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एम-आधार से होगी पहचान की जांच, फर्जी आईडी वाले रेल यात्रियों पर होगी सख्ती

भोपाल  ट्रेन यात्रा के दौरान यात्री को अपनी पहचान साबित करने के लिए मोबाइल ऐप एम-आधार का सहारा लेना होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोन को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। एमआधार ऐप के जरिए अब ट्रेनों में सफर के दौरान यात्रियों की पहचान तकनीकी रूप से सत्यापित की जाएगी। ट्रेनों में अक्सर देखा जाता है कि दूसरे के टिकट पर लोग यात्रा कर लेते हैं। लेकिन अब ट्रेन यात्रा के दौरान यात्री को अपनी पहचान साबित करने के लिए मोबाइल ऐप एम-आधार का सहारा लेना होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोन को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। एमआधार ऐप के जरिए अब ट्रेनों में सफर के दौरान यात्रियों की पहचान तकनीकी रूप से सत्यापित की जाएगी। दूसरों के नाम पर टिकट लेकर यात्रा करते हैं लोग मिली जानकारी के अनुसार रेलवे को लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ लोग दूसरों के नाम पर टिकट लेकर यात्रा करते हैं या फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर ट्रेन में चढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए रेलवे अब एमआधार ऐप का इस्तेमाल करेगा, जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने विकसित किया है। जाने कैसे काम करेगे एम आधार एप रेवले द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस ऐप में क्यूआर कोड स्कैन कर पहचान सत्यापन की सुविधा है। टीटीई इस ऐप के माध्यम से यात्री का आधार कार्ड स्कैन कर उसकी वास्तविकता को तुरंत जांच सकेंगे। इससे फर्जी आधार कार्ड की पहचान आसान हो जाएगी और टिकटों की कालाबाजारी पर भी नियंत्रण संभव होगा। रेलवे बोर्ड ने कहा है कि ऐप को जल्द ही HHT (हैंड हेल्ड टर्मिनल) डिवाइस से जोड़ा जाएगा, जिससे टीटीई को यह सुविधा सीधे उनके उपकरण में उपलब्ध होगी। इससे आरक्षित टिकटों का गलत इस्तेमाल रुकेगा और यात्रा के दौरान यात्रियों की असली पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। यात्री सुरक्षा और ट्रेनों में अनधिकृत यात्रा को रोकने का प्रयास रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम यात्री सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रेनों में अनधिकृत यात्रा को रोकने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। साथ ही डिजिटल इंडिया की दिशा में भी यह प्रयास मील का पत्थर साबित हो सकता है।  

एनसीआर में बड़ी महापंचायत, किसानों और गुर्जरों ने 13 जुलाई को राष्ट्रीय बैठक बुलाने का किया ऐलान

