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7 देशों ने मिलाया हाथ, Crude Oil Production पर लिया बड़ा फैसला; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।  Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।  Crude की कीमतों में गिरावट जारी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी। संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।  इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।  एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।  OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।  क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?  अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।   हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।  पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत  मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।  Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।   

समंदर में बढ़ी भारत की ताकत! INS Mahendragiri की एंट्री से दुश्मनों की बढ़ेगी मुश्किलें

मुंबई  भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को अपनी समुद्री ताकत में एक और बड़ा इजाफा करने जा रही है. इस दिन विशाखापट्टनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही जुलाई के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) वॉरशिप आईएनएस मालवन का भी कमीशनिंग कार्यक्रम प्रस्तावित है. इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से INS महेंद्रगिरि रडार को धता बताते हुए मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।  INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित छठी स्टील्थ फ्रिगेट है. इस प्रोजेक्‍ट के युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है. यह युद्धपोत अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है. करीब 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से निर्मित महेंद्रगिरि भारत के डिफेंस मैन्‍यूफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक है. इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्‍टम, पनडुब्बी रोधी हथियार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं. यह वॉर ऑपरेशन के अलावा समुद्री निगरानी, मैरीटाइम सिक्‍योरिटी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा अन्य बहुआयामी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी।  भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि का शामिल होना देश की समुद्री युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी माना जा रहा है. इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी. इससे पहले 21 जून 2026 को भारतीय नौसेना ने तीन स्वदेशी युद्धपोतों (आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय) को भी बेड़े में शामिल किया था. लगातार नए स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।  डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि महेंद्रगिरि और मालवन जैसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना को भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री हितों की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी. बता दें कि इंडिन नेवी ने पिछले कुछ महीनों में अपने बेड़े में कई वॉरशिप को शामिल कर चुकी है. हिन्‍द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नकेल कसने के लिहाज से इस कदम को अहम माना जा रहा है। 

मध्य प्रदेश में ट्रैफिक जाम से राहत की तैयारी, Google Maps के पीक ऑवर डेटा से तैयार होगा नया रोड प्लान

भोपाल  प्रदेश के बड़े शहरों के भीतर ट्रैफिक के दवाब को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले लोकेशन पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में 6 शहरों का चयन कर काम शुरू किया गया है। इसमें जबलपुर में एक कॉरिडोर तैयार किया भी जा चुका है। इसके अलावा शहर में ही एक और नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, राजधानी भोपाल में भी 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं। इन एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़े शहरों का ट्रैफिक दबाव होगा कम -भोपाल : शहर के बैरागढ़ इलाके में स्थित लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी का 306 करोड़ से कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसका 80 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। -इंदौर : शहर के एलआइजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी का 306 करोड़ से एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है। -उज्जैन : शहर के हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक दाने वाले 5.32 कि.मी का 945 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। -जबलपुर : शहर में 7 कि.मी का एक कॉरिडोर 1019 करोड़ से बनकर तैयार किया जा चुका है। जबकि, दूसरा बनाने की तैयारी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है। -ग्वालियर: आईआईआईटीएम महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी, गिरबाई एबी रोड पर 13.3 किमी का 1065 करोड़ से फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण काम 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है। -रीवा : शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की डीपीआर बनाई जा रही है, जल्द काम शुरु किया जाएगा। डिजाइन तैयार करने से पहले इन पर विश्लेषण -प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या -पीक आवर में जाम की स्थिति -सड़क की क्षमता दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड -भविष्य के यातायाता का अनुमान गूगल से डेटा परीक्षण कर बनेगी डिजाइन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से पहले वैज्ञानिक आधारों पर परीक्षण किया जाता है। खास बात यह है कि गूगल से पहले हर घंटे का डेटा एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इस बात का विश्लेषण करते हैं कि, सबसे पीक ऑवर में यहां ट्रैफिक की क्या स्थिति रहती है। उसके आधार पर कॉरिडोर का लेआउट-डिजाइन तैयार करते हैं। इसका डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार करवाया जा रहा है। साथ ही रोड सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा रहा है।

