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कैंसर जांच में बड़ी सफलता: IIT दिल्ली ने 60 रुपए में पैंक्रियाज कैंसर टेस्ट का दावा किया

अंबाला. बब्याल के रहने वाले एवं आइआइटी दिल्ली के छात्र शिवम ने शोध कर पैंक्रियाज कैंसर की बीमारी की जांच के लिए उपकरण यूरोस्मार्ट बनाया है। शिवम का दावा है कि इससे यूरिन (पेशाब) के सैंपल से शरीर में पैंक्रियाज कैंसर का पता चल जाएगा। कुछ लोगों पर इसका टेस्ट भी किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिवम ने इस उपकरण के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इससे सिर्फ 60 रुपये में जांच हो सकेगी। उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना होगा। वर्ष 2024 में शिवम कुमार बग्गन, कुशाग्र जैन, खालिद भट्ट और प्रो. नवीन की टीम ने शोध शुरू किया था। यह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। ऐसे काम करता उपकरण शिवम ने बताया कि यूरोस्मार्ट उपकरण सेंसर पर काम करता है। इस में पोटेंशियो स्टेट सेंसर लगाया है, जो मोबाइल से जुड़ा होता है। मरीज का यूरिन सैंपल इस उपकरण में लिया जाता है। इस पर एक बटन लगाया गया है, जिसे दबाना होता और यूरिन की एक बूंद सेंसर पर पहुंच जाती है। इसके बाद सारा काम सेंसर करता है। करीब 15 मिनट का समय लगता है और रिपोर्ट मोबाइल पर आ जाती है और स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को पैंक्रियाज कैंसर है या नहीं। यह जांच ब्लड से होती है, जिसमें काफी समय लगता है। जिसे पैंक्रियाज कैंसर होगा, उसका शरीर बायोमार्कर सीए 19.9 रिलीज करता है। यह ब्लड और यूरिन दोनों में पाया जाता है। अभी इसका ट्रायल प्रथम चरण में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह उपकरण बाजार में उपलब्ध होगा। यह है पैंक्रियाज कैंसर पैंक्रियाज कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो पैंक्रियाज में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होता और देरी से पता चलने के कारण यह और घातक हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह का कैंसर काफी घातक हो जाता है, जबकि उपचार काफी महंगा है। आइआइटी दिल्ली के प्रो. एवं शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि सुबह का पहला यूरिन जांच के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें इन्फार्मेशन अधिक होती है। इस टेस्ट में यदि रीडिंग 37 यूनिट प्रति एमएल से नीचे आती है तो पैंक्रियाज कैंसर नहीं मान सकते, जबकि इससे अधिक यह जितना अधिक जाएगा उतना कैंसर माना जाता है। अब इस उपकरण को लेकर एम्स में जा रहे हैं, जहां आगामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपचार की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता: डॉ. यशपाल कैंसर विशेषज्ञ एवं अटल कैंसर केयर सेंटर के निदेशक डा. यशपाल वर्मा का कहना है कि सीए 19-9 एक गैर-विशिष्ट परीक्षण है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे एक स्वतंत्र नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग करने के बजाय, उपचार की निगरानी और पुनरावृत्ति का पता लगाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। पित्त की पथरी और अग्नाशयशोथ जैसी सामान्य स्थितियों में भी इसका स्तर अधिक हो सकता है।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर  प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं महान  शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर आज लोक भवन में  राज्यपाल  रमेन डेका ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।                  इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और को सुदृढ़ करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके विचार और आदर्श आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कुणाल शाह बन सकते हैं WhatsApp के नए ग्लोबल CEO, मेटा में बड़ा बदलाव

दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप का सीईओ भारतीय होगा. वॉट्सऐप के मौजूदा CEO Will Cathcart अब की जगह क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह लेंगे. Meta इन्हें वॉट्सऐप का ग्लोबल सीईओ बना रही है. दिलचस्प ये है कि वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा कुणाल शाह की कंपनी क्रेड में लगभग 1 बिलियन डॉलर्स निवेश किया है. ये भारतीय रुपये में 900 करोड़ रुपये होते हैं. CRED एक फिनटेक ऐप है और इसे शुरुआत में कंपनी ने क्रेडिट कार्ड के बिल पेमेंट सल्यूशन के तौर पर पेश किया था. धीरे धीरे इस ऐप में कई सर्विसेज जुड़ीं और अब इस ऐप के जरिए पेमेंट से लेकर लोन तक मिल सकता है. कंपनी के प्रोडक्ट हेड क्रिस कॉक्स ने एक नोट में लिखा है. आप पूरा नोट पढ़ सकते हैं. कुछ जरूरी जानकारी शेयर करनी है. सात साल तक वॉट्सऐप को लीड करने के बाद विल कैथकार्ट ने फैसला किया है कि अब वह इस रोल से पीछे हटेंगे और जिम्मेदारी किसी नए लीडर को देंगे. इस बदलाव के दौरान वह Meta के साथ जुड़े रहेंगे और आगे की जानकारी हम ट्रांजिशन के बाद शेयर करेंगे. विल कैथकार्ट ने वॉट्सऐप को एक बहुत बड़े बदलाव और ग्रोथ के दौर से गुजरते हुए लीड किया है. उन्होंने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाली मैसेजिंग को 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया, जिसमें अमेरिका के 10 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हैं. इसके साथ ही वॉट्सऐप का बिजनेस भी कई अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचा. उन्होंने दुनिया भर में लोगों के प्राइवेट बातचीत के राइट को सेफगार्ड किया. कई सरकारों का विरोध किया जो बैकडोर एक्सेस चाहते थे. स्पायवेयर कंपनियों के कई हमलों को रोका और NSO ग्रुप को कोर्ट में हराया. विल हमेशा यूजर्स की प्राइवेसी के लिए खड़े रहे हैं और उनके शानदार काम के लिए हम उनके आभारी हैं. मुझे खुशी है कि हम कुणाल शाह को वॉट्सऐप के नए लीडर के रूप में स्वागत कर रहे हैं. जब विल ने अपना फैसला किया, तो हमने ऐसे लीडर की तलाश शुरू की जो वॉट्सऐप की ग्लोबल क्षमता को समझता हो, AI से आने वाले बदलावों को संभाल सके और दुनिया की सबसे बड़ी कम्युनिकेशन सर्विस को लीड करने की क्षमता रखता हो. कुणाल इस भूमिका के लिए सबसे सही विकल्प बनकर सामने आए. वह एक सफल बिजनेसमैन हैं और भारत के सबसे सम्मानित बिजनेस लीडर्स में गिने जाते हैं. हमने अलग से CRED में भी निवेश किया है, जो भारत की एक फिनटेक कंपनी है और जहां कुणाल शाह अभी फाउंडर और CEO हैं. यह निवेश भी इस बदलाव को आसान बनाने का हिस्सा है. कुणाल का पहला दिन आज है. 25 जून को होने वाली वॉट्सऐप की मीटिंग में हम उन्हें पूरी टीम से मिलवाएंगे और विल को धन्यवाद देंगे, जब वह यह जिम्मेदारी आगे बढ़ाएंगे. Meta CEO मार्क जकरबर्ग ने क्या कहा? Mark Zuckerberg ने कहा कि विल कैथकार्ट ने 7 साल तक वॉट्सऐप को लीड करने के बाद अब अपनी भूमिका छोड़ने का फैसला किया है. विल मेटा के सबसे अहम और असरदार लीडर्स में से एक रहे हैं. उनके नेतृत्व में वॉट्सऐप 3 अरब से ज्यादा लोगों तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने में बड़ा रोल निभाया. मार्क जकरबर्ग ने कहा कि वह विल के काम और योगदान के लिए बेहद आभारी हैं. अब विल मेटा के अंदर ही एक नई भूमिका में जाएंगे, जहां वे नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे. उन्होंने कहा कि आगे भी विल के साथ काम करने को लेकर वह उत्साहित हैं. जकरबर्ग ने यह भी कहा कि कुनाल शाह अब वॉट्सऐप के नए लीडर के तौर पर मेटा से जुड़ेंगे. उन्होंने क्रेड को भारत की बड़ी टेक कंपनियों में से एक बनाया है. उनके पास एक बिल्डर की सोच और ग्लोबल नजरिया है, जो दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग ऐप को चलाने में काम आएगा. जकरबर्ग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कुनाल शाह के साथ मिलकर वॉट्सऐप को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि यह अरबों लोगों और लाखों बिजनेस के लिए सबसे बेहतर प्लेटफॉर्म बना रहे.

