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अब 17 की बजाय नई तारीख से होगी MPPSC मेन्स परीक्षा, 12 जिलों में बनेंगे केंद्र

इंदौर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 और राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख आपस में टकरा रही है। इसके चलते मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने अपनी परीक्षा प्री-पोन कर दी। महज चौबीस घंटे में परीक्षा की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले जहां 17 अगस्त से पेपर होना थे, वे अब 8 अगस्त से आयोजित किए जाएंगे। आयोग ने परीक्षा का नया शेड्यूल पोर्टल पर जारी कर दिया है। यूपीएससी परीक्षा से टकरा रही थी तारीखें जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा को लेकर लगे अंतरिम स्थगन (स्टे) को हटाने के बाद अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली। लंबे इंतजार के बाद आयोग (एमपीपीएससी) ने शुक्रवार को राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025, 17 से 22 अगस्त के बीच रखी थी, लेकिन शनिवार को अभ्यर्थियों ने 21 अगस्त से यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा होना बताया। इसके बाद आयोग ने आनन-फानन में राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख में बदलाव कर दिया है, क्योंकि जिन केंद्रों पर पीएससी की परीक्षा होना है, उन्हीं केंद्रों पर यूपीएससी भी करवाई जाएगी। ऐसे में केंद्रों ने भी दोनों परीक्षाएं एक साथ करवाने में असहमति जताई है। आयोग ने नया शेड्यूल जारी करते हुए 8 से 13 अगस्त के बीच छह पेपर रखे हैं। 3 अगस्त से जारी होंगे एडमिट कार्ड राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी। 25 जून से 15 जुलाई के बीच बिना विलंब शुल्क ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। मध्य प्रदेश के मूल निवासियों को 400 रुपये और अन्य राज्यों के चयनित अभ्यर्थियों को 800 रुपये पंजीयन शुल्क देना होगा। 15 जुलाई के बाद ऑनलाइन आवेदन करने पर अभ्यर्थियों से विलंब शुल्क वसूला जाएगा। जबकि एडमिट कार्ड भी 3 अगस्त से अभ्यर्थी डाउनलोड कर सकेंगे। इन 12 जिलों में होंगे परीक्षा केंद्र आयोग ने परीक्षा के लिए 12 जिलों में परीक्षा केंद्र रखे हैं, जिसमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रतलाम, सतना, सागर, शहडोल, बड़वानी, उज्जैन और बालाघाट शामिल हैं।  

किसानों को उचित मूल्य दिलाने वाली योजना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन की किसान हितैषी एवं नवाचार आधारित भावांतर भुगतान योजना-2025 को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 20 जून 2026 को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, अगस्त क्रांति मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना के मार्गदर्शन में भावांतर योजना-2025 तथा ई-मंडी योजना को एकीकृत डिजिटल ढांचे के अंतर्गत सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह पहल किसानों को मूल्य संरक्षण, त्वरित भुगतान और पारदर्शी कृषि विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भावांतर योजना-2025 के अंतर्गत सोयाबीन की खरीदी पूर्णतः ई-मंडी एप्लीकेशन के माध्यम से की गई। यह देश में पहली बार लागू की गई एक अभिनव व्यवस्था है जिसका उद्देश्य किसानों को बाजार भाव में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में न्यूनतम समर्थन मूल्य और वास्तविक बिक्री दर/मॉडल रेट के बीच के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल की ओर से यह सम्मान प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम के निर्देशन में सहायक संचालक योगेश नागले, गोविंद शर्मा एवं निरंजन सिंह द्वारा ग्रहण किया गया। दोनों एप्लीकेशन एन.आई.सी. भोपाल द्वारा विकसित की गई हैं। पुरस्कार समारोह में अध्यक्ष प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद प्रो. एस. महेंद्र देव, अपर सचिव विधि एवं न्याय मंत्रालय डॉ. मनोज कुमार, संचालक इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनामिक रिलेशंस डॉ. शेखर ऐय्यर, महानिदेशक आरआईएस प्रो. सचिन कुमार शर्मा, तथा अध्यक्ष स्कॉच ग्रुप समीर कोचर सहित कई गणमान्य नागरिक एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की किसान कल्याण और कृषि विपणन सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है और राज्य की डिजिटल कृषि विपणन व्यवस्था की सफलता को रेखांकित करती है।  

