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जनजातीय संग्रहालय भोपाल में शास्त्रीय गायन और भरतनाट्यम की होगी प्रस्तुति ललित कला महाविद्यालयों में कला की बारीकियों से रूबरू होंगे युवा

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आगामी 21 जून 2026 को 'विश्व योग एवं संगीत दिवस' के पावन अवसर पर प्रदेश में कला और संस्कृति का अनूठा उत्सव मनाया जा रहा है। इस विशेष दिवस पर राज्य के 14 स्थानों पर संगीत, नृत्य, चित्र और शिल्पकला पर केंद्रित भव्य सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश सहित देश के सुप्रतिष्ठित और ख्यातिलब्ध कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा और अविस्मरणीय अनुभव होगा। संस्कृति विभाग के संचालक  एन.पी. नामदेव ने जानकारी दी कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अटूट हिस्सा है। यह मात्र सुरों और रागों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली साधना और असीम मानसिक शांति का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस सुदीर्घ परंपरा का उत्सव मनाना गर्व की बात है, और इसका मुख्य उद्देश्य हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और कलात्मक धरोहर के प्रति जागरूक व गौरवान्वित करना है। इसी कड़ी में, 21 जून को जनजातीय संग्रहालय' में संगीत और नृत्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस सुरमयी शाम की शुरुआत सु प्रदक्षिणा भट्ट (भोपाल) के शास्त्रीय गायन से होगी, जिसके बाद पुणे की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु स्मिता महाजन अपने भावपूर्ण भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति देंगी। यह गरिमामयी कार्यक्रम सायंकाल 7:00 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें आम जनता और कला अनुरागियों के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है। इसके साथ ही, प्रदेश के विभिन्न शासकीय संगीत महाविद्यालयों में भी सुर और ताल की महफिलें सजेंगी। शासकीय संगीत महाविद्यालय, नरसिंहगढ़ में  आकाश गुंटीवार का शास्त्रीय गायन और सु मोहिका सक्सेना का भरतनाट्यम होगा। उज्जैन में  यश देवले के शास्त्रीय गायन के बाद सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु सुचित्रा हरमलकर का कथक नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। ग्वालियर में सु श्वेता गुंजन जोशी का गायन व सु सन्नाली शर्मा का कथक, खंडवा में  सुप्रियो मैत्रो व  आकाश तिवारी का गायन तथा सु प्रियंवदा सिंह का कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। मंदसौर में डॉ. नीलिमा छापेकर के गायन के साथ  मुन्ने खाँ और आबिद हुसैन का जुगलबंदी भरा सारंगी वादन होगा। वहीं, मैहर में  विजय सप्रे के गायन व सु शालिनी खरे के कथक और इंदौर में  दामोदर राव के गायन व सु भार्गवी शर्मा एवं समूह के कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी। संगीत के साथ-साथ दृश्य कलाओं के संवर्धन के लिए प्रदेश के शासकीय ललित कला महाविद्यालयों में विशेष व्याख्यान और प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) आयोजित किए जा रहे हैं। ग्वालियर में  बसंत भार्गव और धार में सु निधि चोपड़ा चित्रकला की बारीकियों को साझा करेंगे। इंदौर में गुजरात के प्रसिद्ध कलाकार  जयंती राबड़िया चित्रकला पर अपने अनुभव साझा करेंगे। वहीं, मूर्तिकला और शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर में वाराणसी के  मदनलाल शिल्पकला पर और खंडवा में सु गिरिजा वायंगणकर मूर्तिकला विषय पर व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगी। संस्कृति विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रदेश में कलात्मक चेतना को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।  

लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों का किया अवलोकन

भोपाल जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शहर के तालाबों एवं उससे जुड़े जल मार्गों (चैनलों) पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिये विशेष अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में इंदौर शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों तथा 250 से अधिक कुओं और बावड़ियों के संरक्षण के लिये किये गये कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता में देश और दुनिया में अपनी पहचान स्थापित कर चुका इंदौर अब जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अपनी उपलब्धियां दर्ज कर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौदर्यीकरण के कार्यों का अवलोकन कर श्रमदान भी किया। उन्होंने लिंबोदी में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा  कि जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन नीरस है। हम प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करें और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई करें। जल की एक-एक बूंद बचायें और जल को सहेजें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को इंदौर में करीब 100 वर्ष से अधिक पुराने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये तालाबों, कुँओं एवं बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई संबंधी कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत गुड़ी-पड़वा से की थी। अभियान में अभी तक प्रदेश में 2 लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किये जा चुके हैं। महापौर  पुष्यमित्र भार्गव  ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में शहर के तालाबों,  कुँओं और बावड़ियों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास के व्यापक कार्य किये जा रहे हैं। अमृत 2.0 के अंतर्गत भी तालाब संरक्षण एवं विकास कार्य जारी हैं, जिनमें स्‍टोन बोल्‍डर पिचिंग, टो-वॉल निर्माण, बंधान पर रैलिंग, इको फ्रेंडली पाथ-वे, स्टोन बेंच आदि कार्य किये जा रहे हैं। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, विधायक  मधु वर्मा, जनप्रतिनिधि, नगर निगम आयुक्‍त  क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्‍त  आशीष पाठक सहित बड़ी संख्‍या में नागरिक उपस्थित थे।

म.प्र. में टेक सेक्टर में आया 12,500 करोड़ रु. का निवेश, 50 हज़ार नये रोजगार सृजित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भविष्य में अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। मध्यप्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। हमें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर प्रदेश को ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सशक्त केंद्र बनाना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास किए जाएं। निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे गुजरात की तर्ज पर मध्यप्रदेश (राजधानी क्षेत्र भोपाल) में भी गिफ्ट सिटी बनाने के लिए ठोस प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज बन रहे हैं। उज्जैन में ही मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की स्थापना की जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यों एवं अन्य गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निवेश संवर्धन पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रमुख निवेश (लीड इन्वेस्टमेंट) आकर्षित करने के लिए तैयार की गई विशेष कार्य योजना की समीक्षा की तथा इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में होने वाला निवेश न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, अनुसंधान, स्टार्ट-अप संस्कृति और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने तथा निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रगति रिपोर्ट तथा आगामी कार्य योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में जरूरी मानव संसाधन की पद पूर्ति कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को और भी सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन देकर बताया कि उज्जैन में डीपटेक रिसर्च पार्क की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। अब इसी प्रस्ताव अंतर्गत उज्जैन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए नई कार्य योजना तैयार कर संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह सेंटर करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। डीपटेक रिसर्च पार्क भी अब इसी सेंटर ऑॅफ एक्सीलेंस का हिस्सा होगा। उन्होंने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने की तैयारी है। इसे ईकाई सिटी (EKAI CITY – एजुकेशन, नॉलेज एण्ड एआई सिटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 10 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग की जाएगी। राज्य सरकार भी इसमें राशि मिलाएगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की 4 यूनिवर्सिटीस मध्यप्रदेश में अपना अध्ययन परिसर (स्टडी कैम्पस) खोलना चाहती हैं। उनसे भी समन्वय किया जा रहा है। प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का एक उभरता हुआ टेक हब बन रहा है। यहां 5 आईटी एसईजेड, 15 से अधिक आईटी पार्क, 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियां, करीब 1200 से अधिक टेक स्टार्ट-अप्स कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले 300 से अधिक कॉलेज, 50 हजार से अधिक तकनीकी स्नातक/वर्ष (यूजी. पीजी, डिप्लोमा), आईआईटी, आईआईआईटीडीएम, आईआईएम, एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र की 6 नीतियां हैं। एमपी स्टार्ट-अप पॉलिसी : 2022 भी लागू है। सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय, ब्याज सब्सिड़ी जैसे प्रोत्साहन भी निवेशकों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में टेक सेक्टर में लगभग 12 हजार 500 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इससे करीब 50 हजार नए रोजगार का सृजन हुआ है। विभाग द्वारा आईटी आईटीईएस तथा क्वांटम और एआई जैसी उभरते तकनीकी सेक्टर, डेटा सेंटर, ईएसडीएम- डेटा सेंटर कम्पोनेंट्स मैन्यूफेक्चरिंग, सेमी कंडक्टर- पैकेजिंग, डिजाइन, ड्रोन निर्माण, जीसीसी, एवीजीसी- एक्सआर एवं स्पेस टेक पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में इस पूरे सेक्टर के अंतर्गत करीब 5 हजार 892 करोड़ रूपए की मेगा परियोजनाओं के प्रस्ताव पाइपलाइन में है। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बैठक में बताया कि उद्योग विभाग के पास 10 लाख वर्ग फीट जमीन उपलब्ध है। निवेशकों को कम से कम समय में भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अधीन स्टार्ट-अप मिशन के तहत हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को भी जरूरी मदद मुहैया करा रहे हैं। प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा ने अपने स्पेशल प्रेजेंटशन में मध्यप्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आमूल-चूल विकास और इस सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार को इस सेक्टर को प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री मनीष सिंह, प्रबंध संचालक मप्र औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड श्री चंद्रमौली शुक्ला, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस में पदाधिकारी श्री तापस तिवारी सहित एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।  

कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों को नोटिस जारी करने तथा ब्लैक-लिस्ट करने के दिए निर्देश

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज अपने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रवास के दौरान लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग, सेतु निर्माण, सड़क एवं भवन निर्माण तथा विद्युत एवं यांत्रिकी के अधिकारियों की बैठक लेकर सड़कों, भवनों व पुल-पुलियों के निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी, वनमण्डलाधिकारी  आलोक बाजपेई और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाते हुए समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा ठेकेदारों के साथ सतत समन्वय बनाकर कार्यों को गति देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने लंबित कार्यों की जानकारी लेकर संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी करने तथा ब्लैक-लिस्ट करने के निर्देश दिए।  बंसल ने बैठक में बलरामपुर-रामानुजगंज-सनावल, कामेश्वरनगर, कपिलदेवपुर, गणेशमोड़, जनकपुर, रमेशपुर-शंकरपुर, चंपा-बाद और कुसमी-कोरंधा मार्ग के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न भवनों के निर्माण और अधोसंरचना परियोजनाओं के साथ ही शासकीय महाविद्यालय भवन के कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। शासन की प्राथमिकता वाले निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को जवाबदेही से कार्य करने तथा गुणवत्ता व समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय राजमार्ग और कंठी घाट का किया निरीक्षण, अधूरे कार्यों को बारिश से पहले पूरा करने कहा लोक निर्माण विभाग के सचिव  बंसल ने बैठक के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-343 और कंठीघाट में निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-343 का निरीक्षण करते हुए कहा कि बरसात के पहले नाली निर्माण एवं जल निकासी संबंधी सभी कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण कर लें, ताकि वर्षा के दौरान आवागमन बाधित न हो व लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने सड़कों और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता तथा सड़क सुरक्षा के मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

