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शिक्षकों को राहत: चाइल्ड केयर लीव पर DC की अनुमति की बाध्यता खत्म

चंडीगढ़. शिक्षा विभाग में अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) के लिए उपायुक्तों से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। शिक्षक संगठनों के विरोध के चलते शिक्षा विभाग ने नौ मार्च को जारी किया गया आदेश वापस ले लिया है, जिसमें बाल देखभाल अवकाश के लिए जिला उपायुक्त की अनुशंसा अनिवार्य की गई थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जितेंद्र कुमार ने सोमवार को पत्र जारी कर सभी उपायुक्तों और जिला शिक्षा अधिकारियों सहित सभी संबंधित अधिकारियों को नए फैसले से अवगत कराते हुए निर्देशों का पालन करने को कहा है। सीसीएल के लिए उपायुक्तों की अनुशंसा समाप्त किए जाने से अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के आवेदन पर स्वीकृति मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। सीसीएल से संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश को वापस लिए जाने का स्वागत करते हुए हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि विगत 15 जून को उन्होंने शिक्षा महानिदेशक के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया था। सीसीएल फाइलों को उपायुक्त के माध्यम से भेजने संबंधी अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब उम्मीद है कि जल्द ही स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) से प्रिंसिपल पदोन्नति (आरओएच) के मामले भी निपटाए जाएंगे। शिक्षा महानिदेशक की ओर से मेवात क्षेत्र के पीजीटी से प्रिंसिपल पदोन्नति संबंधी फाइल पर भी तेजी दिखाई गई है। इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक की वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए गठित समिति को भी निदेशक ने मंजूरी प्रदान कर दी है। समिति को तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जा सके। यात्रा रियायत भत्ता (टीए) और महंगाई भत्ता (डीए) को वेतन की तर्ज पर नियमित रूप से वितरित करने के प्रस्ताव को अनुमति के लिए वित्त विभाग के समक्ष भेजा गया है।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में अति पिछड़ा सम्मेलन, सीएम ने विपक्ष पर साधा निशाना

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अति पिछड़ा महासम्मेलन के मंच से पूर्व सीएम लालू यादव और रबड़ी देवी पर बड़ा हमला किया है। कहा है कि उनकी सुरक्षा में डेढ़ सौ पुलिस कर्मी आज भी तैनात हैं फिर भी सुरक्षा में कटौती की बात करते हैं। यह भी कहा है कि पटना से लेकर गोपालगंज और दिल्ली तक उनके कितने मकान हैं इसकी गिनती नहीं है। फिर भी परिवार के सभी लोगों को अलग-अलग बंगला चाहिए। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की ओर से अतिपिछड़ा समाज के सम्मेलन होगा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों का अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के शीर्ष नेता शामिल हुए। मंच से सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष खासकर लालू परिवार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों इनके बंगले और सुरक्षा का मामला चर्चा में है। सबको पता होना चाहिए कि आज भी करीब डेढ़ सौ पुलिस कर्मी उनके आवास के बाहर तैनात हैं। अब पूरे बिहार की पुलिस इनकी सुरक्षा में तैनात कर दें तो अति पिछड़ा समाज की सुरक्षा कौन करेगा। उनको बुलेटप्रूफ गाड़ी और जरूरत के मुताबिक पुलिस बल तैनात है। अब और कितना चाहिए। सीएम ने कहा कि लालू परिवार सरकारी बंगला छोड़ने को तैयार नहीं है। अब माताजी, बेटा, बेटी सब को सेपरेट बंगला चाहिए। इनके पास अपना कितना मकान है इसकी गिनती नहीं है। माता और पुत्रों को सरकारी बंगला मिला है। इनका महुआबाग में बड़ा सा मकान है। कौटिल्य नगर में पांच बंगलों को मिलाकर एक मकान है। राजाबाजार में एक अलग घर। गोपालगंज और दिल्ली में कब्जा कर लिए हैं। अब और कितना बंगला चाहिए। सीएम ने राजद प्रमुख के शासन काल का इतिहास निकाला जा रहा है। सबका पूरा हिसाब किया जाएगा। सीएम ने कहा कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना हमारा पहला लक्ष्य है। अपराध के मसले पर कोई समझौता नहीं होगा। जब तक मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हूं त अति पिछड़ों का कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता। जरूरत होगी तो हम इस समाज के लिए खून भी देंगे। अपराध के खिलाफ हमारा ऑपरेशन आज भी जारी है। नीट परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को जेल भेजा गया है। विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद ने देश को लूटा है। कर्पूरी ठाकुर के नाम पर राजनीति की लेकिन उनको सम्मान मोदी सरकार ने दिया। अतिपिछड़ा समाज की ओर से भाजपा के केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद कुमार चंद्रवंशी हैं। थोड़ी देर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी आयेंगे। भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं का आगमन शुरू है। समारोह में अतिपिछड़ा समाज के विधायकों का सम्मान किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह सहित अन्य नेता पहुंचे। समारोह में सीएम को भाषण देने के लिए पोडियम विशेष पोडियम बनवाया गया। सीएम की सुरक्षा में लगे जवानों की देखरेख में इसे तैयार किया गया। बिहार में ऐसा पहली बार हो रहा है जब सीएम के सुरक्षाकर्मी अपनी देखरेख में पोडियम बनवाया गया।

निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता से करें मॉनिटरिंग – शंगीता आर

रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने नगरीय निकायों के कार्यों की मॉनिटरिंग व समन्वय के लिए जिलेवार नियुक्त नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर उनके कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आयोजित बैठक में सभी नोडल अधिकारियों को नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता एवं गंभीरता से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की समस्याओं का हल निकालकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में मैदानी निरीक्षण के दौरान वहां की जरूरतों और व्यवस्थाओं का आकलन भी करने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव शंगीता आर. ने बैठक में नोडल अधिकारियों से उनके नगरीय निकायों के भ्रमण और बैठकों का फीडबैक लेकर निकायों में कार्यों की वस्तुस्थिति जानी। उन्होंने कहा कि निकायों में कार्यों के निरीक्षण के लिए पूरी तैयारी से जाएं। विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में कितनी राशि जारी की गई है, इसकी भी जानकारी रखें। उन्होंने निकायों में प्रगतिरत निर्माण कार्यों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी हर महीने समीक्षा करने के निर्देश दिए। शंगीता आर. ने नोडल अधिकारियों को आबंटित जिले के आय-व्यय की स्थिति पर भी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो निकाय खुद की आय से अपनी सभी व्यवस्थाएं कर सकते हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने निकायों में लक्ष्य निर्धारित कर वार्डवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को सेचुरेट करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, उप सचिव भागवत जायसवाल, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा भी बैठक में मौजूद थे। शहरी विकास योजनाओं की निगरानी को और सशक्त करने नोडल अधिकारी कर रहे स्थल निरीक्षण, अब तक 103 निकायों का निरीक्षण कर चुके नोडल अधिकारी  नगरीय प्रशासन विभाग ने विकास कार्यों और योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने सभी राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आबंटित जिलों के नगरीय निकायों के नियमित भ्रमण के निर्देश दिए हैं। विगत 6 जून को एक साथ सभी नोडल अधिकारियों ने अपने जिलों में पहुंचकर योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया। विभाग की इस पहल का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, समस्याओं का त्वरित समाधान तथा मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अलग-अलग जिलों के नोडल अधिकारी अब तक राज्य के 194 नगरीय निकायों में से 103 में मैदानी निरीक्षण के लिए जा चुके हैं।

32348 मेगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि: योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।  मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। चाहे तूफानी रात हो, भारी बारिश हो या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपकेंद्रों का निरीक्षण भी लगातार किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।  रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही चेयरमैन डॉ. गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, ADC के नए पद सृजित; जनता को मिलेगा सीधा फायदा

