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मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में कड़ा एक्शन, आरोपी के ठिकानों पर चला बुलडोजर

बीजापुर पत्रकार मुकेश चंद्रकार हत्याकांड के मुख्य आरोपित सुरेश चंद्रकार के चट्टानपारा स्थित बाड़े पर सोमवार को प्रशासन ने अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त किया। आठ माह पहले हुई इस घटना में युवा पत्रकार मुकेश चंद्रकार की हत्या कर उनके शव को बाड़े के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया था। पत्रकारों ने तत्काल कार्रवाई की उठाई थी मांग घटना के बाद पूरे पत्रकार समुदाय और समाज के सभी वर्गों में गहरी नाराजगी व्याप्त थी। पत्रकारों ने आरोपित के इस प्लाट के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई थी। प्रशासन ने फारेस्ट लेंड में बनाए गए प्लांट को पहले ही ध्वस्त किया था और अब राजस्व और नगर पालिका के संयुक्त अमले ने अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन नहीं करेगा कोई समझौता पुलिस ने क्राइम सीन को सील किया था और अब राजस्व भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर तैनात किया गया। नगर पालिका और राजस्व अमले के संयुक्त प्रयास से यह कार्रवाई हो रही है। इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण और कानून के उल्लंघन पर प्रशासन कोई समझौता नहीं करेगा। आठ माह बाद हुई यह कार्रवाई आरोपित सुरेश चंद्रकार के खिलाफ कानून के हाथ मजबूत होने का प्रतीक है। क्या था मामला? छत्तीसगढ़ के रायपुर से 433km दूर बीजापुर में 1 जनवरी 2025 को युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी। पत्रकार हत्या मामले के मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर को बीजापुर पुलिस ने 5 जनवरी 2025 को हैदराबाद से अरेस्ट किया था। आपको बता दें कि सुरेश चंद्राकर और उसके दो सहयोगी तब से जेल में बंद है। इस केस में पत्रकारों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस मामले में बीजापुर पुलिस प्रशासन ने 8 सितंबर 2025 को बड़ा एक्शन लिया। अब मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए सुरेश चंद्राकर के फार्म हाउस और ठिकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई है।

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत योजना, 100 परिवारों को 25 एकड़ भूमि आवंटित करने की तैयारी

जगदलपुर बस्तर में पहाड़ी नाले की वजह से मांदर गांव में 26 अगस्त को आई बाढ़ के चलते गांव में भारी नुकसान हुआ. नाले के आसपास स्थित दर्जनों घर तबाह हो गए. कई मकान क्षतिग्रस्त भी हुए. बाढ़ प्रभावित ग्रामीण आज भी दहशत में हैं. ऐसे में प्रशासन ने पहाड़ी नाले के आसपास बसे ग्रामीणों को विस्थापित करने का निर्णय लिया है. मांदर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि अगर फिर बाढ़ आई तो उन्हें फिर से बेघर होना पड़ सकता है. ऐसे में प्रशासन ने पहाड़ी नाले के पास बसे ग्रामीणों को विस्थापित करने का फैसला लिया है. गांव के ही एक छोर में 25 एकड़ जमीन 100 से अधिक बाढ़ प्रभावितों के लिए आवंटित की जाएगी. गांव में प्रशासन का सर्वे जारी : कलेक्टर बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने बताया कि बाढ़ में अपना घर गंवाने वाले लोगों और बाढ़ संभावना वाले इलाकों के ग्रामीणों को यहां से विस्थापित किया जाएगा. फिलहाल ग्रामीणों को विस्थापित करने को लेकर गांव में प्रशासन का सर्वे जारी है.

