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दमोह के 3 गांवों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का फैसला, तोड़ा तो जेब ढीली

दमोह   शराब को सामाजिक बुराई का दर्जा दिया गया है. दमोह में 3 गांव के लोगों ने मिलकर इस बुराई को दूर करने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में पूरी तरह से शराबबंदी का फैसला लिया है. इस फैसले को कड़ाई से लागू कराने के लिए इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से कई घर-परिवार बर्बाद हो गए. गांव में आए दिन शराब पीकर मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. दमोह के 3 गांवों में शराबबंदी का निर्णय विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा दमोह में शराबबंदी के लिए मुहिम चलाई जा रही है. जिसमें भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग ला रहे हैं. संगठन के प्रयासों से 2 दिन के भीतर जिले के 3 ग्राम पंचायत आनू, हलगज और मुराड़ी में सर्वसम्मति से शराबबंदी का निर्णय लिया गया. इस मौके पर जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय थाने की पुलिस भी मौजूद थी. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय पंचायत में फैसला लिया गया कि तीनों गांवों में शराब, गांजा सहित सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. जो भी व्यक्ति इस फैसले का उल्लंघन करेगा, जैसे शराब पीकर गांव में आएगा, गांव में शराब बेचेगा या किसी भी प्रकार का नशा करने या दूसरों को करने के लिए प्रेरित करेगा, उस पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. ग्रामीणों ने नारा लगाकर इस बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया फैसला ग्राम पंचायत मुड़ारी के सरपंच प्रतिनिधि मुकेश सिंह ने बताया "हमारे गांव में जो गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थ बिक रहे हैं उन्हें बंद करना है. इससे गांव में बहुत परेशानियां हो रही हैं. शराब पीकर लोग गाली गलौज भी करते हैं. जिसके बाद सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया और प्रस्ताव पारित किया है कि गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए." आनू की ग्राम सभा में पहुंचे बांदकपुर चौकी प्रभारी एएसआई राजेंद्र मिश्रा में कहा कि "यह एक अच्छी पहल है. इस सामाजिक बुराई को दूर होना चाहिए. ग्रामीण और उनकी मुहिम में पुलिस का पूरा सहयोग है. पहले भी पुलिस ने सहयोग किया है अभी भी करेगी." शराब पीकर गाली गलौज करने पर 5 हजार का जुर्माना भगवती मानव कल्याण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश लोधी ने कहा कि "शराब ने घर परिवार में कोहराम मचा रखा है. जिस परिवार में बाप-बेटे शराब पीते हैं, वहां मारपीट होती है लड़ाई-झगड़े होते हैं. वहां का वातावरण खराब हो गया है. इससे जब लोग परेशान हो गए तो इसके लिए सभी जाति धर्म के लोगों ने निर्णय लिया कि शराब बंदी की जाए. इसके लिए शराब पीकर गाली-गलौज करने वालों पर 5000 और 11000 रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है." मध्य प्रदेश के कई गांवों में लागू है शराबबंदी इससे पहले भी बीते महीने दमोह की हटा तहसील के बंधा गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का निर्णय लिया था. इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के कई गांव में इसी तरह शराबबंदी का फैसला लिया गया है. बुरहानपुर के चौंड़ी और जम्बूपानी गांव में शराब बैन है. जबलपुर की तिन्हेटा तहसील के 6 गांवों में शराबबंदी लागू है. निवाड़ी के किशोरपुरा गांव में शराब बैन है. इसके अलावा भी प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जहां ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

RSS की विस्तार रणनीति में बदलाव, भैयाजी जोशी बोले- गांव से जोड़ेंगे बड़ी कंपनियों को

इंदौर  इंदौर में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के एक दिवसीय प्रवास के बाद अब संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी मध्यप्रदेश पहुंचे हैं। वे इंदौर में संघ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान प्रदेश के गांव-गांव में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर भैयाजी जोशी ने इंदौर से पहले बैतूल में बैठक की थी। इस बैठक में पंच परिवर्तन, शाखाओं का विस्तार और सेवा कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, जोशी शाम तक इंदौर पहुंचेंगे और यहां संपर्क विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। संघ 2025-26 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से की गई है। शताब्दी वर्ष में विशेष रूप से युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शाखाओं की संख्या बढ़ाने के लिए समय-निर्धारण लचीला रखा जाएगा ताकि सुबह से शाम तक किसी भी समय शाखा लगाई जा सके। इसके साथ ही गोष्ठियों और पंच परिवर्तन कार्यक्रमों का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। प्रचारकों को गांवों में जिम्मेदारी बैतूल बैठक में भैयाजी जोशी ने प्रचारकों को निर्देश दिए कि वे गांवों में शाखाओं की संख्या बढ़ाएं और कॉलेज, आईटी के छात्रों व प्रोफेशनल्स को संघ से जोड़ें। इसके अलावा शहरों में पथ संचलन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संवाद और युवाओं को नगर, मंडल व बस्तियों में सक्रिय करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) से संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होंगे। पंच परिवर्तन पर फोकस मालवा प्रांत में वर्तमान में 3046 स्थानों पर 4636 शाखाएं संचालित हो रही हैं। बैतूल सम्मेलन में संघ के सामाजिक और सेवा कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिनमें शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता शामिल हैं। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि पंच परिवर्तन के तहत स्वदेशी, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक नए लोगों को जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। रिटायर अधिकारियों-कर्मचारियों को भी संघ के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए संपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है। 

इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग का कहर: बर्बाद हुए सैकड़ों परिवार, टूटी कई जिंदगियां

 इंदौर  ऑनलाइन गेमिंग से अपना सबकुछ गंवा रही युवा पीढ़ी और इसकी लत का शिकार हुए अपने नौनिहालों को गंवा रहे परिवारों को अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जागी है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने की राह भी साफ हो गई है। देशभर में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवाने के अलावा सैकड़ों युवाओं ने आत्महत्या भी कर ली। 2020 में इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार तथा गेमिंग कंपनियों के अलावा इसका प्रचार करने वाले खिलाड़ियों और फिल्म सितारों को भी नोटिस दिए गए थे। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। 13 वर्षीय छात्र आकलन जैन ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपनी मां का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर लगभग 2,800 रुपये गंवा दिए। डर और तनाव के कारण एक अगस्त को उसने आत्महत्या कर ली। उसके स्वजन आज भी यह दर्द नहीं भूल पाए हैं। स्वजन ने कहा कि हमारा बेटा होनहार था। अगर पहले ही सरकार गेमिंग पर सख्ती करती तो शायद वह आज जीवित होता। नशे की तरह है गेमिंग की लत गेमिंग की लत नशे जैसी होती है। मरीज जब तक गेम नहीं खेलता, बेचैन रहता है। कई मामलों में लोग सारी कमाई एक हफ्ते में ऑनलाइन गेम में उड़ा देते हैं। इलाज के दौरान उन्हें दवा के साथ-साथ काउंसलिंग और बैंक खाते में सीमित पैसे रखने जैसी सलाह दी जाती है। माता-पिता को बच्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। – डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक केस 1 : मार्च में इंदौर के 16 वर्षीय छात्र प्रिंस का मामला भी पूरे शहर को झकझोर गया था। वह ऑनलाइन गेम्स का आदी था और जब उसका फोन चोरी हो गया तो उसे तुरंत नया फोन नहीं मिल सका। गुस्से और बेचैनी में उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। केस 2 : 25 वर्षीय जितेंद्र वास्कले इंदौर में पढ़ाई के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करता था। ऑनलाइन गेमिंग में फंसकर उसने लोन ले लिया, लेकिन लगातार हारने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। दबाव और निराशा में उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने साफ लिखा कि वह कर्ज और गेमिंग लत से टूट चुका है। केस 3 : 24 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक जो हर माह 50 हजार रुपये कमाता था, यह पैसा वह एक ही हफ्ते में गेम में उड़ा देता था। इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। उसे ऑनलाइन गेम की लत बार-बार तलब होती थी। जब तक गेम नहीं खेलता था, बेचैन रहता था। उसके लिए गेम नशे की तरह एडिक्शन रहता है। डॉक्टरों ने खाते में कम रुपये रखवाए। इसके साथ ही दवाइयां भी दी। करीब छह माह इलाज के बाद वह अब स्वस्थ है। ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से हुई ठगी मंदसौर में ऑनलाइन गेम की लत से कई लोगों ने रुपये गंवाए हैं। लोक-लाज के भय से अधिकांश पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे। 15 दिसंबर 2024 को इंदौर क्राइम ब्रांच ने मंदसौर के आठ सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से फ्राड करते थे। यह ठग लोगों से लिए रुपये अलग-अलग खातों में डालकर उन्हें आइडी और पासवर्ड देते थे। उसी आइडी से लोग वेबसाइट पर सट्टा खेलते थे। आरोपितों के पास से करोड़ों का हिसाब-किताब मिला था। पुलिस ने मंदसौर के परीक्षित लोहार, रोशन लालवानी, विजय विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, राजेश कोतक, प्रफुल्ल सोनी, महेंद्रसिंह के साथ ही बिहार के रुचित को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से फर्जी बैंक खाते नंबर भी मिले थे। मोबाइल में दुबई मनी एक्सचेंज करने वाले लोगों के नंबर भी मिले थे।

