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अश्विन ने टेस्ट टीम में हरभजन को फ्रंटलाइन स्पिनर के रूप में रिप्लेस किया था, दोनों ने ‘मनमुटाव’ पर तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली  भारत के पूर्व स्पिनर आर अश्विन और हरभजन सिंह का शुमार दिग्गज गेंदबाजों में होता है। दोनों ने अपने करियर में लंबे समय तक सफलता के झंडे गाड़े। अश्विन ने 106 टेस्ट में 24.00 की औसत से 537 विकेट चटकाए। वहीं, हरभजन ने 103 टेस्ट में 32.46 की औसत से 417 शिकार किए। अश्विन ने भारतीय टेस्ट टीम में हरभजन को फ्रंटलाइन स्पिनर के रूप में रिप्लेस किया था, जिसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव और जलन की अटकलें लगना शुरू हो गई थीं। हालांकि, दोनों पूर्व दिग्गज स्पिनर ने अब आपसी मनमुटाव की अटकलों पर चुप्पी तोड़ी है।   अश्विन और भज्जी 'कुट्टी स्टोरीज विद ऐश' में मनमुटाव की कंट्रोवर्सी पर चर्चा करते हुए नजर आए। भज्जी ने बेबाक सवाल का बेबाक जवाब दिया। अश्विन ने हरभजन से पूछा, ''जलन की चर्चा रही। इससे पहले कि मैं आपको इसका जवाब दूं, मैं कुछ स्पष्ट कर दूं। लोग हर चीज को अपने नजरिए से देखते हैं। मिसाल के तौर पर, अगर वे मुझ पर कोई टिप्पणी कर रहे हैं तो वे मानते हैं कि दूसरे लोग दुनिया को उनकी नजर से देखेंगे। जैसे की यह जो बात है कि आप उस शख्स से जलते हैं जो आज आपका इंटरव्यू ले रहा है। इसपर आप क्या कहेंगे?" अश्विन को रिप्लाई देते हुए हरभजन ने कहा, ''"क्या आपको लगता है कि मैं आपसे जलता हूं? आप आज मेरे साथ बैठे हो और हमने काफी बातचीत की है। क्या आपको लगता है कि मैं उस तरह का इंसान हूं?" वहीं, अश्विन ने कहा, ''अगर आपको कभी जलन हुई भी हो तो यह जायज है। यह मेरा पॉइंट है। मैं इसे कभी गलत तरीक़े से नहीं लूंगा क्योंकि हम सब इंसान हैं। स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है।" इसके बाद, अश्विन ने अपना और वॉशिंगटन सुंदर का उदहारण दिया। अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अचानक इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविद कहा दिया था। अश्विन के रिटायरमेंट के बाद कहा गया कि उन्होंने सुंदर को प्लेइंग इलेवन में तरजीह दिए जाने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। अश्विन ने इस बारे में कहा, ''कुछ लोगों का मानना है कि मैंने वॉशिंगटन सुंदर की वजह से संन्यास लिया। यह सब लोगों का नजरिया है। यह दूसरे लोगों का देखने का तरीक है।"  

