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ट्रक ने छीना परिवार का सुख: मां-बेटे की मौत, पिता और बच्चा जिंदगी की जंग में

जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी ने एक पूरे परिवार को मौत के मुंह में ढकेल दिया. मुलमुला थाना क्षेत्र के पामगढ़ रोड पर एक ही बाईक पर पति-पत्नी अपने 3 बच्चों को लेकर सफर कर रहे थे. इसी दौरान एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने बाइक को ठोकर मार दी, जिससे बाइक सवार परिवार ट्रक की चपेट में आ गए. महिला और एक मासूम की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं मृतिका के पति और एक बच्चे की हालत गंभीर है. तीसरा बच्चे को मामूलि चोट आई है. घटना के बाद आरोपी बोलेरो वाहन लेकर फरार हो गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर मृत महिला और मासूम के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. वहीं गंभीर रूप से घायल बाइक चालक (मृतिका के पति) और एक बच्चे को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है. वहीं तीसरे बच्चे को अकलतरा अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है. आरोपी बोलेरो वाहन चालक की पहचान कर उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है.

जबलपुर- हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण की कोशिश, ट्रेनर अमन खान का कर था ब्रेनवॉश

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर में जिम में ट्रेनिंग देने के नाम पर धर्म परिवर्तन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जी हां जिम की एक महिला सहकर्मी ने अधारताल थाने में आकर शिकायत की है कि जिम का ट्रेनर अमन खान न केवल उसके साथ गाली गलौज करता है, बल्कि बेड टच भी करता है। पीड़िता ने बताया कि अमन खान लंबे समय से उसे इस्लाम के फायदे बात कर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बना रहा था।   बात नहीं मानने पर करता था बैड टच  पीड़िता ने बताया कि जब उसने अमन खान की बात नहीं सुनी तो वह उसके साथ गाली गलौज और बेड टच करने की कोशिश करता है। पीड़िता के साथ घट रही घटना की जानकारी जैसे ही टाइगर फोर्स को लगी तो देर रात टाइगर फोर्स के लोग पीड़िता को लेकर अधारताल थाने पहुंचे। पीड़िता और टाइगर फोर्स के लोगों ने थाने में बताया कि अमन खान जिम में आने वाली लड़कियों को अपना नाम पहले तो अमन राज बताता था, फिर उनको धीरे-धीरे बातों में लेकर इस्लाम के फायदे बताकर मुस्लिम धर्म अपनाने की बात कहता था। जब लड़कियां उसकी बात नहीं सुनती तो फिर उनके साथ अभद्र व्यवहार और बेड टच जैसी हरकत करता था।  टाइगर फ़ोर्स ने सख्त कार्रवाई की मांग की  टाइगर फोर्स ने मांग की है कि अमन खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए जिम के संचालक के ऊपर भी कार्रवाई की जाए। टाइगर फोर्स का कहना है कि जिम में इतने लंबे समय से सारी चीज चल रही है और जिम संचालक को पता ना हो, ऐसा मुमकिन नहीं है। वहीं पुलिस ने पीड़िता और टाइगर फोर्स की शिकायत के आधार पर मामला कायम कर अमन खान को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

