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E20 Fuel Survey: आधे से ज्यादा कार मालिक असंतुष्ट, 66% बोले- माइलेज पर पड़ा बुरा असर

 नई दिल्ली कहते हैं बदलाव की कीमत चुकानी पड़ती है. लेकिन जब कीमत हर बार आम आदमी की जेब से ही निकले, तो सवाल उठना तय है. सरकार E20 पेट्रोल के फायदे गिना रही है, उधर पुराने पेट्रोल वाहन चलाने वाले लोग घटते माइलेज और बढ़ते रिपेयर बिल का हिसाब लगा रहे हैं. अब एक बड़े सर्वे ने इस बहस को और हवा दे दी है. सर्वे में 53 प्रतिशत लोगों ने E20 लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई, 66 प्रतिशत ने माइलेज गिरने की शिकायत की और 45 प्रतिशत ने कहा कि गाड़ी का मेंटेनेंस पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।  लोकल सर्किल्स (LocalCircles) के सर्वे में देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया. सर्वे के अनुसार 53 प्रतिशत लोगों ने सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की E20 पेट्रोल लागू करने की प्रक्रिया को या तो "बेहद खराब" या "असरहीन" बताया. इनमें 42 प्रतिशत लोगों ने इसे "बेहद खराब" करार दिया, जबकि सिर्फ 13 प्रतिशत लोगों ने इस पहल को थोड़ी अच्छी रेटिंग दी।  10% घटा माइलेज सर्वे में सबसे बड़ी चिंता 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर सामने आई. ऐसे वाहन मालिकों में 66 प्रतिशत लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया है. वहीं 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनकी गाड़ियों के कंपोनेंट में समस्या बढ़ी है और मरम्मत पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।  इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि, लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग का पूरी तरह विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चाहिए. 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के करीब 31 प्रतिशत मालिकों ने कहा कि अगर E0 या E10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए तो वे E20 से महंगा होने पर भी उसे खरीदना पसंद करेंगे. इससे साफ है कि पुराने वाहन मालिक कम इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के लिए रेडी हैं, भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े।  सरकार E20 के फायदे गिना रही है दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव कर रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा, एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. बीते दिनों सरकार ने दिग्गज वाहन निर्माताओं के अधिकारियों का एक पूरा पैनल बठाया था. जिसमें सभी कंपनियों ने एक सुर में इथेनॉल के फायदे गिनाए थे।  सर्वे में कहा गया है कि भारत की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी पेट्रोल गाड़ियां चल रही हैं जिन्हें कम इथेनॉल वाले फ्यूल को ध्यान में रखकर बनाया गया था. अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद बनने वाले नए मॉडल पूरी तरह E20 कम्पलायंट माने जाते हैं. ऐसे में पुराने वाहन मालिकों को माइलेज और मेंटेनेंस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  अपग्रेड करना भी आसान नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पुरानी गाड़ियों को E20 कम्पलायंट बनाना हो, तो फ्यूल सिस्टम के ऐसे कई पार्ट बदलने पड़ सकते हैं जो ज्यादा इथेनॉल को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते. इससे वाहन मालिकों का खर्च और बढ़ सकता है. हाल ही में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी ने आजतक से ख़ास बातचीत में बताया कि, एक ख़ास तरह की फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट की टेस्टिंग की गई है. जिसके नतीजे काफी हद तक पुरानी बीएस4 और बीएस6 कारों के लिए सकारात्मक रहे हैं।  दीपक बलानी ने ये भी बताया कि, इस कन्वर्जन किट की टेस्टिंग रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है. हालांकि इसे इंपोर्ट कर के लाया गया था तो इसकी कीमत 50,000 रुपये है. लेकिन अगर इसे स्थानीय स्तर पर डेवलप किया जाता है तो इसकी कीमत तकरीबन 20,000 रुपये तक हो सकती है. ISMA ने इस किट को मारुति डिजायर कार में टेस्ट किया था।  कैसे किया गया सर्वे लोकलसर्किल्स का यह सर्वे देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों के बीच किया गया. इसमें 69 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्सा लिया. करीब 46 प्रतिशत लोग टियर-1 जिलों से, 32 प्रतिशत टियर-2 जिलों से और बाकी 22 प्रतिशत टियर-3, टियर-4, टियर-5 और ग्रामीण इलाकों से थे. लोकल सर्किल्स के अनुसार सर्वे में शामिल सभी लोग उसके प्लेटफॉर्म के रजिस्टर्ड और सर्टिफाइड यूजर थे। 

