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छत्तीसगढ़ में मलेरिया के खिलाफ निर्णायक बढ़त — 61.8% बिना लक्षण वाले मरीज समय पर पहचाने गए

  बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा-सुकमा में शासन की रणनीति सफल — दूरस्थ अंचलों में भी पहुँच रही स्वास्थ्य सेवा सक्रिय निगरानी, घर-घर स्क्रीनिंग और सामुदायिक भागीदारी से गढ़ा नया स्वास्थ्य मॉडल रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान (12वां चरण) की अब तक की प्रगति से स्पष्ट है कि राज्य शासन की घर-घर स्क्रीनिंग रणनीति और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से मलेरिया की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। 25 जून से 14 जुलाई 2025 तक हुए सर्वेक्षण में 1884 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 1165 मरीज (61.8%) बिना लक्षण (Asymptomatic) वाले थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है—बीमारी की प्रतीक्षा मत करो, बीमारी से पहले पहुँचो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह अभियान राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा। कुल 1,39,638 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 1884 लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से 1165 (61.8%) बिना किसी लक्षण के थे — यानी यदि ये स्क्रीनिंग नहीं होती, तो संक्रमण आगे बढ़ता। कुल मामलों में से 75% से अधिक बच्चे हैं, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्ग हैं। 92% से अधिक मलेरिया केस Plasmodium falciparum (Pf) प्रकार के हैं — जिसकी त्वरित पहचान से गंभीर जटिलताओं को टाला गया। दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिले में 12.06% लक्ष्य प्राप्ति दर और 706 मलेरिया पॉजिटिव मामलों की पहचान एक बड़ी सफलता है। खास बात यह है कि इनमें से 574 मरीज बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) थे, जिन्हें शासन की सक्रिय रणनीति के कारण समय रहते उपचार उपलब्ध कराया गया। यह दिखाता है कि जंगल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच, निगरानी, और सेवा वितरण प्रभावशाली तरीके से हो रहा है। सुकमा में 15,249 व्यक्तियों की जांच के दौरान 372 मलेरिया पॉजिटिव केस मिले, जिनमें से 276 मरीज बिना लक्षण वाले थे। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि शासन की प्रो-एक्टिव स्क्रीनिंग के चलते साइलेंट संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी मेडिकल एक्सेस और सामुदायिक भागीदारी के चलते संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है — यह प्रशासन की रणनीतिक सफलता है। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 12वें चरण अंतर्गत 27266 घरों में स्क्रीनिंग टीमों की पहुँच हुई। 1247 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 10 पॉजिटिव पाई गईं – यानी केवल 0.08%। LLIN (लार्ज लास्टिंग मच्छरदानी) का उपयोग 92% घरों में सुनिश्चित हुआ। Indoor Residual Spray कवरेज 68.73% तक पहुँचा। 614 घरों में मच्छर लार्वा मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई। यह अभियान दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता, समयबद्धता और पहुँच का नाम है। शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और फॉलोअप व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका है कि 61.8% बिना लक्षण वाले मरीजों को इलाज मिला और संक्रमण की कड़ी टूट सकी। छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य को मलेरिया मुक्त बनाना सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बने।

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक, MP हाईकोर्ट करेगा व्यापक जांच और जवाबदेही तय

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान एक अहम् फैसला सुनाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों को दी जा रही मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी है , इस आदेश के बाद कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है, बता दें मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को लंबे इन्तजार के बाद मान्यता मिलने जा रही थी जिसे हाई कोर्ट ने रोक दिया है। नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीज़नल बेंच ने एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश पारित किया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई नर्सिंग मामले की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पिछले दिनों एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों के मान्यताओं में भी अनियमितताएँ की जा रही है। 2023-24 एवं 2024-25 सत्र के लिए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल दे रहा मान्यता  याचिका में कहा गया कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा निकल चुके एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है और बगैर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त किए सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों के प्रवेश दिए जा रहे हैं, नर्सिंग घोटाले की जांच में जिन कॉलेजों को सीबीआई ने अनसूटेबल बताया है उन्हीं बिल्डिंग में पैरामेडिकल काउंसिल अब पैरा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दे रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगाई   पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे अलग जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, आज की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है जो पैरामेडिकल काउंसिल को एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से देने की अनुमति देता था। 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई  मामले में पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है बताते चलें कि मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ला, पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं । इस मामले की अगली सुनवाई सभी नर्सिंग मामलों के साथ 24 जुलाई को होगी ।

अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल पर तीखा हमला बोला- कैंसर जैसा ट्यूमर है इजरायल

तेहरान ईरान और इजरायल के बीच कई दिनों तक चली जंग में फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन जुबानी हमले जारी हैं। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजरायल तो कैंसर जैसे ट्यूमर की तरह है, जिसे जड़ से खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इजरायल एक कुत्ते की तरह है, जो अमेरिका के पट्टे से बंधा है और उसके कहने पर ही सब कुछ करता है। इस तरह खामेनेई ने इजरायल के बहाने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके पालतू इजरायल से लड़ने में कोई बुराई नहीं है और उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। यही नहीं खामेनेई का कहना है कि भले ही सीजफायर है, लेकिन इजरायल पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कभी भी इजरायल हम पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर कोई हमला हुआ तो हम सख्ती के साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने हुई 12 दिनों की जंग में ईरान ने इजरायल को जमकर जवाब दिया था और अब यदि फिर से अटैक हुआ तो हम पीछे नहीं हटेंगे। बता दें कि 12 दिनों की जंग के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया था और लंबी जद्दोजहद के बाद ईरान ने इसे स्वीकार कर लिया था। इस सीजफायर से पहले अमेरिका ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना है कि इस हमले में ईरान का यूरेनियम भंडार कम हुआ और उसे नुकसान पहुंचा है। वहीं इजरायली एजेंसियों का कहना है कि अब भी ईरान के पास इतना भंडार मौजूद है कि कुछ महीनों के अभियान में ही वह पहले जैसी ताकत हासिल कर सकता है। बता दें कि इजरायल ने अब सीरिया पर हमला किया है। इसके अलावा लेबनान पर भी अटैक किए हैं और गाजा में भी सीजफायर की स्थिति नहीं बन पा रही है। उसने एक खतरनाक प्रस्ताव रखते हुए यह भी कहा है कि यदि गाजा में बसे लोग दक्षिण के एक इलाके में ही सीमित हो जाएं तो जंग थम सकती है।  

राखी सिर्फ भाई के लिए नहीं! जानिए शास्त्रों में किन-किन को बांधी जा सकती है राखी

रक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक, भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण त्योहार है. सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं. शास्त्रों में रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर क्या कहा गया है? आइए जानते हैं कि बहन, भाई के अलावा और किस-किस को राखी बांध सकती है. भगवान को राखी बांधने की परंपरा राखी बांधने का सबसे पहला अधिकार ईश्वर को माना गया है. कई बहनें सबसे पहले भगवान कृष्ण, शिव या गणेश को राखी बांधती हैं और फिर अपने भाई को. यह आस्था की अभिव्यक्ति है कि भगवान पहले रक्षक हैं. बहनें बहनों को भी बांधती हैं राखी यदि किसी स्त्री का भाई न हो या वह बहनों के साथ ही पली-बढ़ी हो, तो वह अपनी बड़ी बहन को राखी बांध सकती है. यह बहनत्व, प्रेम और साथ निभाने का प्रतीक होता है. गुरु या शिक्षक को राखी भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान माना गया है. शिष्य यदि अपने गुरु को राखी बांधता है तो वह यह संकेत देता है कि वह गुरु की रक्षा, सेवा और सम्मान का वचन देता है. पुजारी, साधु-संतों को राखी कई स्थानों पर महिलाएं साधु-संतों या मंदिर के पुजारियों को राखी बांधती हैं. यह धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है. यह परंपरा विशेषकर वृंदावन, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों में देखने को मिलती है. रक्षासूत्र के रूप में सैनिकों को राखी रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें भारतीय सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को राखी भेजती हैं या स्वयं जाकर बांधती हैं. यह समाज की रक्षा करने वाले रक्षक के प्रति श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. पेड़ों को राखी बांधना पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा देने के लिए कई लोग वृक्षों को राखी बांधते हैं. यह संकल्प होता है कि हम पेड़ों की रक्षा करेंगे और पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे. रक्षाबंधन 2025 कब है? पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त को देर रात 2 बजकर 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन 9 अगस्त को रात 1 बजकर 24 मिनट होगी. उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा.

