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गुजरात दंगों पर तरलोचन सिंह बोले: नरेंद्र मोदी न होते तो पूरा राज्य जल उठता

नई दिल्ली सिख मामलों के जानकार और पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना की है। कहा कि यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्सा का नतीजा था और इसे नरेंद्र मोदी ने अच्छे से संभाला वरना पूरा गुजरात ही जल जाता। उन्होंने कहा कि ट्रेन में जिंदा जले लोगों के परिजन उनके शवों को अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने उनका अंतिम संस्कार वहीं करा दिया। तरलोचन सिंह ने कहा कि यदि ये शव उनके गांवों में पहुंचते तो सोचिए कि कितना गुस्सा लोगों का भड़कता और पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि 2002 का दंगा जनता के गुस्से का परिणाम था, उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे। उस दंगे को लेकर उन पर भी कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए जाते रहे हैं। 2002 के दंगों के दौरान तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि गुजरात का दंगा दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की तरह सरकार प्रायोजित नहीं था। उन्होंने कहा कि 2002 में मैं अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष था। तरलोचन सिंह ने कहा कि घटना होने के बाद सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में मैं था। मैंने उसके बारे में पूछताछ की। कोई उसके बारे में नहीं जानता था। मैं 2000 में अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना था और गुजरात दंगा 2002 में हुआ। मैंने गुजरात दंगे पर एक बुकलेट भी लिखी है। उन्होंने कहा कि यह बुकलेट छपी भी थी और नरेंद्र मोदी ने इसकी 500 कॉपियां बटवाई थीं। मैंने गुजरात दंगों से दिल्ली के सिख दंगों की तुलना की थी। मैंने कहा था कि दिल्ली का दंगा सरकार प्रायोजित था, लेकिन गुजरात का दंगा जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति थी। उस दंगे में सरकार या उसके किसी एक भी आदमी की भूमिका नहीं थी। मैंने अपनी जांच में यह बात कही थी। पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा कि तब गुजरात सीएम के तौर पर उनका रोल सराहनीय था। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने तय किया कि मारे गए सभी कारसेवकों का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए। यदि वे शव गांवों में पहुंचते तो कितना गुस्सा भड़कता। हम इसकी कल्पना ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तो पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और हालात को संभाल लिया। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम था कि दंगे अहमदाबाद और उसके आसपास के इलाके में ही हुए। पूरे गुजरात में स्थिति नहीं बिगड़ी।

CM सैनी का बयान: क्यों हटाए गए लाखों परिवार BPL लिस्ट से

हरियाणा  हरियाणा विधानसभा में बीपीएल कार्ड के मुद्दे पर भी काफी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान गरीब परिवारों को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर बीपीएल लिस्ट में नाम डाले और चुनाव के तुरंत बाद लाखों परिवारों को बाहर कर दिया। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सरकार से पूछा कि पहली जनवरी, 2024 से 31 जुलाई, 2025 के बीच कितने नए बीपीएल कार्ड बने और कितने काटे गए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बीपीएल कार्ड बंद करने का आधार क्या रखा गया। सरकार की ओर से सदन में जवाब देते हुए विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि इस अवधि में लाखों परिवार बाहर हुए हैं तो करीब उतने ही बीपीएल कैटेगरी में शामिल भी हुए हैं। पंवार ने सदन में आंकड़े रखते हुए कहा कि इस अवधि में 8,73,507 परिवार जोड़े गए। वहीं 9,68,506 परिवार बाहर किए गए। 31 मार्च, 2025 को बीपीएल परिवारों की संख्या 52 लाख 37 हजार 671 थी जो अब छंटनी के बाद घटकर 41 लाख 93 हजार 669 रह गई है। यह आंकड़ा 22 अगस्त तक का है। केहरवाला ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में फायदा लेने के लिए भाजपा ने बीपीएल परिवारों की संख्या बढ़ाई। नतीजों के बाद फिर से कम कर दिए।   विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गुपचुप सर्वे करवाकर गरीब परिवारों को योजनाओं से वंचित कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव के दौरान बीपीएल के नाम पर जनता को गुमराह किया। सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई, पोर्टल पर लोगों ने खुद अपनी आय घोषित की। उन्होंने कहा कि जो परिवार सालाना 1.80 लाख रुपये से ज्यादा कमाते थे, वे स्वेच्छा से बीपीएल लिस्ट से बाहर हो गए।

हाईवे पर फंसे मालवाहक वाहन, भाड़ा भी नहीं मिलेगा; बर्बाद हो रही लाखों की सब्जियां