Apple Crisis in Himachal: 40% तक घट सकता है सेब उत्पादन, जानें कौन बन रहा ₹5000 करोड़ के कारोबार का सबसे बड़ा ‘खलनायक’

 नई दिल्ली एक कहावत है कि 'रोज एक सेब खाएं और डॉक्टर को दूर भगाएं', लेकिन अब लग रहा है कि डॉक्टर को भगाने के लिए सेब ही नहीं बचेंगे. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से ये डराने वाले अनुमान जाहिर किए जा रहे हैं. सेब के उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खलनायक बन रहा है मौसम का मिजाज, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन में 40 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।  Apple इकोनॉमी खतरे में है बिजनेस टुडे पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था (Apple Economy) इस समय अभूतपूर्व जलवायु संकट का सामना कर रही है. मौसम की अनियमितता के चलते इस साल सेब उत्पादन में लगभग 40% की गिरावट आने की आशंका है और ये सेब की फसल पर निर्भर जिससे इस फसल पर निर्भर करीब  25 लाख किसान परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।  अधिकारियों को सता रही चिंता हिमाचल प्रदेश राज्य के बागवानी अधिकारियों ने अनुमान जाहिक करते हुए कहा कि राज्य में सेब का उत्पादन 2025 में 6.99 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2026 में लगभग 4.36 लाख मीट्रिक टन (लगभग 2.15 करोड़ बक्से) रह जाएगा, यानी 2.63 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आएगी. इसके साथ ही इसी अनुपात में सेब अर्थव्यवस्था में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।  सेब उत्पादन में इस बड़ी गिरावट को लेकर अधिकारियों ने कारण बताते हुए कहा कि सर्दियों में अपर्याप्त हिमपात, बेमौसम  बारिश, लगातार ओलावृष्टि और तापमान में अनियमित उतार-चढ़ाव से ये हालात पैदा हुए हैं. बागवानों की मानें, तो मौसम ने उत्पादन लागत बढ़ाने और पैदावार घटाने की चुनौतियां पैदा कर दी हैं. दूसरी ओर कीटनाशक दवाओं और मशीनरी समेत अन्य एग्रीकल्चर उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी ने उनका बोझ बढ़ा दिया है।  किसानों ने सरकार से लगाई गुहार राज्य के भारी भरकम 5000 करोड़ रुपये के करीब के सेब कारोबार पर संकट बढ़ता देख, किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने फसल बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।  मौसम का बदलता मिजाज न सिर्फ राज्य की इकोनॉमी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी मुसीबत माना जा रहा है, इसका प्रभाव सिर्फ सेब तक ही सीमित नहीं है. तमाम एक्सपर्ट शेयर बाजार पर भी मौसम के प्रभाव का अनुमान जता रहे हैं।  मौसम बनता जा रहा खलनायक? बीते कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई का जोखिम बढ़ाया था, लेकिन अब अमेरिका-ईरान में बात बनते ही तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट में तेल सस्ता होने के बाद अब एक्सपर्ट भी मानते नजर आए थे कि मौसम इकोनॉमी के लिए खलनायक बनता जा रहा है।  इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा था कि आज देश में महंगाई का सबसे बड़ा जोखिम तेल नहीं, बल्कि मानसून है. कमजोर मानसून अब भारत के लिए कच्चे तेल की तुलना में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि देश में महंगाई की कैलकुलेशन में Fuel Price से कहीं ज्यादा खाद्य पदार्थों का रोल रहता है और भारत की करीब आधी एग्रीकल्चर लैंड बारिश पर निर्भर है, इसमें अनियमितता से अनाज, दालों, सब्जियों, फलों और तिलहन के प्रोडक्शन में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई दर में तेज इजाफा हो सकता है और घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है। 