माओवादियों की बिछाई मौत की राह में फंसा किशोर, गंभीर रूप से घायल

 बीजापुर  छत्तीसगढ़ की जमीन से माओवाद के खातमे को लेकर प्रशासन और सुरक्षाबलों की ओर से लगातार प्रयास जारी है। इसी बीच माओवादी भी रह-रहकर कायराना हरकतों को अंजाम दे रहे हैं और निर्दोष लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। बीजापुर के भोपालपटनम थाना क्षेत्र के माओवाद प्रभावित कोंडापडगु में शनिवार की शाम माओवादियों का एक और अमानवीय कृत्य सामने आई, जिसमें जंगल में मवेशी चराने गया एक 16 वर्षीय किशोर माओवादियों के लगाए हुए प्रेशर आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार शनिवार की शाम को कोंडापडगु निवासी कृष्णा गोटा पिता फकीर मवेशी चराने जंगल गया हुआ था, तभी जमीन में दबे हुए प्रेशर आइईडी पर उसका पैर पड़ गया। जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। इस हादसे में कृष्णा के पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। इलाज जारी, स्थिति गंभीर घायल बालक को तत्काल उपचार हेतु जिला अस्पताल बीजापुर लाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, परंतु समय पर चिकित्सा मिलने से उसकी जान बच गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने घटनास्थल की घेराबंदी कर तलाशी अभियान प्रारंभ कर दिया है। माओवादियों के लगाए हुए अन्य विस्फोटकों की खोज के लिए विशेष टीम भेजी गई है। माओवादी अपनी जान बचाने खतरे में डाल रहे निर्दोषों की जान बस्तर में सुरक्षा बलों के अभियान से डरे माओवादी अपनी जान बचाने जंगलों में बारूद बिछा रहे हैं, पर इसकी चपेट में निर्दोष ग्रामीण आ रहे हैं। इस वर्ष अब तक एक दर्जन से अधिक ग्रामीण माओवादियों के लगाए विस्फोटक की चपेट में आकर घायल हुए हैं, या मारे गए हैं। पुलिस ने जनता से अपील की गई है कि वे जंगल क्षेत्रों में अत्यधिक सतर्कता बरतें तथा यदि कोई भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाना या सुरक्षा कैंप को सूचित करें। सतर्कता ही सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।

माओवादी ऑपरेशन के दौरान संवेदनशील जानकारी लीक न हो इसके लिए उठाए सख्त कदम

जगदलपुर माओवादी मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बलों की रणनीतिक गोपनीयता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक सख्त कदम उठाया गया है। माओवाद प्रभावित जिलों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए निर्देशित किया गया है। जिससे की किसी भी प्रकार की ऑपरेशन जानकारी लीक न हो सके। बता दें कि बस्तर संभाग के सातों माओवादी प्रभावित जिलों – दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर में तैनात डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड), एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स) के जवानों के सभी इंटरनेट मीडिया अकाउंट अब डिलीट करा दिए गए हैं। जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे किसी भी प्लेटफार्म से दूरी बनाए रखें और भविष्य में कोई भी ऑपरेशनल जानकारी साझा न करें। इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह पिछले दिनों हुए ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का इंटरनेट मीडिया के ज़रिए लीक होना, बताया जा रहा है। माओवादी कमांडर बसव राजू के मारे जाने के बाद जवानों द्वारा पोस्ट किए गए आपरेशनल वीडियो मिलियन्स में व्यूज बटोर रहे थे, जिनमें हथियार, जंगल मार्ग, मुठभेड़ स्थल और यहां तक कि घायल या मारे गए माओवादियों की तस्वीरें भी शामिल थीं। इससे मिशन की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था। जवानों को दी जा रही काउंसलिंग जवानों को साइबर सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष काउंसलिंग भी दी जा रही है ताकि वे अनजाने में भी कोई संवेदनशील जानकारी साझा न करें। यह कदम माओवादी विरोधी अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने और जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में लिया गया निर्णायक निर्णय है। ऑपरेशन में सीमित होगा मोबाइल उपयोग ऑपरेशन के दौरान मोबाइल उपयोग भी सीमित कर दिया गया है। जवान केवल आपातकालीन या आधिकारिक संपर्क के लिए ही फोन का प्रयोग कर सकेंगे। वीडियो बनाना, फोटो लेना और रिकार्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।आपरेशन के बाद मोबाइल की जांच भी अनिवार्य कर दी गई है।

