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बिहार के 534 प्रखंडों में बन रहे आउटडोर स्टेडियम, आधे से ज्यादा पूरे

257 प्रखंडों में स्टेडियम पूरे, जल्‍द गांवों में ही मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग 534 में से 257 स्टेडियम पूरे! बाकी का काम तेजी से होगा पूरा, खेल विभाग सख्त निर्देश पटना,  गांव की मिट्टी सोना उगलने के लिए तैयार हो रही है। बिहार सरकार ने 534 प्रखंडों में आउटडोर स्टेडियम बनाने का लक्ष्य रखा था। अब अच्छी खबर ये है कि इनमें से 257 प्रखंडों में स्टेडियम पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। यानी बिहार में भी खेल का ऐसा माहौल तैयार होगा। जिससे बिहार की ताकत मैदान पर दिखेगी और खिलाड़ी देश का नाम रौशन करेंगे। खेल विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 46 प्रखंडों में स्‍टेडियम बनाने का काम तेजी से चल रहा है। जिनमें से ज्‍यादातर स्‍टेडियम का काम अब अपने आखिरी चरण पर है। जहां काम रुका है, तुरंत पूरा कराएं : बी राजेंद्र खेल विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केवल 29 प्रखंडों में आउटडोर स्‍टेडियम बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है लेकिन जल्‍द ही इस पर निर्माण कार्य शुरू होने वाले हैं। बता दें कि 48 प्रखंडों में 10 स्टेडियम अधूरे फिलहाल अधूरे हैं। खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र ने भवन निर्माण निगम और जिलाधिकारियों को साफ निर्देश दिया है। जहां काम रुका है, उसे तुरंत शुरू कराया जाए। खिलाड़ियों के लिए सुनहरा मौका बताते चलें कि इन स्टेडियमों में एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल ग्राउंड, कबड्डी और वॉलीबॉल कोर्ट होंगे। इसके साथ ही इन ग्राउंड में हॉकी खेलने की सुविधा भी होगी। खास बात यह है कि यहां प्रशिक्षकों की तैनाती भी की जाएगी। जिसके लिए बहाली प्रक्रिया जल्‍द शुरू की जाएगी। ताकि खिलाड़ियों को गांव और कस्बों में ही राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिल सके। बदलेगा बिहार का खेल परिदृश्य बिहार सरकार और नीतीश कुमार की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि बिहार की धरती से मेडल जीतने वाले खिलाड़ी निकलें। माना जा रहा है कि बिहार में खेल का माहौल बनने के बाद सीएम नीतीश कुमार का ये सपना पूरा होगा। खेल विभाग के अधिकारियों की माने तो सभी स्टेडियम बनने के बाद बिहार के छोटे-छोटे गांवों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलेंगे। खेल प्रेमियों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अब उन्हें राजधानी या बड़े शहर जाने की मजबूरी नहीं होगी।

अनीश दयाल सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी, अब बने अजित डोभाल की टीम का हिस्सा

नई दिल्ली सीआरपीएफ और आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक अनीश दयाल सिंह को डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है। इन्हें आंतरिक मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिंह 31 दिसंबर 2024 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (DG) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस नियुक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की टीम को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यूपी के प्रयागराज के रहने वाले हैं अनीश दयाल सिंह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 1964 में जन्मे अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इससे पहले वे इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। CRPF के DG के रूप में उनके कार्यकाल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान दिया। इसके अलावा अगस्त 2024 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। मणिपुर कैडर के आईपीएस अधिकारी अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मणिपुर कैडर के IPS अधिकारी के रूप में की थी। उन्होंने कई वर्षों तक केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) में विशेष निदेशक के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण ऑपरेशनों का नेतृत्व किया। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उनकी डिप्टी NSA के रूप में नियुक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारत की रणनीति को और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के नेतृत्व में डिप्टी NSA के रूप में अनीश दयाल सिंह आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आंतरिक खतरों जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सलाह देंगे। उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।  