Aaj Ka Rashifal 7 July 2026: मंगलवार को किस राशि की चमकेगी किस्मत? पढ़ें मेष से मीन तक का पूरा राशिफल

मेष मजबूत भावनाएं आपको यह देखने में मदद करती हैं कि क्या मायने रखता है। शांत फोकस क्लियर ऑप्शन लाता है। आज बदलावों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण रिश्तों की रक्षा करने के लिए सावधानी से लॉजिक का उपयोग करें। जल्दी मिलने वाले ऑफर से सावधान रहें। वृषभ आज के दिन प्रोजेक्ट्स को देखभाल के साथ आगे बढ़ाए। आज के दिन अपनी रूटीन को हल्का रखें। आज आप स्टेबल और फोकस्ड महसूस करेंगे। कामों को शांति से पूरा करेंगे, लक्ष्यों की ओर धीरे-धीरे लेकिन पक्का आगे बढ़ेंगे। मिथुन आपके सावधानी भरे कदम क्रिएटिव कामों को बेहतर बना सकते हैं। दोस्त आपको सपोर्ट देंगे। नए विचारों को नोट करें और शांत पलों का इस्तेमाल करके क्लियर, व आसान तरीके से अगले कदमों की योजना बनाएं। कर्क आज शांत संकेतों पर भरोसा करें और दयालुता दिखाएं। जब आप रुककर बारीकियों को ध्यान से देखेंगे, तो आपके क्रिएटिव विचार सामने आएंगे। आज छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें और दयालुता से काम करें। छोटी-छोटी सफलताओं का जश्न मनाएं। सिंह कोई बड़ी मेडिकल समस्या भी आपको परेशान नहीं करेगी। आज छोटी-मोटी इन्वेस्टमेंट संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। आज के दिन आपकी फीलिंग्स आपको आसान, मददगार डिसीजन लेने में आपका मार्गदर्शन करेंगी। कन्या एक बिजी ऑफिस शेड्यूल और मजबूत फाइनेंशियल बेस के साथ एक शानदार लव लाइफ जिएं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं मुश्किल समय ला सकती हैं। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। तुला इस बात का ध्यान रखें कि आपका स्वास्थ्य अच्छा रहे। आज धन संबंधी छोटी-मोटी समस्याएं हो सकती हैं। आपका प्रेमी आपकी कमिटमेंट को मंजूर करेगा, जबकि आपको प्रोडक्टिविटी से जुड़े पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेंगे। वृश्चिक रिश्ते में भावनाओं को जाहिर करने के लिए अच्छे पलों की तलाश करें। प्रोफेशनल तौर पर सफलता मिलेगी, और आर्थिक रूप से आप अच्छी स्थिति में रहेंगे। स्वास्थ्य भी आपका अच्छा रहेगा। धनु आज के दिन ऑफिस में जरूरी कामों में सीनियर्स की प्रोफेशनल सलाह को महत्व दें। आपके फाइनेंस और सेहत दोनों में दिक्कतें आ सकती हैं। अपने प्रेमी पर प्यार बरसाते रहें और प्रोफेशनल लाइफ को प्रोडक्टिव बनाए रखें। मकर आपकी लव लाइफ बिना किसी परेशानी के बहुत अच्छी रहेगी। प्रोफेशनल चुनौतियों को लगन से संभालें। आज आपकी दौलत और सेहत दोनों ही मुश्किल समय ला सकती हैं। आज के दिन अपने रिलेशनशिप की समस्याओं को सुलझाएं। कुंभ अपनी पर्सनल लाइफ की हर प्रॉब्लम को सॉल्व करें। आपको अपने करियर में खुद को साबित करने के कई मौके मिल सकते हैं। आर्थिक रूप से आप अच्छी सिचूऐशन में रहेंगे, और आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। मीन आज रिश्ते को प्रोडक्टिव बनाए रखें और टाइट डेडलाइन वाले कामों को भी पूरा करके ऑफिशियल लाइफ को अगले लेवल पर ले जाने के बारे में सोचें। आपकी फाइनेंशियल स्थिति अच्छी रहेगी, और आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी।