एकनाथ शिंदे की नई रणनीति: भीमराव आंबेडकर के पोते के सहारे दलित वोट बैंक पर नजर

मुंबई मराठी बनाम हिंदी के विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे दो दशक से ज्यादा की दूरी के बाद साथ आए हैं। बीते सप्ताह दोनों ने एक रैली की थी और मंच पर हाथ उठाकर संदेश दिया कि हम साथ-साथ हैं। इस एकता से एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना को लेकर सवाल खड़े हुए कि आखिर अब उनका क्या होगा। वजह यह है कि शिंदे सेना भी मराठी कार्ड की राजनीति कर रही है और अब इसी मुद्दे पर ठाकरे बंधु साथ हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे ने भी अब बड़ा दांव चल दिया है। मराठी एकता के बरक्स उन्होंने दलित दांव चल दिया है। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के पोते आनंदराज आंबेडकर की पार्टी रिपब्लिकन सेना से हाथ मिला लिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आनंदराज अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना के साथ गठबंधन किया है। शिंदे और अंबेडकर ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की घोषणा की। एकनाथ शिंदे ने कहा कि दोनों ताकतें एक साथ आ रही हैं। इसीलिए आज बहुत खुशी का दिन है। उन्होंने कहा, 'सड़कों पर अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले दो संगठन आज एक साथ आ रहे हैं। एक है बालासाहेब की शिवसेना और दूसरी है भारत रत्न बाबासाहेब अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना। उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने विश्वास जताया कि हम साथ मिलकर काम करेंगे। उनके बगल में बैठे आनंदराज अंबेडकर ने कहा कि हमारी एकता का निश्चित तौर पर असर दिखेगा। शिंदे ने कहा कि आनंदराज आंबेडकर और मैंने हमेशा कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। जब मैं ढाई साल तक मुख्यमंत्री था, तब भी मैं एक आम आदमी था। अब डिप्टी सीएम के रूप में फिर से आम आदमी के लिए समर्पित हो गया हू। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी और एक आम कार्यकर्ता होना ही हमारी पहचान है। हमारी प्रतिबद्धता आम आदमी के प्रति है। हमारा रिश्ता आम आदमी से जुड़ा है। आंबेडकर की वजह से ही मैं बन पाया था सीएम: शिंदे उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान ने आम आदमी, वंचितों, शोषितों की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। मेरे जैसा एक आम आदमी मुख्यमंत्री बन सका। यह बाबासाहेब द्वारा लिखे गए संविधान की वजह से ही संभव हुआ। नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। यह शक्ति संविधान की है। बाबासाहेब ने दुनिया के कई संविधानों का अध्ययन करने के बाद अपना संविधान लिखा था। दोनों नेताओं ने ऐलान किया कि शिवसेना और रिपब्लिकन सेना आगामी नगर निगम और जिला परिषद चुनाव मिलकर लड़ेंगे। शिवशक्ति और भीमशक्ति की एकता का दिया नारा शिंदे ने शिवशक्ति-भीमशक्ति गठबंधन बनाने की बात की। उनकी कोशिश है कि मराठी वोटों के साथ ही दलित वोटरों को भी साध लिया जाए। बता दें कि भीमराव आंबेडकर के एक और पोते प्रकाश आंबेडकर भी राजनीति में हैं, लेकिन उनका दल अलग है, जिसका नाम है- बहुजन वंचित अघाड़ी।  