भोजपुर मुठभेड़ मामले में रिटायर्ड जज करेंगे जांच, कई पुलिसकर्मी निलंबित

 भोजपुर बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश दिया गया है। सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि घटना के सभी पहलुओं को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सामने लाना जरुरी है। इस मामले में इंस्पेक्टर, दारोगा समेत कई पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी है। बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भरत के एनकाउंटर पर सवाल उठाया है। भरत तिवारी की मौत को पुलिस द्वारा की हत्या का आरोप लगाकर इलाके के लोगों ने गुरुवार को जबरदस्त बवाल काटा। सड़क जाम हटाने और आक्रोशित लोगों को शांत कराने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने बयान जारी कर सीएम के फैसले की सराहना की है। सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने पहले भी कहा था कि बिहार की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। सरकार के फैसले पर बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि सम्राट चौधरी जी की पारदर्शी एवं न्यायोचित कार्यशैली का स्वागत करते हैं। हाई कोर्ट के सेवानिवृत जज के नेतृत्व नेतृत्व में आरा, भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच करवाना यह दर्शाता है कि एनडीए की सरकार कानून व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के प्रति प्रतिबद्ध है। हम अपराधियों को बख्शते नहीं और निर्दोष अधिकारों की रक्षा भी करते हैं। न्यायिक जांच से सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। अगर पुलिस वाले दोषी हैं तो उन पर भी वैसे ही कार्रवाई होगी जैसे किसी अपराधी पर होती है। बुधवार को भरत तिवारी को पुलिस ने एनकाउंटर में गोली मार दी थी जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप लगाया गया कि पुलिस ने सरेंडर के बाद उसे गोली घुटने ऊपर चार गोलियां मारी। दावा किया गया कि पुलिस के कहने पर भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था। उसके बाद फेक एनकाउंटर किया गया। अगले दिन गुरुवार को इसके विरोध में भयंकर बवाल हुआ। सोशल मीडिया भरत तिवारी एनकाउंटर की खबरों से पटा हुआ है। इस मामले में थानेदार समेत दारोगा कई पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। उसके बाद इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे।

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अत्याधुनिक अध्ययन केंद्र : मुख्यमंत्री

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली ग्राम में निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। लगभग 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित हो रहे इस 250 सीटर अत्याधुनिक परिसर के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। नालंदा परिसर युवाओं को अध्ययन, मार्गदर्शन और आत्मविकास के लिए एक आधुनिक एवं प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परिसर जशपुर जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि नालंदा परिसर के निर्माण का प्लिंथ लेवल कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समयावधि में परियोजना को पूर्ण करने के निर्देश दिए। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नालंदा परिसर निर्माणाधीन नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। परिसर में विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। यहां इंडोर एवं आउटडोर स्टडी जोन, ऑक्सी रीडिंग जोन, डिजिटल लाइब्रेरी, वाई-फाई जोन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित 50 हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी। परिसर को पर्यावरण अनुकूल स्वरूप प्रदान करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली विकसित की जाएगी तथा 50 से अधिक देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। युवाओं के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परिसर में यूथ टावर, स्पोर्ट्स कोर्ट, कैफेटेरिया, एटीएम और हेल्थ जोन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त आरएफआईडी आधारित प्रवेश प्रणाली, बायोमेट्रिक पहचान व्यवस्था तथा आधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली जैसी स्मार्ट सुविधाएं इसे एक आधुनिक और तकनीक-सक्षम अध्ययन केंद्र का स्वरूप प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारपूर्ण शैक्षणिक केंद्र युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्षमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