राहुल बनाम लेफ्ट: RSS तुलना पर INDIA गठबंधन में तनाव चरम पर

नई दिल्ली बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। एनडीए और महागठबंधन, दोनों में ही घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है। इस बीच कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टी को लेकर एक बयान देकर खलबली मचा दी है। राहुल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की विचारधारा एक जैसी है। उनके इस बयान के बाद इंडिया गठबंधन में दरार की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार शनिवार को इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक में इस मुद्दे को वामपंथी नेताओं द्वारा जोरदार ढंग से उठाया गया। राहुल गांधी ने केरल के कोट्टायम में पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मैं RSS और CPI(M) दोनों से विचारधारा को लेकर समान रूप से लड़ता हूं। मेरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इन दोनों में लोगों के प्रति संवेदना नहीं है। राजनीति में होना मतलब लोगों को महसूस करना, उन्हें सुनना और छूना भी जरूरी है।" वामदलों ने जताई आपत्ति बैठक में सीपीआई नेता डी राजा ने इस मुद्दे को बिना नाम लिए उठाते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां कैडरों में भ्रम फैलाती हैं और गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। एक अन्य नेता ने याद दिलाया कि INDIA गठबंधन का नारा था, "देश बचाओ, बीजेपी हटाओ", न कि आपसी मतभेद को बढ़ावा देना। राहुल गांधी की टिप्पणी पर सीपीआई(एम) महासचिव एम.ए. बेबी ने एक तीखा वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी द्वारा CPI(M) और RSS की तुलना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे यह जाहिर होता है कि उन्हें केरल और भारत की राजनीतिक हकीकत की सही समझ नहीं है।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2004 में कांग्रेस सरकार वामपंथी दलों के समर्थन से ही बनी थी। उन्होंने कहा, "डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार CPI(M) के समर्थन के बिना नहीं बन सकती थी।" बेबी ने राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने को लेकर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, "वह जिस सीट से लड़े, वहां उन्हें BJP या RSS से नहीं, बल्कि CPI उम्मीदवार से मुकाबला करना पड़ा।" गौरतलब है कि राहुल गांधी ने वायनाड से CPI उम्मीदवार एनी राजा के खिलाफ चुनाव जीतने के बाद सीट छोड़ दी थी और अब वह रायबरेली से सांसद हैं। बाद में वायनाड सीट से प्रियंका गांधी उपचुनाव जीत चुकी हैं। आलोचना होगी, लेकिन तुलना नहीं: सीपीआईएम एम.ए. बेबी ने कहा कि वामपंथी दल कांग्रेस की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हैं, लेकिन कभी कांग्रेस की तुलना बीजेपी या RSS से नहीं करते। उन्होंने कहा, "हम कांग्रेस की आलोचना स्वतंत्र रूप से करते हैं, लेकिन कभी उन्हें RSS या BJP जैसा नहीं कहते।" कांग्रेस और CPI(M) राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन केरल में दोनों दल प्रतिद्वंद्वी मोर्चों का नेतृत्व करते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और वाम दलों के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF)। बीजेपी यहां अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बिहार की बात करें तो 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में लेफ्ट की पार्टियां भी शामिल हैं।  

डायरेक्टर चंद्र बरोट का 79 की उम्र में निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

मुंबई  बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर चंद्र बरोट का 86 साल की उम्र में निधन हो गया है। चंद्र बरोट को अमिताभ बच्चन की साल 1978 में आई कल्ट क्लासिक फिल्म डॉन डायरेक्ट करने के लिए जाना जाता है। चंद्र बरोट पिछले कुछ सालों से फेफड़ो की समस्या से जूझ रहे थे। उनकी पत्नी ने चंद्र के निधन की बात कंफर्म की है। फरहान अख्तर ने भी इंस्टा पर उनके निधन को लेकर पोस्ट किया है। फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे चंद्र बरोट रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्र बरोट की पत्नी दीपा बरोट ने उनके निधन की खबर को कंफर्म करते हुए कहा, “वो पिछले सात सालों से पल्मोनरी फाइब्रोसिस से जूझ रहे थे।” बरोट का इलाज गुरु नानक अस्पताल में डॉक्टर मनीष शेट्टी कर रहे थे। फरहान अख्तर ने लिखा पोस्ट बॉलीवुड एक्टर और डायरेक्टर फराहन अख्तर ने चंद्र बरोट के निधन पर इंस्टाग्राम पुर उनकी एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- "दुख हुआ ये जानकर कि ओजी फिल्म डॉन के डायरेक्टर अब नहीं रहे। बरोट जी की आत्मा को शांति मिले। परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं।" इन फिल्मों को भी किया डायरेक्ट चंद्र बरोट ने डॉन से डायरेक्टर के रूप में डेब्यू किया था। डॉन के बाद चंद्र ने बंगाली फिल्म आश्रिता डायरेक्ट की थी जो 1989 में रिलीज हुई थी। चंद्र ने साल 1991 में प्यार भरा दिल नाम की फिल्म डायरेक्ट की थी।  