S-400 की ढाल और Su-57 का वार… भारत का घातक कॉम्बो पाकिस्तान पर पड़ेगा भारी

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी ताकत को और मजबूत करने की योजना बना रही है. अगर रूस के साथ चल रही Su-57E स्टील्थ फाइटर जेट की बातचीत सफल होती है, तो यह S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर दक्षिण एशिया में सबसे खतरनाक जोड़ी बन सकता है. यह जोड़ा पाकिस्तान वायुसेना (PAF) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.  S-400: भारत का आसमानी कवच भारत ने रूस से 5 S-400 ट्रायम्फ सिस्टम खरीदे हैं, जिनमें से तीन 2025 तक तैनात हो चुके हैं. यह सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी तक हवाई हमलों को रोक सकता है. यह विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक और नष्ट कर सकता है. इसकी खासियत है…     लंबी रेंज: 600 किमी तक दुश्मन के विमान-मिसाइल को देख सकता है. 400 किमी तक नष्ट कर सकता है.     मल्टी-टारगेट: एक साथ 300 टारगेट ट्रैक और 36 को नष्ट कर सकता है.     मोबाइल सिस्टम: इसे फटाफट एक जगह से दूसरी पर ले जाया जा सकता है, जिससे दुश्मन के लिए निशाना बनाना मुश्किल है.  भारत ने इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात किया है, जैसे पंजाब, राजस्थान और गुजरात में. इससे पाकिस्तान के F-16, JF-17 और नए J-10CE विमान भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही पकड़े और नष्ट किए जा सकते हैं. S-400 को भारत में सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है, जो इसका दमदार प्रभाव दर्शाता है.  Su-57E: भारत का स्टील्थ तलवार Su-57E रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. अगर भारत इसे खरीदता है, तो यह IAF का सबसे ताकतवर हथियार बन सकता है. इसकी खासियतें…     स्टील्थ टेक्नोलॉजी: इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, यानी दुश्मन के रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ सकते.     लंबी रेंज हथियार: यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ले जा सकता है.     सुपर मैन्यूवरेबिलिटी: यह तेज और चुस्त है, जिससे युद्ध में बेहतर प्रदर्शन करता है.     एडवांस सेंसर: इसके सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम IAF के अन्य हथियारों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं. Su-57E दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सकता है, बिना पकड़े गए. यह पाकिस्तान के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है. S-400 और Su-57E का जोड़ा क्यों है खतरनाक? S-400 और Su-57E मिलकर भारत को डिफेंस और ऑफेंस में बेजोड़ ताकत देते हैं. इसे इस तरह समझें… S-400: आसमानी ढाल S-400 भारत के आसमान को दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइल से बचाता है. यह पाकिस्तान के विमानों को भारतीय सीमा के पास आने से पहले ही नष्ट कर सकता है. इसकी रेंज इतनी है कि पाकिस्तान के कई एयरबेस इसके निशाने पर हैं. सरगोधा और कामरा जैसे बेस से उड़ान भरते ही PAF के विमान पकड़े जा सकते हैं. Su-57E: हमलावर कटार Su-57E स्टील्थ होने से पाकिस्तान के रडार से बचकर उनके इलाके में घुस सकता है. यह PAF के विमान, बेस या अन्य टारगेट पर सटीक हमला कर सकता है. इसके हथियार लंबी दूरी तक मार कर सकते हैं, जिससे PAF जवाब देने से पहले ही नुकसान उठाए. PAF की रणनीति बेकार पाकिस्तान अक्सर अपने JF-17 और J-10CE विमानों की संख्या बढ़ाकर IAF की तकनीकी बढ़त को कम करने की कोशिश करता है. लेकिन S-400 की लंबी रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने यह रणनीति फेल हो सकती है. PAF के विमान न तो भारत में घुस पाएंगे और न ही अपने बेस पर सुरक्षित रहेंगे. मनोवैज्ञानिक दबाव युद्ध में तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है. S-400 और Su-57E की मौजूदगी से PAF का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है. उन्हें पता होगा कि भारत का डिफेंस सिस्टम उनके हर हमले को रोक सकता है. Su-57E उनके बेस पर चुपके से हमला कर सकता है. इससे उनकी रणनीति सीमित हो जाएगी. पाकिस्तान के लिए चुनौती पाकिस्तान के पास अभी F-16, JF-17 और J-10CE जैसे विमान हैं, लेकिन ये S-400 की रडार रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने कमजोर पड़ते हैं. पाकिस्तान के पास चीनी HQ-9 डिफेंस सिस्टम है, जिसकी रेंज 250 किमी है, लेकिन यह S-400 से कमजोर है.  भारत की रणनीति IAF अपनी रणनीति को लेयर्ड डिफेंस (कई परतों वाला रक्षा तंत्र) पर बना रही है. S-400 के साथ भारत के पास अकाश, बराक-8 और स्पाइडर जैसे सिस्टम भी हैं. Su-57E के आने से IAF को स्टील्थ हमले की ताकत मिलेगी. भारत की स्वदेशी नेत्रा AEW&C और अकाशतीर सिस्टम S-400 और Su-57E के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बनाएंगे. यह नेटवर्क दुश्मन के हर हमले को रोक सकता है. जवाबी हमला कर सकता है.