2026 से बंद होंगे नए फीचर्स: Microsoft ने इन यूजर्स को दी चेतावनी

नई दिल्ली Microsoft ने घोषणा की है कि वह अगस्त 2026 से Windows 10 यूजर्स के लिए Office ऐप्स में नए फीचर्स देना बंद कर देगा। यह कंपनी का एक और बड़ा कदम है जिसका मकसद यूजर्स को Windows 11 पर ले जाना है। कंपनी चाहती है कि यूजर्स विंडोज 10 के बजाए विंडोज 11 इस्तेमाल करें। हालांकि, सिक्योरिटी अपडेट अक्टूबर 2028 तक मिलते रहेंगे, लेकिन नए फीचर्स का मिलना बंद होने का मतलब है कि लेटेस्ट Office के लिए यूजर्स को अपना ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड करना ही होगा। कब बंद होंगे फीचर्स? फीचर्स कब बंद होंगे, यह समय-सीमा यूजर्स के सब्सक्रिप्शनके हिसाब से अलग-अलग है। माइक्रोसॉफ्ट365 पर्सनल और फैमिली यूजर्स को अगस्त 2026 में वर्जन 2608 के साथ नए फीचर्स मिलने बंद हो जाएंगे। वहीं, एंटरप्राइज कस्टमर्स को अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच उनके अपडेट चैनल के आधार पर फीचर्स मिलने बंद हो जाएंगे। सभी वर्जन 2608 फीचर सेट पर ही फ्रीज हो जाएंगे, चाहे आपका सब्सक्रिप्शन कोई भी हो। सिक्योरिटी अपडेट जारी, पर नए फीचर मिलना बंद Microsoft का यह फैसला उनकी पिछली घोषणाओं से काफी अलग है। कंपनी ने पहले Office सपोर्ट को Windows 10 की अक्टूबर 2025 की एंड-ऑफ-लाइफ तारीख के साथ ही खत्म करने की योजना बनाई थी, लेकिन यूजर्स के विरोध के बाद इस साल की शुरुआत में उन्होंने यह फैसला बदल दिया था। हालांकि, द वर्ज ने सबसे पहले बताया था कि कंपनी ने शुरुआत में यह नहीं बताया था कि नए फीचर्स 2026 से बंद हो जाएंगे। करना होगा ये काम इस बदलाव का मतलब है कि Windows 10 यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर Office से जुड़ी समस्याओं के लिए सीमित सपोर्ट मिलेगा। माइक्रोसॉफ्ट का आधिकारिक निर्देश है कि ऐसे यूजर्स Windows 11 में अपग्रेड करें। सपोर्ट स्टाफ केवल ट्रबलशूटिंग असिस्टेंस देगा और चेतावनी देगा कि "तकनीकी समाधान सीमित या अनुपलब्ध हो सकते हैं।" नए फीचर्स एक्सेस करने के लिए यूजर्स को विंडोज 11 में अपग्रेड करना होगा। लेटेस्ट Office टूल्स के लिए Windows 11 जरूरी इस कदम से कंपनी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा यूजर्स Windows 11 का इस्तेमाल करें। भले ही Windows 11 हाल ही में Windows 10 को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डेस्कटॉप OS के तौर पर पीछे छोड़ चुका है, फिर भी लाखों डिवाइस अभी भी पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं। कंपनी ने अपग्रेड करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दिए हैं, जैसे विंडोज बैकअप को इनेबल करने वाले या प्रति डिवाइस $30 का पेमेंट करने वाले Windows 10 यूजर्स के लिए फ्री एक्सटेंडेड सिक्योरिटी अपडेट। जो यूजर्स अपग्रेड नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते, उनके लिए Office वेब ऐप्स नए फीचर्स एक्सेस करने का एक ऑप्शन बने रहेंगे। हालांकि, डेस्कटॉप एक्सपीरियंस अगस्त 2026 के बाद स्थिर रहेगा, जिससे एक ऐसा सिस्टम बनेगा जहां आधुनिक Office क्षमताओं के लिए Windows 11 की जरूरत होगी।