सभी सरकारी दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, हरियाणा सरकार ने विभागों को दिए निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा में दस्तावेजों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने को लेकर सरकार ने सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश में सभी कानूनों, नियमों, सरकारी आदेश, सर्कुलर, अधिसूचनाओं, नीतियों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का केंद्रीकृत ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जाना है। ताकि सभी दस्तावेज विभागवार, विषयवार और अंतिम अपडेट की तारीख के साथ ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए और आसानी से सर्च किए जा सके। मुख्य सचिव ने भेजा रिमाइंडर मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों को रिमाइंडर जारी कर कहा है कि नौ जून को दिए गए निर्देशों के बावजूद कई विभागों से अब तक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिली है। विभागों से कहा गया है कि बिना और देरी किए एक्शन टेकन रिपोर्ट निर्धारित ई-मेल पर भेजी जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही सभी विभागों को अपने-अपने कानूनों, नियमों और अन्य दस्तावेजों की संपादन योग्य डिजिटल कॉपी तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी बताना होगा कि कौन-से नियम या कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं और किनमें संशोधन, सरलीकरण या निरस्तीकरण की जरूरत है। विभागों की छह बिंदुओं पर समीक्षा सरकार नियामकीय सुधार के तहत सभी विभागों के नियमों की छह बिंदुओं पर समीक्षा करा रही है। इसमें अनावश्यक लाइसेंस खत्म करना, पुराने और अप्रासंगिक नियम हटाना, जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू करना तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है।  

राम मंदिर विवाद के बीच BJP सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की कांग्रेस को खुली चेतावनी, RSS पर बयान से गरमाई सियासत

खंडवा  मध्य प्रदेश की सियासत में अयोध्या के श्री राम मंदिर को लेकर एक बार फिर जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंदिर में बिना कलश स्थापना के ही प्राण प्रतिष्ठा की गई और भगवान राम की प्रतिमा का रंग भी काला है। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं वजहों से देश में 'दंड' मिल रहा है और वर्तमान की अप्रिय घटनाएं इसी का नतीजा हैं। बीजेपी सांसद का करारा पलटवार दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद बीजेपी पूरी तरह हमलावर हो गई है। बुरहानपुर पहुंचे खंडवा संसदीय क्षेत्र के बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सांसद ने साफ लफ्जों में कहा कि ऐसी ही बातें कह-कहकर दिग्विजय सिंह ने खुद का और अपनी कांग्रेस पार्टी का सत्यानाश कर लिया है। 'प्रभु राम ने कर दिया बेड़ापार' जो लोग कभी भगवान राम और रामसेतु को काल्पनिक बताते थे, प्रभु श्री राम ने आज उनकी और उनकी पार्टी की क्या स्थिति कर रखी है, यह सब देख रहे हैं। दरअसल, इनका खुद का मन काला है। इन्हें हर समय हिंदू समाज पर उंगली उठाने में ही आनंद आता है। प्रभु श्री राम इनको ऐसी ही सद्बुद्धि देते रहें और इनका जो बेड़ापार हुआ है, वह आगे भी ऐसे ही होता रहे। जब से राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ है, इनके पेट में दर्द हो रहा है। ये लोग गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।- ज्ञानेश्वर पाटिल, सांसद, खंडवा आरएसएस पर दिया बड़ा बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भी सांसद पाटिल ने सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि संघ एक पवित्र संस्था है और इसके मार्गदर्शन में सब काम कर रहे हैं। इस पर गलत आरोप लगाने वाले और उंगली उठाने वाले तत्वों की उंगली और हाथ तोड़ दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि चंदे के मामले में जिन कर्मचारियों की गड़बड़ी सामने आई थी, उन पर पहले ही एक्शन लिया जा चुका है और दोषियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।  

इंदौर हाईकोर्ट का अहम फैसला, महिला अपनी इच्छा से गर्भ जारी रखने या खत्म करने का निर्णय ले सकती है