बड़े पर्दे पर दिखेगा गोटमार मेले का अनोखा रंग, फिल्म की शूटिंग की तैयारी शुरू

पांढुर्णा मध्यप्रदेश के पांढुर्णा का प्रसिद्ध गोटमार मेला अब जल्द ही बड़े परदे पर दस्तक देने जा रहा है। पांढुर्णा की मिट्टी, जाम नदी के पत्थर और गोटमार की कहानी, जल्द ही बड़े परदे पर गूंजेगी। मुंबई की पल्स मीडिया और क्रेजी बैग्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने गोटमार पर फिल्म बनाने का ऐलान किया है। फिल्म निर्माण से पहले परंपरा और लोक गतिविधियों का गहन अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को मुंबई से एक विशेष दल पांढुर्णा पहुंचा। इस दल में निर्माता सौरभ गौड़, संगीत निर्देशक शैल आर. सैनी, कार्यकारी निर्माता दिव्यांश मिश्रा, अपार जैन, और प्रमुख सहयोगी जितेंद्र परमार, दीपक कुशवाह व उत्कर्ष चौधरी शामिल थे। टीम ने किया स्थल का दौरा पांढुर्णा पहुंचकर दल ने सबसे पहले गोटमार मेले की आराध्या मां चंडिका के दर्शन किए। इसके बाद टीम ने गोटमार स्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर इस अनूठे मेले की परंपराओं और उससे जुड़ी मान्यताओं को समझा। मीडिया से चर्चा में निर्माता सौरभ गौड़ ने बताया- “गोटमार मेला अपनी अलग ही पहचान रखता है। इस परंपरा में आस्था, लोक संस्कृति और जनमानस की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हमारी कोशिश है कि फिल्म के माध्यम से इस मेले की लोकप्रियता केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों तक पहुंचे। प्रेमी युगल की कहानी गोटमार मेले की शुरुआत को लेकर एक किवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि पांढुर्णा का एक युवक सावरगांव की युवती से प्रेम करता था। एक दिन युवक अपनी प्रेमिका को लेकर पांढुर्णा लौट रहा था। जैसे ही वे जाम नदी के बीच पहुंचे, सावरगांव के लोगों को खबर मिल गई। युवती को रोकने सावरगांव के लोग पत्थरों के साथ पहुंचे और युवक पर हमला किया। जवाब में पांढुर्णा के लोग भी पत्थर बरसाने लगे। पत्थरों की इस मारा-मारी में अंततः प्रेमी युगल की जान चली गई। तभी से गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई और यह आयोजन हर साल आस्था, परंपरा और उस प्रेम कहानी की याद में होता आ रहा है। जिस पर अब फ़िल्म बनने जा रही है। फिल्म से बढ़ेगा आकर्षण टीम का मानना है कि गोटमार पर आधारित फिल्म दर्शकों के लिए रोचक और भावनात्मक अनुभव होगी। साथ ही यह परंपरा और संस्कृति का दस्तावेज बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

तकनीक का करिश्मा, एआई ने लौटाई महिला की खोई हुई आवाज़

लंदन  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई की मदद से कई कमाल हो चुके हैं। लेकिन 55 साल की सारा एजेकील के साथ जो हुआ वह तो वास्तव में चमत्कार ही है। एआई की मदद से सारा एजेकील ने 25 साल पहले खोई अपनी आवाज वापस पा ली। सारा एजेकील को 25 साल पहले मोटर न्यूरॉन रोग के बारे में पता चला था। इस बीमारी में इंसान के शरीर की नसें और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे बोलने, निगलने और चलने-फिरने में मुश्किल होती है। बाद में धीरे-धीरे आवाज भी चली जाती है। सारा के साथ भी ऐसा ही हुआ था। अब परिवार के पास से आठ सेकंड की पुरानी वीडियो क्लिप का इस्तेमाल करके सारा की आवाज वापस लाई गई है। ऐसे किया गया काम सारा की जो पुरानी क्लिप मिली है उसमें वह अपनी बेटी से बात कर रही थीं। वैज्ञानिकों ने इस क्लिप से सारा की आवाज का आठ सेकंड का ऑडियो सैंपल लिया। इस सैंपल का यूज करके एआई को ट्रेनिंग दी गई। इसके जरिए बताया गया कि सारा के आवाज की टोन, पिच और बोलने का तरीका कैसा था। इस ट्रेनिंग के आधार पर एआई मॉडल ने एक सिंथेटिव वॉयस डेवलप की। यह आवाज सुनने में बिल्कुल सारा एजेकील की आवाज की तरह लगती है। अब अपनी आंखों से बोलती हैं सारा अब बोलने के लिए सारा एक खास टेक्नीक का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए वह अपनी आखों से कंप्यूटर पर टाइप करती हैं। इसके बाद एआई सारा के लिखे को अपनी आवाज में बोल देती है। इस तरह से सारा अपने फैमिली मेंबर्स के साथ अपनी आवाज में बात कर सकती हैं। यह दिखाता है कि एआई के जरिए किस तरह से मेडिकल फील्ड में शानदार चीजों को अंजाम दिया जा सकता है।  