रिपोर्ट के लिए CAG परेशान, मध्य प्रदेश के 34 विभागों से नहीं मिला खर्च का डाटा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के कई विभागों की हालत अच्छी नहीं है। मंत्रियों की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही का नतीजा यह हो रहा है कि 34 विभाग अब तक बजट के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे। यह जानकारी ऑडिटर जनरल कार्यालय द्वारा मांगी गई है, लेकिन उसे जानकारी नहीं मिल पाई। दरअसल, महालेखाकार कार्यालय कैग ने 31 मार्च 2025 की स्थिति तक विभागों से जानकारी मांगी है। यह जानकारी मांगी गई है कि विभाग के अधीन बजट नियंत्रण अधिकारियों ने बैंकों में कितनी राशि जमा कर रखी थी? इस अवधि में कौन-कौन से बड़े कार्य और परियोजनाएं अधूरी रहीं? कई बार पत्र लिख चुका CAG महालेखाकार कार्यालय ने इसको लेकर इस वित्त वर्ष में सबसे पहले 29 अप्रैल को, फिर 20 मई और इसके बाद 24 जुलाई को पत्र लिखा था। महालेखाकार कार्यालय इस बार सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिख चुका है। इसके बाद गुरुवार तक सभी विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश एक बार फिर जारी किए गए थे। इसके बाद भी जवाब नहीं मिला तो एक अगस्त को वित्त विभाग को अलग और मुख्य सचिव को अलग पत्र भेजकर जानकारी दिलाने को कहा है। वित्त विभाग ने बार-बार विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि बजट नियंत्रण अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा असर सरकार की वित्तीय रिपोर्टिंग पर पड़ रहा है। इससे राज्य के वित्तीय लेनदेन का ब्यौरा तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं। यह विभाग बने लापरवाह राजस्व विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, एमएसएमई, जनजातीय कार्य विभाग, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, अनुसूचित जाति कल्याण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, महिला एवं बाल विकास, वाणिज्यिक कर, संसदीय कार्य, विमानन, लोक सेवा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त विभाग, गृह विभाग, स्कूल शिक्षा, विधि एवं विधायी कार्य, जनसंपर्क विभाग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संस्कृति विभाग, उच्च शिक्षा, सामान्य प्रशासन, वन विभाग, खनिज साधन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग और लोक निर्माण विभाग। वित्त विभाग ने मांगी थी यह जानकारी तय बजट के अलावा अन्य खर्च, अनपेड बिलों से संबंधित देनदारियां, आउट साइड फंड ऑपरेशन की स्थिति, बैंकों में जमा राशि, पंचायत राज संस्थाओं को दी जाने वाली बकाया ग्रांट, अपूर्ण बड़े कार्यों की सूची, नए ऋण और अग्रिम (एडवांस) की जानकारी, ऋण की अदायगी और बकाया स्थिति, ऋण और अग्रिम का समेकित विवरण (समरी), निगमों, सरकारी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को दी गई सहायता, पीपीपी मोड और जनभागीदारी के तहत हुए निवेश की जानकारी, नई योजनाओं पर लिए गए नीतिगत निर्णयों का संभावित कैश फ्लो, संस्थाओं को दी गई ग्रांट की पूरी जानकारी, सिंचाई परियोजनाओं के वित्तीय परिणाम, अब तक नहीं दी गई यह महत्वपूर्ण जानकारी, बिजली योजनाओं के वित्तीय परिणाम, ऋण व लाभांश की रिपोर्ट।  