इंदौर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून में निर्धारित अवधि के भीतर गर्भावस्था होने पर यह निर्णय पूरी तरह महिला का होगा कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या उसका समापन कराना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है। इसी के साथ खंडपीठ ने 13 सप्ताह की गर्भवती विवाहित महिला को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) ऐक्ट के तहत गर्भसमापन की अनुमति प्रदान कर दी। यह आदेश 29 जून 2026 को पारित किया गया। मामला इंदौर संभाग के एक हाई प्रोफाइल दंपती से जुड़ा है, जिनका विवाह करीब दो वर्ष पहले हुआ था। विवाह के बाद दोनों के बीच लगातार विवाद बढ़ने लगे। इसी दौरान महिला गर्भवती हो गई। गर्भावस्था लगभग 13 सप्ताह की थी, लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में आई खटास के कारण दोनों अलग रहने लगे। महिला का कहना था कि वैवाहिक संबंध टूटने की स्थिति में बच्चे का जन्म उसके लिए मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से कठिन होगा। भविष्य को देखते हुए उसने गर्भ जारी नहीं रखने का निर्णय लिया और अधिवक्ता जी.पी. सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी। कोर्ट ने क्या कहा जब महिला अलग रहने लगी तो महिला नहीं चाहती थी कि बच्चा जन्म ले. इसलिए उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. फिर कोर्ट ने 13 सप्ताह की गर्भवती विवाहित महिला को गर्भपात की अनुमति दी है. साथ ही स्पष्ट किया है कि कानून द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर गर्भावस्था है तो महिला खुद तय कर सकती है कि वह गर्भ रखना चाहती है या नहीं. उसे गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है।  क्या है प्रेगनेंसी एक्ट कोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भावस्था का मानसिक और शारीरिक प्रभाव सबसे अधिक महिला पर पड़ता है, इसलिए गर्भ जारी रखना है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय महिला का ही होगा. कोर्ट ने कहा कि महिला की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की है, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) एक्ट, 1971 की निर्धारित सीमा के भीतर है. ऐसे मामलों में अधिकृत डॉक्टर्स कानून के अनसार गर्भसमापन की प्रक्रिया कर सकते हैं।  पति को नोटिस, फिर भी कोर्ट में नहीं हुआ उपस्थित सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पति को नोटिस जारी किया था, जिसकी विधिवत तामील भी हो गई थी, लेकिन वह किसी भी तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, राज्य शासन की ओर से भी याचिका का कोई विरोध नहीं किया गया। अनुच्छेद-21 के तहत महिला की स्वायत्तता को बताया अधिकार खंडपीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले 'एक्स बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर' का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक महिला को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह उसकी व्यक्तिगत गरिमा और मौलिक अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने फैसले में महिला के प्रजनन अधिकारों को बताया सर्वोपरि हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि अवांछित गर्भावस्था का सबसे अधिक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रभाव महिला पर पड़ता है। इसलिए यह निर्णय कि गर्भावस्था को जारी रखा जाए या उसका समापन कराया जाए, पूरी तरह महिला का व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध मातृत्व स्वीकार करने या गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की थी, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971 में निर्धारित वैधानिक सीमा के भीतर आती है। ऐसे मामलों में कानून अधिकृत चिकित्सकों को आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण और प्रक्रिया का पालन करते हुए गर्भसमापन की अनुमति देता है। इसलिए याचिकाकर्ता का मामला भी कानूनी रूप से गर्भपात की अनुमति दिए जाने योग्य पाया गया। सहमति के बाद पीछे हट गया पति महिला ने अपने एडवोकेट जीपी सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई और गर्भपात की अनुमति मांगी गई। कोर्ट को बताया कि पति के साथ वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय हो चुका था, लेकिन बाद में पति अपने रुख से पीछे हट गया। ऐसे में गर्भावस्था जारी रखना उसके लिए मानसिक तनाव, असुरक्षा और भावनात्मक पीड़ा का कारण बन रहा है। पति को नोटिस, फिर भी नहीं हुआ पेश मामले में पति को नोटिस जारी किया गया था और उसकी तामील भी हो चुकी थी, लेकिन वह सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। राज्य शासन की ओर से भी याचिका पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कोर्ट ने माना प्रजनन स्वतंत्रता मौलिक अधिकार मामले में कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले ‘एक्स बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत महिला को अपनी शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। जानिए क्या और क्यों दी गर्भपात की अनुमति     कोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भावस्था का मानसिक और शारीरिक प्रभाव सबसे अधिक महिला पर पड़ता है, इसलिए गर्भ जारी रखना है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय महिला का ही होगा।     कोर्ट ने कहा कि महिला की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की है, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) एक्ट, 1971 की निर्धारित सीमा के भीतर है। ऐसे मामलों में अधिकृत डॉक्टर्स कानून के अनुसार गर्भसमापन की प्रक्रिया कर सकते हैं।     कोर्ट ने यह भी माना कि वैवाहिक स्थिति में बदलाव, पति-पत्नी का अलग रहना और तलाक की स्थिति भी गर्भपात की अनुमति के लिए वैध आधार हो सकते हैं।     आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। महिला की गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार हैं।     कोर्ट ने डॉक्टर्स को निर्देश दिया कि गर्भपात की प्रक्रिया स्वास्थ्य मंत्रालय और कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ की जाएं। याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने महिला को गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी और मामले … Read more

