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सी.पी. राधाकृष्णन बने भारत के उपराष्ट्रपति, सीएम साय ने दी बधाई

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सी.पी. राधाकृष्णन को भारत का उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक प्रभावशाली नेता और कुशल प्रशासक के रूप में  राधाकृष्णन जी ने समाज की जड़ों से उठकर राष्ट्र के उच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने का गौरव अर्जित किया है। उनका यह सफर लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त मिसाल है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राधाकृष्णन जी का दूरदर्शी नेतृत्व और गहरा प्रशासनिक अनुभव न्याय, समानता और विकास के मूल्यों को नई ऊँचाइयों पर स्थापित करेगा। वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के उत्थान के प्रति उनकी निष्ठा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय प्रगति को और सुदृढ़ बनाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सफलता राधाकृष्णन जी के विश्वास, कड़ी मेहनत और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है, जो पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से राधाकृष्णन जी को पुनः शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

लात-घूसों से पिटने के बाद गायब हुईं नेपाल की विदेश मंत्री आरजू देउबा, मचा हड़कंप

काठमांडू  नेपाल में अराजकता की स्थिति अब भी जारी है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसक प्रदर्शनों का दौर थमा नहीं है. सोमवार को पुलिस की झड़प में कम से कम 20 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद नाराज जेन-जी प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को भारी तोड़-फोड़ की और कई मंत्रियों, नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के काठमांडू में बुदानिलकांठा स्थित घर पर हमला किया. प्रदर्शनकारियों ने घर पर मौजूद देउबा और उनकी पत्नी नेपाल की विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा को बुरी तरह पीटा. सेना के हस्तक्षेप के बाद देउबा की जान तो बच गई लेकिन आरजू का कुछ पता नहीं चल पा रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी आरजू को लात-घूसों से पीटते नजर आ रहे हैं. आरजू हमले में बुरी तरह घायल हुई थीं. उनके पति को तो बचा लिया गया लेकिन उन्हें लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आ पा रही है. फिलहाल यह पता नहीं है कि देश की विदेश मंत्री इस वक्त कहां हैं.  कुछ रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि बुरी तरह पीटने के बाद आरजू को प्रदर्शनकारी अपने साथ ही लेकर चले गए. हालांकि, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. पूर्व प्रधानमंत्री को खूब पीटा, चेहरे से बहा खून प्रदर्शनकारियों ने देउबा के आवास में खूब तोड़फोड़ की. फुटेज में दिख रहा है कि देउबा पर हमले के बाद उनके चेहरे से खून बह रहा है. इसके बाद देउबा और आरजू को बचाने के लिए पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे.  फुटेज में देखा जा सकता है कि खून से लथपथ पूर्व प्रधानमंत्री जमीन पर बैठे हैं और सेना के जवान उन्हें घेरे हुए हैं. हालांकि, इस दौरान उनकी पत्नी कहीं नहीं दिख रही हैं. आर्मी के हाथ में नेपाल, पूरे देश में लगा कर्फ्यू नेपाल में आर्मी ने अब कमान संभाल ली है और आंदोलन से निपटने के लिए पूरे नेपाल में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कर्फ्यू बुधवार पांच बजे से लेकर गुरुवार सुबह 6 बजे तक रहेगा. सेना ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सिंहदरबार जैसे स्थानों पर भी कंट्रोल कर लिया है. नेपाल में जेन-जी का यह आंदोलन 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन के केपी शर्मा ओली सरकार के फैसले से शुरू हु्आ जो कि जल्द ही हिंसक हो गया. इस हिंसा में जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा है. भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बहाली में मदद कर रहा है.