चंडीगढ़. पंजाब वासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लोगों की लंबे समय से उठाई गई मांग पूरी हो गई है। जानकारी के अनुसार पंजाब में नई ADC पोस्ट को बनाई दी गई है। लोगों द्वारा मांग की गई थी कि दसूहा और मुकेरियां सब-डिवीजन के लिए ADC का पद बनाया जाए क्योंकि इन इलाकों के लोगों को अपने कामों के लिए दूर जाना पड़ता है। इसके बाद अब दसूहा, मुकेरियां, टांडा, तलवाड़ा, हाजीपुर और गढ़दीवाला इलाकों में नई एडीसी पोस्ट को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही फगवाड़ा के लोगों को भी अपने काम के लिए कपूरथला जाना पड़ता था। यहां के लोगों को राहत देने के लिए फगवाड़ा में भी एडीसी का एक नया पद बनाने को मंजूरी दी गई है। 

स्टंटबाज की दबंगई! पुलिस वाहन में बनाई रील, लिखा- ‘आज जेल, कल बेल…’

दुर्ग. दुर्ग जिले में अपराधी पुलिस की नाक के नीचे कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं। भिलाई की सड़क पर खतरनाक बाइक स्टंट करने वाले आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी उसने पुलिस वाहन में बैठकर वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर कर दिया। दरअसल, सुपेला पुलिस ने आरोपी युवराज सोनी को लापरवाहीपूर्वक स्टंट करते हुए वाहन चलाने और लोगों की जान जोखिम में डालने के आरोप में पकड़ा था। आरोपी का यह वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कार्रवाई की। इस मामले में सुपेला पुलिस ने शनिवार शाम प्रेस नोट जारी कर बताया कि सड़क पर खतरनाक स्टंट करने वाले युवक युवराज सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। आरोपी पर अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी युवक ने एक और वीडियो बना डाला, जिसमें वह पुलिस वाहन के अंदर बैठा हुआ और हाथ में लगी हथकड़ी दिखाते हुए रील बनाता नजर आ रहा है। वीडियो पोस्ट कर उसने कैप्शन में लिखा “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल”। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं आरोपी वीडियो में पुलिस विभाग को चिढ़ाते हुए हंसता और विक्ट्री साइन दिखाता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के करीब 3 घंटे बाद उसके इंस्टाग्राम अकाउंट से यह स्टोरी अपलोड की गई।

योगी सरकार के तहत यूपी बना देश में सबसे अधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य

लखनऊ  कई अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दर्जनों उपक्रम में नंबर एक बने उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रविवार रात को बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। तूफानी भरी रात हो या फिर भारी बारिश या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारी भी उपकेंद्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।  

प्रसूताओं पर संकट के बीच मंत्री गजेंद्र सिंह की टिप्पणी, कहा- दर्द से बचने की चाह से बढ़ रहे सीजेरियन

जोधपुर  राजस्थान में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में सामने आए मामलों पर उन्होंने कहा कि सभी मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत बिल्कुल ठीक है, जबकि एक महिला को बेहतर उपचार के लिए एम्स रेफर किया गया है. चिकित्सा मंत्री ने सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मंत्री के इस बयान को लेकर एक बार फिर बवाल मच गया है।  चिकित्सा मंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर बड़े अस्पतालों में पहुंचते हैं. लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान धक्के खाते हुए आखिरकार मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं, ऐसे में हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं. उन्होंने दावा किया कि मातृ मृत्यु दर मात्र एक प्रतिशत है. मंत्री ने कहा कि कोटा मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में गड़बड़ी मिलने के बाद निजी खरीद 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि जोधपुर में कोई महिला गंभीर नहीं है और अब तक की जांच में संक्रमण बड़ा कारण सामने नहीं आया है. किडनी फेलियर के कारणों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।  रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत गंभीर इधर, जोधपुर के पावटा स्थित सेटेलाइट अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, एमडीएम अस्पताल में रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य छह महिलाओं का उपचार सेटेलाइट अस्पताल में जारी है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।  प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका है  एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा के अनुसार, आठ महिलाओं में से एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ था, जबकि दूसरी महिला डायबिटीज की मरीज है और उसका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था. प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है. संक्रमण के संदेह के चलते अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को फिलहाल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है तथा प्रभावित महिलाओं के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की गई है।  जिला कलेक्टर ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, सेटेलाइट अस्पताल के पीएमओ कुलबीर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई और अब तक की जांच रिपोर्ट तथा उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।      कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।     प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी… पूर्व सीएम गहलोत ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो महिलाओं की हालत गंभीर होने की खबर बेहद चिंताजनक है. प्रसूताओं में सेप्टीसीमिया और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आना चिकित्सा व्यवस्था की खामियों और संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है. सबसे गंभीर बात यह है कि एक ओर शहर में सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी दौरों की तैयारियों पर जोर दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर माताओं-बहनों की जान जोखिम में पड़ रही थी. ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पावटा सेटेलाइट अस्पताल में प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के मामले पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. मामले की जांच जारी है तथा सरकार पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाया जाएगा।  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. भगवान भरोसे चल रही है प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने नेता टीकाराम जुली का कहना है कि कोटा में प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में चिकित्सीय लापरवाही और अब जोधपुर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है और माताओं-बहनों की जान जोखिम में है. कांग्रेस ने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपनी विफलताओं को छिपाने में लगी है. पार्टी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अस्पतालों में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं, दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और प्रदेश की जनता को सुरक्षित व भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कब मिलेंगी।  कांग्रेस नेता खाचरियावास ने मंत्री के बयान को बताया महिलाओं का अपमान चिकित्सा मंत्री … Read more

