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राजगढ़ पुलिस ने करेंसी एक्सचेंज के नाम धोखाधड़ी करने वाले 03 आरोपियों को किया गिरफ्तार 2 लाख 40 हजार रुपये नगद जब्त

भोपाल  प्रदेश में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नागरिकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजगढ़ जिले के थाना पचोर पुलिस ने करेंसी एक्सचेंज के नाम पर 05 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 02 लाख 40 हजार रुपये नगद जब्त किए हैं। पुलिस अधीक्षक राजगढ़ श्री अमित तोलानी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री के.एल. बंजारे के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी सारंगपुर श्री अरविन्द सिंह के पर्यवेक्षण में थाना पचोर पुलिस टीम द्वारा यह कार्रवाई की गई। 25 अगस्त को सारंगपुर निवासी फरियादी द्वारा थाना पचोर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि एक महिला एवं दो पुरुषों द्वारा पचोर मंडी में करेंसी एक्सचेंज के नाम पर छल-कपटपूर्वक उसके साथ 05 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना पचोर में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना पचोर पुलिस द्वारा आरोपियों की पतारसी एवं धोखाधड़ी की राशि की बरामदगी के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई तथा मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा उनके कब्जे से धोखाधड़ी की राशि में से 02 लाख 40 हजार रुपये नगद जब्त किए। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा रही है। धोखाधड़ी की शेष राशि की बरामदगी तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों एवं संभावित सहयोगियों के संबंध में विवेचना जारी है। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी एवं अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग एवं आधुनिक पुलिसिंग के माध्यम से निरंतर कार्रवाई कर रही है।  

सात साल तक हादसे का इंतजार करते रहे अधिकारी, मौतें हुईं तो 7 महीने में बदल दी दूषित पानी की लाइन

 इंदौर   हाई कोर्ट में प्रस्तुत भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट से रोजाना नए तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में ही बता दिया था कि भागीरथपुरा सहित शहर के कई क्षेत्रों में बोरिंग दूषित पानी उगल रहे हैं। बावजूद इसके नगर निगम के अधिकारियों ने सात साल तक पाइप लाइन बदलने को लेकर गंभीरता नहीं जताई। दिसंबर 2025 के अंत में जब दूषित पानी की वजह से भागीरथपुरा में मौतें होने लगी तो अधिकारियों की नींद खुली। सात साल से अटकी पाइप लाइनें सिर्फ सात माह में बदल दी गईं। कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में आयोग ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। 110 पेज के निष्कर्ष में कोर्ट ने हादसे के लिए निगम के आधा दर्जन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने माना कि समय रहते ये अधिकारी जाग जाते तो हादसा नहीं होता। रिपोर्ट को हल्के में लेते रहे अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में दी अपनी रिपोर्ट पेश करने के साथ इस बात की चेतावनी भी दी थी कि नालों के आसपास के बोरिंग दूषित पानी दे रहे हैं। कई रहवासी क्षेत्रोंं में लोग इस पानी को रोजमर्रा के कामकाज में उपयोग करने के साथ-साथ पीने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। यह स्थिति किसी भी दिन खतरनाक साबित हो सकती है, लेकिन जिम्मेदारों ने इस रिपोर्ट और चेतावनी को गंभीरता से लिया ही नहीं। उनकी यह लापरवाही भागीरथपुरा के रहवासियों पर भारी पड़ गई। दिसंबर 2025 की शुरुआत से ही भागीरथपुरा में लोग बीमार होने लगे थे, लेकिन इस तरफ न स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान दिया न नगर निगम ने। 28 दिसंबर को जब बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों के बीमार होने की खबरें सामने आई और केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों पर इसे लेकर नाराजगी जताई तो अधिकारी हरकत में आए। पिछले कई माह से कर रहे थे शिकायत जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर 2025 से ही जनप्रतिनिधियों से पानी दूषित आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आयोग के समक्ष एक दर्जन से ज्यादा रहवासियों ने इसकी पुष्टि की है। इन लोगों का कहना था कि जनप्रतिनिधि उनकी शिकायत सुनने के बाद सिर्फ इतना कहते थे कि दिखवाते हैं। 25 किमी से ज्यादा लाइन है भागीरथपुरा में भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी के पाइप लाइन की लंबाई करीब 25 किमी है। शासन की दो बड़ी योजनाओं में इन लाइनों को बदलने के लिए पैसा तो आया लेकिन कभी काम नहीं हुआ।