नदियों का रास्ता बदलने लगा अवैध खनन, अमरजीत सिंह बोले- SYL विवाद पर हो नए सिरे से अध्ययन

जालंधर  भाखड़ा बांध को लेकर फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि सरकार और प्रशासन को मानसून के मद्देनजर सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए। भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा राज्यों से डैम का पानी लेने की अपील के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इसे अलार्मिंग स्थिति नहीं कहा जा सकता। यह बात जागरण विमर्श में ऑनलाइन शामिल हुए पंजाब सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुलेट ने कही। अमरजीत सिंह ने कहा कि इस समय भाखड़ा बांध का जलस्तर उसकी पूर्ण क्षमता से करीब 115 फीट नीचे है। ऐसे में तत्काल बड़े खतरे की आशंका नहीं है। बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी हालांकि बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए यह जरूरी है कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले नालों, नहरों, नदियों और तटबंधों की सफाई व मरम्मत का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाए। जून के अंत तक संबंधित विभागों से इन कार्यों का अंतिम प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो जाना चाहिए। डैम को अधिक खाली रखने संबंधी सवाल पर दुलेट ने कहा कि बीबीएमबी की भूमिका केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है। उसका प्रमुख दायित्व जलविद्युत उत्पादन भी है। ऐसे में डैम को जरूरत से ज्यादा खाली रखना व्यावहारिक नहीं है। यदि भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ का पिघलना अपेक्षा से कम हुआ तो जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसलिए जल प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बीबीएमबी को संभावित परिस्थितियों के बारे में समय रहते राज्य सरकारों को सूचित करना चाहिए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारियां की जा सकें। पूर्व चीफ इंजीनियर ने नदियों में बढ़ती तबाही के पीछे अवैध और अनियंत्रित खनन को भी एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही माइनिंग के कारण कई नदियों ने अपना प्राकृतिक मार्ग बदल लिया है। इससे बाढ़ के दौरान पानी नए क्षेत्रों में फैलता है और नुकसान बढ़ जाता है। साथ ही अत्यधिक खनन से तटबंध कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। एसवाईएल पर नए सिरे से जल उपलब्धता का आकलन हो सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर दुलेट ने कहा कि यह मुद्दा पिछले चार दशकों से चला आ रहा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। एसवाईएल की मूल नीति उस समय बनाई गई थी जब नदियों में पानी का प्रवाह आज की तुलना में काफी अधिक था। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और नदियों में इनफ्लो कम हुआ है। ऐसे में जल उपलब्धता का नए सिरे से वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर आकलन किया जाए तो इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी और समाधान का रास्ता भी आसान हो सकता है।