हिमाचल  चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पिछले तीन दिनों से पंडोह से औट के बीच बंद है, जिससे कुल्लू-मनाली और लाहौल-स्पीति की ओर जाने वाले सैकड़ों मालवाहक वाहन फंस गए हैं। इन ट्रकों में फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान लदा है, जो अब खराब होने लगा है। सोमवार को कुछ समय के लिए सड़क खोली गई थी, लेकिन भारी बारिश के कारण यह फिर से बंद हो गई। दवाड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान हाईवे को सबसे ज्यादा नुकसान दवाड़ा के पास हुआ है, जहाँ ब्यास नदी का पानी हाईवे पर आ गया और सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आ रहे ये ट्रक 9 मील के पास खुले मैदानों में खड़े हैं। ट्रक चालक तीन दिनों से यहाँ फंसे हुए हैं, जिससे उनकी चिंताएँ बढ़ गई हैं। चालकों का दर्द: "अब तो भाड़ा भी नहीं मिलेगा" एक ट्रक चालक ने बताया कि तीन दिन से हाईवे पर फंसे होने के कारण उनके ट्रक में लदी हुई सारी सब्जियां और फल सड़ने लगे हैं। उनका कहना है कि इस नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है, क्योंकि उन्हें अब भाड़ा भी नहीं मिलेगा। कुछ अन्य चालकों ने कहा कि उन्होंने कभी भी हाईवे की ऐसी खराब हालत नहीं देखी। हालाँकि, प्रशासन की तरफ से फंसे हुए चालकों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है, लेकिन खराब हो रहे सामान की वजह से चालकों की परेशानी कम नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि इस सड़क को जल्द से जल्द खोला जाए और इसका रखरखाव बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) को सौंपा जाए। प्रशासन का बयान: युद्ध स्तर पर चल रहा काम मंडी जिला प्रशासन ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें सड़क बहाली के काम में जुटी हुई हैं। सड़क खोलने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। प्रशासन ने यह भी जानकारी दी है कि मंडी से कुल्लू जाने वाले वैकल्पिक मार्ग, कटौला रोड को भी जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिशें की जा रही हैं। यह स्थिति न केवल चालकों के लिए, बल्कि कुल्लू-मनाली में जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर डाल रही है। प्रशासन का कहना है कि वे इस समस्या को जल्द से जल्द हल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।  

माइकल क्लार्क स्किन कैंसर से जूझे, नाक से गांठ हटाई गई, पोस्ट में किया इमोशनल खुलासा

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार माइकल क्लार्क को स्किन कैंसर (त्वचा कैंसर) का पता चला है. 44 साल के क्लार्क ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी सेहत को लेकर जानकारी साझा की और लोगों से नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराने की अपील की. क्लार्क ने इंस्टाग्राम पर लिखा 'स्किन कैंसर वास्तविक है! खासकर ऑस्ट्रेलिया में. आज मेरी नाक से एक और कैंसर वाली गांठ निकाली गई. यह एक फ्रेंडली र‍िमाइंडर है क‍ि आप अपनी त्वचा की जांच कराते रहें. इलाज से बेहतर है बचाव, लेकिन मेरे मामले में नियमित जांच और शुरुआती पहचान ही सबसे अहम है. शुक्रगुजार हूं कि डॉ. बिश सोलिमान ने इसे समय रहते पकड़ लिया.' माइकल क्लार्क का स्किन कैंसर से सामना नया नहीं है. उन्हें पहली बार 2006 में स्किन कैंसर का पता चला था. इसके बाद 2019 में तीन नॉन-मेलेनोमा लीजन की भी पहचान हुई थी. उस समय भी क्लार्क ने लोगों से अपील की थी कि वे धूप से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें और अपनी त्वचा की नियमित जांच कराते रहें. क्लार्क का शानदार करियर अपनी शानदार बल्लेबाजी और शानदार स्किल लिए मशहूर क्लार्क ने 2003 से 2015 तक ऑस्ट्रेलिया के लिए 115 टेस्ट (8643 रन), 245 वनडे (7981 रन) और 34 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच (488 रन) खेले. उन्होंने टेस्ट और वनडे और टी20 तीनों फॉर्मेट में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की. क्लार्क ने 47 टेस्ट (24 जीत, 16 हार), 74 वनडे और 18 टी20 में ऑस्ट्रेलिया की अगुवाई की. उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 2015 का वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया. आक्रामक रणनीति और जुझारू स्वभाव ने उन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया. स्किन कैंसर क्यों होता है? स्किन कैंसर असामान्य त्वचा कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है. इसका मुख्य कारण सूर्य की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें या टैनिंग बेड का ज्यादा इस्तेमाल है. यह दुनिया में सबसे आम कैंसर है, जिसमें शुरुआती पहचान और इलाज बेहद जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया में स्किन कैंसर की स्थिति ऑस्ट्रेलिया दुनिया में स्किन कैंसर के सबसे ज्यादा मामलों वाला देश है. इसका कारण है – यहां का उच्च UV स्तर, भूमध्य रेखा के करीब होना और गोरे रंग की आबादी. आंकड़ों के मुताबिक, 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले हर 3 में से 2 ऑस्ट्रेलियाई किसी न किसी रूप में स्किन कैंसर से प्रभावित होते हैं.

