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धरती का कहर! सूडान में भूस्खलन से गांव तबाह, 1000 लोगों की जान गई

  खारर्तूम  पश्चिमी सूडान के Marra Mountains इलाके में भीषण भूस्खलन ने एक पूरे गांव को तबाह कर दिया. इस हादसे में कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है. यह जानकारी सोमवार को सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी ने एक बयान में दी है. सूडानी मूवमेंट ने का नेतृत्व अब्दुलवाहिद मोहम्मद नूर कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि कि यह हादसा 31 अगस्त को हुआ. क्षेत्र में लगातार कई दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिसके बाद यह भूस्खलन आया. मूवमेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि गांव अब पूरी तरह से जमीनदोज हो चुका है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे मृतकों के शवों को निकालने और प्रभावित परिवारों को सहायता देने के लिए तुरंत कदम उठाएं. संगठन ने यह भी कहा कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. वैश्विक समुदाय से मदद की अपील दारफुर क्षेत्र में स्थित इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले इस आंदोलन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से पीड़ितों के शवों को बरामद करने में मदद की अपील की है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। उत्तरी दारफुर राज्य में सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच चल रहे युद्ध से भागकर निवासियों ने मार्रा पर्वतीय क्षेत्र में शरण ली है। यहां भोजन और दवाइयां ना होने से लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सूडान में बीते दो साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी के संकट से जूझ रही है। इसके चलते लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। उत्तरी दारफुर राज्य की राजधानी अल-फशीर पर भी लगातार गोलाबारी हो रही है। सूडान में दो साल से जारी है गृहयुद्ध यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब सूडान पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सूडानी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच पिछले दो साल से जारी गृहयुद्ध ने देश की स्थिति और बिगाड़ दी है. गृहयुद्ध से बचने के लिए उत्तर दारफुर राज्य से बड़ी संख्या में लोग Marra Mountains में शरण लेने पहुंचे थे. हालांकि, यहां खाद्य सामग्री और दवाइयों की भारी कमी है. सूडान में आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में गृहयुद्ध ने सूडान की आबादी पर गहरा असर डाला है. आधे से ज्यादा लोग भुखमरी के संकट का सामना कर रहे हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. उत्तर दारफुर की राजधानी अल-फाशिर भी लगातार हमलों की चपेट में है. SLM/A ने कहा कि भूस्खलन की यह त्रासदी देश की मौजूदा मानवीय स्थिति को और भयावह बना रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.

सपा नेता गुलशन यादव पर बड़ी कार्रवाई, ₹1 लाख का इनाम घोषित

प्रतापगढ़ यूपी के प्रतापगढ़ के सपा नेता गुलशन यादव पर एडीजी ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. यह कार्रवाई एसपी डॉ. अनिल कुमार की सिफारिश पर हुई है. गुलशन यादव पर कुल 53 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. ये मुकदमे प्रतापगढ़ और प्रयागराज के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं. गुलशन पिछले एक साल से फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है.  करोड़ों की संपत्ति हुई कुर्क गुलशन यादव पर इनाम घोषित होने से पहले ही पुलिस उनकी कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है. पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक गुलशन यादव की 7 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. ये कार्रवाई उनकी आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने के तहत की गई है.  गौरतलब है कि कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद से ही गुलशन यादव लगातार सुर्खियों में रहे हैं. चुनाव में उन्हें राजा भैया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इस दौरान दोनों ओर से सियासी वार-पलटवार हुए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था.  53 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे सपा के कार्यवाहक ज़िलाध्यक्ष गुलशन यादव के खिलाफ 53 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. इन मुकदमों में हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट जैसे संगीन आरोप शामिल हैं. ये सभी मुकदमे प्रतापगढ़ और प्रयागराज के थानों में दर्ज हैं. एक साल से ज्यादा समय से फरार चल रहे गुलशन यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है. 