तेल नहीं, अब चुंबक है नया सोना! भारत के पास मिला खजाना, चीन की दबदबे पर लगाम

नई दिल्ली रेयर अर्थ मिनरल्‍स की वजह से वर्ल्ड वॉर तक हो सकती है. इसके दम पर चीन ने पूरी दुनिया का टेटुआ दबा रखा है. जिससे रिलेशन खराब होता है, उसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स नहीं देता है. इससे स्‍मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक की मैन्‍यूफैक्चरिंग प्रभावित होती है. भारत के साथ संबंध जब पटरी से उतरा तो चीन ने इस अमूल्‍य खजाने के एक्‍सपोर्ट को लिमिटेड कर दिया, जिसका असर साफ तौर पर देखा गया. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर फिलहाल चीन की मोनोपोली यानी एकाधिकार है. अमेरिका से लेकर भारत तक इसके लिए चीन पर निर्भर हैं. क्‍लाइमेट चेंज को देखते हुए फॉसिल फ्यूल्‍स (जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स और कोयला आदि) के दिन लदने वाले हैं. इलेक्‍ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स का बोलबाला बढ़ने वाला है, जिसकी तस्‍वीर दिखने भी लगी है. इलेक्ट्रिक कार के बढ़ते बाजार से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके अलावा स्‍मार्टफोन आज लोगों के जीवन का अ‍हम हिस्‍सा बन चुके हैं. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के बिना इनकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग संभव नहीं है और चीन का इसपर एकाधिकार है. लिहाजा, यह पूरी तरह से चीन पर निर्भर है कि किस देश में इस तरह की इंडस्‍ट्री फलेगी-फुलेगी. लेकिन, अब एक शुभ समाचार सामने आया है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के रिजर्व के मामले में भारत का तीसरा स्‍थान है और एक अनुमान के अनुसार देश में 70 लाख टन ऐसे म‍िनरल्‍स हैं अनुमान है कि चीन की जमीन में 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स हैं. दूसरे नंबर पर कौन है? जी हां…दूसरे नंबर पर ब्रिक्‍स का ही एक और मेंबर कंट्री ब्राज़ील है. अनुमान है कि ब्राज़ील की जमीन में 2.1 करोड़ टन रेयर अर्थ दबे हैं यानी इस गेम में ब्राज़ील दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है, क्योंकि आने वाला टाइम तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही दिख रहा है. पेट्रोल डीजल के जमाने लदने वाले हैं. सऊदी अरब से लेकर कतर वगैरह सब आगे की प्‍लानिंग कर रहे हैं, जब उनके तेल से कमाई के दिन खत्म होने वाले हैं. पहले देखते थे कि किस देश के पास कितना तेल का भंडार है. अब जमाना आएगा रेयर अर्थ के भंडार का. इस मामले में फिलहाल चीन बेताज बादशाह है. ब्राज़ील के पास दूसरा सबसे बड़ा भंडार है. आपको पता है कि इस मामले में तीसरे स्‍थान पर कौन है. अपना भारतवर्ष. देश में करीब 70 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स होने का अनुमान है. भारत के लिए गेम चेंजर भारत में रेयल अर्थ मिनरल्‍स अभी भंडार ही हैं. जमीन में ही हैं. इसको निकालना, साफ़ करना, रिफ़ाइन करना, फिर उसके मैगनेट बनाने के लिए पूरा सिस्टम तैयार करना पड़ेगा. अच्‍छी बात यह है कि भारत अब इस काम में लग गया है. इसमें टाइम तो लगेगा. चीन कई साल से ऐसा कर रहा है और शुरू में तो कोई देश उतना सस्ता और उतनी क्षमता की रिफाइनिंग कर भी ना पाए, लेकिन लगे रहना पड़ेगा. एक सरकारी घोषणा आपने सुनी होगी. भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू कर रहा है. ये उसी काम का मिशन है. इसमें कुछ साल लगेंगे. तब तक चीन से ही लेना होगा. अब चुंबक का आया जमाना! कैसे धरती में दबी ताकत से पूरी दुनिया का टेंटुआ दबा रहा चीन तेल के खेल से पूरी दुनिया अच्छी तरह वाक़िफ है. 70 के दशक में अरब देशों ने दिखा दिया था कि तेल पर कंट्रोल मतलब पूरी दुनिया पर दबाव. लेकिन अब ज़माना बदल गया है. खेल का नया खिलाड़ी है ‘रेयर अर्थ मिनरल‘ और नया सुपरपावर बन बैठा है चीन. रेयर अर्थ मिनरल्स आखिर हैं क्या? ये कोई जादुई चीज़ नहीं, बल्कि 17 धातुओं का एक समूह है. जैसे लोहा या तांबा होता है, वैसे ही ये भी खनिज हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इन्हें जमीन से निकालना और रिफाइन करना बेहद मुश्किल और महंगा काम है. लंबे समय तक इनका कोई बड़ा इस्तेमाल नहीं था. लेकिन जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का जमाना आया, इनकी कीमत आसमान छूने लगी. असली ताकत चुंबक की इन रेयर अर्थ मिनरल्स से बनते हैं सुपर मैगनेट. ये छोटे से पुर्जे दिखने वाले मैगनेट आज पूरी टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं. – स्मार्टफोन में – इलेक्ट्रिक गाड़ियों में – टीवी स्क्रीन में – हवाई जहाज के इंजन में – बिजली के टर्बाइन में खासकर इलेक्ट्रिक कारें इन चुंबकों के बिना असंभव हैं. मतलब इलॉन मस्क की टेस्ला हो या कोई और कंपनी, अगर रेयर अर्थ मैगनेट न मिले तो उनका काम खत्म. चीन कैसे बना राजा? 30-40 साल पहले चीन ने दूरदर्शिता दिखाई. उसने देखा कि इलेक्ट्रॉनिक्स का जमाना आने वाला है. उसने बड़े पैमाने पर खदानें खोलीं, रिफाइनिंग प्लांट लगाए और चुंबक बनाने की फैक्ट्रियां खड़ी कर दीं. नतीजा ये हुआ कि आज दुनिया का 90% रेयर अर्थ रिफाइनिंग चीन में होती है और 60-70% खदानें भी वहीं हैं. इतना ही नहीं, चीन ने म्यांमार, अफ्रीका और पाकिस्तान के बलूचिस्तान तक में खदानों पर कब्जा कर लिया है. यानी सिर्फ अपने देश ही नहीं, दूसरे देशों की जमीन से भी रेयर अर्थ निकालकर अपने कंट्रोल में कर लिया. बाकी दुनिया क्यों फंसी? अमेरिका जैसे देश पहले खुद खनन करते थे. लेकिन चीन ने इतने सस्ते दाम पर चुंबक बेचना शुरू किया कि बाकी देशों ने खदानें बंद कर दीं. 2002 में अमेरिका ने अपना बड़ा प्लांट ही बंद कर दिया. सबको लगा चीन से खरीदना आसान है. लेकिन जब इलेक्ट्रिक कारों का दौर आया तो चीन ने सप्लाई रोककर सबका टेंटुआ दबा दिया. भारत और दुनिया की स्थिति आज चीन के पास अनुमानित 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल का भंडार है. दूसरे नंबर पर ब्राज़ील है 2.1 करोड़ टन के साथ. तीसरे नंबर पर आता है भारत, जहां करीब 70 लाख टन का भंडार है. फर्क बस इतना है कि चीन 40 साल से इस धंधे में है और भारत अभी शुरुआत कर रहा है. भारत ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ लॉन्च किया है. लक्ष्य साफ है- अपने भंडार को निकालना, रिफाइन करना और खुद मैगनेट बनाना. लेकिन इसमें वक्त लगेगा. तब तक चीन से लेना ही मजबूरी है. आने वाला समय कैसा होगा? जैसे कभी तेल पर कंट्रोल रखने वाले अरब देश पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करते थे, वैसे ही … Read more

