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डायल-112 की तत्परता से सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर मिली मदद

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता के साथ जरूरतमंदों को समय पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आगर मालवा जिले में सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की एफआरवी तत्काल मौके पर पहुंची, जहां एएसआई श्री विजय बड़गोत्या ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने घायल को डायल-112 वाहन से ही शासकीय चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका उपचार प्रारंभ किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नलखेड़ा निवासी सुनील स्कूटी से नलखेड़ा से आगर की ओर जा रहे थे। चामड़दा फंटे के पास अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। दुर्घटना में वे स्कूटी सहित सड़क किनारे झाड़ियों में जा गिरे और घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 की एफआरवी तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। घायल की स्थिति को देखते हुए एएसआई श्री विजय बड़गोत्या ने तत्काल सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार प्रदान किया। इसके बाद चालक श्री जीवन यादव की सहायता से घायल को डायल-112 वाहन से ही शासकीय चिकित्सालय पहुंचाया। पुलिस टीम द्वारा घायल के परिजनों को भी दुर्घटना की सूचना दी गई। सीपीआर प्रशिक्षण से आपात स्थिति में त्वरित सहायता देने में सक्षम हो रहे पुलिसकर्मी मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिसकर्मियों को आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगर मालवा में हुई इस दुर्घटना में एएसआई श्री विजय बड़गोत्या द्वारा प्रशिक्षण का उपयोग करते हुए घायल को तत्काल सीपीआर देना और डायल-112 के माध्यम से अस्पताल पहुंचाना इसी प्रशिक्षण और तत्परता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि सड़क दुर्घटना, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति अथवा किसी अन्य संकट की स्थिति में नागरिक तत्काल डायल-112 पर सूचना दें।  

प्रधानमंत्री आवास योजना से रामकिशुन श्रीवास का पक्के मकान का सपना हुआ साकार

रायपुर, हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक पक्का मकान हो, जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई जरूरतमंद परिवारों के लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं होता। ऐसे परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। इस योजना ने राजनांदगांव जिले के नगर पंचायत डोंगरगांव अंतर्गत सेवता पारा, वार्ड क्रमांक 6 निवासी  रामकिशुन वास के पक्के मकान के सपने को भी साकार किया है। शासन के सहयोग से अपने सपनों का पक्का आशियाना तैयार किया रामकिशुन वास रामकिशुन वास का परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था। कच्चे मकान में रहने के कारण परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सीमित आर्थिक संसाधनों के चलते स्वयं का पक्का मकान बनाना उनके लिए कठिन था। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 उनके जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आई। योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए मिली 2 लाख 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने सपनों का पक्का आशियाना तैयार किया। पक्के घर का सपना पूरा होने से जीवन स्तर में आया सकारात्मक बदलाव   रामकिशुन वास बताते हैं कि पहले कच्चे मकान में रहने के कारण परिवार को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। अब पक्का मकान बन जाने से परिवार को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल गया है। अपने घर की पक्की छत के नीचे परिवार के साथ रहने की खुशी उनके जीवन में एक नया सुकून लेकर आई है। वर्षों से संजोया गया पक्के घर का सपना पूरा होने से परिवार के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। जीवन में स्थायित्व और आत्मसम्मान की भावना हुई मजबूत  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के पात्र आवासहीन परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास मिलने के साथ उनके जीवन में स्थायित्व और आत्मसम्मान की भावना भी मजबूत हो रही है। वास ने पक्के आवास का सपना साकार होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।  

