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सोच से परे प्रेम कहानी: शादीशुदा महिला ने छोड़ा परिवार, प्रेमी के लिए सब कुछ कुर्बान

मुरादाबाद यूपी के संभल में दो बच्चियों की मां को जाने क्या हुआ। न उम्र का ख्याल रहा न समाज की चिंता। उसने अपनी उम्र से 20 साल छोटे लड़के से संबंध बनाए और फिर एक दिन अपनी दोनों बच्चियों को लेकर उसी के घर मुरादाबाद के छजलैट पहुंच गई। यही नहीं महिला ने उम्र में काफी छोटे उस युवक से कथित रूप से शादी भी कर ली। बाद में पति उसे खोजते-खोजते अपनी मां के साथ वहां पहुंचा तो अपनी पत्नी का रुख देखकर दंग रह गया। पति और सास ने महिला को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने उनके साथ जाने से साफ इनकार कर दिया। बाद में वह अपने प्रेमी और दोनों बच्चियों के साथ मां थाने पहुंच गई। वहां देर शाम तक विवाद चलता रहा। महिला के परिजन भी संभल से छजलैट पहुंच गए, विवाहिता ने वापस जाने से इंकार कर दिया। वह दो बेटियों को लेकर प्रेमी के साथ चली गई। मुरादाबाद के छजलैट थाना क्षेत्र के गांव भैंडी फरीदपुर का रहने वाला युवक का फेसबुक के जरिए संभल के असमोली थाना क्षेत्र के गांव निवासी विवाहिता से प्रेम प्रसंग हो गया। पहले तो दोनों में फोन पर ही बातें चलीं, लेकिन कई बार युवक और विवाहिता मुरादाबाद में एक-दूसरे से भी मिले। इस दौरान युवक ने विवाहिता को अपने साथ अपने घर शादी करके ले जाने की बात कही। जिस पर विवाहिता ने बच्चों को साथ लाने की बात कही। युवक ने बच्चों को भी अपनाने की बात कही। विवाहिता 10 दिन पहले एक 16 वर्ष और 13 वर्ष की बेटी को साथ लेकर छजलैट के गांव में आ गई। यही नहीं उसने युवक के साथ कथित तौर शादी भी कर ली। जब विवाहिता को पति और अन्य ने तलाश किया तो छजलैट क्षेत्र के गांव का पता लगा। मंगलवार को विवाहिता के परिजन थाने पहुंचे। विवाहिता अपने 20 वर्षीय प्रेमी और बेटियों के साथ थाने पहुंच गई। विवाहिता का पति और सास विवाहिता को ले जाने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन उसने जाने से साफ इंकार कर दिया। वह प्रेमी और दो बेटियों के साथ वापस प्रेमी के घर चली गई।  

अदालत में अपील लगाने सरकारी वकील मांग रही थी रिश्वत, लोकायुक्त ने दबोचा

जबलपुर  जबलपुर में लोकायुक्त टीम ने एक महिला सरकारी वकील कुक्कू दत्त को 15 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। महिला सरकारी वकील ने शिकायतकर्ता से उसकी केस की पैरवी करने के बदले में 15 हजार रुपए की मांग की थी। फरियादी ने इसी की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से कर दी, जिसकी पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त ने घेराबंदी कर जाल बिछाया और महिला सरकारी वकील को 15 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। फिलहाल, लोकायुक्त टीम महिला वकील के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है। क्या कहता है नियम? दरअसल, पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश पर नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे नहीं मांग सकता। फिर भी महिला वकील कुक्कू दत्त शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए मांग रही थीं। दरअसल पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने सिविल लाइन निवासी बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश के अनुसार नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे की नहीं मांग सकता। लेकिन उसके बावजूद सरकारी महिला वकील ने शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए की मांग की थी। यही नहीं, पीड़ित का कहना है कि महिला वकील ने उसे कहा था कि यदि उसने उसे 15000 रुपए नहीं दिए तो वह उसके केस में काम नहीं करेगी। जिसके चलते वह फिर से अपना केस हार जाएगा। शिकायतकर्ता का आरोप पीड़ित का ये भी आरोप है कि, सरकारी महिला वकील ने उसे ये भी धमकी दी थी कि, अगर वो उसे 15 हजार नहीं देता तो वो केस पर किसी करह का काम नहीं करेगी, जिसके पर्णाम स्वरूप वो केस हार जाएगा।

