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इंडेक्स घोटाले में CBI की छापेमारी, रसूखदारों रविशंकर महाराज, डीपी सिंह और भदौरिया कसा शिकंजा

रायपुर  CBI ने प्रदेश के प्रसिद्ध संत व रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन रविशंकर महाराज(Rawatpura Sarkar) के खिलाफ FIR दर्ज की है. उनके खिलाफ ये FIR कॉलेज को मान्यता देने और सीटें बढ़ाने के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल यानी NMC  की टीम को रिश्वत देने के मामले में दर्ज कराई गई है. दरअसल CBI को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि NMC के कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत लेकर निजी मेडिकल कॉलेजों की मान्यता रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. इसी सूचना के आधार पर CBI ने ट्रैप तैयार किया और बेंगलुरू में इंस्पेक्शन टीम के एक डॉक्टर को 55 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया. वैसे रावतपुरा सरकार की मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही है. रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार के इस मेडिकल कॉलेज का जीरो ईयर भी घोषित किया जा सकता है. इस पूरी जांच में श्री रावतपुरा समेत आठ राज्यों के मेडिकल कालेज प्रबंधन से पैसे लेकर मान्यता देने का मामला सामने आया है.  CBI ने छापे की ये कार्रवाई बीते 1 जुलाई को की. CBI टीम ने तब कर्नाटक,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़,राजस्थान,उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 6 राज्यों में 40 जगह छापे मारे थे.  जिसमें तीन डॉक्टर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. अब CBI ने इसी मामले में श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल साइंस और उसके चेयरमैन श्री रविशंकर जी महाराज और निदेशक अतुल तिवारी समेत 35 लोगों को आरोपी बनाया है. अब आप ये जान लीजिए कि किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है.  इसके अलावा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के अधिकारी जीतू लाल मीना (Jeetu Lal Meena), धर्मवीर (Dharmveer), पीयूष माल्यान (Piyush Malyan), राहुल श्रीवास्तव (Rahul Srivastava), अनूप जायसवाल (Anup Jaiswal) जैसे नाम भी चार्जशीट में दर्ज हैं.  कौन हैं रावतपुरा सरकार? संत रविशंकर महाराज को ही मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत उत्तर भारत के लोग रावतपुरा सरकार के नाम से जानते हैं. उनके भक्तों की सूची कई बड़े राजनेता भी शामिल हैं. अध्यात्म की दुनिया में वे बड़ा नाम हैं. वो रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के चेयरमैन भी हैं. इसी इंस्टीट्यूट के मामले में CBI ने जो FIR दर्ज की है उसमें उनका नंबर चौथा है. संत रविशंकर महाराज का जन्म 12 जुलाई 1968 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गांव में हुआ था. उनका बचपन का नाम रवि था, जो उनके नाना-नानी ने रखा था. उनके पिता,कृपाशंकर शर्मा, एक ग्राम सेवक थे. उनकी मां का नाम रामसखी शर्मा है. उन्हें करीब से जानने वाले बताते हैं कि तब वे स्कूल जाने के बजाय अक्सर गांव से 2 किलोमीटर दूर शारदा माता मंदिर के पास एक गुफा में ध्यान लगाने चले जाते थे. उनकी माँ को कई बार उन्हें गुफा से निकालकर घर लाना पड़ता था. कई बार उनकी मां को गुफा में रवि के कपड़े भीगे हुए मिले, जैसे उन्होंने कुएं में डुबकी लगाई हो.  11 वर्ष की उम्र में घर छोड़ा और बन गए बाबा ऐसा कहा जाता है कि रावतपुरा सरकार 11 साल की उम्र में  आध्यात्मिक खोज में निकल पड़े थे. यह निर्णय उनके परिवार के लिए चिंता का विषय था, क्योंकि वे परिवार के सबसे बड़े बेटे थे और उनसे जिम्मेदारियों की उम्मीद थी. फिर भी, उनकी आध्यात्मिक रुचि ने उन्हें रावतपुरा गांव (लहार, भिंड, मध्य प्रदेश) में हनुमान मंदिर के पास ले गई, जहां उन्होंने साधना शुरू की. यहीं से उन्हें "रावतपुरा सरकार" की उपाधि मिली.रावतपुरा गांव में हनुमान मंदिर के पास साधना के बाद रविशंकर महाराज ने रावतपुरा धाम को अपने आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया. उनका आश्रम धीरे-धीरे भक्तों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गया।  यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज भी बनवाए साल 2000 में, रविशंकर जी महाराज ने रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट की स्थापना की. इस ट्रस्ट ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शिक्षा,स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में व्यापक काम किए. ट्रस्ट के तहत स्कूल, कॉलेज,अस्पताल,ब्लड बैंक,नर्सिंग कॉलेज और वृद्धाश्रम जैसे संस्थान चलाए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में श्री रावतपुरा यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई. जिसमें इंजीनियरिंग,मैनेजमेंट,फार्मेसी,कॉमर्स,साइंस और आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी प्रोग्राम प्रदान की जाती है. इसके अलावा वा रायपुर में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) की भी स्थापना की गई.इसी मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए रिश्वत कांड में उनके खिलाफ सीबीआई ने FIR दर्ज की है. कौन हैं रावतपुरा सरकार के नाम से मशहूर रविशंकर महाराज? छत्तीसगढ़ में श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए मनचाही रिपोर्ट देने के लिए 55 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में 3 डॉक्टरों समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद एक बार फिर रावतपुरा महाराज सुर्खियों में आ गए हैं.  दरअसल, रावतपुरा सरकार के नाम से मशहूर रविशंकर महाराज इस मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन भी हैं. आखिर कौन हैं रावतपुरा सरकार और कैसे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की बड़ी हस्तियां इनके आशीर्वाद के लिए जाते हैं? यह समझने की कोशिश करते हैं. रविशंकर महाराज कैसे बने रावतपुरा सरकार!  दरअसल, रावतपुरा सरकार की प्रसिद्धि की शुरुआत भिंड के लहार स्थित उनके आश्रम की वजह से हुई. जहां रावतपुरा सरकार का यह आश्रम एक प्राचीन हनुमान मंदिर के पास स्थित है. रावतपुरा में हर रोज हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.  यहां संत ही ‘सरकार’ हैं! रविशंकर महाराज का जन्म बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गांव में हुआ था. इनका बचपन काफी आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरा. आगे चलकर उनके माता-पिता ने रविशंकर महाराज का दाखिला ओरछा के रामराजा संस्कृत विद्यालय में करवा दिया ताकि वो पुरोहित का काम सीख सकें, लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा और वो पढ़ाई बीच में ही छोड़कर रावतपुरा गांव पहुंच गए और यहां स्थित हनुमान मंदिर में साधना शुरू कर दी.  मंदिर में प्राप्त हुईं सिद्धियां स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी मंदिर में रविशंकर महाराज को सिद्धियां प्राप्त हुईं और उन्होंने अपना दरबार लगाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे मंदिर में रविशंकर महाराज को मानने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी, पर वहां जगह की कमी को देखते हुए बात में रावतपुरा धाम की स्थापना की गई, जहां एक विशाल आश्रम बनाया गया. ट्रस्ट बनने … Read more