प्रधानमंत्री आवास योजना से कविता बाई के पक्के घर का सपना हो रहा साकार

रायपुर हर परिवार का सपना होता है कि उसके सिर पर अपनी पक्की छत हो, जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता सके। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तनोद निवासी श्रीमती कविता बाई के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी सपने को साकार करने की उम्मीद लेकर आई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत उनके आवास को स्वीकृति मिलने से परिवार के लिए अपना पक्का घर बनाने की राह आसान हुई है। कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों के लिए पक्का घर केवल चारदीवारी और छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार होता है। श्रीमती कविता बाई भी अपने परिवार के लिए ऐसा ही आशियाना चाहती थीं, जहां उन्हें स्थायी आवास की सुविधा मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास की स्वीकृति मिलने से उनकी इस इच्छा को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। अपने घर की उम्मीद को मिला नया सहारा श्रीमती कविता बाई के लिए आवास की स्वीकृति परिवार की एक बड़ी जरूरत पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पक्का घर बनने से परिवार को बेहतर रहन-सहन, सुरक्षा और दैनिक जीवन में सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। योजना से मिली सहायता ने उनके परिवार को अपने आवास के सपने के करीब पहुंचाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने घर का निर्माण करने और बेहतर आवासीय सुविधाएं प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार श्रीमती कविता बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने पर खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उनके लिए यह सहायता परिवार के बेहतर भविष्य और सुरक्षित आवास की उम्मीद का आधार बनी है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कविता बाई की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि आवास जैसी बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए मिलने वाली शासकीय सहायता जरूरतमंद परिवारों के जीवन में कितना महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। अपने पक्के घर की उम्मीद के साथ कविता बाई का परिवार अब बेहतर और सुरक्षित जीवन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सह-चिकित्सीय क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने के लिए आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए सह-चिकित्सीय क्षेत्र में दक्ष एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और तकनीकों के अनुरूप युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में एलाइड एंड हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रारंभ करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वल्लभ भवन में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में राष्ट्रीय एलाइड एंड हेल्थकेयर आयोग, भारत सरकार द्वारा जारी अंतरिम दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही करते हुए आयोग द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों को मध्यप्रदेश में तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबद्धता एवं प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करें। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आयोग द्वारा एलाइड एंड हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों के माध्यम से सह-चिकित्सीय क्षेत्र में उन्नयन, आधुनिक तकनीक के विस्तार तथा देशभर में पाठ्यक्रमों में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरिम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मध्यप्रदेश में इन पाठ्यक्रमों का संचालन निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के मध्य समन्वय के साथ आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। बैठक में उच्च शिक्षा आयुक्त  प्रबल सिंह, एलाइड काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, एलाइड काउंसिल के सचिव डॉ. शेलोज जोशी सहित संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

किराए के मकान की चिंता हुई दूर, हाउसिंग बोर्ड ने साकार किया स्मिता श्रीवास्तव के अपने घर का सपना