महिलाओं के लिए बड़ी खबर: सर्वाइकल कैंसर से बचाव को सरकारी अस्पतालों में जल्द मिलेगी HPV वैक्सीन

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. रुचिका गर्ग ने चौंकाने वाले आंकड़े बताये हैं. भारत में तेज़ी से फ़ैल रहा सर्वाइकल कैंसर बेहद जानलेवा साबित हो रहा है. पूरे विश्व की तुलना में भारत अकेला 25% तक इस बीमारी को झेल रहा है. सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक बीमारी है. सर्वाइकल कैंसर को  बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से भी जाना जाता है. सर्वाइकल कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से गर्भाशय ग्रीवा में होता है. डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि यह सर्वाइकल कैंसर आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है. उन्होंने यह भी बताया कि अब इससे बचाव के लिए बाजार में  वैक्सीन  उपलब्ध हो चुकी है. यह टिका महिलाओं को समय रहते लगवा लेना चाहिए. बच्चेदानी के बचाव के लिए इस टीके को लगवाना बहुत जरुरी हो गया है. सर्वाइकल कैंसर से हर 7 मिनट में 1 महिला की हो रही है मौत सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. रुचिका गर्ग ने चौकाने वाले आंकड़े बताये. उन्होंने कहा कि यह कैंसर इतना खतरनाक है कि प्रत्येक 7 मिनट के अंदर 1 महिला अपनी जान गंवा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हर साल बच्चेदानी के मुंह का कैंसर ( सर्वाइकल कैंसर ) से लगभग 1 लाख से अधिक महिलाओं को मृत्यु हो रही है. डॉ. गर्ग ने कहा कि पूरे विश्व में सर्वाइकल कैंसर के केस में 25 प्रतिशत की भागीदारी भारत की महिलाओं की है. सर्वाइकल कैंसर को कोई भी महिला हल्के में ना लें. समय रहते इसका टिका लगवाने से इससे बचा जा सकता है. सर्वाइकल कैंसर आखिर महिलाओं में क्यों फ़ैल रहा है… डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर (बच्चे दानी के मुँह का कैंसर) आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है. डॉ ने यह भी बताया कि यौन संचारित संक्रमणों के संपर्क में आने की संभावना अधिक होना जैसे उदाहरण के तौर पर, कम उम्र में पहली बार यौन क्रिया करना, एक से अधिक यौन साथी के साथ संबध बनाना. डॉ. रुचिका ने कहा कि अत्यधिक मात्रा में मौखिक गर्भ निरोधकों जैसे जन्म नियंत्रण की दवाएं का सेवन करना भी एक मुख्य कारण है. सर्वाइकल कैंसर के बचाव… डॉ. रुचिका गर्ग बताती है कि यह केवल ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन के माध्यम से खत्म किया जा सकता है.  उन्होंने यह भी कहा कि जितनी कम उम्र की बच्चियों को यह वैक्सीन लगावाया जाये उतना ही बेहतर यह काम करेगी. डॉ. रुचिका ने बताया कि इस वैक्सीन को लेकर जो गाइडलाइन बनी हुई उसके तहत जैसे 9 से 14 वर्ष तक की बच्चियों को यह टिका लगवाना चाहिए. यह उम्र इस टिके के लिए सबसे उत्तम मानी गई है. इसके अतिरिक्त 26 साल तक की महिला भी इस वैक्सीन को लगवा सकती है. डॉ. गर्ग ने कहा कि यदि 26 तक उम्र की महिलाएं इस टिके को नही लगवा पाईं हैं तो वह 45 साल तक की उम्र तक इसे लगवा सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा की 26 से अधिक उम्र की महिलाएं टिका लगवाने से पहले अपनी डॉ. से सलाह लेकर ही इसको लगवा सकती है. सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं, कैसे इससे बचा जा सकता है… डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर के लक्षण बेहद सामान्य है, जिस कारण शुरुआत में इसे आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है. डॉ. रुचिका ने कहा कि कुछ कारणों से इसकी पहचान कि जा सकती है जैसे, सफ़ेद पानी आना, गंदा बदबूदार पानी आना, पति से संबध के बाद ब्लडिंग होना यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें. डॉ. ने बताया कि इसे जाँच के माध्यम से भी पहचाना जा सकता है. उन्होंने कहा कि पांच पांच साल के अंतराल में HPV टेस्ट करा सकते है. उन्होंने बताया किपपनिकोलाउ (Pap) परीक्षण से भी महिला अपना टेस्ट करवा सकती है. डॉ. रुचिका ने बताया कि यह टेस्ट एस एन मेडिकल कॉलेज में निशुल्क किया जा रहा है. जल्द सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी सर्वाइकल वैक्सीन… डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि सर्वाइकल वैक्सीन अभी एसएन मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है. सर्वाइकल वैक्सीन बाज़ारो में उपलब्ध है. डॉ. ने कहा कि इस वैक्सीन को सरकारी अस्पतालों में आने के लिए बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन सरकार जल्द सरकारी अस्पतालों में छोटी बच्चियों को लिए निशुल्क उपलब्ध करवा सकती है.