विलेज ऑफ आर्मी: छत्तीसगढ़ का वो गांव, जहां सेना बनना है परंपरा

किरीत ये गांव है वीर जवानों का,अलबेलों का,मस्तानों का… इस गांव का यारों क्या कहना… जी हां!छत्तीसगढ़ में एक गांव है किरीत,जहां की माटी वीर सपूतों को जन्म देती है। यहां ऐसा कोई घर नहीं है जहां के युवा फौज में न हो। यहां के युवाओं में देशप्रेम की भावना कूटकूट कर भरी हुई है। इस गांव के 100 से अधिक युवा थल सेना में अलग-अलग पदों पर रहते हुए सीमा पर तैनात हैं। इसके अलावा पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ जैसे विंगों में भी गांव के युवक सेवा दे रहे हैं। देश सेवा का जुनून और फौज में भर्ती होने का यह सिलसिला चार दशक पहले शुरू हुआ था, जो अब तक चल रहा है। किरीत गांव के ग्राम पटेल लक्ष्मण प्रसाद चंद्रा बताते हैं कि 6 जून 1985 को सबसे पहले गांव के युवा ध्यानचंद्र चंद्रा की थल सेना में भर्ती हुई थी। ध्यानचंद्र को तब इस बात का जरा भी अंदाज नहीं था कि युवाओं में देशप्रेम का उनके द्वारा जगाया जज्बा इतना प्रभावी होगा कि किरीत का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में अदब से लिया जाएगा। प्रदेश का यह पहला गांव है… जहां इतनी बड़ी संख्या में युवा देश की सेवा कर रहे हैं। देशसेवा की दीवानगी यहां के युवाओं में कुछ ऐसी है कि दिन रात हाड़तोड़ मेहनत करते हैं। सुबह से लेकर शाम तक युवाओं को दौड़ लगाते देख सकते हैं। हर साल 6 से 7 युवाओं की भर्ती सेना में हो रही है। प्रवेशद्वार पर लिखा ‘सैनिक नगर’ गांव के रजनीश कुमार खुंटे ने बताया कि देश सेवा के प्रति गांव के लोगों में इस कदर का जुनून आपने कहीं नहीं देखा होगा। देश और प्रदेश में गांव को सैनिक नगर के नाम से जाना जाता है। गांव की मिट्टी के कण-कण में देश सेवा का जज्बा है, जिसके चलते सौ से ज्यादा सेना के जवान देश सेवा में लगे हुए हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर सैनिक नगर लिखा हुआ है। हमारे गांव के हर युवा का सपना है कि वह आर्मी में भर्ती हो और गांव के इस ख्याति को बनाए रखें। हमारे गांव किरीत को सैनिक का गांव भी कहते हैं। हमारे गांव ने पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी और जांजगीर-चांपा जिले की अलग पहचान बनाई है। आर्मी में हर साल 6 से 7 युवा जाते हैं ग्रामीण सीताराम साहू बताते हैं कि गांव की आबादी लगभग 4 हजार के आसपास है। गांव के बच्चों में बचपन से ही देश प्रेम और देशभक्ति का जुनून देखने को मिलता है। देश सेवा करने का सपना… सपने को साकार करने का जुनून युवाओं में आपको दिखेगा। गांव के ग्राउंड में ही युवा अपने सपनों को पंख लगाने मेहनत करते दिख जाएंगे। आर्मी की नौकरी से रिटायर होने वाले युवा अब दूसरी जगहों पर नौकरी कर रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर जैसे पद पर सेवा दे रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 साल से हर साल 6 से 7 सैनिक गांव से चयनित होते हैं। सेना के अलावा पुलिस, सीआरपीएफ में भी गांव के युवा नौकरी कर रहे हैं।  

नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़, पंजाब में बरामद हुए लाखों रुपये

दीनानगर  पुलिस को आज एक बड़ी सफलता मिली है। सूचना के आधार पर पुलिस ने दो व्यक्तियों के पास से लाखों रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएसपी दिनानगर, रजिंदर सिंह मिन्हास ने बताया कि पुलिस को सुनील कुमार, निवासी तालाबपुर पंडोरी, ने शिकायत दी कि उनके इलाके में ठेकेदार कमलदीप सिंह, पुत्र मोहन सिंह, निवासी संतनगर, थाना सिटी गुरदासपुर, नकली भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल कर रहा है। इस पर कार्रवाई करते हुए थाना दौरागला पुलिस टीम ने आरोपी कमलदीप सिंह को पकड़कर उसके पास से 7 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 3,500 रुपये) बरामद किए। कड़ी पूछताछ के बाद उसके पीछे के लिंक की जांच की गई। इसके बाद आरोपी निर्मल सिंह, पुत्र दियाल सिंह, निवासी बसंतकोट, थाना कोटली सूरत मल्लियां, को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 400 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 2 लाख रुपये) बरामद हुए।   डीएसपी ने बताया कि दोनों का पुलिस रिमांड लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। इनके खिलाफ थाना दौरागला में अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

‘दीवार’ पुजारा को साथी क्रिकेटरों का सम्मान, संन्यास पर मिली ढेरों बधाइयाँ

नई दिल्ली  भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर और पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने रविवार को चेतेश्वर पुजारा को भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा पर बधाई दी। पुजारा टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए आठवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उन्होंने अपने करियर में 103 टेस्ट मैचों में 43.60 की औसत से 7195 रन बनाए जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं, और उनका सर्वोच्च स्कोर 206* रहा। गंभीर ने अपने एक्स पर लिखा, 'तूफान के दौरान वह डटे रहे, उम्मीदें खत्म होने पर उन्होंने संघर्ष किया। बधाई हो, पुजारी।' चेतेश्वर पुजारा ने 9 अक्टूबर 2010 को बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। उन्हें 2018/19 और 2020/21 में ऑस्ट्रेलिया में भारत की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। उन्होंने अपने मजबूत डिफेंस और तकनीक से ऑस्ट्रेलिया को परेशान किया था। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने पुजारा के इस शानदार टेस्ट करियर की सराहना करते हुए कहा, 'शानदार टेस्ट करियर के लिए बधाई चेतेश्वर पुजारा आपका धैर्य, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत प्रेरणादायक थी और आपने जो हासिल किया है उस पर आपको बहुत गर्व हो सकता है। एक यादगार दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं।'  दिग्गज भारतीय बल्लेबाज युवराज सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, 'कोई ऐसा व्यक्ति जिसने हमेशा देश के लिए अपना मन, शरीर और आत्मा लगा दी! एक शानदार करियर के लिए बहुत-बहुत बधाई, पुजी! आपसे दूसरी तरफ मिलते हैं!' 2018/18 बीजीटी में भारतीय लाल गेंद के दिग्गज ने चार मैचों में 74.42 की औसत, 3 शतक और एक अर्धशतक के साथ 521 रन बनाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 193 रन रहा। 2020-21 सीरीज में उन्होंने चार मैचों में 33.87 की औसत से 271 रन बनाए जिसमें तीन अर्धशतक और 77 का सर्वश्रेष्ठ स्कोर शामिल था। गाबा में खेले गए अंतिम टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के कई प्रहार झेले, जिससे यह जीत और भी यादगार बन गई।  अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'एक शानदार करियर चेतेश्वर पुजारा आपने जो हासिल किया, उस पर आपको बहुत गर्व होना चाहिए और आपको दूसरी पारी की हार्दिक शुभकामनाएं।'  पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने पुजारा के शानदार करियर के लिए उन्हें नमन किया। जाफर ने एक पोस्ट में लिखा, 'अपने नाम के पहले, अपनी तरह के आखिरी चेतेश्वर पुजारा, शानदार करियर के लिए नमन। भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए आपने जो हासिल किया, उस पर आपको बहुत गर्व होना चाहिए। बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं।' पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी पुजारा को बधाई दी। रैना ने एक पोस्ट में लिखा, 'शानदार करियर के लिए बधाई भाई चेतेश्वर पुजारा आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं।'  अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा चेतेश्वर पुजारा घरेलू क्रिकेट में एक दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने 278 प्रथम श्रेणी मैचों में 51.82 की औसत से 21301 रन बनाए हैं। लाल गेंद के इस अनुभवी खिलाड़ी ने अपने प्रथम श्रेणी करियर में 66 शतक और 81 अर्धशतक लगाए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 352 रन रहा है।   