रायपुर हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर, सुरक्षित और सुविधायुक्त घर हो, जहां वह अपने परिवार के साथ बिना किसी चिंता के सुकून भरा जीवन बिता सके। किराए के मकान में रहने वाले परिवारों के लिए यह सपना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हर महीने किराए का खर्च और स्थायी आवास की चिंता उनके जीवन का हिस्सा बनी रहती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय परियोजनाएं ऐसे ही परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम बन रही हैं। राजधानी रायपुर के कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर में रहने वाली  स्मिता श्रीवास्तव की कहानी भी इसी बदलाव, खुशी और संतुष्टि का उदाहरण है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आम नागरिकों, विशेषकर मध्यमवर्गीय परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण, सुव्यवस्थित आवासीय परियोजनाओं और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों को उनकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध कराना है। किराए के मकान से अपने आशियाने तक का सफर कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर की निवासी  स्मिता श्रीवास्तव बताती हैं कि पहले वे किराए के मकान में रहती थीं। हर महीने किराया चुकाने के साथ अपने स्थायी घर की चिंता भी बनी रहती थी। उनकी इच्छा थी कि परिवार के बजट में ऐसा घर मिले, जहां निर्माण की गुणवत्ता अच्छी हो और दैनिक जीवन की सभी जरूरी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध हों।  स्मिता कहती हैं, “पहले मैं किराए के मकान में रहती थी। हर महीने किराया देना और अपने घर की चिंता करना मेरे लिए एक बड़ी परेशानी थी। लेकिन आज हाउसिंग बोर्ड की वजह से मेरा अपने घर का सपना पूरा हो गया है।” उनके लिए किराए के मकान से निकलकर अपने घर में रहना जीवन की बड़ी उपलब्धि है। अब उन्हें हर महीने मकान मालिक को किराया देने की चिंता नहीं रहती। अपने घर में परिवार के साथ रहने से उन्हें स्थायित्व, सुरक्षा और आत्मसंतुष्टि का अनुभव हो रहा है। अच्छी लोकेशन और जरूरी सुविधाओं ने बढ़ाई खुशी  स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुविधाजनक लोकेशन है। आसपास अस्पताल, बच्चों के लिए स्कूल और दैनिक जरूरतों के लिए बाजार उपलब्ध होने से परिवार को काफी सुविधा मिलती है। आवागमन की बेहतर व्यवस्था के कारण शहर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान है। वे बताती हैं कि आवास खरीदते समय उनकी प्राथमिकता केवल एक मकान लेना नहीं था, बल्कि ऐसा स्थान चुनना था, जहां परिवार की सभी आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो सकें। हाउसिंग बोर्ड की इस परियोजना में उन्हें अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं मिली हैं।  स्मिता कहती हैं, “यहां की सबसे अच्छी बात इसकी लोकेशन है। अस्पताल हो, बच्चों के लिए स्कूल हो या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार, सभी सुविधाएं आसपास ही उपलब्ध हैं। कहीं भी आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होती।” बजट के अनुरूप घर और बेहतर निर्माण गुणवत्ता से संतुष्ट  स्मिता बताती हैं कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए घर खरीदते समय बजट सबसे महत्वपूर्ण होता है। उनकी भी यही इच्छा थी कि आर्थिक क्षमता के अनुरूप ऐसा घर मिले, जिसमें निर्माण की गुणवत्ता के साथ आवश्यक सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया हो। वे कहती हैं, “हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुरक्षित घर हो। मेरा भी यही सपना था कि मेरे बजट में मुझे एक ऐसा मकान मिले, जहां अच्छी निर्माण गुणवत्ता के साथ सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने मेरी उम्मीदों के अनुरूप मुझे एक बहुत अच्छा घर दिया है।” उनके अनुसार हाउसिंग बोर्ड के आवास में रहने से परिवार को बेहतर वातावरण मिला है। घर की बनावट, सुविधाजनक लोकेशन और आसपास उपलब्ध आवश्यक सेवाओं के कारण वे अपने निर्णय से संतुष्ट हैं। “अब किराए के मकान में नहीं, अपने खुद के घर में रह रही हूं” अपने घर से जुड़ी खुशी व्यक्त करते हुए  स्मिता श्रीवास्तव कहती हैं कि जीवन में कुछ उपलब्धियां ऐसी होती हैं, जिनकी खुशी शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल होता है। अपने घर का सपना पूरा होना उनके लिए ऐसा ही अवसर है। वे भावुक होकर कहती हैं, “अब सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मैं किराए के मकान में नहीं, बल्कि अपने खुद के घर में रह रही हूं। यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी और सुकून की बात है।” उनके लिए अपना घर केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों की उम्मीदों, मेहनत और परिवार के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है। अपने आशियाने में रहने से परिवार को स्थायित्व मिला है और भविष्य को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ा है। मध्यमवर्गीय परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में प्रयास मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मंडल का प्रयास है कि आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों को उनकी आवश्यकताओं तथा आर्थिक क्षमता के अनुरूप सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध हों। आवासीय परियोजनाओं में बेहतर लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, आवश्यक नागरिक सुविधाओं और परिवारों की दैनिक जरूरतों को महत्व दिया जा रहा है। इसके माध्यम से नागरिकों को केवल मकान उपलब्ध कराने के बजाय सुरक्षित और सुविधाजनक आवासीय वातावरण विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड के प्रति जताया आभार  स्मिता श्रीवास्तव ने अपने घर का सपना पूरा होने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “आज मैं यहां अपने परिवार के साथ बेहद खुश और बेफिक्र होकर रह रही हूं। मैं इस सराहनीय पहल के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का हृदय से धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने हम जैसे परिवारों के अपने घर के … Read more

नारायणपुर के कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण अंतिम चरण में

