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विकास का मेगा पैकेज: राजनांदगांव में 333 परियोजनाओं का शुभारंभ, सीएम साय ने दी 510 करोड़ की सौगात

रायपुर.  किसानों की समृद्धि, गांवों का विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश में विकास और सुशासन के नए अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव जिले को 510 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की लागत के 333 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने शिवनाथ नदी के मोहारा मेला स्थल से ऑक्सीजन जोन तक सस्पेंशन ब्रिज, ईरा एनीकट निर्माण एवं संरक्षण कार्य, कुमरदा-गेंदाटोला-कल्लूबंजारी मार्ग निर्माण तथा घुमरिया व्यपवर्तन जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव जिले ने फसल चक्र परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। यहां किसानों को पारंपरिक खेती के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषक उन्नति योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और अन्य किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को खेती के लिए आवश्यक खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है, जहां नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज कराकर निर्धारित समय-सीमा में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के माध्यम से आय, जाति, निवास सहित विभिन्न विभागों की 400 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आम नागरिकों को बिजली बिल से दीर्घकालिक राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विकास कार्यों का निर्माण नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप आवास, बिजली, पानी, सड़क और डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि फसल चक्र परिवर्तन एवं जल संरक्षण के लिए किसानों एवं ग्रामवासियों में जागृति लाने के लिए पद्मफूलबासन बाई यादव महिला स्वहसहायता समूह की महिलाओं के साथ अप्रैल-मई की दोपहरी में यात्रा करती रही और एक अद्भुत कार्य किया गया। राजनांदगांव में फसल चक्र परिवर्तन होने से  फसल विविधीकरण के लिए किसान प्रेरित हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन एवं एबीस एक्सपोर्ट के बीच किसानों के सोयाबीन उत्पाद की खरीदी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, कृषि सखी दीदियों, सरपंचों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का सम्मान किया गया और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को मिनी किट वितरित किए गए। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद संतोष पांडे, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अब AI और ड्रोन रखेंगे पक्षियों पर नजर, सुल्तानपुर नेशनल पार्क में बनेगा डिजिटल डेटा बैंक

चंडीगढ़. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए एआई कैमरे  नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। एआई से इन कामों में मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

अब किताबों से आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को मिलेगी AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग

लखनऊ  प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 मंडलों में ड्रीम लैब स्थापित की जा रही हैं। इसके लिए टाटा समूह के प्रतिष्ठान नेल्को के साथ हब और स्पोक माडल पर अनुबंध किया गया है नेल्को की ओर से ड्रीम लैब की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री की आपूर्ति इसी माह कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की योजना वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन लैब का संचालन शुरू करने की है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। ड्रीम लैब ऐसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है, जहां विद्यार्थी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकेंगे। यहां उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), रोबोटिक्स, इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी), कोडिंग, थ्री-डी डिजाइन और इलेक्ट्रानिक उपकरणों के संचालन जैसी उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रयोगशाला केवल किताबों तक सीमित शिक्षा की अवधारणा को बदलकर विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ का अवसर देगी। हब और स्पोक माडल के तहत प्रत्येक मंडल में स्थापित मुख्य ड्रीम लैब (हब) से आसपास के चयनित विद्यालयों (स्पोक) के विद्यार्थी भी जुड़ेंगे और उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे। इससे सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंच सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रीम लैब विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और नवाचार की सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच तकनीकी संसाधनों की दूरी भी कम होगी और वे भविष्य की रोजगारोन्मुखी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

फिरोजाबाद.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनसभा स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर बच्चों और उप्र पुलिस के स्टॉल पर पुलिस कर्मियों से संवाद स्थापित किया। कृषि विभाग, एमएसएमई, आजीविका मिशन, खादी ग्रामोद्योग, फिरोजाबाद-शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग आदि के स्टॉल आदि पर जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर दुलारा-पुचकारा और उनका अन्नप्राशन किया। यहां फिरोजाबाद की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई।  विधायक मनीष ने लगवाया नारा- देखो-देखो शेर आया  मंच संचालिका ने जब फिरोजाबाद विधायक मनीष असीजा को संबोधन के लिए बुलाया तो उन्होंने शीघ्रता से अपनी बात रखी। विधायक असीजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया और जनता से नारा लगवाया। उन्होंने बोला, देखो-देखो कौन आया, जनता ने ‘शेर आया-शेर आया’ के गगनचुंबी नारों से सीएम योगी का स्वागत किया।  सीएम ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया। सीएम के हाथों चेक, चाबी, प्रमाण पत्र, स्वीकृति पत्र आदि पाकर लाभार्थियों के चेहरे खिल उठे।  सीएम के हाथों इन्हें मिली चाबी  प्रदीप कुमार- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी  शशि- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी आलोक प्रताप सिंह- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी  मीरा देवी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी पिंकी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी इन्हें मिला चेक  अंकित झा – मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  रानी/डाली- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-6.45 करोड़ का चेक  श्रीनिवास- त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत 12.80 लाख का चेक  ओमकार नाथ ब्रिज- पीएम कुसुम योजना- 2.66 लाख का चेक ।

