samacharsecretary.com

सशक्तिकरण की ओर कदम: अब महिलाएं करेंगी जलकर संग्रहण, मिलेगा प्रोत्साहन राशि

उज्जैन  उज्जैन जिले में गांवों में जल कर राशि जमा करवाने का चुनौतीभरा काम अब महिलाएं अपने हाथों में लेने वाली हैं। वे हर महीने जल जीवन मिशन के उपभोक्ताओं के घर पहुंचेंगी और उनसे जल कर की राशि लेंगी। इसके एवज में उन्हें भी जमा जलकर राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। जल जीवन मिशन अंतर्गत अधिकांश गांवों के कई घरों में नल कनेक्शन हैं। इनमें से कई परिवार रोज नलों से पानी भी लेते हैं लेकिन इसके बदले में जलकर जमा करने वालों की संया बहुत ही कम है। जलकर वसूली के लिए अभी तक प्रभावी व्यवस्था भी नहीं बनी है। ऐसे में पंचायत को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है वहीं राशि की कमी में योजना का मेंटिनेंस भी नहीं हो पाता है। स्वसहायता समूह की महिलाएं देंगी दस्तक गांवों में राजस्व वसूली बढ़ाने अब जिले में नवाचार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब महीने की 1 से 10 तारीख के बीच नल जल के उपभोक्ताओं के घर स्वसहायता समूह की महिलाएं दस्तक देंगी। वे उपभोक्ताओं को जलकर की जानकारी देने के साथ इसकी बकाया राशि जमा करवाएंगी। राशि क्यूआर कोड से भी जमा करवाई जाएगी ताकि पादर्शिता बनी रहे। साथ ही तीन रसीद बनेगी जिनमें एक उपभोक्ता, दूसरी पंचायत व तीसरी महिला सदस्य के पास रहेगी। जलकर वसूली की नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने वाली है। शुरुआत उज्जैन जनपद के 57 व अन्य जनपदों की 10-10 योजनाओं (एक योजना में एक गावं) से होगी। व्यवस्था कारगर होने पर जिले की सभी योजनाओं में इसे लागू कर दिया जाएगा। महिलाओं को आर्थिक लाभ भी मिलेगा जल कर संग्रहित करने के लिए प्रत्येक गांव में स्वसहायता समूह की तीन-चार महिलाओं को अधिक्रत किया जाएगा। महीने की 1 से10 तारीख तक कर जमा करने के बाद इसकी 20 प्रतिशत राशि महिला के बैंक खाते में सीधे जमा की जाएगी। बता दें कि वर्तमान में पंचायत में 60 से 100 रुपए प्रतिमाह जलकर निर्धारित है। अभी इसे जमा करवाने की ठोस व्यवस्था नहीं है। हालांकि नलजल मिशन अंतर्गत ग्राम जल स्वच्छता समिति पहले से गठित है। जनपदवार दे रहे प्रशिक्षण जिले में नई व्यवस्था लागू करने से पूर्व जिला पंचायत के माध्यम से जनपदवार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला पंचायत की जिला समन्यक व ट्रेनिंग कार्यक्रम की नोडल अधिकारी कविता उपाध्याय ने बताया, कलेक्टर के निर्देश व जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। समूह की चिन्हित महिलाओं व संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। जल जीवन मिशन अंतर्गत जलकर राशि संग्रहण के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें स्वसहायता समूह की महिलाओं को जोडक़र उन्हें इसकी जिमेदारी दी जा रही है। इससे राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी होगी। – जयति सिंह, जिपं. सीईओ