हजारों कर्मचारियों के खातों में पहुंचेगी बड़ी राशि, केंद्र सरकार का बड़ा कदम

भोपाल भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाय) के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग 2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। एमपी-छत्तीसगढ़ के 34,610 कर्मचारी होंगे लाभान्वित क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त रौशन काश्यप ने बताया कि विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय पीएम-वीबीआरवाय के कार्यक्रम को राष्ट्रीय आयाम देते हुए देश भर में 200 स्थानों पर एक साथ क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन स्थानों पर इसका लाइव प्रसारण होगा। योजना से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की 2476 कंपनियों के 34,610 कर्मचारी लाभान्वित होंगे। मध्य प्रदेश में दो स्थानों मैनिट सभागार भोपाल एवं एचईजी मंडीदीप में भी कार्यक्रम होंगे। जिसमें नियोक्ताओं, कर्मचारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों के रूप में लगभग 700 अतिथि शामिल होंगे। मैनिट भोपाल और एचईजी मंडीदीप के कार्यक्रमों में शामिल होंगे मुख्य अतिथि मैनिट सभागार भोपाल में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मप्र शासन के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल शामिल होंगे। एचईजी मंडीदीप में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक भोजपुर क्षेत्र सुरेन्द्र पटवा शामिल होंगे। भोपाल के हर्षित मेहरा और धार के नैतिक वैष्णव करेंगे पीएम से संवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले लाभार्थियों के साथ बातचीत भी करेंगे। इनमें भोपाल के हर्षित मेहरा और धार के नैतिक वैष्णव पीएम से संवाद करेंगे। 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां देना है उद्देश्य पीएम-वीबीआरवाय भारत सरकार की एक प्रमुख एंप्लायमेंट-लिंक्ड इंसेंटिव (ईएलआइ) योजना है, जिसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, संगठित कार्यबल में पहली बार प्रवेश करने वालों को सहायता प्रदान करना और नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार सृजन करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पात्र पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों को 15,000 तक का एक माह का वेतन मिलता है, जबकि नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी तीन हजार रुपये प्रति माह तक का प्रोत्साहन दो साल की अवधि के लिए मिलेगा, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह माह तक निरंतर रोजगार में रहे। विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगी अतिरिक्त सहायता विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र अतिरिक्त दो वर्षों के लिए विस्तारित सहायता के लिए पात्र है। जिससे श्रम-गहन उद्योगों में निरंतर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है। 99,446 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ शुरू की गई योजना का उद्देश्य दो वर्ष की अवधि में देश भर में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों के सृजन की सुविधा प्रदान करना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थियों के पहली बार औपचारिक कार्यबल में प्रवेश करने की उम्मीद है। योजना एक अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित नौकरियों पर लागू हैं।

​उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने दी नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं

​रायपुर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने नवीन शिक्षा सत्र के शुभारंभ पर राज्य के समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों, शैक्षणिक और अशैक्षणिक स्टाफ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस सत्र में शैक्षणिक कैलेंडर का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़ और अनुशासित बनेगी।  उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, अनुशासित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन, डिजिटल गवर्नेंस के उपयोग, एकीकृत नियामक संस्थाओं के गठन और छात्रों की अनिवार्य उपस्थिति से जुड़े सख्त दिशा-निर्देश शामिल हैंl उन्होंने कहा कि कॉलेज परिसरों में अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ​विद्यार्थियों की समस्याओं के लिए बनेगा 'हेल्प डेस्क'      ​ छात्र हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए मंत्री  वर्मा ने घोषणा की है कि महाविद्यालय आने वाले समस्त विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए 'हेल्प डेस्क' की स्थापना की जाएगी। इससे छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें तत्काल राहत मिलेगी। ​समय पर प्रवेश लें छात्र, बार-बार नहीं बढ़ेगी तारीख  ​उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी विद्यार्थियों से अपील की है कि वे शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार महाविद्यालयों में गुणाक्रम (मेरिट) के आधार पर समय पर प्रवेश लें। उन्होंने कहा कि समय पर प्रवेश होने से प्राविण्य सूची (मेरिट लिस्ट) में आने वाले सभी विद्यार्थियों का एडमिशन निर्धारित समय में पूरा हो सकेगा और पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो पाएगी। बार-बार प्रवेश की तिथि बढ़ाने की आवश्यकता न पड़े, इसके लिए जरूरी है कि प्रवेश सूची में नाम आने पर कोई भी विद्यार्थी दाखिले से वंचित न रहे। ​NEP 2020 का समयबद्ध क्रियान्वयन सभी कॉलेजों के शैक्षणिक स्टाफ और विद्यार्थियों की यह जिम्मेदारी होगी कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत पढ़ाई समय पर शुरू हो, पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो, और सेमेस्टर व अन्य परीक्षाएं समय पर आयोजित की जाएं। इसके साथ ही शैक्षणिक कैलेंडर की समय-सीमा के भीतर ही परीक्षाओं के परिणाम भी जारी किए जाएंगे। कॉलेज परिसरों में उच्च शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को सह-शैक्षणिक (Co-curricular) गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे अपने संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास कर संस्था और प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। ​युवाओं के सुनहरे भविष्य के निर्माण का भरोसा  उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को विश्वास दिलाया कि माननीय मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय जी की सरकार युवाओं के सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सबको मिलकर यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय  नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' के सपनों को साकार करना है।

कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में गोसंरक्षण के लाभ बताए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे, फिर उन्हें सड़कों पर बेसहारा छोड़ देंगे और जब ये गाय फसलों का नुकसान करेंगी तो दोष मुझे देंगे। हमारा संकल्प व संस्कार है कि गोमाता को कटने नहीं देंगे और देश की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने सिख गुरुओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई आक्रांता या कसाई गोहत्या करता था, तो सिख वीर उसका वहीं काम तमाम कर देते थे। यह उस कालखंड की बात है, जब देश गुलाम था और लोग विदेशी आक्रांताओं के साये में जीवन व्यतीत कर रहे थे। कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का कोई ऐसा सनातन धर्मावलंबी नहीं होगा, जो गोमाता की उपासना न करता हो, उसे अपने जीवन व परिवार का हिस्सा न मानता हो। गोमाता आधारित खेती न केवल कृषि को सशक्त बनाती है, बल्कि गोमाता की रक्षा भी करती है। साथ ही, यह हम सभी को पुण्य का भागीदार भी बनाती है। विदेशियों की नकल ने भारत को पीछे धकेला मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 2000 वर्ष पहले भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। मुगलों की लूटपाट के बावजूद भारत की ग्लोबल इकॉनमी में हिस्सेदारी 24 प्रतिशत तक थी। जब तक भारत किसानों, व्यापारियों, नौजवानों और आधी आबादी के सामर्थ्य पर विश्वास करता रहा, तब तक देश समृद्धि की ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहा। लेकिन, जब हमने विदेशियों की नकल करना शुरू कर दिया तो वही भारत विपन्न होते-होते आजादी के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में मात्र दो प्रतिशत हिस्सेदारी तक सिमट गया। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश ने नारी शक्ति, युवाओं, व्यापारियों और किसानों पर फिर से विश्वास किया। इसी का परिणाम है कि आज भारत पूरे विश्व में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। ज्यादा लागत-कम आय से जूझ रहा था किसान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी-पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अब भारत बीमारू नहीं, विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर देश है। यह विचार करने की आवश्यकता है कि वे कौन से कारण थे, जिन्होंने इतनी समृद्ध भूमि होने के बावजूद अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। 2014 से पहले किसान आत्महत्या कर रहा था, क्योंकि लागत अधिक व उत्पादन कम था और उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था। मोदी सरकार ने दी डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी सीएम योगी ने कहा कि आजाद भारत में किसानों को उनकी लागत का न्यूनतम डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी किसी ने दी, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में लाखों किसानों ने आत्महत्या की, लेकिन 2014 के बाद इस पर विराम लग गया। पहली बार सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से धरती माता के स्वास्थ्य का परीक्षण शुरू हुआ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए अन्नदाता किसानों को फसल सुरक्षा की गारंटी मिली। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई की सुविधा बढ़ी। किसानों के लिए प्रोक्योरमेंट सेंटर स्थापित हुए और किसान सम्मान निधि की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाले उर्वरक (फर्टिलाइजर) पर सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया बैग की कीमत करीब 4000 रुपये तक होती है, जबकि किसानों को एक चौथाई से भी कम कीमत पर इसे उपलब्ध कराया जाता है। किसान प्रति एकड़ रासायनिक उर्वरकों पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर देता है। किसान की मेहनत को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो उसकी कुल लागत 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद सालभर की मेहनत के बाद उसे 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ भी नहीं मिल पाता। जहर मुक्त खेती ही बेहतर भविष्य का आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग की वजह से कई बार हमारा उत्पादन दुनिया के बाजार में स्वीकार नहीं किया जाता, क्योंकि उसमें रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव होता है। आज से 30 वर्ष पहले किडनी खराब होने के इतने मामले नहीं होते थे। लोग हैंडपंप व तालाब का पानी पीते थे, मेहनत करते थे और सामान्य स्वस्थ जीवन जीते थे। आज लगभग हर मोहल्ले में दो-तीन किडनी रोगी मिल जाते हैं। लिवर सिरोसिस, ब्लडप्रेशर व डायबिटीज के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। सीएम ने कहा कि यह केवल व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दोष है जो केमिकल फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के उपयोग को बढ़ावा देती है। यदि किसान गो आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हैं तो प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये की सीधी बचत रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में ही हो जाएगी। स्वास्थ्य उत्तम होगा तो दवाओं पर भी खर्च बचेगा। आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से आर्थिक सहायता तो दी जाती है, लेकिन बीमारी से प्रभावित व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। पूरा परिवार संकट में आ जाता है। लोग स्वस्थ रहेंगे तो अपनी ऊर्जा व प्रतिभा का उपयोग देश-समाज के विकास में कर सकेंगे। 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास शुरू किए गए हैं। प्रदेश के 34 जिले प्राकृतिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं। गंगा किनारे स्थित 27 जनपदों तथा बुंदेलखंड के सात जनपदों को प्राकृतिक खेती के लिए चिह्नित किया गया है। बुंदेलखंड के किसानों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग व मार्केटिंग पर तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि मंडियों में इसके लिए व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के बीज से लेकर फसल तैयार होने तक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया, शोरूम की स्थापना तथा उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन का आधार … Read more