बाड़मेर में भारी बारिश का असर: शहर की गलियां बनीं नदियां, मौसम हुआ सुहाना

बाड़मेर थार नगरी बाड़मेर में मानसून जमकर मेहरबान नजर आ रहा है। शनिवार रात को जिले में मूसलधार बारिश से शहर की सड़कें पानी का दरिया बनी गईं। शहर की सड़कों पर करीब एक से डेढ़ फीट पानी का बहाव रहा। जिसके चलते पैदल राहगीरों ओर वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामान करना पड़ा। शनिवार रात को चले बारिश के दौर के कारण शहर के कई कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी का भराव हो गया। पिछले दो दिनों को हुई अच्छी बारिश से फसलों को जीवनदान मिला। किसानों को इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है। वहीं जिले में हुई बारिश के बाद से मौसम में ठंडक घुल गई है, जिसके कारण लोगों को गर्मी को उमस से भी राहत मिली है। शनिवार देर शाम को अचानक बाड़मेर के आसमान में काले घनघोर घटाएं छा गई और कुछ ही देर बाद अचानक तेज बारिश का दौर शुरू हुआ जो कि रुक-रुक कर देर रात तक जारी रहा। मेघ गर्जना के साथ हुई मूसलाधार बारिश के चलते कुछ ही देर में शहर की सड़क पानी से दरिया बनी नजर आई सड़क पर एक-डेढ़ फीट तक पानी के बहाव चलना शुरू हो गया। जिसके चलते राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, बारिश के चलते शहर की बिजली कई घंटे तक गुल रही, इसके कारण भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शनिवार रात को रुक-रुक कर चले बारिश के दौर के कारण शहर में सिणधरी रोड ओवरब्रिज के पास, कृषि मंडी आवासीय कॉलोनी, सब्जी मंडी परिसर, किसान भवन परिसर, रोडवेज बस स्टैंड परिसर, बलदेव नगर , शास्त्री नगर अंडरब्रिज सहित कई स्थानों पर में जल भराव की समस्या के कारण आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, रविवार सुबह से बाड़मेर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बादल छाए हुए हैं और रिमझिम बारिश का दौर चल रहा है। ऐसे में फिलहाल थार का मौसम सुहाना बना हुआ है।  

जेम्स एंडरसन बोले- ट्रॉफी पर सचिन तेंदुलकर के साथ नाम देखना एक अजीब लेकिन गर्व का पल

लंदन  इंग्लैंड के महान तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने स्वीकार किया कि सचिन तेंदुलकर के साथ ट्रॉफी पर अपना नाम देखकर वह अजीब महसूस करते हैं और उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के महानतम क्रिकेटरों में से एक के साथ अपना नाम होना बहुत बड़ा सम्मान है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट श्रृंखला की ट्रॉफी का नाम एंडरसन तेंदुलकर ट्रॉफी रखा है। पहले इसका नाम पटौदी ट्रॉफी था जो भारत के पूर्व कप्तान इफ्तिखार अली खान पटौदी और उनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी के नाम पर था।   एंडरसन ने स्काय स्पोटर्स से कहा, ‘‘यह जरूरी नहीं कि आपके नाम पर ट्रॉफी का होना कितना बड़ा है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आपके नाम के साथ सचिन तेंदुलकर का नाम है, जो मेरे लिए अब तक के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक हैं।’’ उन्होंने कहा , ‘‘मैं ट्रॉफी पर अपने साथ उनका नाम देखता हूं तो बड़ा अजीब लगता है। मैं उनका काफी सम्मान करता हूं। मैने बचपन से उन्हें देखा है और उनके खिलाफ खेला है । वह इतने महान क्रिकेटर रहे हैं जिन्होंने पूरे देश की उम्मीदों का बोझ अपने पूरे कैरियर में उठाया है। उनके साथ इस तरह का कुछ साझा करना बहुत बड़ा सम्मान है।’’ तेंदुलकर ने 200 और एंडरसन ने 188 टेस्ट खेले हैं। पिछले साल क्रिकेट को अलविदा कहने वाले एंडरसन ने 704 विकेट लिये हैं। 5 मैच की तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी 2025 के तीन मैच खेले जा चुके हैं। मेजबान इंग्लैंड 2-1 से सीरीज में आगे हैं। सीरीज का चौथा और बेहत महत्वपूर्ण मैच 23 जुलाई से मैनचेस्टर में खेला जाना है।  