दुर्ग : होटल सागर इंटरनेशनल के मालिक विजय अग्रवाल के ठिकानों पर ED की रेड

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के एक बड़े कारोबारी के घर ईडी की टीम पहुंची है. ईडी की रेड दुर्ग जिले में पड़ी है. दीपक नगर दुर्ग में छत्तीसगढ़ के एक बड़े कारोबारी, होटल व्यवसायी और सागर होटल के मालिक विजय अग्रवाल के बंगले पर ईडी छापे की कार्रवाई जारी है. दुर्ग में होटल व्यवसायी के घर ईडी: सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह 6:00 बजे दो गाड़ियों में सवार होकर ईडी के अधिकारी होटल व्यवसायी के घर पहुंचे.उन्होंने पहले गेट पर तैनात निजी सुरक्षा गार्ड से परिचय पत्र दिखाकर दरवाजा खुलवाया, फिर घर के अंदर प्रवेश कर पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया. दुर्ग में सागर होटल के मालिक के घर ईडी बताया जा रहा है कि ईडी अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों को जांच में सहयोग करने की बात कही और घर में मौजूद दस्तावेजों की गहनता से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों में खलबली मच गई है. छापेमारी की कार्रवाई जारी है. सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवान साथ में तैनात हैं. सुबह 6 बजे 2 गाड़ियों में पहुंचे ईडी के अधिकारी  कौन है विजय अग्रवाल: विजय अग्रवाल दुर्ग स्टेशन के सामने स्थित सागर होटल के मालिक हैं और स्थानीय होटल व्यवसाय में उनका मजबूत दबदबा है. ईडी की इस कार्रवाई का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन अनुमान है कि यह दबिश वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी हो सकती है. होटल व्यवसायी के घर ईडी 4 जुलाई को भिलाई में ईडी का छापा: ईडी पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में सक्रिय है. बीते 4 जुलाई को ईडी ने कारोबारी सौरभ आहूजा के बड़े भाई को पूछताछ के लिए रायपुर स्थित ईडी दफ्तर बुलाया था. ईडी को शक था कि राजस्थान के जयपुर में शादी के बहाने सौरभ आहूजा ने कई महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात और नेटवर्किंग की योजना बनाई है. मामला ऑनलाइन बेटिंग एप से जुड़ा हुआ है. 5 जुलाई को सोना तस्करी सिंडिकेट पर ईडी की कार्रवाई: विदेशी मूल की तस्करी का सोना खरीदने और आपूर्ति के मामले में ईडी ने कार्रवाई करते हुए रायपुर सोना तस्करी सिंडिकेट के दो सदस्यों सचिन केदार और पुरुषोत्तम कावले की 3.76 करोड़ की संपत्ति अस्थायी तौर पर कुर्क की थी. 