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के फरीदाबाद जिला स्थित अरावली क्षेत्र में वन विभाग के बुलडोजर एक्‍शन के खिलाफ लामबंदी तेज हो गई है। शनिवार को महापंचायत में हजारों की संख्या में जुटे किसानों और गुर्जर नेताओं ने तोड़फोड़ के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई। इस महापंचायत में पूरे एनसीआर से किसान और गुर्जर नेताओं ने भाग लिया। यह पंचायत फरीदाबाद जिले के अनंगपुर गांव में आयोजित की गई। इसे भारतीय किसान यूनियन समेत कई किसान संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को भी पंचायत होगी। इसके साथ ही 13 जुलाई को किसानों की राष्ट्रीय पंचायत बुलाई गई है। जो बुलडोजर एक्‍शन के खिलाफ ग्रामीणों की आवाज बुलंद करेगी। वन विभाग के बुलडोजर एक्‍शन पर भड़का गुस्सा दरअसल, फरीदाबाद जिले के अरावली क्षेत्र स्थित अनंगपुर गांव में वन विभाग ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसका बड़े स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। शनिवार को आयोजित पंचायत में ग्रामीणों और किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि अरावली क्षेत्र में अनंगपुर गांव सदियों पुराना है। यहां कई लोग पीढ़ियों से निवास करते आए हैं। किसान और गुर्जर नेताओं ने कहा कि वन कानून बहुत बाद में बना। जबकि यह गांव सैकड़ों साल पुराना है। ऐसे में गांवों पर वन कानून जबरन लागू करना गलत है।   गांवों को उजाड़ रही भाजपा सरकार पंचायत में जुटे किसान और गुर्जर नेताओं ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला। किसानों और गुर्जरों ने कहा कि भाजपा सरकार पूरे देश में बुलडोजर चला रही है। इसके साथ ही अब वह पुराने गांवों को भी उजाड़ने में जुटी है। ग्रामीणों ने कहा कि सदियों पुराने अनंगपुर गांव को बचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा, लेकिन वन विभाग को यहां तोड़फोड़ नहीं करने दी जाएगी। लोगों ने पंचायत में कहा कि आबादी वाले पुराने गांवों को नुकसान पहुंचाना जनता के साथ बड़ा अन्याय है। घर टूटने के डर से अनंगपुर में चल रहा धरना प्रदर्शन दरअसल, वन विभाग ने फरीदाबाद के गांव अनंगपुर को अरावली क्षेत्र में अवैध कब्जा बताया है। इसके साथ ही स्‍थानीय निवासियों को घर खाली करने को कहा गया है। इसी के बाद से ग्रामीण अनंगपुर में अपना घर बचाने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों के धरने को कांग्रेसी नेता विजय प्रताप और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि अपना समर्थन देने पहुंचे थे। इस दौरान 13 जुलाई को गांव बचाने के लिए राष्ट्रीय पंचायत बुलाने ऐलान किया गया था। धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अनंगपुर को ग्रामीणों की संपत्ति बताते हुए वन विभाग की कार्रवाई को गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई गौरतलब है कि फरीदाबाद अरावली क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि अरावली पर्वत माला क्षेत्र में जितने भी अवैध कब्जे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर पर्यावरण को सुरक्षित किया जाए। इसके बाद पहले फेज में वन विभाग ने अब तक 420 अवैध ढांचों को ध्वस्त किया है। इस कार्रवाई की जद में अनंगपुर समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा गांव शामिल हैं। अनंगपुर गांव में आबादी ज्यादा होने के चलते ग्रामीण तोड़फोड़ के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

यूपी के युवाओं के लिए खुशखबरी, योगी सरकार दे रही स्थानीय स्तर पर रोजगार का मौका

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ ही उनकी क्षमता का भी पूरा उपयोग करने का इंतजाम कर रही है। सरकार स्किल डेवलपमेंट के साथ युवाओं को स्वावाल‍ंबी बनाने के लिए हर स्तर उनकी मदद की योजना तैयार कर चुकी है। सरकार तो अब युवाओं को उनके ही जिले में रोजगार देने की कोशिश कर रही है। पहली बार जिला स्तर पर स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके तहत युवाओं को उन्हीं सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनकी उनके जिले में सबसे अधिक मांग है। हर जिले में पांच प्रमुख सेक्टरों की पहचान की जा रही है। यह चयन स्थानीय उद्योगों की मांग, रोजगार की संभावनाएं और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा। हर जिले में चुने गए पांच सेक्टरों में काम कर रही पांच अग्रणी कंपनियों या औद्योगिक इकाइयों को चिन्ह्ति किया जाएगा। इनके साथ समन्वय कर युवाओं को उनकी मांग के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें उन्हीं कंपनियों में सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे। कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ बैठक कर योजना की रूपरेखा साझा की है। योजना को अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस दौरान जिला प्रशासन, उद्योग प्रतिनिधियों, प्रशिक्षण संस्थानों और मिशन टीम के बीच मजबूत समन्वय किया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारियों को 26 सेक्टरों की सूची सौंपी गई है, जिनमें से उन्हें अपने जिले के लिए पांच उपयुक्त सेक्टरों का चयन करना है। कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि इससे उद्योगों को स्थानीय प्रशिक्षित जनशक्ति मिलेगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को घर के पास ही नौकरी मिलेगी।  