दिग्विजय सिंह की पोस्ट पर घमासान, मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की एक फेसबुक पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दिग्विजय ने अपने पोस्ट में दो तस्वीरें शेयर की हैं. पहली तस्वीर में कांवड़ यात्रा को सड़क पर दिखाया गया है, जबकि दूसरी तस्वीर में नमाज अदा करते हुए लोग नजर आ रहे हैं. पोस्ट में सवाल उठाया गया है, 'एक देश, दो कानून?' इस पोस्ट पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मध्यप्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह को 'मौलाना' करार देते हुए कहा कि वे केवल सनातन धर्म का विरोध करते हैं. आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह कांवड़ यात्रा जैसे पवित्र पर्व को विवादास्पद बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जाकिर नाइक का महिमामंडन करने वाले, आतंकवादियों को संरक्षण देने वाले, सेना के ऑपरेशन पर विवाद खड़ा करने वाले, पाकिस्तान परस्ती की बात करने वाले, तुष्टिकरण को आगे बढ़कर राजनीति करने वाले दिग्विजय सिंह से और कुछ अपेक्षा नहीं है. विश्वास सारंग ने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा हिंदू धर्म के अनुयायियों, साधु-संतों और हिंदू त्योहारों का अपमान करते आए हैं, इसलिए उन्हें 'मौलाना दिग्विजय सिंह' कहा जाता है. मोहन सरकार के मंत्री ने आगे कहा, ''भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को इजाद करके दिग्विजय सिंह ने ही सनातन को इस दुनिया में बदनाम करने का काम किया है. मैं दिग्विजय सिंह से कहना चाहता हूं कि हिंदू और सनातन धर्म के किसी भी त्यौहार पर इस तरीके की टिप्पणी होगी तो यह सहन नहीं किया जाएगा.'' 

इंग्लैंड अंडर 19 ने कप्तान हमजा शेख के जुझारू शतक की बदौलत भारत की उम्मीदों पर फेरा पानी

नई दिल्ली  इंग्लैंड अंडर 19 ने कप्तान हमजा शेख के जुझारू शतक की बदौलत भारत अंडर 19 टीम की जीत की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उसे पहले युवा टेस्ट क्रिकेट मैच के चौथे और अंतिम दिन ड्रॉ पर रोक दिया। भारतीय टीम ने इंग्लैंड के सामने 350 रन का लक्ष्य रखा था। इंग्लैंड ने 63 ओवर में सात विकेट पर 270 रन बनाकर भारत को दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल नहीं करने दी। शेख ने मंगलवार को यहां 140 गेंदों पर 11 चौकों और दो छक्कों की मदद से 112 रन बनाए। उन्हें बेन मेयस से महत्वपूर्ण सहयोग मिला, जिन्होंने 82 गेंदों पर 51 रन बनाए। उनके अलावा विकेटकीपर-बल्लेबाज थॉमस रीव ने 35 गेंदों पर 50 रन का योगदान दिया। भारत ने 14वें ओवर में इंग्लैंड का स्कोर तीन विकेट पर 62 रन कर दिया था लेकिन इसके बाद वह दबाव बनाने में असफल रहा। इंग्लैंड ने शेख की मेयस और रीव के साथ उपयोगी साझेदारियों से अच्छी वापसी की। जब खेल समाप्त होने में एक घंटे का समय बचा था तब भारत ने लगातार ओवरों में दो रन आउट करके अपनी उम्मीद जगाई। उसने पहले शेख को आउट किया और फिर अगले ओवर में एकांश सिंह को वापस पवेलियन भेजा। लेकिन राल्फी अल्बर्ट (37 गेंदों पर नाबाद नौ रन) और जैक होम (36 गेंदों पर नाबाद सात रन) ने दबाव में धैर्य से काम लिया और मैच को ड्रॉ कराया। भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 540 रन बनाए थे जिसके जवाब में इंग्लैंड ने 439 रन बनाए। भारत ने अपनी दूसरी पारी में 248 रन बनाकर इंग्लैंड के सामने 350 रन का लक्ष्य रखा था। आयुष म्हात्रे की अगुवाई में भारत अंडर-19 ने इससे पहले पांच मैचों की युवा वनडे सीरीज 3-2 से जीती थी।  