Indore Green Bond Model की सफलता के बाद रायपुर भी जारी करेगा ₹100 करोड़ का ग्रीन बॉन्ड

 इंदौर  देश में ग्रीन बांड के जरिए शहरी विकास के लिए पूंजी जुटाने का सफल माडल पेश करने वाले इंदौर नगर निगम के नक्शे कदम पर अब रायपुर नगर निगम भी चल पड़ा है। इंदौर की कार्यप्रणाली और अनुभव के आधार पर रायपुर नगर निगम करीब 100 करोड़ रुपये का बांड जारी करने जा रहा है। बांड जारी करने की पूरी प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया है। यह बांड जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच जारी हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इंदौर के ग्रीन बांड की तर्ज पर रायपुर के बांड को भी निवेशकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। ग्रीन बांड से मिलने वाली राशि का उपयोग रायपुर नगर निगम शहर में इलेक्ट्रानिक मार्केट और कमर्शियल कांप्लेक्स विकसित किए जाएंगे। एए रेटिंग मिली है रायपुर के बांड को रायपुर नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए जारी किए जाने वाले बांड को एए रेटिंग मिली है, जबकि इंदौर नगर निगम द्वारा जारी बांड को एए प्लस रेटिंग मिली थी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि एए रेटिंग को सामान्यत: अच्छा माना जाता है। रायपुर नगर निगम ने बांड से जुटाई जाने वाली राशि से किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे नागरिक बांड के माध्यम से शहर के विकास के लिए राशि जुटाने के इंदौर नगर निगम के माडल ने नगरीय निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन विकसित करने का नया रास्ता खोल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ और नगरीय निकाय भी हैं, जो इसी तर्ज पर बांड लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे हैं। यह है इंदौर का बांड मॉडल     जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए इंदौर नगर निगम ने 10 फरवरी 2023 को ग्रीन बांड जारी किया था।     सिर्फ तीन दिन में ही यह छह गुना अधिक सब्सक्राइब हो गया था।     ग्रीन बांड के माध्यम से नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये जुटाए थे।     इस राशि से स्थापित किए गए सोलर प्लांट से निगम को प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।     इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड होल्डर्स को 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है     ग्रीन बांड के लगभग 18 हजार बांड होल्डर हैं। कई निकाय भी ले रहे हैं सलाह     इंदौर एक दौर है। सिर्फ रायपुर ही नहीं, कई अन्य नगरीय निकाय भी इंदौर के बांड माडल को अपनाने जा रहे हैं। ये निकाय भी विकास कार्यों के लिए जनता से राशि जुटाना चाहते हैं। इंदौर ग्रीन बांड के बाद अब जल्द ही ब्लू बांड भी जारी हो जाएगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा ब्लू बांड नर्मदा के चौथे चरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम द्वारा लाया जाने वाला ब्लू बांड सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि निगम ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। लगभग सभी अनुमतियां मिल गई हैं।

MP Transco की 593 EHV लाइनों ने रचा रिकॉर्ड, 4 साल से बिना ब्रेकडाउन जारी बिजली पारेषण

एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी लाइनों ने बनाया चार वर्षों से बिना ब्रेकडाउन के बिजली पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  आंधी-तूफान, तेज बारिश, बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों और अन्य अप्रत्याशित व्यवधानों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की 593 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने पिछले चार वर्षों (करीब 1500 दिन) से बिना किसी ब्रेकडाउन के निर्बाध विद्युत पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इससे विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और मजबूती प्रमाणित हुई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में संलग्न आउटसोर्स कर्मियों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों की इस उपलब्धि के पीछे सतत एवं सजग मेंटेनेंस, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की निरंतर तत्परता प्रमुख कारण रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल से मिली सफलता ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि प्रदेश में विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय एवं सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, विभिन्न नवाचार,नियमित मेंटेनेंस, समयबद्ध निरीक्षण तथा प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में ईएचवी लाइनें लंबे समय से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। साथ ही इस उपलब्धि के पीछे ट्रांसमिशन लाइनों की नियमित पेट्रोलिंग, थर्मो-विजन निरीक्षण, संवेदनशील स्थलों की विशेष निगरानी, प्री-मानसून मेंटेनेंस अभियान तथा एससीएडीए आधारित सतत मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा लाइन कॉरिडोर का प्रभावी प्रबंधन, पेड़ों की समयबद्ध कटाई-छंटाई, इंसुलेटर, कंडक्टर, जंपर एवं अन्य हार्डवेयर का निवारक अनुरक्षण तथा संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किए जाने से ब्रेकडाउन की स्थितियों को प्रभावी रूप से रोका जा सका।  