शिप्रा नदी से मिली आरक्षक आरती की लाश, उज्जैन में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उज्जैन   मध्य प्रदेश के उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार शाम को आरक्षक आरती पाल का शव बरामद होने के साथ पूरा हो गया। करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद आरती का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी में स्थित गहरे गड्ढे से बरामद किया गया। वहीं, आज बुधवार को दिवंगत आरक्षक आरती पाल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वैसे तो आरती मूल रूप से रतलाम जिले की रहने वाली खीं, लेकिन रेस्क्यू के दौरान उनका पूरा परिवार उज्जैन ही आ गया था। ऐसे में सभी की सहमति से आज बुधवार को उज्जैन चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर आरती का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई आरती पाल की अंतिम विदाई के मौके पर एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, परिवार के लोगों के साथ साथ हजारों की संख्या में उज्जैन वासी शामिल हुए। सभी ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शिप्रा नदी से निकला कॉन्स्टेबल आरती पाल का शव, परिवार में पसरा मातम उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ सर्च ऑपरेशन मंगलवार देर शाम तीसरे दिन पूरा हो गया। दरअसल, करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद महिला कांस्टेबल आरती पाल का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी पर स्थित गहरे गड्ढे से बरामद हुआ है। उज्जैन के उन्हेल थाने में कार्यरत महिला आरक्षक आरती पाल मूल रूप से रतलाम की रहने वाली हैं। उनका शव मिलने की सूचना के बाद से परिवार के बीच कोहराम मच गया। माता-पिता समेत उनके घर के हर सदस्य का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि, हर कोई सदमें में है। शिप्रा नदी में हादसे का शिकार होकर जान गवाने वाली आरती पाल मूल रूप से रतलाम शहर के अरिहंत परिसर की रहती थीं। आरती के पिता अशोक पाल कलेक्टर कार्यालय से सेवानिवृत हुए हैं और माता शीला पाल गृहणी हैं। साल 2013 में पुलिस सेवा में आई आरती के परिवार में उनका एक छोटा भाई लोकेंद्र 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बेटी का शव मिलने की खबर मिलते ही उसके बचे होने की नामुमकिन सी उम्मीद बांधे बैठे परिवार में मातम पसर हुआ है। मां का कहना है कि, जबतक बेटी को देख नहीं लेती, यकीन नहीं करूंगी कि अब वो इस दुनिया में नहीं है। बता दें कि, आरती अपने परिवार के प्रति इतनी जिम्मेदार थी कि, माता-पिता की सेवा के चलते अबतक विवाह नहीं किया था। घर की जिम्मेदारियां निभाने अबतक नहीं की शादी आरती के चाचा अजय पाल ने बताया कि, ऐसी जानकारी मिली थी कि, हादसे का शिकार हुआ वाहन आरती ही चला रही थी। आपको बता दें कि, एनडीआरएफ – एसडीआरएफ, पुलिस और उज्जैन-महिदपुर के लोकल रेस्क्यू दलों के कुल 130 जवानों ने 68 घंटे में 40 फीट गहराई तक तलाशने के बाद मंगलवार शाम महिला कांस्टेबल का शव नदी से ढूंढ निकाला है। बताया जा रहा है कि, आरती पाल का शव वाहन के साथ नदी में बड़े पुल से करीब 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक गहरे गड्ढे में फंसा मिला है। हादसे से एक दिन पहले बोलकर गई थी 'जल्दी आऊंगी' चाचा के अनुसार, आरती के एक अन्य भाई जितेंद्र पाल का इसी साल 30 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। सवा माह पूरा होने पर धूप-ध्यान करने आखिरी बार बेटी 4 सितंबर को ही घर आई थी। उस दिन पूरा परिवार एक साथ था। वहीं, 5 सितंबर को जाते समय उसने घर वालों से कहा था, 'इस बार जल्दी आऊंगी'। लेकिन, घर से लौटने के अगले ही दिन इस तरह की दिल दहला देने वाली खबर आई, जिसने परिवार को झकझोर कर रख दिया और अब पता चला है कि, बेटी का शव मिला है। हमें पता नहीं था कि, बेटी इस हाल में जल्दी घर आएगी। ये सिर्फ आरती के माता-पिता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गहरी क्षति है। पुलिस महकमें में हड़कंप आपको बता दें कि, 6 सितंबर शनिवार रात को उज्जैन की शिप्रा नदी के पुल से एक वाहन नदी में गिर गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की सूचना पर रात डेढ़ बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वाहन और उसमें सवारों की तलाश की गई पर नदी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा। रविवार सुबह 6 बजे दोबारा तलाश दोबारा से शुरु हुई। इसी बीच रेस्क्यू दल समेत पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिप्रा पुल से करीब 2 किलोमीटर दूर मिली कार से उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव निकला। बाद में मालूम हुआ कि, बीती रात जो वाहन हादसे का शिकार हुआ है, उसमें टीआई के साथ एसआई मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी मौजूद थीं। 68 घंटे बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन घटना ने पुलिस महकमें को सन्न कर दिया। टीआई के साथ एसआई और महिला आरक्षक होने की पुष्टि होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाई गई, लेकिन रविवार देर रात तक दोनों लापता पुलिसकर्मियों का कोई सुराग नहीं लगा। सोमवार की सुबह से एक बार फिर एसडीआरएफ ने रेस्क्यू शुरु किया तब जाकर शाम को एसआई मदनलाल का शव भी मिल गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ा और मंगलवार शाम करीब 68 घंटे बाद आरक्षक आरती पाल का शव भी नदी से बरामद कर लिया गया। नदी में कार गिरने का वीडियो हुआ वायरल इधर, सोमवार रात शिप्रा नदी के बड़े पुल से पुलिसकर्मियों की कार गिरने का लाइव वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कार अन्य वाहनों के साथ जाती दिख रही थी ऐर अचानक ही पुल से नीचे गिर गई। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर अब भी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