भीषण आग मामले में SIT जांच शुरू, चार लोग गिरफ्तार और अधिकारी निलंबित

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड की जांच जे हो गई है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए गठित एसआईटी का गठन किया गया है। मंगलवार को SIT की टीम मौके पर पहुंची जांच शुरू कर दी है। एक-एक चीज का निरीक्षण किया जाएगा। बिल्डिंग के दस्तावेज भी मांगे गए हैं। वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने में जुटी है। दरअसल, सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर देर रात उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान किया। जिसके बाद एसआईटी का गठन किया। इसमें अपर मुख्य सचिव पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृत विभाग अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार हैं। 7 दिन में सीएम सौंपेगी SIT सीएम योगी ने एसआईटी से सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई संभावित लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करेगी। मृतकों के परिजनों के केंद्र से 2 लाख और राज्य से 5 लाख का मिलेगा मुआवजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।

BJP नेता के क्लीनिक पर देर रात हमला, पेट्रोल बम फेंककर मचाई दहशत; शहजाद भट्टी का दावा

बठिंडा. शहर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक डॉक्टर, सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन और भाजपा नेता डॉ. तरसेम गर्ग के क्लीनिक पर सोमवार देर रात पेट्रोल बम से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। हमले में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन परिसर में खड़ी स्कूटी समेत कुछ सामान क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के करीब दो घंटे बाद डॉ. गर्ग की पत्नी को एक धमकी भरा फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को गैंगस्टर शहजाद भट्टी बताते हुए घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। जानकारी के अनुसार, रात करीब 9.40 बजे दो अज्ञात युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर मेला राम रोड स्थित क्लीनिक के बाहर पहुंचे और पेट्रोल बम फेंककर फरार हो गए। घटना के बाद मौके से एक और संदिग्ध पेट्रोल बम जैसी बोतल भी बरामद हुई है। डा. तरसेम गर्ग ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित किया गया। इसके बाद डीआईजी हरजीत सिंह, एसएसपी डा. ज्योति यादव, समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने फोरेंसिक टीम, डाग स्क्वायड और तकनीकी टीमों को जांच में लगाया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमलावर वारदात का वीडियो भी बना रहे थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। धमकी भरे फोन से जांच का दायरा बढ़ा डॉ. गर्ग ने बताया कि आधी रात के आसपास उनकी पत्नी के मोबाइल पर एक काल आई, जिसमें काल करने वाले ने खुद को शहजाद भट्टी बताया और धमकियां दीं। साथ ही घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। इसकी जानकारी तत्काल पुलिस को दे दी गई है। राजनीतिक एंगल पर भी चर्चा, पुलिस ने नहीं की पुष्टि डा. तरसेम गर्ग लंबे समय तक आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। नगर निगम चुनाव के दौरान टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी, जबकि उनकी पत्नी ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस वजह से घटना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी एंगल की पुष्टि नहीं की है।

प्रेमानंद महाराज की सलाह, नदियों में सिक्का डालना नहीं है शास्त्रसम्मत

 भारत समेत दुनिया भर की कई संस्कृतियों में नदियों, कुओं या झरनों में सिक्का डालकर मन्नत या इच्छा मांगने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक नजरिए से तो इसे भगवान के प्रति श्रद्धा और अपनी मनोकामना पूरी करने की इच्छा से जोड़ा जाता है. अगर धार्मिक ग्रंथों की बात करें, तो नदियों में सिक्के डालने की कोई स्पष्ट या अनिवार्य मान्यता नहीं मिलती है. इसे अधिकतर एक व्यक्तिगत विश्वास के रूप में ही देखा जाता है, न कि धार्मिक नियम के रूप में. इसी को लेकर एक भक्त ने मथुरा-वृंदावन के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि क्या महाराज जी पवित्र नदियों में सिक्के डालने चाहिए? नदियों में सिक्के डालने की परंपरा इस पर प्रेमानंद महाराज ने उत्तर दिया कि, 'गंगा जी हो या यमुना जी हो, उनके लिए 1 रुपये का आटा ले लो और फिर उस आटे से छोटी छोटी गोलियां बनाकर नदियों में डाल दो. उससे नदियों में रह रहे जीव जैसे मछली या कछुआ, वह ये सब खा लेंगे. रुपये गंगाजी में डालने से कुछ नहीं होगा, ऐसी कोई शास्त्र आज्ञा नहीं है. ये सब मनमानी आचरण है.' खाने की चीजें करें दान 'लोगों में आजकल अपनी मनमर्जी करना शुरू कर दिया है. सिक्के डालने से कुछ नहीं होता है. उससे हमारी नदियां सिर्फ प्रदूषित हो रही हैं. हमने केसी घाट पर देखा है कि वहां छोटे छोटे लड़के नदियों में चुंबक डालकर सारे सिक्के निकाल लेते हैं. उससे किसी का भला नहीं हो रहा है. जहां ज्यादा यात्रियों का आवागमन होता है, वहां ये लड़के पहुंच जाते हैं.' 'अगर दान में तुम 100 रुपये देना ही चाहते हो तो 100 रुपये देने के बजाय उसका चारा खरीदकर गाय को दे दो या 100 रुपये किसी बीमार आदमी के काम में दे दो या 100 रुपये का भोजन किसी को खिला दो. ऐसा रुपये फेंकने से कुछ हासिल नहीं होगा. इसलिए, आस्था के साथ-साथ विवेक का इस्तेमाल करना भी जरूरी है, ताकि हमारी श्रद्धा का सही और सार्थक उपयोग हो सके.'