लद्दाख की ऊंचाइयों पर सतना का परचम: रत्नेश पाण्डेय की बड़ी उपलब्धि

सतना  प्रदेश के प्रख्यात पर्वतारोही रत्नेश पाण्डेय ने लद्दाख क्षेत्र में स्थित 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाली चार पर्वत चोटियों को महज तीन दिनों में फतह कर साहस, संकल्प और सतना की पहचान को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने हर चोटी पर भारत का तिरंगा और अपने गृहनगर सतना का ध्वज लहराया और आई लव सतना और जय हिंद का घोष किया है। सबसे ऊंची चोटी है ग्यामा कांगरी ईस्ट दरअसल रत्नेश पाण्डेय ने जिन पर्वत चोटियों को सफलतापूर्वक फतह किया है, उनमें चार अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाली चोटियां शामिल हैं। इनमें सबसे ऊंची चोटी ग्यामा कांगरी ईस्ट है। जिसकी ऊंचाई 6,108 मीटर है। इसके अलावा उन्होंने कीगर री (6,100 मीटर), यालुंग नोंग 1 (6,050 मीटर) और यालुंग नोंग 2 (6,080 मीटर) पर भी विजय प्राप्त की है। ये सभी चोटियां समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं। ढह गया तंबू, फिर भी नही टूटी हिम्मत यह पर्वतारोहण अभियान अत्यधिक बारिश, बर्फबारी और तेज़ हवाओं जैसी खतरनाक परिस्थितियों के बीच पूरा हुआ है। अभियान के दौरान एक हिम तूफान ने उनका तंबू तक ढहा दिया। लेकिन रत्नेश और उनकी टीम ने माउंट एवरेस्ट पर अर्जित अनुभव और साहस के बल पर न केवल खुद को सुरक्षित रखा है बल्कि अभियान को दोबारा शुरू कर सफलता के साथ पूरा भी किया है। मंगल चांद पर जीवन ढूढ़ना तकनीकी उपलब्धि रत्नेश का यह मिशन पूरी तरह अल्पाइन स्टाइल में पूरा किया गया है। जिसमें बिना बाहरी सहायता के सभी ज़रूरतें टीम ने खुद पूरी कीं है। उन्होंने पर्वतारोहण को केवल खेल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक ज़रूरी साधन बताया। उन्होंने कहा मंगल और चांद पर जीवन ढूंढना तकनीकी उपलब्धि हो सकती है। लेकिन धरती मां पर जीवन को बचाना हमारी सबसे बड़ी नैतिक ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। टीम के सहयोगियों को दिया श्रेय उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय टीम के अन्य सदस्यों स्टेंजिन लापु, दावा शेर्पा और अब्दुल कयूम को दिया और बताया कि हिमतूफान के बाद टीम जीपीएस की मदद से एक निचले गांव तक पहुंची और फिर मौसम साफ़ होने पर पुनः चढ़ाई शुरू की। सरकार कर चुकी है विक्रम पुरस्कार से सम्मानित गौरतलब हो कि सतना निवासी रत्नेश पाण्डेय को पहले ही मध्यप्रदेश सरकार के विक्रम पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह पुरस्कार उन्हें साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था। वे एक प्रमाणित मास्टर इंस्ट्रक्टर और रेस्क्यू एक्सपर्ट भी हैं। लद्दाख प्रशासन ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण चेतना भी फैलाते हैं।

वीरगति को प्राप्त हुए सिपाही श्री हरिओम नागर का पार्थिव शरीर पहुंचा भोपाल

वीरगति को प्राप्त हुए सिपाही श्री हरिओम नागर का पार्थिव शरीर पहुंचा भोपाल मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने दी श्रद्धांजलि भोपाल जम्मू-कश्मीर के सियाचिन में मातृभूमि की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए राजगढ़ जिले के ग्राम टूटियाहैड़ी निवासी सिपाही श्री हरिओम नागर का पार्थिव शरीर सोमवार सायं लगभग 4 बजे विशेष विमान से भोपाल पहुंचा। भोपाल एयरपोर्ट पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला तथा अपर जिला दण्डाधिकारी श्री अंकुर मेश्राम ने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारत माँ के इस वीर सपूत को नमन किया। उल्लेखनीय है कि सिपाही हरिओम नागर सियाचिन में भारत-पाक सीमा पर 13,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान 20 जुलाई की सुबह लगभग 9 बजे अचानक हुए भूस्खलन में एक विशाल शिला उनके ऊपर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।  

