samacharsecretary.com

टोंक रोड पर फिल्मी अंदाज में चोरी, चादरें लगाकर Rado शोरूम से लाखों की घड़ियां ले गए चोर

  जयपुर
जयपुर में गुरुवार तड़के करीब साढ़े चार बजे जब शहर सो रहा था और टोंक रोड पर राडो लग्जरी घड़ियों के शोरूम में चोरी का पूरा 'ऑपरेशन' चल रहा था। छह-सात नकाबपोश आए, शटर के बाहर दो चादरें तानीं और फिर शुरू हुआ घड़ियां समेटने का सिलसिला। महज 36 मिनट में बदमाश 251 घड़ियां बैगों में भरकर निकल गए। चोरी गई घड़ियों की शुरुआती कीमत करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पूरी वारदात शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। सूत्रों के मुताबिक, चोरी की गई घड़ियों की कीमत 90 हजार से लेकर सात लाख रुपए तक है।

आधा घंटे तक अंदर…क्या पहले से था 'नक्शा'?
पुलिस को आशंका है कि चोरों को शोरूम की अंदरूनी व्यवस्था और महंगी घड़ियों के डिस्प्ले की पहले से जानकारी थी। हालांकि, यह भी जांच की जा रही है कि घड़ियों का चयन पहले से तय था या मौके पर किया गया। बदमाशों ने पहले आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी। मौका देखकर शटर के बाहर कपड़े की दो चादरें आड़ी लगाईं, ताकि अंदर चल रही गतिविधियां सड़क से दिखाई न दें।

घटना के बाद जांच करती पुलिस
इसके बाद शटर तोड़कर उसे ऊपर उठाया और एक-एक कर अंदर दाखिल हो गए। अंदर पहुंचते ही उनका निशाना तय था। महंगी घड़ियों वाले शोकेस और काउंटरों तक पहुंचे और बैगों में घड़ियां भरने लगे। सीसीटीवी फुटेज में नकाब पहने बदमाश टॉर्च की रोशनी में लगातार घड़ियां समेटते नजर आ रहे हैं। कोई शोकेस खंगाल रहा था तो कोई बैग भरने में जुटा था।

चार राज्यों में पहले भी इसी कंपनी के शोरूम बने निशाना
शुरुआती जांच में सामने आया है कि देश के अन्य राज्यों में भी राडो घड़ियों के शोरूम चोरों के निशाने पर रहे हैं। जयपुर पुलिस अब इन पुरानी वारदातों के पैटर्न और आरोपियों के तौर-तरीकों का बारीकी से मिलान कर रही है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस तेलंगाना में पकड़े गए उस अंतरराज्यीय गिरोह के बारे में भी पता लगा रही है, जिसने 11 राज्यों में ऐसे शोरूम को निशाना बनाने की बात कबूल की थी। कुल 251 घड़ियां चोरी होना बताया गया है।

सड़क पर लोग गुजरते रहे
पुलिस को आशंका है कि बदमाश बाइक या चौपहिया वाहन से आए थे। वाहन शोरूम से कुछ दूरी पर खड़ा करने या किसी साथी के उन्हें नजदीक छोड़ने की भी संभावना है। वारदात के दौरान सुबह की सैर करने वाले लोग और वाहन वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पड़ताल शुरू कर दी है।

सुबह 8 बजे खुला चोरी का राज
दुर्गापुरा की चंद्रकला कॉलोनी निवासी शोरूम मालिक ने बजाज नगर थाने में मामला दर्ज कराया। सुबह करीब 8 बजे पड़ोसी दुकानदार ने शटर ऊंचा देखा तो मालिक को सूचना दी। अंदर जाकर देखा तो शोरूम में घड़ियों का बड़ा स्टॉक गायब था। शुरुआती जांच में 251 घड़ियां चोरी होना सामने आया है। मॉडल, कीमत और स्टॉक रिकॉर्ड का मिलान जारी है। इसके बाद चोरी गए माल की अंतिम कीमत स्पष्ट होगी। कई लग्जरी मॉडल लाखों रुपए कीमत के हैं।

कैमरे बंद मिलने और लाइव मॉनिटरिंग न होने से खुली पोल
पॉश और व्यस्त सड़कों में शुमार टोंक रोड पर चोरों ने सुरक्षा तंत्र को ठेंगा दिखाते हुए सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने लग्जरी घड़ी के शोरूम को आधे घंटे से अधिक समय तक इत्मीनान से खंगाला और करोड़ों रुपए की घड़ियां समेटकर फरार हो गए।

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात हो गई, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी। शोरूम में न तो कोई अलार्म सिस्टम था और न ही कोई ऐसा अलर्ट तंत्र, जो चोरी की भनक लगते ही मालिक या पुलिस को सतर्क कर सके। अगले दिन सुबह जब पड़ोस का दुकानदार शोरूम पर पहुंचा, तब चोरी का खुलासा हुआ और उसने शोरूम मालिक लितेश को इसकी सूचना दी।

गश्त व्यवस्था पर सवाल
जिस जगह पर यह चोरी हुई, वहां से बजाज नगर थाना महज सवा किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद बदमाशों का इतनी देर तक बेखौफ होकर शोरूम के भीतर रहना पुलिस की रात्रिकालीन गश्त और खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े करता है। यदि रात के वक्त पुलिस की चौकसी मजबूत होती, तो चोरों के लिए इस तरह आसानी से वारदात को अंजाम देना मुश्किल होता।

सुरक्षा के दावे कागजी
शहर में अभय कमांड सेंटर के जरिए हजारों कैमरों से पैनी नजर रखने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन इस घटना ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोरूम के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे या तो बंद मिले या फिर उन पर किसी की नजर ही नहीं पड़ी। कैमरों के होने के बावजूद लाइव मॉनिटरिंग का फेल होना बड़ी नाकामी है। एडिशनल डीसीपी ईस्ट पारस जैन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि शोरूम में सुरक्षा के नाम पर अलार्म और अलर्ट सिस्टम दोनों ही नदारद थे।

ये सवाल ताकि शहर रहे सुरक्षित
बजाज नगर थाना इलाके में करोड़ों के सामान वाले इस शोरूम में हुई चोरी ने शहर के अन्य महंगे आभूषण, घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस को ऐसे प्रतिष्ठानों एवं शहर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना भी जरूरी हो गया है।

क्या जयपुर में सुरक्षा का मतलब सिर्फ वारदात के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगालना रह गया है? टोंक रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर चोर आधे घंटे से ज्यादा सक्रिय रहे, तो पुलिस गश्त कहां थी?

बजाज नगर थाने से महज सवा किलोमीटर दूर वारदात हुई, फिर पुलिस की मौजूदगी का असर क्यों नहीं दिखा? रात में बंद रहने वाले शोरूमों की सुरक्षा पुलिस गश्त में क्यों नहीं है?

क्या हजारों कैमरों के होने के बावजूद लाइव मॉनिटरिंग फेल हो रही है? क्या कमांड सेंटर के पास कैमरों के बंद होने या तकनीकी खराबियों का कोई रियल-टाइम डैशबोर्ड है?

सेंधमारी होने पर मालिक को तुरंत सूचना देने वाला ऑटोमैटिक अलार्म सिस्टम क्यों नहीं था? क्या ऐसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए?

अपराध रोकने के लिए पुलिस, कमांड सेंटर और व्यापारियों के बीच कोई एकीकृत सुरक्षा तंत्र काम कर रहा है?

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here