मोगली गर्ल’ एहसास का निधन, 9 साल बाद थम गया संघर्ष का सफर

बहराइच मोगली गर्ल यानी एहसास। अब दुनिया छोड़ गई। नौ साल पहले बंदरों के झुंड से घिरी एक 10 साल की बच्ची को वनकर्मियों ने बचाया था। बंदरों जैसी आवाज, पैर से खाना खाने की आदत और कपड़े न पहनने की शगल ने ही उसको मोगली गर्ल बनाया था। 15 जून को उसकी मौत की खबर पाकर एक बार फिर वर्ष 2017 की तस्वीर लोगों के सामने आ गई, जब वह देश के नामचीन अखबारों की सुर्खियां ही नहीं बनी थी। कतर्निया सेंचुरी के मोतीपुर रेंज के नैनिहा गांव के पास गश्त के दौरान तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरेश कुमार ने एक 10 साल की बच्ची को बंदरों के झुंड के बीच देखा था। वह लड़की नंगी थी, नाखून-बाल बढ़े थे, दोनों हाथ-पैर से चलती थी और बंदरों की तरह चिल्लाती-गुर्राती थी। बंदरों ने उसे बचाने आए ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे झुंड से निकाला। सामान्य जीवन जीने की कला सीख रही मोगली गर्ल का नौ साल बाद जिंदगी का सफर 15 जून को खत्म हो गया। वर्ष 2017 में जंगल से निकली बच्ची मोगली गर्ल शरीर पर खरोंचों के निशान थे।मिहीपुरवा सीएचसी से रेफर कर उसे बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आम लोगों की भाषा नहीं समझती थी मोगली गर्ल तत्कालीन सीएमएस रहे डॉ डीके सिंह ने बताया कि वह न भाषा समझती थी, न थाली में खाना खाती थी, बल्कि जमीन पर फैलाकर बंदरों की तरह उठाकर खाती थी। लिहाजा उसे मोगली गर्ल का नाम मिला था। इलाज करने वाले नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ एसके वर्मा बताते हैं कि पहली बार ऐसा मामला उनके सामने आया था। सारे अंग विकसित थे, लेकिन उसके हाव-भाव पूरी तरह से बंदरों जैसे थे। हालाकि यहां से जाने के बाद उसके भाषा, व्यवहार और शिक्षा पर काम हुआ। धीरे-धीरे उसने बोलना सीखा, कपड़े पहनना सीखा और सामान्य जीवन जीने लगी। लेकिन जब उन्हें भी यह जानकारी मिली कि उस बालिका की मौत हो गई तो वे भी हैरान रह गए। सांस की बीमारी से जूझ रही थी जंगल में मिली लड़की वैसे डॉ अनूप कुमार बताते हैं कि जंगल में वर्षों रहने का असर उसके फेफड़ों पर पड़ा था। जैसा की जानकारी सामने आई है कि लंबे समय से वह सांस की बीमारी से जूझ रही थी। दो दिन पहले लखनऊ में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची को वनकर्मियों ने मौत के मुंह से निकाला था, वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ते-जुड़ते दुनिया छोड़ गई। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ संजय खत्री कहते है कि ऐसी घटनाएं हमेशा समाज में एक नई सीख देती है। एहसास की कहानी मानवता और प्रकृति के रिश्ते का सबसे अनोखा उदाहरण मानी जाएगी।

9 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण: सड़क, विद्युत और ग्रामीण अधोसंरचना को मिलेगी नई मजबूती

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र के 9 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इन विकास कार्यों की कुल लागत 9 करोड़ 65 करोड़ रुपये है, जिसमें 4 कार्यों का भूमिपूजन तथा 5 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सुविधाएं, अवसर और समृद्धि लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, विद्युत, स्वच्छता और ग्रामीण अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान और युवाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर कार्य कर रही है। विकास के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 6.74 करोड़ रुपये के 4 विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन मुख्यमंत्री साय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत कुल 6 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत वाले 4 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 31.68 लाख रुपये की लागत से फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट तथा 10 लाख रुपये की लागत से ग्राम पंचायत पगुराबहार के बेहराटोली में भजनो घर के पास पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 220.82 लाख रुपये की लागत से ग्राम पंचायत चराईडांड़ के मलेरिया बस्ती से राष्ट्रीय राजमार्ग-43 तक 2 किलोमीटर पहुंच मार्ग निर्माण तथा 412.48 लाख रुपये की लागत से घासीमुंडा से कोरवाटोली (ग्राम पंचायत कोहपानी) तक 3.10 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों की आवागमन सुविधा बेहतर होगी तथा सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। 2.90 करोड़ रुपये के 5 विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री ने कुल 2 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 5 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित चार कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें ग्राम पंचायत जोकबहला के हरिजन बस्ती पहुंच मार्ग पर आरसीसी पुलिया निर्माण, ग्राम पंचायत जोकारी में मधेश्वर महादेव पहाड़ मार्ग पर आरसीसी पुलिया निर्माण, ग्राम पंचायत डोडापानी के डुमरटोली बस्ती में सीसी रोड निर्माण तथा ग्राम पंचायत हेठघींचा में उपरघींचा से घुड़ाजोर मार्ग पर पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं। कुडूकेला विद्युत उपकेंद्र से क्षेत्र को मिलेगी बेहतर बिजली सुविधा लोकार्पण कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा 2.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 33/11 केवी, 3.15 एमवीए विद्युत उपकेंद्र कुडूकेला का भी लोकार्पण किया। इस विद्युत उपकेंद्र के प्रारंभ होने से जामटोली, गड़बहार, टुकूपानी, बरटोली, पंडरा, सुखापोखर, जामचुवां, कुडूकेला, सरडीह, गिनाबहार, टोप्पो बागान, रेंगारघाट, सियावर चौक, चटकपुर, बेने, बासनटोली, कुहूमुड़ा, भेलवाटोली तथा नवापारा सहित अनेक गांवों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध होगी। इससे क्षेत्र के कृषि कार्यों, घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे विकास कार्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान को मिलेगी 1150 इलेक्ट्रिक बसें, पहले चरण में 675 बसें चलेंगी