अग्निवीरों को सम्मान: उत्तराखंड में सरकारी भर्तियों में 10% आरक्षण की योजना

देहरादून  सैनिक के रूप में देश की आन-बान-शान की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने के बाद नागरिक जीवन में लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों को उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण मिल सकता है। अग्निवीरों के कल्याण और पुनर्वास के लिए उत्तराखंड सरकार विभिन्न विभागों की भर्तियों में क्षैतिज आरक्षण की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। कार्मिक विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर विधायी विभाग को परामर्श के लिए भेज दिया है। रविवार को कार्मिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने 'हिन्दुस्तान' को बताया कि आरक्षण प्रस्ताव पर पिछले कुछ समय से मंथन चल रहा था। विधायी परामर्श के बाद आरक्षण प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी के लिए जाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार अग्निवीरों को वर्दीधारी सेवाओं में आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। उत्तराखंड में पुलिस के साथ ही परिवहन, आबकारी, वन विभाग समेत कई विभाग हैं। अग्निवीर सेना से प्रशिक्षित होने की वजह से प्रवर्तन सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले साल घोषणा की थी कि अग्निवीरों के सेवा पूरी करने के बाद उनके समायोजन, पुनर्वास के लिए ठोस व्यवस्था की जाएगी। इससे देश की सेवा के लिए समर्पित होने वाले नौजवानों को सेवा अवधि पूरी करने के बाद रोजगार, पुनर्वास के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। कमेटी दे चुकी है रिपोर्ट मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सरकार ने सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी भी अपनी रिपेार्ट सरकार को सौंप चुकी है। इसमें अग्निवीरों को सेना में सेवा की अवधि के वर्षों की संख्या के अनुसार सरकारी सेवाओं में अधिकतम आयु सीमा में छूट, सेवा से लौटने के बाद शैक्षिक योग्यता बढ़ाने के इच्छुक पूर्व अग्निवीरों को राज्य के शिक्षण संस्थानों की सीटों पर एक तय सीमा तक आरक्षण तथा राज्य की स्वरोजगार और ऋण योजनाओं में भी प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। वर्ष 2022 में शुरू हुई थी योजना वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत भर्ती होने युवाओं को अग्निवीर नाम से जाना जाता है। यह सेवा चार साल की है। इसमें 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थायी होने का अवसर भी मिलता है। वर्ष 2022 में यह योजना शुरू हुई थी। चार साल पूरे होने पर अग्निवीर वर्ष 2026 से नागरिक जीवन में लौटना शुरू करेंगे। यूपी में भी है 20 पर्सेंट आरक्षण इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य पुलिस बल में अग्निवीरों को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दे चुकी है। उन्हें आयु में 3 वर्ष की छूट भी प्रदान की गई है। इसके अलावा राजस्थान और हरियाणा में भी अग्निवीरों को आरक्षण देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा कई केंद्रीय बलों में भी उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

इंसानियत की मिसाल बने कलेक्टर, आशीष सिंह ने सैलरी से बच्चों के सपनों को दिया सहारा

इंदौर  जिन बच्चों के लिए परीक्षा की राह फीस के कारण बंद हो रही थी, उनके लिए इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आए। आर्थिक तंगी से जूझ रहे 22 छात्रों की तकलीफ सुनने के बाद कलेक्टर ने जो किया, वो न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी है। इतने पैसे नहीं कि स्कूल फीस और परीक्षा शुल्क भर सकें दरअसल, बीते महीने कलेक्टर आशीष सिंह मूसाखेड़ी स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के निरीक्षण पर पहुंचे थे। वहां 10वीं और 12वीं के कई छात्रों ने अपनी परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, और इतने पैसे नहीं हैं कि वे स्कूल की फीस और परीक्षा शुल्क भर सकें। पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती है सर एक छात्र ने डबडबाई आंखों से कहा-“पिता मजदूरी करते हैं, बड़ी मुश्किल से घर चलता है। फीस मांगी तो उन्होंने साफ कह दिया कि पढ़ाई छोड़नी होगी। तब कलेक्टर सर ने भरोसा दिलाया कि वे मदद करेंगे। आज हमारी फीस जमा हो चुकी है।” छात्रों की यह स्थिति सुनकर कलेक्टर भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत स्कूल प्राचार्य से बात की और वादा किया कि वे इन बच्चों की फीस अपनी सैलरी से भरेंगे। वादा ही नहीं, बल्कि कुछ ही दिनों में उन्होंने करीब ₹65,000 का चेक स्कूल को सौंपा। इससे 22 बच्चों की पूरी सालभर की फीस और परीक्षा शुल्क जमा कर दिया गया। बच्चों की पढ़ाई न रुके, यही मकसद प्राचार्य शव सेवक मौर्य ने बताया- “कलेक्टर सर जब स्कूल आए थे, तब कई छात्रों ने अपनी परेशानी बताई थी। उन्होंने तुरंत कहा कि बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने अपनी सैलरी से राशि दी और अब सभी 22 बच्चों की फीस जमा हो गई है।” जानकारी के अनुसार, स्कूल की सालभर की फीस ₹1200 और परीक्षा शुल्क ₹1500 है। गरीब तबके से आने वाले इन बच्चों के लिए ये राशि भी बहुत बड़ी थी। लेकिन अब वे न सिर्फ स्कूल जा सकेंगे, बल्कि परीक्षा भी दे सकेंगे। एक अधिकारी, जो बच्चों का ‘भविष्य रक्षक’ बन गया कलेक्टर आशीष सिंह का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि उन तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ना चाहते हैं। उनका यह कार्य यह दर्शाता है कि जब किसी पद पर बैठा इंसान दिल से जिम्मेदारी निभाता है, तो कई जिंदगियां संवर जाती हैं। इन 22 छात्रों की आंखों में अब डर नहीं, बल्कि एक उम्मीद है- कि वे भी कुछ बन सकते हैं, क्योंकि कोई तो है जो बिना शोर किए उनके पीछे खड़ा है। यह सिर्फ फीस भरने की कहानी नहीं है, यह एक नई सुबह की शुरुआत है।

