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इलाहाबाद हाई कोर्ट से डिग्री मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को बड़ी राहत

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाई कोर्ट से डिग्री मामले में बड़ी राहत दी है। दरअसल, कोर्ट ने दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। आप को बता दें दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री की डिग्री मामले में पुनरीक्षण याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया कि केशव प्रसाद मौर्य ने जिस डिग्री के आधार पर पेट्रोल पंप लिया है और चुनाव में हलफनामा दायर किया वह अमान्य है। ऐसे में एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जानी चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 मई को आदेश रिजर्व कर लिया था। फिलहाल इस मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत दे दी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना में उद्योगपतियों से भेंट कर निवेश के लिये दिया आमंत्रण

मध्यप्रदेश की गतिशीलता-शांति और संसाधनों का लाभ उठाएँ निवेशक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जहां संभावना दिखती है, वहां नियम बदलने से नहीं हिचकिचाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना में उद्योगपतियों से भेंट कर निवेश के लिये दिया आमंत्रण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को लुधियाना स्थित वर्धमान औद्योगिक परिसर में पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों से भेंट की और उन्हें मध्यप्रदेश की समावेशी, उदार और निवेश-अनुकूल नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार  न केवल उद्योग लगाने और निवेश बढ़ाने के लिए तैयार है, बल्कि यदि किसी सेक्टर में संभावना दिखती है, तो वहां आवश्यकतानुसार नियमों में परिवर्तन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए विशेष अवसर उपलब्ध हैं और राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि इंदौर की हुकुमचंद मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्य हो रहा है और मजदूरों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सौ करोड़ रु. से अधिक के सेटलमेंट क्लियर किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों और श्रमिकों के साथ सरकार की प्रतिबद्धता हर स्तर पर बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि ग्वालियर की जेसी मिल और उज्जैन की हीरा मिल के मामले में भी राज्य सरकार ने सह्रदयता से निर्णय किये है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार उद्योगपतियों के हित में निर्णय लेने के लिए कैबिनेट स्तर पर नीतियों में बदलाव को भी तैयार है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश में आकर संभावनाओं को देखें और राज्य की गतिशीलता, शांति और संसाधनों का लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि राज्य में टेक्सटॉइल, एग्री बेस्ड इंडस्ट्री, इंजीनियरिंग गुड्स, स्टील प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और आईटी जैसे सेक्टरों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से यह भी कहा कि मध्यप्रदेश केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि एक जनकल्याणकारी राज्य के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब तबके के लिए एयर एंबुलेंस सेवा और राहगीर सेवा योजना जैसी अभिनव योजना क्रियान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं की उद्योगपतियों ने सराहना करते हुए कहा कि इस स्तर की सोच और संवेदनशीलता शायद ही किसी अन्य राज्य में दिखती हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से वर्धमान ग्रुप के एमडी नीरज जैन, राल्सन इंडिया लिमिटेड के चेयरमेन संजीव पहवा, कंगारू इंडस्ट्रीज के एमडी अंबरीश जैन, टीके स्टील रोलिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी लोकेश जैन, रजनीश इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राहुल आहूजा, फार्मपार्ट्स कंपनी के उपाध्यक्ष जे.एस. भोगल, सीआईसीयू के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा, कमल (सरजवन होजरी) के प्रतिनिधि सुदर्शन जैन और अरुण जैन सहित विभिन्न सेक्टर के उद्योगपतियों ने मुलाकात की। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में बिजली दरें प्रतिस्पर्धी हैं और नियम संबंधी प्रक्रियाओं को सरल और निवेशक-अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सोलर और पॉवर सेक्टर में भी बड़े प्रोजेक्ट आ रहे हैं। केंद्र सरकार के स्तर पर कोई पर्यावरणीय क्लियरेंस लंबित है, तो मध्यप्रदेश सरकार अपने स्तर पर उसे शीघ्र दिलाने का भी प्रयास करेगी। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नीति स्पष्टता, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि देश के सबसे भरोसेमंद और निवेश के योग्य राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल हो गया है। 