आदिवासी अंचल से निकली सफलता की मिसाल, उमरिया की प्रियंका सिंह मसराम बनीं MPPSC से हिंदी असिस्टेंट प्रोफेसर

उमरिया  जब हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो बंदिशें और संसाधन कभी आड़े नहीं आते। संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत आने वाले उमरिया जिले के सुदूर आदिवासी अंचल, पाली विकासखंड के ग्राम कुमूर्दु की बहू प्रियंका सिंह मसराम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। प्रियंका ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और पारंपरिक जिम्मेदारियों के बीच प्रियंका की यह छलांग सिर्फ एक व्यक्तिगत नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह इस आदिवासी बेल्ट में महिलाओं की बदलती सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का एक बड़ा जमीनी दस्तावेज है। खुद की मेहनत से बनाई अलग पहचान प्रियंका के पति धर्मपाल सिंह वर्तमान में बैतूल जिले की मुलताई जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक माहौल घर में होने के बावजूद प्रियंका ने अपनी पढ़ाई की निरंतरता को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी इस सफलता से साबित किया कि शादी और पारिवारिक दायित्वों के बाद भी अगर जिद पक्की हो, तो देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक को भी पास किया जा सकता है। ग्रामीण अंचल में जश्न और प्रेरणा की नई लहर कुमूर्दु गांव और आसपास के इलाकों में प्रियंका की इस कामयाबी के बाद से खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है: पपाराजी को रवि किशन ने सुनाया 'मिर्जापुर' का दमदार डायलॉग, देखिए वीडियो     यह सफलता अंचल की अन्य युवतियों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगी।     पांचवीं अनुसूची वाले इस पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा को लेकर समाज का नजरिया तेजी से बदलेगा।     प्रियंका की यह जीत आने वाली पीढ़ी के लिए अब एक गाइडिंग लाइट (प्रेरणा स्रोत) की तरह काम करेगी। स्थानीय स्तर पर परिजनों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने प्रियंका सिंह मसराम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।  

Punjab Flood Alert: अमृतसर और गुरदासपुर में बाढ़ से निपटने की तैयारी, प्रशासन अलर्ट मोड पर

अमृतसर अमृतसर और गुरदासपुर में पिछले वर्ष आई विनाशकारी बाढ़ जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जल संसाधन विभाग धर्मकोट घोनेवाल कॉम्प्लेक्स ने रावी नदी में बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग अभियान शुरू कर दिया है।पिछले वर्ष मानसून के दौरान रावी नदी ने भारी तबाही मचाई थी। जिले में 23 स्थानों पर तटबंध टूट गए थे, जिससे अमृतसर जिले के 198 गांव सीधे प्रभावित हुए। इस भीषण बाढ़ में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 59,793 एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। इसके अलावा 307 पशुओं की भी जान चली गई। 1,825 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ केवल धर्मकोट घोनेवाल कॉम्प्लेक्स में ही तटबंध छह स्थानों पर टूट गया था। सरकार के अनुसार वर्ष 2023 और 2025 के दौरान सतलुज, ब्यास और रावी नदी प्रणालियों में आई बाढ़ से 86 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हुई। इससे करीब 1,825 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जल वहन क्षमता काफी कम बाढ़ के बाद हुए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में पाया गया कि नदी में अत्यधिक गाद और मलबा जमा होने से उसका प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है और जल वहन क्षमता काफी कम हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सेडिमेंट प्रबंधन ढांचे के दिशा-निर्देशों के तहत विस्तृत परियोजना तैयार की गई और संयुक्त स्टेट टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी से इसकी मंजूरी ली गई। डिजिटल निगरानी में डी-सिल्टिंग अभियान जारी डी-सिल्टिंग का पूरा कार्य डिजिटल जियो-फेंसिंग और कड़ी निगरानी में किया जा रहा है। निकाली गई गाद को सुरक्षित स्थानों पर जमा किया जा रहा है, जिसका उपयोग संवेदनशील तटबंधों को मजबूत करने, रेत की बोरियां भरने व आपातकालीन बाढ़ सुरक्षा उपायों में किया जाएगा। जल संसाधन विभाग का कहना है कि मानसून के चरम दौर से पहले रावी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बहाल करने और अमृतसर व गुरदासपुर के लोगों की जान-माल, फसलों व आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान तेजी से जारी रहेगा।  

