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लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

भारतीय कला-संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय मंच, भातखंडे के नए परिसर की रूपरेखा पर हुआ मंथन लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव देश-विदेश के कलाकारों का नया ठिकाना बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नवीन परिसर 'नादाधीनम् जगत्' की अवधारणा पर बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस परिसर सीएम योगी के विजन पर आगे बढ़ेगा भातखंडे, भारतीय संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय परिसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत भारतीय संस्कृति, संगीत, लोक परंपराओं और प्रदर्शन कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर एक ऐतिहासिक पहल बनने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के काकराबाद में प्रस्तावित इस विश्वस्तरीय परिसर को केवल संगीत विश्वविद्यालय तक सीमित न रखकर भारतीय संस्कृति के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से सोमवार को अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने परिसर की रूपरेखा पर विस्तृत मंथन किया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नया परिसर आने वाले सैकड़ों वर्षों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रदर्शन कलाओं का सबसे बड़ा केंद्र बने। बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को एक ही मंच पर समेटने वाला ऐसा संस्थान आज देश में नहीं है, जहां शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कलाएं, दृश्य एवं ललित कलाएं, साहित्य, दर्शन, योग, अध्यात्म, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कला शिक्षा का समन्वित अध्ययन एवं शोध हो सके। इसी दृष्टि से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के नए परिसर को देश के पहले समग्र 'संस्कृति विश्वविद्यालय' के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपॉजिटरी और भारतीय प्रदर्शन कलाओं के संग्रहालय जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में प्रस्तावित परिसर के लिए कई अत्याधुनिक सुविधाओं पर भी सहमति बनी। नए परिसर में संगीत, नृत्य, रंगमंच, योग एवं अध्यात्म, दृश्य एवं ललित कला, साहित्य एवं दर्शन, फिल्म निर्माण तथा कला एवं सांस्कृतिक प्रबंधन जैसे विषयों के विशेष विद्यालय स्थापित किए जाने के सुझाव दिए गए। साथ ही ध्वनि-विज्ञान आधारित अभ्यास कक्ष, आधुनिक नृत्य स्टूडियो, संगीत एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, एआई म्यूजिक लैब, विष्णु नारायण भातखंडे ग्रैंड ऑडिटोरियम, ब्लैक बॉक्स थिएटर, शास्त्रीय नृत्य थिएटर, रेसाइटल हॉल और मुक्ताकाशी मंच जैसी आधुनिक अधोसंरचनाओं का भी निर्माण करने का सुझाव दिया गाया। इसके अलावा सांस्कृतिक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, मीडिया एवं कंटेंट लैब तथा बौद्धिक संपदा (आईपी) सहायता केंद्र विकसित कर भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की योजना रखी गई। बैठक में पद्ममालिनी अवस्थी ने परिसर को प्रकृति और भारतीय परंपरा के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने व्यापक वृक्षारोपण, खुले एवं प्राकृतिक वातावरण, शिक्षकों के लिए आवासीय व्यवस्था, उत्तर भारतीय और कर्नाटक संगीत के समन्वय, उत्तर प्रदेश के पारंपरिक घरानों को संस्थान से जोड़ने, थिएटर कॉम्प्लेक्स, एग्जीबिशन हॉल, इंटरएक्टिव लर्निंग स्पेस तथा इंटीग्रेटेड नॉलेज सिस्टम पर आधारित विशेष लैब स्थापित करने का सुझाव दिया। वहीं प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने विश्वविद्यालय को संगीत संस्थान से आगे बढ़ाकर समग्र संस्कृति विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में पद्मप्रो. वामन केंद्रे सहित अन्य विशेषज्ञों ने लोक एवं जनजातीय कलाओं, थिएटर, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल आर्ट्स और साहित्य को एकीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल आर्ट सेंटर की स्थापना, इसे सभी कलाओं के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने तथा देश-विदेश के प्रख्यात कलाकारों को नियमित रूप से आमंत्रित कर विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनाने का सुझाव दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह परिसर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर की कला शिक्षा और शोध का अवसर भी उपलब्ध कराएगा। अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ऐसा विश्वस्तरीय संस्थान विकसित करने का अनूठा अवसर है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप भी हो। उन्होंने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को विश्व के अग्रणी प्रदर्शन कला संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए ऐसा परिसर विकसित किया जाएगा, जिसकी वास्तुकला, शैक्षणिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक वातावरण स्वयं भारतीयता का अनुभव कराए। यहां आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी, कलाकार और आगंतुक भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं से जुड़ाव महसूस करे और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए राष्ट्रीय स्तर की आर्किटेक्चरल डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित करने की भी योजना है, ताकि देश के श्रेष्ठ वास्तु विशेषज्ञ इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि परिसर की रूपरेखा में भारत के विभिन्न घरानों और सांस्कृतिक परंपराओं की भौगोलिक विविधता भी झलकनी चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक दायरे को पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं से आगे बढ़ाते हुए डिजिटल आर्ट्स, एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, वर्चुअल प्रोडक्शन, म्यूजिक टेक्नोलॉजी, अंतर्विषयक शोध, बौद्ध सांस्कृतिक दर्शन, सांस्कृतिक कूटनीति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि यह संस्थान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सके। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर भारतीय संस्कृति, संगीत और प्रदर्शन कलाओं के समग्र विकास का एक विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। यहां परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा, शोध और सृजन का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में कुलसचिव एस.पी. सिंह, पद्मभूषण पं. अजय चक्रवर्ती, प्रो. श्रुति बंदोपाध्याय, पद्मडॉ. शोवना नारायण, प्रो. अनुपम महाजन, पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह, पद्मप्रो. वामन केंद्रे, प्रो. सिद्धार्थ सिंह तथा डॉ. वंदना सहगल सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