MP में दिवाली तोहफा: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द शुरू, यात्रा होगी और तेज़

भोपाल   देश में दिवाली से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की तैयारी है। रेलवे सूत्रों के अनुसार दिल्ली से पटना के रूट पर देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सितंबर में ही शुरू की जाएगी। बाद में दिल्ली से भोपाल और अहमदाबाद के लिए ये सेवा शुरू होगी। बता दें कि इससे पहले चर्चा थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सबसे पहले एमपी की राजधानी भोपाल से नई दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। लेकिन अब नई दिल्ली-भोपाल के रूट पर चलाई जाने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी। दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली वंदे भारत का मार्ग अभी तय नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि यह जयपुर हो कर जा सकती है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिल्ली से करीब 1000 किमी दूरी पर बसे शहरों के लिए शुरू करने की योजना है। माना जा रहा है कि पटना के लिए पहली वंदे भारत स्लीपर बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की जाएगी जिसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का इंतजार है। वहीं भोपाल वासियों समेत पूरे एमपीको वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का बेसब्री से इंतजार है। देशभर में अभी दौड़ रहीं 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें देश में अभी 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें दिन के शिड्यूल में चल रही है। रात के सफर को सुगम व बेहतर बनाने के लिए अब वंदेभारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train) तैयार की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद में कहा था कि चेन्नई की इंट्रीगल कोच फैक्ट्री में वंदे भारत स्लीपर के 10 सैट तैयार हो जाएंगे और फैक्ट्री ने 50 अतिरिक्त वंदेभारत स्लीपर का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। ऐसे होगी समय की बचत नई दिल्ली से पटना: 972 किमी, अन्य ट्रेनों में समय- 17 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 11 घंटे नई दिल्ली से अहमदाबाद: (वाया जयपुर): 1000 किमी, अन्य ट्रेन-14 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- करीब 8-9 घंटे नई दिल्ली से भोपाल (New Delhi to Bhopal): 790 किमी, अन्य ट्रेनों में समय 13 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 6-7 घंटे

हरियाणा में NMMS स्कॉलरशिप 2025, नौवीं से बारहवीं तक छात्रों को मिलेगी मासिक ₹1000 की सुविधा

