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छात्रों की सुविधा के लिए कॉलेज प्रवेश पोर्टल पुनः सक्रिय, आज ही अंतिम मौका

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदेश के कॉलेजों में दाखिले इस बार फीके पड़ गए हैं। स्नातक प्रथम वर्ष के प्रवेश के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग ने 18 सितंबर को अंतिम दिन घोषित किया था। लेकिन बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने पर पोर्टल को एक बार फिर खोल दिया गया है। अब इच्छुक विद्यार्थी शुक्रवार यानी 19 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में अंडरग्रेजुएट कोर्स की 49 फीसदी और पोस्टग्रेजुएट कोर्स की 61 फीसदी सीटें अभी तक खाली हैं। पिछले सत्र में जहां लगभग 1.57 लाख छात्रों ने दाखिला लिया था, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 1.39 लाख रह गई है। यह गिरावट विभाग और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। करीब 10 दिन पहले ही शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कॉलेजों में घटते दाखिलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय अधिकारियों से जवाब-तलब किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यदि कॉलेजों में खाली सीटें रहीं तो यह उच्च शिक्षा के प्रति विश्वास की कमी को दर्शाता है।

सिंहस्थ से पहले सीख: नासिक महाकुंभ में व्यवस्थाएं संभालेगा मध्य प्रदेश का प्रशासनिक दल

भोपाल  उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ की तैयारियों में भीड़ प्रबंधन और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर पुलिस-प्रशासन कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता। नासिक में वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ में पुलिस, आपदा प्रबंधन व अन्य संबंधित विभागों का दल पूरे समय वहां रहकर व्यवस्थाएं देखेगा। इस आधार पर वहां के नवाचार, तकनीक को उज्जैन में अपनाया जा सकेगा। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में व्यवस्थाएं करने के लिए प्रयागराज की तुलना में नासिक महाकुंभ का अवलोकन अधिक बेहतर रहेगा। कारण यह कि नासिक और उज्जैन शहर की संरचना लगभग एक जैसी हैं। क्षेत्र संकीर्ण होने के कारण भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती है। हालांकि, प्रयागराज महाकुंभ में किए गए तकनीकी नवाचारों का भी परीक्षण किया जा रहा है। वहां काम कर चुके विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी वहां के अधिकारियों के एक दल ने पुलिस मुख्यालय में प्रस्तुतीकरण भी दिया था। इनमें जो उज्जैन के लिए व्यवहारिक हैं उन्हें पुलिस अपनाने की तैयारी भी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि नासिक में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा प्रबंध, यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य व्यवस्था, सफाई आदि में किसी तरह की समस्या आती है तो उसे देखते हुए उज्जैन सिंहस्थ में उस तरह की समस्या दूर करने के प्रयास किए पहले ही कर लिए जाएंगे। साथ ही अलग-अलग क्षेत्र में वहां काम कर चुके विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। बता दें कि पुलिस मुख्यालय ने उज्जैन सिंहस्थ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारी प्रारंभ कर दी है। इसमें सबसे पहले उज्जैन और ओंकारेश्वर का सुरक्षा आडिट कराया गया है।

मांगें ना मानने पर जिला डिपो होल्डर ने किया रोष प्रदर्शन

राजपुरा  पंजाब सरकार की ओर से डिपो होल्डर की मांगें ना मानने पर डिपो होल्डर जिला पटियाला की मीटिंग राजपुरा में जिला प्रधान अनिल कुमार नीलपुर की प्रधानगी में हुई जिसमें रोष प्रदर्शन करते हुये मांग की गई कि सरकार ने मांगे पूरी नहीं की व केवाईसी का सम्मान भत्ता जारी नहीं किया तो वे पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट जायेंगें और बनता हक लेकर रहेंगे। जानकारी देते हुये जिला प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर स्पेशल मीटिंग की गई है जिसमें मुख्य बात यह है कि सभी डिपो होल्डर पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से घर घर जा कर उपभोक्ताओं के केवाईसी कर रहे हैं। जिसका लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