साइबर अपराध पर हरियाणा पुलिस की सख्ती, 31% धनवापसी के साथ जांच में बड़ी सफलता

चंडीगढ़ हरियाणा में साइबर अपराधियों से निपटने में सख्ती और जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। विशेषकर हाट स्पाट नूंह में साइबर ठगों का नेटवर्क तोड़ने में खासी सफलता मिली है। पिछले छह महीन में 14 हजार 139 अवैध आनलाइन सामग्री हटाई गई और 3947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। डेढ़ साल के दौरान नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की है। यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। पिछले डेढ़ साल में 9100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 25 जून से ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। 25 जून से ई-जीरो एफआइआर सुविधा लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रानिक जीरो एफआइआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं। इससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है। इस दौरान गृह सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डा. वंदना दिसोदिया ने भी अपनी बात रखी। नूंह में पकड़े सर्वाधिक साइबर अपराधी नूंह में सर्वाधिक साइबर अपराधी पकड़े गए हैं। पिछले डेढ़ साल में हरियाणा पुलिस ने 473 एफआइआर दर्ज करते हुए 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपितों से 751 मोबाइल फोन तथा 1442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त 43 हजार 354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5007 आइएमईआइ को ब्लाक किया गया। प्रदेश में साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है। 675 पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच में जुटे प्रदेश में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा 3742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में 5390 पुलिस कर्मियों को विशेष आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है।

हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल, हर जिले में मेडिकल कॉलेज की योजना

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को दैनिक जागरण के यूफोरिया कार्यक्रम में राज्य की कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर दूरगामी कार्ययोजना स्पष्ट की। बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष में बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की आधारशिला रख देंगे। सभी 534 ब्लाॅक में माॅडल स्कूल और 38 जिलों में खुलेंगे मेडिकल काॅलेज राज्य के 14 हजार से अधिक हाई स्कूलों में से सभी 534 ब्लाॅकों को चिन्हित कर वहां शानदार माॅडल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 में वोट मांगने से पहले बिहार के सभी 38 जिलों में सर्वसुविधायुक्त मेडिकल काॅलेज व अस्पताल बना दिए जाएं। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, कला संस्कृति मंत्री डाॅ. प्रमोद चंद्रवंशी, दैनिक जागरण बिहार के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, राज्य संपादक आलोक मिश्रा, दैनिक जागरण बिहार के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह आदि ने किया। 126 किमी लंबा मरीन ड्राइव बनेगा राज्य की समृद्धि में दैनिक जागरण की बड़ी भूमिका की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी माह से 213 नए डिग्री काॅलेज स्थापित करने का काम शुरू किया जा रहा है। राज्य में 126 किलोमीटर लंबा शानदार मरीन ड्राइव बनाने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने कई अन्‍य बिंदुओं पर भी अपनी बातें रखीं। कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के सारे जिलाधिकारियों व एसपी को पत्र भी लिख दिया गया है।राज्य में कहीं भी किसी तरह से कोई फूहड़ गाने बजते हैं, उसको कड़ाई से बंद कराएं। इसमें किसी तरह की कोताही स्‍वीकार्य नहीं है।  

