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विशेष सचिव शीतल वर्मा के कड़े निर्देश, हर हफ्ते तय हो निराकरण की तिथि

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाने के लिए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) में वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स उप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनहित की योजनाओं से जुड़े ऋण (लोन) और अनुदान (सब्सिडी) के मामलों को बैंकर्स बिना किसी देरी के जल्द से जल्द स्वीकृत करें। प्रमुख योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा          बैठक में मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं के तहत 31 मार्च तक बैंकों द्वारा दिए गए लोन और वित्तीय सहायता के मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, अंत्योदय स्वरोजगार योजना सहित अन्य योजनाओं के 31 मार्च तक के हितग्राहियों को बैंकों द्वारा प्रदत्त लोन एवं अन्य वित्तीय सहायता के प्रकरणों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। अनावश्यक रूप से पेंडिंग न रखें फाइलें- विशेष सचिव          विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा ने बैंक प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों के आवेदनों को बेवजह लंबित न रखा जाए। फाइलों के त्वरित निपटारे के लिए उन्होंने बैंकर्स को एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाने को कहा है। लोन के लिए हर हफ्ते तय हो एक दिन        बैंकर्स से कहा गया है कि वे स्वरोजगार और अन्य योजनाओं के हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रति सप्ताह एक निर्धारित दिन (फिक्स डे) तय करें, ताकि उसी दिन सभी आवेदनों की जांच कर उनका तत्काल निपटारा किया जा सके।         इस उच्च स्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और विभिन्न राष्ट्रीयकृत व क्षेत्रीय बैंकों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। शासन की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आम नागरिकों और ग्रामीण उद्यमियों को बैंकों से ऋण मिलने की प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी हो जाएगी।

मंत्री श्री सारंग ने घर-घर पहुंचकर गिनाईं उपलब्धियां

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशव्यापी “विश्वास, विकास और जनकल्याण के 12 वर्ष” महा जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। नरेला विधानसभा क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग के नेतृत्व में व्यापक जनसंपर्क अभियान का आयोजन किया गया। अभियान अंतर्गत मंत्री  सारंग ने नरेला विधानसभा के विभिन्न बूथों पर पहुंचकर नागरिकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और पिछले 12 वर्षों में देश में हुए परिवर्तन की जानकारी आमजन तक पहुंचाई। घर-घर पहुंचकर योजनाओं की दी जानकारी महा जनसंपर्क अभियान के दौरान मंत्री  सारंग ने कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों के साथ घर-घर जाकर नागरिकों से संपर्क किया तथा प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, जल जीवन मिशन, अमृत 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के हितलाभ की जानकारी दी। जन-कल्याणकारी शिविरों में हितलाभ वितरण मंत्री  सारंग के मार्गदर्शन में नरेला विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में जनकल्याणकारी शिविरों का भी आयोजन किया गया। शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। संबल योजना, स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई गईं तथा नागरिकों की समस्याओं का निराकरण भी किया गया। विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने का अभियान मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित किए हैं। देश की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह अभियान इन उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने तथा विकसित भारत के संकल्प को सशक्त बनाने का माध्यम है।    

जैन मंदिरों से चोरी हुई 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ मूर्तियां सुरक्षित बरामद