शारिक की रील नहीं बनाई तो बन गया निशाना! भोपाल में MBA छात्र से मछली गैंग के गुर्गों ने की मारपीट

भोपाल  कुख्यात मछली परिवार गैंग के बदमाशों का आतंक अब भी बरकरार है। ड्रग-तस्करी से लेकर यौन शोषण के गंभीर प्रकरणों से परिवार की छवि को बट्टा लगने के बाद अब उसकी गैंग के सदस्य शारिक मछली को बेकसूर साबित करने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं। मछली गैंग के गुर्गे अब शारिक मछली के समर्थन में रीलें और पोस्ट बनाकर लोगों को भेज रहे हैं और उनके सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर साझा करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा एक मामला पिपलानी के इंद्रपुरी में सामने आया है। जहां मछली गैंग का गुर्गे महेंद्र चौहान ने एमबीए छात्र को शारिक के समर्थन में रील पोस्ट करने का दबाव बनाया। वहीं जब महीने भर में उसने रीलें शेयर नहीं की तो एक कैफे में उससे मारपीट की। पीड़ित की शिकायत पर एक बार फिर मछली गैंग पर पुलिस कार्रवाई करने से बची और एनसीआर काट कर किनारा कर लिया था, बाद में अगले दिन हिंदू संगठनों ने थाने का घेराव किया तब जाकर एफआइआर दर्ज की गई। कॉलेज में महेंद्र से हुई थी पहचान महेंद्र ठाकुर के साथ पुलिस ने गैंग के गौरव ठाकुर नामक युवक को भी आरोपित बनाया है। पिपलानी टीआई चंद्रिका यादव के मुताबिक शिवम पांडे ने बताया कि वह वर्तमान में निजी कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। इससे पहले उसने टीआईटी कॉलेज से बीफार्मा किया और वर्तमान में एक अस्पताल में नौकरी कर रहा है। तब उसकी पहचान कॉलेज में सीनियर पिपलानी निवासी महेंद्र चौहान से हुई थी। रील को सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा मछली कांड के बाद महेंद्र चौहान ने शारिक मछली के समर्थन में कई रीलें बनाईं और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा। पीड़ित ने बताया कि रात 8:45 बजे वह असपताल से नौकरी करने के बाद इंद्रपुरी स्थित चिलपिल कैफे दोस्तों के साथ पहुंचा। वहां महेंद्र ठाकुर अपने दोस्तों के साथ पहले से मौजूद था। उसने शारिक की रील शेयर न करने को लेकर विवाद शुरू कर दिया। कैफे में पीटना शुरू कर दिया वहीं जब शिवम ने उसे रील शेयर करने से मना किया तो वह पार्टी के लिए दो हजार रुपये देने को कहने लगा। इस पर भी पीड़ित ने इनकार किया। इससे गुस्साए महेंद्र चौहान ने उसे कैफे में पीटना शुरू कर दिया। शिवम के दोस्तों ने बीच-बचाव किया तब महेंद्र जान से मारने की धमकी देकर मौके से भाग निकला। शिवम ने बताया कि महेंद्र की बात न मानने को लेकर कुछ देर बाद गौरव ठाकुर ने उसे फोन किया और अभद्रता शुरू कर दी। साथ ही बात न मानने पर भोपाल छोड़ने की धमकी तक दे डाली। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपितों पर केस दर्ज कर लिया है।

SC-ST के खिलाफ अपराध रोकने MP पुलिस का बड़ा एक्शन: 23 जिलों में कड़ी निगरानी, 63 थाना क्षेत्र सेंसिटिव घोषित