हिसार  हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय साधन सह पात्रता छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा 2025 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो गया है। इच्छुक विद्यार्थी 8 सितंबर से 15 अक्तूबर 2025 तक हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा का आयोजन 30 नवंबर 2025 को होगा। एनएमएमएस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 1000 रुपये और वार्षिक 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। यह राशि कक्षा 9 से 12वीं तक मिलेगी। यानी कि विद्यार्थी कुल मिलाकर चार वर्षों में 48,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। क्या है एनएमएमएस छात्रवृत्ति मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) के अंतर्गत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से वर्ष 2008 में राष्ट्रीय साधन सह पात्रता छात्रवृत्ति की केंद्र स्तर पर शुरुआत की गई थी। ये छात्रवृत्ति आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को वित्तीय मदद प्रदान करने के लिए बनाई गई है। सालाना 12 हजार रुपये की राशि प्रदान कर इस छात्रवृत्ति का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को माध्यमिक शिक्षा कक्षा 9 से कक्षा 12 तक की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित करना है। पिछले वर्ष 143 विद्यार्थियों का हुआ था चयन पिछले वर्ष परीक्षा में जिले से कुल 2348 ने आवेदन किया था। इसमें से 2199 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से उत्तीर्ण 143 विद्यार्थियों का चयन हुआ था, जिन्हें प्रतिमाह विभाग की ओर से 1 हजार रुपये की राशि दी जा रही है। पात्रता मानदंड यह छात्रवृत्ति योजना केवल उन्हीं विद्यार्थियों के लिए है जो इस समय कक्षा 8 में पढ़ाई कर रहे हैं। चयनित विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक मिलेगा। योजना के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के परिवार की वार्षिक आय 3.30 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग प्रदान करती है। 30 नवंबर को होगी स्कॉलरशिप परीक्षा हरियाणा एनएमएमएस स्कॉलरशिप परीक्षा 30 नवंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के एडमिट कार्ड परीक्षा तिथि से लगभग 10 दिन पहले हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।  

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025: इंदौर नंबर वन, जबलपुर को मिला दूसरा स्थान और ₹1 करोड़ इनाम

इंदौर/ जबलपुर   इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में नया कीर्तिमान रच दिया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब लगातार जीतने वाला इंदौर अब स्वच्छ वायु अवॉर्ड से भी सम्मानित हुआ है। दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में आयोजित समारोह में मंगलवार दोपहर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इंदौर को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव विशेष रूप से मौजूद रहे। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इंदौर को मिला पहला स्थान स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इंदौर ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि शहर ने 200 में से पूरे 200 अंक हासिल कर नया इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि इंदौर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रमाण है। सम्मान समारोह में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ सांसद शंकर लालवानी, एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा ‘बबलू’, अश्विनी शुक्ला और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया भी उपस्थित थे।  जबलपुर को मिला दूसरा स्थान और ₹1 करोड़ इनाम जबलपुर ने संपूर्ण भारत में लगातार दूसरी बार स्वच्छ वायु वाले शहर होने का गौरव बरकरार रखा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025’ में जबलपुर दूसरा स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतरगत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के नतीजे मंगलवार को जारी किए गए, जिसमें स्वच्छ आबोहवा वाले 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर को लगातार द्वितीय स्थान प्राप्त होने पर एक करोड़ पुरस्कार राशि प्रदान की गई। जबकि पहले स्थान पर इंदौर और तीसरे स्थान पर सूरत रहा। नई दिल्ली के गंगा ऑडिटोरियम, इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित होने वाले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार समारोह जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त प्रीति यादव और स्वच्छता सेल के नोडल अधिकारी संभव अयाची को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव द्वारा पुरस्कार राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। विदित हो कि गत स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में सूरत पहले और जबलपुर दूसरे स्थान पर था। 10 से अधिक आबादी वाले 47 शहर है शामिल स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के लिए अवार्ड को तीन केटेगरी मे विभाजित किया गया था। पहला 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए है। जिसमें 47 शहर शामिल हैं। जबकि दूसरा अवार्ड तीन लाख से 10 लाख आबादी वाले शहर जिसमें 44 शहर शामिल थे। वहीं, तीसरा तीन लाख से कम आबादी वाले शहर जिसमें 40 शहर शामिल रहे। नगर निगम जबलपुर त्योहारों के समय शहर को स्वच्छ वायु गुणवत्ता कायम रखने में सफल हुआ। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू निगायुक्त प्रीति यादव ने इसे जबलपुर के नागरिकों की उपलब्धि बताया है। उन्होंने बताया कि शहर की हवा को शुद्ध बनाए रखने के साथ ही रैकिंग सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे। रोड स्वीपिंग मशीन और डीप फोगर मशीन की मदद से हवा को शुद्ध बनाए रखने में मदद मिली है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतरगत वायु सर्वेक्षण 2025 के तहत डॉक्यूमेंटेशन का कार्य पूरा कर 15 जून तक नगर निगम को केंद्रीय मंत्रालय की वेबसाइट में अपलोड कर दिया था। इसके अलावा जमीनी स्तर पर अनेक कार्य कराएं परिणाम स्वरूप ये उपलब्धि मिली।