दुग्ध समितियों से किसानों की आय बढ़ाने के होंगे प्रयास, प्रत्येक नगर पंचायत में बनेगा गीता भवन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कैलारस शुगर फैक्ट्री को पुनः प्रारंभ कराया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज का बेहतर लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मुरैना में दुग्ध समितियों के माध्यम से दुग्ध संग्रहण को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे। मुरैना सहित जिले की प्रत्येक नगर पंचायत में गीता भवन का निर्माण कराया जाएगा। इन भवनों में नागरिकों को अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। जिले के एक विकासखंड में वृंदावन भवन भी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कृषि उपज मंडी परिसर मुरैना में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को सीहोर से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बलराम कृषि महोत्सव और कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रति प्रेरित करने की बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना जिला गेहूं, धान, तिलहन और दलहन के उत्पादन में अग्रणी रहा है। किसान गेहूं की खेती को बढ़ावा दें। खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश को देश में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। भविष्य में 30 लाख लोगों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की योजना है। इससे किसानों को सिंचाई के साथ विद्युत व्यय में भी लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान दूध डेयरी को आय का अतिरिक्त साधन बनाएं और गाय पालन को बढ़ावा दें। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के हित में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। खरीफ एवं रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की अवधि 6-6 माह निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है। अब किसान जिस दिन ऋण लेगा, उस दिनांक से एक वर्ष की अवधि में ऋण चुका सकेगा। इससे किसानों को बार-बार बैंक की लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हितों के लिए प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को उन्नत बाजरा एवं सरसों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराया गया है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और बेहतर कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जाए। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। गेहूं, सोयाबीन, चना, दलहन-तिलहन तथा उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश के किसान निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के ज्ञान और सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अधिक उत्पादन, अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता, कम लागत, बेहतर मूल्य और किसान की अधिक आय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती तथा दलहन-तिलहन मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को निरंतर लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण में भी पारदर्शिता लाई गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में उर्वरक वितरण इसी प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इससे अनावश्यक कतारों, कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर प्रभावी नियंत्रण में सहायता मिल रही है। कृषि मंत्री  कंषाना ने इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों सर्व राममोहन मीणा, गिर्राज आदिवासी, उदय राठौर, अरविंद सिंह गुर्जर, बालबिहारी शर्मा, राकेश शर्मा, संजय शर्मा, रामबाबू सिंह, कौशलकिशोर एवं बृजेन्द्र को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मेधावी विद्यार्थियों हर्ष कुशवाह, रिचा तोमर, शिवेन्द्र यादव, अमन शर्मा, रागिनी देवी, हर्षित वशिष्ठ, कृतिका सिकरवार, धर्मेन्द्र धाकड़, रियान खान एवं कु. सोनम को भी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में समाजसेवी  कमलेश कुशवाह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मुरैना-श्योपुर सांसद  शिवमंगल सिंह तोमर ने किसानों से जैविक खाद अपनाने का आह्वान किया। रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग करने से भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से आवश्यकता के अनुसार ही खाद, बीज एवं पानी का उपयोग करने की अपील की। सांसद  तोमर ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा निरंतर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदियों को जोड़ने की योजनाओं से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर महापौर मती शारदा सोलंकी, कलेक्टर  लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक  धर्मराज मीणा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर  अश्विनी कुमार रावत, संयुक्त संचालक कृषि, उप संचालक कृषि मुरैना सहित बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषकगण उपस्थित रहे।  

MP में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी, कई जिलों के कलेक्टर बदलेंगे; मंत्रालय में भी होगा बदलाव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छह से आठ सितंबर तक दुबई में आयोजित निवेशकों के सम्मेलन में भाग लेने जाएंगे। उनके लौटने पर प्रदेश में कुछ कलेक्टर बदले जाएंगे। मंत्रालय स्तर पर भी कुछ अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन होगा। इसे लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के बीच प्रारंभिक चर्चा भी हो चुकी है। जन विश्वास अभियान और प्रशासनिक फेरबदल की वजह सात जुलाई से प्रारंभ किए गए जन विश्वास अभियान में कुछ जिलों की रिपोर्ट ठीक नहीं पाई गई है। जन समस्याओं के निराकरण में ये न केवल पीछे हैं बल्कि संपर्क और संवाद भी कम पाया गया है। प्रशासनिक के साथ-साथ अन्य कारणों से कुछ कलेक्टरों को बदला जाना है। इनके स्थान पर 2017 बैच के अधिकारियों को अवसर दिया जाएगा।  

जनहित के कार्यों को मिलेगी प्राथमिकता, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में योजनाओं की प्रगति परखी