ट्रंप के टैरिफ से पानीपत की टेक्सटाइल पर संकट, हरियाणा को भारी नुकसान

पानीपत ट्रंप के पचास प्रतिशत टैरिफ का असर  अंबाला की साइंस इंडस्ट्री और पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ने लगा है। पानीपत से अमेरिका में 12 हजार करोड़ का निर्यात होता है। क्रिसमिस सीजन पर 1,500 करोड़ का निर्यात होता है। ऐसे में अमेरिकी ग्राहक उद्यमियों से छूट मांग रहे हैं। लगभग 30 प्रतिशत आर्डर अटक गए हैं।  उद्यमी बोले- अब बड़ा नुकसान होना तय है, नई मंडी तलाशनी होगी। वहीं, अंबाला में करीब चार मिलियन डालर का साइंस उपरकणों का एक्सपोर्ट अमेरिका के कई हिस्सों में होता है, इससे कई ऑर्डर रद हो गए हैं। 1500 करोड़ के आर्डर तैयार, आनाकानी कर रहे पानीपत के उद्यमी लगभग 1500 करोड़ के क्रिसमिस के आर्डर तैयार करके बैठे हैं। अब अमेरिकन इनको लेने में आनाकानी कर रहे हैं। इस सीजन में अमेरिका में सबसे अधिक कुशन कवर, बाथमैट, तौलिये, सोफे कवर, परदे व दरियां जाती है। अब अमेरिका से आर्डर मिलने की संभावना न के बराबर है। अमेरिकन इन आर्डर को बांग्लादेश, पाकिस्तान व वियतनाम में शिफ्ट कर सकते हैं।

अब बिहार की खेतों में भी लहलहाएंगे अंजीर, किसान उठा रहे दोगुना लाभ

* प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए तक का अनुदान पा सकते हैं किसान * वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए है कर सकते हैं किसान आवेदन * योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन  * बिहार में अंजीर की खेती को बढ़ावा दे रही है राज्य सरकार   पटना बागवानी फसलें किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने में मददगार साबित होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने 2025-2026 और 2026-2027 के लिए अंजीर फल विकास योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अंजीर की खेती करने वाले किसानों को भारी अनुदान दिया जा रहा है। सरकार इस अनुदान से जहां एक ओर राज्य में अंजीर की खेती को बढ़ावा दे रही है वहीं दूसरी ओर किसानों की आय को बढ़ाने की भी कोशिश कर रही है।       अंजीर फल विकास योजना के तहत इसकी खेती पर वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए प्रति हेक्टेयर 1.25 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसकी खेती करने वाले किसानों को सरकार उनकी लागत का 40 प्रतिशत अर्थात 50 हजार रुपए का अनुदान देगी। 2025-26 में यह कुल अनुदान का  60 प्रतिशत यानि कि 30 हजार रुपए और 2026-27 में 40% अर्थात 20 हजार रुपए किसानों को मिलेगा। ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन  अंजीर फल विकास योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। किसान अनुदान से संबंधित विशेष जानकारी के लिए जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इन 32 जिलों के किसान उठा सकते हैं लाभ अंजीर फल विकास योजना के तहत बिहार के 32 जिलों में चलाई जा रही हैं। जिसमें अरवल, भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, जहानाबाद, लखीसराय, मधेपुरा, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, अररिया, औरंगाबाद, बेगुसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, जमुई, खगड़िया, किशनगंज, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, गया, रोहतास, पूर्णिया, समस्तीपुर, वैशाली और पश्चिम चम्पारण शामिल है।        कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह योजना न सिर्फ बिहार के किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने में मददगार साबित होगी बल्कि इससे बिहार में अंजीर फल के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आर्थिक लाभ के लिए खाद्यान्न फसलों पर किसानों की निर्भरता कम होगी।