मध्य प्रदेश में मानसून मेहरबान, 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी; मौसम विभाग ने बताया कब तक जारी रहेगा दौर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी ताकत के साथ एंट्री मार दी है. मानसून ने मध्य प्रदेश को पूरे तरीके से कवर कर लिया है. भोपाल, इंदौर सहित हर जिले में बारिश का दौरा देखने को मिल रहा है. इसी बीच बिजली गिरने सहित हादसों की खबरें भी सामने आ रही है. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब चूंकि इस बार मध्य प्रदेश में मानसून तय टाइम से देरी से आया था. ऐसे में मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी भरपाई के लिए मानसून अधिक समय तक सक्रिय रह सकता है. आर्टिकल में जानिए मानसून की गतिविधियां।  कब तक एक्टिव रहेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है. इसलिए फिलहाल सितंबर तक इसके प्रभावी बने रहने की संभावना है. लेकिन मानसून की सक्रियता पूरी तरह मानसूनी ट्रफ की स्थिति पर डिपेंड करती है. ऐसे में बीच-बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश कम हो सकती है. इसके बाद ट्रफ के अनुकूल होने पर बारिश का दौर फिर से तेज होने की संभावना रहेगी. सितंबर के बाद मानसून लौटना शुरु हो जाएगा।  मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है. इस दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं रहता, बल्कि इसकी तीव्रता मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. वहीं बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन फिर मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है. मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई सामान्यतः सितंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होती है।  कैसे आता है मानसून, कैसे बनते हैं बादल मानसून भारत में सबसे पहले केरल में पहुंचता है. मानसून के बनने का प्रोसेस भी काफी रोचक है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून गर्मियों में जमीन के तेजी से गर्म होने और समुद्र से उठने वाली नमी वाली हवाओं के कारण आता है. हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर हवाएं भारत की ओर आती हैं. नमी वाली हवाएं ठंडी होकर घने बादलों में तब्दील हो जाती हैं और बारिश होने लगती है. मानसून 15 जून से भारत में एक्टिव हो जाता है. जो सितंबर तक चलता है. सिंतबर के बाद मानसून विदा लेने लगता है।  22 जिलों में होगी भारी बारिश 7 जुलाई सुबह 8:30 से 8 जुलाई सुबह 8:30 तक विदिशा, रायसेन, शहडोल और उमरिया जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, सिंगरौली, सतना और अनूपपुर सहित 22 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात एवं तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल सहित 28 जिलों में झंझावात, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।  7 जुलाई सुबह 8:30 से 9 जुलाई सुबह 8:30 तक रायसेन, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट है. वहीं भोपाल सहित 34 जिलों में झंझावात, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  9 जुलाई सुबह 8:30 से 10 जुलाई सुबह 8:30 तक गुना और अशोकनगर में अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राजगढ़, आगर, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुरकलां, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर सहित 13 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा सहित 39 जिलों में वज्रपात, झंझावात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। 

मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज, नौकरशाहों को अहम मंत्रालय मिलने की संभावना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस विस्तार में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें है। सूत्रों का कहना है कि ‘परफॉर्मेंस’ और ‘लॉयल्टी’ के फॉर्मूले पर खरे उतरने वाले अफसरों को पीएम मोदी जल्दी रिटायर नहीं होने देते। ऐसे में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम मंत्रिमंडल फेरबदल में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे आला अधिकारियों के नाम हैं। इनके अलावा भी कुछ अधिकारी महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर आ सकते हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में भी कभी-कभी ऐसे प्रयोग हुए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में यह व्यवस्थागत रूप ले चुकी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार मिलना सामान्य हो गया है और वे विभिन्न मंत्रालयों तथा सरकार संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल न केवल प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करता है, बल्कि बड़े सुधारों को गति देने और संकट प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। सरकारों को यह होता है लाभ: दशकों का प्रशासनिक अनुभव, जटिल नीतियों की गहरी समझ, संस्थागत स्मृति का संरक्षण, बड़े सुधारों में निरंतरता, संकट के समय अनुभवी नेतृत्व की उपलब्धता और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन रिटायर लोगों को जिम्मेदारी देने की बड़ी वजह बताई जाती है। मोदी सरकार का जोर अनुभव, निष्ठा और परिणाम पर रहा है। फाइल क्लियरेंस, प्रोजेक्ट डिलीवरी, खर्च प्रबंधन की दक्षता और शिकायत निवारण जैसे पैमानों पर अधिकारियों को स्कोर कार्ड दिए जा रहे हैं। हालांकि, इस मॉडल की आलोचना भी होती है। आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक सेवा विस्तार से नए अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। भारत ही नहीं कई देशों में भी यह प्रयोग यह प्रवृत्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर में स्थायी सचिव सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कंपनियों और नीति आयोगों का नेतृत्व करते हैं। अमेरिका में जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन (सेवानिवृत्त जनरल) रक्षा मंत्री बने। जेनेट येलेन (पूर्व फेड चेयर) वित्त मंत्री बनीं। जेरोम पॉवेल केंद्रीय बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व अधिकारी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, थिंक टैंक और विशेष दूत के रूप में कार्य करते हैं। ब्रिटेन में सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स, सार्वजनिक आयोगों और नियामक संस्थाओं में नियुक्त करना सामान्य है। मार्क सेडविल सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न संस्थानों में रणनीतिक भूमिकाएं निभा चुके हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों स्वयं उच्च सिविल सेवा से आए। जापान में अमकुदरी (स्वर्ग से अवतरण) परंपरा के तहत वरिष्ठ नौकरशाह सेवानिवृत्ति के बाद निजी कंपनियों में नेतृत्व करते हैं।

दतिया उपचुनाव का बिगुल बजा! 13 जुलाई को नामांकन, क्या दोहराई जाएगी मिश्रा बनाम भारती परिवार की सियासी टक्कर?

दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां पहले से ही तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने बैठक कर संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की है। भाजपा की भोपाल स्थित 74 बंगला में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर पैनल तैयार किया गया, जिसे उसी दिन केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया गया। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान निर्वाचन आयोग ने दतिया उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 4 अगस्त को की जाएगी। भाजपा ने शुरू की चुनावी रणनीति भाजपा नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की टीम दतिया में उतारने की रणनीति बनाई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संगठन बूथ से लेकर जिला स्तर तक लगातार सक्रिय है और उपचुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत सूत्रों के अनुसार भाजपा में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे प्रमुख दावेदार हैं। वे पिछले कुछ समय से लगातार दतिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनावी माहौल तैयार कर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी उन्हें सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है। कांग्रेस में टिकट को लेकर कई दावेदार     कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और सिद्धार्थ कुशवाहा की समिति गठित की है, जो राजनीतिक हालात का आकलन कर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को रिपोर्ट सौंपेगी। टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और अन्य नेता सक्रिय हैं।     सूत्रों के अनुसार आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। माना जा रहा है कि वह अपने बेटे अंकित भारती को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात करा चुके हैं। आसपा ने घोषित किया प्रत्याशी दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार के रूप में दामोदर यादव के नाम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही दतिया का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है।