अंतिम चरणों में रायपुर-राजिम रेल लाइन का काम, 15 अगस्त से चल सकती है ट्रेन

रायपुर नवा रायपुर-धमतरी-राजिम रेल लाइन का काम अंतिम चरणों में हैं। 30 जून को जीएम तरुण सिन्हा ने अभनपुर से राजिम के बीच बिछे रेल लाइन का निरीक्षण किया। अभनपुर से राजिम के बीच गेज कनवर्जन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। सीआरएस (कमिशनर आफ रेलवे सेफ्टी) के निरीक्षण के बाद राजिम तक ट्रेन चलाने की तैयारी है। इसके लिए अफसरों ने तारीख भी तय कर ली है। अधिकारियों के अनुसार 15 अगस्त तक राजिम तक ट्रेन शुरू हो जाएगी। वर्तमान में ट्रेन रायपुर से अभनपुर के बीच चलाई जा रही है। नवा रायपुर-धमतरी-राजिम रेल लाइन पर वर्तमान में मेमू ट्रेन चलाई जा रही है। इसी ट्रेन को राजिम तक विस्तार किया जाएगा। 550 करोड़ की लागत से बनाई जा रही 67 किलोमीटर लंबी रेललाइन परियोजना पहले से ही अपने निर्धारित समय से तीन साल पीछे चल रही है। लेकिन इस साल इस रेल लाइन में लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। 31 मार्च को रायपुर से अभनपुर के बीच पहली ट्रेन चलाई गई। इसके बाद अब अधिकारी 15 अगस्त से पहले तक इस रेल लाइन में राजिम तक ट्रेन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में इस ट्रेन में रायपुर से अभनपुर के बीच हर महीने लगभग दो हजार यात्री सफर कर रहे हैं। राजिम तक ट्रेन शुरू होने से यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। राजिम प्रदेश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यह तीन नदियों, महानदी, पैरी और सोंढूर के संगम पर स्थित है, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहा जाता है। यहां राजीव लोचन मंदिर और कुलेश्वर महादेव मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिर हैं। राजिम में अतिक्रमण, इसलिए आ रही है परेशानी वर्तमान में राजिम स्टेशन के दोनों छोर पर अतिक्रमण है। जिसे हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन से बात की जा रही है। अफसरों के अनुसार यात्री ट्रेनें चलाने में रेलवे को परेशानी नहीं है। लेकिन गुड्स ट्रेनें (मालगाड़ी) चलाने में जरूर दिक्कत हो सकती है। धमतरी के लिए दिसंबर तक का रखा लक्ष्य अफसरों की माने तो अभनपुर से धमतरी के बीच भी गेज कनवर्जन कार्य प्रगति पर है। दिसंबर में धमतरी तक ट्रेन शुरू करने की बात कही जा रही है। हांलाकि पूरी तरह से धमतरी तक रेल सेवा शुरू करने के लिए 2026 का ही लक्ष्य रखा है। 1920 में इसी रेल लाइन पर हुआ था सत्याग्रह ब्रिटिश सरकार के काले कानूनों से लड़ने इसी रेल लाइन पर राष्ट्रपिता महात्मागांधी 1920 में कंडेल सत्याग्रह के लिए धमतरी पहुंचे थे। इस रेल लाइन को रेलवे ने नौ साल पहले नुकसान बताकर बंद कर दिया था। लोगों के विरोध पर रेलवे ने 2018 में नई रेल लाइन की घोषणा की। फिर बजट पास किया और काम शुरू हुआ। 15 अगस्त तक किसी भी हाल में यात्री ट्रेन राजिम तक शुरू हो जाएगी। राजिम रेलवे स्टेशन के आसपास अतिक्रमण है। जिसे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हटाने की तैयारी है। – अवधेश कुमार त्रिवेदी, सीनियर डीसीएम, रायपुर।

भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5, दुनिया का चौथा सबसे समान देश बना