रायपुर: श्रमिकों की हेल्थ चेकअप में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, श्रम मंत्री के सख्त निर्देश

रायपुर श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के विभागीय कामकाज की समीक्षा की। बैठक में मंत्री देवांगन ने निजी उद्योगों द्वारा कराए जाने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य जांच की गहन समीक्षा की। जोखिम वाले (खतरनाक) 913 कारखानों में मात्र 682 ने ही श्रमिकों की चिकित्सा रिपोर्ट अपलोड की गई, शेष की रिपोर्ट अपलोड नहीं करने और जिनके द्वारा किये गए है उनके द्वारा बरती जा रही खानापूर्ति को लेकर मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश दिए। उन्होने कहा कि श्रमिकों के स्वास्थ जांच में किसी तरह की मनमानी न हो इसके लिए फील्ड पर विभागीय अधिकारी स्वास्थ्य जांच पर नियमित निगरानी रखे। उन्होंने जोखिम कारखानों का विभागीय अधिकारियों द्वारा निरिक्षण के बाद पाई गई कमियों के निराकरण के सम्बन्ध में 929 कारखानो में 222 में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने को लेकर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। बैठक में श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, संयुक्त सचिव फरिहा आलम, उप सचिव अंकिता गर्ग, श्रम विभाग अपर आयुक्त श्रीमती सविता मिश्रा, एस.एल.जांगड़े, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री देवांगन ने बैठक में संगठित, असंगठित और श्रम कल्याण मण्डल की सभी श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग, ईएसआईसी विभाग की समीक्षा की। आवास योजना की राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख प्रति हितग्राही करने आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए । मंत्री देवांगन ने श्रमिकों को मिलने वाली सभी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होने कई जिलों के कम परफॉरमेंस वाले श्रम अधिकारी को कड़े निर्देश दिए गए। साथ ही योजनाओं का अधिक से अधिक श्रमिकों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा है कि श्रम विभाग द्वारा संचालित विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ श्रमिकों को मिले इस दिशा में अधिकारी मुस्तैदी से कार्य करें। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों श्रमवीर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के निर्देश दिए। प्रदेश में लगभग 30 लाख 69 हजार पंजीकृत श्रमिक है। इसमें से 11 लाख श्रमिकों द्वारा 5 साल बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया है। केबिनेट मंत्री ने श्रमिकों का दोबारा पंजीयन कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। विभागीय अधिकारी श्रमिकों के बीच इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। उन्होंने विभाग के अधीन संचालित मंडलों द्वारा किये जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की। देवांगन ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना का विस्तार प्रदेश के सभी जिलों में करने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। श्रम मंत्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल – छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छ.ग. असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छ.ग. श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है।  श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से अटल उत्कृष्ट योजना , मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है।

महिला एवं बाल विकास सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने रायपुर जिले की आंगनबाड़ी सेवाओं की ली समीक्षा बैठक

रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने आज इंद्रावती भवन, रायपुर में विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा बैठक ली। बैठक में रायपुर जिले की आंगनबाड़ी सेवाओं, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति, टेक होम राशन वितरण की स्थिति तथा पोषण अभियान की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की। आंगनबाड़ी केन्द्रों का नियमित निरीक्षण आवश्यक सचिव श्रीमती आबिदी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि रायपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा क्षेत्रीय स्तर के अधिकारी नियमित रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करें और वास्तविक स्थिति का आंकलन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न होकर, सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और हितग्राहियों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने का माध्यम होना चाहिए। बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और महतारी वंदन योजना पर भी विशेष बल दिया गया। सचिव ने निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें। महतारी वंदन योजना में हितग्राहियों के घर-घर जाकर सर्वे करें। जिन मामलों में लाभार्थी पते पर उपलब्ध नहीं हैं, दस्तावेज अधूरे हैं या हितग्राही की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जानकारी तत्काल सत्यापित कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सीडीपीओ और डीपीओ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। टेक होम राशन वितरण की होगी सख्त निगरानी सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती आबिदी ने टेक होम राशन (THR) के वितरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों गर्भवती एवं धात्री माताओं और कुपोषित बच्चों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मात्रा में टेक होम राशन उपलब्ध कराना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। राशन वितरण और एंट्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर संबंधित पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। एनीमिया रोकथाम पर जोर सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बालिकाओं, शिशुवती महिलाओं और गर्भवती माताओं में एनीमिया की समस्या को रोकने के लिए पोषणयुक्त आहार पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी और सामुदायिक स्तर पर जागरूक करने एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से हरी सब्जियों, सहजन (मोरिंगा), गुड़, तिल, चना और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य वस्तुओं के सेवन के लिए प्रोत्साहित करें। पोषण ट्रैकर और राष्ट्रीय पोषण अभियान सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने पोषण ट्रैकर ऐप का सही उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित गृहभेट करें और समय पर ऑनलाइन एंट्री करें। उन्होंने बताया कि 01 सितंबर से राष्ट्रीय पोषण अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी हैं ताकि समुदाय में कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़े और पोषण स्तर में सुधार हो। कुपोषण रोकने के लिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश सचिव श्रीमती आबिदी ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में कुपोषण रोकने के लिए मिशन मोड में काम किया जाए ताकि कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं और सेवाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब बच्चों, माताओं और किशोरियों को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त स्वस्थ जीवन मिल सके। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पी. एल्मा, संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी, रायपुर जिले की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती शैल ठाकुर, सीडीपीओ तथा सुपरवाइजर उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