रेलवे अपडेट: तीसरी लाइन कमीशनिंग के चलते दर्जनों ट्रेनों पर असर, यात्रियों को परेशानी

लखनऊ रेलवे गोंडा से गोंडा कचहरी के बीच पांच किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन को कमीशंड करने के लिए अगले माह प्री इंटरलाकिंग और नान इंटरलाकिंग की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस कारण गोंडा रूट होकर चलने वाली कई ट्रेनों को सात से 11 जुलाई तक निरस्त किया जाएगा। वहीं, कई ट्रेनों के रूट बदलेंगे। छह, सात व 10 जुलाई को 15109 छपरा-मथुरा एक्सप्रेस लखनऊ नहीं आएगी। ये ट्रेनें निरस्त होंगी – 22921 -बांद्रा-बलरामपुर एक्सप्रेस -05 जुलाई – 22922 -बलरामपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -07 जुलाई – 15081- गोरखपुर-गोमतीनगर एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15082- गोमतीनगर-गोरखपुर एक्सप्रेस -07 से 11 जुलाई – 15133 -छपरा-आनंद विहार एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15134 -आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15031- गोरखपुर-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15032- लखनऊ जंक्शन-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15070- ऐशबाग-गोरखपुर एक्सप्रेस -सात से 10 जुलाई – 15069- गोरखपुर-ऐशबाग एक्सप्रेस -आठ से 11 जुलाई – 22199- ग्वालियर-बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस-08 जुलाई – 22200- बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15029- गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15030- पुणे -गोरखपुर एक्सप्रेस अयोध्या होकर चलेंगी यह ट्रेनें – 15078- गोमतीनगर-कामाख्या एक्सप्रेस -29 जून – 15904- चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस -28 जून व 08 जुलाई – 12512- तिरुवनंतपुरम-गोरखपुर एक्सप्रेस -28 जून से 07 जुलाई – 15046- ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस 28 जून व 05 जुलाई – 12592- यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस -29 जून व 06 जुलाई – 15134- आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -01 व 04जुलाई – 19409 – साबरमती-थावे एक्सप्रेस -02 जुलाई – 22534- यशवंतपुर-गोरखपुर सुपरफास्ट -01 जुलाई – 19623- मदार जंक्शन-दरभंगा अमृत भारत -03 जुलाई – 12522- एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस -03 जुलाई – 15065- गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15067- गोरखपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12587- गोरखपुर-जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस -06 जुलाई – 12565- बिहार संपर्कक्रांति एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15651- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15066- पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15565- वैशाली एक्सप्रेस – 08 से 10 जुलाई – 12571- गोरखपुर-आनंद विहार एक्सप्रेस-08 व 10 जुलाई – 12572- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस – 09 जुलाई – 14673 शहीद एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15005- गोरखपुर-देहरादून एक्सप्रेस-08 जुलाई – 15652- जम्मूतवी-गुवाहाटी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12596- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15566- वैशाली एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15653- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15204- बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -09 जुलाई – 12555- गोरखधाम एक्सप्रेस -09 जुलाई – 22537- गोरखपुर-एलटीटी कुशीनगर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 11079- एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 14674- शहीद एक्सप्रेस -09 जुलाई वाराणसी शटल समेत दो ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रेलवे प्रशासन ने लखनऊ और वाराणसी रूट सहित दो प्रमुख ट्रेनों में कोचों की स्थायी वृद्धि करने का बड़ा फैसला लिया है। इसमें गाड़ी संख्या 20401/20402वाराणसी-लखनऊ-वाराणसी सुपरफास्ट शटल एक्सप्रेस में 27 जून से कोच बढ़ाए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर को सुगम बनाने के लिए एक वातानुकूलित (एसी) चेयर कार और एक शयनयान (स्लीपर) श्रेणी का कोच स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद ट्रेन की कुल कोच संख्या 20 से बढ़कर 22 हो जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को सीटों के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ेगी। रेलवे ने वाराणसी-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (द्वि-साप्ताहिक और साप्ताहिक) में भी जुलाई की शुरुआत से एक एसी प्रथम श्रेणी और एक एसी 2-टियर कोच की स्थायी वृद्धि करने की घोषणा की है, जिससे इसकी क्षमता भी 22 कोच की हो जाएगी। इससे रेलयात्रियों को राहत मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल PPP मोड में शामिल

