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श्रावण अष्टमी पर 10 दिवसीय मेला: माता चिंतपूर्णी में भक्ति और परंपरा का संगम

ऊना उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त तक श्रावण अष्टमी मेले का आयोजन किया जाएगा। एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने इसे लेकर शुक्रवार को माईदास सदन चिंतपूर्णी में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और मेले के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने जानकारी दी कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान एडीसी ऊना मेला अधिकारी, एसडीएम अंब सहायक मेला अधिकारी जबकि एएसपी ऊना को पुलिस मेला अधिकारी तथा डीएसपी अंब को सहायक पुलिस मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है।  सचिन शर्मा ने कहा कि मेले के दौरान माता श्री चिंतपूर्णी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे खुला रहेगा। साफ-सफाई के लिए रात्रि के दौरान मंदिर को केवल एक घंटे के लिए बंद किया जाएगा। दोपहर को मां के श्रृंगार व भोग इत्यादि के लिए भी मंदिर कुछ समय के लिए बंद रहेगा।   लंगर लगाने की लेनी होगी अनुमति एसडीएम ने बताया कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान लंगर लगाने की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा। आयोजक को लंगर की समाप्ति के बाद साफ-सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा मेले के दौरान डीएफएससी ऊना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। नियमों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने कहा कि मेले के दौरान ढोल नगाड़े, चिमटा, लाउडस्पीकर इत्यादि बजाने और प्लास्टिक व थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा मालवाहक वाहनों के माध्यम से माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर आने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।   दस सेक्टरों में बांटा जाएगा क्षेत्र मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटा जाएगा। सुरक्षा के दृष्टिगत पर्याप्त मात्रा में पुलिस व होमगार्ड के जवानों सहित त्वरित कार्य बल की टीमें तैनात रहेंगी। सभी सेक्टरों की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम एसडीएम सचिन शर्मा ने बताया कि मेले के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे तथा ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए रिकवरी वैन तैनात की जाएगी। भिक्षावृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा तथा इसे लेकर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की टीमों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। मेले में श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए विभिन्न स्थानों पर एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक कैंप स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपदा अथवा आग इत्यादि की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन तैनात रहेंगे। साथ ही मेलावधि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मेला शुरू होने से पूर्व सड़कों की व्यवस्था को भी दुरूस्त करने के भी निर्देश दिए। एसडीएम ने निजी सराय प्रबंधकों को सरायों में अग्निशमन उपकरण लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन इनकी जांच भी करवाएगा। उन्होंने विद्युत विभाग को मेलावधि के दौरान विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने के लिए विद्युत लाइनों का आवश्यक रखरखाव करना सुनिश्चित करने को कहा ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा मेले के दौरान अस्थाई रूप से अतिरिक्त स्ट्रीट लाईटें भी लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पीने के पानी के लिए प्याऊ भी लगाए जाएंगे। उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए जल भंडारण टैंकों का क्लोरिनेशन करना भी सुनिश्चित करें। बैठक में एएसपी ऊना संजीव भाटिया, सीएमओ डॉ संजीव वर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत छपरोह शशि कालिया, प्रधान नारी पंचायत अल्का, गंगोट की प्रधान एश्वर्या, डूहल भंगवाल की प्रधान प्रतिभा और अप्पर लोहारा की प्रधान संगीता वाला सहित अन्य मौजूद रहे। 

खाद्य सुरक्षा पर सवाल: आलू, प्याज और रोटी अब नहीं रहे सुरक्षित – इंटरनेशनल स्टडी का दावा