सैनिक स्कूल अंबिकापुर का 17वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न

रायपुर सैनिक स्कूल अम्बिकापुर का 17वां स्थापना दिवस समारोह  गरिमामय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह अवसर न केवल संस्थान की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गरिमा, सैन्य अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता का जीवंत प्रतीक भी बना। समारोह के मुख्य अतिथि जनजातीय कल्याण एवं कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने विद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल अनुशासन और शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की नींव भी है। उन्होंने कैडेट्स को देशभक्ति, समर्पण और नेतृत्व के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से सैनिक स्कूल के लिए तीन योजनाओं- विद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना, आधुनिक इनडोर एरेना का निर्माण तथा हॉकी में कैडेट्स की प्रतिभा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निखारने हेतु एस्ट्रोटर्फ मैदान के निर्माण का आश्वासन दिया है। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा सासंद चिंतामणि महाराज ने भी अपने संबोधन में विद्यालय की भूमिका को सराहा और इसके कैडेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सीतापुर  विधायक राम कुमार टोप्पो और अम्बिकापुर मेयर श्रीमती मंजूषा भगत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम कलेक्टर विलास भोसकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  समारोह में प्राचार्या कर्नल रीमा सोबती ने स्कूल के उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ पी श्रीनिवास एवं प्रशासनिक अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर जेम्स नायर की उपस्थिति में अपने स्वागत भाषण में विद्यालय की वर्ष भर की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने शैक्षणिक, सहशैक्षणिक, खेलकूद और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कैडेट्स की भागीदारी और सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूल अम्बिकापुर के पूर्व कैडेट खिलानंद साहू और अनिमेष कुजूर, सैनिक स्कूल और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक दिन पर, सैनिक स्कूल अंबिकापुर के 17वें स्थापना दिवस और छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती का संयुक्त उत्सव एक अद्वितीय सांस्कृतिक और भावनात्मक संगम बन गया। जहाँ राज्य की गौरवशाली यात्रा और सैनिक स्कूल की अनुशासित शैक्षणिक परंपरा एक साथ मंच पर आलोकित हुईं। यह अवसर न केवल अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने का था, बल्कि भावी पीढ़ियों को प्रेरणा देने वाला एक सशक्त संदेश भी था, कि शिक्षा, संस्कृति और सेवा भाव जब एकत्रित होते हैं, तो राष्ट्र निर्माण की नींव और भी मजबूत होती है। इस अवसर पर सैनिक स्कूल के कैडेटों ने एक शानदार रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने देशभक्ति गीत, छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, मूक अभिनय और सबसे बढ़कर महाभारत की नाट्य गीत प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। किड्स अम्बिकन प्राइमरी स्कूल के नन्हे मुन्ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत नृत्य इस कार्यक्रम का एक अन्य आकर्षण रहा। इस मौके पर विभिन्न सदनों को उनकी वार्षिक उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित किया गया। मानेकशा सदन को खेलों में सर्वश्रेष्ठ सदन का पुरस्कार प्राप्त हुआ, जबकि अरिहंत सदन को सर्वश्रेष्ठ कनिष्ठ सदन के रूप में सम्मानित किया गया। अर्जन सिंह सदन को शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ सदन घोषित किया गया। अर्जन सिंह सदन ने प्रतिष्ठित एनडीए ट्रॉफी भी अपने नाम की, जो राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में चयन हेतु सर्वाधिक कैडेट्स भेजने वाले सदन को प्रदान की जाती है। मुख्य अतिथि कृषि मंत्री नेताम के हाथों अर्जन सिंह सदन के  हाउस मास्टर शशिकांत ने सर्वश्रेष्ठ सदन की ट्रॉफी प्राप्त की। समारोह में विद्यालय के दो शिक्षकों सामाजिक विज्ञान के अध्यापक एवं एनसीसी ए. एन. ओ. शिवेश राय एवं सैनिक स्कूल के संस्थापक सदस्यों में से एक हिंदी के अध्यापक रवीन्द्र तिवारी को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही महेश सिन्हा एवं उदेश कुमार को भी उनके समर्पित कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