क्रिकेट में सबसे शर्मनाक पारी! वेस्टइंडीज की पूरी टीम 27 रन पर ऑलआउट, 7 खिलाड़ी जीरो पर

नईदिल्ली  ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में मेजबान वेस्टइंडीज के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड जुड़ा है. पूरी टीम दूसरी पारी में महज 27 के स्कोर पर सिमट गई. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 176 रनों से ये मैच जीत लिया. वेस्टइंडीज को टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे शर्मनाक स्कोरकार्ड में से एक का सामना करना पड़ा. यह वेस्टइंडीज के इतिहास में उसका सबसे कम टोटल था. वे न्यूजीलैंड के बदनाम 26 के स्कोर से बस एक रन दूर थे. बता दें कि टेस्ट मैच में सबसे कम स्कोर न्यूजीलैंड के नाम दर्ज है.  स्टार्क ने ऐसे पलट दिया मैच अपने 100वें टेस्ट मैच में इससे बेहतर प्रदर्शन कोई क्या कर सकता है? मिचेल स्टार्क ने नई गेंद से वेस्टइंडीज पर कहर बरपाया. उन्होंने पारी की पहली ही गेंद पर जॉन कैंपबेल को आउट किया और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. सिर्फ 15 गेंदों में उन्होंने 5 विकेट झटके, जो अब टेस्ट इतिहास में सबसे तेज़ (गेंदों के हिसाब से) पांच विकेट लेने का रिकॉर्ड है. उन्होंने अर्नी टोशैक का 79 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. बोलैंड की हैट्रिक ने विंडीज का खेल खत्म किया स्टार्क ने जहां टॉप ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया था, वहीं स्कॉट बोलैंड ने टेल-एंड को समेटा. उन्होंने लगातार तीन गेंदों में जस्टिन ग्रीव्स, शामर जोसेफ और जोमेल वॉरिकन को आउट कर हैट्रिक पूरी की. वह टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले 10वें ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ बने. 7 बल्लेबाज नहीं खोल सके खाता वेस्टइंडीज सिर्फ 14.3 ओवर में 27 रन पर ऑल आउट हो गई. टेस्ट इतिहास में दूसरा सबसे कम स्कोर और वेस्टइंडीज का अब तक का सबसे कम स्कोर था. उनके सात बल्लेबाज़ खाता तक नहीं खोल सके. सिर्फ चार खिलाड़ी रन बना सके और टॉप छह बल्लेबाज़ों ने कुल मिलाकर केवल 6 रन जोड़े. 176 रन की हार के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली. टेस्ट इतिहास में सबसे कम स्कोर टेस्ट इतिहास में सबसे कम स्कोर की बात करें तो यह शर्मनाक रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम दर्ज है. जब 1955 में इंग्लैंड के खिलाफ न्यूजीलैंड की टीम 26 के स्कोर पर सिमट गई थी. वहीं, दूसरे पायदान पर अब वेस्टइंडीज है जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मैच में 27 के स्कोर पर सिमट गई. वहीं, दक्षिण अफ्रीका का नाम इस लिस्ट में तीन बार आता है. अफ्रीका 1896 और 1924 में दो बार महज 30 के स्कोर पर ऑल आउट हुआ है. जबकि 1899 में दक्षिण अफ्रीका 35 पर सिमट गया था.