बिना कोचिंग की पढ़ाई से रचा इतिहास! श्रद्धा पांडेय ने किया BPSC 70वीं परीक्षा टॉप

पटना  बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का फाइनल रिजल्ट आ गया है. इसके बाद से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है.  जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली श्रद्धा पांडेय ने 593 अंक हासिल कर पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस उपलब्धि के बाद उन्हें SDM का पद मिल सकता है. खास बात यह है कि श्रद्धा पहले से ही उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर लखनऊ में तैनात हैं और अब उन्होंने BPSC में टॉप कर एक और बड़ी उपलब्ध हासिल की है।  शनिवार को जारी हुआ रिजल्ट  बिहार लोक सेवा आयोग ने शनिवार को 70वीं CCE का फाइनल रिजल्ट जारी किया. इस परीक्षा में श्रद्धा पांडेय ने कुल 593 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें SDM पद मिल सकता है. श्रद्धा प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली हैं.उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS कैटेगरी से 153वीं रैंक हासिल की थी. पहले ही अटेम्प्ट में यूपी PCS क्वालीफाई करने वाली श्रद्धा ने अब BPSC में भी परचम लहरा दिया।  दूसरे प्रयास में किया टॉप  श्रद्धा पांडेय की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS श्रेणी से 153वीं रैंक हासिल कर पहले ही प्रयास में यूपी PCS परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुईं. अब उन्होंने एक और कमाल कर दिखाया है. दूसरे प्रयास में BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत और तैयारी का एक और उदाहरण पेश किया है।  क्या करते हैं श्रद्धा के पिता?  श्रद्धा के पिता संतोष पांडेय वकील होने के साथ किसान भी हैं,जबकि मां सुनीता पांडेय हाउस वाइफ हैं.  श्रद्धा की शुरुआती पढ़ाई रानीगंज के मनीष मेमोरियल स्कूल से इंटर, संगम इंटरनेशनल स्कूल से और ग्रेजुएशन स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय महाविद्यालय से हुआ. खास बात यह कि श्रद्धा ने कही भी कोचिंग नहीं ली है और पहले ही कामयाबी में उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर निकला तो दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस टॉप कर दिया।  परिवार में खुशी की लहर  श्रद्धा की इस सफलता पर परिवार के लोग बेहद खुश हैं. घर पर मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार व शुभचिंतक लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं. बेटी की इस उपलब्धि पर पिता ने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. उसने कभी कोचिंग की मदद नहीं ली है और हमेशा खुद पर भरोसा रखा. उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. वहीं, गांव के लोगों का भी कहना है कि श्रद्धा की सफलता से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। 