 बाढ़ प्रभावितों का हाल जानने उनके बीच पहुँचे मुख्यमंत्री साय: अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया हवाई और जमीनी सर्वेक्षण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा और बस्तर का हवाई सर्वेक्षण एवं जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुँचना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता तथा तत्परता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा के चूड़ीटिकरा पारा में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था निरंतर बनी रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके पुनर्वास के कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों में सभी जरूरी व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को राशन, बर्तन और कपड़े जैसे आवश्यक सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को आवश्यकता अनुसार मकान की मरम्मत अथवा नए मकान निर्माण के लिए सहायता राशि समय पर देने के निर्देश दिए। साय ने कलेक्टर एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को बाढ़ से हुई फसल क्षति, पशुधन हानि सहित अन्य नुकसानों का शीघ्र आंकलन कर प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कठिनाई अवश्य लाती हैं, परंतु प्रशासनिक तत्परता और जनसहयोग से इन कठिनाइयों का समय पर समाधान संभव है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष देखभाल की जाए तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य शिविर का जायजा लिया मुख्यमंत्री साय ने यहाँ लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल टीम से दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती और मरीजों को दी जा रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए यह भी पूछा कि क्या वे प्रशासन की मदद से संतुष्ट हैं। प्रभावितों ने जिला प्रशासन के त्वरित सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। साय ने बाढ़ प्रभावितों की स्वास्थ्य जांच, बीमारों के उपचार और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता के बारे में मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ प्रभावितों को शिविर में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ के बाद संभावित उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित मौसमी बीमारियों पर निरंतर निगरानी रखने और बचाव हेतु पेयजल स्रोतों का अनिवार्य रूप से क्लोरीनेशन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आमजन को पीने के शुद्ध पानी का उपयोग करने, स्वच्छता एवं साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को प्रभावित वार्डों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन रायपुर में CM विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत इंतजामों की समीक्षा बैठक की दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक : स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश रायपुर दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक:स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई। बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।

रायपुर : किसानों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल : इस माह मिलेगा 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है। प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रदेश के किसानों को इस माह बड़ी राहत मिली है। भारत सरकार ने सितंबर माह के लिए छत्तीसगढ़ को कुल 60,800 मीट्रिक टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें 58,100 मीट्रिक टन स्वदेशी और 2,700 मीट्रिक टन आयातित यूरिया शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में यूरिया की आपूर्ति लगभग 100 प्रतिशत स्वदेशी कंपनियों के माध्यम से होती है। इसलिए इस माह किसानों को यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। कंपनी प्रतिनिधियों से चर्चा के उपरांत यह जानकारी दी गई कि सितंबर माह के कुल स्वदेशी आबंटन का लगभग 30 से 35 प्रतिशत अर्थात् करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्रथम सप्ताह में उपलब्ध हो जाएगा। इसके अतिरिक्त आगामी 15 दिनों में लगभग 60 प्रतिशत यानी 35 हजार मीट्रिक टन तथा शेष मात्रा भी माह के अंत तक आपूर्ति कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने सभी कंपनियों को समयबद्ध रेकवार आपूर्ति कार्यक्रम प्रस्तुत करने और किसानों की मांग के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आगामी 10 से 12 दिनों में मांग के अनुरूप आपूर्ति कर ली जाएगी और प्रदेश में यूरिया की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की सुविधा के लिए भारत सरकार के इस सहयोग पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समय पर उपलब्ध यूरिया से खरीफ फसलें सुरक्षित रहेंगी और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी। इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर FIR, लेखपाल-नायब तहसीलदारों ने धरना दिया