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के कुनकुरी तहसील अंतर्गत नारायणपुर स्थित कपरी नाला में 2 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने और कृषि गतिविधियों को अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। कपरी नाला में निर्माणाधीन इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर उसका कृषि कार्यों में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है। स्टॉप डैम के निर्माण से वर्षा जल को रोककर उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और फसलों के बेहतर उत्पादन की संभावनाएं मजबूत होंगी। 150 हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित, सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 तक पहुंचने की संभावना कपरी नाला में स्टॉप डैम के निर्माण से लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद किसानों को आगामी कृषि सत्र 2027-28 से सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को समय पर फसलों की सिंचाई करने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह परियोजना उपयोगी साबित होगी, क्योंकि सिंचाई सुविधा के विस्तार से उनकी कृषि संबंधी कठिनाइयों में कमी आने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ भू-जल संवर्धन और ग्रामीण जनजीवन को मिलेगा लाभ कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण जल संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वर्षा ऋतु के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को रोककर उसका संचयन किया जा सकेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने और जल स्तर में सुधार होने की संभावना है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को निस्तारी संबंधी जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी। जल संचयन की इस व्यवस्था से स्थानीय जल संसाधनों के संरक्षण और उनके समुचित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने पर पेयजल स्रोतों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त कपरी नाला के आसपास स्थित शिव मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलने की संभावना है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि अधोसंरचना के विकास तथा किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जशपुर जिले में जल संरक्षण और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टॉप डैम से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत को नियंत्रित करने और किसानों की आय में वृद्धि के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ कृषि विकास को बढ़ावा देने वाली यह परियोजना क्षेत्र के ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों ने मुख्यमंत्री  साय के प्रति जताया आभार कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है। किसानों को उम्मीद है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और खेती-किसानी से जुड़ी उनकी समस्याओं में कमी आएगी। क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई सुविधा के विस्तार और जल संरक्षण की दिशा में इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

नरेला में दशहरा उत्सव की तैयारियों का मंत्री श्री सारंग ने लिया जायजा

भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के समस्त दशहरा मैदानों का निरीक्षण कर उत्सव की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने और आयोजन स्थलों पर नागरिकों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि दशहरा सत्य की असत्य पर विजय और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक पर्व है। नरेला विधानसभा में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दशहरा उत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह है और बड़ी संख्या में नागरिक उत्सव के साक्षी बनेंगे। जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस के अधिकारी आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हैं। नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मंत्री श्री सारंग ने दशहरा मैदानों में पर्याप्त बैठक व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थलों पर भीड़ के बेहतर प्रबंधन के साथ नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा सेवाओं और अग्निशमन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आगामी 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के आयोजन को लेकर सभी तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं, ताकि क्षेत्रवासी परिवार सहित उत्सव में शामिल होकर पर्व की खुशियां साझा कर सकें। प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से सभी दशहरा मैदानों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

नवरात्रि शक्ति की आराधना और नारी सम्मान का महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री निवास आज नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और गरबा की ताल के बीच पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित माताओं-बहनों, बेटियों एवं सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भक्ति के साथ नारी सम्मान का महापर्व है। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व हमें मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति होने के साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। गुजरात की धरती से निकली गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता के भाव को और मजबूत करते हैं। हमारे पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये परिवार और समाज को जोड़ने, आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आज गरबा देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ा है। बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और बेटियों की सहभागिता इस उत्सव को और विशेष बनाती है। महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल भाव है और महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आदरणीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संबल मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह हमारी मातृशक्ति के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं। माता कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ की धरती शक्ति आराधना की पावन भूमि मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है और यहां आदिशक्ति की आराधना की समृद्ध परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पूरा छत्तीसगढ़ शक्ति की आराधना में लीन दिखाई देता है। ये शक्तिपीठ केवल हमारी आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भूमिका मुख्यमंत्री  साय ने गुजराती समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुजराती समाज ने अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, सेवा भावना और सामाजिक एकता से देश के विकास में विशिष्ट पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी गुजराती समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव सभी समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाने की रही है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। विकसित भारत के निर्माण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में समाज की यह सहभागिता महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। माता रानी के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विभिन्न आयोग-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष  प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष  देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष  जयंती पटेल,  मितुल कोठारी,  नितिन डोलकिया,  महेंद्र कोडियार,  बाबू भाई पटेल,  अशोक पटेल,  मुकेश शाह,  गौरंग काचा,  कीर्ति व्यास,  राजेंद्र फौजदार सहित गुजराती समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