भोपाल धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नरसिंहपुर पुलिस ने जैन मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा कर पांच सदस्यीय शातिर चोर गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जैन मंदिरों से चोरी की गई लगभग 250 वर्ष पुरानी अष्टधातु की दो दुर्लभ प्रतिमाएं, चांदी के 17 छत्र, दो चांदी के आसन, एक चांदी का मुकुट, चार बैटरियां, तीन इनवर्टर, दो रेफ्रिजरेटर, चार एलईडी टीवी, दो डीवीआर, दो पंखे, घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिल तथा नगदी सहित चोरी गई संपत्ति जब्त की है। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन धरोहरों की सुरक्षित बरामदगी पुलिस की संवेदनशील, पेशेवर एवं प्रभावी कार्यशैली को दर्शाती है। नरसिंहपुर में विगत दो से तीन माह के दौरान ग्राम रामनिवारी, तेन्दूखेड़ा तथा करकबेल स्थित जैन मंदिरों सहित अन्य स्थानों पर चोरी की घटनाएं सामने आई थीं। धार्मिक स्थलों से जुड़ी इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना द्वारा तीन विशेष टीमों का गठन किया गया था। टीमों को अज्ञात आरोपियों की शीघ्र पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयास, तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी तथा वैज्ञानिक विवेचना के परिणामस्वरूप इस संवेदनशील प्रकरण का सफल खुलासा संभव हो सका। पुलिस द्वारा प्रारंभ से ही सभी पहलुओं पर सूक्ष्मता एवं गंभीरता के साथ जांच की गई। घटनास्थलों का बारीकी से निरीक्षण कर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए गए तथा तकनीकी जानकारी, मुखबिर तंत्र एवं अन्य उपलब्ध सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं के पैटर्न का भी विस्तृत अध्ययन किया। घटनाओं के समय, स्थान, वारदात के तरीके एवं संदिग्ध गतिविधियों के तुलनात्मक विश्लेषण से महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए। इसी क्रम में निगरानी बदमाश टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया की संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर उसकी गहन पतारसी की गई। तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य तथ्यों के आधार पर पूछताछ किए जाने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने प्रकरण में टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया के साथ ज्ञानी प्रजापति, आशीष शर्मा, नितिन शर्मा तथा चोरी का सामान खरीदने वाले चिन्टू उर्फ मुकेश सोनी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने करकबेल जैन मंदिर, रामनिवारी स्थित जैन मंदिर, तेन्दूखेड़ा स्थित जैन मंदिर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई कुल पांच चोरी की घटना कारित करना स्वीकार की है। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहरों एवं जनसुरक्षा की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस प्रकार अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।  

इंग्लैंड, आयरलैंड और जर्मनी में प्रवासी विरोधी माहौल, विदेश जाने की सोच रहे भारतीयों के लिए कितनी चिंता?