लखनऊ  सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर ही FIR लाद दी गई । सरकारी कर्मचारियों पर हुई एफआईआर के विरोध में नगर निगम मुख्यालय पर लेखपालों और नायब तहसीलदारों ने धरना दिया । मांग रखी गई है कि एफआईआर निरस्त कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने चेतावनी भी दी कि जब तक एफआईआर वापस नहीं होगी, तब तक सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी नहीं करेंगे। पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी। धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें – डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए। – अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे। – एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो। – कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।

तत्पर प्रशासन, राहत का सहारा! बाढ़ प्रभावितों को मिला जरूरी राशन

रायपुर दंतेवाड़ा में हाल ही में आई बाढ़ से निपटने और प्रभावितों को आवश्यक मदद पहुँचाने में प्रशासन तत्पर रहा। अपने विदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कोरिया से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर बाढ़ प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। आज मुख्यमंत्री के दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा पहुँचने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन द्वारा समय पर बचाव एवं राहत पहुँचाने के लिए आभार व्यक्त किया। मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार की इस संवेदनशील पहल से सभी प्रभावित परिवार सुरक्षित और सकुशल हैं। राहत शिविर में रहने, भोजन और इलाज जैसी सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बाढ़ पीड़ित गुप्तेश्वरी कश्यप, शालिनी शर्मा, सविता पात्रे एवं लता सागर ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि राहत शिविर में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है और अब राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा भी दिया गया है। मकान ढहने पर सहायता राशि भी मिल चुकी है और अब घर बनने तक वे यहाँ राहत शिविर में रहेंगे। प्रभावितों ने बताया कि बाढ़ आने के साथ ही प्रशासन की अपील पर सभी लोग सुरक्षित ऊँचे स्थान पर चले गए थे। फिर बाढ़ का पानी उतरने के बाद उन्हें चूड़ी टिकरापारा के छात्रावास भवन में राहत शिविर में ठहराया गया। इसी तरह रीता कश्यप, द्रोपदी नाग, कुंदन गुप्ता, महेश नाग, बबीता नाग सहित अन्य प्रभावितों ने भी प्रशासन के राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री के समक्ष भावुक हुईं सोमड़ी सोढ़ी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बाढ़ प्रभावितों से मिलने के दौरान चूड़ी टिकरापारा निवासी सोमड़ी सोढ़ी के घर पहुँचे तो श्रीमती सोमड़ी सोढ़ी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पूरा घर डूब गया था। बाढ़ आने के एक दिन पहले वह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुई थीं और उनकी दोनों बेटियाँ भी साथ में थीं, इस कारण उनकी जान बच गई। अस्पताल से ठीक होकर शुक्रवार को वह घर लौटीं। सोमड़ी ने बताया कि बाढ़ के पानी में घर का पूरा सामान खराब हो गया है। इस बीच प्रशासन ने राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा उपलब्ध कराया है। साथ ही राहत शिविर में नाश्ता, भोजन और इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। इस आपदा की घड़ी में सरकार की सहायता के लिए श्रीमती सोमड़ी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट किया। इसी तरह दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा के बाढ़ प्रभावित सुरेश बघेल ने बताया कि बाढ़ आने के दिन पूरा परिवार घर में ही था। प्रशासन की सूचना पर वे सभी सुरक्षित स्थान पर चले गए और एक दिन बाद राहत शिविर पहुँचे। पिछले शुक्रवार को वे शिविर से घर लौटे हैं। सुरेश ने बताया कि प्रशासन द्वारा राशन, बर्तन, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा, कंबल-चादर और कपड़े जैसे सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।