ट्राइबल यूथ हॉस्टल के 13 अभ्यर्थियों ने यूपीएससी प्रीलिम्स में हासिल की सफलता

रायपुर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 के परिणामों में छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। नई दिल्ली के द्वारका स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रहे 13 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। विशेष बात यह है कि इनमें अधिकांश विद्यार्थी जनजातीय, ग्रामीण एवं सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से आते हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति की प्रतिभा, परिश्रम और अटूट संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर निर्माण के लिए बेहतर अवसर एवं संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इन युवाओं की सफलता प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देगी। यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में सफल होने वाले विद्यार्थियों में  गौतम कुमार,  कुलभूषण सिंह पोया,  हरि चंद्र प्रकाश सिंह,  मयंक रात्रे,  मलिकराम पटेल,  आर्यन राठौर,  चेतन लाल,  हरीश कुमार पटेल,  किशन लाल साहू,  सत्यनारायण चंद्राकर, सु दीक्षा दिवाकर,  विकेश कुर्रे तथा  प्रकाश पटेल शामिल हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि समाज के वंचित एवं प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।  इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ वनांचलों, जनजातीय क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को देश की राजधानी में रहकर संघ लोक सेवा आयोग सहित अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर अवसर प्राप्त हो रहा है। उल्लेखनीय है कि ट्राइबल यूथ हॉस्टल की स्थापना राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, अध्ययन कक्ष, पुस्तकालय, उत्कृष्ट कोचिंग तथा अनुभवी विशेषज्ञों का नियमित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि ट्राइबल यूथ हॉस्टल जैसे संस्थान प्रतिभाओं को पहचान देने और उन्हें उचित दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रारंभिक परीक्षा में सफल ये विद्यार्थी मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रशासनिक सेवाओं में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएंगे। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार द्वारा युवाओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे शैक्षणिक अवसरों और मार्गदर्शन व्यवस्था का सकारात्मक परिणाम है।  UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में 13 अभ्यर्थियों की सफलता ने इस संस्थान की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी पर फहराया तिरंगा, मध्यप्रदेश पुलिस का बढ़ाया गौरव