UP में पौधरोपण का बनेगा नया रिकॉर्ड, CM योगी बोले- ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ के भाव को करें आत्मसात

'माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:' के भाव को आत्मसात कर पौधरोपण का नया रिकॉर्ड बनाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों व पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के पार्षदों आदि से किया संवाद 12 जुलाई को वृक्षारोपण महाभियान-2026 के तहत लगाएं ‘एक पेड़ मां के नाम’, उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे, सुबह 7 से शाम छह बजे तक होगा वृहद आयोजन मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से की अपील- जनसहभागिता से पौधरोपण महाभियान को बनाएं सफल, इसके लिए दो दिन के भीतर कर लें तैयारी  पौधे लगाएं और हर हाल में उसकी सुरक्षा पर भी दें पूरा ध्यानः मुख्यमंत्री 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति, इनकी सहभागिता से हासिल किया जाएगा हर लक्ष्यः मुख्यमंत्री  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने'पौधरोपण महाभियान-2026' के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद किया। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षदों आदि की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।   12 जुलाई को लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधेः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान जनांदोलन का स्वरूप ले चुका है। 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर भी पांच करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार विगत 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश में 247 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।  जनप्रतिनिधि दो दिन के भीतर बैठक कर पूरी करें तैयारी  मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। कई विशिष्ट वन भी किए जाएं स्थापित, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाए जाएं छायादार पौधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन स्थापित किए जाएं। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी हो। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएं। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाए।  हर हाल में सुनिश्चित हो पौधों की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपलब्ध कराया जाए। यह पौधा कुपोषण से बचाव में काफी कारगर साबित होता है। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से संवाद बनाकर उन्हें भी पौधरोपण जन अभियान से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत सरोवरों, नदियों के किनारे, खाली जमीन, हाइवे-एक्सप्रेसवे के किनारे, मंडी समितियों में आवश्यकतानुसार फलदार-छायादार पौधे रोपित किए जाएं। गंगा जी, यमुना जी समेत अन्य नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधे लगवाने के साथ इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ट्री गार्ड आदि लगाकर इनकी सुरक्षा भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।  नर्सरियों में उपलब्ध हैं 57 करोड़ से अधिक पौधे मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ वर्ष पहले जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ किया गया था, तब वन एवं उद्यान विभाग की नर्सरियों में पांच करोड़ पौधे भी उपलब्ध नहीं थे। आज स्थिति यह है कि दोनों विभागों के पास 57 करोड़ से अधिक पौधों का भंडार है। इनमें फलदार, औषधीय, इमारती तथा सजावटी प्रजातियों सहित सभी प्रकार के पौधे शामिल हैं और प्रत्येक जनपद में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा उत्तर प्रदेश  उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय दायित्व है। ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है और उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति  उन्होंने कहा कि प्रदेश के 72 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि सभी जनप्रतिनिधि पूरी सक्रियता से इस अभियान से जुड़ेंगे तो वृक्षारोपण का लक्ष्य सहजता से प्राप्त किया जा सकेगा और यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करेगा। मुख्यमंत्री का पौधों के संरक्षण व संवर्धन पर रहा जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण और संवर्धन की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई, सुरक्षा एवं देखरेख की व्यवस्था करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सुरक्षित पौधा ही भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेगा। महाभिय़ान को जन जागरूकता व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जोड़ें  मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आम, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, हरड़ सहित पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नुक्कड़ नाटक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए, जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वाभाविक जागरूकता और उत्साह का वातावरण बने। प्रत्येक कार्यक्रम की कराएं फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक वृक्षारोपण कार्यक्रम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कर वन विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इससे अभियान की पारदर्शी मॉनिटरिंग के साथ-साथ … Read more

दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ायेंगे किसानों की आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में उन्नत कृषि कार्यशाला में किसानों से किया संवाद अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का किया भूमिपूजन ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आमदनी केवल एक फसल से नहीं बल्कि बहु फसलों एवं उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा उन्नत व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हम अगले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन राज्य बनायेंगे। इसी कड़ी में सरकार नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित साँची दुग्ध उत्पादन संघ को भरपूर मदद दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्नत कृषि पर हुई संभागीय कार्यशाला में मौजूद किसानों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कार्यशाला में किसानों से सीधा संवाद करते हुए जैविक व प्राकृतिक खेती पर अनुभव सुने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में मूर्तरूप लेने जा रही अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का भी रिमोट से भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर के खुरैरी एवं ग्राम जहांगीरपुर में इस हाईटेक नर्सरी के प्रथम चरण का कार्य होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं कृषि से जुड़े अन्य विभागों की योजनाओं के तहत विभिन्न किसानों को हितलाभ भी वितरित किए। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्क्रण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर व श्रीमती सरला रावत, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, साडा अध्यक्ष अशोक शर्मा, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जयप्रकाश राजौरिया, किसान मोर्चा के पदाधिकारी गिर्राज व्यास व अमरदीप सिंह औलख सहित जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल रहे। सिंचाई रकबा होगा 100 लाख हैक्टेयर तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा मात्र साढ़े 7 लाख हैक्टेयर था जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे हम 100 लाख हैक्टैयर तक ले जायेंगे। चंबल-पार्वती-काली सिंध एवं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओ के माध्यम से यह संभव हुआ। उन्होंने इन परियोजनाओं की मंजूरी के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर सकते हैं कृषि ऋण किसानों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश के कृषकों को 31 मार्च तक ऋण जमा करने की चिंता नहीं रही है। सरकार ने अब उन्हें ऋण जमा करने के लिये पूरे एक साल का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार द्वारा सभी प्रकार के कृषि उत्पादों व पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। खिड़क प्रणाली के स्थान पर गौ-शालाओं की स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ माता कभी आवारा नहीं हो सकती। इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण एवं स्वदेशी गाय पालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित गायों को बंद करने के लिये कार्यरत खिड़क प्रणाली को समाप्त कर दिया है और बड़े पैमाने पर गौशालायें स्थापित की जा रही हैं। साथ ही देशी गायों में नस्ल सुधार के प्रयास भी प्रमुखता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तरह प्रदेश के महानगर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में बड़ी गौशालाओं की स्थापना की जा रही है। जैविक व प्राकृतिक खेती पर किसानों ने किए अनुभव साझा उन्नत कृषि पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला में कृषकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी कृषकों को अपने पास बुलाया और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के ग्राम बिलौआ निवासी उन्नत कृषक प्राण सिंह माथुर ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि वे अपने छोटे से कृषि फार्म में सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पाँच नए किस्म के पौधों की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। उनके द्वारा ईजाद किए गए अमरूद की “बिलौआ-22” व “बिलौआ-रेड” किस्म पेटेंट हो चुकी हैं। प्राण सिंह अब तक 50 हजार से अधिक कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी तरह ग्राम देवरा निवासी बृजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया है। उन्नत प्राकृतिक खेती के लिये उनकी धर्मपत्नी को राष्ट्रीय स्तर पर पाँच अवार्ड मिल चुके हैं। भगवानपुरा मुरार निवासी कृषक देवराज कुशवाह का कहना था कि वे अब प्राकृतिक पद्धति से गेहूँ व सरसों जैसी खाद्यान्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा वे भिंडी, गेहूँ, मिर्च व आलू जैसी फसलें भी पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री ने समन्वित कृषि प्रणाली एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाइयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। किसानों के लिए आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती का व्यावहारिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। इस “समन्वित कृषि प्रणाली इकाई” में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल में एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए रॉ मटेरियल बनता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को आय … Read more