कृषक उन्नति योजना से शंकर प्रसाद की खेती को मिलेगा आर्थिक संबल, तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती पर मिलेंगे 45 हजार रुपये

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषक हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसानों को परंपरागत खेती के साथ नवाचार, उन्नत कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक संबल किसानों को खेती में नए प्रयोग करने और अपनी आय बढ़ाने के अवसर प्रदान कर रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लक्ष्मणगढ़ निवासी किसान  शंकर प्रसाद ने भी परंपरागत धान की जगह सुगंधित धान की खेती अपनाकर इस दिशा में नई पहल की है। उन्हें योजना के अंतर्गत तीन एकड़ कृषि भूमि के लिए कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम लक्ष्मणगढ़ के कृषक  शंकर प्रसाद ने इस वर्ष अपनी तीन एकड़ कृषि भूमि में सुगंधित धान की खेती की है। उन्होंने परंपरागत धान की खेती से अलग हटकर सुगंधित धान का चयन किया है, जिससे बेहतर उत्पादन और आर्थिक लाभ की संभावनाएं विकसित हो सकें। खेती में बदलाव का उनका यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की प्रोत्साहन आधारित योजनाएं किसानों को कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित कर रही हैं। तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती, बेहतर आमदनी की उम्मीद किसान  शंकर प्रसाद ने इस वर्ष अपनी खेती में बदलाव करते हुए तीन एकड़ भूमि में सुगंधित धान लगाया है। सुगंधित धान की खेती से उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। परंपरागत धान की जगह नई किस्म की खेती अपनाने का उनका निर्णय कृषि गतिविधियों में विविधता लाने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  शंकर प्रसाद की इस पहल को कृषक उन्नति योजना से आर्थिक संबल भी मिलेगा। योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की दर से तीन एकड़ के लिए उन्हें कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होगी। इससे खेती से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करने और आगामी कृषि कार्यों की तैयारी में सहायता मिल सकेगी। शासन की यह सहायता उन्हें खेती में नई तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी। 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से खेती को मिलेगी मजबूती खेती में बीज, खाद, कृषि आदान और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए किसानों को आर्थिक संसाधनों की जरूरत होती है। विशेषकर सीमित कृषि भूमि वाले किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत  शंकर प्रसाद को मिलने वाली 45 हजार रुपये की राशि उनके कृषि कार्यों को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी। इस राशि का उपयोग वे खेती की आवश्यकताओं को पूरा करने, आगामी फसल की तैयारी और बेहतर कृषि प्रबंधन के लिए कर सकेंगे। प्रोत्साहन राशि मिलने से किसानों को कृषि कार्यों में निवेश करने का अवसर मिलता है और वे अपनी खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। फसल विविधीकरण और कृषि नवाचार से बढ़ेंगी किसानों की संभावनाएं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों को परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ फसल विविधीकरण और उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि में विविधता लाने से किसानों को बाजार की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन करने के अवसर मिलते हैं। सुगंधित धान जैसी विशिष्ट किस्मों की खेती भी किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं विकसित कर सकती है।  शंकर प्रसाद द्वारा तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती का निर्णय इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। उनकी पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी खेती में नए प्रयोग करने, फसल चयन में बदलाव लाने और उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों की समृद्धि को मिल रही प्राथमिकता मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कृषक उन्नति योजना किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ कृषि गतिविधियों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई किसान  शंकर प्रसाद की यह कहानी शासन की कृषक हितैषी योजनाओं से मिलने वाले प्रोत्साहन का उदाहरण है। तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती अपनाकर उन्होंने कृषि नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं योजना से मिलने वाली 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके प्रयासों को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी। शासन की सहायता और किसानों की मेहनत से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं तथा ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