मिशेल ओवेन का ऐतिहासिक डेब्यू, पहले ही मैच में रचा रिकॉर्ड, अर्धशतक के साथ दिग्गजों की लिस्ट में शामिल

मेलबर्न  ऑस्ट्रेलिया ने 5 मैचों की टी20 सीरीज के पहले मैच में वेस्टइंडीज के 3 विकेट से मात देकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. 190 रनों के लक्ष्य को मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया ने 7 गेंद शेष रहते ही हासिल कर लिया. ये मैच ऑस्ट्रेलियाई डेब्यूटंट मिशेल ओवेन के नाम रह, जिन्होंने मैच में कई उपलब्धियां हासिल की. मिशेल ओवेन ने डेब्यू मैच में रचा इतिहास मिशेल ओवेन ने अपने पदार्पण मैच में ही शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने 27 गेंदों पर 50 रनों की तेज पारी खेली, जिसमें 6 छक्के शामिल थे. इसके साथ वो डेब्यू मैच में अर्धशतक जड़ने वाले तीसरे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बन गए. इससे पहले ये कारना रिकी पोंटिंग और डेविड वॉर्नर अंजाम दे चुके है. मैच में शानदार और मैच जिताऊ पारी खेलने की वजह से मिशेल ओवेन को प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड दिया गया. जिसके साथ वो डेब्यू मैच में ये अवॉर्ड जीतने वाले चौथे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज भी बन गए हैं. इससे पहले इस लिस्ट में रिकी पोंटिंग (2005), कैमरून व्हाइट (2007), और डेविड वॉर्नर (2009) का नाम शामिल है. इसके अलावा ओवेन ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. वो सबसे ज्यादा 186.34 की स्ट्राइक रेट से 1,000 टी20 रन पूरा करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं. इससे पहले ये रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के फिन एलन के नाम था, जिन्होंने 173.81 की स्ट्राइक रेट के साथ 1000 रन पूरा किया था. WI vs AUS पहले टी20 मैच की हाइलाइट्स वेस्टइंडीज बनाम ऑस्ट्रेलिया पहले टी20 मैच की बात करें तो मेहमान टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम नें पूरे 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 189 रन बनाए. जिसमें कप्तान शाई होप के 39 गेंद में 55 रन, रोस्टन चेस के 32 गेंद में 60 रन और शिमरन हेटमायर के 19 गेंद में 38 रन सबसे ज्यादा थे. ऑस्ट्रेलिया की ओर से ड्वार्शुइस ने 23 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि ओवेन, सीन एबॉट और कॉनॉली ने एक-एक विकेट लिया. 190 रनों के के मुश्किल लक्ष्य को मेहमान टीम ने ओवेन और कैमरून ग्रीन के अर्धशतकों की बदौलत सात गेंद शेष रहते ही चेस कर लिया. ओवेन 27 गेंद पर 50 और ग्रीन ने 26 गेंद पर 51 रनों की पारी खेली. वेस्टइंडीज की ओर से जेसन होल्डर, अल्जारी जोसेफ और गुडकेश मोटी ने 2-2 विकेट लिए, जबकि अकिला हुसैन को एक विकेट मिला. सीरीज का दूसरा मैच इसी ग्राउंड पर 23 जुलाई को खेला जाएगा.

