जातीय समीकरणों को भी साधते हुए अपने सीएम फेस घोषित किए। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दौरान भी दलों की ओर से सीएम फेस पर मंथन जारी है। अभी तक आम आदमी पार्टी अपना सीएम फेस घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की रणनीति अबकी इस दिशा में अलग है। सीएम फेस के साथ चुनाव लड़ने के पैटर्न को यदि देखें तो साल 1997 में प्रकाश सिंह बादल शिअद-भाजपा गठबंधन के प्रमुख चेहरे थे। मुद्दे भी असरदार रहे, लिहाजा पार्टी को जीत हासिल हुई। साल 2002 के चुनाव में शिअद की ओर से बादल ही चेहरा थे, मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा। सत्ता विरोधी लहर भी थी। नतीजतन बादल हार गए और कैप्टन अमरिंदर सीएम बने। साल 2007 और 2012 में शिअद-भाजपा गठबंधन ने प्रकाश सिंह बादल के नाम और सरकार के काम पर चुनाव लड़ा। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही प्रमुख चेहरा बनाया गया। पहले चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल, मजबूत ग्रामीण-सिख आधार, अकाली दल का संगठन और गठबंधन का सामाजिक समीकरण जीत का आधार बना, जबकि 2012 में बादल के चेहरे और उनकी पहली पारी के विकास कार्यों पर मतदाताओं ने फिर मुहर लगाई।  नतीजतन लगातार दूसरी जीत हासिल हुई। साल 2017 में भी मुकाबले में बादल और कैप्टन ही प्रमुख चेहरों के तौर पर आमने-सामने थे, मगर 10 साल की शिअद-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, नशे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। हालांकि प्रकाश सिंह बादल का व्यक्तिगत कद बड़ा था, लेकिन सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन का नुकसान हुआ। साल 2022 में बने थे नए समीकरण साल 2022 में कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर छह माह के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाया। ‘साड्डा चन्नी-साड्डा सीएम’ नारा भी दिया गया, मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के वादों ने सत्ता पलट दी। आप ने अपने वादों और गारंटियों के साथ भगवंत सिंह मान को प्रमुख चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा। नतीजतन भगवंत मान की लोकप्रियता ने चन्नी के दलित कार्ड को पीछे छोड़ दिया। साल 2027 के लिए क्या? आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल साल 2027 के लिए भगवंत सिंह मान को सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2027 के लिए अब तक किसी एक नेता को औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। इसी मुद्दे पर अंदरूनी कलह के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कह चुके हैं कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी। जीत के बाद राहुल गांधी सीएम फेस तय करेंगे।  शिरोमणि अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल चुनावी तैयारी में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है मगर पार्टी की ओर से औपचारिक सीएम फेस की घोषणा अभी नहीं हुई है। भाजपा भी साफ कर चुकी है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जीते तो संभवतः जट सिख चेहरे को सीएम बनाया जाएगा।