36 लोगों को नोटिस, भोपाल के अनंतपुरा कोकता में विभागीय जमीन पर कब्जे की जांच शुरू

भोपाल  भोपाल के अनंतपुरा कोकता में पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने 36 लोगों से 10 दिन में जवाब मांगा है। जिसमें कब्जे से जुड़ी पूरी जानकारी शामिल रहेगी।  बता दें, डायमंड सिटी के 20 मकान भी जद में है। इसके अलावा खेती कार्य के लिए कब्जा करने पर 8, कॉलोनी के पहुंच मार्ग के लिए 4 नोटिस दिए हैं। इसके अलावा बीपीएस स्कूल, द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट समेत एक हॉस्टल और एक दुकान संचालक को भी नोटिस दिए हैं। पक्ष रख चुके लोग, कहा-कोई लेना नहीं सीमांकन के दौरान निशान और जमीन पर खूटियां लगाई गई थी। इससे स्पष्ट हो गया था कि प्रशासन किन लोगों को नोटिस देगा। इसलिए लोग एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को अपनी पीड़ा सुना चुके हैं। वहीं, कई लोग पहले से ही अपना पक्ष बता चुके थे। स्कूल के लिए 2400 स्क्वायर फीट जमीन दिसंबर 2021 में सिद्धार्थ सिन्हा ने खरीदी थी। जमीन की जानकारी जुटाई तो यह सही बताई गई थी। इसके बाद एसडीएम ऑफिस से नामांतरण कराया। सभी अनुमति लेने के बाद ही बिल्डिंग बनाई और स्कूल संचालित करना शुरू किया। स्कूल को लेकर भी जिला शिक्षा विभाग से सभी अनुमति और मान्यता प्राप्त की गई। लोगों का भी कहना है कि जमीन खरीदते समय सारे रिकॉर्ड देखें थे। डायवर्जन, रजिस्ट्री, नक्शे, नामांकन कराया। सरकारी तौर पर जब बटांकन कराया तो आरआई-पटवारी आए। उन्होंने ही बताया था कि उनके हिस्से में कहीं कोई सरकारी जमीन नहीं है। सीमांकन में इतना कब्जा मिला था सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार, 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया। दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेट्रोल पंप नगर निगम के हैं। वहीं, बायपास का 200 फीट हिस्सा भी पशुपालन विभाग की जमीन पर ही निकला था। ऐसे में इन्हें सरकारी प्रक्रिया में कोई राहत मिल सकती है। अब तक यह प्रक्रिया हुई     27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया था।     तीन दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा हो गया। इसके बाद रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है?     इसी बीच 2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास रहने वाले कई लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।     3 सितंबर को यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की।     8-9 सितंबर को चिंह्नित कब्जाधारियों को नोटिस भेजे गए।     नोटिस में 10 दिन की मोहलत दी गई है। इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई। इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।

सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाना चाहते हैं? इन 5 आदतों को तुरंत छोड़ें

हर इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस का होना जरूरी है। ये एक ऐसी जरूरी चीज है जिसके बल पर वो दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकता है। जिस इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी होती है वो ज्यादातर सक्सेज नहीं पाते। अगर आपके अंदर भी सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी रहती है तो जरा इन 5 आदतों पर गौर करें। अगर ये आदते आपकी लाइफ का हिस्सा हैं तो फौरन इन्हें दूर कर दें। तभी आत्मविश्वास बढ़ पाएगा। खुद के बारे में निगेटिव सोचना अगर आप खुद के बारे में हमेशा निगेटिव बातें बोलते और सोचते हैं। खुद की कमियां निकालते हैं तो इससे आपकी सेल्फ एस्टीम प्रभावित होती है। और आपके अंदर का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। आपको खुद पर विश्वास नहीं रहता कि कोई काम आप अकेले कर सकते हैं। इसलिए सेल्फ वैल्यूएशन करने और खुद को क्रिटिसाइज करने के बीच का फर्क समझकर निगेटिव सोचना बंद करें। हमेशा परफेक्ट बनने की चाह किसी भी काम में परफेक्शन अच्छी बात है लेकिन यहीं परफेक्शन की चाह कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। क्योंकि जरा सी कमी भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और कई बार सेल्फ कॉन्फिडेंस पर निगेटिव असर पड़ता है। दूसरों से तुलना दूसरों से तुलना करना अगर आदत बन जाती है तो खुद में केवल कमियां ही कमियां नजर आती हैं। जिसकी वजह से आत्मविश्वास कमजोर होता है। नए चैलेंज एक्सेप्ट ना करना अगर आप लाइफ में आने वाले नए चैलेंज को एक्सेप्ट नहीं करते हैं तो ये आपकी ग्रोथ को रोक सकती है। क्योंकि मन में बात आती है कि मुझसे ये काम नहीं होगा, जो कि पूरी तरह से कमजोर आत्मविश्वास की निशानी है। खुद को जिम्मेदार ठहराना लाइफ में और अपने आसपास आपसे जुड़े लोगों के जीवन में हो रही किसी भी समस्या के लिए अगर आप खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ये सेल्फ कॉन्फिडेंस को कमजोर बना देती है।  