पाकिस्तान की डोमेस्टिक क्रिकेट में सुधार, PCB ने पेश किया नया मॉडल

नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी ने अपने डोमेस्टिक क्रिकेट में बड़े बदलाव किए हैं। बोर्ड ने 2025-26 के घरेलू सत्र के लिए री-स्ट्रक्चर थ्री-टीयर डिपार्टमेंटल क्रिकेट फ्रेमवर्क का अनावरण किया, जो ग्रेड-III डिवीजन की शुरुआत के साथ एक ऐतिहासिक पहल है। अगस्त 2025 से मई 2026 तक चलने वाले इस नए स्ट्रक्चर में ग्रेड-I, ग्रेड-II और ग्रेड-III में प्रतिस्पर्धा करने वाली 40 से ज्यादा विभागीय टीमें शामिल हैं और प्रदर्शन को पुरस्कृत करने और डिवीजनों के बीच गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट प्रमोशन और डिमोशन सिस्टम स्थापित किया गया है। ग्रेड-I विभाग नवंबर-दिसंबर में 50 ओवर के प्रेसिडेंट कप के साथ अपना अभियान शुरू करेंगे। इसके बाद प्रथम श्रेणी प्रेसिडेंट ट्रॉफी होगी, जिसका समापन जनवरी 2026 में होगा। दोनों टूर्नामेंटों में आठ शीर्ष स्तरीय टीमें शामिल होंगी, जिनमें गनी ग्लास, केआरएल, ओजीडीसीएल, पीटीवी, साहिर एसोसिएट्स, एसबीपी, एसएनजीपीएल और डब्ल्यूएपीडीए शामिल है। प्रेसिडेंट्स कप कुल में 31 लिस्ट ए (वनडे) मैच होंगे, जबकि प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी में 29 रेड-बॉल मैच होंगे। निचली दो टीमों को ग्रेड-II में भेज दिया जाएगा, जबकि ग्रेड-II की शीर्ष दो टीमों को प्रमोशन मिलेगा और वे ग्रेड-I में पहुंच जाएंगी। ग्रेड-II में 14 टीमें होंगी, जिनमें 2024-25 प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी ग्रेड-II के 12 शीर्ष प्रदर्शन करने वाली टीमें और ग्रेड-I की दो डिमोटेड टीमें शामिल होंगी। यह डिवीजन मार्च से मई 2026 तक तीन दिवसीय मैचों की मेजबानी करेगा। दूसरे टीयर में भाग लेने वाली टीमों में अहमद ग्लास, गनी इंस्टीट्यूट, जेडीडब्ल्यू शुगर मिल्स, किंग्समेन, एमआईटी सॉल्यूशंस, पीएएफ, पीएचए रावलपिंडी, पोर्ट कासिम, रेलवे, सरदार ग्रुप, वाइटल टी, विंग 999 स्पोर्ट्स, एचईसी और एशाल एसोसिएट्स टीम शामिल है। ग्रेड III एक नया एडिशन है, जो मार्च-अप्रैल 2026 में आयोजित होगा और इसमें दो दिवसीय मैच खेले जाएंगे। प्लेसमेंट का निर्धारण पिछले सीजन के ग्रेड-II प्रदर्शन के आधार पर किया गया था। ग्रेड-III की शीर्ष दो टीमों को दूसरे ग्रेड में प्रमोट किया जाएगा, जबकि ग्रेड-II की निचली दो टीमों को रेलीगेट कर दिया जाएगा, जिससे प्रतिस्पर्धी चक्र पूरा हो जाएगा। पीसीबी ने ग्रेड-II टीमों के लिए एक अलग 50-ओवर टूर्नामेंट शुरू करने की योजना का भी खुलासा किया, जिससे घरेलू क्रिकेट का और विस्तार होगा। महिलाओं के खेल को मजबूत करने के अपने दृष्टिकोण के तहत, पीसीबी विभागों को महिला क्रिकेट टीमें बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जिसके बारे में अधिक जानकारी बाद में दी जाएगी। पीसीबी के घरेलू क्रिकेट संचालन निदेशक, अब्दुल्ला खुर्रम नियाजी ने कहा, "विभागीय क्रिकेट लगातार तीसरे वर्ष हमारे घरेलू ढांचे की रीढ़ बना हुआ है। यह थ्री-टीयर सिस्टम एक रणनीतिक निवेश है जो योग्यता को पुरस्कृत करता है और 400 से अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर चमकने का एक मंच प्रदान करता है।"  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय ब्रह्मानंद यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया

सदैव कार्य निष्ठा की शिक्षा और प्रेरणा मिली श्रद्धेय ब्रह्मानंद यादव जी से : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्रह्मानंद जी ने जीवन का हर क्षण मां भारती को न्यौछावर किया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय ब्रह्मानंद यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले उनके पूज्य ससुर श्रद्धेय ब्रह्मानंद यादव जी से सदैव 'कार्य निष्ठा' की शिक्षा और प्रेरणा मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके देवलोकगमन पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि गहन शोक की इस घड़ी में यही शिक्षा व प्रेरणा मुझे संबल प्रदान करती है कि मैं विदेश यात्रा पर मध्यप्रदेश के विकास के संकल्प को पूरा कर पाऊं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय ब्रह्मानंद यादव जी एक शिक्षक थे और उन्होंने जीवन का हर क्षण मां भारती की सेवा के लिए न्यौछावर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की एवं शोकाकुल परिजन के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना की है।  

घुमने आई युवती गजपल्ला वाटरफॉल की गहराई में समाई, 20 फीट नीचे पत्थरों के बीच फंसा शव, पर्यटकों की आवाजाही पर रोक

गरियाबंद दोस्तों के साथ घुमने आई रायपुर की युवती गजपल्ला वाटरफॉल की गहराई में समा गई है. 24 घंटे बाद भी उनका शव नहीं निकाला जा सका है. युवती का शव 20 फीट गहराई में पत्थरों के सुरंग के बीच फंसा हुआ है. वन विभाग, नगर सेना, पुलिस और स्थानीय गोताखोर के 60 से ज्यादा जवान रेस्क्यू में जुटे हैं. वहीं इस हादसे के बाद चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल में पर्यटकों के आने पर प्रशासन ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. सोमवार को लगभग 4 बजे गजपल्ला वाटर फॉल के गहराई में रायपुर की 19 वर्षीय मेहवीस खान गिरी थी. एसडीआरएफ की टीम ने उनके शव का पता लगा लिया है. वाटर प्रूफ कैमरे लेकर गहरे पानी के नीचे तलाश की गई. 19वें घंटे बाद गहराई में मौजूद चट्टान में बने सुरंग नुमा स्थल पर मृतका के फंसी होने की संभावना जताई गई है, लेकिन कैमरा 10 फीट के बाद काम नहीं कर रहा. एसडीआरएफ के लांस नायक उमेश सिन्हा ने बताया कि ज्यादा गहराई में कैमरे की विज्वल्टी का अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा. 20 फीट नीचे पत्थरों में सुरंग है. संभावना है कि वही युवती का शव फंसा होगा. रेस्क्यू में रायपुर के एसडीआरएफ की टीम समेत गरियाबंद प्रशासन के 60 से ज्यादा जवान जुटे हुए हैं. मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला गजपल्ला में मौजूद वृक्ष में दर्जनभर से ज्यादा मधुमक्खियों के छत्ते मौजूद हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन के दरम्यान मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर हमला भी कर दिया. स्थानीय तीन मददगारों पर मधुमक्खी ने हमला कर दिया था, जिससे एक घंटे तक आपरेशन बाधित हुआ. मौके पर पाण्डुका थाना प्रभारी, गरियाबंद रेंजर भी मौजूद हैं. परिजनों ने किया रतजगा, रो-रो कर बुरा हाल हादसे की सूचना के बाद रायपुर राजापारा में रहने वाले परिजन और सगे संबंधी बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पहुंच गए हैं. मृत्तिका के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पूरी तरह प्रतिबंध : डीएफओ इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने प्रतिबंध का बोर्ड लगाकर आवाजाही रोक दिया है. प्रवेश स्थानों पर वन विभाग ने जवान तैनात कर दिया है.

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव गुप्ता ने किया स्वागत

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मनोनीत मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा का बुधवार दोपहर को राजभवन आगमन हुआ। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा का राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर राजभवन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मनोनीत न्यायमूर्ति सचदेवा का स्वागत किया। विदित हो कि राज्यपाल मंगुभाई पटेल 17 जुलाई 2025 को प्रात: 10 बजे राजभवन के सांदीपनि सभागार में न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाएंगे।  

UK के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा भागवत गीता का पाठ, सीएम धामी ने कहा- इसकी तैयारी पहले से थी