अब स्मार्ट पोर्टल बताएगा MP के किस जिले में कौन-सी बीमारी फैल रही है

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जिला अस्पताल अब डिजिटल तकनीक से लैस हो रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश ने स्मार्ट पोर्टल (स्टेट मानिटरिंग एंड असेसमेंट आन रियल टाइम पोर्टल) को नए स्वरूप में शुरू किया है। शुरुआत राजधानी के जेपी अस्पताल से हो चुकी है और आने वाले समय में सभी जिला अस्पताल इस प्लेटफार्म से जुड़ेंगे। स्मार्ट पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और दवाइयों की जानकारी दर्ज होगी। हर मरीज को यूनिक हेल्थ आईडी (यूएचआईडी) नंबर मिलेगा। इस नंबर के आधार पर डॉक्टर तुरंत मरीज की पिछली रिपोर्ट, बीमारियों और उपचार का पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे। इससे मरीजों को हर बार पुराने पर्चे और कागज लाने की झंझट से छुटकारा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग को मिलेगा जिलावार डेटा विशेषज्ञों के अनुसार, पोर्टल से जिलावार बीमारी का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। किस जिले में कौन-सी बीमारी तेजी से फैल रही है, इसका तुरंत पता लगाया जा सकेगा। कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक का विश्लेषण संभव होगा। इससे सरकार को स्वास्थ्य नीतियां बनाने और योजनाओं की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। पोर्टल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है। इसमें गैर-संचारी रोग (एनसीडी), नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम (एनओएचपी), नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ द एल्डरली (एनपीएचसीई), नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनआरसीपी) और नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एनएमएचपी) शामिल होंगे। अब इन योजनाओं से जुड़ी जांच, दवाइयों और परामर्श की जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज होगी। पारदर्शिता और सुविधा डिजिटल सिस्टम के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं न केवल पारदर्शी होंगी, बल्कि तेज भी होंगी। डॉक्टर और मरीज दोनों को इससे सुविधा होगी। मरीज का इलाज आसान होगा और अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेशभर में लागू किया जा रहा     पोर्टल पहले से संचालित था, लेकिन इसकी प्रापर मानिटरिंग नहीं हो पा रही थी। कुछ कमियां थीं, इसलिए अब इसे नए स्वरूप में लागू किया जा रहा है। मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं को एक ही प्लेटफार्म पर लाकर इसे 2025 से पूरे प्रदेशभर में लागू किया जा रहा है। – सलोनी सिडाना, मिशन संचालक, एनएचएम, मप्र  