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा ‘परशुरामपुरी’

यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी 60 करोड़ रुपये से लागू होगी बीमा योजना, 85 प्रतिशत प्रीमियम देगी सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान महामारी, दैविक आपदा और आकास्मिक दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा, 2.28 लाख से अधिक पशु आएंगे दायरे में पशुओं की मौत या अपंगता पर नहीं होगा आर्थिक संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ,   सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है। इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। 2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी। धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है। प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी। राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा। यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी' नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर को मिलेगी नई आधिकारिक पहचान अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा नाम परिवर्तन का निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर … Read more

Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का बड़ा ऐलान, नामांकन निरस्त होने के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेंगी

भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में समझौता (कॉम्प्रोमाइज) हुआ है और कांग्रेस इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर करेगी।मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पार्टी की लीगल टीम इस मामले पर काम कर रही है और परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर याचिका दायर कर दी जाएगी। भाजपा ने रची साजिश उन्होंने कहा, “ना तो नामांकन पत्र में कोई गलती थी और ना ही हमारे किसी साथी से कोई चूक हुई। जब फार्म-16 में नोटिस के उल्लेख का कोई कॉलम ही नहीं है, तो उसके आधार पर नामांकन निरस्त करना यह साबित करता है कि यह एक षड्यंत्र था।” कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को हर स्तर पर लड़ेगी, क्योंकि यह मामला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि पूरी चुनाव व्यवस्था की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में नगरीय निकाय और विधानसभा चुनाव होने हैं। यदि इसी तरह नामांकन निरस्त किए जाते रहे, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। पेपर लीक और राम मंदिर चंदा मामला पर बरसीं मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि देश और प्रदेश के सामने अभी तीन बड़े गहरे संकट हैं। जिस तरह से नीट पेपर लीक हुआ, वैसे ही भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पेपर लीक हो गए। छात्र और उनके अभिभावक वर्षों का संघर्ष करते हैं लेकिन जिस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा। इसको लेकर कांग्रेस ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम प्रारंभ किया है। इसके तहत इंदौर से भोपाल तक 14 और 15 जुलाई को साइकिल यात्रा निकाली जा रही है। 9 अगस्त को दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम कर अपनी बात जन-जन तक पहुंचाई जाएगी। जिस तरह से हम सब के आराध्य और आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई, वह पूरे देश ने देखा‌। यह बहुत गंभीर मामला है। महाकाल की नगरी उज्जैन में भी जमीन की लूट की बात सामने आई है। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। प्रदेश का किसान परेशान वहीं, किसानों के साथ होने का दावा करने वाली भाजपा सरकार अक्सर किसानों के साथ धोखा करती है। ग्रीष्मकालीन मूंग का अच्छा उत्पादन हुआ है लेकिन प्रदेश में मात्र 25% ही उपज खरीदी जा रही है। किसान परेशान है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। किसानों से जुड़ा केवल यह एक मामला नहीं है। ना तो उन्हें खाद मिल रही है ना ही बीज। अमेरिका के साथ जो व्यापारिक समझौता किया गया है उसकी चोट भी सीधी सीधी किसानों पर ही है सरकार को इसको लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए।  

Indore Traffic Alert: शहर में 5 नए ब्लैक स्पॉट की पहचान, रालामंडल चौराहे पर दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा खतरा