राजस्व महाअभियान: अब सीएससी ऑपरेटरों के हाथों में होगा डिजिटल कामकाज

कल से सीएससी के ऑपरेटर संभालेंगे राजस्व महा–अभियान शिविरों का डिजिटल कामकाज राजस्व महाअभियान: अब सीएससी ऑपरेटरों के हाथों में होगा डिजिटल कामकाज राजस्व महाअभियान में नई पहल: सीएससी ऑपरेटर करेंगे डिजिटल कार्यप्रवाह ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर आवेदन संधारण तक की जिम्मेदारी, गुरुवार से तैनात रहेंगे शिविरों में पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान के तहत आयोजित होने वाले शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों का डिजिटल प्रबंधन कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के ऑपरेटर करेंगे। ये व्यवस्था गुरुवार से लागू हो जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद विभाग के स्तर पर संविदा कर्मियों की हड़ताल से निपटने के लिए पुख्ता व्यवस्था बनाकर अभियान को सफल बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी अंचलाधिकारी को पत्र जारी कर आदेश दिया है कि प्रत्येक शिविर में चार कम्प्यूटर ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे। ये ऑपरेटर शिविर में मिले सभी आवेदनों को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत करेंगे और फिर संबंधित राजस्व कर्मचारी को उपलब्ध कराएंगे। एक अंचल में अधिकतम 28 ऑपरेटरों की व्यवस्था की जा सकेगी। इसके निगरानी की व्यवस्था भी तय की गई है। अंचल स्तर पर एक सुपरवाइजर और जिला स्तर पर दो डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सीएससी की ओर से लगाए जाएंगे, जो शिविरों में तैनात ऑपरेटरों की उपस्थिति और कामकाज पर नजर रखेंगे। सचिव श्री सिंह ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत सीएससी के जिला प्रबंधक/समन्वयक से समन्वय स्थापित करें, ताकि शिविरों में पंजीकरण और प्रपत्र संधारण की प्रक्रिया निर्बाध रूप से पूरी हो सके। सभी अंचलाधिकारी को जिला प्रबंधक/समन्वयक तथा अंचल समन्वयक का नाम एवं नंबर उपलब्ध करा दिया गया है। सीएससी के कर्मी कल यानी गुरुवार से शिविरों में तैनात रहेंगे।

ट्रंप भारत संग कर रहे थे बड़ी डील की बात, अचानक क्यों बिगड़ गया माहौल?

