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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के घने वनों और वन्यजीव पर्यटन को राजस्व वृद्धि का एक प्रमुख माध्यम बताया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य में ‘जियो और जीने दो’ की भावना को केंद्र में रखकर सह-अस्तित्व आधारित ईको-सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे न केवल जैव विविधता का संरक्षण हो रहा है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है और वनवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में कई नवाचार किए जा रहे हैं इनमें वन्यजीव अभयारण्यों के संरक्षण और प्रबंधन में उच्च तकनीक का अनुप्रयोग, गुजरात के ‘वनतारा’ से प्रेरित रैस्क्यू सेंटर, दुर्लभ जीवों जैसे चीते, घड़ियाल एवं कछुओं के एक अभयारण्य से दूसरे में पुनर्स्थापन और संरक्षित क्षेत्रों की फेंसिंग शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को गुजरात के ‘वनतारा’ वन्यजीव पुनर्वास केंद्र का अध्ययन कर प्रदेश में भी ऐसा ही रेस्क्यू और एनिमल वेलफेयर प्रोजेक्ट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्वास में एक नई मिसाल पेश करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के घने वनों और वन्यजीव पर्यटन को राजस्व वृद्धि का एक प्रमुख माध्यम बताया। उन्होंने वन अधिकारी-कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाओं और उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रोत्साहन की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में वन क्षेत्र और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया जारी है। जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिए कई स्थलों को जैव-विविधता विरासत घोषित किया गया है। वन-अग्नि की घटनाओं पर विभाग की प्रतिक्रिया अब पहले से अधिक त्वरित हुई है, जो प्रभावी वन प्रबंधन को दर्शाता है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उठाए गए प्रमुख कदम मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिससे प्रदेश की छवि 'टाइगर स्टेट' के रूप में और मजबूत हो रही है। प्रदेश में अब 9 टाइगर रिजर्व हो गये हैं। बाघ संरक्षण के साथ-साथ ये रिजर्व पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं। टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए ‘बफर-सफर’ योजना के अंतर्गत अनेक नई गतिविधियाँ प्रारंभ की गई हैं। अब पर्यटक प्राकृतिक स्थलों, वन और वन्य-प्राणी दर्शन के साथ ईको-पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और कोर क्षेत्रों पर दबाव भी कम होगा। प्रदेश में 15,000 से अधिक वन समितियाँ गठित की जा चुकी हैं, जिनकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सक्रिय बनाया जा रहा है। प्रदेश में आधुनिक चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर्स विकसित किये जा रहे हैं। उज्जैन और जबलपुर में उन्नत सुविधाओं से युक्त नये चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर शीघ्र ही स्थापित किए जा रहे हैं। ओंकारेश्वर, ताप्ती और बालाघाट के सोनेवानी क्षेत्र में नए कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जा रहे हैं, जो वन्यजीव आवासों की रक्षा करेंगे। अफ्रीका से लाए गए चीतों की कूनो में सफल पुनर्स्थापना के बाद इन चीतों को प्रदेश एंव देश के दूसरे अभयारण्यों में बसाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। प्रदेश के बुंदेलखंड वन क्षेत्रों में फैले हुए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्स्थापना की तैयारियाँ चल रही हैं, जिससे जैव विविधता में वृद्धि होगी। जलीय जीव संरक्षण के रूप में नर्मदा में महाशीर मछली जैसे जलजीवों के लिए प्रजनन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। चंबल में कछुए, मगरमच्छ एवं घड़ियाल एवं गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए केंद्र पहले से ही स्थापित हैं। इनमें जलीय जीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है औऱ इन्हें प्रदेश के साथ ही देश भर में भेजा जा रहा है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग की जा रही है। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हाथियों की सुरक्षा हेतु विशेष योजना प्रदेश सरकार द्वारा हाथियों की सुरक्षा और अनुश्रवण के लिए वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में कुल ₹1 करोड़ 52 लाख 54 हजार खर्च किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹20 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹25 करोड़ 59 लाख 15 हजार का प्रावधान किया गया है। इस तरह वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक योजना का कुल आकार ₹47 करोड़ 11 लाख 69 हजार रहेगा। हाथियों के आवागमन की मॉनिटरिंग के कॉलर आईडी लगाये जा रहे हैं। इन योजनाओं से हाथियों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। वनवासियों के अधिकारों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि टाइगर रिजर्व की घोषणा से जनजातीय समुदायों और वनवासियों के अधिकारों को प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा और उनका पूर्ण सम्मान किया जाएगा। सह-अस्तित्व के लिए सह-प्रबंधन की नीति अपनाई जाएगी और जहाँ आवश्यक होगा वहाँ पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप उनके निर्देशन में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिये एक अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। यहां जैव विविधता, पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और जनजातीय आजीविका का संतुलित एवं वन्य-जीवों के साथ सह-अस्तित्व का इको सिस्टम विकसित हो रहा है।  