इंदौर  इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। एक ओर यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने पांच ब्लैक स्पॉट को सूची से हटाने में सफलता हासिल की, तो दूसरी ओर उतने ही नए ब्लैक स्पॉट सामने आ गए। सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के 16 ब्लैक स्पाट में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और बायपास कॉरिडोर पर हैं। इससे बायपास इंदौर का सबसे खतरनाक दुर्घटना कारिडोर बनकर उभरा है। रालामंडल चौराहा पूरे शहर का सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पाट है, जहां वर्ष 2023 से 15 जून 2026 तक 13 दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत हुई। यातायात पुलिस के वर्ष-2025 के ब्लैक स्पाट के आंकड़ों (2023, 2024, 2025 तथा 15 जून 2026 तक) के अनुसार, शहर में वर्तमान में 16 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें 11 पुराने स्थान अब भी सूची में बने हुए हैं, जबकि पांच नए स्थानों को पहली बार ब्लैक स्पाट घोषित किया गया है। दूसरी ओर, पांच पुराने ब्लैक स्पाट को इंजीनियरिंग सुधार के बाद सूची से हटा दिया गया है। यहां सबसे ज्यादा खतरा आंकड़ों के अनुसार, दुर्घटनाओं का सबसे अधिक दबाव अब बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। ओमेक्स सिटी, बिचौली मर्दाना ब्रिज, रालामंडल चौराहा, कैलोद करताल फाटा, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज सहित अधिकांश ब्लैक स्पाट एनएचएआई के हिस्से में आते हैं। तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और जंक्शन की डिजाइन इस कॉरिडोर को अधिक जोखिमपूर्ण बना रही है। कैलोद करताल फाटा, लवकुश चौराहा और ओमेक्स सिटी भी लगातार हादसों की सूची में बने हुए हैं। कुछ को सुधारा तो नए उभरे रिजलाय फाटा, बेस्ट प्राइज, आईटी पार्क चौराहा और प्रभु तोल कांटा सहित पांच स्थानों को ब्लैक स्पाट की सूची से हटा दिया गया है। इन स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधार और यातायात प्रबंधन का सकारात्मक असर दिखा है। वहीं एमआर-10 टोल, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज जैसे पांच नए स्थान ब्लैक स्पाट के रूप में सामने आए हैं। यानी जहां एक स्थान सुरक्षित हुआ, वहीं दूसरे स्थान पर खतरा बढ़ गया। सिर्फ छह माह में 2.48 लाख चालान यातायात पुलिस ने चालानी कार्रवाई में भी तेजी दिखाई है। एक जनवरी 2026 से 25 जून तक 2.48 लाख से अधिक चालान बनाए जा चुके हैं। सबसे अधिक कार्रवाई बिना हेलमेट, गलत पार्किंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर हुई है। इसके बावजूद ब्लैक स्पाट की संख्या में स्थायी कमी नहीं आई है। यह संकेत है कि केवल चालानी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सड़क की डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और यातायात इंजीनियरिंग में भी व्यापक सुधार की जरूरत है।     122 दुर्घटनाएं (2023 से 15 जून 2026 तक)     123 मौतें दर्ज     2,48,620 चालान ( एक जनवरी से 25 जून 2026 तक) आगे यह करना होगा ब्लैक स्पाट की सूची बताती है कि इंदौर में सड़क सुरक्षा का फोकस अब केवल शहर के चौराहों तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा जोखिम बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर है। यदि इन कारिडोर पर इंजीनियरिंग सुधार, गति नियंत्रण और निगरानी को प्राथमिकता नहीं दी गई तो एक ब्लैक स्पाट हटने के साथ दूसरा बनने का सिलसिला जारी रहेगा।     राऊ, रालामंडल और अर्जुन बड़ौद में फ्लाइओवर शुरू होने से वहां के ब्लैक स्पाट समाप्त हो गए हैं। अर्जुन बड़ौद में पुल बनने से पहले यातायात का दबाव अधिक था। लाजिस्टिक क्षेत्र होने के कारण ट्रक और ट्राले गलत दिशा से आते थे तथा सड़क पर खड़े रहते थे। इससे दुर्घटनाएं अधिक होती थीं, जो अब समाप्त हो गई हैं। एमआर-10 बायपास पर 65 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन और करीब ढाई किलोमीटर लंबे फ्लाइओवर का निर्माण अगले दो माह में पूरा हो जाएगा। नेमावर रोड पर राघवगढ़ के पास भी दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। इससे आवागमन और अधिक सुरक्षित होगा। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई  