लंदन  कभी बेहतर पढ़ाई, अच्छी नौकरी और सुरक्षित भविष्य के सपने लेकर यूरोप जाने वाले प्रवासियों के लिए अब माहौल पहले जैसा नहीं रहा. ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड और कई दूसरे यूरोपीय देशों में पिछले कुछ सालों से प्रवासियों को लेकर बहस तेज होती जा रही है. ताजा हालात ये हैं कि कहीं सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, कहीं सरकारें वीजा नियम सख्त कर रही हैं और कहीं स्थानीय लोग अपने शहरों में बढ़ती आबादी और संसाधनों पर दबाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।  ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूरोप में प्रवासियों के खिलाफ यह गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? क्या भारतीय भी इसके निशाने पर हैं? और अगर हां, तो फिर इस माहौल का भारतीय छात्रों, कामगारों और परिवारों पर क्या असर पड़ सकता है? इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें कुछ साल पीछे जाना होगा।  साल 2015 में सीरिया, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता की वजह से लाखों लोग यूरोप की ओर बढ़े. जर्मनी समेत कई देशों ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों को स्वीकार किया. उस समय इसे मानवीय कदम माना गया. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतते गए, कई देशों में लोगों को लगने लगा कि स्कूलों, अस्पतालों, मकानों और सरकारी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।  बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी के लिए भारतीय भी बड़ी संख्या में यूरोप जाने लगे. शिक्षा से लेकर रहन-सहन, साफ हवा और परिवार के लिए बेहतर माहौल की तलाश में भारतीयों ने यूरोपीय देशों को चुना. इसी दौरान यूक्रेन युद्ध की वजह से भी लाखों लोग अन्य यूरोपीय देश पहुंचे. यहीं से प्रवास और शरणार्थियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।  ब्रिटेन में क्यों भड़का लोगों का गुस्सा? ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों से प्रवासी एक बड़ा मुद्दा रहा है. यहां कहावत है कि लोग इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आते हैं और संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं. जंगों और स्थानीय प्रताड़ना की वजह से जब लोग ब्रिटेन पुहंचते हैं और सरकार उन्हें स्वीकार करती हैं तो उनके रहने-सहने के लिए सरकारी इंतजाम भी किए जाते हैं।  कहा जाता है कि सरकार इन लोगों को अस्थायी रूप से होटलों में ठहराती है. कई शहरों और कस्बों में स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना था कि उनके इलाके में पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों और आवास की कमी है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी खबरें और अफवाहें भी फैलती रही हैं, जिनसे तनाव बढ़ा. कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक भी हुए।  कई मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि, इन प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा शरणार्थी नीति और अवैध प्रवास था, लेकिन माहौल ऐसा बना कि कई प्रवासी समुदायों को असुरक्षा महसूस होने लगी है।  आयरलैंड में क्या हुआ, प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? कुछ साल पहले तक आयरलैंड को प्रवासियों के प्रति आमतौर पर एक उदार देश माना जाता था. लेकिन हाल के वर्षों में वहां भी हालात बदलने लगे हैं. डबलिन और दूसरे शहरों में मकानों की भारी कमी है. किराए आसमान छू रहे हैं. स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि बड़ी संख्या में नए लोगों के आने से दबाव और बढ़ा है. 2023 के आखिर में डबलिन में हुई हिंसा के बाद प्रवास और सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है. इसके बाद कई जगहों पर शरणार्थी केंद्रों और आवास योजनाओं के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले. ताजा हालात ये हैं कि शहर-शहर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।  ताजा मामला उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक सूडानी शरणार्थी से जुड़ी चाकूबाजी से जुड़ा है, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. घटना के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. हालात को काबू में करने के लिए एंटी-राइट पुलिस, स्पेशल फोर्सेज और वॉटर कैनन की तैनाती की गई. प्रदर्शनकारियों पर ईंटें फेंकने और वाहनों में आग लगाने के आरोप हैं, जिसके बाद कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।  स्थानीय मीडिया की मानें तो कुछ दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े उपद्रवियों ने प्रवासियों और जातीय अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए कई इलाकों में घर-घर जाकर डराने-धमकाने की कोशिश भी की. इस दौरान कुछ मकानों और कारोबारों पर हमले किए गए और प्रदर्शनकारियों ने कई संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचाया।  जर्मनी में प्रवासियों और शरणार्थिों पर बहस तेज जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. यहां लाखों विदेशी काम करते हैं. भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन जर्मनी में भी प्रवास को लेकर राजनीतिक माहौल बदल रहा है. कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि देश को अपनी सीमाओं और शरणार्थी व्यवस्था पर ज्यादा नियंत्रण की जरूरत है।  दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो प्रवासियों के समर्थन में सड़कों पर उतरते हैं. यानी जर्मनी में लड़ाई सिर्फ प्रवासियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटा हुआ नजर आ रहा है।  नीदरलैंड और दूसरे देशों में क्या तस्वीर है? यूरोप के अन्य देशों में भी प्रवास को लेकर बहस तेज हुई है. कहीं मुद्दा मकानों की कमी है, कहीं सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो कहीं सरकारों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे सीमाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहीं. इटली लंबे समय से भूमध्य सागर के रास्ते आने वाले प्रवासियों का मुख्य प्रवेश द्वार रहा है. वहीं फ्रांस में भी समय-समय पर प्रवास और राष्ट्रीय पहचान को लेकर प्रदर्शन देखे जाते हैं. यानी हर देश की अपनी कहानी है, लेकिन लगभग हर जगह कुछ समान कारण दिखाई देते हैं।  दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में इस समय बड़े पैमाने पर पर्यटन के खिलाफ भी विरोध बढ़ रहा है. नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, फ्रांस, स्पेन और इटली के कई शहरों में भी स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे हैं. लोगों का कहना है कि पर्यटकों की वजह से मकानों के किराए और संपत्तियों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि सार्वजनिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा है।   स्पेन में बार्सिलोना और कैनरी द्वीप समूह समेत 40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. वहीं इटली के वेनिस, फ्लोरेंस, रोम और मिलान में किराये वाले पर्यटन आवासों के खिलाफ … Read more

सूरज की रोशनी से चमका राजनांदगांव

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले  ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने उसे देशभर में नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राजनांदगांव देश में सर्वाधिक सोलर क्षमता वाले कनेक्शन स्थापित करने वाला जिला बन गया है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का उत्साह तेजी से बढ़ रहा है। कलेक्टर  जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन तथा विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है। योजना के तहत जिले में अब तक 6776 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6381 हितग्राहियों ने वेंडर का चयन कर लिया है। वहीं 3255 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 2218 लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है। जिले में 3255 घरेलू सोलर कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 9 मेगावाट, 162 व्यावसायिक सोलर कनेक्शनों से 3.40 मेगावाट तथा 31 पावर प्लांटों के जरिए 383 मेगावाट क्षमता विकसित की गई है। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि ढाबा स्थित मेसर्स सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के 160 मेगावाट क्षमता वाले सोलर कनेक्शन की है, जो देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा कनेक्शन माना जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को सम्मानित कर अन्य नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राजनांदगांव की यह उपलब्धि हरित ऊर्जा की दिशा में देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।