11 राज्यों में करोड़ों की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार

कोंडागांव सायबर अपराध पर शिकंजा कसते हुए फरसगांव पुलिस ने 11 राज्यों में करोड़ों की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. इन आरोपियों पर करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी का आरोप है. पुलिस की इस सफलता ने पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है. यह कार्रवाई एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने की. टीम में थाना फरसगांव के निरीक्षक संजय सिन्दे और साइबर सेल के विशेषज्ञ शामिल थे. लंबे समय से चल रही निगरानी के बाद आरोपियों को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया. कैसे सामने आया गिरोह का जाल? पुलिस मुख्यालय रायपुर ने साइबर अपराध रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे. उसी के तहत पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव वाय. अक्षय कुमार (भा.पु.से.) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कौशलेन्द्र देव पटेल के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई अंजाम दी गई. तफ्तीश की शुरुआत थाना फरसगांव में दर्ज अपराध क्रमांक 46/2025 से हुई, जब एक आरोपी भावेश तारम पकड़ा गया. वह म्यूल एकाउंट धारक था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि पूरा गिरोह लेयर सिस्टम में काम करता है:     लेयर-1: म्यूल एकाउंट खुलवाने वाले लोग     लेयर-2: एकाउंट खरीदकर बेचने वाले बिचौलिए     लेयर-3 और 4: असली स्कैमर जो धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं आरोपी लोगों को मामूली रकम का लालच देकर उनके नाम पर बैंक एकाउंट, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम हासिल करते थे. इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल बड़ी साइबर ठगी में किया जाता था. चार केस, एक ही गैंग से जुड़े तार थाना फरसगांव में दर्ज चार मामलों (अपराध क्रमांक 46/2025, 82/2025, 83/2025, 84/2025) की जांच में सामने आया कि सभी में एक जैसी कार्यप्रणाली थी. फर्जी म्यूल एकाउंट खोलकर अलग-अलग राज्यों में ऑनलाइन फ्रॉड किए गए. क्या होता है म्यूल एकाउंट? म्यूल एकाउंट वे बैंक खाते होते हैं, जो किसी आम व्यक्ति के नाम पर खोले जाते हैं. स्कैमर इन्हें धोखाधड़ी में इस्तेमाल करते हैं. खाताधारक को कुछ पैसा देकर उनका डेटा और डॉक्युमेंट ले लिया जाता है, लेकिन बाद में वह व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ जाता है. पुलिस की अपील फरसगांव पुलिस ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताते हुए नागरिकों से अपील की है कि किसी भी लालच या धोखे में आकर अपना बैंक एकाउंट, पासबुक, एटीएम या सिम किसी को न दें. ऐसा करना साइबर अपराध में भागीदारी माना जाता है और कड़ी सज़ा हो सकती है. वहीं आने वाले समय में इस गिरोह से जुड़े और नामों का खुलासा होने की संभावना जताई गई है.