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को प्रधानमंत्री ई बस सेवा के तहत अमर जवान ज्योति से जेसीटीएसएल की 29 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। साथ ही, उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भीलवाड़ा में भी 18 इलेक्ट्रिक बसों का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इन बसों के संचालन से स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुगम सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी परिवहन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगस्त 2023 में पीएम ई-बस सेवा योजना प्रारम्भ की। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के डिपो निर्माण, इलेक्ट्रिक वर्क और संचालन में राज्य सरकार को सहायता दी जा रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहरों में प्रदूषण को कम करने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ई बस का किया अवलोकन, आधुनिक सुविधाओं की ली जानकारी मुख्यमंत्री ने अमर जवान ज्योति पर इलेक्ट्रिक बस का विधिवत पूजन कर अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बस में पैनिक बटन, एसी और सीसीटीवी कैमरे जैसी आधुनिक सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही, चालक और परिचालक से बातचीत की। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने टिकट लेकर अमर जवान ज्योति से स्टेट हेंगर तक इलेक्ट्रिक बस में सफर किया। उन्होंने कहा कि इस योजना में राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर तथा अजमेर का चयन हुआ है। केन्द्र सरकार द्वारा इन 8 जिलों के लिए 675 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं। इसके अतिरिक्त भी 475 ई बसें स्वीकृत हुई हैं। इस प्रकार राजस्थान को कुल 1150 ई बसेें मिलेंगी। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में दीपावली तक 675 ई बसों का संचालन किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक से सुसज्जित ये बसें विशेष रूप से दिव्यांगों, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक एवं किफायती यात्रा का माध्यम बनेंगी। साथ ही, इन बसों में सीसीटीवी कैमरे होंगे जिनसे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रदेश के नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 555 ई-बसंे शहरी परिवहन के लिए और 50 डबल डेकर ई-बस पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके क्रियान्वयन के लिए तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। यह कदम विकसित राजस्थान 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में अहम कड़ी साबित होगा। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने पिछले ढाई वर्ष में राजस्थान के पानी, बिजली, उद्योग, परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हरियालो राजस्थान के जरिए पर्यावरण संरक्षण को मजबूती प्रदान कर रही है। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 20 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। उन्होंने प्रदेशवासियों से एक पेड़ मां के नाम और हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विधायक कालीचरण सराफ, गोपाल शर्मा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अध्यक्ष जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड रवि जैन एवं जेसीटीएसएल के अन्य अधिकारियों सहित आमजन उपस्थित रहे। वहीं, भीलवाड़ा से विधायक उदयलाल भडाणा, अशोक कोठारी सहित आमजन वीसी के जरिए कार्यक्रम में जुड़े।

एक दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल प्रसार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

रायपुर   पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में जशपुर वनमण्डल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार एवं रोपण का कार्य संपादित कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की राज्य प्रमुखमती सोनल राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया। वनमण्डल की ओर से यह प्रमाण-पत्र वनमण्डलाधिकारी शशि कुमार ने प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वनमण्डल, वन विभाग तथा अभियान से जुड़े सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जशपुर में संचालित “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” अभियान जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब शासन, प्रशासन और समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जशपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। जशपुर वनमण्डल द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी अभियान “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सीडबॉल प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और हरित आवरण में वृद्धि के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना है। अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें देखने को मिली व्यापक जनसहभागिता रही। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, महिला स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। हजारों लोगों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ और एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इस उपलब्धि ने जशपुर जिले को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। साथ ही यह सिद्ध किया है कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