चौंकाने वाला आंकड़ा: पाकिस्तान में फैक्ट्रियों से अधिक मस्जिद-मदरसे दर्ज

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की इकॉनॉमिक सेंसस रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक देश में मस्जिदों और मदरसों की संख्या फैक्ट्रियों से कहीं ज्यादा है. पाकिस्तान में 6 लाख से ज्यादा मस्जिदें और 36 हजार से अधिक मदरसे मौजूद हैं, जबकि फैक्ट्रियों की संख्या केवल 23 हजार है. यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा पर बातचीत कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में कुल 40 मिलियन स्थायी इकाइयों में से 7.2 मिलियन रोजगार संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जहां 2023 तक 25.4 मिलियन लोग काम कर रहे थे. इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा सर्विस सेक्टर का है, जिसमें 45% यानी 11.3 मिलियन लोग काम करते हैं. इसके बाद 30% यानी 7.6 मिलियन लोग सोशल सेक्टर में और सिर्फ 22% लोग प्रोडक्शन सेक्टर में कार्यरत हैं. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़े इस मिथक को तोड़ते हैं कि इंडस्ट्री ही देश का मुख्य जॉब-क्रिएटिंग सेक्टर है, जबकि असल में सर्विस सेक्टर दुगुना रोजगार देता है. 6.04 लाख मस्जिदें और 36,331 मदरसे रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में कुल 7.2 मिलियन दर्ज प्रतिष्ठानों में 2.7 मिलियन रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल शॉप्स, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख हॉस्पिटल शामिल हैं. एजुकेशन सेक्टर में 2.42 लाख स्कूल, 11,568 कॉलेज, 214 यूनिवर्सिटी, 6.04 लाख मस्जिदें और 36,331 मदरसे दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर स्कूल सरकारी हैं, जबकि कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी थोड़ी ज्यादा है. राज्यवार आंकड़े पंजाब में सबसे ज्यादा 58% प्रतिष्ठान हैं. इसके बाद सिंध (20%), खैबर पख्तूनख्वा (15%) और बलूचिस्तान (6%) का स्थान है. इस्लामाबाद कैपिटल रीजन की हिस्सेदारी सबसे कम यानी 1% है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के ज्यादातर बिज़नेस छोटे स्तर के हैं. लगभग 7.1 मिलियन इकॉनॉमिक स्ट्रक्चर्स 1 से 50 लोगों को रोजगार देते हैं. 51 से 250 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान केवल 35,351 हैं और 250 से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाले यूनिट्स सिर्फ 7,086 हैं. रिपोर्ट पेश करते हुए योजना मंत्री अहसान इकबाल ने कहा कि "विश्वसनीय डेटा टिकाऊ विकास की रीढ़ है, क्योंकि यह एविडेंस-बेस्ड प्लानिंग और बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है."

मध्यप्रदेश में पराली प्रबंधन की नई पहल, किसानों को धान और गेहूं के अवशेष से होगा फायदा

ग्वालियर  ग्वालियर चंबल अंचल में हुई रिकार्ड वर्षा के बीच धान का रकबा लक्ष्य से अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही पराली की समस्या भी डराने लगी है, क्योंकि पिछले साल देश में सबसे अधिक पराली अंचल के श्योपुर और दतिया में जलाई गई थी। बहरहाल, कृषि विभाग ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। कृषि विभाग ने किसानों को पराली का प्रबंधन सिखाने की योजना बनाई है। योजना कारगर साबित हुई तो किसानों को दोहरा फायदा होगा। यानी पराली की समस्या का समाधान होगा और बुवाई के लिए खेत की बार-बार जुताई से मुक्ति मिलेगी। एक बार में ही खेत की पराली समस्या का हल और बीज की बुवाई भी हो जाएगी। यह काम हैप्पी सीडर मशीन से होगा। कृषि विभाग फिलहाल जिले के 250 किसानों को 250 हेक्टेयर जमीन पर हैप्पी सीडर से पराली प्रबंधन व जुताई का तरीका सिखाएगा। क्या है हैप्पी सीडर मशीन, कैसे होगा पराली की समस्या का हल हैप्पी सीडर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जो खासतौर पर पराली (फसल कटने के बाद बचा हुआ डंठल और पुआल) जलाने की समस्या का समाधान करेगी। हैप्पी सीडर को ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है। यह पहले खेत में पड़ी हुई पराली को काटकर साइड में फैला देती है। उसी समय मशीन जमीन में गेहूं या अन्य रबी की फसल का बीज बो देती है। इस तरह बिना पराली जलाए सीधे उसी खेत में अगली फसल की बुआई हो जाती है। क्या है कृषि विभाग की पूरी योजना     स्थानीय कृषि विभाग धान की पैदावार करने वाले अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे 250 किसानों को चिह्नित कर रहा है, जिनके पास कम से कम एक हेक्टेयर जमीन हो। धान की फसल होने के बाद इन किसानों के खेतों में हैप्पी सीडर से सीधे पराली को काटकर, खेत जोतकर गेहूं की बुवाई कराई जाएगी।     हैप्पी सीडर मशीन की कीमत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दे रही है। यदि कोई समूह या समिति इसे खरीदता है, तो सब्सिडी और बढ़ जाती है। कृषि विभाग गांव के उन किसानों को हैप्पी सीडर मशीन खरीदने के लिए प्रेरित कर रही है, जिनके पास ट्रैक्टर हैं। ऐसे होगा किसानों को दोहरा फायदा     कृषि विभाग के सहायक संचालक नरेश मीणा बताते हैं कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने या नष्ट करने के लिए खेत को तैयार किया जाता है। इस तरह बुआई से पहले किसानों को दो से तीन बार जुताई करना होती है। हैप्पी सीडर मशीन पराली की कटाई करेगी और साथ ही गहरी जुताई भी कर देगी। इस तरह किसानों का श्रम और खर्च बचेगा। इसका उपयोग गेहूं की कटाई के बाद नरवाई के प्रबंधन में भी किया जा सकता है।     हैप्पी सीडर से काटकर खेत की मिट्टी में मिलाई गई पराली एक से डेढ़ महीने में जैविक खाद में बदल जाएगी। इससे किसानों को खेतों में खाद भी कम देना होगा। धान का रकबा बढ़ गया     ग्वालियर ही नहीं, श्योपुर आदि जिलों में अच्छी वर्षा की वजह से अन्य फसलों की बुवाई नहीं हो पाई, केवल धान की बुवाई हुई है। इस बार धान का रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है। धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या खड़ी होगी। इसलिए किसानों को हैप्पी सीडर मशीन से पराली का प्रबंधन व सीधे गेहूं की बुआई का प्रबंधन सिखाया जाएगा। – आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि व किसान कल्याण विभाग, ग्वालियर  