राजस्व प्रकरणों का रिकॉर्ड निराकरण, राजस्व महा-अभियान के बाद 8 लाख 49 हजार 681 प्रकरणों का निराकरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिये प्रदेश में 2 चरणों में राजस्व महाअभियान संचालित किये गये। राजस्व महाअभियान में राजस्व प्रकरणों के निराकरण का क्रम राजस्व महाअभियान-2 के बाद भी जारी है। राजस्व महाअभियान-2 के बाद फरवरी-2025 से अब तक राजस्व विभाग द्वारा नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के 8 लाख 49 हजार 681 प्रकरणों का रिकॉर्ड निराकरण किया गया है। यह निराकरण राजस्व महा-अभियान के बाद जनवरी-2025 के अंत से अब तक किया गया है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति, राजस्व न्यायालयों की दक्षता, पारदर्शिता और तीव्रता को दर्शाती है। राजस्व महा-अभियान से प्रकरणों के निराकरण में आयी तेजी लगातार बनी हुई है। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के 27 जनवरी, 2025 के बाद से अब तक के प्रकरणों के निराकरण की जिलेवार स्थिति में आगर-मालवा में 10 हजार 417, अलीराजपुर में 2550, अनूपपुर में 10 हजार 690, अशोकनगर में 10 हजार 130, बालाघाट में 21 हजार 897, बड़वानी में 5 हजार 610, बैतूल में 21 हजार 407, भिण्ड में 21 हजार 964, भोपाल में 31 हजार 996, बुरहानपुर में 6 हजार 340, छतरपुर में 28 हजार 325, छिंदवाड़ा में 23 हजार 84, दमोह में 15 हजार 616, दतिया में 14 हजार 501, देवास में 16 हजार 395, धार में 13 हजार 362, डिण्डौरी में 9 हजार 203, गुना में 14 हजार 784, ग्वालियर में 26 हजार 221, हरदा में 5 हजार 704, इंदौर में 31 हजार 540, जबलपुर में 28 हजार 167, झाबुआ में 6 हजार 730, कटनी में 22 हजार 299, खण्डवा में 13 हजार 413, खरगौन में 14 हजार 37, मैहर में 8 हजार 612, मण्डला में 11 हजार 110, मंदसौर में 14 हजार 776, मऊगंज में 6 हजार 788, मुरैना में 21 हजार 538, नर्मदापुरम में 12 हजार 89, नरसिंहपुर में 9 हजार 650, नीमच में 8 हजार 710, निवाड़ी में 4 हजार 491, पांढुर्णा में 5 हजार 16, पन्ना में 11 हजार 544, रायसेन में 15 हजार 343, राजगढ़ में 15 हजार 911, रतलाम में 13 हजार 720, रीवा में 31 हजार 789, सागर में 25 हजार 841, सतना में 18 हजार 959, सीहोर में 17 हजार 112, सिवनी में 20 हजार 725, शहडोल में 12 हजार 646, शाजापुर में 14 हजार 816, श्योपुर में 5 हजार 134, शिवपुरी में 21 हजार 98, सीधी में 13 हजार 653, सिंगरौली में 17 हजार 373, टीकमगढ़ में 11 हजार 387, उज्जैन में 26 हजार 614, उमरिया में 7 हजार और विदिशा जिले में 19 हजार 854 राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया। 

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 4 जुलाई को करेगा जनसुनवाई

भोपाल प्रदेश की पिछड़े वर्ग की जातियों को केन्द्र की सूची में शामिल करने के संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 4 जुलाई 2025 को भोपाल में जन सुनवाई करेगा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर और आयोग के सदस्य श्री भूवन भूषण कमल जनसुनवाई करेंगे। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई राज्य अतिथि गृह (व्हीआईपी गेस्ट हाउस) लालघाटी में 4 जुलाई को पूर्वान्ह 11 बजे से प्रारंभ होगी। इसमें मध्यप्रदेश की पिछड़े वर्ग की 32 जातियों (जो राज्य पिछड़ावर्ग की सूची में है, किन्तु केन्द्र की सूची में नहीं हैं।) को केन्द्र की सूची में शामिल करने पर सुनवाई करेंगे। उक्त जानकारी आयुक्त पिछड़ा वर्ग ने दी है। 