भोपाल का ‘भिखारी मुक्त’ सपना अधूरा, बढ़ती भिखारी संख्या ने बढ़ाई चिंता

भोपाल  भोपाल को “भिखारी मुक्त शहर” बनाने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है. प्रशासन के तमाम दावों और पहले चलाए गए अभियानों के बावजूद, शहर के प्रमुख चौराहों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भिखारियों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है. न्यू मार्केट, बोर्ड ऑफिस चौराहा, व्यापम चौराहा, ज्योति टॉकीज, बिट्ठन मार्केट, मंदिरों और बस स्टैंडों जैसे इलाकों में भिखारी बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं. इनमें से कई भिखारी सामान बेचने का बहाना करते हैं, लेकिन उनका असली मकसद भीख मांगना होता है. ये लोग हाथ में अगरबत्ती, रक्षासूत्र, झाड़ू या कोई सस्ता सामान लेकर राहगीरों से पैसे मांगते हैं. अगर कोई पैसे देने से मना करता है, तो कई बार ये लोग बदतमीजी पर उतर आते हैं. इससे आम लोगों को असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे. कुछ समय पहले भोपाल प्रशासन ने शहर को भिखारी मुक्त बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया था. इस दौरान कई भिखारियों को आश्रय गृहों में भेजा गया था, लेकिन अभियान के रुकते ही ये लोग फिर से सड़कों पर लौट आए. भोपाल कलेक्टर ने इस मुद्दे पर कहा कि हाल के दिनों में यह अभियान धीमा पड़ गया है, लेकिन त्योहारों के बाद जल्द ही भिखारियों को हटाने के लिए विशेष अभियान फिर से शुरू किया जाएगा. हालांकि, स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह सब सिर्फ “कागजी कार्रवाई” बनकर रह गया है. वे चाहते हैं कि प्रशासन केवल अभियान चलाकर दिखावा न करे, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले. लोगों का कहना है कि भिखारियों के पुनर्वास के लिए ठोस योजनाएं बनाई जाएं, जैसे उन्हें रोजगार के अवसर देना या आश्रय गृहों में बेहतर सुविधाएं देना. तभी भोपाल वास्तव में एक स्वच्छ, व्यवस्थित और भिखारी मुक्त शहर बन सकता है. नागरिकों की मांग है कि प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से काम करे और भोपाल को एक आदर्श शहर बनाने का सपना साकार करे.  

शिक्षा क्षेत्र में बड़ी सफलता, छत्तीसगढ़ के 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का समायोजन