बिजली चोरी के सूचनादाताओं को पारितोषिक की 5 फीसदी राशि का तुरंत भुगतान

अब तक 5 सूचनादाताओं के खाते में पहुंचाई राशि भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी बिजली चोरी की रोकथाम के लिए पारितोषिक योजना चला रही है। योजना में बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली होने पर सूचनाकर्ता को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। संशोधित प्रावधानानुसार पांच प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित सूचनाकर्ता को सूचना सही पाए जाने पर कर दिया जाता है। अंतिम निर्धारण आदेश के बाद शेष पांच प्रतिशत राशि पूर्ण वसूली के बाद दी जा रही है। योजना में एक अप्रैल से अब तक 5 सफल सूचनादाताओं को 11 हजार 500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराए गए हैं। इसके साथ ही जांच एवं वसूली की कार्यवाही करने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को भी 3 हजार रुपये प्रोत्‍साहन राशि का भुगतान उनके मासिक वेतन में जोड़कर किया गया है। कंपनी ने ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के पहले कुल 63 प्रकरणों में 7 सफल सूचनादाताओं को उनके खाते में पूर्ण भुगतान के रूप में 2 लाख 18 हजार रूपये की प्रोत्‍साहन राशि दी गई है। कंपनी में कार्यरत नियमित कर्मचारी, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी को भी सूचनादाता के रूप में शामिल किया गया है, परंतु उसे सूचना सही पाए जाने एवं जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश की पूर्ण वसूली होने पर एक प्रतिशत प्रोत्‍साहन राशि दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि विभिन्न परिसरों की जांच एवं बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में सभी कर्मचारियों का महत्‍वपूर्ण योगदान रहता है। कंपनी ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ जांच एवं वसूली के कार्य में शामिल बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी परितोषिक योजना में दी जाने वाली 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि सभी संबंधितों को समान रूप में दी जा रही है। पारितोषिक योजना की पूरी जानकारी जैसे बिलिंग, भुगतान से संबंधित गतिविधियां पूरी तरह से गोपनीय और ऑनलाइन है। अब सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर गुप्‍त रूप से दिए गए प्रारूप में बैंक खाता, पहचान के रूप में आधार अथवा पेन कार्ड देना अनिवार्य है। योजना में सूचनादाता के संबंध में जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखते हुए, कंपनी मुख्यालय से प्रोत्साहन की राशि सीधे संबंधित के बैंक खाते में हस्तांतरित की जा रही है। योजना में क्षेत्रीय, वृत्त स्तर के अधिकारियों को जो शिकायतें प्राप्त होती है, उन शिकायतों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये कंपनी मुख्यालय के द्वारा सतत रूप से निगरानी भी रखी जा रही है। पोर्टल अथवा उपाय एप पर देनी होगी सूचना कंपनी द्वारा योजना में सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है तथा कंपनी वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है एवं उपाय एप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी नागरिकों के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाए और कंपनी को सहयोग दें।

श्योपुर की उभरती खेल प्रतिभाएँ, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर परचम लहरा रहे खिलाड़ी

भोपाल  श्योपुर जिले की प्रतिभाएँ अब सीमित दायरे में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपना लोहा मनवा रही हैं। खेल के क्षेत्र में लगातार नई ऊँचाइयों को छूते हुए श्योपुर जिले के खिलाड़ी जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। हाल ही में दो खिलाड़ियों मिक्स मार्शल आर्ट में मोहम्मद हुसैन और कुश्ती में सुखमन कौर ने अपनी उपलब्धियों से पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। गत 12 और 13 जुलाई को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय मिक्स मार्शल आर्ट चैंपियनशिप में श्योपुर के मोहम्मद हुसैन ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मैडल हासिल किया। देशभर के 18 राज्यों से आए प्रतिभागियों में हुसैन ने विभिन्न मुकाबलों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराते हुए फाइनल में जगह बनाई और महाराष्ट्र के खिलाड़ी को पराजित कर स्वर्ण पदक जीता। मोहम्मद हुसैन ने बताया कि मिक्स मार्शल आर्ट एक तकनीक, ताकत और आंतरिक बल का खेल है और यह भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। श्योपुर की बेटी सुखमन कौर ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। किर्गिस्तान में आयोजित एशियन अंडर-15 कुश्ती चैम्पियनशिप में उन्होंने मंगोलिया और कजाकिस्तान की खिलाड़ियों को 10-0 के अंतर से हराकर काँस्य पदक हासिल किया। सुखमन की इस जीत पर श्योपुर कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में उनका स्वागत और सम्मान किया। साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कलेक्टर ने एकलव्य अवॉर्ड के लिए सुखमन कौर का नाम अनुशंसा करने के लिए खेल अधिकारी को निर्देशित किया। इसके अंतर्गत दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। सुखमन की यह उपलब्धि कोई पहली नहीं है। वर्ष 2022 से लेकर अब तक उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीते हैं। इसमें अंडर-14, अंडर-15 और अंडर-17 वर्ग की प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। श्योपुर जैसे सीमावर्ती जिले में इन प्रतिभाओं की सफलता यह दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि संकल्प और समर्पण हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। मोहम्मद हुसैन और सुखमन कौर जैसे खिलाड़ी न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, बल्कि श्योपुर को खेलों की नई पहचान भी दिला रहे हैं।  

बिहार चुनावी रण से पहले बेंगलुरु में कांग्रेस का दांव: OBC को 50% से ज्यादा आरक्षण का संकल्प

