samacharsecretary.com

महिला कॉन्स्टेबल का आरोप: डिप्टी कलेक्टर ने किया शोषण, तीन बार जबरन गर्भपात कराया

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक महिला सिपाही ने डिप्टी कलेक्टर पर शादी का झांसा देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने, जबरदस्ती गर्भपात करवाने और आर्थिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने शिकायत में बताया कि उनका संबंध करीब 8 साल तक चलता रहा। इस दौरान उसने डिप्टी कलेक्टर को लाखों रुपए की मदद भी की। सीएएफ की महिला सिपाही ने इस मामले की प्राथमिकी डौंडी थाना में दर्ज कराई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीएसपी चित्रा वर्मा से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायत के मुताबिक पीड़िता 2017 में ग्राम अवारी, जिला बालोद निवासी दिलीप उईके के साथ डौंडी स्थित आईटीआई में पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के दौरान दोस्ती प्यार में बदल गई। दिलीप ने उससे शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला मार्च 2017 में पहली बार गर्भवती हुई। उसने यह बात दिलीप को बताई तो उसने कहा कि अभी वह पढ़ाई कर रहे हैं। पहले कुछ बन जाएं और अपने पैरों पर खड़े हो जाएं फिर शादी और बच्चे के बारे में सोचा जाएगा। युवती के मना करने के बाद भी जबरदस्ती दवा खिलाकर गर्भपात करवाया। इसके बाद 2017 में महिला की पुलिस विभाग में नौकरी लग गई और दिलीप उईके ने आगे की पढ़ाई के लिए दुर्ग में एडमिशन लिया। शुरुआत में वह हॉस्टल में रह रहे थे। बाद में किराये पर मकान लेकर रहने लगे। महिला की नौकरी लग जाने के कारण और भविष्य में दिलीप के साथ शादी करने की उम्मीद में उसने उसकी पढ़ाई, कोचिंग और अन्य खर्चों के लिए हर माह 5 हजार रुपए उसके खाते में ट्रांसफर किया। इस दौरान जब भी दोनों की मुलाकात होती तो दिलीप शादी की बात कहकर महिला के साथ संबंध बनाता रहा। बीजापुर में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पोस्टिंग सीजीपीएससी परीक्षा में सफल होने के बाद 2020 में दिलीप डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए और बीजापुर में पोस्टिंग हुई। नौकरी लगने के बाद जब युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया तो दिलीप ने कहा कि अभी नौकरी लगी है। अच्छे से सैटल हो जाऊं फिर तुमसे शादी करूंगा। इस बीच युवती एक बार फिर गर्भवती हो गई तो उसने गर्भपात करा दिया। मई 2025 में तीसरी बार गर्भवती होने पर दिलीप ने शादी का झांसा देकर 15 मई 2025 को जबरदस्ती गर्भपात की दवा खिलाई। इस बीच फोन करने पर दिलीप फोन नहीं उठाता था। 2 जून 2025 को दिलीप महिला को उसके घर छोड़कर गया और साफ-साफ कहा कि वह शादी नहीं कर सकता। तुम्हें जो करना है कर लो। इस मामले में महिला सिपाही की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। सीएसपी चित्रा वर्मा ने बताया कि डौंडी थाना में मामला दर्ज कर बयान लिया जा रहा है। वहीं डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके का बयान सामने आने के बाद मामला स्पष्ट होने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम

विश्व में हो रहे डिजिटल खतरे को कम कर सकता है साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट  साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम  सेमिनार में सीएम योगी द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना हुई  योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ अपनाया गया कड़ा रुख, साइबर अपराध में आई कमी लखनऊ  साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि पूरे विश्व में डिजिटल खतरे का लगातार सामना कर रहा है। ऐसे में हमे साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इसके लिए विश्व के विभिन्न देशों से टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बहुत महत्व रखता है। यह मंथन यूपीएसआईएफएस द्वारा आयोजित डिजिटल ऑडिट, साइबर इंश्योरेंस, सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे विभिन्न पहलुओं को सराहा गया।  साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में मजबूत कैरियर की संभावनाएं यूपीएसआईएफएस के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने बताया कि योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए भारत के डीपीडीपी अधिनियम और जीडीपीआर जैसी नीतियों की जानकारी दी। साथ ही टीमवर्क और निरंतर शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सेमिनार में साइबर सुरक्षा के लिए लगातार शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक स्पष्टता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ कैरियर की संभावना है, बशर्ते सही कौशल, कानूनी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन प्रयासों को और भी सशक्त बनाया गया है, जो भारतीय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना जरूरी सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यूएसए के पवन शर्मा ने कहा कि डिजिटल ऑडिट किसी संगठन के जोखिम को समझने के लिए एक नींव का काम करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऑडिट के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उसे लागू करने की क्षमता आज के समय में साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। साइबर इंश्योरेंस के लिए ऑडिट रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और उसे सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। सिस्को के प्रतिनिधि ने यह बताया कि अब पारंपरिक वार्षिक ऑडिट की बजाय संगठन लगातार, जोखिम-आधारित मूल्यांकन कर रहे हैं, जो वास्तविक समय के मापदंडों और अनुपालन ढांचे से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमेशन और साइबर जोखिम मॉडलिंग जैसे कौशल अब करियर की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जेड-स्केलर के प्रतिनिधि ने कंपनियों में आंतरिक अपस्किलिंग के महत्व को बताया और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता को प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र जैसे कि CompTIA Security+ और CISSP की सिफारिश की। इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से युवाओं को अपने करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यूपीएसआईएफएस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार राय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना आवश्यक है। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे महत्वपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया कि लगातार मूल्यांकन से ही सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के मद्देनज़र वैश्विक दृष्टिकोण की अहमियत को उजागर किया।      

मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री

युवाओं को ग्लोबल लीडरशिप रोल के लिए तैयार करने का माध्यम बनेगी चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना: सीएम योगी  मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री   योगी सरकार ने दिया वैश्विक शिक्षा का अवसर, अब यूपी के छात्र पढ़ेंगे यूके में अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर “चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना”की हुई शुरुआत मुख्यमंत्री की उपस्थिति में प्रदेश सरकार और एफसीडीओ-यूके के बीच ऐतिहासिक एमओयू  हर साल पांच मेधावी छात्रों को मिलेगी यूनाइटेड किंगडम में मास्टर डिग्री की स्कॉलरशिप 2025-26 से तीन वर्षों तक संचालित होगी योजना, 2028-29 से किया जाएगा नवीनीकृत  प्रति छात्र आएगा ₹45 से ₹48 लाख का खर्च, प्रदेश सरकार ₹23 लाख रुपए तक करेगी वहन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में उनके सरकारी आवास पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार और द फॉरेन कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) यूके के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत “चिवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजना” शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत हर साल प्रदेश के पांच प्रतिभाशाली छात्रों को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छात्रवृत्ति योजना प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने और युवाओं को “ग्लोबल लीडरशिप रोल” के लिए तैयार करने का सशक्त माध्यम बनेगी। छात्रों को मिलेगा वैश्विक एक्सपोजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना है। यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 से तीन वर्षों तक (2025-26, 2026-27 और 2027-28) संचालित होगी। इसके बाद 2028-29 से योजना को नवीनीकृत किया जाएगा। भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी जी की प्रेरणा से प्रारंभ की गई यह योजना प्रदेश के युवाओं को वैश्विक शिक्षा और नेतृत्व में नई ऊंचाइयां हासिल करने का अवसर देगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। पूरी पढ़ाई और खर्च का प्रावधान इस छात्रवृत्ति में पूर्ण शिक्षण शुल्क, परीक्षा व शोध शुल्क, रहने-खाने का भत्ता तथा यूके तक आने-जाने का हवाई किराया शामिल रहेगा। प्रति छात्र लगभग £38,048 से £42,076 (लगभग ₹45 से ₹48 लाख) का खर्च आएगा। इसमें से उत्तर प्रदेश सरकार लगभग £19,800 (₹23 लाख) वहन करेगी, शेष राशि का वहन एफसीडीओ यूके करेगा। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने भी पहल को सराहा ब्रिटिश हाई कमिश्नर टू इंडिया, लिंडी कैमरन ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष हुए एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि लखनऊ आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर करना बेहद खुशी की बात है। इस नई चिवनिंग स्कॉलरशिप के तहत अगले तीन वर्षों तक हर साल पांच छात्रों को यूके में पूर्ण छात्रवृत्ति पर पढ़ाई का अवसर मिलेगा। यह यूनाइटेड किंगडम और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों का प्रतीक है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी जी की यूके विजिट के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा ट्रेड एग्रीमेंट और विजन 35 साइन किया गया है, जिससे शिक्षा के साथ-साथ व्यापार के शानदार अवसर भी खुलेंगे। इस साझेदारी से भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के छात्रों को वैश्विक मंच पर बड़ा फायदा होगा।    

सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा

न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित कर रहे डिजिटल साक्ष्य सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा  बोले एक्सपर्ट, न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम, यह तब और बढ़ जाती है जब कोई विटनेस नहीं होता  सीएम योगी के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में तैयार किया जा रहा आवश्यक ढांचा   लखनऊ  न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका बहुत अहम होती है। यह भूमिका तब और बढ़ जाती है जब डिजिटल साक्ष्य के आलावा कोई विटनेस नहीं होता है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी कसाब के मामले में इंटरनेट ट्रांस्क्रिप्ट्स का उपयोग दोषसिद्धि में काफी महत्वपूर्ण था। वर्तमान डिजिटल साक्ष्य न केवल न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये बातें सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपीएसआईएफएस के डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में कही।   डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया गया सेमिनार में जस्टिस सिंह ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में न्यायपालिका को तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत किया जा रहा है और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को और भी सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, ताकि न्यायिक कार्यवाही तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। यह सेमिनार इसका प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सुधारों में अपने कदम तेजी से बढ़ा रहा है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने डिजिटल साक्ष्य को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह सभी डेटा होते हैं, जो डिजिटल रूप में जन्म और एक जगह एकत्रित होते हैं। उन्होंने इसे बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि अब यह लगभग हर जांच का अभिन्न हिस्सा बन गया है। चाहे मामला चोरी, लूट या साइबर अपराध का हो। मेरा मानना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अभियोजन की ताकत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार से दोषसिद्धि में मदद करते हैं। गवाहों के बयान में वीडियो कांफ्रेंसिंग वैध तरीका बना जस्टिस सिंह ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)के नये नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अधिनियम डिजिटल साक्ष्य की स्वीकृति को आसान बनाता है, जिसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दर्ज मौखिक बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC)की धारा 273 का उदाहरण देते हुए बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग अब एक वैध तरीका बन गया है, जिसके द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे स्कैन किए गए पीडीएफ, सीसीटीवी फुटेज) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, एसएमएस, सर्वर लॉग्स) दो अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि डिवाइस नियमित रूप से इस्तेमाल में हो, डेटा सामान्य रूप से दर्ज किया गया हो और डिवाइस की कार्यशीलता सही हो।     

बिलासपुर :अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई: प्रार्थना भवन ध्वस्त, मतांतरण के आरोप में तीन महिलाएं हिरासत में

बिलासपुर   बिलासपुर जिले में धार्मिक गतिविधियों को लेकर दो बड़े मामले सामने आए हैं। सकरी क्षेत्र के भरनी गांव में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए प्रार्थना भवन को सोमवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर हटा दिया। यहां पहले मतांतरण के प्रयास का आरोप लगा था। वहीं, सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण का प्रयास होने पर हंगामा खड़ा हो गया और पुलिस ने मौके से तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया। सुर्खियों में आया था प्रार्थना भवन प्रशासन ने शासकीय भूमि पर बना यह प्रार्थना भवन पिछले माह तब सुर्खियों में आया था जब यहां मतांतरण का आरोप लगाया गया था। ग्रामीणों और संगठनों का कहना था कि भवन के भीतर कुछ लोग प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास कर रहे थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया था। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अतिक्रमण हटाने और मतांतरण रोकने की मांग की गई थी। शिकायत पर राजस्व विभाग ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया और भूमि दस्तावेज मांगे, लेकिन वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की गई। जांच में भूमि शासकीय साबित होने पर सोमवार को प्रशासन ने बैकहो लोडर चलवाकर अतिक्रमण हटा दिया। तहसीलदार सकरी, सीएसपी और थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। पास्टर सहित तीन महिलाएं गिरफ्तार इधर, सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में भी प्रार्थना सभा के दौरान मतांतरण की कोशिश का मामला सामने आया। सूचना पर विभिन्न संगठन मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिससे हंगामा मच गया। आरोप है कि सभा में धार्मिक ग्रंथ और सामग्री के माध्यम से लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित कर तीन महिलाओं, जिनमें एक पास्टर भी शामिल है, को गिरफ्तार किया।  

योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट

दो माह तैयार हो जाएगा यूपी का पहला एसआईएचएम योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट 48.39 करोड़ रुपये की आ रही लागत, निर्माण कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण टूरिज्म, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चलेंगे कोर्स योगी सरकार में तेजी से हुआ है हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का विकास दक्ष मानव संसाधन की मांग को पूरा करने में एसआईएचएम की होगी अहम भूमिका गोरखपुर  प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) दो माह में तैयार हो जाएगा। योगी सरकार द्वारा गोरखपुर में 48.39 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए जा रहे एसआईएचएम के पहले फेज का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग द्वारा अगले माह के अंत तक शत प्रतिशत कार्य पूर्ण कराया जाना लक्षित किया गया है।  बीते कुछ सालों में गोरखपुर का टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ा है। यहां कई बड़े ब्रांड के होटल्स, रेस्टोरेंट खुल चुके हैं और कई खुलने की प्रक्रिया में हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल पेशेवरों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) बनवा रहे हैं। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के कार्यालय के सामने बन रहे एसआईएचएम का निर्माण सितंबर माह तक पूरा हो जाएगा और अगले शैक्षिक सत्र से यहां होटल एंड टूरिज्म मैनजमेंट से जुड़े डिप्लोमा और डिग्री के पाठ्यक्रम संचालित होने लगेंगे।  स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, पर्यटन विभाग का प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था के रूप में सी एंड डीएस यूनिट-14 द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना पर निर्माण कार्य 26 सितंबर 2023 को प्रारंभ हुआ था। वर्तमान समय में 38.42 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर 95 प्रतिशत कार्य पूरे कर लिए गए हैं और इसी साल 25 सिंतबर तक कार्य पूर्ण किया जाना है। निर्माण के पहले चरण में दो ब्लॉकों में प्रशासनिक कक्ष, क्लास रूम, कॉमन हाल, किचन के अलावा अंडरग्राउंड पार्किंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, फायर सेफ्टी, पाइपलाइन आदि के कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं। उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद यादव मिश्रा बताते हैं कि कि स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट का निर्माण कार्य अगले माह (सितंबर) तक पूरा हो जाएगा, इस समय फिनिशिंग का काम चल रहा है। अगले माह के बाद कभी भी इसका लोकार्पण हो सकता है।  उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षिक सत्र से यहां ग्लोबल डिमांड के अनुरूप होटल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट के कोर्स शुरू कर दिए जाएंगे। स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में कोर्स शुरू हो जाने के बाद युवाओं को रोजगारपरक पढ़ाई के लिए नए विकल्प मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर में जिस तरह से पर्यटन विकास हो रहा है उससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  दूसरे चरण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल का भी निर्माण शुरू स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के दूसरे चरण के निर्माण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है। दूसरे चरण की परियोजना के निर्माण पर 46.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निर्माण कार्य 15 मई से शुरू है। फिलहाल निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 14 प्रतिशत है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मई 2027 तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। एसआईएचएम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 128 रूम का पांच मंजिला ब्वॉयज हॉस्टल और 84 रूम का पांच मंजिला गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है।

भोपाल में 25 स्कूल बने आधार कार्ड सेंटर, बच्चों को मिलेगा नया और अपडेशन दोनों का फायदा