नई दिल्ली पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अब वर्ल्ड बैंक ने भारत की ताकत का लोहा माना है। भारत सरकार ने एक खास मुकाम हासिल करते हुए चीन-अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सफलता का प्रमुख आधार बनीं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5 है। इसके साथ ही भारत दुनिया का चौथा सबसे समान देश बन गया है। इस लिस्ट में स्लोवाक रिपब्लिक, स्लोवेनिया और बेलारूस पहले तीन स्थान पर हैं। दरअसल गिनी इंडेक्स एक तरीका है, जिससे पता चलता है कि किसी देश में आय, संपत्ति या उपभोग लोगों के बीच कितनी बराबरी से बंटा हुआ है। इसका स्कोर 0 से 100 तक होता है। 0 का मतलब है कि सब कुछ बराबर है। 100 का मतलब है कि सब कुछ सिर्फ एक व्यक्ति के पास है। भारत का स्कोर चीन (35.7) और अमेरिका (41.8) से बहुत कम है। यह कई विकसित देशों से भी बेहतर है। गरीबी कम करने से मिली सफलता भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ समान समाज में से एक है। सरकार के अनुसार, गिनी इंडेक्स में भारत की अच्छी रैंकिंग कोई संयोग नहीं है। यह गरीबी कम करने में मिली सफलता का नतीजा है। World Bank की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस सालों में 17.1 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 2011-12 में 16.2% थी। 2022-23 में यह घटकर 2.3% हो गई। यह आंकड़ा 2.15 डॉलर प्रति दिन से कम कमाने वाले लोगों का है। वर्ल्ड बैंक ने गरीबी की नई सीमा 3 डॉलर प्रति दिन तय की है। इसके अनुसार, 2022-23 में गरीबी दर 5.3% होगी। सरकारी योजनाओं ने कर दिया कमाल भारत की इस सफलता के पीछे सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं हैं। इन्हीं योजनाओं के दम पर भारत ने आय में समानता लाने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाया है। इन योजनाओं में पीएम जन धन योजना, DBT, आयुष्मान भारत, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और पीएम विश्वकर्मा योजना शामिल हैं। जन धन योजना और डीबीटी जैसी योजनाओं से देश के आम नागरिक बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं। वहीं आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने गरीब लोगों को मुफ्त इलाज, पक्के घर जैसी आधारभूत सुविधाएं दी हैं। इसके अलावा स्टैंड अप इंडिया, पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं से लोग अपना खुद का बिजनेस शुरू करने में कामयाबी हासिल कर रहे हैं। किसानों के लिए भी पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम जैसी योजनाएं चलाकर उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर की जा रही है। ILO ने भी बांधे तारीफों के पुल अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके अनुसार पिछले 11 साल में भारत की सामाजिक सुरक्षा काफी बेहतर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में जहां सिर्फ 19 फीसदी कवरेज था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 64.3% हो गया है। भारत ने दुनिया में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि को हासिल करने में भी केंद्र द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है।  

राष्ट्रपति ट्रंप की बहु वैनेसा ट्रम्प दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स के साथ रिलेशनशिप , करेगी दूसरी शादी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भला कौन नहीं जानता है। बिजनेस हो या फिर पॉलिटिक्स या पर्सनल लाइफ ट्रंप किसी ना किसी वजह चर्चा में रहते ही हैं। ट्रंप को लेकर पॉलिटिक्स की खबरें तो आपने खूब सुनी और पढ़ी होगी, लेकिन एक खबर उनकी फैमिली से जुड़ी हुई निकल कर सामने आ रही है जिससे सनसनी मच गई है। ये खबर है डोनाल्ड ट्रंप की बहु वैनेसा ट्रम्प की। वैनेसा डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की एक्स वाइफ हैं। वैनेसे और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी साल 2005 में हुई थी, लेकिन 13 साल बाद दोनों का 2018 में तलाक हो गया। वहीं अब वैनेसा दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स के साथ रिलेशनशिप में हैं और जल्द ही 47 साल की उम्र में वह वुड्स से शादी करने वाली हैं। इसी साल मार्च में पहली बार ये खबर आई थी कि टाइगर वुड्स और वैनेसा ट्रम्प एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। वैनेसा और टाइगर वुड्स ने दुनिया की नजरों से छिप कर 2024 में एक दूसरे को डेट करना शुरू किया था, सेकिन जल्दी इसके बारे में सबको पता चल गया। मॉडलिंग और एक्टिंग कर चुकी हैं वैनेसा बता दें कि वैनेसा डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ शादी से पहले भी काफी मशहूर थीं। खास तौर से उन्होंने मॉडलिंग में खूब नाम कमाया। उन्होंने 20 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू कर दी थी। इसके अलावा हॉलीवुड के मशहूर एक्टर लियोनार्डो डिकैप्रियो को भी डेट कर चुकी हैं। वैनेसा ने साल 2003 में आई फिल्म 'समथिंग्स गोटा गिव' के एक दृश्य में भी दिखाई दीं थीं। इसके अलावा 2011 में वह अपने ससुर डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होस्ट किए गए 'द अपरेंटिस' के एक एपिसोड में दिखाई दीं थी।  पांच बच्चों की मां हैं वैनेसा वैनेसा ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की पूर्व पत्नी हैं। दोनों ने 12 नवंबर 2005 में शादी रचाई थी और 2018 में उनका तलाक हो गया। वैनेसा पांच बच्चों की मां हैं और अब दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स के साथ रिश्ते में हैं। इसकी पुष्टि अमेरिकी खिलाड़ी ने खुद की। सोमवार को उन्होंने तस्वीर साझा कर कहा- 'प्यार हवा में है और तुम्हारे साथ मेरी जिंदगी बेहतर है। हम साथ मिलकर जिंदगी की यात्रा करने के लिए उत्सुक हैं। इस समय हम अपने दिल के करीब सभी लोगों के लिए गोपनीयता की सराहना करेंगे।' 2010 में हुआ था वुड्स का तलाक वैनेसा की तरह वुड्स भी शादी के बंधन में बंध चुके हैं। उन्होंने स्वीडिश मॉडल एलिन नॉर्डग्रेन से शादी रचाई थी, लेकिन 2010 में उनका तलाक हो गया था। इसके बाद वुड्स का नाम कथित तौर पर अमेरिकी स्कीइंग दिग्गज लिंडसे वॉन और एरिका हरमन के साथ जुड़ा। हालांकि, अब वह वैनेसा के साथ रिलेशनशिप में हैं।  वुड्स की निजी जिंदगी और पिछले रिश्ते टाइगर वुड्स हमेशा अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखने के लिए जाने जाते हैं. इससे पहले उनकी शादी एलिन नॉर्डग्रेन से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे हैं. वुड्स का हालिया रिश्ता एरिका हरमन के साथ था, जो 2022 में कानूनी विवादों के बाद समाप्त हो गया. हाल ही में वुड्स ने अपने बाएं एच्लीस टेंडन में चोट की वजह से मास्टर्स टूर्नामेंट से बाहर होने की घोषणा की थी. बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप टाइगर वुड्स के अच्छे मित्र भी है. हाल ही में जब टाइगर वुड्स की मां का निधन हुआ था तो राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर गोल्फ खिलाड़ी की मां के निधन पर शोक व्यक्त किया था.  