IND vs IRE: आयरलैंड ने चुना नया कप्तान, भारत के खिलाफ T20 सीरीज के लिए टीम घोषित

 डबलिन भारत के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टी20 सीरीज के लिए क्रिकेट आयरलैंड ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है. विकेटकीपर-बल्लेबाज लोर्कन टकर को आयरलैंड की टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया गया है. टकर ने पॉल स्टर्लिंग की जगह ली है, जिन्होंने इस साल टी20 वर्ल्ड कप के बाद टीम की कप्तानी छोड़ दी थी।  29 वर्षीय लोर्कन टकर ने 2016 में आयरलैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. टकर अब तक तीनों प्रारूपों को मिलाकर 159 मुकाबले खेल चुके हैं. घरेलू क्रिकेट में लेनस्टर लाइटनिंग की कप्तानी कर चुके टकर इससे पहले भी दो टी20 इंटरनेशनल मैचों में आयरलैंड की कमान संभाल चुके हैं।  इस सीरीज को लेकर लोकर्न टकर ने कहा कि भारतीय टीम टी20 क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम्स में से एक है और उनके खिलाफ खेलना किसी भी टीम के लिए बड़ी चुनौती होती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आयरलैंड की टीम इस सीरीज में वर्ल्ड चैम्पियन भारत को कड़ी टक्कर देगी। तीन खिलाड़ियों को पहली बार मौका भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए आयरलैंड ने तीन नए खिलाड़ियों को शामिल किया है. रूबेन विल्सन, मैथ्यू हॉलार्ड और जय मूंदरा को टी20 टीम में पहली बार जगह मिली है. विल्सन हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेलफास्ट में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में अपना टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं, जबकि हॉलार्ड और मूंदरा ने अभी तक आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेले हैं।  आयरलैंड की टीम को इस सीरीज से पहले इंजरी के चलते बड़े झटके लग चुके हैं. कुल छह खिलाड़ी चोट के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे. पूर्व कप्तान पॉल स्टर्लिंग पिंडली (काफ) की गंभीर चोट से जूझ रहे हैं. तेज गेंदबाज जोश लिटिल को स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ है, जबकि मार्क अडायर रेक्टस मसल इंजरी के चलते बाहर हैं. इसके अलावा कर्टिस कैम्फर हाथ में फ्रैक्चर, बैरी मैकार्थी एसीएल (ACL) इंजरी और जॉर्डन नील कंधे एवं पैर की चोट के कारण टीम का हिस्सा नहीं बन सके।  आयरलैंड का स्क्वॉड: लोर्कन टकर (कप्तान), रॉस अडायर, बेन कैलिट्ज, गैरेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, स्टीफन डोहेनी, मैथ्यू हम्फ्री, गैविन होए, मैथ्यू हॉलार्ड, लियाम मैकार्थी, जय मूंदरा, हैरी टेक्टर, टिम टेक्टर और रूबेन विल्सन।  भारत का आयरलैंड दौरा (जून) • पहला टी20: 26 जून, बेलफास्ट • दूसरा टी20: 28 जून, बेलफास्ट