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन देखते-देखते हमारी थाली और जेब तक पहुंचने लगा है. शोधकर्ताओं ने बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ तो वहीं कुछ जगहें भीषण सूखा या अकाल का सामना कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है.  खेती कैसे हो रही है प्रभावित? जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर दुनिया भर में होने वाली खेती पर काफी बुरे तरीके से पड़ रहा है. खेती कम होने के कारण अनाज, फल और सब्जियों के दाम को बढ़ाया जा रहा है. अगर इसी तरह से मौसम बिगड़ता रहा तो आने वाले समय में गरीब देश कुपोषण, राजनीतिक समस्या और समाज में अशांति की समस्या से जूझ रहे होंगे. किन-किन चीजों के दाम में आया उछाल? ब्रिटेन की एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलीजेंस यूनिट, European Central Bank, फूड फाउंडेशन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इमपैक्ट के संयुक्त अध्ययन में 2022 और 2024 के बीच 18 देशों के मौसम का डाटा लिया गया जिसमें पाया गया कि खाने वाली चीजों के दाम में बढ़ोतरी का कनेक्शन गर्मी, सूखा और बारिश से था. शोध से पता चला कि बीते साल ब्रिटेन में आलू, साउथ कोरिया में पत्तागोभी और घाना में कोको के दाम में तेजी से उछाल आया. इनकी वजह असामान्य मौसम था. खेती करने में क्या आ रही है मुश्किल? Climate Change ने खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. तेज बहाव के साथ आने वाली बाढ़ ऊपजाऊ मिट्टी को अपने साथ बहा ले जाती है. इसके बाद उस जगह पर सिर्फ ऐसी जमीन रह जाती है जिस पर खेती करना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इसके बाद अनाज की कमी और मंहगाई की वजह से परिवारों को बुनियादी पोषण का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है.  आलू-प्याज पर भी खतरा? इसी शोध में ये भी पाया गया कि साल 2022 के मुकाबले भारत में जून 2024 तक प्याज और आलू के दाम 89 फीसदी तक बढ़े थे. यहीं हाल बाकी देशों का भी है. बता दें कि मोजाम्बिक में जब ब्रेड की कीमत बढ़ी थी तो लोग सड़कों पर उतर आए थे. शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि, जब खाने की चीजें महंगी होती हैं तो गरीबों को कम पोषण मिलता है जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है. 

फ्लाइट से राखी पहुंचाना हुआ महंगा, ग्वालियर से बड़े शहरों की टिकट में तीन गुना उछाल

 ग्वालियर  रक्षा बंधन पर विमान कंपनियां भी मौके का फायदा उठाकर लोगों की जेब हल्की करने की तैयार में हैं। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan 2025) के आसपास हवाई सफर महंगा हो गया है । ग्वालियर से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के लिए महंगे किराये (Flight Fare Expensive)के बावजूद फ्लाइट को अच्छी बुकिंग मिल रही है, जो फेयर रक्षा बंधन से पहले कम है, वह त्योहार के सीजन में दो से तीन गुना तक हो गए हैं। महंगा किराया रक्षा बंधन के दो दिन बाद भी रहेगा। 15-16 और 17 अगस्त तीन दिन भी फ्लाइट किराया बढ़ने की उम्मीद इस त्योहार के छह दिन बाद ही 15 अगस्त की छुट्टी भी लोगों को मिलने वाली है। इस बार 15 अगस्त शुक्रवार की है 16 को जन्माष्टमी और 17 को रविवार है। ऐसे में ये तीन दिन भी छुट्टी के रहेंगे, इन दिनों में भी फ्लाइट का किराया बढ़ा रहने की उम्मीद है। अहमदाबाद की हवाई सेवा भी बंद सप्ताह में एक दिन चलने वाली अहमदाबाद की फ्लाइट पिछले महीने से बंद है। ऐसे में अब लोगों को अहमदाबाद के लिए ट्रेन का ही सहारा है। इससे कुछ दिन पहले भी हैदराबाद के साथ कोलकाता की फ्लाइट बंद हो गई थी। ट्रेनों में मिल रहा नो रूम रक्षा बंधन पर ट्रेनों में भी बुरा हाल है। मुंबई, बेंगलुरू, सहित लंबी दूरी की ट्रेनों में भी यात्रियों को टिकट नहीं मिल रहे है। इससे परेशान होकर यात्री दूसरे शहरों से ट्रेनें छोड़कर अब फ्लाइट से जाने का प्लान भी बनाने लगे हैं। यहां जानें कितना किराया देना होगा शहर           – पहले        – अब नई दिल्ली – 3071 रुपए – 10303 रुपए मुंबई – 4354 रुपए – 9179 रुपए बेंगलुरू- 5271 रुपए – 9226 रुपए 24 हजार से ज्यादा मिलते हैं यात्री ग्वालियर से हर महीने दूसरे शहरों के आने जाने वाले यात्रियों की संख्या 24 हजार के पार है। इसमें मुंबई और दिल्ली के यात्री सबसे ज्यादा होते है। लेकिन पिछले महीने जून में मुंबई के बाद दूसरे नंबर पर बेंगलुरु के यात्री थे।