बेंगलुरु बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग को रिझाने के लिए शिक्षा, नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण की 50% की सीमा को तोड़ने का संकल्प लिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस की ओबीसी परिषद की बैठक में इसका ऐलान किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओबीसी सलाहकार परिषद की दो दिवसीय बैठक बेंगलुरु में आयोजित की गई थी। आज बैठक का दूसरा और आखिरी दिन है। कांग्रेस द्वारा गठित ओबीसी सलाहकार परिषद को देश भर में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति बनाने का काम सौंपा गया है। परिषद की बैठक में केंद्र से तेलंगाना जाति सर्वेक्षण के मॉडल के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित जातिगत गणना कराने का आह्वान किया गया। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व में यहां हुई दो दिवसीय बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया। सिद्धरमैया ने परिषद में पारित प्रस्तावों को ‘बेंगलुरु घोषणा’ नाम देते हुए कहा,‘‘जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति और जाति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक, रोज़गार, राजनीतिक पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि दूसरा प्रस्ताव आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को समाप्त करने का था, जिससे शिक्षा, सेवा, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों में ओबीसी के लिए उपयुक्त आरक्षण सुनिश्चित हो सके। सिद्धरमैया ने बुधवार को बेंगलुरु में हुई परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। निजी शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए आरक्षण सिद्धरमैया ने कहा कि बैठक में पारित तीसरे प्रस्ताव में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए आरक्षण होना चाहिए। सलाहकार परिषद ने सर्वसम्मति से ‘न्याय योद्धा’ राहुल गांधी को समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद दिया। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘राहुल जी के दृढ़ निश्चय ने मनुवादी मोदी सरकार को भारत में जातिगत गणना की न्यायोचित और संवैधानिक मांग के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया। भारत के सभी पिछड़े वर्गों की ओर से, परिषद हृदय से उनकी सराहना करता है और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए राहुल गांधी के योगदान को श्रेय देता है।’’ जातिगत गणना मील का पत्थर जातिगत गणना को लेकर केंद्र द्वारा किये गए फैसले को मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय संविधान द्वारा परिकल्पित सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक छोटा सा कदम है। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘न्याय योद्धा राहुल गांधी जी के साहसी और अडिग नेतृत्व में, भारत सामाजिक सशक्तिकरण के अंतिम संवैधानिक उद्देश्य को साकार करने और प्राप्त करने के लिए नियत है, जिससे हमारे महान राष्ट्र में एक समतावादी और समान समाज का निर्माण होगा।’’ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने परिषद से राष्ट्रव्यापी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जाति जनगणना पूरी करने के लिए मौजूदा सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों के लिए 75% आरक्षण या जाति जनगणना के आधार पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष किया जाना चाहिए। उन्होंने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की वकालत की। …तो भारत एक सच्चा लोकतंत्र नहीं रह सकता सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि अगर अल्पसंख्यकों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) सहित अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों की बात नहीं सुनी जाती, तो भारत एक सच्चा लोकतंत्र नहीं रह सकता। ओबीसी परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "अगर ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों – यानी अहिंदा समुदायों – की सिर्फ़ गिनती की जाती है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो भारत एक सच्चा लोकतंत्र नहीं रह सकता।" यह सिर्फ आरक्षण की लड़ाई नहीं: सिद्धारमैया उन्होंने आगे कहा, "यह सिर्फ आरक्षण की लड़ाई नहीं है। यह उन लोगों के लिए सम्मान, पहचान और असली ताकत की लड़ाई है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से इससे वंचित रखा गया है।" अहिंदा कन्नड़ में अल्पसंख्यातरु, हिंदुलिदावरु और दलितरु (अल्पसंख्यक, ओबीसी, एससी) का संक्षिप्त रूप है। कर्नाटक के सामाजिक न्याय के संघर्ष से उपस्थित लोगों को अवगत कराते हुए, मुख्यमंत्री ने 2015 में कंथराज समिति सहित विभिन्न समितियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों का उल्लेख किया, जिन्होंने 1.3 करोड़ परिवारों का सर्वेक्षण किया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि भाजपा ने रिपोर्ट को चार साल तक रोके रखा। सिद्धारमैया ने आगे कहा, "कर्नाटक सामाजिक न्याय की लड़ाई में अग्रणी रहा है: 1918 में मिलर समिति, 1921 में 75 प्रतिशत आरक्षण, हवानूर आयोग (1975) ने पिछड़े वर्ग के उत्थान की वैज्ञानिक नींव रखी, 1995 में ओबीसी राज्य अधिनियम, 2015 में कंथराज आयोग, जिसने 1.3 करोड़ परिवारों का सर्वेक्षण किया। लेकिन भाजपा ने हर प्रगतिशील कदम को रोका या लटकाकर रखा। इसमें कंथराज रिपोर्ट को 4 साल तक रोके रखना भी शामिल है।"  