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने 23 जिलों के 63 थाना क्षेत्रों और लगभग 100 वार्डों एवं गांवों को अत्याचार प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। इन क्षेत्रों में अब विशेष सतर्कता और निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि प्रदेश के कुछ हिस्से ऐसे हैं, जहां SC-ST वर्ग के लोगों पर अत्याचार की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक सामने आती हैं। ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर कड़ी निगरानी की जरूरत है। इसी उद्देश्य से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं उसके नियमों के तहत यह अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चिह्नित थाना क्षेत्रों में SC-ST वर्ग के लोगों के साथ होने वाले अत्याचार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेष निगरानी के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पुलिस चौकियों की स्थापना, जागरूकता के कार्यक्रम, पुराने विवादों को हल कराने जैसे प्रयास होंगे। घटनाओं को लेकर पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने के लिए भी कहा गया है। गृह विभाग ने केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया है। जिन थाना क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है उनमें मंडला जिले का कोतवाली, बालाघाट का कोसमी, भरवेली, विदिशा का कोतवाली, गंज बासौदा, सिविल लाइन, धार का कोतवाली, खंडवा का पदम नगर, मांधाता, पंधाना, इंदौर का सिमरोल, मुरैना कोतवाली, स्टेशन रोड, सिविल लाइन, बामनोर, भिंड में देहात, देवास में औद्योगिक क्षेत्र, पिपलावा, शाजापुर में शुजालपुर सिटी, शुजालपुर मंडी, मंदसौर का वायडीनगर, नर्मदापुरम के देहात, इटारसी, कोतवाली, पिपरिया और शिवपुर, बैतूल में सारणी, आमला, रायसेन में औबेदुल्लागंज, जबलपुर में गोराबाजार, गुना में कोतवाली, कैंट, विजयपुर, आरोन, मधुसूदनगढ़, शिवपुरी में सिरसोद, दिनारा, आमोला, इंमदौर, भौंती, अशोकनगर में कोतवाली, देहार, बहादुरपुर, ग्वालियर में जनकगंज, झांसी रोड, विश्वविद्यालय, ठाठीपुर, बहोड़ापुर, ग्वालियर, डबरा, सागर में कैंट, बहेरिया, बंडा, राहतगढ़, दमोह में कोतवाली, छतरपुर में सिविल लाइन, लवकुशनगर, जुझारपुर और टीकमगढ़ जिले का कोतवाली थाना क्षेत्र शामिल है। 4 केस से समझिए थाना क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित करने की वजह केस-1: सागर दलित युवक हत्या, मां को निर्वस्त्र कर पीटा ये मामला 24 अगस्त 2023 का है। सागर जिले के खुरई देहात थाना क्षेत्र के बरोदिया नौनागिरी गांव में दबंगों ने दलित युवक लालू उर्फ नितिन अहिरवार की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बेटे को बचाने गई मां को भी निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया। दरअसल, लालू की बहन से दबंगों के छेड़छाड़ की थी। जिसकी शिकायत थाने में की गई थी। दबंग पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने इनकार किया, तो इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में 9 नामजद और 4 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। खास बात ये है कि नितिन अहिरवार के इस केस में घटना के चश्मदीद उसके चाचा और बहन की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। जिसकी जांच अभी भी चल रही है। केस-2: 30 हमलावरों ने महिला की गोली मारकर हत्या की ये मामला मंदसौर जिले के गरोठ थाना क्षेत्र के ढाकनी गांव का है। 