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

कूनो नेशनल पार्क में बारिश से बिगड़े हालात, चीतों के फंसने का खतरा गहरा

 ग्वालियर  कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही भारी वर्षा ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मादा चीता 'आशा' और उसके तीन शावक रविवार को पार्क की सीमा पार कर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गए। इस समय जंगल में चारों ओर जलभराव और दलदल जैसी स्थिति है, जिससे ट्रैकिंग में भारी बाधा आ रही है। जंगल के बाहर पहुंचना जोखिम भरा पार्क की सीमा पार कर चुके चीतों के सामने नहर में डूबने और गड्ढों में फंसने का खतरा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल चीता 'पवन' की मौत पानी से भरे एक गड्ढे में गिरने से हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है, लेकिन वर्षा और रास्तों के बाधित होने के कारण ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो गई है। गार्ड्स और ट्रैकर्स की सीमाएं हालांकि सभी चीतों के गले में कालर आइडी लगे हुए हैं, फिर भी ट्रैकिंग टीमें बारिश के चलते मौके पर जल्दी नहीं पहुंच पा रहीं। पानी से भरे रास्तों और कीचड़ के कारण न तो गाड़ियों से पहुँचना संभव है और न ही पैदल ट्रैकिंग आसान रह गई है। इसी कारण, ट्रैकर्स और वनरक्षकों ने एक प्रस्ताव प्रबंधन के सामने रखा है कि मानसून खत्म होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाए। संक्रमण से बचाव के उपाय कूनो डीएफओ थिरूकुरल आर ने बताया कि सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटी एक्टो परजीवी दवा दी जा चुकी है। साथ ही लगातार निगरानी जारी है। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 26 चीते हैं, जिनमें 9 वयस्क (6 मादा, 3 नर) और 17 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 16 चीते अब खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। शावकों के लिए स्थिति ज्यादा संवेदनशील मादा चीतों के साथ मौजूद शावकों के लिए बारिश के मौसम में खुले जंगल में रहना और भी खतरनाक है। पानी भरे गड्ढों और दलदली जमीन में उनके फिसलने या फंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। ट्रैकिंग रूट्स में पानी भरने से निगरानी टीमों की गतिविधि सीमित हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता में बाधा बन सकती है।