अब कोई भी विद्यालय शिक्षक-विहीन नहीं, एकल-शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या घटी रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी युक्तियुक्तकरण निर्देशों के प्रावधानों के तहत राज्य में व्यापक युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही की गई है। इस बड़े कदम के फलस्वरूप 16,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया है। अब प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षक-विहीन नहीं है। उल्लेखनीय है कि पहले जहां 5,936 विद्यालय एकल-शिक्षकीय थे, वहीं युक्तियुक्तकरण के बाद केवल 1,207 प्राथमिक शालाएँ शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण एकल-शिक्षकीय रह गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अतिशेष शिक्षकों का चिन्हांकन विषयवार किया गया है। यदि किसी संस्था में किसी एक विषय का शिक्षक अतिशेष पाया गया, किन्तु उसी संस्था में सेटअप के आधार पर किसी अन्य विषय का पद रिक्त था, तो ऐसे अतिशेष शिक्षक का युक्तियुक्तकरण करते हुए आवश्यकता के आधार पर रिक्त विषय के पद पर उस विषय के शिक्षक की पदस्थापना की गई है। युक्तियुक्तकरण निर्देशों के अंतर्गत, शालाओं में पदस्थापना तिथि के आधार पर अतिशेष शिक्षकों का चिन्हांकन किया गया है। इस दौरान विषय, विकलांगता तथा परिवीक्षा अवधि जैसे कारकों का भी विशेष ध्यान रखा गया। इसके अलावा, अतिशेष शिक्षकों की गणना उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज मूल विषय के आधार पर की गई है। जिन शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण के पश्चात कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापना स्थल में कार्यभार ग्रहण कर लिया है, उनके वेतन आहरण की कार्यवाही पूर्व पदस्थ संस्था से प्राप्त अंतिम वेतन प्रमाणपत्र के आधार पर की जा रही है। इसी तरह, युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न शिक्षकों से प्राप्त अभ्यावेदन (जिनमें न्यायालयीन प्रकरण भी सम्मिलित हैं) पर शासन गंभीरता से परीक्षण कर रहा है। इन प्रकरणों की जांच संभागीय आयुक्त की समिति, संचालनालय स्तरीय समिति एवं शासन स्तरीय समिति में की जा रही है और शीघ्र ही इनका निराकरण कर लिया जाएगा।

मंंत्रिमंडल विस्तार के बाद कैबिनेट की पहली बैठक, मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

  रायपुर मंत्रिपरिषद ने सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 09 जून 2025 को बम विस्फोट की घटना में शहीद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरेपूंजे की शहादत और अदम्य वीरता को सम्मानित करते हुए उनकी पत्नी श्रीमती स्नेहा गिरेपूंजे को विशेष प्रकरण मानते हुए राज्य पुलिस सेवा में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत की निर्भरता को कम करने तथा गैर पारंपरिक स्त्रोत आधारित ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य की सौर ऊर्जा नीति में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। नीति की अवधि – नई व्यवस्था के अनुसार यह संशोधित नीति अब 2030 तक लागू रहेगी, या फिर जब तक राज्य सरकार नई सौर ऊर्जा नीति जारी नहीं करती। उद्योगों को मिलने वाले लाभ – सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अब राज्य की औद्योगिक नीति के तहत प्राथमिकता उद्योग का दर्जा मिलेगा। इसके तहत निवेशकों को कई तरह की रियायतें और प्रोत्साहन मिलेंगे, जैसे ब्याज अनुदान, पूंजी लागत पर अनुदान (सूक्ष्म उद्योगों को), जीएसटी प्रतिपूर्ति (लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों को), बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प शुल्क में छूट, परियोजना रिपोर्ट तैयार करने पर अनुदान, भूमि उपयोग बदलने की फीस में छूट, भूमि बैंक से जमीन लेने पर शुल्क में रियायत मिलेगी, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक और तृतीय लिंग समुदाय के उद्यमियों को जमीन के प्रीमियम में छूट, दिव्यांगों को रोजगार देने पर अनुदान, मेगा और अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सुश्री रीता शांडिल्य, जो वर्तमान में लोक सेवा आयोग की सदस्य एवं कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं, को लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ वरिष्ठ मीडिया कर्मी सम्मान निधि के तहत सेवानिवृत्त हो चुके मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली सम्मान राशि 10 हजार रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 20 हजार रूपए प्रतिमाह करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसकी घोषणा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई थी।

नए वाहनों पर बड़ी राहत: सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट से मोटरयान कर में 50% छूट