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से माउंट किलिमंजारो विजय के उपरांत निरीक्षक मती दीपिका गौतम ने पुलिस मुख्यालय में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर  मकवाणा ने उन्‍हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए डीजीपी ने कहा कि यह सफलता मध्यप्रदेश पुलिस की महिला अधिकारियों की क्षमता, साहस, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि निरीक्षक मती दीपिका गौतम ने अपनी उपलब्धि से प्रदेश की महिलाओं, युवाओं तथा पुलिस बल के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी है। इस अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एससीआरबी  जयदीप प्रसाद एवं पुलिस महानिरीक्षक एससीआरबी  हरिनारायणचारी मिश्र उपस्थित थे। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), पुलिस मुख्यालय में पदस्थ इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने 29 मई 2026 को अफ्रीका महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो के Gilmans point 5685m पर पहुंचकर तिरंगा एवं मध्यप्रदेश पुलिस का ध्वज फहराया। इस अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में वे भारत की एकमात्र प्रतिभागी थीं। इस उपलब्धि के साथ निरीक्षक मती दीपिका गौतम मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने तंजानिया स्थित विश्व प्रसिद्ध पर्वत शिखर पर सफलतापूर्वक फतह कर प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया है। माउंट किलिमंजारो अभियान पांच दिनों का अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं कठिन अभियान था। इस दौरान तीन बेस कैंप पार करने के बाद अंतिम चढ़ाई रात्रि में प्रारंभ की गई। अभियान के दौरान तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था तथा लगातार बदलते मौसम ने परिस्थितियों को और अधिक कठिन बना दिया था। इन चुनौतियों के बावजूद निरीक्षक मती दीपिका गौतम ने अदम्य साहस, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए सफलता प्राप्त की।  

प्रदेश में समग्र इको सिस्टम को मिलेगी नई गति

भोपाल मध्यप्रदेश को आईटी और सेवा क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिये हम प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। आईटी पार्क-3, आईटी पार्क-4 आईटी पार्क उज्जैन, इंदौर-पीथमपुर इकोनामिक कॉरिडोर और निजी क्षेत्र की परियोजनाएं मिलकर एक ऐसा आधुनिक इको सिस्टम तैयार करेगी, जो मध्यप्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपालिटन रीजन इस परिवर्तन का ग्रोथ इंजन बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को इंदौर में निर्माणाधीन आईटी पार्क-3 के निरीक्षण में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर को हम मध्यप्रदेश की आईटी और सेवा क्षेत्र की विकास राजधानी के रूप में विकसित कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यहां विकसित होने वाला आईटी पार्कों का समग्र इको सिस्टम प्रदेश को नई आर्थिक गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईटी पार्क प्रदेश को आईटी, ग्लोबल केपीबिलिटी सेंटर और सेवा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में एक सुदृढ़ और भविष्य उन्मुख डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन आईटी पार्क 557 करोड रुपए की लागत से ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह 22 मंजिला भवन 11.25 लाख वर्गफीट के कुल निर्मित क्षेत्रफल के साथ मध्य भारत का सर्वश्रेष्ठ ग्लोबल आईटी पार्क बनने जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, विधायकगण  रमेश मेंदोला,  मधु वर्मा,  मनोज पटेल और पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार, कलेक्टर  शिवम वर्मा, एमपीआईडीसी के सीईओ  हिमांशु प्रजापति सहित जनप्रतिनिधिगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।