चिराग को शादी की सलाह, तेजस्वी यादव बोले – हम तो जनता के हनुमान हैं

अररिया  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। कांग्रेस समेत महागठबँधन में शामिल कई दल और उनके नेता इस वक्त राज्य में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। वोटर अधिकार यात्रा के तहत राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, दीपांकर भट्टाचार्य और मुकेश सहनी समेत महागठबंधन के कई दिग्गज नेता रविवार को अररिया में थे। यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इन नेताओं ने बारी-बारी से चुनाव आय़ोग को घेरा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में एलजेपी (आर) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को शादी कर लेने की सलाह दे दी। इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि चिराग पासवान एक व्यक्ति विशेष के हनुमान हैंं और हम जनता के हनुमान हैं। दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से पूछा कि चिराग पासवान बोल रहे हैं कि तेजस्वी यादव अब कांग्रेस के पिछलग्गू बनकर घूम रहे हैं? इसपर राहुल गांधी ने माइक तेजस्वी यादव को थमाया। तेजस्वी यादव ने माइक पकड़ने के बाद कहा, 'भाई वो तो किनके हनुमान हैं आपको तो पता ही है, उसपर हम ज्यादा नहीं बोलेंगे। हमलोग तो जनता के हनुमान हैं। वो व्यक्ति विशेष के हनुमान हो सकते हैं। तेजस्वी यादव ने आगे कहा, 'हम चाहेंगे कि मुद्दे पर बात हो। चिराग पासवान आज का मुद्दा नहीं है और ना ही जनता उनको पूछती है। आज लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। संविधान को मिटाया जा रहा है। इसके बाद तेजस्वी यादव ने मुस्कुराते हुए कहा कि तो अगर आप चिराग पासवान पर सवाल पूछ रहे हैं तो हम उसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन उनको सलाह जरूर देंगे कि हमारे बड़े भाई हैं जल्द से जल्द शादी कर लें। इसके बाद राहुल गांधी को जैसे ही तेजस्वी ने माइक थमाया तो राहुल गांधी ने खिलखिलाते हुए कहा कि मेरे लिए भी एप्लिकेबल है। इसके बाद प्रेस वार्ता में मौजूद अन्य नेता भी हंसने लगे  

पोरा तिहार उत्सव: उपमुख्यमंत्री, मंत्री-विधायक और राज्यपाल रमेन डेका संग झूमे लोग