6 दिसंबर 2024 को करीब 30 हमलावर 5 गाड़ियों में सवार होकर गांव में ही रहने वाले बलराम के घर पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें बलराम की पत्नी 45 साल की सुगना बाई की मौत हो गई, जबकि बलराम सहित 3 लोग घायल हो गए थे। ये विवाद सरकारी जमीन पर गाय बांधने को लेकर हुआ था। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और गांववालों ने शव रखकर बोलिया, शामगढ़ भानपुरा और खड़ावदा रोड पर करीब 5 घंटे तक चक्काजाम किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के बाद ही प्रदर्शन खत्म हुआ। उस समय पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए तीन लोगों की गिरफ्तारी भी की थी। केस-3: गैंगरेप के बाद आरोपियों ने घर में लगाई आग भिंड जिले के आरोली गांव में इसी साल 13 जनवरी 2025 को गांव के दबंगों ने दलित युवती के साथ गैंगरेप किया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी सोनी गुर्जर और धर्मेंद्र गुर्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मगर, कोर्ट में बयान दर्ज कराने से पहले ही आरोपियों ने पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। समझौते से इनकार करने पर आरोपी बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुंचे और परिवार से मारपीट की। इसके बाद घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इस आगजनी में परिवार के दो लोग झुलस गए थे। केस-4 : गैंगरेप पीड़िता की आंत-बच्चेदानी बाहर थी खंडवा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ दरिंदगी हुई। घटना 23 मई की रात हुई जब महिला शादी समारोह से लौट रही थी। आरोपी हरी और सुनील ने शराब के नशे में महिला के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि महिला की आंत 6 फीट शरीर से बाहर निकली थी। उसके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें भी थीं। इन्हीं चोटों की वजह से महिला की मौत हो गई थी। महिला का पोस्टमॉर्टम करने वाली डॉक्टर सीमा सूटे के मुताबिक उसके गर्भाशय और रेक्टम तक को गंभीर चोटें लगी थीं।। उन्होंने कहा, "मैंने अपने पूरे करियर में इतनी क्रूरता नहीं देखी।" रिपोर्ट के अनुसार, महिला के शरीर से खून बहुत अधिक बहा और इसके कारण उसकी मौत हो गई। पीड़िता ने मरने से पहले अपने बेटे को आरोपियों के नाम बताए थे, जिन्होंने पुलिस को बयान भी दिया। क्या होगा आइडेंटिफाई एरिया में.. गृह विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक ये कदम केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत उठाया है। 23 जिलों के 63 थानों को संवेदनशील घोषित किया है और इन थानों के तहत आने वाले क्षेत्र को 'आइडेंटिफाई एरिया' के रूप में चिह्नित किया गया है। एक्सपर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसी थाना क्षेत्र को आइडेंटिफाई एरिया घोषित करती है तो इसका मतलब है कि वहां और ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। वहां की … Read more