अमरकंटक से भोरमदेव तक: भावना बोहरा की आस्था की 151 किमी लंबी कांवड़ यात्रा शुरू

कवर्धा सावन के दूसरे सोमवार को शिवभक्ति की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने मां नर्मदा के जल के साथ 151 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की शुरुआत की। अमरकंटक से कांवड़ लेकर निकलीं विधायक बोहरा इस कठिन यात्रा के दौरान जंगल, पहाड़, नदी-नाले पार करते हुए डोंगरिया स्थित जलेश्वर महादेव और प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। बता दें कि आज सुबह अमरकंटक पहुंचकर विधायक भावना बोहरा ने विधि-विधान से मां नर्मदा की पूजा की और छत्तीसगढ़ राज्य की सुख-शांति व समृद्धि की कामना करते हुए संकल्प के साथ यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान ‘बोल बम’ और ‘हर हर नर्मदे’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस यात्रा में उनके साथ सैकड़ों शिवभक्त भी कांवड़ उठाकर निकल चुके हैं। यह जत्था सात दिनों की कठिन यात्रा के बाद अपने गंतव्य तक पहुंचेगा, रास्ते में पहाड़ी इलाके, बीहड़ और घने जंगल होंगे, लेकिन श्रद्धा की ताकत हर बाधा को पार कर रही है। 4 वर्षों से कांवड़ियों के लिए कर रहीं भंडारे का आयोजन विधायक भावना बोहरा पिछले चार वर्षों से अमरकंटक में छत्तीसगढ़ से आने वाले कांवड़ियों के लिए नि:शुल्क भंडारे का आयोजन करती आ रही हैं। इसमें ठहरने, भोजन और जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जाती है। इस निःस्वार्थ सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने इस वर्ष स्वयं कांवड़ यात्रा पर निकलने का निर्णय लिया। जनआस्था का महापर्व सावन के इस पावन माह में पूरे कवर्धा जिले से लेकर अमरकंटक तक हर दिशा में “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई दे रही है। पंचमुखी बूढ़ा महादेव और भोरमदेव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। यह पदयात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जनसेवा, सामाजिक एकता और प्रकृति से जुड़ाव की सशक्त मिसाल भी बन रही है।

काडियाना हादसा: यात्रियों से भरी बस मलबे में फंसी, बचाव कार्य जारी

हिमाचल हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने कहर बरपा रखा है, खासकर जिला सिरमौर में स्थिति गंभीर बनी हुई है। रात भर से जारी मूसलाधार बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है, जिससे सड़कें बंद हो गई हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाल-बाल बची निजी बस में फंसी 15 सवारियां सोमवार सुबह श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के संगड़ाह-चढ़ाना सड़क पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। काडियाना नाले में भारी मात्रा में मलबा आने से एक निजी बस फंस गई। बस में करीब 15 सवारियां मौजूद थीं। गनीमत रही कि चालक और परिचालक ने सूझबूझ से काम लिया और सावधानीपूर्वक यात्रियों को इमरजेंसी व चालक के दरवाजे से बाहर निकाला। मलबे की मात्रा इतनी ज़्यादा थी कि बस अपनी जगह से हिल भी नहीं पाई और सवारियों वाली तरफ के दरवाज़े मलबे में बुरी तरह फंस गए थे, जिससे उन्हें खोलना नामुमकिन हो गया था। इस दौरान बस में सवार यात्री काफी दहशत में आ गए थे। बारिश के कारण नेशनल हाईवे 707 और 907-ए पर भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। जिला सिरमौर के पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे 707 सोमवार सुबह शिलाई के पास उत्तरी में भारी भूस्खलन के कारण एक बार फिर बंद हो गया। बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क पर आ गिरने से दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया है। इसी तरह, नाहन-कुमारहट्टी नेशनल हाईवे 907-ए भी सादना घाट में भारी भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है। इन महत्वपूर्ण सड़कों के बंद होने से यातायात बुरी तरह चरमरा गया है। जिला सिरमौर में देर रात से हो रही लगातार बारिश के चलते लोक निर्माण विभाग के अनुसार 20 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली संगड़ाह-पालर-राजगढ़ सड़क भी भूस्खलन के कारण बंद पड़ी है। सड़कों के बंद होने से न केवल आम लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश का असर किसानों की फसलों पर भी पड़ा है। पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शिमला मिर्च और टमाटर जैसी महत्वपूर्ण फसलें काफी हद तक बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द सड़कों को खोलने और राहत कार्यों को तेज़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।  