रायपुर छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार ‘‘पोरा तिहार’’ आज कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निवास में धूमधाम और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया. पोरा तिहार के इस पावन पर्व पर राज्यपाल रमेन डेका शामिल हुए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ वासियों को पोरा तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी. उन्होंने इस मौके पर कहा कि पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और कृषि जीवन की महत्वपूर्ण परंपरा है. कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि मंत्री नेताम अपनी धर्मपत्नी मती पुष्पा नेताम के साथ भगवान शिव-पार्वती और भगवान स्वरूप नांदिया-बैला का पूजा-आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की. उन्होंने उपस्थित जनसमूह को पोरा तिहार की शुभकामनाएं दी. कृषि मंत्री नेताम ने कहा आज पोरा तिहार है, जो छत्तीसगढ़ की परम्परा में किसानों और पशु प्रेम को समर्पित है. इसके साथ ही तीन दिन बाद तीजा है, जो सुहागिनों के लिए सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर के लिए तीजा का कठिन व्रत किया था. हमारी सरकार हर माह के पहले हफ्ते में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत एक-एक हजार रूपए उनके खातों में अंतरण कर महिलाओं का सम्मान बढ़ा रही है. कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के रास्ते पर चलते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार छत्तीसगढ़ के चंहुमुखी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है. इस अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मंत्री गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, विधायक पुरंदर मिश्रा, रोहित साहू, मोतीलाल साहू, इन्द्र कुमार साहू, सहित मंडल-निगम आयोग के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने में कहा कि आज हमारे साथी मंत्री रामविचार भैया ने त्यौता देकर हमें पोरा मनाने अपने घर पर बुलाया है. पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा और सामाजिक सद्भाव का पर्व हैं. हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य कर रही है. महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने भी पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश में हमारी सरकार द्वारा पारंपरिक पर्वों को सम्मान एवं नए उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. कृषि मंत्री निवास को परंपरागत ग्रामीण परिवेश में विशेष रूप से सजाया गया था. पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बैला और मिट्टी के खिलौने व बर्तन से सुसज्जित वातावरण ने ग्रामीण अंचल की झलक प्रस्तुत की. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिससे पोरा तिहार का उत्सव और अधिक जीवंत हो गया. वहीं इस मौके पर आगंतुकों ने छत्तीसगढ़ के ठेठरी, खुरमी, अइरसा, गुलगुला भजिया, चीला, फरा सहित विविध प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुप्त उठाया.

प्लास्टिक मुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: इंदौर को मिली बायोप्लास्टिक तकनीक की सौगात

इंदौर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन को साकार करते हुए, बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) ने देश का पहला बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड-पीएलए) प्लांट स्थापित किया है। यह एक ऐसा कदम है जो सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ा हथियार साबित होगा। मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में ‘बायो युग ऑन द व्हील्स’ नामक एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बलरामपुर चीनी मिल्स के बनाए गए बायोप्लास्टिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष, सचिन बंसल ने बताया कि गन्ने से प्राप्त होने वाली चीनी को पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) में बदला जाता है, जिससे कई तरह के उत्पाद बनाए जा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये उत्पाद पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल हैं। इन्हें इस्तेमाल के बाद मिट्टी में दबाकर आसानी से डिस्पोज किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। क्यों है यह प्लांट इतना महत्वपूर्ण ? अभी तक पीएलए बनाने के लिए कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता था, जो काफी महंगा पड़ता था। भारत में इसके उत्पादन से न सिर्फ कीमतें कम होंगी, बल्कि आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।बलरामपुर चीनी मिल्स की प्रतिनिधि, श्वेता सूर्यवंशी ने बताया कि यह नया उद्यम भारत के पहले औद्योगिक-स्तरीय बायो-पॉलीमर प्लांट की स्थापना में सहायक होगा, जो भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। इस बायोप्लास्टिक से कटलरी, कप, बोतलें, स्ट्रॉ, खिलौने, फ्लेक्स बैनर और यहां तक कि पीपीई किट भी बनाई जा सकती हैं। यह पारंपरिक प्लास्टिक का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है। इस कार्यक्रम में उद्योगपतियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी हिस्सा लिया, जिससे इस पहल की गंभीरता और भविष्य की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह प्लांट भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो न सिर्फ प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि एक आत्मनिर्भर और हरित भविष्य की नींव भी रखेगा।