Nirav Modi Extradition: भगोड़े हीरा कारोबारी को बड़ा झटका, आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद भारत लाने का रास्ता साफ

नई दिल्ली भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अपनी आखिरी कानूनी कोशिश भी हार दी है. उन्होंने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जो अपील दायर की थी, उससे भी राहत नहीं मिली. सूत्रों के मुताबिक, अब नीरव मोदी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में अब ब्रिटेन की सरकार उनके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज सकती है।  मिल रही जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था. इससे पहले ब्रिटेन की अदालतें उनकी सभी अपीलें खारिज कर चुकी थीं. अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की व्यवस्था और उनके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं. सूत्रों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है और ब्रिटेन की एजेंसियों ने नीरव मोदी को भारत के हवाले करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  आपको बता दें कि नीरव मोदी मार्च, 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद हैं. उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन और ईडी ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत लाने की मांग की है. ऐसे में कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।  किन-किन मामलों में फंसा है नीरव मोदी? भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी भारत में तीन अलग-अलग मामलों में वांछित है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला और सबूतों- गवाहों से छेड़छाड़ का मामला शामिल है. अप्रैल, 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद नीरव मोदी की सभी जमानत याचिकाएं और कानूनी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. मार्च 2026 में उसने भारत भेजे जाने के खिलाफ आखिरी अपील भी हार दी. इसके बाद उसने फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली है और अब उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

जेल में पंजाबी कैदी से बढ़ी नजदीकियां! जालंधर की लेडी अफसर पर प्रेम संबंध, फॉरेन ट्रिप और कॉस्मेटिक सर्जरी के आरोप