पेंशन स्कीम पर बड़ा अपडेट: कर्मचारियों को 30 सितंबर तक करना होगा विकल्प चयन, वरना छूट सकते हैं फायदे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन को लेकर बड़ा फैसला किया है. वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2025 की समयसीमा से पहले ही यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का विकल्प चुन लें, ताकि उनके आवेदन समय पर निपटाए जा सकें और भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े. सबसे बड़ी बात यह है कि निर्धारित समयसीमा के अंदर इस विकल्प को नहीं चुनने पर सरकारी कर्मचारियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा. एनपीएस में शामिल कर्मचारियों के लिए यूपीएस का विकल्प सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के अंतर्गत यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) की शुरुआत की थी. इसके तहत कर्मचारियों को निश्चित पेंशन की सुविधा मिलेगी. एनपीएस में शामिल पात्र कर्मचारी और पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारी 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस का विकल्प चुन सकते हैं. मंत्रालय का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी एनपीएस में बने रहने का विकल्प चुनता है, तो वह अंतिम तिथि के बाद यूपीएस में शामिल नहीं हो सकेगा. इसीलिए सभी पात्र कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे समयसीमा से पहले ही अपना निर्णय स्पष्ट करें. 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुनें वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि एनपीएस के तहत काम करने वाले मौजूदा कर्मचारी और रिटायर्ड लोग 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुन सकते हैं. अभी तक 20 जुलाई तक करीब 31,555 सेंट्रल गवर्नमेंट कर्मचारियों ने इस स्कीम का ऑप्शन लिया है. मंत्रालय ने सलाह दी है कि देर न करें, क्योंकि अंतिम समय में भीड़ से प्रोसेस में देरी हो सकती है. अगर आपका मन बदल जाए तो 25 अगस्त को दी गई एक खास सुविधा का फायदा ले सकते हैं. मंत्रालय ने एक बार का एकतरफा स्विच ऑप्शन शुरू किया है, जिससे यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी बाद में एनपीएस में वापस जा सकते हैं. मिलेंगे ये सभी फायदे ये स्विच सुविधा रिटायरमेंट से एक साल पहले या वॉलंटरी रिटायरमेंट से तीन महीने पहले तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी यूपीएस ले ले और बाद में लगे कि एनपीएस बेहतर है, तो एक बार मौका मिलेगा. ये फैसला सोच-समझकर लेना होगा, क्योंकि ये सिर्फ एक तरफा है. यूपीएस का फायदा ये है कि रिटायरमेंट पर आधी सैलरी पेंशन के रूप में मिलेगी, जो मार्केट की चाल पर निर्भर नहीं. अगर कर्मचारी की सर्विस के दौरान मौत हो जाए या वे अक्षम हो जाएं, तो सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021 या सीसीएस (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स 2023 के तहत लाभ मिलेगा. इसके अलावा, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का फायदा भी यूपीएस में बढ़ाया गया है. टैक्स में भी राहत है, क्योंकि यूपीएस को इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत एनपीएस जितने ही छूट मिलेंगे. ये सुविधाएं कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देती हैं. मंत्रालय का मकसद है कि हर कर्मचारी को फायदा मिले, इसलिए ऑनलाइन क्रेजी सिस्टम से आवेदन करें. अगर तकनीकी दिक्कत हो तो नोडल ऑफिस में फॉर्म जमा कर सकते हैं. लंबे समय से कर्मचारी एनपीएस से नाखुश थे, क्योंकि उसमें मार्केट रिस्क था. यूपीएस आना जैसे उनकी सुनवाई हुई. लेकिन 30 सितंबर की डेडलाइन नजदीक है, तो जल्दी फैसला लें. दिल्ली में एक कर्मचारी ने कहा, “मैं यूपीएस लेना चाहता हूं, लेकिन डर है कि समय निकल न जाए.” मंत्रालय का कहना है कि देर करने से नुकसान हो सकता है. अगर आप सेंट्रल गवर्नमेंट में हैं, तो अपने डिपार्टमेंट से बात करें और पोर्टल चेक करें. ये स्कीम परिवारों को मजबूत करेगी और रिटायरमेंट की चिंता कम करेगी. सरकार का ये कदम कर्मचारी हित में बड़ा है, लेकिन समय पर एक्शन जरूरी है. कितने कर्मचारियों ने चुना यूपीएस? सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक करीब 31,555 केंद्र सरकार के कर्मचारी यूपीएस से जुड़ चुके हैं. मंत्रालय का मानना है कि अंतिम समय में विकल्प चुनने पर तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए जल्द निर्णय लेना कर्मचारियों के हित में होगा.