नए वाहनों पर "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट" से मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट दिये जाने का निर्णय मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश-2025 की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार कोमंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए बीएस-I और पूर्ववती तथा बीएस-॥ व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों वाले वाहनों को जारी "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट" के विरुद्ध पंजीकृत किये जाने वाले नए गैर परिवहन यानों तथा नए परिवहन वाहनों पर 50 प्रतिशत की मोटरयान कर में छूट प्रदान किये जाने की स्वीकृति शर्तों के अधीन प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार समस्त यान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 1 (बीएस-1) मानक और पूर्ववती व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों अनुसार विनिर्मित किये गए है तथा मध्यम मालयान/भारी मालयान/ मध्यम यात्री मोटरयान/भारी पात्री मोटरयान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 2 (बीएस-।।) मानदंडों के अनुसार विनिर्मित किये गए हैं, को इसके तहत छूट प्रदान की गयी हैं। प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 1563 नए वाहन पंजीकरण पर लगभग 17 करोड़ 5 लाख रूपये की छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में BS-1 एवं BS-II श्रेणी के लगभग 99 हजार मोटरयान ऑनरोड है। इनको मोटरयान कर में 50% छूट दिए जाने पर 100 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आएगा। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश को 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्राप्त होगी। भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत स्टेज (बीएस-1) उत्सर्जन मानदण्डों को सबसे पहले अप्रैल 2000 में लाया गया था। स्वीकृति अनुसार जिस व्यक्ति के नाम से तत्समय "Certificate of Deposih धारित होगा उसी व्यक्ति के नाम पर नया वाहन क्रय किये जाने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। वाहन स्वामी दवारा नया वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन और लाभ प्राप्त करने के लिए, "Certificate of Deposit एक आवश्यक और पर्याप्त दस्तावेज होगा, इस प्रमाण-पत्र की वैधता जारी होने की तिथि से 3 वर्ष होगी। "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉज़िट" इलेक्ट्रॉनिक रूप से विनिमय योग्य होगा। प्रत्येक नए मालिक को "Certificate of Deposit" का हस्तांतरण फॉर्म 2 डी के अनुसार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। "Certificate of Deposit" का एक बार उपयोग हो जाने पर, उस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय या डीलर दवारा उसे वाहन डेटाबेस में "रद्द" के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा, जिसके द्वारा उक्त प्रमाण-पत्र के धारक को लाभ प्रदान किया गया है। मोटरयान कर में छूट तभी प्रदान की जाएगी, जब नया वाहन मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत किसी आर.वी.एस.एफ द्वारा ही जारी "Cerificate of Deposit के विरुद्ध पंजीकृत किया जाये। यदि "Certificate of Deposit" मध्यप्रदेश राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में स्थित आर.वी.एस.एफ. दवारा जारी किया गया हो तो मोटरयान कर में छूट प्रदान नहीं की जाएगी। जिस श्रेणी का वाहन स्क्रैप किया गया है उसी श्रेणी का नया वाहन क्रय करने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। जीवनकाल कर जमा किये जाने की स्थिति में गैर-परिवहन/परिवहन यानों पर 50% मोटरयान कर में एकमुश्त छूट प्रदान की जाएगी। जिन वाहनों पर मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक आधार पर कर उद्ग्रहित किया जाता है, उन्हें मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक कर में 8 वर्ष तक 50% की छूट प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग द्वारा 8 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना के अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली मोटरयान कर की छूट उन वाहनों पर लागू नहीं होगी, जिन्हें इस अधिसूचना के अंतर्गत मोटर यान कर छूट प्रदान की गई है। मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की नगर पालिका परिषद नगर परिषदों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन आगामी आम-निर्वाचन में प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराये जाने के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा वर्ष 1999 से 2014 तक लगातार किया जाता रहा है। कोविड महामारी के आ जाने से वर्ष 2019 में निर्वाचन नहीं हो सके। इसके बाद वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया गया। वर्ष 2027 के नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाना है। उपरोक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की संबंधित धाराओं में संशोधन के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।