 पटना बिहार को आगामी पांच वर्षों के भीतर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूबे के विभिन्न क्षेत्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार लगातार निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिसमें स्वास्थ्य को मुख्य प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है कि सूबे में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का कायाकल्प अब लोक निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इस नीति के तहत बिहार के अलग-अलग जिलों में कुल 33 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का तेजी से विकास किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिलना संभव हो सकेगा। 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल होंगे शामिल इस योजना के तहत चिन्हित किए गए कुल 33 अस्पतालों का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इनमें 17 बिल्कुल नए अस्पताल 'ग्रीन फील्ड' के रूप में विकसित किए जाएंगे, जबकि पहले से ही अलग-अलग चरणों में चल रहे 16 'ब्राउन फील्ड' मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को भी इसी पीपीपी मॉडल में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, नए 'ग्रीन फील्ड' अस्पतालों को 60 साल के लिए और निर्माणाधीन 'ब्राउन फील्ड' अस्पतालों को 30 साल की अवधि के लिए पीपीपी मोड के आधार पर संचालन हेतु निवेशकों को सौंपा जाएगा। इन सभी अस्पतालों के पूर्ण रूप से धरातल पर उतरने के बाद बिहार में कुल सरकारी व पीपीपी संचालित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की संख्या वर्तमान से बढ़कर सीधे 54 हो जाएगी, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता में भी भारी इजाफा होगा। नेपाल और बांग्लादेश के मरीजों के लिए भी बड़ा केंद्र बनेगा बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने इस योजना के दूरगामी राजनैतिक और सामाजिक प्रभावों को साझा करते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस अभूतपूर्व आधारभूत संरचना के विकास से बिहार न केवल उत्तर-पूर्वी भारत, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के लिए भी मुख्य चिकित्सा हब के रूप में उभरेगा। इस योजना के साकार होने से बिहार के आम मरीजों की दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे सुदूर महानगरों के नामचीन अस्पतालों पर से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और हर बीमारी का त्वरित इलाज राज्य के भीतर ही संभव होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में देश और विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों से निवेश के आधिकारिक प्रस्ताव आमंत्रित कर लिए हैं। निवेशकों की सहूलियत, स्थलीय निरीक्षण और विभिन्न विभागों से त्वरित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने एक विशेष नोडल पदाधिकारी भी तैनात कर दिया है ताकि इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी प्रशासनिक देरी के पूरा किया जा सके।