4775.84 करोड़ की लागत से यूपी को मिलेगा नया एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल और वेस्ट के बीच सीधा रास्ता

लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर दोनों ओर सात मीटर चौड़ाई में सर्विस रोड का निर्माण किया जाना है। यूपीडा के प्रस्ताव में एक्सप्रेसवे पर यातायात व्यवस्था के सुगम संचालन के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) भी स्थापित करना शामिल है। एक्सप्रेसवे पर दो बड़े सेतु, 20 छोटे सेतु, दो रेलवे ओवरब्रिज, छह फ्लाईओवर व पांच इंटरचेंजेज का निर्माण होगा। लखनऊ से कानपुर जाने वाले लोग अब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधे कनेक्ट हो सकेंगे। प्रदेश सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दे दिया है। यह छह लेन का होगा और भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक के साथ आठ लेन का भी किया जा सकेगा। इसके लिए 39 गांवों की 597 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। एक्सप्रेसवे बनने के बाद पांच साल तक निजी कंपनी इसका रखरखाव करेगी। इसे आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे के पहले टोल (महुरा कला) से सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पहले टोल से जोड़ा जाएगा। इसकी लंबाई करीब 49.960 मीटर होगी। इसका सबसे अधिक फायदा लखनऊ, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर को होगा। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ के आदमपुर, इरखरा, सकाभवई, लुहस बंथरा, सिकंदपुर, कुरैनी, भगदुमपुर, काशी जैतीखेड़ा, परवर, पश्चिम परवर, उल्लासखेड़ा, खुजहा, बरकत नगर, किथौली और कलपहास जैसे गांवों से होकर गुजरेगा। यहां वाहनों की गति 120 किमी. प्रति घंटे की होगी। वहीं लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों को अगर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पकड़ना होगा तो उन्हें लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर न चलकर लखनऊ-कानपुर (एनएच 27) यानी नीचे वाले एक्सप्रेसवे पर चलना होगा। जमीन अधिग्रहण करने की प्रक्रिया और लिंक एक्सप्रेसवे बनाने में कम से कम तीन साल का समय कार्यदायी संस्था को लग सकता है।  