जोधपुर में अनोखी शादी: 72 साल के भारतीय से ब्याही 27 साल की यूक्रेनी महिला, लिव-इन के बाद लिया फैसला

 जोधपुर राजस्थान का जोधपुर एक बार फिर विदेशी मेहमानों की शाही शादी का गवाह बना. इस बार यहां यूक्रेन के रहने वाले एक जोड़े ने भारतीय तौर-तरीकों से प्रभावित होकर हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों से सात फेरे लिए. यह कपल पिछले तीन-चार साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था, लेकिन भारतीय परंपराओं से प्रभावित होकर उन्होंने पारंपरिक विवाह करने का फैसला लिया. दरअसल, 72 साल के दूल्हा स्टानिस्लाव और 27 साल की दुल्हन अनहेलीना पहली बार भारत आए थे. भारतीय रस्मों और परंपराओं को देखकर दोनों इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने जयपुर, उदयपुर और जोधपुर में से शादी के लिए सूर्यनगरी जोधपुर को चुना.  इस कपल के विवाह को कोऑर्डिनेट करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि रोहित और दीपक ने बताया कि दुल्हन अनहेलीना भारतीय रीति-रिवाजों से काफी प्रभावित हैं, इसलिए उन्होंने हर परंपरा को निभाया. जोधपुर पहुंचने के बाद शादी की रस्में शुरू हुईं. दूल्हा राजसी अचकन, साफा और कलंगी पहनकर घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर आया. शहर के खास बाग में पारंपरिक ढंग से दूल्हे का टीका किया गया. इसके बाद वरमाला हुई और फिर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर विवाह की रस्म पूरी हुई. इस दौरान दूल्हे ने दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया और सिंदूर से मांग भरी. इस कपल ने भारतीय परिधान पहनकर शादी की सभी रस्में पूरी कीं और गीतों पर ठुमके भी लगाए. जोधपुर विदेशी पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है. यहां की स्थापत्य कला, मेहरानगढ़ किला और रंगीन बाजार सैलानियों को लुभाते हैं. यही वजह है कि कई विदेशी यहां शादियां करना पसंद करते हैं.  इससे पहले भी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस ने उम्मेद भवन में विवाह रचाकर जोधपुर को सुर्खियों में ला दिया था. कंपनी प्रतिनिधि रोहित और दीपक ने कहा कि यूक्रेन से आए इस कपल ने भारतीय विवाह की परंपराओं को बेहद आत्मीयता के साथ अपनाया. भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी गहरी आस्था दिखी.

लखनऊ में ज़मीन घोटाले का खुलासा, अपर्णा यादव की मां सहित पांच के खिलाफ मामला दर्ज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की मां अंबी बिष्ट सहित पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. यह एफआईआर साल 2016 के जानकीपुरम जमीन घोटाले में दर्ज की गई है. अंबी बिष्ट के साथ-साथ एलडीए के तत्कालीन अनुभाग अधिकारी वीरेंद्र सिंह, उप सचिव देवेंद्र सिंह राठौड़, वरिष्ठ कॉस्ट अकाउंटेंट बी महादनी और अवर वर्ग सहायक शैलेंद्र कुमार गुप्ता पर भी केस दर्ज किया गया है.  यह कार्रवाई विजिलेंस की खुली जांच में दोषी पाए जाने के बाद की गई. मामला लखनऊ की प्रियदर्शिनी योजना में भूखंड आवंटन में गड़बड़ी से संबंधित है.  आरोप है कि प्रियदर्शिनी जानकीपुरम योजना के भूखंडों के आवंटन में बदलाव कर रजिस्ट्रेशन करने में गड़बड़ी की गई थी. जिस वक्त यह गड़बड़ी हुई, उस समय अंबी बिष्ट एलडीए में संपत्ति अधिकारी थीं. अपर्णा यादव का कनेक्शन… आरोपी अंबी बिष्ट की बेटी अपर्णा यादव, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की पत्नी हैं. अपर्णा यादव मौजूदा वक्त में बीजेपी का हिस्सा हैं और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं. सभी आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. यह एफआईआर एक खुली जांच के बाद दर्ज की गई है.

यासीन मलिक का बड़ा खुलासा: मनमोहन सिंह ने हाफिज सईद से मिलने पर जताया आभार!