वाशिंगटन  भारत पर अमेरिकी टैरिफ की मार जारी है। बुधवार से अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लागू हो गया। इसके साथ ही भारतीय निर्यात पर अब कुल 50 फीसदी शुल्क लगेगा। खास बात है कि भारत और ब्राजील दो ही ऐसे देश हैं, जिनपर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इतना टैरिफ लगाया है। सवाल है कि आखिर कैसे बड़े सहयोगी माने जाने वाले दो देश व्यापार के लिहाज से तकरार का सामना कर रहे हैं। ट्रंप क्या बताते हैं ज्यादा टैरिफ की वजह जुलाई में जब ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया तो इसकी वजह ब्रिक्स बताई। तब उन्होंने कहा था, 'हम अभी बातचीत कर रहे हैं और इसमें ब्रिक्स का मसला भी शामिल है। आप जानते हैं, ब्रिक्स अमेरिका विरोधी देशों का एक समूह है और भारत इसका सदस्य है। यह अमेरिकी मुद्रा पर हमला है और हम किसी को भी ऐसा नहीं करने देंगे।' ट्रंप ने घाटे की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'यह निर्णय आंशिक रूप से ‘ब्रिक्स’ की वजह से लिया गया है और इसमें कुछ हद तक घाटे की भूमिका है। हमें बहुत बड़ा घाटा हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं, प्रधानमंत्री मोदी मेरे मित्र हैं लेकिन वे हमारे साथ व्यापार के मामले में बहुत ज्यादा जुड़े नहीं हैं।' 7 महीनों में ऐसा क्या हो गया फरवरी- भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ सीमित व्यापार समझौते और साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक करने पर सहमत हुए। साथ ही उन्होंने अमेरिका से ऊर्जा खरीद में भी इजाफा का वादा किया था। मार्च- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन पहुंचते हैं और ट्रंप सरकार में मंत्री हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात करते हैं। साथ ही उन्होंने अधिकारी जैमिसन ग्रीर से भी चर्चा की। इसके बाद मार्च में ही अमेरिकी अधिकारी बातचीत के लिए दिल्ली पहुंचे थे। तब तक भारत ने कहा था कि अमेरिका के साथ अच्छी चर्चा चल रही है। खबर है कि एक रिपोर्ट में भारत की तरफ से लगाए जाने वाले भारी टैरिफ, डेटा कानून और पेटेंट के मुद्दे का जिक्र किया गया था। अप्रैल- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत पहुंचे और द्विपक्षीय वार्ता की रूपरेखा तैयार हुई। तब भारतीय अधिकारियों की तरफ से कहा गया था कि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले डील साइन हो जाएगी। मई- गोयल ने फिर वॉशिंगटन का दौरा किया और इस बार उनके साथ बड़े वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी थे। कहा जा रहा था कि भारत को अच्छे नतीजों की उम्मीद थी। जून- अमेरिका के वाणिज्य मंत्री लुटनिक 3 जून को भारत आते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका अच्छी प्रगति कर रहे हैं और जल्द ही डील पर अंतिम मुहर लग सकती है। खुद ट्रंप ने भी कहा था कि भारत के साथ बड़ी डील होने वाली है। रॉयटर्स से बातचीत में भारतीय अधिकारियों ने बताया था कि खासतौर से कृषि उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी के मामले में असहमति होने के चलते बातचीत रुक गई है। इसके बाद 20 जून को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि उन्होंने ट्रंप का अमेरिका आने का न्योता अस्वीकार कर दिया था। जुलाई- गोयल ने 4 जुलाई को कहा था कि भारत डेडलाइन के लिए डील नहीं करेगा और राष्ट्र के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इसके बाद 15वें दौर की बातचीत के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर अमेरिका पहुंचा। खास बात है कि उस दौरान ट्रंप लगातार दावा कर रहे थे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया। पीएम मोदी ने जुलाई में संसद में कहा कि 'विश्व के किसी भी नेता ने हमें ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा।' इसके बाद 31 जुलाई को ट्रंप ने पहली बार भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। अगस्त- 7 अगस्त को ही नए टैरिफ रेट लागू हुए थे कि कुछ समय बाद ट्रंप ने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की भी घोषणा कर दी। इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि भारत किसानों के हित से समझौता नहीं करेगा। खास बात है कि 25-29 अगस्त के बीच भारत आ रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा रद्द हो गई। इधर, पीएम मोदी ने चीन जाने की तैयारी कर ली थी। इन मुद्दों पर फंसा पेंच रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि कई स्तर पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। खासकर अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी और कृषि से जुड़े उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर बेचे जाएं। इसके लिए बीटीए के तहत भारत आयात शुल्क में रियायत दे, जिस पर भारत सहमत नहीं है। भारत उन उत्पादों को समझौते में शामिल नहीं करना चाहता है या फिर उन उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने को तैयार नहीं है, जिनसे घरेलू बाजार, उद्योग और किसान प्रभावित हों। क्या चाहता है भारत रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लेकर विशेष शुल्क रियायत देने की मांग कर रही है। इनमें वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे उत्पाद शामिल हैं। समझौते के तहत भारत अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वहीं, स्टील और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और ऑटो क्षेत्र (25 प्रतिशत) के शुल्क भी कमी चाहता है।  