RICEM की पहल: मैराथन के जरिए दिया स्वच्छता और सहकारिता का संदेश

 जयपुर राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (RICEM) द्वारा शनिवार को ‘स्वच्छ सहकार समृद्ध सहकार’ थीम पर स्वच्छता मैराथन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छता एवं सहकारिता के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देना तथा इन मूल्यों को व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित करना था। मैराथन प्रातः 6:30 बजे जवाहर सर्किल से प्रारंभ होकर सरस संकुल (RCDF) पहुंचकर सम्पन्न हुई। इस दौरान प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक दौड़ में भाग लेते हुए स्वच्छता एवं सहकारिता का संदेश आमजन तक पहुंचाया। राजस्थान राज्य सेवा (सहकारिता, जेल, श्रम कल्याण एवं उद्योग) के नवनियुक्त 73 प्रशिक्षु अधिकारियों हेतु आयोजित सह-शैक्षणिक गतिविधियों के अंतर्गत आयोजित इस मैराथन में सभी प्रशिक्षु अधिकारियों ने भाग लिया। आरआईसीईएम  के निदेशक श्री संजय पाठक के निर्देशन में संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी इसमें शामिल हुए। साथ ही आरसीडीएफ के अधिकारियों एवं कार्मिकों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सेवाकाल के दौरान स्वच्छता, अनुशासन एवं सहकारिता के मूल्यों को अपने कार्य एवं जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और सहकारिता समाज के समग्र विकास एवं समृद्धि के महत्वपूर्ण आधार हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ सिंहस्थ : 2028 के दृष्टिगत नवीन घाट निर्माण कार्य का किया अवलोकन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सिंहस्थ : 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में 778 करोड़ रुपए राशि की लागत से किए जा रहे 29.15 किमी लंबे नवीन घाट निर्माण कार्य की प्रगति का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घाट निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ : 2028 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का सिंहस्थ अनुभव सनातन संस्कृति के वैभव के अनुरूप हो। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने नवीन घाट निर्माण कार्य की विस्तार से जानकारी दी। एसीएस डॉ. राजौरा ने बताया कि 29.15 किमी नवीन घाट का निर्माण 778 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 150 से अधिक स्थान चिन्हित किए गए हैं। नवीन घाट निर्माण कार्य अंतर्गत 18.20 किमी लंबी रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जा चुका है। लगभग 7 किमी नवीन घाट निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य तेजी से प्रगतिरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में नीम, रुद्राक्ष, पीपल के पौधे रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हे कि प्रदेश वनों से आच्छादित रहे। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण, टनल मे उतर कर देखी गुणवत्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का भी निरीक्षण किया। परियोजना के टनल भाग में उतरकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने चिंतामन जवासिया गांव के समीप स्थित शाफ्ट नंबर-2 पर फेज नंबर-3 के कार्य की विस्तृत जानकारी ली। एसीएस डॉ. राजेश राजौरा द्वारा योजना की जानकारी दी गई। टनल पहुंच एवं रखरखाव संबंधी तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी गई। परियोजना का मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शहर में शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों एवं तीर्थ स्थलों में मिलने से रोकना है, जिससे शिप्रा नदी का जल स्वच्छ बना रहे। परियोजना के अंतर्गत ग्राम जमालपुरा, तहसील उज्जैन में कान्ह नदी पर एक बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे दूषित जल को क्लोज डक्ट के माध्यम से 30.15 किमी दूर गम्भीर बांध के डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। परियोजना की लागत 919.94 करोड़ रुपए है। इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी (कट एंड कवर डक्ट: 18.15 किमी + टनल: 12.00 किमी) है। टनल भाग में 4 शाफ्टों का निर्माण पहुंच एवं सफाई तथा रखरखाव के लिए किया गया है। डक्ट का डी-आकार का क्रॉस सेक्शन, अधिकतम 40 क्यूसेक दूषित जल की निकासी क्षमता रखता है। परियोजना को आगामी 25 वर्ष तक की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद आगामी 15 वर्ष तक संचालन एवं संधारण का प्रावधान है। वर्तमान में बैराज का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कट एंड कवर भाग की कुल 18.15 किमी लंबाई में से 4.50 किमी में प्री-कास्ट सेगमेंट्स का लेइंग कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है। 18.15 किमी में से 10.30 किमी लंबाई में लेइंग करने योग्य प्री-कास्ट सेगमेंट्स तैयार किए जा चुके हैं। टनल भाग के निर्माण के लिये चारों शाफ्टों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल 12 किमी लंबाई में से 8.15 किमी की खुदाई कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की और कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अवलोकन एवं भ्रमण के समय महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापतिमती कलावती यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।