सांसद की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित

सड़क सुरक्षा हेतु ट्रफिक नियमो का सख्ती से पालन कराये  : सांसद डॉ मिश्र   सिंगरौली सांसद सीधी सिंगरौली डॉ. राजेश मिश्र के अध्यक्षता एवं राज्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती राधा सिंह, सिंगरौली विधासभा के विधायक राम निवास शाह, देवसर विधानसभा के विधायक राजेन्द्र मेश्राम, धौहनी विधानसभा के विधायक श्री कुवर सिंह टेकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष सोनम सिंह,कलेक्टर श्री चन्द्र शेखर शुक्ला, प्राधिकरण अध्यक्ष दिलीप शाह, के उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में सड़क सुरंक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई बैठक के प्रारंभ पूर्व बैठक में किए गए निर्णय के पालन प्रतिवेदन से अवगत होने के पश्चात सांसद डॉ. मिश्र ने कहा कि जिले में होने वाली सड़क दुर्घटनाओ को मुख्य कारण यातायात नियमो का सही ढंग से पालन नही कराया जाना है। उन्होने निर्देश दिए कि जिले में ट्रफिक नियमो का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाये। उन्होने कहा कि इसकी मानीटरिंग किया जाये कि दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के गाड़ी  नही चलाये। उन्होने निर्देश दिए कि सभी वाहन सीमित गति से ही सड़क पर चले । उन्होने जिला परिवहन अधिकारी को निर्देश दिए कि नियमिति चेकिंग लगाकर वाहनो की फिटनेस, बीमा, रजिस्ट्रेसन की जॉच करे। यह सुनिश्चित करे कि सभी छोटे बड़े वाहनो के नम्बर प्लेट सही ढंग से लगे हो। साथ यह भी जॉच करे कि वाहन चालक शराब के नशे में तो वाहन नही चला रहे है। नियमो का उल्लघन करने वालो के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करे। सांसद ने निर्देश दिये कि किसी थाना क्षेत्र में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाए हुई उसकी जानकारी से अवगत कराने के साथ उस क्षेत्र को रेड जोन में चिन्हित करे।सांसद ने निर्देश दिए कि सड़को में बनने वाले स्पीड ब्रेकर सही माप दण्ड के अनुसार बनाया जाये। तथा बड़े वाहनो में आगे तथा पीछे की ओर स्पष्ट अक्षरो मे वाहन का नम्बर लिया रहे। उन्होने कहा कि सड़को में लगने वाले संकेत भी उचित प्रकार से लगाया जाये। बैठक के दौरान राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़क के पटरियो में लगने वाले बाजरो के लिए  स्थाल चिन्हित  बाजार के लिए व्यवस्था सुनिश्चित करे  ताकि सड़क मे होने वाले भीड़ भाड़ को कम किया जा सके।  बैठक में विधायक सिंगरौली एवं धौहनी ने सुझाव दिया कि जिले के सड़को में किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही किया जाये। इसके साथ ही सड़को में भवन निर्माण के लिए सामंग्री रखी दी जाती है उसको हटाने के साथ ही खराब सड़को की मरम्मत कराई जाये। बैठक के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक रंजन, एसडीएम सिंगरौली सृजन बर्मा, एसडीएम देवसर अखिलेश सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष बरगवा प्रमिला बर्मा, जनपद अध्यक्ष देवसर प्रणव पाठक, जनपद अध्यक्ष चितरगी सिया दुलारी, जनपद अध्यक्ष बैढ़न एसडीएम माड़ा राजेश शुक्ला, आयुक्त नगर निगम डी.के शर्मा, डिप्टी कलेक्टर देवेन्द्र द्विवेदी, जिला परिवहन अधिकारी बिक्रम सिंह राठौर, सीएसपी पीएस परस्ते सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।