राजस्थान में रॉक फास्फेट उत्पादन बढ़ाने और नई खनन संभावनाएं तलाशने पर जोर

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम श्रीमती अपर्णा अरोरा ने राजस्थान स्टेट माइंस एवं मिनरल्स (आरएसएमएम) को फ्यूचरिस्टिक एप्रोच अपनाते हुए खनिजों के उत्पादन, विपणन और वार्षिक कारोबार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खेती-किसानी के जरुरी राॅक फास्फेट के उत्पादन में आरएसएमएम का लगभग एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि वित वर्ष के शेष माहों का रोडमैप बनाकर क्रियान्वयन किया जाता है तो उसके अच्छे व सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। एसीएस माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा शुक्रवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में आरएसएमएम के कार्यों की समीक्षा कर रही थी। उन्होंने कहा कि राजस्थान खनिज संपदा युक्त प्रदेश है। आरएसएमएम द्वारा राॅक फास्फेट, लाइमस्टोन, लिग्नाइट और जिप्सम का खनन और बिक्री की जा रही है। हाल ही समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आरएसएमएम का वार्षिक कारोबार करीब 1922 करोड़ रुपए का रहा है। हमें वार्षिक कारोबार और लाभदायकता बढ़ाने के समग्र एवं योजनाबद्ध प्रयास करने होंगे। श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि आरएसएमएम को पोटाश के एक्सप्लोरेशन और खनन की संभावनाओं को तलाशने के ठोस प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही नए क्षेत्रों में प्रवेश की संभावनाओं का आकलन करना होगा। उन्होंने लंबित विधानसभा प्रश्नों के उत्तर भिजवाने, बकाया ऑडिट पेराज के निस्तारण, रिक्त पदों पर भर्ती, जांच प्रकरणों का समयबद्ध निष्पादन और पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित कर कार्मिकों की बकाया डीपीसी कराने के निर्देश दिए। आरएसएमएम के प्रबंध निदेशक श्री पी. रमेेश ने बताया कि आरएसएमएम में आर एण्ड डी प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है ताकि खनन क्षेत्र में शोध को बढ़ावा दिया जा सके और देश दुनिया में आ रही नवीनतम तकनीक को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयोग की संभावनाएं तलाशी जा सके। इसके साथ ही यह प्रकोष्ठ बाजार मांग व आपूर्ति का भी अध्ययन कर समय समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। एमडी श्री पी. रमेश ने बताया कि आरएसएमएम का वार्षिक टर्न ओवर 1922 करोड़ रु. से अधिक का रहा है और चालू वित्तीय वर्ष में वार्षिक कारोबार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। आरएसएमएम द्वारा हाल ही समाप्त वित्तीय वर्ष में 70 करोड़ 64 लाख टन खनिजों की बिक्री की गई है। इसमें 41 लाख 95 हजार टन लाइमस्टोन, 17 लाख 65 हजार टन राॅक फाॅस्फेट, 9 लाख 24 हजार टन लिग्नाइट और एक लाख 80 हजार टन जिप्सम की बिक्री की गई । उन्होंने कहा कि इस साल कारोबार में और अधिक वृद्धि के समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। समीक्षा बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस श्रीमती नम्रता वृष्णि, उप सचिव माइंस श्री राकेश कुमार, ओएसडी श्री श्रीकृष्ण शर्मा, ओएसडी तकनीकी श्री सुनील कुमार वर्मा, आरएसएमएम की कार्यकारी निदेशक प्रशासन श्रीमती कीर्ति राठौड़, वित्तीय सलाहकार श्रीमती भारती राज, समूह महाप्रबंधक लिग्नाइट श्री अरुण सिंह, प्रभारी लाइमस्टोन श्री शैलेश जोशी, समूह महाप्रबंधक परियोजना श्री नरेश एलयानी, प्रभारी मार्केटिंग श्री हनुमत सिंह, प्रभारी बजरी श्री शंकर लाल सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