राजस्थान के विकास से जुड़े मुद्दों पर की चर्चा , मुख्यमंत्री शर्मा ने राज्यपाल से की मुलाकात

  जयपुर,  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपालहरिभाऊ बागडे से मुलाकात की। राज्यपाल बागडे से उन्होंने राजस्थान के  विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। राज्यपाल बागडे से मुख्यमंत्री शर्मा की यह शिष्टाचार भेंट थी।

WTC 2025-27: भारत की जीत से बदला पॉइंट्स टेबल का हाल, इस नंबर पर पहुंची इंग्लिश टीम

नई दिल्ली आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के पॉइंट्स टेबल में बड़ा बदलाव हुआ है। भारत ने इंग्लैंड को हराकर टेबल में फेरबदल किया लेकिन उसके बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम ने वेस्टइंडीज को हराकर पॉइंट्स टेबल में बड़ा खेल कर दिया है। टीम इंडिया बर्मिंघम में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद भी टॉप 2 में शामिल नहीं हैं। हालांकि टीम इंडिया के पास तीसरे टेस्ट मैच में जीत दर्ज करके अपनी स्थिति और बेहतर करने का बड़ा मौका है। पॉइंट्स टेबल का बदल गया खेल लीड्स टेस्ट मैच में हार के बाद टीम इंडिया ने शानदार कमबैक किया और बर्मिंघम में 336 रनों से जीत लिया। इस जीत के कारण ही अब टीम इंडिया पॉइंट्स टेबल में नंबर 4 पर 12 अंको के साथ नजर आ रही है। वहीं इंग्लिश टीम भी 12 अंको के साथ नंबर 3 पर नजर आ रही है। श्रीलंका की टीम 16 अंकों के साथ नंबर 2 पर फिलहाल नजर आ रही है। वहीं वेस्टइंडीज को दोनों टेस्ट मैच में हराने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम 24 अंको के साथ टॉप पर नजर आ रही है। 4 अंको के साथ बांग्लादेश की टीम फिलहाल टेबल में नंबर 5 पर मौजूद है। वहीं वेस्टइंडीज का तो अभी खाता भी नहीं खुला है। टीम इंडिया लॉर्ड्स टेस्ट मैच में जीतकर टॉप 2 में एंट्री कर सकती है। वहीं यही मौका फिलहाल इंग्लैंड के पास भी मौजूद है। श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेली जा रही सीरीज खत्म हो चुकी है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच एक और टेस्ट मैच होना है। यहां जानें डब्ल्यूटीसी का पूरा समीकरण यह जीत सिर्फ सीरीज़ के लिहाज़ से अहम नहीं थी, बल्किवर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 (WTC) के नज़रिए से भी महत्वपूर्ण रही. यह भारत की मौजूदा चक्र में पहली जीत थी और इसी के साथ टीम ने अपने पहले अंक भी हासिल कर लिए. गिल की टीम ने ये साबित कर दिया कि वह WTC फाइनल की दौड़ में मजबूत दावेदार है. WTC चक्र की बात करें तो अब तक ऑस्ट्रेलिया ने 2 मैच खेले हैं और दोनो में जीत हासिल की है. इसी के साथ 24 अंकों के साथ ऑस्ट्रेलिया पहले पायदान पर है. वहीं, दूसरे नंबर पर श्रीलंका है, जिसने 2 टेस्ट मैच में अबतक 1 जीता है और एक ड्रा पर खत्म किया है. 16 अंकों के साथ वो दूसरे पायदान पर है. तीसरे पायदान पर भारत है जिसने 2 में से 1 मैच जीता है और 12 अंक हासिल किया है. चौथे स्थान पर इंग्लैंड है और पांचवें पर बांग्लादेश है.  यहां पर देखें WTC 2025-27 का पॉइंट्स टेबल  स्थान टीम संक्षेप टीम नाम खेले जीते हारे ड्रा कटौती अंक प्रतिशत 1 AUS ऑस्ट्रेलिया 2 2 0 0 0 24 100.00% 2 SL श्रीलंका 2 1 0 1 0 16 66.67% 3 ENG इंग्लैंड 2 1 1 0 0 12 50.00% 4 IND भारत 2 1 1 0 0 12 50.00% 5 BAN बांग्लादेश 2 0 1 1 0 4 16.67% 6 WI वेस्ट इंडीज 2 0 2 0 0 0 0.00% 7 NZ न्यूज़ीलैंड 0 0 0 0 0 0 0.00% 8 PAK पाकिस्तान 0 0 0 0 0 0 0.00% 9 SA दक्षिण अफ्रीका 0 0 0 0 0 0 0.00%  

मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा ने सनसनीखेज खुलासे किए, कबूला ‘हां, मैं पाकिस्तानी आर्मी का एजेंट था…

 नई दिल्ली 26/11 मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने वाले तहव्वुर हुसैन राणा ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में हुई पूछताछ के दौरान राणा ने माना कि वह पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद एजेंट था, जिसे  खलीज युद्ध के दौरान सऊदी अरब भी भेजा गया था. राणा ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा सिर्फ एक आतंकी संगठन नहीं, बल्कि जासूसी नेटवर्क की तरह काम करता है. उसने यह भी कबूला कि उसका दोस्त और सहयोगी डेविड हेडली लश्कर के लिए कई बार ट्रेनिंग ले चुका था.   ISI ने की थी मदद राणा ने बताया कि मुंबई में अपने इमिग्रेशन फर्म का सेंटर खोलने का विचार उसका ही था, और उससे जुड़ी फाइनेंशियल डीलिंग को बिज़नेस खर्च बताया गया. लेकिन उसने यह भी स्वीकार किया कि 2008 में जब 26/11 हमला हुआ, तब वह मुंबई में मौजूद था और वह पूरी तरह से आतंकी साजिश का हिस्सा था. उसने कबूला कि उसने मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे स्थानों की रेकी की थी. पूछताछ में राणा ने यह भी माना कि इस हमले को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के साथ मिलकर अंजाम दिया गया था. अब मुंबई पुलिस राणा को गिरफ्तार करने और अपनी हिरासत में लेने की तैयारी में है, ताकि जांच को और आगे बढ़ाया जा सके. हेडली का दोस्त था राणा तहव्वुर राणा आतंकी डेविड हेडली का करीबी दोस्त था जो 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में शामिल था. हेडली से पूछताछ के दौरान राणा का जिक्र किया था. इस हमले में 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने अरब सागर के रास्ते मुंबई पहुंचकर रेलवे स्टेशन, दो लग्जरी होटलों और एक यहूदी सेंटर पर हमला किया. करीब 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोग मारे गए. राणा पर हेडली लश्कर-ए-तैयबा, हरकत-उल-जिहादी इस्लामी और पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है 

डोडा चूरा तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने संदिग्ध पिकअप से 1 करोड़ रुपए से अधिक कीमत का डोडा चूरा और हथियार किए जब्त

उदयपुर शहर की प्रतापनगर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ रुपए से अधिक कीमत का डोडा चूरा जब्त किया है। यह कार्रवाई बीती रात देबारी टी-प्वाइंट पर की गई, जहां नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोकने की कोशिश की। थानाधिकारी राजेन्द्र सिंह के अनुसार चित्तौड़गढ़ की ओर से आती एक पिकअप जैसे ही पुलिस के नाकाबंदी पॉइंट के पास पहुंची, तो ड्राइवर ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीछा किया लेकिन आरोपी ड्राइवर और उसका साथी वाहन को सड़क किनारे छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर पहाड़ियों की ओर भाग निकले। पुलिस टीम ने जब पिकअप की तलाशी ली तो खलासी की सीट के पास से एक पिस्टल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए। वाहन के पिछले हिस्से में रखे गए 68 प्लास्टिक के कट्टों में कुल 1395 किलोग्राम अवैध डोडा चूरा पाया गया। बरामद डोडा चूरा की अनुमानित बाजार कीमत करीब 1 करोड़ रुपये है। पुलिस ने पिकअप वाहन, अवैध मादक पदार्थ और हथियार को जब्त कर लिया है। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें जंगलों और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह मादक पदार्थ कहां से लाया गया था और इसे कहां सप्लाई किया जाना था।