जासूसी केस में ज्योति मल्होत्रा की 11वीं पेशी, अधूरी चार्जशीट को लेकर वकील तैयार

हिसार  पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोपों में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा की आज कोर्ट में 11वीं पेशी होगी। ज्योति व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होगी। ज्योति की इससे पहले 3 सितंबर को हिसार कोर्ट ने ज्योति की डिफॉल्ट बेल को खारिज कर दिया था। ज्योति के वकील कुमार मुकेश का कहना था कि 90 दिन का समय पुलिस को चालान पेश करने के लिए मिला था मगर पुलिस पूरी जांच नहीं कर पाई। ज्योति के खिलाफ पुलिस को कुछ नहीं मिला और अधूरी चार्जशीट के आधार पर बेल मिलनी चाहिए मगर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा पुलिस ने कोर्ट में 3 एप्लीकेशन लगाई थी। कोर्ट ने 2 एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया था। इसके अनुसार वकील कुमार मुकेश को अधूरी चार्जशीट दी जाएगी और चालान के पार्ट को प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। हालांकि रूटीन मीडिया ब्रीफिंग पर कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने बताया कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन मैं इनसे संतुष्ट नहीं हूं। चारों आदेशों की कॉपियां शीघ्र लेकर उनके खिलाफ रिविजन फाइल की जाएगी। ज्योति की पिछली पेशी 2 सितंबर को हुई थी। 25 अगस्त से चार्जशीट को लेकर चल रहा विवाद पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की चार्जशीट को लेकर विवाद चल रहा है। 25 अगस्त को ज्योति को चार्जशीट सौंपने के लिए कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। कोर्ट में चार्जशीट सौंपने की प्रक्रिया चल ही रही थी, इस दौरान हिसार पुलिस ने कोर्ट में 3 एप्लिकेशन दी कि ज्योति के वकील कुमार मुकेश को चार्जशीट के कुछ हिस्से न दिए जाएं। पुलिस ने इसके पीछे तर्क दिया है कि वकील को चार्जशीट कॉपी देने से रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है, जो काफी संवेदनशील है। पुलिस ने कहा कि पंचकूला सीएफएल का डेटा गोपनीय है और देश की सुरक्षा के लिए इसे सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। पुलिस ने कहा कि पाक एजेंटों के साथ ज्योति की चैटिंग सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पुलिस ने कहा कि पूरे मामले के मीडिया ब्रीफिंग पर रोक लगाई जाए। वहीं कुमार मुकेश ने कोर्ट में कहा था कि यह एप्लिकेशन अवैध हैं। कुछ प्रावधानों को तरोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। इसका कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद वकील कुमार मुकेश ने अपनी तरफ से डिफॉल्ट बेल की एप्लिकेशन कोर्ट में लगाई थी। पाकिस्तान और चीन की यात्रा से शक के घेरे में आई थी ज्योति ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा सुरक्षा एजेंसियों की नजर में तब आई जब वह पिछले साल 2024 में 2 महीने के भीतर पाकिस्तान और फिर चीन गई थी। ज्योति मल्होत्रा के यूट्यूब पर अपलोड वीडियो की डेट के अनुसार वह 17 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान गई थी। 15 मई तक वह पाकिस्तान में ही रही। इसके बाद भारत लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून को वह चीन चली गई। 9 जुलाई तक चीन में रही और फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुंच गई। इससे पहले वह करतारपुर कॉरिडोर से पाकिस्तान गई तो वहां पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री और पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ से मिली और उनका इंटरव्यू तक किया। ज्योति को 15 मई को किया था गिरफ्तार बता दें कि हिसार पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में 15 मई को गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और गोपनीय जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोप हैं।

जानें घर की सही दिशा, जहां अपराजिता लगाने से बढ़ती है खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर में पेड़-पौधे लगाने के लिए भी कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का ध्यान रखने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। आज हम आपको अपराजिता के पौधे से संबंधित कुछ वास्तु नियम बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में। मिलते हैं ये फायदे घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति को धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा के संचार को भी बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखता है। माना जाता है कि घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति के करियर में आ रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं। किस दिशा में लगाएं पौधा वास्तु शास्त्र में अपराजिता का पौधा लगाने के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना गया है। क्योंकि वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, यह दिशा देवी-देवताओं की देशा मानी गई है। ऐसे में इस दिशा में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। साथ ही और नकारात्मकता भी दूर होती है। वहीं वास्तु शास्त्र में अपराजिता लगाने के लिए पूर्व दिशा भी शुभ मानी गई है। इस दिशा से अपराजिता का पौधा लगाने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि हो सकती है। रखें इन बातों का ध्यान अपराजिता के पौधे कभी भी पश्चिम या फिर दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है और आपके जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं। साथ ही यह भी माना गया है कि आपको शनिवार के दिन अपराजिता का पौधा लगाने से काफी लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही शनि देव की पूजा में अपराजिता का फूल अर्पित करने से शनिदेव की कुदृष्टि आपके ऊपर नहीं पड़ती।