रायपुर : जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में विकास कार्यों की समीक्षा की अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता के दिए निर्देश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर जिला के ओड़गी के जनपद पंचायत सभाकक्ष में आयोजित विकासखंड स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होकर क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार योजनाओं और कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा आमजन से जुड़ी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ आमजन को मिले, इसके लिए अधिकारी पूरी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। समीक्षा बैठक में क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन तथा विभागीय योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को लंबित कार्यों में गति लाने और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती इन्द्रमणि पैकरा सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, बेंगलुरु-हैदराबाद-चेन्नई समेत 20+ शहर होंगे कनेक्ट

बेंगलुरु मुंबई, हैदराबाद की तरह बेंगलुरु भी बुलेट ट्रेन का बड़ा हब बनेगा. बेंगलुरु से निकलने वाले ये हाईस्पीड रेल कॉरिडोर साउथ इंडिया के तीन राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बड़े शहरों को हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी देंगे. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद अन्य रूट की डीपीआर, अलाइनमेंट की औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है. अभी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर काम चल रहा है. इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन और दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन रूट पर भी मंथन चल रहा है।  चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु दक्षिण भारत का सबसे अहम बुलेट ट्रेन रूट है, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को जोड़ता है. 463 किलोमीटर के कॉरिडोर में चेन्नई से बेंगलुरु 306 किमी और बेंगलुरु से मैसूरु 157 किमी का रूट है. इससे बेंगलुरु से चेन्नई का सफर 5–6 घंटे के बजाय सिर्फ सवा घंटे का रह जाएगा. बेंगलुरु से मैसूरु का सफर 2 घंटे से घटकर लगभग 30-45 मिनट रह जाएगी. ये कॉरिडोर बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा. इसमें चेन्नई सेंट्रल, पूनमल्ली, चित्तूर (आंध्र प्रदेश), कोलार, कोडिहल्ली, व्हाइटफील्ड, बयप्पनहल्ली (बेंगलुरु), इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, कैंगेरी, मांड्या और मैसूरु स्टेशन हो सकते हैं।  हैदराबाद-बेंगलुरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर यह भारत के दो सबसे बड़े आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद को जोड़ेगा. 610 किमी के इस रूट पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेंगी. अभी ट्रेन से 10 से 12 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा. ये रूट तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके और उत्तरी कर्नाटक से होकर जाएगा. हैदराबाद (शमशाबाद एयरपोर्ट), महबूबनगर, करनूल, अनंतपुर, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु का कैंपेगौड़ा एयरपोर्ट इसका स्टेशन प्रस्तावित है।  बेंगलुरु-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर  बेंगलुरु को सीधे पुणे और मुंबई से भी जोड़े जाने की तैयारी है. ये 850 से 900 किलोमीटर लंबा रूट होगा. अभी रेल से 18–20 घंटे का सफर लगता है तो 4 से 5 घंटे रह जाएगा. कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा सीमा से सटे इलाके इसके दायरे में आएंगे. बेंगलुरु, तुमकुरु, दावणगेरे, हुबली-धारवाड़, बेलगावी, कोल्हापुर, पुणे और मुंबई भी बुलेट ट्रेन के स्टेशन होंगे।  DPR और अलाइनमेंट पर काम ये हाईस्पीड कॉरिडोर जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड गेज पर बनाए जाएंगे. NHSRCL इन बुलेट ट्रेन रूट के लिए  LiDAR सर्वे, अलाइनमेंट ड्राफ्टिंग और ट्रैफिक से जुड़े अध्ययन कर रहा है.घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद शमशाबाद में सुरंगें और बाकी मैदानी भागों में एलिवेटेड वायडक्ट बनाए जाएंगे। 