देहरादून  स्कूलों में भागवत गीता पढ़ाए जाने को लेकर सीएम धामी का बड़ा बयान आया है. सीएम धामी ने कहा, ‘हमने शिक्षा विभाग की समीक्षा मीटिंग में तय किया था, उस पर अब काम शुरू हो गया है.’ सीएम ने कहा कि भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया ज्ञान हमारे बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करेगा. सीएम ने कहा कि इससे बच्चे न्यायशील बनेगे और जीवन में आगे बढ़ेंगे. प्रदेश के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक पढ़ाए जाने के फैसले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महारा ने कहा कि किसी भी अच्छी चीज का स्वागत होना चाहिए. लेकिन सिर्फ श्रीमद् भागवत गीता को ही क्यों शामिल किया जाए. एक धर्म विशेष से जुड़े साहित्य को पढ़ाना सिर्फ वोटों की राजनीति लगती है. हर रोज सुनाना होगा एक श्लोक उत्तराखंड में एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को श्रीमद् भगवद्गीता का एक श्लोक अर्थ सहित प्रतिदिन सुनाया जाए ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा से छात्रों को अवगत कराकर उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सके. उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में जारी एक आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में सुनाए जाने वाले इस श्लोक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जानकारी भी छात्रों को दी जाएगी. शिक्षकों को सप्ताह का श्लोक घोषित करना होगा इसके अलावा, शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह गीता के एक श्लोक को ‘सप्ताह का श्लोक’ घोषित कर उसे सूचना पटट पर अर्थ सहित लिखे जाने को कहा गया है जिसका छात्र अभ्यास करेंगे और सप्ताह के अंत में उस पर चर्चा कर उसका ‘फीडबैक’ लिया जाएगा . आदेश में शिक्षकों को समय-समय पर श्लोकों की व्याख्या करने तथा छात्रों को इस बात की जानकारी देने को कहा गया है कि श्रीमद् भगवद्गीता के सिद्धांत किस प्रकार मानवीय मूल्य, व्यवहार, नेतृत्व कौशल, निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन और वैज्ञानिक सोच विकसित करते हैं. केवल विषय के तौर पर ना पढ़ाया जाए छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि गीता के उपदेश मनोविज्ञान, तर्कशास्त्र, व्यवहार विज्ञान एवं नैतिक दर्शन पर आधारित हैं जो धर्मनिरपेक्ष द्रष्टिकोण से संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी हैं. आदेश में कहा गया है कि विद्यालय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों को ये श्लोक केवल विषय या पठन सामग्री के रूप में नहीं पढ़ाए जाएं बल्कि ये उनके जीवन एवं व्यवहार में भी परिलक्षित हों. सती ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार एवं ज्ञान प्रणाली का अध्ययन कराया जाना है। इससे पहले उत्तराखंड में राज्य पाठ्यचर्या को लेकर छह मई को आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीमद् भगवद्गीता और रामायण को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए थे.

देश में पिछले 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें हुई, UIDAI ने पिछले 14 वर्षों में केवल 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए

नई दिल्ली वर्तमान समय में आधार कार्ड को भारत में नागरिक पहचान के सबसे बड़े दस्तावेज के रूप में पेश किया गया है। हालांकि इससे होने वाले फर्जीवाड़ा और इसकी गोपनीयता पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। अब ‘आधार’ पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ये खुलासा आरटीआई (RTI) से हुआ है। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि सरकारी डाटा के मुताबिक देश में पिछले 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें हुई है। वहीं आधार जारी करने वाली संस्था UIDAI ने पिछले 14 वर्षों में केवल 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए हैं। यह संख्या देश में हुई मौतों के मुकाबले बेहद कम है। इस खुलासे ने एक बार फिर आधार डेटा की विश्वसनीयता और इसके अपडेट न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इसकी खामियों को एक बार फिर से उजागर किया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक, अप्रैल 2025 तक भारत की कुल जनसंख्या 146.39 करोड़ है। वहीं आधार कार्ड धारकों की संख्या 142.39 करोड़ है। इसके मुकाबले, भारत के सिटिजन रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के अनुसार, 2007 से 2019 तक हर साल औसतन 83.5 लाख लोगों की मौत होती रही है। ऐसे में पिछले 14 वर्षों में करीब 11.69 करोड़ से ज्यादा मौतें हुई होंगी। जबकि UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर बंद किए हैं। यानी कुल मौतों का 10% से भी कम। जब RTI में पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों में साल-दर-साल कितने आधार नंबर मृत्यु के आधार पर बंद किए गए हैं, तो UIDAI ने साफ कहा, “ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है। UIDAI ने सिर्फ कुल आंकड़ा दिया कि 31 दिसंबर 2024 तक मृत्यु के आधार पर 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए गए हैं। UIDAI ने कहा: हमारे पास आधार विहीन लोगों का कोई अनुमान नहीं जब पूछा गया कि क्या UIDAI ने कभी यह अनुमान लगाया कि देश में कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास आधार नहीं है, तो जवाब था, “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.” UIDAI के अनुसार, जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) आधार नंबर के साथ किसी मृतक का डेटा साझा करता है, तब एक प्रक्रिया के बाद आधार नंबर निष्क्रिय किया जाता है. अगस्त 2023 में जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, पहले मृत्यु रजिस्टर के डेटा को UIDAI के डेटाबेस से मिलाया जाता है. फिर दो बातें देखी जाती हैं: (1) नाम की 90% तक समानता होनी चाहिए, (2) लिंग (Gender) का 100% मेल होना चाहिए. अगर ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तब भी अंतिम फैसला तब लिया जाता है जब यह पुष्टि हो जाए कि मृत्यु के बाद उस आधार नंबर से कोई बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन या अपडेट नहीं हुआ है. अगर मौत के बाद भी आधार का इस्तेमाल हुआ हो, तो आगे की जांच होती है. वहीं, अगर निष्क्रिय किया गया आधार भविष्य में किसी प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होता है, तो सिस्टम उपयोगकर्ता को चेतावनी देता है. फिर वह व्यक्ति बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए आधार पुनः सक्रिय करवा सकता है. UIDAI के पास नहीं है साल-दर-साल आधार निष्क्रियता का रिकॉर्ड जब RTI में पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों में साल-दर-साल कितने आधार नंबर मृत्यु के आधार पर बंद किए गए हैं, तो UIDAI ने साफ कहा, “ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है.” UIDAI ने सिर्फ कुल आंकड़ा दिया कि 31 दिसंबर 2024 तक मृत्यु के आधार पर 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए गए हैं. बिहार में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन और खतरे की घंटी बिहार में SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान कई जिलों में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन देखने को मिला है। उदाहरण के लिए: किशनगंज: 126%, कटिहार और अररिया: 123%, पूर्णिया: 121%, शेखपुरा: 118% इसका मतलब है कि इन जिलों की अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा लोगों को आधार जारी हो चुका है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि मरने वालों के आधार नंबर समय पर निष्क्रिय नहीं किए जाते. इसके अलावा जनसंख्या अनुमान में त्रुटियां, प्रवासन (Migration), और डुप्लिकेशन भी जिम्मेदार हैं. क्या कहता है यह सब? इस RTI के जवाब से यह साफ होता है कि UIDAI के पास न तो आधारविहीन लोगों का कोई अनुमान है, न ही मृत लोगों के आधार निष्क्रिय करने की प्रभावी व्यवस्था. इससे न केवल डेटा की सटीकता पर सवाल उठते हैं बल्कि नीति निर्माण और जनसंख्या आंकड़ों में भी गंभीर खामी उजागर होती है. UIDAI को अपनी सिस्टम में पारदर्शिता और ताजगी लाने की जरूरत है, खासकर जब आधार अब बैंकिंग, राशन, मतदान, और सरकारी योजनाओं से जुड़ चुका है. देश में कितने लोगों के पास आधार नहीं, इसकी जानकारी नहीं जब पूछा गया कि क्या UIDAI ने कभी यह अनुमान लगाया कि देश में कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास आधार नहीं है, तो जवाब था, “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। UIDAI के अनुसार, जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) आधार नंबर के साथ किसी मृतक का डेटा साझा करता है, तब एक प्रक्रिया के बाद आधार नंबर निष्क्रिय किया जाता है। अगस्त 2023 में जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, पहले मृत्यु रजिस्टर के डेटा को UIDAI के डेटाबेस से मिलाया जाता है। फिर दो बातें देखी जाती हैं: (1) नाम की 90% तक समानता होनी चाहिए, (2) लिंग (Gender) का 100% मेल होना चाहिए। अगर ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तब भी अंतिम फैसला तब लिया जाता है जब यह पुष्टि हो जाए कि मृत्यु के बाद उस आधार नंबर से कोई बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन या अपडेट नहीं हुआ है. अगर मौत के बाद भी आधार का इस्तेमाल हुआ हो, तो आगे की जांच होती है। बिहार में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन और खतरे की घंटी बिहार में SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान कई जिलों में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन देखने को मिला है। उदाहरण के लिए: किशनगंज: 126%, कटिहार और अररिया: 123%, पूर्णिया: 121%, शेखपुरा: 118%। इसका मतलब है कि इन जिलों की अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा लोगों को आधार जारी हो चुका है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि मरने वालों के आधार नंबर समय पर निष्क्रिय नहीं किए जाते। इसके अलावा जनसंख्या अनुमान में त्रुटियां, प्रवासन (Migration), और डुप्लिकेशन भी जिम्मेदार हैं। 