भारत में लॉन्च हुआ LG का AI Smart TV, लगभग 25 लाख रुपये है कीमत, जानिए फीचर्स

LG ने भारतीय बाजार में अपने नए स्मार्ट टीवी को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने OLED evo और QNED evo सीरीज को पेश किया है. इस लाइन-अप में आपको ज्यादा प्रीमियम फीचर्स मिलेंगे. इसमें AI फीचर्स दिए गए हैं, जो इन स्मार्ट टीवी को दूसरों से अलग बनाते हैं. कंपनी ने सिर्फ स्मार्ट फीचर्स को नहीं जोड़ा है, बल्कि TV को इंटेलिजेंस बनाने पर काम किया है.  यूजर किस तरह से इंटरैक्ट करता है, टीवी इसका ध्यान रखता है और फ्यूचर में वैसे ही कंटेंट को सजेस्ट करता है. दोनों ही वेरिएंट्स में कंपनी ने AI एन्हांसमेंट, एडवांस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और अपडेटेड WebOS दिया है. आइए जानते हैं इन स्मार्ट टीवी की कीमत और दूसरी खास बातें.  क्या है इन Smart TV में खास? 2025 OLED evo और QNED evo TV में कंपनी ने Alpha AI Gen 2 प्रोसेसर दिया है. इसकी वजह से आपको बेहतर कस्टमाइजेशन और स्मार्ट कंट्रोल्स मिलेंगे. AI मैजिक रिमोट में अब कंपनी ने अलग से AI बटन दिया गया है, जिसका इस्तेमाल वॉयस कंट्रोल और नेविगेशन के लिए किया जा सकता है.  यूजर्स के इस्तेमाल करने के तरीके पर टीवी उन्हें पर्सनलाइज्ड कंटेंट ऑफर करेगा और कीवर्ड्स पर सजेस्ट करेगा. AI सर्च का फीचर जोड़ा गया है जो लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर बना है. टीवी में दिया गया AI चैटबॉट रियल टाइम में इशू को डिटेक्ट करता है और उसका समाधान प्रदान करता है.  लेटेस्ट टीवी में ने नया webOS दिया है, जो अपग्रेडेड और फास्ट यूजर एक्सपीरियंस ऑफर करता है. इसमें आपको रिडिजाइन होम स्क्रीन मिलेगी, जो मल्टीपल यूजर प्रोफाइल सपोर्ट करती है. इसमें बिल्ट-इन Apple AirPlay और गूगल कास्ट मिलता है, जिसकी मदद से आप अपने फोन के कंटेंट को टीवी पर शेयर कर सकते हैं.  कितनी है कीमत? QNED AI TV को कंपनी ने 74,990 रुपये (QNED8BA सीरीज) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. ये टीवी 43-inch से 75-inch तक के स्क्रीन साइज का ऑप्शन मिलता है. वहीं QNED evo सीरीज (QNED8GA/XA) 1,19,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिलेगी. OLED स्मार्ट टीवी 1,93,900 रुपये (B5 सीरीज) की शुरुआती कीमत पर आता है.  OLED evo के C5 सीरीज को आप 1,49,990 रुपये की कीमत, G5 सीरीज को 2,67,990 रुपये में और G5 Ultra-Large टीवी सीरीज को 24,99,990 रुपये में खरीद पाएंगे. ये कीमत 97-inch के स्मार्ट टीवी की है.

टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर फेल, 5 कारणों में छिपी भारत की हार की कहानी