उर्दू शिक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बिना छात्र वाले स्कूल में टीचर की पोस्टिंग नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने उर्दू शिक्षक स्थानांतरण विवाद (Teacher Transfer Dispute) पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि उर्दू विषय पढ़ाने वाले शिक्षक को वहीं कार्य करने दिया जाए, जहां उर्दू शिक्षक का पद स्वीकृत है और विद्यार्थी उपलब्ध हैं। साथ ही, ट्रांसफर आदेश के खिलाफ दिए गए रिप्रेजेंटेशन का 30 दिन के भीतर निपटारा करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह आदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी ने आजाद चौक, कटनी निवासी इलियास अहमद की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शंकर प्रसाद सिंह और पद्मावती जायसवाल ने पक्ष रखा। क्या है मामला? याचिकाकर्ता इलियास अहमद की नियुक्ति उर्दू विषय के शिक्षक के रूप में शासकीय माध्यमिक शाला, खमरिया नंबर-दो में हुई थी। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी, कटनी ने उनका ट्रांसफर शासकीय प्राथमिक शाला कोठी, ढीमरखेड़ा में कर दिया। यहीं विवाद शुरू हुआ क्योंकि जहां उनका स्थानांतरण हुआ वहां उर्दू विषय का न तो कोई पद स्वीकृत है और न ही छात्र हैं। इलियास अहमद ने इस अन्याय के खिलाफ डीईओ कटनी, कलेक्टर कटनी और लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को अभ्यावेदन दिया, जिसमें स्थानांतरण रद्द करने की मांग की गई। साथ ही, यह भी कहा गया कि मप्र शासन के सर्कुलर के अनुसार मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी होने के नाते उन्हें स्थानांतरण में छूट मिलनी चाहिए। लेकिन, लगातार आवेदन देने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई, जिससे विवश होकर उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा। हाई कोर्ट का फैसला कोर्ट ने माना कि शिक्षक की नियुक्ति विशिष्ट विषय उर्दू के लिए हुई थी। ऐसे में उस स्कूल में भेजना जहां न तो उर्दू पढ़ने वाले छात्र हैं और न ही पद स्वीकृत है, न केवल व्यावहारिक रूप से गलत है बल्कि यह शैक्षिक हितों के भी खिलाफ है। इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को उसी मौजूदा स्कूल में कार्य करने दिया जाए, जहां उर्दू के विद्यार्थी और पद दोनों मौजूद हैं। स्थानांतरण के विरुद्ध प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण 30 दिन के भीतर किया जाए।

जांच के घेरे में सौरभ शर्मा: करोड़पति कांस्टेबल की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट सतर्क, जांच तेज

भोपाल  जबलपुर हाईकोर्ट में  आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल से करोड़पति बिल्डर बने सौरभ शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ईडी ने सौरभ शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों समेत 12 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद शर्मा 4 फरवरी से न्यायिक हिरासत में हैं। जिला न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शर्मा ने हाईकोर्ट में अपील की थी। 12 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है मामला हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं। लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर दबिश दी थी। बेनामी संपत्ति मिलने पर ईडी ने सौरभ शर्मा सहित उसके पारिवारिक सदस्यों समेत 12 व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। 4 फरवरी से पुलिस की अभिरक्षा में है सौरभ आरोपी सौरभ शर्मा विगत 4 फरवरी से न्यायिक अभिरक्षा में है। ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में जिला न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान सौरभ शर्मा के वकील ने दलील दी कि ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्ति सौरभ शर्मा के नाम पर नहीं है और उनका उन संपत्तियों से कोई लेना-देना नहीं है। 108 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच ईडी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विक्रम सिंह ने अदालत को बताया कि सह-आरोपियों का कहना है कि सौरभ शर्मा ने उनके नाम पर उक्त संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी के अधिवक्ता ने एकलपीठ को बताया कि 108 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है, जिसे सौरभ शर्मा ने सह-आरोपियों के नाम पर खरीदा था। अटैच की गई संपत्ति से संबंधित एक सिविल प्रकरण दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। आरोपी सौरभ शर्मा द्वारा अवैध रूप से अर्जित धन से उक्त संपत्तियां खरीदी गई थीं। जिला न्यायालय में खारिज हुई थी जमानत अर्जी मामला तब शुरू हुआ जब लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर छापा मारा और बेनामी संपत्ति का पता लगाया। इसके बाद, ईडी ने शर्मा, उनके परिवार और 12 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। शर्मा को 4 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। शर्मा ने जिला न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की।  

माता-पिता की सेवा ही सच्चा धर्म: बेटा बना श्रवण कुमार, 20 KM पैदल चला कोटेश्वर धाम