मेकाहारा जांच मशीनों पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री का तीखा जवाब विपक्ष पर भारी

रायपुर सदन की कार्यवाही के तीसरे दिन डॉ. भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) की बंद पड़ी जांच मशीनों और मशीनों की खरीदी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरा. स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस विधायक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में पांच साल आपकी भी सरकार थी. कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश ने प्रश्नकाल में मेकाहारा में बंद पड़ी जांच की मशीनों की मरम्मत का मामला उठाया हुए कहा कि मशीनों में से कई मशीन एक संख्या में थे जो वर्षों से ऐसी ही पड़ी है. मशीनों की खरीदी क्यों नहीं हो रही और खरीदी की प्रक्रिया क्या है? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि 161 मशीन स्थापित है 50 मशीन बंद है. अभी 70 करोड़ की खरीदी कर रहे हैं. 11 मशीनों का सुधार कार्य चल रहा है. इस पर कांग्रेस विधायक ने सवाल किया कि कैंसर की जांच करने वाले मशीन क्यों नहीं है? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वो जांच मशीन की श्रेणी में नहीं इलाज की श्रेणी में आता है, और यह मशीन विदेश से आता है. लेकिन हम उस मशीन को चालू भी करेंगे. विधायक शेषराज ने सवाल जारी रखते हुए कहा कि यह मशीन पिछले 9 साल पहले आपके ही कार्यकाल में खरीदी गई थी. 9 साल पहले खरीदी गई मशीन अभी तक चालू क्यों नहीं कर पाए है? इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में एक अच्छे सोच के साथ मशीन की खरीदी की गई थी, लेकिन कुछ कारणवश अगर चालू नहीं कर पाए, तो अभी करवा रहे है. लेकिन 5 साल आपकी भी सरकार थी. इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मैने पिछले 5 साल में भी यह कहा है बार बार की वह मशीन अगर चालू होगी तो उससे कई लोगों का इलाज किया जा सकता है कोई अनियमितता होगी तो उसकी भी जांच करा सकते हैं.