महिलाएं शुरू करें छोटे उद्योग: शिवराज सिंह चौहान

रायसेन और विदिशा से पायलट अभियान की शुरुआत, हर गांव के हर परिवार को आजीविका से जोड़कर बनाएंगे गरीबी मुक्त गांव- शिवराज सिंह चौहान कृषि और पशुपालन एक ही सिक्के के दो पहलू, महिला किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला- शिवराज सिंह चौहान खेती करने वाली बहनें ही असली महिला किसान, उन्हें औपचारिक पहचान दिलाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास करेंगे- शिवराज सिंह चौहान   महिला किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने के लिए करेंगे प्रयास- शिवराज सिंह चौहान महिला FPO को प्रोत्साहन, खरीद में वरीयता और महिला किसानों के लिए कृषि योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने पर होगा काम- शिवराज सिंह चौहान बहनों को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाना हमारा संकल्प, महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो देश विकसित बनेगा- शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 46 सड़कों का भूमि पूजन, गांव-गांव तक पहुंचेंगी बेहतर सड़कें- शिवराज सिंह चौहान नई दिल्ली केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र सांची के दौरे पर रहे। इस दौरान वे महिला किसान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 46 सड़कों के भूमिपूजन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। महिला किसान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेतों में काम करने से लेकर पशुपालन, दूध उत्पादन, चारा प्रबंधन और पशुओं की देखभाल तक महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसके बावजूद उन्हें औपचारिक रूप से किसान की पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, जो बहनें अपने हाथों से खेती का काम करती हैं, वो महिला किसान हैं और उन्हें औपचारिक पहचान दिलाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास किए जाएंगे। खेती करने वाली बहनों को मिले महिला किसान की औपचारिक पहचान केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान की पहचान केवल जमीन के स्वामित्व से नहीं, बल्कि खेती में उसके वास्तविक योगदान से भी होनी चाहिए। जो व्यक्ति खेत का मालिक है, लेकिन खेती के काम में भागीदारी नहीं करता, उसकी तुलना उस व्यक्ति से नहीं की जा सकती जो अपने हाथों से खेत में मेहनत करता है। उन्होंने कहा कि अनाज उत्पादन के साथ फल, सब्जियां, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन और मुर्गी पालन भी कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों में महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती हैं। गाय-भैंस की सेवा, दूध निकालना, चारा काटना और पशुओं की देखभाल जैसे अनेक काम महिलाएं करती हैं। इसलिए महिला किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में वे इस विषय को संबंधित मंचों पर पूरी मजबूती से उठाएंगे। रायसेन-विदिशा से शुरू होगा हर परिवार को आजीविका से जोड़ने का अभियान केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि रायसेन और विदिशा से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक ऐसी योजना की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य हर गांव के हर परिवार को कम से कम एक आजीविका से जोड़ना है। इसका लक्ष्य गांवों को गरीबी मुक्त बनाना और परिवारों की आय के स्थायी साधन विकसित करना है। उन्होंने कहा कि गरीबी से मुक्ति केवल सहायता देने से नहीं, बल्कि परिवारों को रोजगार और कमाई के अवसर उपलब्ध कराने से मिलेगी। खेती, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग, पशुपालन, बकरी पालन, मछली पालन और छोटे व्यवसायों के माध्यम से परिवारों को आजीविका से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि हर परिवार के पास आय का साधन होना चाहिए और इस अभियान में महिला किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। महिला किसान अब छोटे उद्यमों से आगे बढ़कर बनेंगी उद्यमी केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महिलाओं को केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बड़ी, पापड़, अचार बनाने, बकरी पालन, मुर्गी पालन और पशुपालन जैसे कार्यों के साथ अब उन्हें कृषि आधारित छोटे उद्योगों की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में दलहन का उत्पादन अधिक होता है, तो वहां छोटी दाल मिल स्थापित की जा सकती है। इसी तरह तेल उत्पादन, टमाटर से केचप बनाने और अन्य कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के छोटे उद्योग शुरू किए जा सकते हैं। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनें और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं में उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने की है, ताकि वे अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ाकर अधिक आय अर्जित कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महिला उद्यमिता के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता पर होगा काम केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि महिला किसानों और महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सेवाएं, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, लाइसेंस और दस्तावेजीकरण जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसे ऋण उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे, जिनमें गारंटी की आवश्यकता कम हो या न हो, ताकि आर्थिक संसाधनों की कमी उनके उद्यम शुरू करने में बाधा न बने। उन्होंने महिला केंद्रित उद्यमिता योजनाओं की आवश्यकता पर सहमति जताते हुए कहा कि महिलाओं को छोटे उद्योग स्थापित करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए।