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AI चैटबॉट से बदतमीजी करने पर लग सकता है अकाउंट पर प्रतिबंध? जानें Anthropic की नई पॉलिसी

 नई दिल्ली ChatGPT या Claude से जवाब पसंद नहीं आया तो क्या आप उसे गाली दे सकते हैं? AI कंपनी Anthropic ने अपने चैटबॉट Claude के लिए ऐसा नियम बनाया है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या AI को अपशब्द कहने पर अकाउंट बैन हो सकता है. कंपनी का कहना है कि बार-बार बिना किसी वजह के AI के साथ क्रूर या अपमानजनक व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AI के जवाब से नाराज होने या उसकी आलोचना करने पर आपका अकाउंट बंद हो जाएगा।  आम तौर पर देखा गया है कि लोग AI बॉट से मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलने पर गलत भाषा का इस्तेमाल करते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करने से यूजर्सा का ही नुकसान हो सकता है. लेकिन कैसे? आइए जानते हैं।  सोचिए, आपने AI से कोई जरूरी काम करने को कहा. उसने गलत जवाब दे दिया. आपने दोबारा पूछा, फिर भी सही जवाब नहीं मिला. गुस्से में आपने उसे गाली दे दी. अब सवाल है कि क्या AI कंपनी आपके इस व्यवहार के लिए आपका अकाउंट बंद कर सकती है?. यह सवाल इन दिनों इसलिए चर्चा में है, क्योंकि Claude AI बनाने वाली कंपनी Anthropic ने अपनी यूज पॉलिसी में AI मॉडल के साथ बार-बार बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार करने पर रोक लगाई है. कंपनी ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी नई पॉलिसी का एलान किया. यह नियम 12 नवंबर से लागू होगा।  क्या AI को गाली देने पर अकाउंट बैन हो जाएगा? Anthropic ने अपनी पॉलिसी में 'सस्टेन्ड एंड नीडलेस एब्यूसिव ऑर क्रूएल बिहेवियर' यानी लगातार और बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार पर रोक लगाई है. कंपनी के मुताबिक, यह नियम सिर्फ बेहद गंभीर मामलों के लिए है, जहां यूजर बार-बार ऐसा करता है और उसके पीछे कोई साफ मकसद नजर नहीं आता।  इसका मतलब है कि अगर Claude कोई गलत जानकारी देता है और आप उसे बताते हैं कि उसका जवाब गलत है, तो इसे अपने आप नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. आप उससे असहमत हो सकते हैं, उसके जवाब पर सवाल उठा सकते हैं और उसे बेहतर जवाब देने के लिए कह सकते हैं. यहां तक कि मॉडल की जांच करने या किसी कहानी के लिए गंभीर और अंधेरे विषयों पर लिखने को कहना भी इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।  जब AI को दर्द नहीं होता, तो उसे गाली देने पर रोक क्यों? यही इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प सवाल है. इंसान को गाली देने से उसे दुख हो सकता है, उसका अपमान महसूस हो सकता है और रिश्ते खराब हो सकते हैं. लेकिन आज के AI चैटबॉट इंसानों की तरह भावनाएं महसूस करते हैं, इसका कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. वे भाषा और डेटा के पैटर्न के आधार पर जवाब बनाते हैं।  Claude भी इंसान की तरह नाराज होकर जवाब नहीं देता. वह ऐसा जवाब बना सकता है, जिससे लगे कि उसे बुरा लगा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह सचमुच दुखी हुआ है. Anthropic ने भी माना है कि AI के किसी तरह के अंदरूनी अनुभव या चेतना होने का सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।  फिर कंपनी यह नियम क्यों ला रही है? इसकी एक वजह यह हो सकती है कि AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रहा. लोग उससे लंबे समय तक बातचीत करते हैं, काम करवाते हैं और कई बार उसे इंसान की तरह संबोधित भी करते हैं. ऐसे में कंपनियां यह तय करना चाहती हैं कि उनके प्लेटफॉर्म पर किस तरह का व्यवहार स्वीकार किया जाएगा।  हालांकि, AI के साथ अच्छे व्यवहार की बात करना और यह दावा करना कि AI को इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं, दो अलग बातें हैं. किसी कंपनी का अपने चैटबॉट के लिए व्यवहार के नियम बनाना यह साबित नहीं करता कि उस चैटबॉट को इंसान की तरह दर्द या अपमान महसूस होता है।  क्या AI से बदतमीजी करना गलत है? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस नजरिए से देखते हैं. अगर बात सिर्फ AI की भावनाओं की है, तो अभी यह साबित नहीं है कि चैटबॉट को इंसान की तरह अपमान महसूस होता है. इसलिए उसे गाली देने की तुलना किसी इंसान को गाली देने से सीधे नहीं की जा सकती।  लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सवाल है कि क्या AI से बात करते समय हमारी भाषा और आदतों का कोई महत्व नहीं है. मान लीजिए कोई व्यक्ति रोज अपने चैटबॉट से बेहद आक्रामक तरीके से बात करता है. क्या इससे उसके इंसानों के साथ व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है? इसका जवाब अभी आसान नहीं है. यह कहना भी गलत होगा कि AI को गाली देने वाला हर व्यक्ति असल जिंदगी में भी दूसरों से बदतमीजी करता है।  फिर भी, भाषा की आदतें मायने रखती हैं. अगर आप AI से नाराज हैं, तो उसे साफ-साफ बता सकते हैं कि जवाब गलत है, जानकारी अधूरी है या उसे दोबारा जांचने की जरूरत है. गाली देने के बजाय निर्देश स्पष्ट करने से बातचीत काम की दिशा में आगे बढ़ सकती है।  AI से विनम्रता से बात करना जरूरी नहीं कि उसके लिए हो. यह आपके संवाद करने के तरीके का हिस्सा भी हो सकता है. वहीं, हर बार 'प्लीज' और 'थैंक यू' कहना भी जरूरी नहीं है. कई कामों में छोटा और स्पष्ट निर्देश ही काफी होता है।  क्या गाली देने से AI का जवाब खराब हो जाता है? यह कहना सही नहीं होगा कि गाली देने पर हर AI जानबूझकर खराब जवाब देगा या विनम्र होने पर हर बार बेहतर जवाब देगा. AI का जवाब मॉडल, सवाल, दिए गए संदर्भ और निर्देशों पर निर्भर करता है. अलग-अलग रिसर्च में भाषा के लहजे का असर अलग पाया गया है. कुछ मामलों में विनम्र या विस्तार से दिए गए निर्देश जवाब के स्वरूप को बदल सकते हैं, लेकिन सिर्फ 'प्लीज' लिखने से जवाब सही होने की गारंटी नहीं मिलती।  इसलिए बेहतर तरीका है कि आप AI को बताएं कि उससे क्या चाहिए. अगर उसने गलती की है, तो गलती का हिस्सा दिखाकर सुधार मांगें. अगर … Read more

IRCTC Travel Insurance: 45 पैसे में मिलेगा ₹10 लाख तक का कवर, जानें कैसे उठाएं लाभ

 नई दिल्ली ट्रेन का टिकट बुक करते समय अगर आप 500, 1000 या उससे भी ज्यादा रुपये खर्च कर रहे हैं, तो क्या सिर्फ 45 पैसे बचाने के लिए एक जरूरी सुविधा छोड़ देंगे? आईआरसीटीसी (IRCTC) के जरिए ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता है. यह अनिवार्य नहीं है, यानी बीमा लेना या नहीं लेना पूरी तरह यात्री की मर्जी पर निर्भर करता है. लेकिन किसी गंभीर रेल दुर्घटना में यही छोटी-सी रकम यात्री या उसके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक मदद का जरिया बन सकती है।  मौजूदा ऑनलाइन टिकट बीमा व्यवस्था के तहत पात्र यात्री की दुर्घटना में मौत या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है. स्थायी आंशिक दिव्यांगता, अस्पताल में इलाज और मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने के खर्च के लिए भी बीमा लाभ का प्रावधान है. हालांकि, बीमा का भुगतान तभी होगा, जब घटना पॉलिसी के दायरे में आती हो और उसकी सभी शर्तें पूरी होती हों।  काउंटर टिकट पर भी है ये सुविधा? अब तक आईआरसीटीसी ऐप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग में यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड को 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशनों के ​रिजर्वेशन काउंटरों से टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक भी बीमा सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यात्रा बीमा के दायरे में लाना है।  सिर्फ 45 पैसे में क्या-क्या मिलता है? आईआरसीटीसी ऐप से ई-टिकट बुक करते समय यात्रियों को बीमा का विकल्प दिया जाता है. इसका प्रीमियम टैक्स सहित प्रति यात्री 45 पैसे है. यात्री चाहे तो इसे चुन सकता है या बिना बीमा के भी टिकट बुक कर सकता है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बीमा का विकल्प चुनना और बीमा के लिए पात्र होना दो अलग बातें हैं. बीमा लेने के बाद भी मुआवजा घटना की प्रकृति, नुकसान और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर ही मिलता है. अगर आप ट्रेन से नियमित सफर करते हैं, तो टिकट बुक करते समय इस विकल्प को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी शर्तें समझना फायदेमंद हो सकता है. बहुत कम प्रीमियम में मिलने वाला यह कवर किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहारा दे सकता है।  ट्रेन हादसे में कितना मुआवजा मिलेगा? मौजूदा आईआरसीटीसी ऑनलाइन टिकट ट्रैवल इंश्योरेंस में अलग-अलग तरह के दावों के लिए अधिकतम बीमा लाभ इस प्रकार बताया गया है।  बीमा दावे का प्रकार     अधिकतम बीमा राशि दुर्घटना में यात्री की मौत     ₹10 लाख स्थायी पूर्ण दिव्यांगता     ₹10 लाख स्थायी आंशिक दिव्यांगता     ₹7.5 लाख तक दुर्घटना में घायल होने पर अस्पताल का खर्च     ₹2 लाख तक मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने का खर्च     ₹10,000 तक ध्यान दें: ये अधिकतम बीमा राशियां हैं, हर मामले में मिलने वाली तय रकम नहीं. वास्तविक भुगतान नुकसान की स्थिति और बीमा पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक तय होगा।  यात्री की मौत होने पर परिवार को कैसे मिलेगी मदद? किसी रेल दुर्घटना में यात्री की मौत होने पर बीमा की रकम नामित व्यक्ति यानी नॉमिनी या पात्र कानूनी वारिस को मिल सकती है. इसलिए टिकट बुक करते समय बीमा का विकल्प चुनने के साथ उससे जुड़ी जानकारी और नॉमिनी का विवरण भी ध्यान से भरना चाहिए. दावा करने के लिए आम तौर पर ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:     बीमा का दावा फॉर्म     रेलवे प्राधिकरण की दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट     मृत यात्री की पहचान से जुड़ी रिपोर्ट     नॉमिनी के पहचान पत्र     बैंक खाते का विवरण और कैंसल्ड चेक अगर बीमा में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं है, तो कानूनी वारिस होने का प्रमाण, उत्तराधिकार संबंधी आदेश या पात्रता साबित करने वाले अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।  दिव्यांगता या इलाज के लिए कितना मुआवजा? बीमा का लाभ केवल यात्री की मौत होने पर ही नहीं मिलता. पॉलिसी की शर्तें पूरी होने पर स्थायी दिव्यांगता और दुर्घटना में घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए भी दावा किया जा सकता है. स्थायी दिव्यांगता के मामले में रेलवे की रिपोर्ट, डॉक्टर की रिपोर्ट, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, प्राथमिकी (FIR) की प्रति और संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं।  अस्पताल में इलाज के मामले में रेलवे प्राधिकरण की रिपोर्ट, अस्पताल से छुट्टी मिलने का सारांश, इलाज के मूल बिल, भुगतान की रसीदें, डॉक्टर की पर्चियां और जांच रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है. दस्तावेजों की अंतिम सूची बीमा कंपनी और दावे की प्रकृति पर निर्भर करेगी. इसलिए दावा करने से पहले संबंधित बीमा कंपनी से जरूरी कागजात की पुष्टि कर लें।  बीमा क्लेम करने के लिए कितना समय मिलता है? मौजूदा आईआरसीटीसी ई-टिकट बीमा पॉलिसी के मुताबिक, बीमित घटना के चार महीने के भीतर यात्री, नॉमिनी या कानूनी वारिस को बीमा कंपनी के नजदीकी कार्यालय में लिखित दावा प्रस्तुत करना होता है. दावा करने के लिए ये कदम उठाएं:     बीमा कंपनी को सूचना दें: घटना की जानकारी देकर दावा करने की प्रक्रिया समझें.     रेलवे की रिपोर्ट जुटाएं: दुर्घटना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रखें.     जरूरी प्रमाण तैयार करें: मौत, दिव्यांगता या इलाज के अनुसार सभी दस्तावेज इकट्ठा करें.     दावा फॉर्म भरें: पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण और अन्य जरूरी कागजात जमा करें.     अतिरिक्त दस्तावेज दें: बीमा कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं.     रिकॉर्ड संभालकर रखें: जमा किए गए दस्तावेजों और दावे की रसीद की प्रतियां अपने पास रखें.     समयसीमा और दस्तावेजों की जानकारी संबंधित बीमा कंपनी से जरूर जांच लें, ताकि जरूरी प्रक्रिया में देरी न हो. किन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा बीमा का लाभ? यह समझना जरूरी है कि 45 पैसे का बीमा लेने का मतलब यह नहीं है कि यात्रा के दौरान होने वाली हर घटना पर मुआवजा मिलेगा. पॉलिसी में कुछ परिस्थितियों को बीमा के दायरे से बाहर रखा गया है. इनमें शामिल हो सकती हैं:     जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं     आत्महत्या या आत्महत्या की कोशिश … Read more

Shardiya Navratri 2026: सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें प्रिय भोग, शुभ रंग और पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी का यह रूप जितना उग्र और शक्तिशाली है, उतना ही भक्तों के लिए कल्याणकारी भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की बाधाओं से लड़ने का साहस प्रदान करती हैं। उन्हें शुभ फल देने वाली देवी होने के कारण 'शुभंकरी' नाम से भी पुकारा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, मंत्र, आरती, कथा और शुभ रंग के बारे में। नवरात्रि का सातवां दिन कब है? वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि 17 अक्तूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का स्मरण करने से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। भक्त उनसे जीवन की परेशानियों को दूर करने और परिवार की सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। देवी कालरात्रि का स्वरूप पुराणों के अनुसार देवी दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को उत्पन्न किया था। इनके शरीर का रंग घने अंधकार जैसा है, बिखरे हुए बाल, गले में विद्युत जैसी माला और तीन नेत्र इनकी विशेषता है। इनके सांसों से अग्नि ज्वालाएं निकलती रहती हैं और इनका वाहन गर्दभ है। वर और अभय मुद्रा में हाथ तथा खड्ग और काँटे का अस्त्र धारण करने वाली मां कालरात्रि भयानक स्वरूप के बावजूद शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।   मां कालरात्रि की पूजा विधि     नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।     इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।     मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने दीपक जलाएं।     देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर मंत्रों का जाप करें।     मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।     अंत में मां कालरात्रि की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें। मां कालरात्रि का प्रिय भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ विशेष प्रिय माना जाता है। इस दिन देवी को गुड़, गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ अर्पित किया जा सकता है। भोग लगाते समय शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। मान्यता है कि देवी को गुड़ का भोग लगाने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और फूल नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह रंग शक्ति, स्थिरता और सकारात्मकता का प्रतीक है। मां कालरात्रि की पूजा में चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़हल या अन्य सुगंधित फूल भी चढ़ा सकते हैं। मां कालरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों ने तीनों लोकों में उत्पात मचाना शुरू किया, तब देवता चिंतित होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं की रक्षा के लिए मां दुर्गा ने असुरों से युद्ध किया। युद्ध के दौरान रक्तबीज नामक दैत्य को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की प्रत्येक बूंद धरती पर गिरते ही उसके समान एक नया दैत्य पैदा हो जाएगा। रक्तबीज का वध करना कठिन हो गया, क्योंकि उसके रक्त से लगातार नए दैत्य उत्पन्न होने लगे। तब देवी ने उग्र कालरात्रि स्वरूप धारण किया। मान्यता है कि मां ने रक्तबीज के शरीर से निकलने वाले रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया और उसका संहार किया। इस प्रकार देवी ने देवताओं को संकट से मुक्त कराया और अधर्म पर विजय प्राप्त की। मां कालरात्रि की यह कथा बुराई के विरुद्ध संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का संदेश देती है। नवरात्रि के सातवें दिन भक्त देवी की पूजा करके जीवन से भय और नकारात्मकता दूर करने तथा शक्ति और सद्बुद्धि प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। मां कालरात्रि की आरतीः कालरात्रि जय जय महाकाली।  काल के मुंह से बचाने वाली। दूष्ट संचारक नाम तुम्हारा।  महाचेही तेरा अवतारा ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देख तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी।  गावे स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय ॥ मां कालरात्रि के प्रिय मंत्रः ॐ कालरात्र्यै नमः बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः देवी मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः ॥ प्रार्थना या स्तुति मंत्रः या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥  

Festive Inflation: रसोई से बाजार तक महंगाई का असर, त्योहार पर खर्च करना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली    सैलरी वहीं की वहीं थमी हुई है, लेकिन महंगाई है कि रुकने का नाम नहीं ले रही. जिसने रसोई से लेकर बाजार तक का पूरा गणित बिगाड़ दिया है. लेकिन त्योहार है, तो खरीदारी भी होगी. चाहे इसके लिए कर्ज ही क्यों न लेना पड़े, दोस्तों से उधार मांगना पड़े या फिर क्रेडिट कार्ड सहारा बने, लोग पीछे नहीं हटते।  दरअसल, इस त्योहारी सीजन में आम आदमी की जेब खाली हो चुकी है. पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने सभी बुनियादी चीजों को महंगा कर दिया है. इस बार दिवाली का उल्लास तो भरपूर मनेगा, लेकिन इसके ठीक बाद गहराता आर्थिक संकट हर मिडिल क्लास फैमिली की नींद उड़ाने के लिए तैयार है।  त्योहार छोड़िए, आज मध्यम वर्गीय परिवार के सामने सबसे बड़ा संकट बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का है. पिछले कुछ समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में जो तेजी आई है, उसने हर चीज का गणित बिगाड़ दिया है. क्योंकि जब ईंधन महंगा होता है, तो हर छोटी-बड़ी चीज चाहे वह सब्जी हो, दाल हो, कपड़े हों या फिर सजावट के सामान, सब महंगे हो जाते हैं. इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है और कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर भागती हैं।  हर घर बिगड़ रहा है बजट खाने-पीने की चीजें जैसे तेल, आटा, मसाले और सब्जियां आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. गृहिणियां समझ नहीं पा रही हैं कि सीमित बजट में घर आखिर कैसे चलाएं? क्योंकि नौकरीपेशा लोगों के वेतन में या तो कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है या फिर वह महंगाई दर के मुकाबले बहुत कम है. ऐसे में अधिकतर परिवारों की मंथली बचत पहले ही खत्म हो चुकी है।  अब सवाल उठता है कि जब रोजमर्रा की जिंदगी चलाना ही मुश्किल है, तो ऐसे में त्योहार पर खर्च के लिए पैसे कहां से आएंगे? जबकि इस बीच बाजार लुभावनी स्कीमों से पटा पड़ा है, 'अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें', 'नो कॉस्ट ईएमआई', और 'भारी छूट'. आम आदमी भी इन विज्ञापनों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं. यहीं से कर्ज जाल में फंसना शुरू हो जाता है।  नए कपड़े, एलईडी टीवी, महंगे स्मार्टफोन और सोने के गहने खरीदना अब आसान हो गया है, क्योंकि लोग तुरंत भुगतान करने के बजाय किस्तों का सहारा लेते हैं. लेकिन ये किस्तें भारी पड़ती है, क्योंकि ऑफर के चक्कर में कई बार लोग आमदनी से ज्यादा खर्च कर देते हैं. लोग यह भूल जाते हैं कि क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर लगने वाला ब्याज उनकी वित्तीय कमर तोड़ सकता है।  इस बीच जो पैसा अगले कुछ महीनों के राशन, बच्चों की फीस या इमरजेंसी के लिए होना चाहिए था, वह त्योहारी बिल चुकाने में चला जाता है. एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने की यह आदत परिवारों को कर्ज के कुचक्र में धकेल देती है।  क्या वाकई कोई विकल्प नहीं बचा है? आम आदमी के पास क्या सचमुच कोई दूसरा रास्ता नहीं है? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है, जो इस व्यवस्था से जूझ रहा है. क्योंकि लोग त्योहार आने से पहले कोई आर्थिक योजना नहीं बनाते. जब समय सिर पर आता है, तो बिना सोचे-समझे खर्च कर देते हैं. लेकिन ये हकीकत है कि महंगाई और आमदनी का यह अंतर रातो-रात खत्म नहीं होने वाला है, ये आंकड़े भी चीख-चीख कर बता रहे हैं।  दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, बढ़ती महंगाई की वजह से केंद्रीय बैंकों को कर्ज महंगा करना पड़ रहा है. अमेरिका जैसा विकसित देश महंगाई से जूझ रहा है, और फेड रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने के लिए लाचार है. भारत में भी पिछले हफ्ते ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया, जबकि इस साल रेपो रेट और 50 बेसिस प्वाइ्ंट्स बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।   फेस्टिव सीजन से ठीक पहले रेपो रेट बढ़ने से तमाम तरह के कर्ज महंगे हो गए हैं. होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों की EMI बढ़ गई है. पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को लोन की बढ़ी हुईं किस्तें आने वाले दिनों में और परेशान करेंगी।  आंकड़े दे रहे सबूत रही सही कसर महंगाई दर ने पूरी कर दी है. खुदरा महंगाई दर 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि थोक महंगाई दर की बात करें, तो ये भी डबल डिजिट में पहुंच गई है. दशहरा से ठीक पहले दोनों आंकड़े सामने आए हैं, सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई. जबकि अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% थी. खाने-पानी के चीजें से तेजी से महंगी हुई हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई. खासकर सब्जियों, दालों और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य चीजों के महंगे होने से आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ा है. प्याज, चीनी और खाने के तेल की कीमतों में साल भर के अंदर बड़ा इजाफा हुआ है।  खुदरा के बाद थोक महंगाई दर ने आम आदमी को झटका दे दिया है. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) सितंबर में उछलकर 11.39% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92% थी. थोक बाजार में ईंधन, बिजली और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में आई भारी तेजी इसके मुख्य कारण रहे।  थोक महंगाई का यह स्तर बताता है कि आने वाले दिनों में कंपनियों की लागत बढ़ने से बाजार में सामान और ज्यादा महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा बोझ अंतिम उपभोक्ता यानी आम जनता को ही उठाना पड़ेगा. सितंबर में खाद्य सूचकांक की महंगाई बढ़कर 8.66% हो गई, जो कि अगस्त में 7.05 फीसदी थी. यानी त्योहारों के बीच आम आदमी को महंगाई की चौतरफा मार पड़ने वाली है।  इसलिए आखिर में आपको सलाह दी जाती है, त्योहार हर साल आते हैं, अगले साल भी आएंगे, खुद को आर्थिक संकट में डालकर फिजूलखर्ची से बचने में ही भलाई है. बाजार जाने से पहले ही तय कर लें कि इस बार आप कुल कितने पैसे खर्च करेंगे? उस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा खर्च न करें. क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि इससे खर्च करने का … Read more

शनिवार का राशिफल: 17 अक्टूबर को इन राशियों को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

मेष राशि– प्रोफेशनल लाइफ में कार्यों की तारीफ होगी। पारिवारिक जीवन की दिक्कतें दूर होंगी। आज आप फैमिली के साथ ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। लव लाइफ में खुशनुमा माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ समय व्यतीत करेंगे। इससे रिश्तों में प्यार और रोमांस जगेगा। स्वास्थ्य पहले से अच्छा रहेगा। वृषभ राशि– दिन मिलाजुला रहने वाला है। दान-पुण्य के कार्यों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है। धार्मिक कार्यों में दिलचस्पी बढ़ेगी। व्यापार में विस्तार होगा। प्रेम जीवन में कुछ समस्याएं आ सकती हैं। स्टूडेंट्स को तनाव महसूस हो सकता है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। मिथुन राशि- दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में समस्याएं हो सकती हैं। कर्क राशि वाले आज यात्रा पर जा सकते हैं। अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना होगा। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अपनी डाइट में प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर फूड शामिल करें। लव लाइफ में दिक्कतें रहेंगी। खर्चों पर थोड़ा ध्यान दें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। मन को शांत रखें। अशांति महसूस हो सकती है। करियर को लेकर मन चिंतित रहेगा। निवेश के नए मौकों पर नजर रखें। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की प्रॉब्लम को सुलझाने के लिए परिजनों से सुझाव लें। वाणी पर नियंत्रण रखें। तुला राशि- तुला राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन शुभ रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में कार्यों की तारीफ होगी। पारिवारिक जीवन की दिक्कतें दूर होंगी। आज आप फैमिली के साथ ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। लव लाइफ में खुशनुमा माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ समय व्यतीत करेंगे। इससे रिश्तों में प्यार और रोमांस जगेगा। स्वास्थ्य पहले से अच्छा रहेगा। धनु राशि- आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। घर के छोटे भाई-बहन करियर में नई उपलब्धि हासिल करेंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। ऑफिस में खूब मान-सम्मान मिलेगा। स्टूडेंट्स को शैक्षिक कार्यों में अपार सफलता मिलेगा। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। मकर राशि- मकर राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में समस्याएं हो सकती हैं। कर्क राशि वाले आज यात्रा पर जा सकते हैं। अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना होगा। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अपनी डाइट में प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर फूड शामिल करें। लव लाइफ में दिक्कतें रहेंगी। खर्चों पर थोड़ा ध्यान दें। मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए शुभ दिन कहा जा सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। घर के छोटे भाई-बहन करियर में नई उपलब्धि हासिल करेंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। ऑफिस में खूब मान-सम्मान मिलेगा। स्टूडेंट्स को शैक्षिक कार्यों में अपार सफलता मिलेगा। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा।

जन्म-मृत्यु पंजीयन में शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करें : सचिव शुक्ल

भोपाल  मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  मन् शुक्ल ने शुक्रवार को सीहोर जिले का भ्रमण कर जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था और विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में जन्म-मृत्यु का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। साथ ही आम नागरिकों को पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। सचिव  शुक्ल ने नगरपालिका सीहोर में जन्म-मृत्यु पंजीयन संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया और प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने हितग्राहियों एवं आम नागरिकों से संवाद कर पंजीयन प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने तीन हितग्राहियों को जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रमाण-पत्र भी वितरित किए।  शुक्ल ने कलेक्टर कार्यालय स्थित जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय का निरीक्षण कर विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने सांख्यिकी संबंधी कार्यों के साथ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना एवं सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया की जानकारी ली। जन्म-मृत्यु के ऑनलाइन पंजीयन की समीक्षा करते हुए उन्होंने पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। सचिव  शुक्ल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत भारत सरकार के ई-साक्षी पोर्टल की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। उन्होंने पोर्टल पर सांसदों की अनुशंसा से कार्यों की स्वीकृति एवं राशि जारी करने की प्रक्रिया का कर्मचारियों से व्यावहारिक प्रदर्शन प्राप्त किया। इसके बाद नगरपालिका सीहोर एवं ग्राम पंचायत जहांगीरपुरा में योजना के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों का मौके पर भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संयुक्त संचालक आर्थिक एवं सांख्यिकी  विश्वजीत रायकवार, जिला योजना अधिकारी  संजय लक्केवार, कार्यपालन यंत्री  ए.के. पंथी, सहायक यंत्री मती ऐश्वर्या मोखले, सहायक यंत्री नगर पालिका  विजय कोली, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार  अश्फाक खान सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