विदिशा में GRP की बड़ी कार्रवाई, रेलवे स्टेशन से किया 20 बच्चों का रेस्क्यू , 6 तस्कर गिरफ्तार

विदिशा   मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरपीएफ और सोशल वेलफेयर सोसाइटी की संयुक्त कार्रवाई में 20 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। यह बच्चे बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं, और इन्हें मुंबई होते हुए सूरत ले जाया जा रहा था, जहां इनसे साड़ी फैक्ट्रियों में काम करवाया जाना था। ऐसे हुआ बच्चों का रेस्क्यू  विदिशा सोशल वेलफेयर सोसाइटी की दीपा शर्मा ने बताया कि जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में बच्चों को ले जाया जा रहा है । जानकारी के आधार पर ये कार्रवाई की गई। हमारी टीम ने आरपीएफ के साथ मिलकर रात भर स्टेशन पर निगरानी की, और सुबह करीब 5 बजे ट्रेन के पहुंचते ही कार्रवाई को अंजाम दिया गया। रेस्क्यू के दौरान कुछ तस्कर मौके से फरार हो गए, जबकि 6 आरोपी को पकड़ लिया गया है। ट्रेन का स्टॉपेज दो मिनिट का था , चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका गया और 34 लोगों को उतारा गया, जिनमें से 20 बच्चे नाबालिक निकले । जानकारी ये भी है कि कुछ बच्चे ट्रेन से आगे निकल चुके हैं, जिन्‍हें उज्जैन स्टेशन पर रेस्क्यू किया जाएगा। पकड़े गए लोगों से हो रही पूछताछ  रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा और फिर बाल संप्रेषण गृह में अस्थाई रूप से रखा जाएगा। फिलहाल जीआरपी थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और उनकी टीम, बच्चों को ले जाने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  जानकारी के अनुसार ये सभी बच्चे बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं और इन्हें ट्रेन के ज़रिए मुंबई होते हुए गुजरात के सूरत शहर ले जाया जा रहा था। वहां इनसे साड़ी फैक्ट्रियों में जबरन मजदूरी करवाई जानी थी। विदिशा सोशल वेलफेयर सोसाइटी की प्रमुख दीपा शर्मा ने बताया कि संस्था को इन बच्चों की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर आरपीएफ के साथ मिलकर रात भर स्टेशन पर निगरानी की गई। सुबह करीब 5 बजे जैसे ही संदिग्ध ट्रेन स्टेशन पर पहुंची टीम ने तत्काल कार्रवाई कर ट्रेन को चेन पुलिंग के ज़रिए रोका।  कार्रवाई के दौरान कुल 34 लोगों को ट्रेन से उतारा गया जिनमें से 20 बच्चे नाबालिग पाए गए। मौके पर हड़कंप मच गया, कुछ तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले लेकिन 6 तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दीपा शर्मा ने आगे बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुछ बच्चे ट्रेन से आगे निकल चुके हैं जिन्हें उज्जैन स्टेशन पर रेस्क्यू करने की तैयारी की जा रही है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और उसके बाद अस्थाई रूप से बाल संप्रेषण गृह में रखा जाएगा। फिलहाल जीआरपी थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और उनकी टीम पकड़े गए तस्करों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि वे पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा करने के लिए हर पहलू की गहन जांच कर रही है। मानव तस्करी क्या है ("मानव तस्करी" का अर्थ)? मानव तस्करी एक संगठित अपराध है जिसमें लोगों को धोखे से, जबरदस्ती या लालच देकर उनका शोषण करने के लिए कहीं और ले जाया जाता है, जैसे कि जबरन मजदूरी या यौन शोषण के लिए। "मानव तस्करी" से कैसे बचा जा सकता है? लोगों को जागरूक बनाकर, बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखकर, और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या सामाजिक संस्थाओं को देकर मानव तस्करी से बचा जा सकता है। "मानव तस्करी" की सूचना कहां दी जा सकती है? आप 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 100 (पुलिस) या किसी भी नजदीकी थाने या सामाजिक संस्था को "मानव तस्करी" की जानकारी दे सकते हैं। क्या बच्चों को काम पर लगाना "मानव तस्करी" में आता है? अगर किसी नाबालिग को जबरन या धोखे से मजदूरी करवाई जा रही है, तो वह मानव तस्करी और बाल शोषण दोनों की श्रेणी में आता है। क्या "मानव तस्करी" के लिए सज़ा का प्रावधान है? हाँ, भारत में "मानव तस्करी" एक गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।