अहमदाबाद में जहर खाकर एक ही परिवार के 5 लोगों ने दी जान, शहर में सनसनी

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में शनिवार को एक ही परिवार के पांच लोगों ने कथित रूप से जहर खाकर जान दे दी। मृतकों में पति-पत्नी उनकी दो बेटियां और एक बेटा शामिल है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं। सामूहिक खुदकुशी की वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अहमदाबाद ग्रामीण के एसपी ने बताया कि बावला स्थित किराए के मकान में एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने जहरीला तरल पदार्थ पीकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चल सका है। सभी मूल रूप से ढोलका के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान विपुल वाघेला (32), उसकी पत्नी सोनल (26) और उनके बच्चों करीना (11), मयूर (8) और राजकुमारी (5) के रूप में हुई है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस को सामूहिक आत्महत्या का शक भाषा के मुताबिक, अहमदाबाद जिले में शनिवार देर रात एक दंपती और उनके तीन बच्चों के शव उनके घर से बरामद किए गए। पुलिस को शक है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है। पुलिस अधीक्षक अहमदाबाद (ग्रामीण) ओम प्रकाश जाट ने बताया कि यह घटना बगोदरा गांव में हुई और पुलिस को इसकी सूचना देर रात करीब 2 बजे मिली। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इस कदम के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘ एक व्यक्ति, उसकी पत्नी और उसके तीन बच्चों ने बगोदरा स्थित अपने किराए के मकान में जहर खाकर जान दे दी। व्यक्ति ऑटो-रिक्शा चलाकर अपना गुजारा करता था और परिवार द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।’’ पुलिस और फॉरेंसिक टीम घर की तलाशी लेने के साथ ही सबूत इकट्ठे कर रही हैं। इसके साथ ही आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है। पहले भी हो चुकीं ऐसी घटनाएं 8 जून 2025 : इससे पहले गुजरात के मेहसाणा जिले में आर्थिक तंगी के चलते एक दंपती ने अपने 9 साल के बेटे के साथ कडी कस्बे के पास नर्मदा नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। मृतकों में 38 साल के धर्मेश पंचाल, 36 साल की उनकी पत्नी उर्मिला और 9 साल के बेटे प्रकाश शामिल था। पुलिस ने धर्मेश की कार से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया था। पुलिस के अनुसार, परिवार आर्थिक संकट के कारण तनाव में था। 13 अप्रैल 2025 : गुजरात के साबरकांठा जिले के वडाली कस्बे में एक किसान ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रात में जहर खा लिया था। पति-पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वडाली थाना पुलिस ने बताया था कि दंपती, उनके दो बेटों और एक बेटी को शनिवार सुबह उल्टियां होने लगी, जिसके बाद पड़ोसियों ने एम्बुलेंस बुलाई और परिवार के पांचों सदस्यों को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां किसान की शाम के वक्त और उनकी पत्नी की रविवार सुबह मौत हो गई। मृतकों की पहचान विनू सागर (42) और उनकी पत्नी कोकिलाबेन (40) के रूप में हुई थी।  

श्रीराम पर बयानबाज़ी: शेखावत ने उठाए सवाल, बोले- गहलोत कांग्रेस से अलग सोच क्यों रखते हैं?