जयराम रमेश का दावा – हर भारतीय पर 4.8 लाख का कर्ज, मोदी सरकार जिम्मेदार

नई दिल्ली  कांग्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट से संबंधित खबरों का हवाला देते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था का बंटाधार कर दिया है। पिछले दो साल में प्रति व्यक्ति कर्ज 90 हजार रुपए से बढ़कर 4.8 लाख रुपए हो गया है। कांग्रेस पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि जनता कर्ज में डूब रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परम मित्र मुनाफा कमा रहे हैं तथा उनकी संपत्ति बढ़ती ही जा रही है। रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, " "अच्छे दिन" का कर्ज़! मोदी सरकार ने पिछले ग्यारह सालों में देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार कर दिया है। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में कोई प्रयास नहीं किया गया, केवल पूंजीपति मित्रों के लिए सारी नीतियां बनाई गईं, जिसका अंजाम आज देश की जनता भुगत रही है।" 'देश पर कर्ज का बोझ मोदी राज में चरम पर है' उन्होंने कहा कि यह सच्चाई किसी न किसी तरह हर रोज हमारे सामने आ रही है। रमेश ने कुछ खबरों का हवाला देते हुए दावा किया, " रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट से भारत की अर्थव्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकार कि ओर से आंकड़ेबाजी और विषेशज्ञों का सहारा लेकर असली कमियों को छुपाने की कोशिश लगातार जारी है, लेकिन इस सच्चाई से कोई इनकार नही कर सकता कि देश पर कर्ज का बोझ मोदीराज में चरम पर है। "   लोगों की आमदनी का 25.7 % हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में जा रहा- जयराम रमेश उन्होंने कहा कि दो साल में प्रति व्यक्ति कर्ज 90,000 रुपए बढ़कर 4.8 लाख रुपए हो गया है यानी लोगों की आमदनी का 25.7 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में जा रहा है। कांग्रेस नेता ने दावा किया, "सबसे ज्यादा 55 प्रति कर्ज तथाकथित रूप से क्रेडिट कार्ड, मोबाइल ईएमआई आदि के लिए जा रहा है, जिसका मतलब है इस महंगाई में परिवारों की आय में उनका गुजारा नहीं हो रहा है और वे कर्ज लेने पर मजबूर हैं। असुरक्षित कर्ज 25 प्रतिशत पार हो चुका है।'' 'युवाओं के पास नौकरी नहीं है… ' रमेश के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात यह है कि मार्च 2025 तक भारत पर दूसरे देशों का/बाहरी कर्ज 736.3 अरब डॉलर था, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के पास नौकरी नहीं है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, महंगाई से जनता त्रस्त है और संवैधानिक संस्थाओं को कुचला जा रहा है। 'जनता कर्ज में डूब रही है और PM मोदी के परम मित्र मुनाफा कमा रहे' कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जनता कर्ज में डूब रही है और प्रधानमंत्री मोदी के परम मित्र मुनाफा कमा रहे हैं, उनकी संपत्ति बढ़ती ही जा रही है। रमेश ने कहा, "सीधा सवाल यह है कि जब सारी सरकारी परियोजनाएं सार्वजनिक निजी भागीदारी या निजी भागीदारी से ही हो रहे हैं तो देश पर कर्जा क्यों बढ़ रहा है तथा हर देशवासी पर 4,80,000 रुपये का कर्ज क्यों हो गया है ?'' 