कल्पेश याग्निक आत्महत्या केस में फर्जी जमानतदार, महिला आरोपी दोबारा गिरफ्तार

इंदौर  वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक ने 2018 में मुंबई के रहने वाली महिला सलोनी अरोड़ा से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. इस मामले में पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया था, जिसको पिछले दिनों जमानत मिल गई है. जिस व्यक्ति ने उनकी जमानत दी थी, उसने पर पूर्व में कई लोगों को फर्जी तरीके से जमानत दिलवाई थी, जिसके चलते एक बार फिर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मुंबई से महिला और जमानत देने वाले इंदौर निवासी केदार को गिरफ्तार किया है. नए केस में फंसी सलोनी अरोड़ा वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक की आत्महत्या मामले में आरोपी सलोनी अरोड़ा एक नए केस में फंस गईं. उन पर फर्जी कागजात पर जमानत लेने का मामला दर्ज हुआ है. सलोनी के साथ जमानतदार केदार डाबी को भी इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है और अब उनसे पूछताछ की जाएगी. इंदौर क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई नीरज याग्निक की शिकायत पर की थी. नीरज स्वर्गीय कल्पेश याग्निक के भाई हैं. उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. आत्महत्या मामले में हुई थी गिरफ्तार दरअसल मामला यह है कि साल 2018 में वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक जिस अखबार में काम करते थे, उसी दफ्तर में आत्महत्या कर ली थी. उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में था. मृतक कल्पेश याग्निक के साथ काम कर चुकी मुंबई निवासी महिला सलोनी अरोड़ा पर ब्लैकमेल करने सहित अन्य आरोप लगे थे, जिसे पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. करीब 1 साल बाद साल 2019 में सलोनी को कोर्ट से जमानत मिल गई थी. फर्जी कागज से कराई थी जमानत सलोनी की जमानत उनकी भाभी डिंपल संजय अरोड़ा ने कराई थी. कोई विवाद सामने आया उसके चलते उनकी भाभी ने साल 2021 में कोर्ट में अर्जी डालकर जमानत वापस ले ली थी. उसके बाद उनकी जमानत केदार डाबी नामक व्यक्ति के द्वारा कराई गई थी. जिस केदार डाबी ने सलोनी की जमानत करवाई थी. उसे पुलिस ने फर्जी जमानत कांड के मामले में गिरफ्तार किया था. हाई कोर्ट ने केदार डाबी को सशर्त पर जमानत दी थी कि वह अब किसी भी व्यक्ति की जमानत नहीं करवाएगा. इसके बावजूद उसने सलोनी की जमानत करवा दी. धोखाधड़ी सहित अन्य धाराएं लगी जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो पुलिस ने सलोनी की जमानत को खारिज करवा दिया. वहीं इस मामले में नीरज याग्निक की शिकायत पर सलोनी और उनकी जमानत करवाने वाले केदार डाबी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित फर्जी दस्तावेज लगाकर जमानत लेने के मामले में प्रकरण दर्ज किया है. पुलिस ने केदार डाबी को तो पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. अब सलोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे इंदौर लाया जा रहा है. इन धाराओं में केस दर्ज इंदौर पुलिस ने सलोनी के खिलाफ IPC की धारा 115, 120बी (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 465, 466, 467, 470, 471, 474 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना और उपयोग करना) के तहत केस दर्ज किया है। सलोनी अरोरा के अलावा इस मामले में सिमरोल निवासी केदार डाबी और आनंद नगर निवासी मधु श्रीवास्तव को भी आरोपी बनाया है। केदार डाबी पेशेवर जमानतदार है। कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?     वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक की आत्महत्या के बाद सलोनी अरोरा पर ने जुलाई 2018 को ब्लैकमेलिंग और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ था।     सलोनी अरोरा ने पहले डिंपल अरोरा की जमानत दी, लेकिन बाद में बदलकर केदार डाबी को जमानतदार बनाया।     जनवरी 2024 में केदार डाबी ने फर्जी ऋण पुस्तिका (लोन बुक) के आधार पर सलोनी के लिए ₹5 लाख की जमानत पेश की। मधु श्रीवास्तव ने केदार के शपथपत्र को सत्यापित करने वाली गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए।  हाईकोर्ट का पुराना ऑब्ज़र्वेशन नीरज याग्निक के अनुसार, केदार डाबी के खिलाफ पहले भी फर्जी जमानत से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं। डाबी आदतन पेशेवर जमानतदार है, यह टिप्पणी भी कर चुका है। कोर्ट में 3 साल से पेश नहीं हुई सलोनी जनवरी 2024 में जमानत के समय को छोड़कर, सलोनी 3 वर्षों से कोर्ट में पेश नहीं हुई। नीरज याग्निक का कहना है कि यह पूरी योजना न्यायालय की प्रक्रिया को धोखा देने और देश छोड़कर भागने की तैयारी का हिस्सा हो सकती थी। क्या है कल्पेश याग्निक आत्महत्या केस? 14 जुलाई 2018 को वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक ने दैनिक भास्कर ऑफिस की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि पूर्व सहकर्मी सलोनी अरोरा उन्हें लंबे समय से ब्लैकमेल कर रही थी। तब से यह मामला 28वें न्यायाधीश हेमंत रघुवंशी की कोर्ट में ट्रायल पर है।  अग्रिम कार्रवाई में जुटी पुलिस इंदौर डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया," आरोपी सलोनी अरोड़ा ने जमानतदार केदार डाबी के साथ मिलकर फर्जी कागज लगाकर जमानत ली थी. जिसकी शिकायत मिलने पर जांच की गई तो जमानत फर्जी पाई गई. इसी के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी सलोनी अरोड़ा और फर्जी जमानतदार को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस मामले की अग्रिम कार्रवाई में जुट गई है." 

बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बताया- विराट और रोहित के ओडीआई भविष्य पर अनिश्चितता के छंटे बादल

नई दिल्ली विराट कोहली और रोहित शर्मा क्या अभी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की तरफ से खेलते दिखेंगे? दोनों ने टी20 और टेस्ट से संन्यास ले लिया है। माना जा रहा कि दोनों का लक्ष्य 2027 का एकदिवसीय विश्व कप खेलने और भारत को फिर चैंपियन बनाने का है। वे तब तक खेल पाएंगे? यह सवाल तो बाद में आएगा, अभी तो सवाल यही है कि क्या वे वनडे में दिखेंगे? इसे लेकर बीसीसीआई ने बड़ा अपडेट दिया है। बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने विराट और रोहित के ओडीआई भविष्य पर अनिश्चितता के छंटे बादलों को साफ कर दिया है। शुक्ला ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में दो टूक कहा कि टेस्ट और टी20 से संन्यास ले चुके ये दोनों दिग्गज एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं इसे एकदम से स्पष्ट कर देना चाहता हूं।' राजीव शुक्ला ने विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर कहा, ‘हमें उनकी कमी हमेशा खलेगी, वो महान बल्लेबाज हैं और हमारे लिए अच्छी बात है कि वनडे के लिए वो सब उपलब्ध हैं।’ शुक्ला के दो टूक के बाद अब इस बात की उम्मीद बढ़ गई है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा 2027 में दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में दिख सकते हैं। भारतीय टीम अभी इंग्लैंड के दौरे पर है जहां दोनों देशों के बीच 5 टेस्ट मैच की सीरीज चल रही है। 3 टेस्ट हो चुके हैं जिनमें भारत को एक में जीत और 2 में हार मिली है। सीरीज का अगला टेस्ट 23 जुलाई से मैनचेस्टर में खेला जाएगा। आखिरी और पांचवा मैच 31 जुलाई से 4 अगस्त तक खेला जाएगा। इंग्लैंड दौरे के बाद भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज की मेजबानी करेगी। अगर टीम के अगले वनडे सीरीज की बात करें तो वेस्टइंडीज के साथ टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद भारतीय टीम 3 वनडे मैच की सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगी। उम्मीद है कि उसमें विराट कोहली और रोहित शर्मा खेलते हुए नजर आएंगे।  