लॉर्ड्स   लॉर्ड्स टेस्ट में टीम इंडिया को रोमांचक मैच में हार का सामना करना पड़ा है. भारत के सामने 193 रनों का लक्ष्य था. लेकिन शुभमन गिल की सेना महज 170 के स्कोर पर ही ढेर हो गई. जडेजा एक छोर पर टिके रहे और नाबाद 61 रनों की पारी खेली लेकिन भारत ये मैच 22 रन से हार गया. इस जीत के साथ इंग्लैंड की टीम 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में अब 2-1 से आगे है. पांचवे और आखिरी दिन भारत को 135 रनों की दरकार थी. जबकि 6 विकेट हाथ में थे. लेकिन पंत, राहुल और रेड्डी समेत कोई भी बल्लेबाज अंग्रेजों के सामने टिक नहीं सका और भारत को हार का सामना करना पड़ा. दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा मुकाबला 23 जुलाई से मैनचेस्टर में होगा.  भारत की दूसरी पारी की हाइलाइट्स टारगेट का पीछा करते हुए दूसरी पारी में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. उसने यशस्वी जायसवाल का विकेट दूसरे ही ओवर में गंवा दिया, जो अपना खाता भी नहीं खोल सके. फिर भारतीय टीम ने खेल के चौथे दिन करुण नायर (14 रन), कप्तान शुभमन गिल (6 रन) और नाइवॉचमैन आकाश दीप (1 रन) का भी विकेट गंवाया. पांचवें दिन भी भारत की खराब लय जारी रही और जडेजा के अलावा कोई भी बल्लेबाज ज्यादा देर तक नहीं टिक सका. इन 5 कारणों में छिपी है लॉर्ड्स में भारत की हार की पूरी कहानी दूसरी पारी में टॉप ऑर्डर रहा फेल लीड्स और बर्मिंघम टेस्ट में शानदार बल्लेबाज़ी करने वाले शुभमन और यशस्वी इस बार दोनों पारियों में सिर्फ 39 रन ही बना सके. करुण नायर, जो पहले दो टेस्ट में एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए, इस टेस्ट में 40 और 16 रन बनाकर आउट हुए. ऐसे में राहुल, पंत और जडेजा पर ही सारी उम्मीदें टिकी रहीं. राहुल ने 100 और 39 और जडेजा ने 72 और 61 रन की पारियां खेलीं, लेकिन उन्हें किसी भी बल्लेबाज़ से समर्थन नहीं मिला. पहली पारी की गलतियां पड़ी भारी पहली पारी में भारत 376/6 पर था लेकिन अगले 4 विकेट सिर्फ 11 रन में गिर गए. दूसरी पारी में टीम 193 रन के आसान लक्ष्य का पीछा कर रही थी, लेकिन पहले दिन का अंत 58/4 पर हुआ. पांचवें दिन पहले सत्र में तीन और विकेट सिर्फ 24 रन में गिर गए. 112 रन पर 8 विकेट गिरने के बाद भारत की हार तय हो गई थी. जोफ्रा आर्चर ने बाएं हाथ के बल्लेबाजों को किया परेशान 4 साल बाद टेस्ट क्रिकेट में लौटे जोफ्रा आर्चर ने भारत के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कीं. पहली पारी में उन्होंने यशस्वी को पहली ही गेंदों में आउट किया. दूसरी पारी में उन्होंने यशस्वी, पंत और सुंदर को आउट कर दिया. बाए हाथ के बल्लेबाजों के लिए आर्चर मुश्किल बनते गए. उन्होंने इस मैच में कुल 5 विकेट लिए और कमाल की बात रही की वो सभी विकेट बाए हाथ के बल्लेबाजों के थे. कठिन होती गई पिच लॉर्ड्स की पिच मैच के दौरान लगातार मुश्किल होती गई. पहले दिन जहां 251 रन बने और 4 विकेट गिरे (प्रत्येक 63 रन पर एक विकेट), वहीं पांचवें दिन पहले सत्र में 54 रन पर 4 विकेट गिरे, यानी प्रत्येक 14 रन पर एक विकेट. इसलिए टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करना इंग्लैंड के लिए फायदेमंद साबित हुआ. सिराज का बैडलक एक समय टीम इंडिया का स्कोर 112-8 था. इसके बाद बुमराह और जडेजा के बीच कमाल की साझेदारी हुई. बुमराह ने जडेजा का पूरा साथ दिया. बुमराह ने 54 गेंद खेली और केवल 5 रन बनाए. 147 पर जब बुमराह का विकेट गिरा तो सिराज ने उनका रोल निभाया. सिराज बी 30 गेंद खेल गए. लेकिन आखिर में सिराज का बैडलक उनपर भारी पड़ा और गेंद उनके पैर से टकराने के बाद स्टंप पर लग गई.   शोएब बशीर बचे दोनों टेस्ट से बाहर हो गए  लॉर्ड्स टेस्ट में मिली जीत के बाद मेजबान इंग्लैंड को एक बड़ा झटका लगा है. भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के पहले तीन मैचों में सबसे ज्यादा ओवर फेंकने वाले शोएब बशीर बचे दोनों टेस्ट से बाहर हो गए हैं. बशीर ने सबसे ज़्यादा 140.4 ओवर (844 गेंदें) डाले, जो किसी भी गेंदबाज़ द्वारा सबसे अधिक हैं. हालांकि इंग्लैंड सीरीज में 2-1 से आगे है, लेकिन अधिकतर पहलुओं में भारत ने मेज़बानों को पीछे छोड़ा है, खासकर स्पिन डिपार्टमेंट में. 20 वर्षीय ऑफ स्पिनर, जिन्होंने धीरे-धीरे इंग्लैंड के प्रमुख स्पिनर के रूप में अपनी जगह बनाई थी, को लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट के दौरान बाएं हाथ की उंगली में फ्रैक्चर हो गया. जाने क्यों बाहर हुए शोएब बशीर यह चोट तब लगी जब बशीर ने तीसरे दिन रविंद्र जडेजा का कैच पकड़ने की कोशिश की. गेंद पकड़ते वक्त उनकी उंगली पर चोट लगी और वह मैदान छोड़कर चले गए. इसके बाद वे भारत की पहली पारी में गेंदबाज़ी के लिए नहीं लौटे. शुरुआत में इंग्लैंड टीम प्रबंधन को उम्मीद थी कि वे अगला मैच खेल सकेंगे, क्योंकि भारत की दूसरी पारी में उन्होंने आखिर में गेंदबाजी की और सिराज का आखिरी विकेट भी झटका. लेकिन अब यह पुष्टि हो गई है कि बशीर इस सप्ताह सर्जरी करवाएंगे और सीरीज के बाकी मैचों में हिस्सा नहीं लेंगे. फ्रैक्चर के बावजूद बशीर पूरी तरह मैच से बाहर नहीं रहे. इंग्लैंड की दूसरी पारी में उन्होंने बल्लेबाज़ी की और 9 गेंदें खेलीं. इसके बाद वे पांचवें दिन के अंत में गेंदबाज़ी के लिए भी लौटे. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने ही मैच का अंतिम विकेट लिया. ऐसा रहा है बशीर का प्रदर्शन तीन टेस्ट मैचों में बशीर ने 54.1 की औसत से 10 विकेट लिए. यह प्रदर्शन शानदार तो नहीं रहा, लेकिन वे इंग्लैंड के सबसे अधिक इस्तेमाल किए गए गेंदबाज़ रहे. उन्होंने सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (541) भी दिए. अब बशीर की अनुपस्थिति ने इंग्लैंड की योजनाओं को मुश्किल में डाल दिया है. जैक लीच, जो बशीर के आने के बाद प्लेइंग इलेवन से बाहर हुए थे, यदि फिट हैं तो उन्हें वापस लाया जा सकता है. अन्य विकल्पों में रेहान अहमद, टॉम हार्टली और लियाम डॉसन शामिल हैं. वहीं, जैकब बेटेल, जो पहले से स्क्वॉड में … Read more