नागद्वार की दुर्गम यात्रा का आगाज़ 19 जुलाई से प्रारंभ होगा भव्य मेला, नागपंचमी 29 जुलाई तक चलेगी यात्रा

जुन्नारदेव   मध्यप्रदेश के पचमढ़ी क्षेत्र में स्थित नागलोक के द्वार नागद्वार के दर्शन हेतु इस वर्ष की वार्षिक धार्मिक यात्रा का शुभारंभ 19 जुलाई से होगा, जो 31 जुलाई तक चलेगी। यह दरवाज़ा वर्ष में केवल एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस पावन अवसर पर मध्यप्रदेश महाराष्ट्र सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु यहाँ आकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। श्रद्धालुओं को नागद्वार तक पहुंचने के लिए दुर्गम यात्रा करनी होती है। यात्रा प्रातःकाल से ही शुरू की जाती है ताकि समय रहते दर्शन सम्पन्न किए जा सकें। यात्रा की शुरुआत छिंदवाड़ा जिले के दमुआ ब्लॉक के गांव आल्मोद से होती है। इसके बाद श्रद्धालु रौरी घाट, काजरी गांव, मछंदरनाथ, गोरखनाथ, बिचबेहरी और झालमऊ जैसे पड़ाव पार करते हुए नागद्वार देवस्थान तक पहुंचते हैं, जो सतपुड़ा रिजर्व फॉरेस्ट के बीच स्थित है। श्रद्धालुओं को हुए नाग देवता के दर्शन यह यात्रा सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव नहीं है, बल्कि यह नाग देवता की प्रत्यक्ष अनुभूति भी कराती है। यात्रा मार्ग में कई गुफाएं हैं जिनमें सैकड़ों नाग देवता की मूर्तियां हैं। मान्यता है कि यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं को साक्षात नाग देवता के दर्शन होते हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक सर्पदंश की कोई घटना नहीं हुई, जो इस यात्रा की दिव्यता को दर्शाता है। साल में एक बार खुलता है यह रास्ता यह दुर्गम और आरक्षित वन मार्ग साल में केवल एक बार ही, नागद्वारी मेले के समय, वन विभाग की अनुमति से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस यात्रा में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचते हैं। प्रशासनिक तैयारी पूरी इस साल यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह और एसपी अजय पांडे ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। यात्रा मार्ग में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए SDRF और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। लगभग 25 हजार श्रद्धालु हर साल इस यात्रा में शामिल होते हैं। सेवा और सुविधाएं यात्रा मार्ग में भंडारे दिन-रात चलते हैं। श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने, रुकने और स्वास्थ्य की व्यवस्था प्रशासन और ग्राम पंचायतों द्वारा की गई है। स्वच्छता के लिए विशेष कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इन बातों का रखें ध्यान यह यात्रा शारीरिक रूप से स्वस्थ श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है। साथ में टॉर्च, रेन कोट, बरसाती जूते, सूखा भोजन, चादर और कंबल अवश्य रखें। शीलेंद्र सिंह (कलेक्टर छिंदवाड़ा) ने कहा कि हम लगातार मेले को सफल बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। दमुआ में SDRF की टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने किए पुख्ता इंतज़ाम इस पवित्र यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा पूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। पुलिस, जल, लाइट, स्वास्थ्य, सफाई एवं अन्य आवश्यक प्रबंधों के लिए अतिरिक्त सरकारी अमला तैनात किया जाएगा। सतपुड़ा के घने जंगलों और पथरीले रास्तों से होकर नागद्वार तक की यात्रा केवल हिल स्टेशन पचमढ़ी से ही संभव है। यहां से होकर श्रद्धालु सतपुड़ा की संगीतमय घाटियों से गुजरते हुए नागद्वार तक पहुंचते हैं और दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं।

प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधरोपण कार्य वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से किया जाए