रिंग रोड, पुल, केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन और आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में रायगढ़ शहर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने शुक्रवार को शहर की प्रमुख विकास परियोजनाओं का मैराथन निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समय-सीमा की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वित्त मंत्री  चौधरी ने दूध डेयरी ऑक्सीजोन से निरीक्षण की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने गोवर्धनपुर में केलो नदी पर निर्माणाधीन पुल, खर्राघाट स्थित केलो रिवर फ्रंट, नालंदा परिसर, एसईसीएल रोड मरीन ड्राइव, कयाघाट पुल, मिनी स्टेडियम स्थित स्केटिंग रिंग, कौहाकुंडा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, स्टेडियम और एफसीआई ऑक्सीजोन सहित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। रायगढ़ के सुनियोजित विकास के लिए बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों के समन्वय से लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि शहर की अधोसंरचना को मजबूत करते हुए नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। प्रत्येक परियोजना की गहन निगरानी की जा रही है, ताकि विकास कार्य तेजी के साथ उच्च गुणवत्ता में पूरे हों। उन्होंने कहा कि रायगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। औद्योगिक गतिविधियों के अनुरूप शहर में जिस स्तर की अधोसंरचना विकसित होनी चाहिए थी, वह लंबे समय तक अपेक्षित गति से नहीं बन पाई। इसके चलते यातायात, भारी वाहनों के दबाव, दुर्घटनाओं, धूल और प्रदूषण जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। अब इन चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए सुनियोजित ढंग से बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। रिंग रोड परियोजना से यातायात व्यवस्था होगी सुगम वित्त मंत्री  चौधरी ने रिंग रोड परियोजना को रायगढ़ के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। घरघोड़ा रोड से झारसुगुड़ा रोड को जोड़ने के लिए प्रथम चरण में कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रायगढ़ से घरघोड़ा तक सड़क को फोरलेन करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। हरित क्षेत्र और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं पर भी जोर वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में बेहतर सड़कों और पुलों के साथ-साथ हरित क्षेत्रों, खेल सुविधाओं, आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन, नालंदा परिसर और खेल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शहर के स्वरूप को नया आयाम देंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो वर्षों में रायगढ़ के विकास की तस्वीर जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय से आने वाली बाधाओं का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान महापौर  जीवर्धन चौहान, सभापति  डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम आयुक्त  बृजेश सिंह क्षत्रिय, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विभागीय अधिकारी, इंजीनियर तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे ‘एक पेड़ गुरु के नाम’

लखनऊ योगी सरकार ने एक तरफ पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत एक दिन में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे रोप कर रिकॉर्ड बनाया तो दूसरी तरफ इस वर्ष भी विशिष्ट वनों की स्थापना की गई। विशिष्ट वनों की श्रृंखला में 'एक पेड़ गुरु के नाम' के तहत भी विशिष्ट आयोजन होगा। गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सभी वन प्रभागों में यह आयोजन किया जाएगा।  योगी सरकार ने रचा इतिहास, 2026 में बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का कीर्तिमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रच दिया। 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण महायज्ञ-2026 में पूरे प्रदेश में एक दिन (12 जुलाई, रविवारवार) में 35,27,89,926 पौधरोपण हुए। यह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य 35 करोड़ से 27,89,926 अधिक रहा। सीएम योगी ने 12 जुलाई को गोरखपुर में दो स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया था। लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर के समीप लगेगा 'एक पेड़ गुरु के नाम'  लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि विशिष्ट वनों की श्रृंखला में शिक्षक दिवस पर लखनऊ में भी पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। यहां चंद्रिका देवी मंदिर के समीप 'एक पेड़ गुरु के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यहां आगन्तुकों को स्मृति चिह्न के रूप में पौधे भी भेंट किए जाएंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मुख्य कार्यक्रम में 'एक पेड़ गुरु के नाम' पौधरोपण कर सकते हैं।  पौधरोपण महाभियान-2026 में लगाए गए विशिष्ट वन  पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को प्रदेश के सभी वन प्रभागों में 'एक पेड़ गुरु के नाम' लगाया जाएगा। इसे लेकर सभी वन प्रभागों में तैयारी पूरी हो गई है। मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भी अनेक विशिष्ट वन स्थापित किए गए।  2026 में स्थापित किए गए विशिष्ट वन व अन्य कार्यक्रम 👉वन योगा कार्यक्रम 👉श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पौधरोपण 👉वन महोत्सव 👉 पर्यावरण दिवस पर वृहद पौधरोपण 👉 महर्षि चरक औषधि वन                 👉 समृद्धि वन                  👉 कपि वन                   👉 ऊर्जा वन                   👉 समरस वन                   👉 सहजन भंडारा              👉 आम भंडारा 👉 वंदे मातरम वाटिका                                👉 अविरल धारा पौधरोपण     👉 मिशन छाया    👉 एक्सप्रेस वे पौधरोपण  👉 भाई-बहन पौधरोपण (रक्षाबंधन वाटिका) 👉 एक पेड़ गुरु के नाम आदि

कम विस्थापन, कम पर्यावरणीय नुकसान और हजारों रोजगार, झारखंड के लिए विंजिंहम पोर्ट से बड़ी सीख