मप्र में निवेश को लेकर दुबई के निवेशक उत्साहित, निवेश की संभावनाओं पर हुआ व्यापक संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की दुबई के निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को बताया मध्यप्रदेश है निवेश के लिए श्रेष्ठ गंतव्य मप्र में निवेश को लेकर दुबई के निवेशक उत्साहित, निवेश की संभावनाओं पर हुआ व्यापक संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दुबई निवेश यात्रा के दौरान सोमवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर के निवेशकों और औद्योगिक समूहों से वन-टू-वन चर्चा हुई, जिसमें मध्यप्रदेश में बहु-क्षेत्रीय निवेश की संभावनाओं पर व्यापक और सकारात्मक संवाद हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गल्फ इस्लामिक इन्वेस्टमेंट्स (GII) के सह-संस्थापक एवं सह-सीईओ श्री पंकज गुप्ता से मुलाकात कर स्वास्थ्य सेवा, लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक रियल एस्टेट, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्माण क्षेत्र में संभावित निवेश पर चर्चा की। जीआईआई एक शरिया-संगत वैकल्पिक निवेश फर्म है जो वैश्विक स्तर पर विविध क्षेत्रों में निवेश करती है और अब मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टाटा समूह के कॉरपोरेट अफेयर्स एवं ग्रोथ (MENA रीजन) प्रमुख श्री अंकुर गुप्ता से भी मुलाकात की। चर्चा में आईटी, ऊर्जा, स्टील, ऑटोमोबाइल, एयरलाइंस, उपभोक्ता उत्पाद और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई। मुख्यमंत्री ने टाटा समूह को मध्यप्रदेश में रणनीतिक निवेश केंद्र स्थापित करने हेतु आमंत्रित करते हुए राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों और त्वरित अनुमतियों की जानकारी दी। गल्फ महाराष्ट्र बिजनेस फोरम (GMBF) के अध्यक्ष डॉ. सुनील मांजरेकर के साथ बैठक में GMBF द्वारा मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने, निर्यात बढ़ाने और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों से सीधे संवाद के लिए मंच प्रदान करने सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने GMBF की ग्लोबल कनेक्ट सीरीज़ के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने पर प्रसन्नता जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बीडीओ एज के हेड ऑफ एडवायजरी श्री शिवेंद्र झा ने भेंट कर भोपाल में 150-सीटर ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर की स्थापना और इंदौर में प्रस्तावित दूसरा डिजिटल सेंटर की जानकारी साझा की। यह केंद्र डिजिटल व परामर्श सेवाओं में रोजगार सृजन करेगा। साथ ही अगले तीन वर्षों में 800-1000 उच्च-कुशल नौकरियों के सृजन का लक्ष्य है। शराफ डीजी ग्रुप के चेयरमैन श्री इब्राहिम शराफ के साथ हुई बैठक में मध्यप्रदेश में 30-50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से रेल साइडिंग लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिससे राज्य में 300 से 600 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एस्सार अल घुरैर इन्वेस्टमेंट के प्रतिनिधि श्री योसेफ अल गुरैर से मुलाकात कर खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य तेल शोधन इकाई और कोल्ड चेन वेयरहाउस परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया। समूह ने राज्य के किसानों से दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूती देने की इच्छा जताई। कोनेरिस ग्रुप के सीईओ श्री भरत भाटिया ने मध्यप्रदेश में USD 75 मिलियन लागत से स्टील प्लांट की स्थापना की योजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष रखी। कंपनी पहले से ही 26 देशों में स्टील उत्पाद भेजती है और भारत में अपनी उपस्थिति राज्य के माध्यम से बढ़ाना चाहती है। एतिसालात ग्रुप के सीईओ श्री खालिद मुर्शिद से स्मार्ट सिटी, 5G नेटवर्क, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ और डिजिटल स्किल डवलपमेंट के क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव रखें। कंपनी 16 से अधिक देशों में कार्यरत है और मध्यप्रदेश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में रुचि रखती है। ब्रावो फार्मास्युटिकल्स के निदेशक श्री राकेश पांडेय ने फार्मा निर्माण और निर्यात को लेकर निवेश रुचि दिखाई, वहीं स्मार्ट स्टार्ट फंड के श्री प्रशांत गुलाटी ने आईटी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े स्टार्टअप्स को मध्यप्रदेश में प्रोत्साहित करने की बात कही। अनलाह वेंचर पार्टनर्स के हितेश धनकानी ने म्यूचुअल फंड, बीमा और इक्विटी सेवाओं में निवेश की योजना साझा की और स्पैन कम्युनिकेशन्स के सीईओ श्री नरेश खेतरपाल ने राज्य में पर्यटन, नेचुरोपैथी रिसॉर्ट और क्रूज़ टूरिज्म को प्रोत्साहित करने हेतु 500 करोड़ रूपये निवेश के साथ 100-150 रोजगार सृजन की संभावना जताई। वहीं, ब्लूवर्स इंडिया के श्री रुशांग शाह ने पर्यावरण-अनुकूल वाहन धुलाई तकनीक और जल संरक्षण आधारित समाधान लाने की योजना साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निवेशकों को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश सरकार उन्हें हर संभव सहायता, नीति समर्थन और त्वरित अनुमतियाँ प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य की औद्योगिक नीतियाँ, प्रशिक्षित कार्यबल, प्राकृतिक संसाधन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। यह यात्रा मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश नक्शे पर और सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।  