जालंधर  कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक पंजाबी मूल की पूर्व महिला जेल गार्ड को एक कैदी के साथ प्रेम संबंध बनाने और अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले में अदालत ने दो साल की सशर्त सजा सुनाई है। सजा के तहत उसे निर्धारित अवधि तक घर में नजरबंद रहना होगा और अदालत की शर्तों का पालन करना होगा।  31 वर्षीय रमनदीप एबॉट्सफोर्ड की रहने वाली हैं। रमनदीप ने मार्च 2021 में नॉर्थ फ्रेजर प्रीट्रायल सेंटर में करेक्शनल ऑफिसर (जेल गार्ड) के रूप में नौकरी शुरू की थी। सितंबर 2021 से लगभग एक वर्ष तक उनका एक कैदी के साथ गुप्त प्रेम संबंध रहा। कैदी जेल के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था। रमनदीप को इस बात की जानकारी थी और वह तलाशी अभियान से पहले कैदी को सतर्क कर देती थीं।  रमनदीप ने अदालत में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कैदी के पास मोबाइल कैसे पहुंचा, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया।  24 जून को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश दिबा माज्जुब ने कहा कि रमनदीप ने अपने कृत्य से जेल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपराध स्वीकार किया है, लेकिन यह केवल एक साधारण गलती नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास का गंभीर उल्लंघन था।  पूरा मामला तब सामने आया, जब एक वरिष्ठ जेल अधिकारी के घर पर जानलेवा हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जालंधर मूल की महिला अधिकारी ने ही उस अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो कैदी तक पहुंचाई थी। इसके बाद कथित तौर पर उसी जानकारी के आधार पर अधिकारी की पहचान कर पूरी साजिश रची गई। यह मामला बाद में कनाडा पुलिस की प्रोजेक्ट साउथ जांच का अहम हिस्सा बना। 3 जुलाई को ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद 563 पन्नों वाले ITO (इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन) के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनसे पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। महिला अधिकारी पेड लीव पर हैं, जबकि कैदी अब भी जेल में बंद है। जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांटेड ड्रग तस्कर रॉयन वेडिंग के कथित ड्रग नेटवर्क से भी जोड़ा है। दोसांझ गांव की निशवंत, कैदी ड्राइवर के तौर पर कनाडा गया कनाडा पुलिस के मुताबिक निशवंत कौर दोसांझ का परिवार पंजाब के जालंधर जिले के दोसांझ कलां गांव से जुड़ा बताया जाता है। वह ब्रिटिश कोलंबिया के ऐबट्सफोर्ड में रहती हैं और टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में कॉर्पोरल थीं। 32 वर्षीय गुरप्रीत सिंह पंजाब से ट्रक ड्राइवर के रूप में कनाडा गया था। बाद में जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ा। अक्टूबर 2024 से वह टोरंटो जेल में बंद है और अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है। दोनों के बीच पहले से प्यार, जेल में देख फिर रिश्ते सक्रिय हुए ITO के मुताबिक गुरप्रीत के अक्टूबर 2024 में टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने से पहले से ही दोनों के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। गुरप्रीत के जेल पहुंचने के बाद निशवंत को पता चला तो उनके बीच का यह रिश्ता फिर से सक्रिय हो गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवा ली, जहां गुरप्रीत बंद था। अक्टूबर 2024 से 2025 तक दोनों के बीच लगातार निजी मुलाकातें होती रहीं। सेल के बाहर ज्यादा समय, यहीं से बढ़ा शक पुलिस के अनुसार निशवंत अक्सर गुरप्रीत की सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं। जेल सुपरवाइजरों ने यह भी नोटिस किया कि वह गुरप्रीत से मिलने के बाद उसके पूर्व सेलमेट से भी मिलती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी असामान्य गतिविधि के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई। जेल के फोन के अलावा कथित अवैध मोबाइल से भी संपर्क ITO के मुताबिक दोनों जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा गुरप्रीत के पास मौजूद कथित अवैध मोबाइल फोन के जरिए भी लगातार संपर्क में थे। जांच के दौरान गुरप्रीत की कई बातचीत इंटरसेप्ट कर मॉनिटर की गई। जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि निशवंत ने एक सहकर्मी को बताया था कि गुरप्रीत ने उन्हें महंगे गिफ्ट दिए, कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए पैसे दिए और विदेश यात्राओं का खर्च भी उठाया। जांच अधिकारी डिटेक्टिव कांस्टेबल एंटोनियो डी ओनोफ्रियो ने लिखा कि गुरप्रीत का निशवंत पर इतना प्रभाव था कि यह एक जेल अधिकारी और कैदी के रिश्ते के लिहाज से बेहद असामान्य था। नंबर प्लेट से हत्या की साजिश तक में शामिल यॉर्क रीजनल पुलिस के मुताबिक जून 2025 में एक वरिष्ठ करेक्शनल अधिकारी की हत्या की साजिश रची गई। अधिकारी के घर पर मुंह ढके हमलावर ने हमला करने की कोशिश भी की। ITO में आरोप है कि गुरप्रीत ने जेल के बाहर मौजूद सहयोगियों के जरिए पूरी योजना बनाई, जबकि निशवंत ने कथित तौर पर 'इंटरनल फैसिलिटेटर' की भूमिका निभाई। पुलिस का दावा है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो लेकर गुरप्रीत तक पहुंचाई। बाद में इसी जानकारी के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकाला गया और अधिकारी के घर की पहचान की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी घटना के बाद प्रोजेक्ट साउथ जांच का दायरा बढ़ा। निशवंत की नाराजगी का बदला लिया इस मामले में सार्वजनिक किए गए अदालत दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गुरप्रीत सिंह की वरिष्ठ जेल अधिकारी से क्या रंजिश थी। हालांकि पुलिस का दावा है कि निशवंत दोसांझ की उस अधिकारी से नाराजगी थी और उसी के बाद कथित साजिश रची गई। जांच में और भी कई नाम 563 पन्नों के ITO में निशवंत और गुरप्रीत के अलावा कई पुलिस अधिकारियों और सिविलियन के नाम भी जांच के दायरे में होने का उल्लेख है। एजेंसियां इनके बीच कथित संपर्क और सहयोग की भी जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में पहले भी कंट्राबैंड और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। इसी वजह से जेल पहले से जांच एजेंसियों की … Read more

कोरोना के बाद बढ़ी स्लीपिंग पिल्स की मांग! ICMR रिपोर्ट में लाइफस्टाइल बदलाव का बड़ा खुलासा

जबलपुर   भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है। एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं। शरीर की जैविक जरूरत मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं। सेहत पर असर नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। अनिद्रा के कारण विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं- डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग। बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं। सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव। नींद लाने के लिए करें ये काम -समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें। -भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता -रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है। -शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें। -सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। -बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।