AIMIM से चुनी गई MP की एकमात्र हिंदू महिला पार्षद ने दिया इस्तीफा, पति ने लगाए थे धर्म परिवर्तन कराने के आरोप

खरगोन  मध्य प्रदेश खरगोन नगर पालिका परिषद में वार्ड क्रमांक 2 की एआईएमआईएम की एकमात्र गैर मुस्लिम पार्षद ने धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। खरगोन की वार्ड क्रमांक 2 से एआईएमआईएम के टिकट से चुनाव जीतने वाली पार्षद अरुण उपाध्याय ने राष्ट्रीय कार्यालय हैदराबाद को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि वह निजी कारणों के चलते प्रदेश कोर कमेटी के पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रही हैं। फंड लेकर धर्म परिवर्तन का आरोप उन्होंने आज पत्रकारों से इस्तीफा के कारण पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पति श्यामलाल उपाध्याय 2022 में चुनाव जीतने के बाद से पार्षद पद छोड़ने का दबाब बना रहे थे। पद छोड़ने से मना करने के बाद उन्होंने विगत दो वर्षों से उन पर फंड लेकर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा कर विभिन्न फोरमों पर शिकायत भी की है। उन्होंने बताया कि वह जान से मारने की भी धमकी देते हैं, इसलिए अलग होकर उनके विरुद्ध तलाक का केस भी दायर किया है। इसके अलावा उन्होंने 15 दिन पहले पति के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से शिकायत भी की है। पत्रकार वार्ता में दी जानकारी उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने स्वयं धर्म परिवर्तन किया है, और ना ही वे फंड लेकर लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि पति से तकरार का कारण पार्टी थी, इसलिए वे इसे छोड़ रही हैं, लेकिन पार्षद के रूप में काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि 'मैंने पति से इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए भी कहा है।' AIMIM की पहली हिंदू महिला पार्षद 2022 के निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से प्रदेश में करीब आधा दर्जन पार्षद जीते थे। इनमें खरगोन की हिन्दू महिला अरुणा उपाध्याय सहित तीन पार्षद भी शामिल थे। वे AIMIM से प्रदेश की पहली हिंदू पार्षद बनकर चर्चा में रहीं। वार्ड 2 से अरुणा के सामने भाजपा प्रत्याशी सुनीता गांगले और कांग्रेस की शिल्पा सोनी मैदान में थीं। उन्होंने 643 वोट हासिल किए थे। भाजपा प्रत्याशी सुनीता को 612, कांग्रेस की शिल्पा को 498 मत मिले थे। अरुणा 31 वोट से जीती थी। खरगोन के वार्ड -2 में निकाय चुनाव के दौरान कुल 2915 मतदाता थे। वार्ड में 70% मुस्लिम आबादी होने के बावजूद उन्होंने जीत हासिल की थी।

ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश: भंवरी की कुबूलनामे से हिली पुलिस, जानें क्या उगला सच