रांची  झारखंड की ही तरह केरल भी हरे भरे जंगलों से भरा है। अरब सागर के किनारे केरलम के शहर त्रिवेंद्रम से 40 किलोमीटर की दूरी पर अडानी विंजिंहम समुद्र परिवहन परियोजना एक रोल मॉडल है। झारखंड में खनन और उद्योग दोनों में पर्यावरण और विस्थापन का सवाल उभर कर सामने आता है। लेकिन विंजिंहम सी पोर्ट यानि बंदरगाह के निर्माण में कम से कम विस्थापन हुआ और समुद्र के आसपास की पारिस्थितिकी को बग़ैर कोई नुकसान पहुंचाए तीन किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी कर दी गई। इसका परिणाम यह है कि भारत आने वाले बड़े जहाजों को अब सामान उतारने के लिए दुबई, कोलंबो, सिंगापुर या एमस्टडर्म नहीं जाना पडता है। देश को हजारों करोड़ का राजस्व मिलता है और 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। झारखंड में नए लगने वाले उद्योगों को इस मॉडल के जरिए पर्यावरण ऑडिट के जरिए अर्थव्यवस्था में योगदान करने वाला बनाया जा सकता है। कोयला परिवहन में परिवहन का माडल है उपयोगी झारखंड में कोयला, लौह और बाक्साइट खनन के बाद उनका परिवहन वन क्षेत्र से ही होता है। विंजिंहम सी पोर्ट ऐसे तो समुद्र में संचालित होता है लेकिन 18 मीटर की गहराई होने की वजह से जल के अंदर एक पूरा वनस्पति और जीव तंत्र रहता है। इसकी डिजिटल मैपिंग कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी वनस्पति और जीव जंतु को नुकसान नहीं पहुंचे। इसी तरह खनिजों के परिवहन में भी डिजिटल सेंसिंग उपकरणों का प्रयोग हो सकता है। 2028 तक समुद्री व्यापार को तीन गुणा बढ़ाएगा विंजिंहम 1विंजिंहम सी पोर्ट अभी पहले ही चरण में है। तीन किलोमीटर के बैक वाटर में अभी 40 मीटर तक के जहाज पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा ये इस बंदरगाह की दूरी मात्र 10 नाटिकल मील है। लेकिन बंदरगाह बन जाने के बाद यहां अंतरराष्ट्रीय और भारतीय जहाज आधे घंटे में पहुंच सकते हैं। 2028 तक बैक वाटर की लंबाई चार किलोमीटर तक हो जाएगी। इससे यहां एक समय में एक लाख तक कंटेनर रखे जा सकेंगे। अभी यहां 35 हजार कंटेनर रखे जा रहे हैं। पूरी तरह ऑटोमैटिक है कंटेनर का उतार-चढ़ाव विंजिंहम सी पोर्ट पर तीस से अधिक उच्च क्षमता के क्रेन लगे हैं। इनका संचालन पूरी तरह से ऑटोमैटिक है जो कंट्रोल रूम में एक सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए होता है। कोयला और लौह अयस्क परिवहन में कन्वेयर बेल्ट को इस तकनीक से संचालित करने पर प्रदूषण की संभावना कम होगी। पहले भारत का 75 प्रतिशत कंटेनर देश गये बाहर उतरता था विंजिंहम सी पोर्ट के संचालित होने से पहले भारत का 75 प्रतिशत समुद्री कंटेनर परिवहन दूसरे देशों से होता था। देश में 17 मीटर से अधिक गहराई को कोई बड़ा पोर्ट नहीं था। अब देश में भी इतनी गहराई की क्षमता का पोर्ट बन जाने से कंटेनर यहीं उतर रहे हैं।  

बारिश के अलर्ट के बीच बड़ा फैसला, ग्वालियर में 5 सितंबर को कक्षा 8वीं तक स्कूलों की छुट्टी

 ग्वालियर मौसम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी की गई भारी वर्षा की चेतावनी और जिले में अत्यधिक बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर जिले में 5 सितंबर को नर्सरी से 8वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। सरकारी और प्राइवेट सभी बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा छुट्टी का आदेश आदेश के अनुसार जिले में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई, आईसीएसई, माध्यमिक शिक्षा मंडल एवं अन्य सभी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के छात्र-छात्राओं का 5 सितंबर 2026 को अवकाश रहेगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक एवं अन्य स्टाफ नियमित समय पर उपस्थित रहेंगे तथा अन्य शासकीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। पूर्व से निर्धारित महत्वपूर्ण गतिविधियां एवं परीक्षाएं, यदि कोई हों, यथावत संचालित की जाएंगी।