अभिभावकों को राहत! पंजाब में निजी स्कूल हर साल केवल 5% तक बढ़ा पाएंगे फीस

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने स्कूली छात्रों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, पंजाब सरकार ने पंजाब के अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स द्वारा हर साल फीस और फंड के नाम पर की जाने वाली मनमानी वसूली और लूट को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पंजाब सरकार ने अब इस गैर-कानूनी लूट पर रोक लगा दी है और फीस बढ़ाने पर रोक लगा दी है। अब पंजाब में कोई भी प्राइवेट या बिना मदद वाला एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन हर साल सिर्फ 5 प्रतिशत (5%) ही फीस बढ़ा सकेगा, इससे ज़्यादा फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा अगर पिछले 36 महीनों में यदि किसी स्कूल ने फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है तो उसे तुरन्त अभिभावकों को पैसे लौटाने होंगे। ये फैसला और नियम पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, CBSE, ICSE और इंटरनेशनल बोर्ड सभी पर लागू होगा। फीस बढ़ाने से पहले करना होगा आवेदन पंजाब सरकार का कहना है कि, अगर किसी स्कूल को 5 प्रतिशत फीस बढ़ानी है तो उसके लिए कमेटी बनाई गई है। फीस बढ़ाने के लिए स्कूलों को 6 महीने पहले आवेदन करना होगा। यही नहीं स्कूलों अपना फाइनेंशियल ऑडिट करना होगा और बताना होगा आखिर फीस क्यों बढ़ाई गई है।  नियम तोड़े तो होगा जुर्माना पंजाब सरकार के आदेशों के मुताबिक नियम तोड़ने पर 5 कक्षा तक फीस बढ़ाने की मनमानी करने पर पहली बार 50 हजार और दूसरी बार 1 लाख रुपए जुर्मान, 8वीं कक्षा तक फीस बढ़ाने पर पहली बार एक लाख रुपए और दूसरी 3 लाख रुपए जुर्मान होगा, 12वीं कक्षा तक के लिए पहली बार 2 लाख रुपए और दूसरी बार 5 लाख रुपए जुर्मान होगा। वहीं अगर स्कूलों द्वारा तीसरी बार नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो स्कूल की मान्यता वापस ले ली जाएगी।

महंगे पेट्रोल से परेशान गिग वर्कर्स का बड़ा फैसला, इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर बढ़ाई कमाई

 ग्वालियर पीठ पर भारी – भरकम डिलीवरी बैग, माथे पर पसीने की बूंदें और दिल में पेट्रोल के मीटर को देखकर बढ़ती धडकऩे…। ये आज के देशभर की सड़कों का कड़वा सच है। वहीं, बात करें मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तो शहर में अचलेश्वर मंदिर की चौखट से लेकर महाराज बाड़े की तंग और व्यस्त गलियों तक जो युवा शहर की रफ्तार बने हुए थे, उनके बजट को भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हिलाकर रख दिया है। आलम ये है कि, कमाई 'सेंटीमीटर' में सिमटती चली जा रही है और पेट्रोल के खर्च 'किलोमीटर' की रफ्तार से भागते चले जा रहा है, लेकिन ग्वालियर के बड़ी आबादी के युवाओं ने भी हार मानने के बजाय एक 'स्मार्ट' ऑप्शन खोज निकाला है। ईंधन की इस बेलगाम बढ़ती आग से बचने के लिए शहर के करीब 60 फीसदी गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को 'बाय – बाय' कह दिया है और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की राह थाम ली है। जुगाड़ और स्मार्ट वर्क का नया फॉर्मूला ग्वालियर की इस गिग इकोनॉमी का पूरा गणित ही बदलकर रख दिया है। शहर में 750 से अधिक गिग वर्कर्स एक्टिव हैं, जो रोजाना डिलिवरी पहुंचाते हुए 50 से 80 किलो मीटर तक की यात्रा शहर के भीतर ही तय कर लेते हैं। दिनभर में 7 से 8 ऑडर्स निपटाने और प्रति ऑर्डर 50 से 100 रुपए कमाने वाले इन युवाओं के लिए पेट्रोल का खर्च एक गहरा आर्थिक घाव बन रहा था। ऐसे में उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए हैं। बाइक को कहा अलविदा, ई-स्कूटर का स्वागत कई युवाओं ने अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक बेच दी और बची – खुची जमा पूंजी से डाउन पेमेंट देकर नया ई-स्कूटर घर ले आए। किराए की सवारी का सहारा जो युवा नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, वे अब किराए की ई – बाइक लेकर रोजाना की पेट्रोल की मार से खुद को बचा रहे हैं। लंबी दूरी को सीधे 'नो' अब आंख मूंदकर ऑडर्स नहीं उठाए जा रहे। युवाओं ने 'फिल्टरिंग' शुरू कर दी है। लंबी दूरी के ऑडर्स को छोड़कर कम दूरी वाले ट्रिप्स से ईंधन और समय का संतुलन बिठाया जा रहा है। रोजगार का बढ़ता ग्राफ और चुनौती… रोजगार कार्यालय के उप संचालक (रोजगार) पवन कुमार भिवटे कहते हैं कि, ग्वालियर में गिग वर्कर्स का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक सिंगल रोजगार मेले से ही कंपनियों को 20 – 25 युवा मिल जाते हैं और सालभर में 200 से ज्यादा युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। चूंकि, इनका पूरा काम दोपहिया वाहन पर ही टिका है, इसलिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर रहा है। पेट्रोल की टंकी जेब खाली कर रही थी शहर के एक गिग वर्कर श्याम कुमार ने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि, पहले बाइक से ही दिनभर भागदौड़ होती थी, लेकिन जब पेट्रोल के दाम बजट से बाहर होने लगे तो ईवी ही एकमात्र रास्ता बचा। मैं रोजाना करीब 8 पार्सल डिलीवर करता हूं और हाल ही में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट हुआ हूं, जिससे अब कुछ बचत हो पाती है।