आज का राशिफल (24 अगस्त 2025): भाग्य चमकेगा इन राशियों का, सफलता और प्रतिष्ठा दोनों साथ

मेष आज आपको लंबी दूरी की यात्रा से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। आर्थिक रूप से आप अच्छे रहेंगे। व्यापारिक स्थिति अच्छी होगी। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। आपको ऑफिस में अपनी स्किल को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। वृषभ आज किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। शादीशुदा लोगों को जीवनसाथी का साथ मिलेगा। परिवार की स्थिति अच्छी होगी। अपनों के सहयोग से आर्थिक लाभ हो सकता है। खाली समय पर अपने महत्वपूर्ण टास्कों को निपटाने की कोशिश करें। आर्थिक मामले उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं। मिथुन आज आपको अपनी नौकरी में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। धन की स्थिति में सुधार होगा। परिवार के लोगों के सपोर्ट से किसी काम में सफलता मिल सकती है। उन्नति के योग हैं। जीवनसाथी के खराब मूड के कारण आज का दिन थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। कर्क धार्मिक और आध्यात्मिक रुचि अपनाने के लिए भी आज का दिन अच्छा है। आज किसी पुराने कर्ज से मुक्ति मिल सकती है। सोशल एक्टिविटी से आपको मन बहलाने का मौका मिलेगा। संतान के साथ अच्छा समय बिताएंगे। आपको किसी अटके हुए धन की वापसी हो सकती है। व्यापारिक स्थिति अच्छी होगी। सिंह आज आपको किसी पुराने मित्र का सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सिंगल जातकों की लाइफ में किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है। रोमांटिक जीवन के लिहाज से यह दिन बेहतर रहेगा। व्यापार में सुधार होगा। कन्या आज आपको मानसिक शांति बनेगी। आपको आर्थिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है। किसी व्यवसाय करने से बचें। आपकी मानसिक शांति के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप ऐसी किसी भी एक्टिविटी में शामिल न हों। परिवार का कोई सदस्य आज आपके खिलाफ बोल सकता है, जिससे आपकी फीलिंग्स को गहरी ठेस पहुंचेगी। तुला आज बच्चों की सेहत पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। कोई पुराना दोस्त आज आपसे आर्थिक मदद मांग सकता है। घरेलू कार्यों के कारण आज आप बिजी रहेंगे। नौकरी में तरक्की के साथ आय में वृद्धि मिल सकती है। नौकरी की तलाश करने वालों के लिए आज का दिन अच्छा है। वैवाहिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। वृश्चिक जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे। पैसे को रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए। शरीर को फिट रहने के लिए एक्सरसाइज से दिन की शुरुआत करें। आज आपको अपने जीवन में सच्चे प्यार की कमी महसूस होगी। फ्रेंड्स के साथ गॉसिप करने से बचें। धनु आज आपको अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल में रखने की जरूरत है। विवाहित जातकों को जीवनसाथी का साथ मिलेगा। आज आपको अचानक किसी अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जिससे परिवार के साथ समय बिताने का आपका प्लान खराब हो सकता है। किसी बड़े खर्च को लेकर जीवनसाथी के साथ आपकी अनबन हो सकती है। मकर आज आपको महत्वपूर्ण फैसला में आसानी होगी। आज आपके लिए धन संबंधी समस्याओं का सामना करना संभव है। लव लाइफ में थोड़े बदलाव सामने आ सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताना मूड को बेहतर बनाएगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा बर्ताव करें। व्यापारिक स्थिति उतार-चढ़ाव भरी हो सकती है। कुंभ आज आपको धन के मामलों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। पैसों का लेन-देन दिन भर लगातार होता रहेगा और दिन ढलने के बाद आप पर्याप्त बचत करने में भी सफल रहेंगे। परिवार के लिए अपना समय निकालें। अनावश्यक विवादों में न पड़ें। आज आप अपने जीवनसाथी के साथ अच्छी बातचीत करेंगे। मीन आज पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। बौद्धिक कार्यों से आय में वृद्धि हो सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। खर्चों की अधिकता रहेगी। किसी मित्र के साथ यात्रा पर जा सकते हैं।