नई दिल्ली जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह का जिक्र किया है। उसका दावा है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों से मुलाकात के बाद तत्कालीन पीएम सिंह ने उन्हें शुक्रिया अदा किया था। साथ ही उसने कई और बड़े नेताओं के नाम लिए हैं। मलिक टेरर फंडिंग मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा है।  रिपोर्ट के अनुसार, 25 अप्रैल को दिए हलफनामे में मलिक ने 2006 में पाकिस्तान में हुई लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से मुलाकात के बारे में बताया गया है। उसने कहा है कि पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बैकचैनल वार्ता का हिस्सा थी और भारत के वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों के कहने पर की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक का कहना है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन विशेष निदेशक वीके जोशी ने उससे दिल्ली में मुलाकात की थी। यह मुलाकात उस समय हुई थी, जब मलिक 2005 में कश्मीर में आए भूकंप के बाद पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था। कथित तौर पर जोशी ने अुरोध किया था कि वह इस मौके का इस्तेमाल पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और आतंकवादियों के संपर्क साधने में करे, ताकि पीएम के शांति प्रयासों को समर्थन मिले। मलिक का दावा है कि उसे साफतौर पर बताया गया था कि जब तक आतंकियों को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक पाकिस्तान के साथ बातचीत से कुछ नहीं मिलेगा। आतंकी ने कहा कि इस अनुरोध पर वह सईद समेत अन्य लोगों से मिलने के लिए तैयार हुआ। हलफनामे में मलिक ने बताया है कि किस तरह सईद ने जिहादी समूहों की बैठक बुलाई थी। पीएम की प्रतिक्रिया रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक का कहना है कि आईबी से बातचीत के बाद उसे कहा गया कि प्रधानमंत्री को सीधे ब्रीफ करे। उसने कहा कि वह उसी शाम तत्कालीन पीएम सिंह से मिला और उस समय तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन भी थे। मलिक का दावा है कि सिंह ने उसके प्रयासों के लिए व्यक्तिगतरूप से धन्यवाद दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने कहा, 'जब मैं पाकिस्तान से दिल्ली लौटा, तो आईबी के विशेष निदेशक वीके जोशी डिब्रीफिंग का हिस्सा बने। वह मुझसे होटल में मिले और तत्काल प्रधानमंत्री को ब्रीफ करने का अनुरोध किया।' उसने कहा, 'मैं उस शाम प्रधानमंत्री से मिला, जहां एनके नारायणन मौजूद थे। मैंने उन्हें मेरी मीटिंग के बारे में बताया और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मेरे प्रयासों, समय, धैर्य और समर्पण के लिए मेरा धन्यवाद दिया।' हलफनामे में मलिक ने अटल बिहारी वाजपेयी, सोनिया गांधी, पी चिदंबरम, आईके गुजराल और राजेश पायलट से हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया है।

नीरव मोदी की नई रणनीति से प्रत्यर्पण पर लग सकता है बड़ा झटका

नई दिल्ली ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उसने अपनी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को फिर से खोलने की मांग रखी। इससे उसे जल्द भारत लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है। इस फैसले के बाद भारत सरकार और जांच एजेंसियां लंदन को जवाब भेजने की तैयारी में हैं, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'नीरव मोदी ने अपनी कानूनी टीम के जरिए पिछले महीने यूके की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसमें उसने भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को फिर से खोलने की मांग की। अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया है और भारत सरकार को नोटिस भेजा गया है।' नीरव मोदी ने अपनी अर्जी में दावा किया कि अगर उसे भारत भेजा गया तो कई एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी और इस दौरान उसे यातना का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने अभी इस अर्जी पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम विस्तार से जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, जो राजनयिक चैनलों के जरिए भेजा जाएगा। हम नीरव के दावों का खंडन करेंगे। अदालत से इस अर्जी को खारिज करने की अपील करेंगे, क्योंकि प्रत्यर्पण का आदेश 2022 में ही अंतिम हो चुका था।' पंजाब नेशनल बैंक घोटाला क्या है? भारत सरकार यह बताने की योजना बना रही है कि अगर नीरव को प्रत्यर्पित किया गया, तो उसका मुकदमा पूरी तरह भारतीय कानून के अनुसार होगा। साथ ही, किसी भी एजेंसी की ओर से उससे पूछताछ नहीं की जाएगी। बता दें कि नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात, भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और करार उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। 2011 से 2017 तक उन्होंने अपनी कंपनियों (जैसे फायरस्टार डायमंड, सोलर एक्सपोर्ट्स) के लिए पीएनबी के मुंबई ब्रांच से 1,200 से अधिक फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) हासिल किए, जो विदेशी बैंकों से कर्ज लेने के लिए इस्तेमाल हुए। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ये एलओयू बिना गारंटी या रिकॉर्ड जारी किए गए, जिससे बैंक को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।