लोकपथ मोबाइल ऐप की सफलता की प्रथम वर्षगांठ पर मंत्री श्री सिंह ने दी बधाई

भोपाल  मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित लोकपथ मोबाइल ऐप ने अपनी पहली वर्षगांठ के साथ एक सराहनीय उपलब्धि दर्ज की है। बुधवार को लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में इस अवसर पर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ऐप के अब तक की सफलता, नागरिकों की भागीदारी और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोकपथ ऐप की शुरुआत 2 जुलाई 2024 को विधानसभा परिसर में की गई थी। ऐप ने अपने पहले ही वर्ष में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अब तक इस ऐप पर 7800 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का त्वरित समाधान कर दिया गया है। लगभग 1.5 लाख नागरिकों द्वारा ऐप को डाउनलोड किया जाना यह दर्शाता है कि जनता में इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता को लेकर गहरी स्वीकार्यता बनी है। ऐप की सफलता पर मंत्री श्री सिंह ने विभागीय अधिकारियों को बधाई देते हुए लोकपथ ऐप को “जनभागीदारी आधारित डिजिटल गवर्नेंस का प्रभावी उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष में ऐप के 5 लाख डाउनलोड सुनिश्चित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए व्यापक जनजागरण और प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा। लोकपथ ऐप को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली जब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन ने इससे संबंधित प्रश्न प्रस्तुत किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश का यह नवाचार अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। मंत्री श्री राकेश सिंह ने बैठक में नागरिकों को और अधिक त्वरित सेवा देने के लिए नियमित समीक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें संवेदनशीलता के साथ शिकायतों का निराकरण करना चाहिए। यदि समय सीमा में सड़क की मरम्मत करना संभव नहीं है तो संबंधित शिकायतकर्ता को दूरभाष पर कारण बताते हुए सुधार में लगने वाले समय की जानकारी देना चाहिए। उन्होंने प्रमुख अभियंताओं को साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य रूप से करने तथा लंबित शिकायतों को लेकर लापरवाह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा। मंत्री श्री सिंह ने सभी परिक्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं के कार्यालयों में एक-एक नोडल अधिकारी को नियुक्ति करने के निर्देश देते हुए उन्हें भोपाल में विशेष प्रशिक्षण देने की बात कही। साथ ही, ऐप से जुड़ी गूगल प्ले स्टोर टिप्पणियों पर विभागीय उत्तर देने की प्रक्रिया आरंभ करने की सिफारिश भी की गई, जिससे नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। बैठक में यह सुझाव भी आया कि नगर निगम की सड़कों को भी लोकपथ ऐप से जोड़ा जाए, जिससे नगरीय क्षेत्रों में भी सड़क समस्याओं का समाधान इसी प्लेटफॉर्म से हो सके। एनएचएआई के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों को लोकपथ से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है — जो आने वाले समय में राज्य के समग्र सड़क नेटवर्क प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार ला सकती है। बैठक में प्रमुख अभियंता श्री केपीएस राणा, श्री एस.आर. बघेल, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता श्री अनिल श्रीवास्तव, सड़क विकास निगम के तकनीकी सलाहकार श्री आर.के. मेहरा, भोपाल परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय मस्के, श्री आनंद राणे, श्री बी.पी. बोरासी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और ऐप के क्रियान्वयन व सुधार की दिशा में अपने बहुमूल्य सुझाव प्रस्तुत किए।  

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में मातृ भाषा को दिया जाये बढ़ावा

भोपाल  केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा में मातृ-भाषा हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप श्रेष्ठ कार्य किया जा रहा है। श्री प्रधान ने यह बात बुधवार को भोपाल में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह से सौजन्य मुलाकात के दौरान कही। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री‍सिंह ने बताया कि प्रदेश में 4473 शासकीय स्कूलों में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इन शालाओं में करीब एक लाख बच्चे नामांकित है। प्रदेश में ड्रॉप-आउट बच्चों की संख्या दर कम करने के लिए स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के बारे में भी जानकारी दी।  

बांग्लादेश में बड़ा सियासी धमाका: शेख हसीना को ICT ने सुनाई 6 माह की जेल

ढाका बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत की अवमानना के मामले में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने छह महीने की जेल की सजा सुनाई। स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी। ‘ढाका ट्रिब्यून' अखबार ने कहा कि न्यायाधीश मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला जारी किया। इसी फैसले में न्यायाधिकरण ने गैबांधा में गोबिंदगंज के शकील अकंद बुलबुल को दो महीने जेल की सजा सुनाई। प्रधानमंत्री पद से हटने और 11 महीने पहले देश छोड़ने के बाद पहली बार अवामी लीग की नेता को किसी मामले में सजा सुनाई गई है। 