लघु जल संसाधन विभाग की कुल 2,507 योजनाओं में 2,297 उतर चुकी हैं धरातल पर

जल-जीवन-हरियाली अभियान से बिहार के 2,41,782 हेक्टेयर खेतों तक पहुंचा सिंचाई का पानी लघु जल संसाधन विभाग की कुल 2,507 योजनाओं में 2,297 उतर चुकी हैं धरातल पर  राज्य में 2,70,697 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता पुनर्स्थापित करने का है लक्ष्य   साथ ही, कुल 993 लाख घनमीटर जल संचयन क्षमता का किया गया है  पुनर्स्थापन  पटना लघु जल संसाधन विभाग द्वारा "जल-जीवन-हरियाली अभियान" के तहत राज्यभर में 2,41,782 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता विकसित करने के साथ ही कुल 993 लाख घनमीटर जल संचयन क्षमता का पुनर्स्थापन कर लिया गया है। लघु जल संसाधन विभाग ने परंपरागत जल स्त्रोतों के पुनरूद्धार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अबतक कुल 2,507 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। जिसमें अबतक 2,297 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। इन सभी 2507 योजनाओं को पूर्ण कर राज्य में 2,70,697 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता को पुनर्स्थापन करने का लक्ष्य तय किया गया है।  यहां उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में व्यापक जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप वर्षापात में कमी एवं भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन के फलस्वरूप भूगर्भ जलस्तर में उत्तरोत्तर कमी आने के कारण बिहार के विभिन्न जिलों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन की इस विषम स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2019 में "जल-जीवन-हरियाली अभियान" की शुरूआत की है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत क्रियान्वित योजनाओं में गुणवत्ता युक्त कार्य सम्पन्न कराते हुए जहां एक ओर राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित किये गये हैं, वहीं दूसरी ओर जलस्त्रोतों में जल संचयन एवं सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जल स्त्रोतों में जल संग्रह के फलस्वरूप भूगर्भ जलस्तर में व्यापक सुधार हुआ है। आहर-पईनों एवं तालाबों व पोखरों के मेढ़ पर वृक्षारोपण किये जाने से हरित क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है।

खरीफ की फसल हो गई बर्बाद? चिंता न करें किसान, बस कर दें ये काम

खरीफ की फसल हो गई खराब! राज्य फसल सहायता योजना का उठाएं लाभ  खरीफ की फसल हो गई बर्बाद? चिंता न करें किसान, बस कर दें ये काम  खरीफ 2025: खरीफ की फसल हो गई खराब? जल्‍द कीजिए आवेदन   खरीफ किसानों को दी बड़ी राहत! 10000 रुपये तक सीधे देगी सरकार  नगर पंचायत से गांव तक, खरीफ किसानों को मिला सरकार का सुरक्षा कवच पटना  बिहार के किसानों को मौसम की मार से घबराने की जरूरत नहीं है। खरीफ की फसल बोने वाले किसानों की इस समस्‍या का बिहार सरकार ने समाधान कर दिया है। किसानों के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर दिया है। बिहार सरकार ने खरीफ 2025 के लिए किसानों को बड़ी राहत दी है।  सीधे मिलेगी आर्थिक मदद, सरकार ने मांगे आवेदन जिन किसानों की फसल मौसम की मार से खराब हो गई है। उनके लिए सरकार फसल सहायता योजना लेकर आई है। सहकारिता विभाग की ओर से बिहार ‘राज्य फसल सहायता योजना’ के तहत इसके लिए ऑनलाइन आवेदन  मांगे गए हैं। किसान 31 अक्टूबर, 2025 तक निशुल्क आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के तहत किसानों को फसल नुकसान होने पर सीधे मदद देगी। ये किया गया है प्रावधान जिन किसानों की खरीफ फसल 20 फीसद तक खराब हो गई है, सरकार ने ऐसे किसानों को 7500 रुपये प्रति हेक्‍टेयर क्षतिपूर्ति के रूप में देगी। 20 फीसद से अधिक के नुकसान पर सरकार ने 10000 रुपये प्रति हेक्‍टेयर देने का ऐलान किया है। यह सहायता अधिकतम 2 हेक्टेयर तक ही दी जाएगी। नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इस योजना के लिए पात्र होंगे। साथ ही, रैयत, गैर-रैयत और आंशिक रूप से रैयत-गैर रैयत किसान भी आवेदन कर सकेंगे। मंत्री ने क्या कहा? सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि यह योजना पूरी तरह निशुल्क है। इसमें किसानों से किसी प्रकार का कोई शुल्‍क या प्रीमियम नहीं लिया जाता। उनका कहा, प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की फसल को क्षति होने पर सरकार सीधे उनके खाते में वित्तीय सहारा देती है। योजना को और पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में लगातार काम चल रहा है। आवेदन कैसे करें? कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान सीधे आवेदन कर सकते हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े रैयत किसान केवल रैयत या आंशिक रैयत-गैर रैयत श्रेणी में आवेदन कर पाएंगे। आवेदन करते समय किसानों को फसल व बुआई क्षेत्र की जानकारी देनी होगी। सीधे बैंक खाते में जाएगी राशि बताते चलें कि कटाई के बाद प्रयोग आधारित उपज दर के आधार पर योग्य पंचायतों का चयन किया जाएगा। इसके बाद चुने गए किसानों को आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सत्यापन के बाद राशि सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेज दी जाएगी। झूठी या गलत जानकारी देने वाले किसानों के आवेदन रद्द कर दिए जाएंगे। इस योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी सहकारिता विभाग की वेबसाइट से भी ली जा सकती है।