बालाघाट/लांजी  कहते हैं भक्ति और सेवा जब साथ चलें, तो वह दृश्य अद्वितीय बन जाता है। सावन माह में भगवान शिव की भक्ति के ऐसे ही एक अलौकिक दृश्य ने हर किसी को भावुक कर दिया। लांजी के प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम में जब तीन बेटों ने अपने वृद्ध माता-पिता को खाट पर बैठाकर 20 किलोमीटर पैदल यात्रा पूरी की, तो हर किसी को श्रवण कुमार की याद आ गई। यह दृश्य सोमवार शाम को कोसमारा से लांजी के बीच दिखा। भीमराज नेताम, अनोत नेताम और दुर्गेश नेताम नामक 3 भाई अपने माता-पिता जयलाल नेताम और सुगन बाई नेताम को खाट पर बिठाकर कांवड़ यात्रा के रूप में कोटेश्वर धाम ले जा रहे थे। उनके साथ चाचा जलम नेताम और अन्य स्वजन भी थे। वर्षों पुरानी मनोकामना हुई पूरी भीमराज नेताम ने बताया कि दो वर्ष पहले उनके मन में यह संकल्प आया था कि वे अपने माता-पिता को कांवड़ में लेकर भगवान कोटेश्वर का जलाभिषेक करवाएंगे। गांव में शिव मंदिर का निर्माण हो चुका था, लेकिन कोटेश्वर धाम ले जाने की मनोकामना अधूरी रह गई थी। इस बार सावन में सभी भाइयों ने मिलकर प्रण किया कि इस बार वह यह सेवा पूर्ण करेंगे और अंततः सोमवार को उन्होंने अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया। बोल बम के जयकारों के साथ जैसे-जैसे वे रास्ता तय कर रहे थे, हर कोई उन्हें श्रद्धा से निहार रहा था। रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों ने उन्हें पानी पिलाया, विश्राम करवाया और श्रवण कुमार की उपाधि दी। कोटेश्वर धाम पहुंचकर उन्होंने विधिपूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद उसी मार्ग से वे अपने माता-पिता को वापस कोसमारा ले गए। हर-हर महादेव का जयकारा करते निकले कांवड़िये पवित्र श्रावण माह के दूसरे सोमवार को शहपुरा-भिटौनी में करीब 7 km की कांवड़ यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और बड़े शामिल हुए, जिन्होंने नर्मदा तट के मालकछार घाट से जल भरकर प्रसिद्ध सफेद शिवलिंग सीतासरोवर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। आयोजक विश्वजीत सिंह और राजदीप राय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यह यात्रा निकाली जा रही है, जिससे वे शिव भक्त भी जुड़ पाते हैं जो लंबी कांवड़ यात्रा नहीं कर सकते। इस यात्रा से वे अपनी आस्था और महत्वाकांक्षाओं को नर्मदा जल से अभिषेक कर पूरा कर पा रहे हैं। बेलखाड़ू में कांवड़ यात्रा का किया स्वागत श्रावण मास के दूसरे सोमवार को विश्व हिंदू परिषद महिला शक्ति द्वारा गौरीघाट से कटंगी तक की 56 km लंबी कांवड़ यात्रा निकाली। यात्रा की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन-अर्चन से हुई, जिसके बाद लड़कियों और महिला कांवड़धारियों ने 'बम भोले' के जयकारे लगाते हुए पैदल चलकर अपने कंधे पर कांवड़ रखी। ग्राम बेलखाडू के माल बाबा मंदिर, सिमरिया तिराहा और अन्य स्थानों पर शिव भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान जगह-जगह स्टॉल लगाकर फल, मिठाई और भोजन-पानी भी वितरित किया गया। स्वागत करने के लिए कटंगी नगर परिषद अध्यक्ष अमिताभ साहू, मंडल अध्यक्ष कटंगी भूपेंद्र सिंह ठाकुर, राजू शुक्ला, अरविंद साहू, जतिन उपाध्याय, रज्जी शुक्ला, तनु जानू शिवहरे, गनेश साहू, पीयूष साहू आदि उपस्थित रहे।