जोधपुर केन्द्रीय पयर्टन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत अपने एक दिवसीय दौरे पर जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उनका स्वागत किया गया। केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाजपा द्वारा राम पर कब्जा करने के बयान पर पलटवार किया। कहा कि गहलोत की सरकार द्वारा राम और रामसेतु को लेकर जो शपथपत्र सुप्रीम कोर्ट में दिया गया था। उस पर विचार साझा करते हुए बताना चाहिए पार्टी और उनके स्टैंड अलग-अलग कैसे हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले जयपुर में राम और हिन्दू धर्म को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरएसएस और भाजपा पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था भाजपा के लोग ऐसा दिखाते हैं, जेसे राम पर उनकी ठेकेदारी है। केवल वहीं हिन्दू हैं। क्या हम हिन्दू नहीं, हमारे तो नेताओं के नाम में भी राम लगा है। नाथूराम मिर्धा परसराम मदेरणा। उन्होंने आगे कहा कि राम तो हमारे हैं। भाजपा ने सड़कों पर उतरकर, दंगे भड़काकर, राम पर कब्जा कर रखा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेशभर में पिछले एक सप्ताह से हो रही बारिश को लेकर कहा कि कांग्रेस और काल की एक ही राशि है। उनके समय काल पड़ता है। हमारे समय भाजपा, भगवान भरोसे भजनलाल, भाग्य और अच्छे जमाने सब की एक ही राशि है। केन्द्रीय मंत्री शेखावत एयरपोर्ट से सीधे सर्किट हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल के साथ जिलेभर की व्यवस्था को लेकर एवं बारिश को लेकर आवश्यक चर्चा करते हुए निर्देश दिए। वहीं, सर्किट हाउस में भाजपा शहर की नई कार्यकारिणी के सदस्यों ने भी उनसे मुलाकात की। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी जोधपुर प्रवास पर आए हुए उन्होंने भी केन्द्रीय मंत्री शेखावत से मुलाकात की।  

पुतिन की भारत यात्रा से पहले अंतरराष्ट्रीय हलचल, क्या बदलेगा भू-राजनीतिक समीकरण?

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ते वैश्विक तनाव और अमेरिका-नाटो के तीखे ऐतराज के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनका यह दौरा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के सिलसिले में होगा, जो 2021 के बाद पहली बार नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका और नाटो (NATO) में शामिल देश रूस पर लगातार प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं और भारत से रूसी रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर पुनर्विचार करने का दबाव बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन के दौरान रक्षा उद्योग में सहयोग, ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी, परमाणु ऊर्जा सहयोग, आर्कटिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का विस्तार और हाई-टेक सेक्टर में संयुक्त रोडमैप पर काम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। हाल ही में पुतिन ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर रूस ने भारत को उर्वरक निर्यात बढ़ाया है, जिससे भारतीय खाद्य सुरक्षा को बल मिला। वहीं, भारत और रूस के बीच नए परमाणु संयंत्र के दूसरे स्थान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी इस शिखर सम्मेलन के दौरान पूरी हो सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा था कि भारत-रूस शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है। पिछली बार यह मॉस्को में हुआ था, अब बारी भारत की है। तारीखें आपसी सहमति से तय की जाएंगी। अमेरिका और NATO को क्यों है आपत्ति? रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद और रक्षा साझेदारी जारी रखी है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर उच्च तकनीक और सैन्य मामलों में कोई व्यापार नहीं करे। वहीं, NATO देश इस बात चिंतित हैं कि भारत का यह रुख G7 और पश्चिमी दुनिया की रणनीति को कमजोर कर सकता है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है। रूस एक पुराना और भरोसेमंद सहयोगी है। ऑपरेशन सिंदूर से पहले पुतिन ने दिया था भारत को समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आखिरी बातचीत ऑपरेशन सिंदूर से ठीक पहले हुई थी। रूस ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया था। इस सैन्य अभियान में रूसी रक्षा प्रणालियों की अहम भूमिका रही। रूसी S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली और भारत-रूस संयुक्त ब्रह्मोस प्रोजेक्ट ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इन प्रणालियों ने पाकिस्तान की चीन निर्मित सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक निष्क्रिय किया। SCO समिट में भी हो सकती है मोदी-पुतिन मुलाकात अगर प्रधानमंत्री मोदी चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो वहां भी उनकी पुतिन से अलग से मुलाकात संभव है।