देर नहीं, अब एक सॉफ्टवेयर से संचालित होंगी सरकारी और निजी एंबुलेंस सेवाएं

ग्वालियर मध्य प्रदेश सरकार ने राहवीर योजना के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके अंतर्गत राज्य की सभी सरकारी और निजी एंबुलेंस को एक ही सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित किया जाएगा। यह कदम प्रदेश को एंबुलेंस सेवाओं के एकीकृत प्रबंधन में एक नया आयाम प्रदान करेगा। मध्य प्रदेश संभवतः ऐसा करने वाला पहला राज्य होगा, जहां सभी एंबुलेंस एक ही प्लेटफार्म पर संचालित होंगी। राहवीर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।   लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस को बुलाएगा वर्तमान में, प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग, एमपीआरडीसी, एनएचएआइ और निजी एंबुलेंस सेवाएं संचालित हैं, लेकिन अब परिवहन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो सड़क दुर्घटना की लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस को बुलाएगा। इस योजना के तहत डायल-100 सेवा को एंबुलेंस सेवा के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे घायल व्यक्तियों को शीघ्र सहायता मिल सकेगी। एंबुलेंस सेवाओं की भूमिका की समीक्षा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के पास लगभग एक हजार एंबुलेंस हैं, जिनमें 300 जननी एक्सप्रेस भी शामिल हैं। इन सभी एंबुलेंस को भी इस नए सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, ताकि घायल व्यक्तियों को गोल्डन टाइम में अस्पताल पहुंचाया जा सके। राहवीर योजना के लागू होने के बाद एंबुलेंस सेवाओं की भूमिका की समीक्षा की गई है। वर्तमान में, स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न एजेंसियों के बीच एंबुलेंस सेवाओं का संचालन एकीकृत नहीं है। जैसे कि हाइवे पर एंबुलेंस की सहायता के लिए एनएचएआइ का नंबर और 108 सेवा अलग है। कॉल भी इसी सॉफ्टवेयर पर होगी दर्ज अब राहवीर योजना के तहत घायलों के गोल्डन टाइम को बचाने के लिए एक ही कॉल पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस भेजी जाएगी। डायल-100 सेवा के अंतर्गत आपातकालीन कॉल करने पर सूचना दी जाती है, और अब यह कॉल भी इसी सॉफ्टवेयर पर दर्ज होगी। जब सड़क दुर्घटना की सूचना मिलेगी, तो सबसे नजदीकी एंबुलेंस तुरंत भेजी जाएगी। देर से एंबुलेंस पहुंचने के घटेंगे मामले इस नए सॉफ्टवेयर का पूरा नियंत्रण भोपाल से होगा, जिससे एंबुलेंस के देर से पहुंचने की घटनाओं में कमी आएगी। अक्सर देखा गया है कि एंबुलेंस देर से पहुंचने के कारण घायल की जान पर संकट आ जाता है। अब एंबुलेंस की शीघ्रता से उपलब्धता से पीड़ित का प्राथमिक इलाज भी तुरंत शुरू हो सकेगा। स्वास्थ्य और परिवहन विभाग मिलकर सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं, जिसमें सभी एंबुलेंस सरकारी और निजी को एक ही जगह जोड़ा जा रहा है। यह डायल-100 से जुड़ेगा और कॉल पहुंचने पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस जाएगी। प्रदेश ऐसा करने वाला संभवतः पहला राज्य होगा। राहवीर योजना के दृष्टिगत यह कवायद की जा रही है। किरण कुमार, उपायुक्त, परिवहन विभाग, मध्य प्रदेश

सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग

 पथरिया  एमपी के जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है। पथरिया से BJP की पूर्व MLA सोना बाई के दिव्यांग पति सेवकराम अहिरवार ने उनसे गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग की है। उनका कहना है कि 2016 में दुर्घटना में पैर खराब होने के बाद वे दिव्यांग हो गए और अब मजदूरी करने में भी असमर्थ हैं। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई ने उन्हें अपमानित किया और बाद में छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें उनके साथ रहने में शर्म आती थी। 1993 में हुई थी शादी सेवकराम अहिरवार और सोना बाई की शादी 1993 में हुई थी। सेवकराम ने बताया कि 2003 में सोना बाई ने राजनीति में आने की इच्छा जताई। उनके सहयोग से सोना बाई 2003 में से BJP के टिकट पर चुनाव जीतीं और 2008 तक MLA रहीं। सेवकराम के अनुसार, पत्नी के MLA रहते सब ठीक था, लेकिन 2009 में सोना बाई ने उन्हें अपमानित करना शुरू कर दिया और कुछ समय बाद छोड़ दिया। हालांकि, दोनों का तलाक नहीं हुआ है। 2016 में एक पैर खराब हो गया सेवकराम ने बताया कि 2016 में एक दुर्घटना में उनका एक पैर खराब हो गया। अब वे दिव्यांग हैं और मजदूरी भी नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने पत्नी से गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम के वकील नितिन मिश्रा ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण सेवकराम को भरण पोषण की आवश्यकता है। कोर्ट से नोटिस मिलने पर देंगे जवाब इस मामले पर सोना बाई का कहना है कि वे कोर्ट से नोटिस मिलने पर ही जवाब देंगी। सोना बाई और सेवकराम के तीन बच्चे हैं। सौरव, नीरज और प्रवीण. तीनों बच्चे अपनी मां सोना बाई के साथ रहते हैं। उनका एक बेटा डॉक्टर है और मकरोनिया के सरकारी अस्पताल में कार्यरत है। सोना बाई अभी भी BJP में हैं, लेकिन उनके पास कोई पद नहीं है। पहले सेवकराम करते थे ठेकेदारी पहले सेवकराम ठेकेदारी करते थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने यह काम बंद कर दिया। उनका कहना है कि पत्नी के MLA बनने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया। बड़े-बड़े नेताओं से संपर्क होने के कारण उनमें गुरूर आ गया। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई को उनके साथ रहने में शर्मिंदगी महसूस होती थी।

नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के रूप में आप सभी के पास बहुत बड़ा अवसर और बड़ी जिम्मेदारी :CM साय