सोने की कीमतों पर सरकार का असरदार फैसला, अब 40 हजार से नीचे मिलेगा शुद्ध सोना

मुंबई  सोना (Gold) काफी महंगा हो गया है, 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड का भाव 1 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है. भारत में बड़े पैमाने पर लोग सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं, खासकर महिलाएं गहने लेती हैं. लेकिन अब सोना महंगा होने से महिलाएं चाहकर भी गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद पा रही हैं. इस बीच अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिससे आने वाले दिनों में सोने की ज्वेलरी की बिक्री बढ़ सकती है. क्योंकि आप 40 हजार रुपये से कम में 10 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी (Gold Jewellery) खरीद सकते हैं.   दरअसल, सोना इतना महंगा हो गया है कि ग्राहक 22 या 18 कैरेट की जगह सस्ते 9 कैरेट के गहनों की खरीदारी में इंटरेस्ट ले रहे हैं. कम कैरेट वाले गोल्ड ज्वेलरी खरीदना लोग बेहतर समझ रहे हैं, क्योंकि ये जेब पर कम बोझ डालते हैं. इसलिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ऐलान किया है कि अब 9 कैरेट सोने के गहनों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. सरकार का तर्क है कि 9 कैरेट गोल्ड पर हॉलमार्क होने से लोग ठगी से बचेंगे. 9 कैरेट गोल्ड के फायदे  इसलिए अब 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए भी हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणियों की सूची में शामिल कर लिया है. यह नियम इसी जुलाई से लागू हो गया है, यानी अब आप हॉलमार्क वाले 9 कैरेट वाली गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं. इससे पहले 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य थी. एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 9 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 37000 से 38000 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है. वहीं, 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी के लिए आपको कम से कम 1 लाख रुपये चुकाने होंगे. सरकार के इस कदम से ग्राहकों को सोने की शुद्धता के बारे में सही जानकारी मिलेगी. 9 कैरेट सोना 22 या 24 कैरेट सोने से सस्ता होता है, और इस पर आधुनिक डिजाइन बनाना भी आसान है.  हॉलमार्किंग से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा यही नहीं, 9 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा, विदेशों में भी 9 कैरेट गोल्ड की खूब डिमांड है. 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी, और 9 कैरेट सोने के आभूषणों की लोकप्रियता भी बढ़ेगी.  अगर फायदे की बात करें तो 9 कैरेट गोल्ड हॉलमार्किंग से गहनों की कीमत कम होगी और लोगों को सस्ता गोल्ड ज्वेलरी खरीदने का बेहतरीन विकल्प मिल जाएगा. हॉलमार्किंग से 9 कैरेट गोल्ड की 37.5% शुद्धता पक्की होगी. नियम के मुताबिक अब ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग केंद्रों को इसका पालन करना होगा. कैसे करें शुद्ध ज्वेलरी की पहचान सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की जांच करने के लिए, आप भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का BIS-Care ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप के जरिये आप ज्वेलरी पर दिए गए HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर को डालकर असली या नकली हॉलमार्किंग की पहचान कर सकते हैं. इसके अलावा आप BIS की वेबसाइट पर जाकर भी हॉलमार्क की जांच कर सकते हैं.  गौरतलब है कि आप जब 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी लेते हैं तो आपको पता होनी चाहिए कि उसमें 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स होता है. वहीं जब आप 18 कैरेट की ज्वेलरी खरीदते हैं, उसमें 6 कैरेट कोई और मेटल मिला होता है. हालांकि अगर आप निवेश के लिए ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो फिर 22 कैरेट की ज्वेलरी ही खरीदें.   हॉलमार्क क्यों जरूरी? हॉलमार्किंग का मतलब होता है सोने की शुद्धता की सही पहचान. जब आप कोई सोने का गहना खरीदते हैं, तो उस पर एक छोटा-सा निशान बना होता है, जो बताता है कि वो गहना कितने कैरेट का है और उसकी गुणवत्ता क्या है. हॉलमार्किंग से ग्राहक को भरोसा रहता है कि जो सोना वह खरीद रहा है, वह असली है और उसकी कीमत के हिसाब से उसमें कोई धोखा नहीं है. इससे न सिर्फ खरीदार को सुरक्षा मिलती है, बल्कि सोने की बिक्री या आगे चलकर एक्सचेंज में भी आसानी होती है.