पीएम किसान सम्मान निधि बनी मेघमणि साहू की खेती का सहारा, बीज-खाद और कृषि कार्यों के खर्चों में मिली राहत

रायपुर खेती-किसानी में समय पर बीज, खाद और अन्य जरूरी सामग्रियों की व्यवस्था करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सलखन निवासी किसान  मेघमणि साहू भी इस योजना का लाभ लेकर खेती के खर्चों का बेहतर प्रबंधन कर रहे हैं। उनके लिए सम्मान निधि की राशि कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में सहायक बन रही है।  मेघमणि साहू लगभग 3 एकड़ 25 डिसमिल कृषि भूमि पर खेती करते हैं। खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल की बुआई से लेकर अन्य कृषि कार्यों तक उन्हें बीज, खाद और विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इन कार्यों के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना जरूरी होता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत उनके बैंक खाते में आने वाली सहायता राशि से उन्हें कृषि संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सुविधा मिल रही है। सम्मान निधि से खेती के जरूरी खर्चों में मिल रही मदद  मेघमणि साहू बताते हैं कि खेती के दौरान कई छोटे-बड़े खर्च सामने आते हैं। फसल की बुआई के समय बीज और खाद की व्यवस्था करनी होती है, वहीं फसल की देखभाल के लिए भी विभिन्न सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली राशि इन जरूरतों को पूरा करने में उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। प्रत्येक किस्त में मिलने वाली 2 हजार रुपये की राशि से किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की सुविधा मिलती है। किसानों को आर्थिक संबल दे रही सम्मान निधि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र किसानों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सीधे बैंक खाते में राशि हस्तांतरित होने से किसानों को सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल हुई है। यह राशि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करने में सहायक होती है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान  मेघमणि साहू की यह ‘सेवा की कहानी’ दर्शाती है कि खेती के लिए मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता किसानों के दैनिक कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना खेती के खर्चों का प्रबंधन करने और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने का उपयोगी माध्यम बनी है।

नियद नेल्ला नार योजना से अबूझमाड़ के ग्राम बोरानिरपी में पहली बार पहुंची बिजली, रोशन हुआ पूरा गांव

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से पूरा गांव रोशन हो गया है।     जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम वनांचल ग्राम का विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, जिससे गांव के सभी 11 परिवारों को विद्युत सुविधा मिल गई है। वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित इन ग्रामीणों के लिए यह पहल उनके दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगी।    विद्युतीकरण और प्रशासनिक प्रयास कलेक्टर नारायणपुर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड नारायणपुर संभाग द्वारा ग्राम बोरानिरपी तक विद्युत सुविधा पहुंचाने के लिए आवश्यक लाइन विस्तार एवं विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया है। अबूझमाड़ की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और दूरस्थ बसाहटों के बीच विद्युत अधोसंरचना का विस्तार कर गांव के प्रत्येक परिवार तक बिजली पहुंचाई गई है।ग्रामीणों के जीवन में आएंगे सकारात्मक बदलावग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों के दैनिक जीवन में निम्नलिखित सुधार होने की उम्मीद हैरूशिक्षा को बढ़ावारू घरों में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध होने से बच्चों को शाम और रात्रि के समय पढ़ाई करने में आसानी होगी। दैनिक सुविधाएं ग्रामीणों को मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक विद्युत उपकरणों के उपयोग का लाभ मिलेगा। विद्युत सुविधा से संचार व्यवस्था बेहतर होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा भविष्य में पेयजल व्यवस्था, छोटे कृषि आधारित उपकरणों और स्थानीय स्वरोजगार के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों तक बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम बोरानिरपी का पूर्ण विद्युतीकरण इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जिससे अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

नोनी सुरक्षा योजना से बेटियों का भविष्य सुरक्षित, डेयरी और मछली पालन से ग्रामीणों को मिल रहे आय के नए अवसर