मॉडल स्कूलों में नौवीं से शुरू होगी डॉक्टर और इंजीनियर बनने की तैयारी

पटना बिहारी प्रतिभा अब उच्च विद्यालयों में ही तराशे जाएंगे। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने अपने प्रतिभावान बच्चों को मैट्रिक के पहले नौवीं कक्षा से ही करियर चुनने का अवसर उपलब्ध कराएगी। सरकार का प्लान है कि स्कूलों में इसके लिए स्पेशल क्लास कराए जाएं ताकि वो (छात्र) डॉक्टर बनना या इंजीनियर, यह तय कर सकेंगे। राज्य सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। जानकरी के मुताबिक, फिलहाल राज्य के मॉडल स्कूलों से इसका प्रारंभिक प्रयोग प्रारंभ होगा। प्रयोग सफल होने पर आगे इसका विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग मॉडल स्कूल को बच्चों की प्रतिभा निखारने का प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है। विभाग ने कक्षा 9वीं से ही इच्छुक बच्चों को मनपसंद करियर चुनने और इसके लिए विशेष अध्ययन की व्यवस्था करने की योजना बनाई है। उन्हें 9वीं से ही मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए सुविधा मिलेगी। उनके लिए न केवल विशेष कक्षाएं चलेंगी, बल्कि हर तरह की शैक्षणिक मदद की जाएगी। सम्राट चौधरी के नए फैसले के तहत वे नियमित वर्ग के बाद मेडिकल या इंजीनियरिंग की तैयारी की बुनियादी पढ़ाई कर सकेंगे। सामान्यत: मैट्रिक के बाद यानी 11वीं में बच्चे तय करते हैं कि उन्हें विज्ञान, कला या फिर वाणिज्य की दिशा में आगे बढ़ना है। अगर विज्ञान का चयन करते हैं तो इसमें भी दो विकल्प गणित या जीव विज्ञान का रहता है। इन दोनों से मेडिकल या इंजीनियरिंग का कॅरियर चुन पाते हैं। अब सरकार ने मॉडल स्कूल के जरिये बच्चों को 9वीं में ही तैयार करने की योजना बनायी है। विभाग के मुताबिक, इस सुविधा से बच्चों को कॅरियर बनाने में काफी मदद मिलेगी। बिहार सरकार ने सात निश्चय-तीन के तहत राज्य के सभी 534 प्रखंडों में एक-एक अत्याधुनिक मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। यह सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से जाना जाएगा। इन स्कूलों में कॉन्वेंट से बेहतर विश्वस्तरीय शिक्षा और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इन उच्च विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई होगी। कक्षा 9 में नामांकन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस संबंध में कहा कि हम मॉडल स्कूल को सही मायने में बेहतर शैक्षणिक केन्द्र बनाना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य है कि बच्चों को वहां न केवल उन्नत शिक्षा और अन्य सारी सुविधा मिले, बल्कि उन्हें बेहतर कॅरियर चुनने में भी मदद मिले। जाहिर है सरकार के इस फैसले से बिहार में छात्रों को बड़ा फायदा पहुंचेगा। छात्र अपने भविष्य को लेकर नए सिरे से तैयारी कर सकते हैं।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को CM साय की श्रद्धांजलि, कहा- वे राष्ट्र की एकता और स्वाभिमान के प्रहरी थे

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद्,भारत के प्रथम उद्योग मंत्री, राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और त्याग भारतीय लोकतंत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतन की अमूल्य धरोहर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही हम राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।