जालौर चितलवाना पुलिस ने बाड़मेर निवासी इंस्टाग्राम इनफ्लुएंसर भंवरी उर्फ भाविका चौधरी को 152 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि उसे यह मादक पदार्थ चंदनी देवी नामक महिला से मिलता था और हर बार सप्लाई के बदले उसे करीब 10 हजार रुपये मिलते थे। भाविका चौधरी का पति गुजरात में काम करता है, इसी कारण उसका गुजरात आना-जाना बना रहता था ताकि किसी को शक न हो। बाड़मेर पुलिस को भंवरी के ड्रग तस्करी नेटवर्क की जानकारी पहले से थी। पुख्ता सूचना मिलने पर पुलिस ने नजर रखनी शुरू की और इस बार भंवरी रोडवेज बस के जरिए ड्रग्स लेकर गुजरात जा रही थी। बस के जालौर सीमा में प्रवेश करने पर चितलवाना पुलिस को सूचना दी गई और नाकाबंदी कर उसे पकड़ा गया। चितलवाना थाने में आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। सरवाना थानाधिकारी सूरजभान सिंह के अनुसार, भंवरी को अदालत में पेश कर 18 जुलाई तक 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। फिलहाल उससे तस्करी के नेटवर्क और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसके कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच कर रही है ताकि पता लगाया जा सके कि यह उसका पहला प्रयास था या उसने पहले भी ड्रग्स की सप्लाई की है। इनफ्लुएंसर होने के बावजूद भंवरी ने जल्दी पैसा कमाने के लिए तस्करी का रास्ता चुना, जो अब उसे भारी पड़ गया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग तस्करी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।  

नाटो प्रमुख ने कहा– रूस से कच्चा तेल खरीदने से उसकी युद्ध नीति को मिल रही मदद, भारत और चीन को जिम्मेदारी से कदम उठाने की सलाह

नई दिल्ली "सुनिए.. अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, या फिर भारत के प्रधानमंत्री हैं या फिर ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप अभी भी रूसियों के साथ बिजनेस कर रहे हैं और उनका तेल और गैस खरीद रहे हैं, तो आप समझ लीजिए कि अगर मॉस्को में बैठा वो आदमी शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं ले रहा है तो मैं 100 परसेंट का सेकेंडरी सैंक्शंस लगाने जा रहा हूं." धमकी की ये भाषा दुनिया के शक्तिशाली देशों के संगठन नाटो चीफ मार्क रूट की है. उन्होंने गैर कूटनीतिक शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए भारत-ब्राजील और चीन को रूस के साथ बिजनेस न करने की सलाह दी है. नाटो महासचिव मार्क रूट ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश रूस के साथ व्यापार करना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस लगाया जा सकता है और ये प्रतिबंध बहुत भारी पड़ सकते हैं. ये सैंक्शंस अमेरिका द्वारा इन देशों पर लगाया जा सकता है. उन्होंने बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही. यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूक्रेन के लिए नए हथियारों की घोषणा और रूस से सामान खरीदने वाले देशों पर कठोर टैरिफ लगाने की धमकी देने के ठीक एक दिन बाद कही गई.  मार्क रूट ने कहा है कि इन देशों को चाहिए कि वे पुतिन पर यूक्रेन के साथ सीजफायर के लिए दबाव बनाएं. रूट ने कहा, "इन तीनों देशों के लिए मेरा विशेष प्रोत्साहन यह है कि अगर आप बीजिंग या दिल्ली में रहते हैं, या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं, तो आपको इस पर गौर करना चाहिए, क्योंकि यह आपको बहुत प्रभावित कर सकता है." उन्होंने आगे कहा, "तो कृपया व्लादिमीर पुतिन को फोन करें और उन्हें बताएं कि उन्हें शांति वार्ता के बारे में गंभीर होना होगा, क्योंकि अन्यथा इसका ब्राज़ील, भारत और चीन पर व्यापक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा." गौरतलब है कि ट्रंप रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियारों की नई खेप देने का ऐलान कर चुके हैं. ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि अगर रूस 50 दिनों के अंदर शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है तो रूस का तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100 फीसदी सेकेंडरी टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने अपने बयान में ब्राजील, चीन या भारत का नाम नहीं लिया था. लेकिन मार्क रूट ने तस्वीर साफ कर दी है. बता दें कि ये तीन देश हैं जिन्होंने 2022 में पुतिन की सेना द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना जारी रखा है. बता दें कि अमेरिकी सीनेटर एक ऐसे विधेयक पर जोर दे रहे हैं जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रावधान है. मार्क रूट ने अपने बयान में काफी तल्खी लाते हुए कहा, "इसलिए मुझे यकीन है कि उन्हें अभी तक पता नहीं है कि उन्हें क्या हिट करेगा? इसे समझने में कुछ समय लगेगा. और मुझे लगता है कि आप लोग मीडिया में यह बात स्पष्ट कर रहे हैं, सीनेटर भी ब्राज़ील, भारत और चीन के अपने समकक्षों के साथ इस पर चर्चा कर रहे होंगे. हथियारों की आपूर्ति के अलावा, रूस पर अधिकतम दबाव डालने में यह बहुत मददगार होगा." बता दें कि भारत अमेरिका के साथ एक ऐसे व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहे हैं. जिसमें अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया जाने वाला टैरिफ 20 प्रतिशत हो सकता है.  चीन और भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के डेटा बताते हैं कि चीन और भारत कच्चे रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं.  पांच दिसंबर 2022 से मई 2025 के अंत तक चीन ने रूस के कुल कच्चे तेल के निर्यात का 47 फीसदी और भारत ने 38 फीसदी खरीदा है. 2024 में भारत ने रूस से लगभग 1.8 से 2.07 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया. जो उसके कुल तेल खरीद का 40-44% है. इसकी वैल्यू 2024 में 52.73 बिलियन डॉलर थी. चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. चीन ने 2024 में 1.76 से 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात रूस से प्रतिदिन किया. जो उसके कुल आयात का 20-22% है. 2024 में इसकी वैल्यू 78 बिलियन यूरो रही. दोनों देशों ने मिलकर मार्च 2023 में रूस के 91% तेल खरीदे. 