महिला स्व-सहायता समूहों की अनूठी पहल, डिप्टी सीएम अरुण साव को भेंट किया गया विशेष चावल

रायपुर.  गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब राज्य स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को जिले का प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल भेंट किया। यह चावल अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जैविक विधि से तैयार किया गया है। इस अवसर पर उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री को जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका संवर्धन गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक एवं विशिष्ट कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद न केवल गुणवत्ता और शुद्धता के लिए पहचान बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय कृषि परंपराओं को भी संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ समूहों द्वारा उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं। साव ने जिले में संचालित इस अभिनव गतिविधि की प्रशंसा करते हुए महिला स्व-सहायता समूहों और जिला प्रशासन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल आज ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों के संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि जिले की विशिष्ट पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, सपा-बसपा-कांग्रेस पर विकास और कानून व्यवस्था को लेकर निशाना

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। टूंडला के उसायनी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस दौरान उनके निशाने पर विपक्ष रहा। सपा-बसपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी रामनवमी का तो विरोध करती ही थी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का भी विरोध करती थी। कांवड यात्रा नहीं होने देती थी। गरीब को राशन नहीं मिलता था। आयुष्मान कार्ड,शौचाल, एलपीजी सिलेंडर की भी सुविधा नहीं थी। तब बिजली भी नहीं थी, क्योंकि सपा, कांग्रेस और बसपा के लोग अंधेरे में रहने के आदी थे। अंधेरे में ही इनकी डकैती कुशलतापूर्ण पड़ जाती थी। इसलिए चाहते ही नहीं थे बिजली आए। सपा-बसपा और कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी ने सपा को घेरते हुए कहा कि उनके एजेंडे में विकास नहीं है। उसका काम लोगों को बांटना, सामाजिक एकता को कमजोर करना, गुंडागर्दी को बढ़ावा देना और विकास योजनाओं में रोड़ा अटकाना रहा है। भाजपा सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाएं दे रही है, जबकि समाजवादी पार्टी के समय 'वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया' की स्थिति थी। हर जिले में एक चिन्हित माफिया अराजकता फैलाता था, जमीनों पर कब्जा करता था और व्यापारियों से वसूली करता था। अब यूपी में सब चंगा है- सीएम योगी उन्होने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया, गुंडागर्दी और उपद्रव से मुक्त हो चुका है। प्रदेश में अब न कर्फ्यू लगता है और न दंगे होते हैं। अब यूपी में सब चंगा है और जब सब चंगा होता है तो उपद्रव नहीं, उत्सव होते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले रामनवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समेत अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी और गरीबों को राशन, आवास, शौचालय, आयुष्मान योजना तथा गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता था। सरकार की गिनाईं उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा 65 लाख परिवारों को आवास, करीब दो करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन और डेढ़ करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि 16 लाख किसानों के निजी ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ किए गए हैं। किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड, खरीद नीति और किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है। हाल ही में किसान सम्मान निधि की 4300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी गई है।

52 गांवों की समस्याओं को लेकर आदिवासियों और कांग्रेस का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोग

धमतरी. जिले के आदिवासी अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सोमवार को फूट पड़ा। लगभग 52 गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया और कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन और शासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए गए हैं। धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है। जानकारी के अनुसार, आदिवासी ग्रामीण बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से धमतरी पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने शोभाराम देवांगन चौक के पास एकत्र होकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने तथा समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट घेराव के लिए आगे बढ़ गए। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। अनुमान है कि प्रदर्शन में 500 से 2000 तक ग्रामीण शामिल है। बड़ी संख्या में आदिवासियों के जुटने को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई। वहीं, प्रदर्शनकारी ग्रामीण कलेक्टर से सीधे मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनेगा और समाधान का भरोसा नहीं देगा, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जिससे जिले में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।