दफ्तर में फंदे से लटका मिला युवक, शादी को हुए थे सिर्फ 6 महीने

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के बीईओ कार्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब युवक की फांसी के फंदे पर लाश लटकी हुई मिली. मृतक की पहचान सफाईकर्मी के बेटे सतीश यादव के रूप में हुई है. घटना से दफ्तर में हड़ंकप मच गया. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना गरूर थाना क्षेत्र की है. जानकारी के मुताबिक, सतीश की मां लक्ष्मी यादव हड़ताल पर गई थी, जिसके चलते सतीश पिछले तीन-चार दिनों से बीईओ कार्यालय में काम करने आ रहा था. उसी के पास कार्यालय की चाबी थी. रविवार-सोमवार की दरमियानी रात सतीश ने कार्यालय में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. सतीश की 6 महीने पहले ही शादी हुई थी. सोमवार सुबह दफ्तर खुलते ही कर्मचारियों को सतीश का फांसी के फंदे पर लटका हुआ शव मिला, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया. घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. फिलहाल आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं है. गुरूर पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.

मध्यप्रदेश में जनप्रतिनिधियों को मिलेगा लग्जरी ठिकाना, 3 स्टार होटल जैसे फ्लैट्स पर 159 करोड़ खर्च

भोपाल  राजधानी में विधायकों के लिए नए फ्लैट बनने जा रहे हैं। इसके लिए भूमिपूजन भी हो चुका है। 159 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 102 नए फ्लैट बनाए जाएंगे, जिसका भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। यह फैसला विधायकों की शिकायत पर लिया गया है, क्योंकि 67 साल पहले बने विश्रामगृह में बारिश का पानी टपकने और प्लास्टर उखड़ने की समस्या आ रही थी। ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित हैं फ्लैट नए 3 बीएचके फ्लैट 2600 वर्गफीट के होंगे और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित होंगे, जिसमें सौर ऊर्जा पैनल और फायर फाइटिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। प्रदेशभर के विधायकों के लिए आधुनिक सुविधाओं युक्त नए आवास बनाने का काम आज से शुरू होने जा रहा है। अरेरा हिल्स पर 159 करोड़ रुपए की लागत से ये सर्वसुविधायुक्त 102 नए फ्लैट बनाए जाएंगे। 67 साल पहले बना था विश्रामगृह 1958 यानी, करीब 67 साल पहले बने विश्रामगृह में वर्तमान समय के हिसाब विधायकों की शिकायत थी कि इन भवनों में बारिश का पानी टपकने और कई जगह प्लास्टर उखड़ने की समस्या सामने आ रही है। इसे देखते हुए 10 महीने पहले सरकार ने विधायकों को नए विश्रामगृह बनाने का फैसला किया था। सीएम और विधानसभा अध्यक्ष ने किया भूमिपूजन सोमवार को (आज) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस नए प्रोजेक्ट का भूमिपूजन करेंगे। विधानसभा के अधिकारियों का कहना है कि इसे दो से तीन साल में पूरा करने की योजना है। नए आवास बनाने के लिए विश्राम गृह के खंड एक और पुराने पारिवारिक खंड के साथ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को तोड़ा जाएगा। इसकी जगह नए फ्लैट बनेंगे। पुराने पारिवारिक खंड में 24 आवास हैं, जो 700 वर्ग फीट के हैं, जबकि खंड एक में 102 सिंगल रूम कमरे हैं। खंड एक में विधायकों को तीन-तीन रूम अलॉट किए जाते हैं। यह 125-125 वर्गफीट के हैं। नए बनने वाले 3 बीएचके फ्लैट 2600 वर्गफीट के होंगे। ‘विश्राम भवन नहीं सेवा भवन हैं’ भूमि पूजन के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि नए दौर के नए समय में मध्य प्रदेश लगातार बढ़ रहा है. यह विश्राम भवन नहीं सेवा भवन हैं, विधायकों के कार्यालय भी आधुनिक होना चाहिए. पहले चरण में 102 आवास बनाए जा रहे हैं. उसके बाद दूसरे चरण में भी आधुनिक विधायक विश्राम गृह बनेंगे. विधायक विश्राम गृह भी अच्छा