केंद्र सरकार ने MP में नए कॉलेजों को मान्यता देने से पहले काउंसिल के गठन की शर्त रखी

भोपाल  मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को तीन वर्ष बाद मान्यता मिलने जा रही है। मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल ने 2023-24 के सत्र के लिए 166 कॉलेजों को मान्यता के लिए चिह्नित किया है, इनमें 22 सरकारी हैं। मान्यता के लिए 32 नए कॉलेजों की तरफ से भी आवेदन आए थे, जिनमें 15 निरीक्षण में उपयुक्त पाए गए हैं, पर अभी यह असमंजस है कि नए कॉलेज खुलेंगे या नहीं। कारण, केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि जब तक हमारी काउंसिल नहीं बन जाती नए कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जाए। इस पर बीच का रास्ता निकालकर नए कॉलेजों की मान्यता के संबंध इसी सप्ताह शासन स्तर पर निर्णय होना है। इसके अतिरिक्त 2024-25 के सत्र की मान्यता भी एक माह के भीतर जारी हो जाएगी। इसकी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। बता दें, केंद्र सरकार द्वारा हेल्थ केयर एलाइड साइंस कमीशन के गठन में देरी के चलते मान्यता उलझी हुई थी। कुछ राज्यों में पैरामेडिकल काउंसिल थी और कुछ में नहीं। सभी जगह पाठ्यक्रम भी अलग-अलग चल रहे थे। इसमें एकरूपता लाने के लिए केंद्र ने नेशनल कमीशन फार एलाइड साइंस एंड हेल्थ केयर प्रोफेशनल (एनसीएचपी) बनाया है। इसके बाद राज्यों की काउंसिल और चयन, भर्ती, यूजी और पीजी के लिए चार अलग-अलग बोर्ड बनने थे। कमीशन बनने के बाद राज्यों ने अपनी काउंसिल भंग कर दी, पर केंद्र के रेगुलेशन अभी तक तैयार नहीं हो पाए, इस कारण प्रदेश में शिक्षा सत्र 2023-24 और सत्र 2024-25 की मान्यता नहीं दी गई। मार्च में कैबिनेट ने प्रदेश की पैरामेडिकल काउंसिल को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। अब नवंबर से 2025-26 का सत्र भी प्रारंभ होना है। इस तरह इस वर्ष तीन सत्रों के लिए कॉलेजों को मान्यता दी जानी है। केंद्र के रेगुलेशन पर नई काउंसिल बनने के बाद यह होगा लाभ पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रदेश स्तर पर बोर्ड होगा। एक राज्य से डिग्री या डिप्लोमा करने वालों का दूसरे राज्यों में भी पंजीयन हो सकेगा। सभी राज्यों के पाठ्यक्रमों में एकरूपता आ जाएगी।