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही हैं। बेटियों के सुरक्षित भविष्य से लेकर किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, स्वरोजगार और ग्रामीण अधोसंरचना के विकास तक शासन की विभिन्न योजनाएं गांवों में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। सरगुजा जिले में इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों की कहानियां बताती हैं कि जब शासन की सहायता और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ जुड़ती है, तो सीमित संसाधनों के बीच भी आत्मनिर्भरता और खुशहाली की राह आसान होने लगती है। सरगुजा के ग्रामीण अंचलों में नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, वहीं राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित करने में मदद मिल रही है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ खेती और मछली पालन के अवसर बढ़ा रही हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुगम हो रही है। विकास की ये पहलें ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। नोनी सुरक्षा योजना से आंचल के सपनों को मिला आर्थिक संबल हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आत्मनिर्भर बनकर अपने सपनों को साकार करे। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेटियों के भविष्य की चिंता स्वाभाविक होती है। ऐसे परिवारों को छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना महत्वपूर्ण सहारा प्रदान कर रही है। अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी मती मानती राजवाड़े की बेटी आंचल राजवाड़े को इस योजना के अंतर्गत भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है। मानती राजवाड़े के लिए यह बॉन्ड केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद भी है। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार आंचल के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मिलने वाली राशि का उपयोग उसकी आगे की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा। इससे परिवार को भविष्य में शिक्षा संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सहायता मिलेगी। नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के प्रति परिवारों में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ उनकी शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डेयरी व्यवसाय ने बदली मनोज की आर्थिक स्थिति, प्रतिदिन 30 लीटर दूध बेचकर कर रहे आमदनी कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन बन रहा है। सरगुजा जिले के लमगांव निवासी  मनोज कुमार पटेल ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। शासन की सहायता और स्वयं की मेहनत से उन्होंने दूध उत्पादन एवं विक्रय का कार्य आगे बढ़ाया है। आज वे प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का विक्रय कर करीब 1,200 रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।  मनोज कुमार पटेल के अनुसार, दूध विक्रय से प्राप्त मासिक आय में पशुओं के चारे और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद लगभग 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। डेयरी व्यवसाय से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। खेती के साथ पशुपालन अपनाने से उनकी आय के स्रोतों में विविधता आई है। मनोज की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा और किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकते हैं। डेयरी व्यवसाय की विशेषता यह है कि इससे ग्रामीण परिवारों को केवल मौसमी कृषि आय पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। दूध उत्पादन और बिक्री से नियमित नकद आय प्राप्त होती है, जिसका उपयोग परिवार की दैनिक जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जा सकता है। पशुपालन आधारित ऐसी गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ स्वरोजगार को भी प्रोत्साहित कर रही हैं। आजीविका डबरी से फूना राम पहाड़ी कोरवा को मिला मछली पालन का अवसर ग्रामीण विकास में जल संरक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्षा जल का संचयन केवल सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि खेती के साथ मछली पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों का आधार भी बन सकता है। सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचल में रहने वाले  फूना राम पहाड़ी कोरवा के लिए आजीविका डबरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत उनकी खाली पड़ी जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल के संग्रहण और उसके उपयोग की सुविधा विकसित हुई। डबरी में संचित पानी से फूना राम को मछली पालन शुरू करने का अवसर मिला है। पहले अनुपयोगी पड़ी भूमि अब परिवार के लिए आजीविका की संभावनाएं पैदा कर रही है। मछली पालन से भविष्य में अतिरिक्त आय अर्जित करने का मार्ग खुला है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के लिए इस प्रकार की जल आधारित परिसंपत्तियां स्थानीय संसाधनों के उपयोग से आर्थिक गतिविधियां विकसित करने में सहायक हो सकती हैं। इसी प्रकार  बाबूनाथ के खेत में डबरी के गहरीकरण से जल संग्रहण क्षमता और सिंचाई सुविधा में सुधार हुआ है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से उन्हें सब्जी उत्पादन में सहायता मिली है, वहीं मछली पालन की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। डबरी के माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई, सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका के एक से अधिक साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण के कार्यों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर उनका लाभ और व्यापक हो सकता है। वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन कृषि उत्पादन बढ़ाने, अतिरिक्त फसलों की खेती और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में उपयोगी है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। 57.83 लाख रुपये से सड़क का नवीनीकरण, ग्रामीणों … Read more

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम

भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश अनुसार मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की समय-सारणी निर्धारित की गई है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने आयोग के निर्देश अनुसार प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को तदानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख तिथियाँ ▪ 2 नवंबर 2026 तक: मतदान केंद्रों का युक्तिकरण एवं पुनर्व्यवस्थापन ▪ 12 नवंबर 2026: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन ▪ 12 नवंबर – 11 दिसंबर 2026: दावे एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अवधि ▪ 28 दिसंबर 2026 तक: दावे एवं आपत्तियों का निराकरण ▪ 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन इस प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित समय-सारणी के अनुसार किया जाएगा।