कौशल विकास मिशन की नई पहल: Skill के साथ Financial Intelligence पर जोर

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के यूपीएसडीएम और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDUGKY) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किल्स की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। योगी सरकार ने पहल की है। प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का लक्ष्य नहीं है। मिशन ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाने का निर्णय लिया है। यह पहल मिशन निदेशक श्री पुलकित खरे के निर्देशन और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनके इसी विज़न को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। MoU से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में Financial Literacy & Awareness Workshop का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया । मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है । एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर लोन लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें, रिस्क और रिटर्न की समझ रखें, टैक्स को देखते हुए निवेश करें, आवश्यक बीमा करवाएं, लॉन्ग टर्म एसेट्स लें, समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ऐप बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप में कर्मचारियों को SaaRthi App के बारे में भी विस्तार से बताया गया । यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और Financial Health Check-up जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी यह MoU प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहाँ करना चाहिए, लोन से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी । साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “Skill + Financial Intelligence” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक श्रीमती पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर श्री मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक श्री संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर श्री एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें । वहीं, NSE से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर श्री अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट श्री जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्क शॉप में मौजूद रहीं । आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को Skill + Financial Intelligence के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

हैदराबाद में MEAI Mining 4.0 राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, अमिताभ मुखर्जी ने स्मार्ट और सस्टेनेबल खनन पर दिया जोर

हैदराबाद.  माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई ) ने आज हैदराबाद में “माइनिंग 4.0: सुरक्षित और सस्टेनेबल खनन कार्यों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुभारंभ की । इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने उद्योग जगत के प्रमुख, खनन पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएमडीसी के निदेशक, तकनीकी एवं एमईएआई हैदराबाद चैप्टर के अध्यक्ष विनय कुमार ने की, इस शुभ अवसर पर जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) ,एनएमडीसी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे । सम्मेलन के प्रथम दिन इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि किस प्रकार तकनीक खनन कार्यों को लगातार एक नया रूप दे रही है । विभिन्न सत्रों में खनन सुरक्षा, प्रचालन दक्षता तथा पर्यावरण प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जियोस्पेशियल सिस्टम तथा स्मार्ट मॉनिटरिंग तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमिताभ मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा: “खनन में सुरक्षा का एकमात्र स्वीकार्य आंकड़ा 'शून्य' (जीरो) है । सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी दोनों एक साथ चलने चाहिए तथा तकनीक इन्हें मजबूत करने में हमारी सहयोग कर रही है । आज डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन खनन कार्यों को बदल रहे हैं, जिससे वे अधिक सुरक्षित, कुशल एवं जिम्मेदार बन रहे हैं । जिस प्रकार से लौह अयस्क, स्टील तथा महत्वपूर्ण खनिजों व क्रिटिकल मिनरल्स की मांग बढ़ रही है, खनन उद्योग के सामने एक बड़ा अवसर प्राप्‍त हो रहा है । इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास जिम्मेदार खनन, निरंतर नवाचार (इन्नोवेशन) तथा सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन व वैल्यू क्रिएशन द्वारा संचालित हो । एमईएआई जैसे सम्मेलन हमें एक-दूसरे से सीखने, नए दृष्टिकोण हासिल करने तथा भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में सहयोग करते हैं ।” इस सम्मेलन का मुख्य विषय यह भी था कि अनुसंधान और नवाचार को केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक खनन कार्यों में लागू किया जाए, ताकि जमीनी पर वास्तविक बदलाव लाया जा सके । उद्घाटन समारोह के समापन पर खनन क्षेत्र और इसके बदलते तकनीकी परिदृश्य में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेशेवरों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया । सम्मानित होने वाले दिग्गजों में निम्‍नांकित शामिल थे एस. कृष्णमूर्ति ,पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी तथा पूर्व महासचिव, एमईएआई, अक्षय दत्त त्रिपाठी, पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी डॉ. के. श्रीनिवास, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय, डॉ. के. वी. शंकर, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय इस सम्मेलन में अपनी भागीदारी के माध्यम से, एनएमडीसी ने सुरक्षित और अधिक सस्टेनेबल संचालन के लिए नई तकनीकों के उपयोग, नवाचार को बढ़ावा देने तथा जिम्मेदार खनन पद्धतियों को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया ।  एनएमडीसी में खानों के प्रबंधन और प्रचालन के उपायों को सुगम व बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेटेड ड्रिल, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी आधुनिक प्रणालियाँ लागू की जा रही हैं । यह सम्मेलन 13 जून तक भी जारी रहेगा, जिसमें तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों के साथ आपसी संवाद तथा खनन के भविष्य को आकार देने वाले उभरते रुझानों व प्रवृत्ति पर चर्चा की जाएगी ।