बाबा बैद्यनाथ से टांगीनाथ धाम तक, जानिए झारखंड के प्रमुख शिवालय

 रांची  भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन शुरू होते ही झारखंड पूरी तरह शिवमय हो गया है। राज्य के प्रसिद्ध शिवालयों में सुबह से ही बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं। देवघऱ से लेकर रांची, गुमला और खूंटी तक लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। अगर आप भी इस सावन बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो झारखंड के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा आपकी आस्था को और मजबूत बना सकती है। बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन के महीने में यहां लाखों कांवरिये और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। हर साल आयोजित होने वाला श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, इसलिए इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। बासुकीनाथ धाम, देवघर-दुमका मार्ग देवघर-दुमका मार्ग पर स्थित बासुकीनाथ धाम का धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में पूजा किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। सावन के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा रहता है। पहाड़ी मंदिर, रांची राजधानी रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन जाता है। करीब 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 468 सीढ़ियां चढ़़नी पड़ती है। सावन में रोजाना फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार होता है और सुबह तड़के से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। आमरेश्वर धाम (अंगराबाड़ी), खूंटी खूंटी जिले में स्थित आमरेश्वर धाम, जिसे श्रद्धालु अंगराबाड़ी के नाम से भी जानते हैं, सावन में आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। इस प्राचीन मंदिर को झारखंड का मिनी बाबा धाम कहा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। टांगीनाथ धाम, गुमला गुमला जिले का टांगीनाथ धाम अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव के अनेक प्राचीन शिवलिंग और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। मान्यता है कि भगवान परशुराम का दिव्य फरसा आज भी यहां स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां विशेष पूजा और श्रावणी मेले का आयोजन होता है। क्यों खास है झारखंड का सावन? झारखंड में सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा, लाखों श्रद्धालुओं की पदयात्रा और शिवालयों में होने वाले विशेष अनुष्ठान इस महीने को और भी खास बना देते हैं। अगर आप इस सावन आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड के ये शिव मंदिर आपकी सूची में जरूर होने चाहिए।  

दिल्ली-पंजाब से 6 संदिग्ध गिरफ्तार, हथियार और पेट्रोल बम बरामद

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली और पंजाब से 6 संदिग्धों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध दो अलग-अलग नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे। एक नेटवर्क आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था जबकि दूसरा अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद किए हैं दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क के 3 संदिग्धों को पंजाब से जबकि एक को दिल्ली से पकड़ा गया था। बताया जाता है कि इन संदिग्धों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी थी। आतंकी अपने नापाक मंसूबे में कामयाब हो पाते उससे पहले ही पुलिस ने नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। दिल्ली को दहलाने की थी योजना दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया था कि संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश में जुटे थे। ये सभी संदिग्ध पकड़े जाने से बचने के लिए पाकिस्तानी आकाओं की ओर से मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। खुफिया इनपुट पर ऐक्शन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिले थे कि पाकिस्तानी ISI एजेंट शहजाद भट्टी अपने गुर्गों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी वारदात को अंजाम देने की कोशिशों में जुटा है। इसके लिए इस टेरर नेटवर्क ने पंजाब के युवाओं की भर्ती की है। इसके बाद मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की गई। टेरर नेटवर्क पर लगातार कस रहा शिकंजा दिल्ली पुलिस सेल के हाथ लगे एक गुर्गे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह शहजाद भट्टी नेटवर्क के पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था। वह ड्रोन के जरिए हथियार जुटा रहा था। उसके खुलासे के बाद पंजाब से दो और संदिग्धों को दबोचा गया था। उनके पास से एक जिगाना पिस्टल, 4 कारतूस और 2 मोबाइल बरामद किए गए थे। बाद में दिल्ली से चौथे संदिग्ध गगनप्रीत को दबोचा गया था। इसके बाद से लगातार इस टेरर नेटवर्क के गुर्गों को पकड़ा जा रहा है।