इंदिरा एकादशी विशेष: पितृ दोष दूर करने के आसान टिप्स, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में आने वाली विशेष तिथि है, जिसका संबंध पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और नियमपूर्वक पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृदोष से मुक्ति का मार्ग खुलता है. शास्त्रों के अनुसार, जो लोग पितृपक्ष में अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करते हैं, उन्हें न केवल पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति भी आती है. आइए जानते हैं इस बार की एकादशी की तिथि और उन उपायों के बारे में जिन्हें करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इंदिरा एकादशी 2025 पंचांग के अनुसार, 16 सितंबर को रात 12 बजकर 21 मिनट पर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी. वहीं, 17 सितंबर को देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी. पितृ दोष क्या है? जब किसी व्यक्ति के पूर्वजों (पितरों) की आत्मा को शांति नहीं मिलती, तो उसे पितृ दोष माना जाता है. यह दोष कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध न करना, उनकी मृत्यु के बाद कोई अनुष्ठान अधूरा रह जाना, या उनका असंतोष. पितृ दोष के कारण परिवार में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं, जैसे धन की कमी, विवाह में देरी, संतान संबंधी परेशानियां और लगातार बीमारियां. इंदिरा एकादशी पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें? अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बहुत शुभ है. इस दिन कुछ विशेष उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं: व्रत और पूजा: इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करें. पूजा में तुलसी दल, फूल, फल और पंचामृत जरूर चढ़ाएं. श्राद्ध और तर्पण: इस दिन पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है. अगर आप अपने पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम हैं, तो किसी योग्य ब्राह्मण से विधिपूर्वक श्राद्ध करवाएं. अगर ऐसा संभव न हो तो तर्पण (जल अर्पित करना) कर सकते हैं. ब्राह्मणों को भोजन कराएं: पितरों की शांति के लिए इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना बहुत शुभ होता है. भोजन में खीर और पूड़ी जैसी चीजें शामिल करें. दान-पुण्य: इस दिन अनाज, कपड़े या धन का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है. गाय को चारा खिलाना भी पुण्य का काम है. पितृ स्तोत्र का पाठ: अगर आपको पितृ दोष महसूस होता है, तो इंदिरा एकादशी के दिन पितृ स्तोत्र या गरुड़ पुराण का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है. यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है. इंदिरा एकादशी का महत्व यह एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकमात्र एकादशी के रूप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. यह भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पितरों को स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं.

तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या दोगुनी, 17 से बढ़कर हुई 35– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुनी हो गई है। वर्ष 2022 में जहां बाघों की संख्या 17 थी, वहीं अप्रैल 2025 के सर्वेक्षण में यह बढ़कर 35 हो गई। यह जानकारी आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सम्पन्न छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड की 15वीं बैठक में दी गई।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता है। हमारा राज्य वन संपदा और वन्य प्राणियों के मामले में अत्यंत समृद्ध है। इन्हें सुरक्षित और विकसित करने के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में बाघों की संख्या में तीन वर्षों के भीतर हुई दोगुनी वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35 होना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में संतोषजनक कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि अब हमें अन्य वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे। छत्तीसगढ़ के कई इलाके ऐसे हैं जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। जशपुर जिले के नीमगांव में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन हेतु आवश्यक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह अन्य क्षेत्रों की पहचान कर उनका भी विकास किया जाना चाहिए। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं वनमंत्री केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य में बाघों की संख्या के साथ-साथ अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन में भी वृद्धि हुई है तथा उनके रहवासों में सुधार के प्रयास जारी हैं। आगे इसके और बेहतर परिणाम जनता के सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि आज पारित प्रस्ताव जनहित के महत्वपूर्ण कार्य हैं, जो शांति का वातावरण स्थापित करने में सहायक होंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि वन्यजीवों एवं जैव विविधता को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। बोर्ड के सदस्य सचिव अरुण कुमार पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा विभागीय उपलब्धियों और एजेण्डा पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। सदस्य सचिव ने बताया कि राज्य में सर्वाधिक बाघ अचानकमार टाइगर रिज़र्व में हैं। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 14वीं बैठक में पारित निर्णय के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व और गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिज़र्व में मध्यप्रदेश से बाघ एवं बाघिन के ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिल चुकी है। शीघ्र ही ट्रांसलोकेशन की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजकीय पशु वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। असम से लाए गए वनभैंसों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसी प्रकार राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। “मैना मित्र” नामक समूह का गठन किया गया है, जो मैना के संरक्षण और उनके रहवास की निगरानी करता है। टाइगर रिज़र्व और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अन्य सुविधाएं विस्तारित की जा रही हैं, जिससे समीपवर्ती ग्रामवासियों को रोजगार मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण में भी सहयोग प्राप्त होगा। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन हेतु गश्ती मार्ग निर्माण तथा संरक्षित क्षेत्र के युक्तियुक्तकरण के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व, गरियाबंद अंतर्गत धवलपुर से कुकरार तक सड़क निर्माण कार्य; मिशन अमृत योजना के तहत पाइपलाइन विस्तार कार्य; तथा कवर्धा वनमंडल में इंटरनेट सुविधा के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की अनुमति प्रदान की गई। इससे वन क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, शासकीय योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलेगी, ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सुधार होगा और क्षेत्रीय अमलों के लिए सूचना संप्रेषण मजबूत होगा। बैठक में राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड के सदस्यों ने वन्यजीव संरक्षण के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक चैतराम अटामी, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, सचिव वन अमरनाथ प्रसाद तथा अन्य माननीय सदस्य और गैर-शासकीय संस्थाओं के प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा

रायपुर : अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री साय ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का किया शुभारंभ, चयनित बच्चों का किया सम्मान रायपुर मुख्यमंत्री ने "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणामुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक बच्चों के लिए संचालित "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" का शुभारंभ किया। उन्होंने चयनित बच्चों का सम्मान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है। साय ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना का लाभ 200 बच्चों को मिलेगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक अनेक समाज के हित के लिए कार्य करता है, परंतु अपने परिवार के लिए बहुत कम समय, संसाधन, ऊर्जा और ध्यान दे पाता है। उनके भी सपने होते हैं कि उनके घर के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिएँ, ताकि भविष्य में मजदूर का बेटा-बेटी केवल मजदूरी न करे, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और राजनेता बने।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत श्रमिक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" प्रारंभ की है। इसके तहत प्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। इनका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम के दौरान निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों ने मिलकर योजना का शुभारंभ पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से अब हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो गए हैं। इस योजना के माध्यम से बच्चों को अच्छी शिक्षा और भविष्य सँवारने का सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे लिए यह एक सपना था, जो अब पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत चालू वर्ष में 100 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 14 निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इन विद्यालयों में सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज श्रम विभाग के सहयोग से श्रमिक परिवारों के 100 बच्चों का दाखिला प्रदेश के 14 निजी आवासीय विद्यालयों में कराया गया है। सरकार की सोच है कि श्रमिक का बच्चा केवल श्रमिक न रहकर अधिकारी बने और देश की सेवा करे। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके निश्चित ही दूरगामी परिणाम सामने आएँगे। श्रम मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि श्रम विभाग के अंतर्गत तीन मंडल संचालित हैं, जिनमें लगभग 70 से अधिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले 20 माह में लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से पहुँचाया गया है। उन्होंने योजना के तहत चयनित बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सुशासन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 30 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, जिनके बच्चे अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ पाते थे। उनके लिए "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चयनित बच्चों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर श्रम विभाग के सचिव हिम शिखर गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्रीमती फरिहा आलम, श्रम कल्याण मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।