कुनाल करण कपूर के साथ तेनाली रामा के सेट पर धमाल मचाते हैं कृष्णा भारद्वाज

मुंबई, सोनी सब के शो ‘तेनाली रामा ’ में तेनाली रामा का किरदार निभा रहे कृष्णा भारद्वाज ने बताया कि वह कुनाल करण कपूर के साथ इस शो के सेट पर खूब धमाल मचाते हैं। सोनी सब का लोकप्रिय शो ‘तेनाली रामा ’ इन दिनों अपने रोमांचक मिस्ट्री ट्रैक के कारण दर्शकों को खूब पसंद किया जा रहा है। जहां शो में बुद्धिमत्ता और हास्य का मेल देखने को मिलता है, वहीं यह दर्शकों को एक जांचपूर्ण यात्रा पर भी ले जाता है ,जहां तेनाली रामा (कृष्णा भारद्वाज), लक्ष्मणप्पा (कुनाल करण कपूर) और तेज दिमाग वाले कोतवाल (निखिल आर्य) मिलकर पुराने जमाने की चतुराई और तर्कशक्ति से जटिल मामलों को सुलझाते हैं।लेकिन यदि कैमरे के पीछे झांकें, तो वहां का नज़ारा बिल्कुल अलग है ।हंसी-ठिठोली, मस्ती भरे पल और एक ऐसी तिकड़ी जो सेट पर मस्ती की जान बन चुकी है। यह तिकड़ी सेट पर गहराई से जांच करते अपने किरदारों के विपरीत, पर्दे के पीछे पूरी मस्ती में डूबी रहती है। कभी हल्की-फुल्की शरारतें करना, कभी मीम्स शेयर करना, तो कभी खुद की गलतियों पर हंसना, इनका आपसी मेलजोल शूटिंग के माहौल को बेहद मजेदार और सहयोगपूर्ण बनाता है। कृष्णा भारद्वाज ने अपने इस ऑफ-स्क्रीन बॉन्ड के बारे में कहा, “कुनाल और मैं सेट पर पूरी तरह धमाल मचाते हैं।जैसे दो शरारती बच्चे जो हमेशा हंसते रहते हैं, मजाक करते हैं, और सबको चिढ़ाते रहते हैं। हमारा सबसे पसंदीदा निशाना है निखिल आर्य, जो हमारी हंसी के बिना मतलब फूटते ठहाकों से अकसर उलझ जाते हैं, लेकिन हर बार बड़े अच्छे मूड में सब झेलते हैं। जब हम तीनों साथ होते हैं, तो हमारी मस्ती और केमिस्ट्री इतनी जबरदस्त होती है कि हमें सही मायनों में शो के ‘फन मस्किटियर्स’ का खिताब मिल चुका है।” शो ‘तेनाली राम’ हर सोमवार से शनिवार, रात 10 बजे, सिर्फ सोनी सब पर प्रसारित होता है।  

ट्रायल कोर्ट की 1 साल की सजा पर हाई कोर्ट की रोक, 18 साल बाद मिला इंसाफ

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए 18 साल आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया है और उसे बरी किया है। अपने इस फैसले में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने ग्राम पोंडी, पाटन, जबलपुर निवासी लोक सिंह को 18 वर्ष बाद दोषमुक्त करार दे दिया। उसके विरुद्ध ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित आदेश अनुचित पाकर निरस्त कर दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने उसे 18 साल पहले 1 वर्ष के कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना राशि जमा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की व्यवस्था दी गई थी। इस सजा के विरुद्ध पहले सेशल कोर्ट में अपील की गई, जहां ट्रायल कोर्ट का आदेश यथावत रखा गया। इसीलिए हाई कोर्ट में रिवीजन दायर की गई।   यह था मामला हाई कोर्ट में लोक सिंह का पक्ष अधिवक्ता प्रमेंद्र सेन व प्रवीण सेन ने रखा। उन्होंने दलील दी कि 16 फरवरी, 2004 को बेलखेड़ा पुलिस ने 54 लीटर देसी शराब जब्त करने का अपराध पंजीबद्ध कर लिया था। उसके विरुद्ध आबकारी अधिनियम अंतर्गत मामला बनाया गया था। 28 अगस्त, 2006 को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, पाटन की कोर्ट ने सजा सुना दी। जिसके विरुद्ध 2007 में हाई कोर्ट की शरण ले ली गई थी।   दरअसल, यह मामला दुर्भावनावश फंसाए जाने से संबंधित था। अवैध शराब से लोक सिंह का कोई सरोकार नहीं था। इसीलिए वह अपनी बेगुनाही साबित करने जमानत हासिल करने के बाद से लंबे समय तक इंसाफ की लड़ाई लड़ता रहा। हालांकि अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और 18 साल बाद लोक सिंह को दोष मुक्त कर दिया गया है।