पौधरोपण में वैज्ञानिक और टिकाऊ तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण मनरेगा के तहत इंजीनियर और कृषि सखियों को दिया जा रहा है तकनीकी प्रशिक्षण प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधरोपण कार्य वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से किया जाए भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई "एक बगिया मां के नाम परियोजना", "गंगोत्री हरित योजना" और "नर्मदा परिक्रमा पथ" जैसी योजनाओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने की दिशा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन योजनाओं के तहत मनरेगा के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रदेश के 2101 इंजीनियर और 626 कृषि सखी को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण मध्यप्रदेश जल-भूमि प्रबंध संस्थान, भोपाल और क्षेत्रीय ग्रामीण विकास-पंचायतराज प्रशिक्षण केंद्रों में संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधरोपण कार्य वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से किया जाए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने निर्देश दिए हैं कि नदियों के उद्गम स्थलों पर पौधरोपण को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों में पौधरोपण कर तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने "एक बगिया मां के नाम परियोजना" को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बताया। मनरेगा के अंतर्गत प्रशिक्षण पाने वाले अधिकारियों में 36 कार्यपालन यंत्री आरईएस, 215 सहायक यंत्री, 47 डीपीएम एसआरएलएम और 1803 उप यंत्री शामिल हैं। इन्हें पौधरोपण की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है, जिससे वे इस कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कर सकें। प्रदेश में पहली बार पौधरोपण कार्य में अत्याधुनिक तकनीक सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से संबंधित जिलों की जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता, एग्रो क्लाइमेट ज़ोन, स्थल चयन और पानी की उपलब्धता जैसी जानकारियां जुटाकर पौधों की उपयुक्त प्रजातियों का चयन किया जाएगा। जहां सॉफ्टवेयर उपयुक्तता नहीं दिखाता, वहां पौधरोपण नहीं किया जाएगा, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके। "एक बगिया मां के नाम" अभियान के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनकी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए 626 कृषि सखी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कृषि सखी बाद में अन्य स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को पौधारोपण की तकनीक, पौधों के चयन और देखरेख के बारे में प्रशिक्षण देंगी और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगी। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में न केवल पर्यावरण-संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्राप्त होगा।  

पीजी में आए अंक के आधार पर मेरिट का निर्धारण किया जा रहा , ऐसा करके राज्य शासन ने शिक्षा के स्तर से समझौता किया : हाईकोर्ट

ग्वालियर पहले से काम कर रहे अतिथि विद्वानों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उच्च न्यायालय ने अतिथि विद्वानों के चयन के लिए अक्टूबर 2023 को जारी सर्कुलर को लेकर बड़ा फैसला दिया है. इसमें स्पष्ट किया गया कि अतिथि विद्वानों की मेरिट का निर्धारण 17 दिसंबर 2019 को जारी सर्कुलर के प्रावधान के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने 2023 के सर्कुलर में कैटेगरी व्यवस्था को शामिल करने का आदेश दिया. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला? 2019 के सर्कुलर में क्या था? 2019 के सर्कुलर में अतिथि विद्वानों की योग्यता को चार कैटेगरी में विभाजित किया गया हैं, जिसमें सी-1 वाला अतिथि विद्वान सबसे ज्यादा योग्य (पीएचडी विद नेट सिलेक्ट) माना जाता है. सी-4 वाला अतिथि विद्वान (पीजी, किसी भी विषय में) अंतिम पायदान पर होता है. 2023 के सर्कुलर में फाल आउट संबंधी प्रावधान को यथावत रखा गया है. इसके अनुसार, नियमित नियुक्ति होने की स्थिति में कम शैक्षणिक योग्यता वाला अतिथि शिक्षक (सी-4) ही हटाया जाएगा. याचिकाकर्ता ने क्या कहा? याचिकाकर्ता डॉ दिनेश कुमार चतुर्वेदी व अन्य की ओर से बताया गया कि 2023 के सर्कुलर में कैटेगरी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. अब केवल पीजी में आए अंक के आधार पर मेरिट का निर्धारण किया जा रहा है. ऐसा करके राज्य शासन ने शिक्षा के स्तर से समझौता किया है. कोर्ट ने क्या कहा? दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने शासन को 2023 में जारी सर्कुलर के प्रावधानों को संशोधित कर प्रतिभागी के फॉल आउट का निर्धारण कैटेगरी के माध्यम से करने का निर्देश दिया है कि जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक दिसंबर 2019 के सर्कुलर में प्रस्तावित कैटेगरी का पालन करने का निर्देश दिया गया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उक्त आदेश आदेश 5 अक्टूबर 2023 के पूर्व में नियुक्त या कार्यरत अतिथि विद्वानों पर ही बंधनकारी होगा.