चलती तिपहिया साइकिल बनी आग का गोला, हरियाणा में दिव्यांग व्यक्ति की दर्दनाक मौत

पानीपत/चरखी दादरी. चरखी दादरी जिले के गांव कन्हेटी में वीरवार देर शाम ई-ट्राइसाइकिल में आग लगने से एक बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में दिव्यांग युवक की मौके पर ही मृत्यु हो गई। सूचना मिलने सदर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाली इमलोटा पुलिस चौकी टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवाया। शुक्रवार को स्वजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। मृतक की पहचान कन्हेटी निवासी रविंद्र (29) के रूप में हुई है। स्वजनों से मिली जानकारी के अनुसार रविंद्र पांच साल पहले इमलोटा के समीप सड़क हादसे का शिकार हो गया था। हादसे में लगी गंभीर चोटों के कारण उसके पेट से नीचे के हिस्से ने काम करना छोड़ दिया था। जिसके चलते वह चलने-फिरने में पूरी तरह से असमर्थ था। वह ई-ट्राइसाइकिल के जरिए ही इधर-उधर जाता था। बीते करीब दो साल से वह झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ के खेल मैदान पर जाता था और युवाओं को अभ्यास करवाता था। वीरवार शाम को वह गांव कन्हेटी स्थित सैयद पीर मजार पर मत्था टेकने के लिए गया था। वहां से लौटने के लिए उसने अपनी ई-ट्राइसाइकिल पर बैठकर उसे स्टार्ट किया तो उसी दौरान वह आग पकड़ गई। वह दिव्यांग होने के कारण उसने फंस गया और नीचे नहीं उतर पाया। आसपास के लोगों ने आग की लपटे देखी तो वहां पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन तब तक जिंदा जलने से उसकी दर्दनाक मृत्यु हो चुकी थी। बाद में ग्रामीणों ने डायल 112 पर काल कर घटना की जानकारी दी तो पुलिस टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतक के चचेरे भाई राजेश के बयान पर इतफाकिया मौत की कार्रवाई की है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट या दूसरा तकनीकि कारण माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

R Nait के नए गाने पर बवाल, शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

बठिंडा. पंजाबी गायक आर नैत एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। उनके नए गाना ‘रील’ को लेकर हिंदू संगठनों में भारी रोष पाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गाने में साधुओं और सनातन धर्म के पवित्र प्रतिकों को आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया है। इस बात की शिकायत थाना डिवीजन नंबर 3 में हिंदू संगठन शिवसेना ने दी है। जानकारी के अनुसार शिकायत में शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाते कहा कि गाने में आर नैत साधु के रूप में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद गाने में अभिनेत्री साधु बने आर नैत को अपनी समस्या बताती है कि सोशल मीडिया पर उसकी रील नहीं चल रही। इसके बाद आर नैत अजीब तरीके से माला हिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद आर नैत रात के समय में साधुओं के साथ नाचते गाते दिखाई दे रहे हैं और फिर आर नैत अभिनेत्री का फोन लेकर उस पर माला घूमाते दिखाई देते हैं। शिवसेना ने आगे बताया कि इस सीन को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि आर नैत तंत्र-मंत्र और पूजा की विधि का मजाक उड़ा रहे हैं। गाने के अंत के सीन में आर नैत अपनी आंखें ऊपर चढ़ाकर अजीब ढंग से अभिनेत्री के सिर पर हाथ फेरते हुए दिखाई देते हैं। इस गाने के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में भारी रोष पाया जा रहा है। उनका कहना है कि हिंदुओं की पूजा अर्चना और साधुओं को अपमान किया जा रहा है। इस बात की शिकायत लुधियाना पुलिस तक पहुंच चुकी है।