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  राजधानी रायपुर के निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में आयोजित नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के लिए तीन दिवसीय आधारभूत/उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी हैं। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के रूप में आप सभी के पास बहुत बड़ा अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो एक व्यक्ति भी पूरे जिले की तस्वीर बदल सकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोक कल्याण की भावना से जनता की सेवा करने वालों को जनता स्वयं आगे बढ़ाती है। अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पंच के रूप में की थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगा। 10 वर्ष की आयु में पिताजी के स्वर्गवास के बाद मेरे कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। मेरा पूरा जीवन संघर्ष में बीता। मैं सरपंच भी बनूंगा, यह मैंने कभी कल्पना नहीं की थी, लेकिन जनता का आशीर्वाद मिला, जिससे विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुछ कर गुजरने के लिए संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण इच्छाशक्ति होती है। जनहित में कार्य करने की सोच से अकेला व्यक्ति भी बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे जिन प्रेरणादायी लोगों के जनसेवा के कार्यों को निकट से देखने का अवसर मिला, उनमें ओडिशा के डॉ. अच्युत सामंत और नानाजी देशमुख का उल्लेख करना चाहूंगा। अभावों में पले-बढ़े डॉ. अच्युत सामंत ने आजीवन जनता की सेवा का संकल्प लिया और भुवनेश्वर में एक बड़ा शिक्षण संस्थान स्थापित किया। इस संस्थान में वे लगभग 25 हजार जनजातीय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसी तरह, चित्रकूट में नानाजी देशमुख ने दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान के माध्यम से 500 गांवों को गोद लेकर उनके सर्वांगीण विकास का कार्य किया। वर्ष 2006-07 में जब मैं वहां गया, तब मुझे पता चला कि अब तक 80 गांवों को उन्होंने आत्मनिर्भर बना दिया है। इन गांवों में हर परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्य किया गया। ये उदाहरण हमें यह बताते हैं कि एक व्यक्ति भी कितना बड़ा परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हर दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। यहां 44 प्रतिशत भूभाग पर वन हैं। यहां की मिट्टी उर्वरा है और किसान मेहनतकश हैं। छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा था, जिसे हम समाप्त कर रहे हैं। जो नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं, उनके लिए हमने एक उत्कृष्ट पुनर्वास नीति बनाई है। जल्द ही राज्य नक्सलमुक्त होगा और बस्तर में सड़क, बिजली, पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोगआयोजित राज्य सेवा परीक्षा-2023 की अंतिम चरण की प्रक्रियाआज से शुरू

इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा-2023 की अंतिम चरण की प्रक्रिया, यानी साक्षात्कार, सोमवार से शुरू होने जा रही है। इस बार आयोग ने साक्षात्कार प्रक्रिया में अहम बदलाव किए हैं। अब उम्मीदवारों को आवेदन पत्र में अपना उपनाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल सहित अन्य व्यक्तिगत जानकारी भरने की आवश्यकता नहीं होगी। रोजाना 60 से 65 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। चयन प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों को फार्म में विभागों की प्राथमिकता देनी होगी। पहले यह इंटरव्यू 18 से 20 दिन में खत्म होते थे जो इस बार एक से डेढ़ माह तक चलेंगे। 229 पदों के लिए 800 अभ्यर्थी इंटरव्यू देंगे।  परीक्षा की पूरी समयरेखा एमपीपीएससी ने इस परीक्षा की अधिसूचना अक्टूबर 2023 में जारी की थी। इसके बाद जनवरी 2024 में प्रारंभिक परीक्षा और मार्च 2024 में मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी। करीब नौ महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद, 30 दिसंबर 2024 को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया। इस परीक्षा में कुल 800 उम्मीदवार चयनित हुए, जिनमें 659 मुख्य सूची और 141 प्रावधिक सूची में हैं। सात जुलाई से साक्षात्कार शुरू हो चुके हैं और इसके लिए चयनित उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड जारी किए जा रहे हैं। रिक्त पदों की संख्या और विभाग राज्य सेवा परीक्षा-2023 के अंतर्गत कुल आठ विभागों के लिए 229 रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। इन पदों में 27 डिप्टी कलेक्टर, 22 पुलिस उप अधीक्षक, 17 जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, 16 विकासखंड अधिकारी, 122 सहकारी निरीक्षक, 17 मुख्य नगर पालिका अधिकारी, तीन नायब तहसीलदार और तीन आबकारी उप निरीक्षक शामिल हैं। आयोग द्वारा सभी विभागों में नियुक्ति के लिए प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का अवसर इस बार उम्मीदवारों को विभागों के चयन में प्राथमिकता देने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार सेवा में स्थान प्राप्त कर सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करेगी। साक्षात्कार के लिए बुलाए जा रहे उम्मीदवारों की संख्या को देखते हुए आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है और साक्षात्कार प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।