UPSC CSE Mains परीक्षा का शेड्यूल जारी, 22 अगस्त से होगा एग्जाम

संघ लोक सेवा आयोग ( यूपीएससी ) ने upsc.gov.in पर सिविल सेवा मुख्य परीक्षा, 2025 का टाइम टेबल जारी कर दिया है. कार्यक्रम के अनुसार, परीक्षा 22 अगस्त (शुक्रवार) को निबंध पेपर (Essay paper) के साथ शुरू होगी और 31 अगस्त को वैकल्पिक विषय (पेपर 2) के साथ समाप्त होगी. यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएंगी, सत्र 1 सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और सत्र 2 दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 2025 के लिए सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है. कार्यक्रम के अनुसार, यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 22, 23, 24, 30 और 31 अगस्त को आयोजित की जाएगी. UPSC CSE Mains 2025: परीक्षा 2025 प्रत्येक दिन दो सत्रों में आयोजित की जाएगी: सुबह का सत्र: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक दोपहर का सत्र: दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक यूपीएससी सीएसई मेंस 2025: तारीख तय नहीं यूपीएससी सीएसई मेंस 2025: परीक्षा पैटर्न सिविल सेवा परीक्षा में तीन चरणों के बाद सेलेक्शन होता है. सबसे पहले प्रारंभिक(Prelims), मुख्य परीक्षा ( Mains)और साक्षात्कार (Interview). प्रारंभिक चरण में दो वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर (Objective Type Question Paper) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक 200 अंकों का होता है. प्रश्नपत्र II (CSAT) अर्हता प्राप्त करने वाला होता है, जिसमें उम्मीदवारों को न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने होते हैं. इस परीक्षा में दोनों प्रश्न पत्र अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध होते हैं. लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जिसके लिए 275 अंक निर्धारित हैं. साक्षात्कार में कोई न्यूनतम अर्हक अंक (Minimum Qualifying Marks) आवश्यक नहीं है. मुख्य परीक्षा में दो अर्हक प्रश्नपत्र (Two qualifying papers) होते हैं – प्रश्न पत्र 'अ' (भारतीय भाषा) और प्रश्नपत्र 'ब' (अंग्रेजी), प्रत्येक 300 अंकों का होता है. इन्हें अंतिम मेरिट लिस्ट में नहीं गिना जाता है. मेरिट सूची में शामिल होने वाले प्रश्न पत्रों में शामिल हैं: निबंध, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I से IV, और एक वैकल्पिक विषय पर दो प्रश्नपत्र. इन सातों प्रश्नों में से प्रत्येक 250 अंकों का होता है. सीएसई मुख्य परीक्षा के लिए कौन पात्र हैं? इस परीक्षा में केवल वे ही मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होंगे जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा 2025 पास की है. प्रारंभिक परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों को विस्तृत आवेदन पत्र-I (DAF-I) जमा करना था. कब हुई थी प्रारंभिक परीक्षा यूपीएससी सीएसई प्रारंभिक परीक्षा 25 मई, 2025 को आयोजित की गई थी. इसमें दो वस्तुनिष्ठ प्रकार के पेपर (एमसीक्यू) शामिल थे, प्रत्येक दो घंटे का था और अधिकतम 200 अंक थे. प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जून में घोषित किया गया था. मुख्य लिखित परीक्षा के बाद, यूपीएससी साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण दौर आयोजित करेगा और अंतिम परिणाम घोषित करेगा. अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक जानकारी के लिए नियमित रूप से आयोग की वेबसाइट देखते रहें.

ग्वालियर विधानसभा में पहुंचे ऊर्जा मंत्री तोमर, लोगों से सीधा संवाद

 ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उप नगर ग्वालियर के विभिन्न  वार्डो में जनसम्पर्क कर जनसमस्याएं सुनी तथा उनका त्वरित निराकरण करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिए। ऊर्जा मंत्री के साथ जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन तथा विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के अलावा स्थानीय पार्षद व अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  ऊर्जा मंत्री तोमर ने सोमवार की सुबह उप नगर ग्वालियर के वार्ड क्रमांक 16 पहुंचकर स्थानीय रहवासियों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने नाली में गंदगी देख स्वयं सफाई भी की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने  मौजूद अधिकारियों को सड़क, पेयजल, सीवर तथा बिजली से सम्बंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिये। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से आव्हान किया कि अपनी दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर ग्वालियर को स्वच्छ, हरा-भरा, प्रदूषण मुक्त और नशा मुक्त बनाने के अभियान के लिए समय दें।  

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में NEP-2020 पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन

रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीतिः 2020 के पुनः उन्मुखीकरण को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय में लागू स्नातक पाठ्यक्रमों में एनईपी के एक वर्ष के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और आवश्यक सुधारों पर विचार करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे ने कहा कि एनईपी 2020 न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी, बल्कि यह युवाओं को उनकी स्थानीय परंपरा और ज्ञान से जोड़ने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर देगी, जिससे वे देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रथम तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (NEP) डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने नीति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनईपी बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देती है, जिसमें छात्र अपनी रुचि एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विषयों का चयन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य एक समग्र और लचीला शिक्षा प्रणाली को विकसित करना है। द्वितीय तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा के संयुक्त संचालक डॉ. जी.ए. घनश्याम ने भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत दर्शन पर विचार रखते हुए कहा कि यह नीति आधुनिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच सेतु का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को भारत की समृद्ध चिंतन परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना एनईपी का अहम लक्ष्य है, जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने एनईपी को वर्तमान और भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल और बाज़ार योग्यताओं से छात्रों को लैस करना है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के एनईपी संयोजक पंकज नयन पाण्डेय ने एनईपी 2020 पर वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा बीते एक वर्ष में पाठ्यक्रम संरचना और वैकल्पिक विषयों के क्रियान्वयन के तहत अनेक प्रभावी पहल की गई हैं, जिससे छात्रों को अपनी रुचियों के अनुरूप अध्ययन का अवसर मिला है।  इस अवसर पर विभागाध्यक्ष शैलेन्द्र खंडेलवाल, डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. आशुतोष मांडवी, डॉ. राजेंद्र मोहंती, उप कुलसचिव सौरभ शर्मा, विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। ’विश्वविद्यालय परिसर में बिहान कैंटीन का शुभारंभ’ इसी दिन विश्वविद्यालय परिसर में ‘बिहान कैंटीन’ का भी शुभारंभ कुलपति महादेव कावरे द्वारा किया गया। यह कैंटीन जिला पंचायत रायपुर के माध्यम से बिहान स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित की जा रही है। इस अवसर पर कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ. देव सिंह पाटिल एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती:CM

रायपुर जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती है। उन्होंने आह्वान किया कि हर जनप्रतिनिधि व नागरिक जैव विविधता एवं वेटलैण्ड संरक्षण के लिए व्यक्तिगत दायित्व समझें और 'वेटलैण्ड मित्र' बनकर इस अभियान को जनांदोलन में परिवर्तित करें। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जैव विविधता और वेटलैण्ड्स का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जैव विविधता के संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करने और “वेटलैण्ड मित्र” बनकर जनजागरण फैलाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष राकेश चतुर्वेदी ने व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1992 के अर्थ सम्मिट, जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड की भूमिका और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की संरचना एवं कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं। आर्द्रभूमि संरक्षण के संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वेटलैण्ड्स पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जिला स्तरीय आर्द्रभूमि संरक्षण समितियों के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वेटलैण्ड्स की निगरानी एवं संरक्षण को मजबूती मिल रही है। कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य का गिधवा-परसदा पक्षी अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित रामसर साइट बनने की पात्रता रखता है। इसके अतिरिक्त, बलौदाबाजार जिले के खोखरा ग्राम को छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। कार्यशाला के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से “वेटलैण्ड मित्र” के रूप में जुड़कर जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। यह भागीदारी राज्य में पर्यावरणीय चेतना को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक होगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ़ वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव राजेश कुमार चंदेले सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।