बनना चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज GPT और गूगल का जमाना है। ऐसे में सारे संसाधनों के साथ जब विधायक अपनी विधानसभा में बैठेंगे और विधानसभा में काम करने आएंगे, तो इस सारे तंत्र का और व्यवस्थाओं का लाभ भी लेंगे। इसलिए भोपाल में विधायक विश्राम गृह भी अच्छा होना चाहिए। हमने अपने बजट में 5 लाख रुपए देकर विधायकों के कार्यालय से आवास तक व्यवस्था बनाने की बात कही थी। हमारे बीच में नवाचार का सिलसिला कम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यह भवन 1958 में बने थे। आज नए दौर का भारत है, जो दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। हमने कल स्पेन की मंत्री का शॉल भेंट कर स्वागत किया, तो उन्होंने बड़े अचंभे से कहा कि आपके यहां महिलाएं घूंघट करती हैं। उन्होंने कहा कि हम युवाओं के रोजगार के लिए प्रबंध कर रहे हैं। डॉ. यादव ने कहा कि ये विश्राम गृह नहीं, बल्कि सेवा ग्रह बनेगा। विजन डॉक्यूमेंट में हमारी पार्टी ने इसे शामिल किया था। दूसरे दलों की सरकारें लंबे समय रहीं, लेकिन विकास के मामले में आप सिंहावलोकन करेंगे तो शेर आगे बढ़ने के लिए एक बार पीछे मुड़कर देखता है। हम आजादी की सौवीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे है, तो सिंहावलोकन जरूरी है। तकनीक से जुड़कर आगे बढ़ें विधायक वरना पीछे रह जाएंगे नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा में कंप्यूटराइजेशन हो रहा है। तकनीक से जुड़कर विधायक नहीं चले, तो पीछे रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब हम पहली बार विधायक बने, तो 1989 से 2000 तक बस से आते थे। उस समय रोडवेज में आगे की सीट रिजर्व रहती थी। हम इंदौर से बस से पांच घंटे में भोपाल पहुंचते थे। उस समय कोई होता नहीं था। उस समय चार-पांच विधायकों के बीच एक कर्मचारी होता था। आज जमाना बदल गया है। आज सोशल मीडिया के लिए अलग स्टाफ है। गनमैन हर विधायक के पास है। आज समय की आवश्यकता के अनुसार नए आवास ग्रह की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि इस बार एमपी के 8 शहर स्वच्छता में अवॉर्ड लेकर आए। विधायक दायित्व का निर्वहन कर सकें इसलिए जरुरत पूरी हो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक जनता का प्रतिनिधि होता है, वह दायित्व का ठीक से निर्वहन कर सके, इसलिए उसकी आवश्यकता की पूर्ति होनी चाहिए। विधायक विश्राम गृह बहुत पुराना हो गया है। मैं भी एक आवास में रहता था, आज फोटो देखने पर पता चला कि वह 1958 में बना था। मेरा जन्म 1957 में हुआ था यानी उस समय मेरी घुटनों के बल चलने की स्थिति रही होगी। उन्होंने कहा कि ये प्रकल्प पूरा होगा तो विधायक और यहां काम के लिए आई जनता को बहुत प्रसन्नता होगी। हमारा राज्य काफी बड़ा और बड़ी आबादी वाला है। राज्य को नई ऊंचाइयां देने के लिए नई चुनौतियां हैं मुख्यमंत्री जी प्रदेश को नई ऊंचाई देने के लिए लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री जी के सामने कई प्रकल्प हैं, ऐसे समय में उन्होंने विधायक विश्राम गृह को स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा में नए नवाचार किए गए हैं। आने वाले समय में ई विधानसभा में तब्दील हो जाएगी, तो विधायकों को काम में आसानी होगी। विधायक विश्राम गृह के दूसरे चरण का काम भी जल्दी शुरू होगा 18 महीने में बनकर तैयार होगा विश्राम गृह PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान विधायक विश्राम गृह 66 साल पुराना है। इसलिए नए विश्राम गृह की जरूरत महसूस हो रही थी, जहां विधायक सरकार के संकल्पों को गढ़ सकें। केवल 18 माह में ये विधायक विश्राम गृह बनकर तैयार होगा। ये अग्नि रोधी, भूकंप रोधी होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर में विधायकों के लिए आवास बनाने के लिए भूमिपूजन में आज … Read more