भोपाल बच्चों के आधार कार्ड अपडेट कराने वाले अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। भोपाल के स्कूलों में आधार कार्ड सेंटर शुरू होने जा रहे हैं। इन सेंटर पर नए कार्ड से लेकर सुधार और अपडेट के लिए काम किया जाएगा। आधार कार्ड में कहीं छात्र का नाम गलत था तो कहीं माता पिता के नाम में खामी मिल रही हैं। विद्यार्थियों के स्कूल में दर्ज रेकॉर्ड और आधार कार्ड में इस तरह की गड़बड़ियां सबसे ज्यादा आ रही हैं। नतीजतन करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थियों का रेकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाया। स्कूली बच्चों के आधार कार्ड में सुधार के लिए संकुल स्तर पर सेंटर बनेंगे। राजधानी में बीस से 25 सेंटर होंगे। यह केवल स्कूली बच्चों के लिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए विशेष व्यवस्था की है। स्कूली बच्चों के दस्तावेजों में सुधार के लिए सेंटर बनाने के लिए निर्देश दिए है। संकुलवार यह केन्द्र बनेंगे। आधार कार्ड में सुधार और अपडेशन कराने में आसानी है। अरविंद चौरगढ़े, संयुक्त संचालक सुधार करवाने में जुटे अभिभावक सुभाष नगर निवासी राकेश ने बताया कामकाज छोड़ कर बच्चों के दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुधार करवा रहे हैं। नगर निगम और आधार कार्ड सेंटर के चक्कर काट रहे हैं। अभिभावक संगठन के पीके पांड्या ने बताया कि रिकॉर्ड सुधार करवाया जा रहा है ये बेहतर है। लेकिन इसके लिए सुविधा दी जाए। कई लोगों को दिक्कत आ रही है। सांदीपनी स्कूल रशीदिया के प्राचार्य केडी श्रीवास्तव ने बताया आधार कार्ड के लिए सेंटर बनाया गया था। आगे भी व्यवस्था रहेगी। कैंप में ये सुविधा बच्चों के फिंगर प्रिंट, आंखों की स्केनिंग और फोटो अपलोड किए जाएंगे। आज से सात साल के बच्चों का आधार कार्ड मुफ्त में अपग्रेड होगा। दो लाख बच्चों के रिकॉर्ड होने हैं दर्ज राजधानी में सरकारी और गैरसरकारी मिलाकर करीब 1500 स्कूल हैं। करीब डेढ़ से दो लाख बच्चों के रिकॉर्ड को डिजिटल कराया जा रहा है। इस रिकॉर्ड में आधार कार्ड से लेकर समग्र आइडी, अपार आइडी और जन्म प्रमाण पत्र शामिल हैं। माता पिता का ब्योरा भी इसमें शामिल किया जा रहा है। अधिकांश अभिभावक दस्तावेजों में छोटी-छोटी गलतियों में सुधार के लिए परेशान हैं। सबसे ज्यादा गलतियां आधार कार्ड में सामने आई हैं।

तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी

राजस्व महा–अभियान : तीन दिनों में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियों का हुआ वितरण तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी राजस्व महा-अभियान का बड़ा आंकड़ा: 3 दिन में 23 लाख से अधिक दस्तावेजों का वितरण जमाबंदी पंजी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर  दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर है पूर्णिया पटना   राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान में महज 16 अगस्त से 18 अगस्त तक तीन दिनों में ही बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्यभर में तीन दिनों में अबतक 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं। सर्वाधिक जमाबंदी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर है। वहां कुल जमाबंदी के 24.02 फीसदी जमाबंदी प्रतियों का वितरण किया गया है। दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर पूर्णिया है। जहानाबाद में 14.48 फीसदी, कैमूर में 13.78 फीसदी, नवादा में 13.72 फीसदी एवं पूर्णिया में 11.35 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण तीन दिनों में कर दिया गया है। छठे स्थान पर अररिया है। यहां 11.16 फीसदी वितरण हुआ है। सातवें स्थान पर खगड़िया है। यहां 11.15 फीसदी वितरण हुआ है। आठवें स्थान पर वैशाली है और यहां 10.41 फीसदी जमाबंदी की प्रति का वितरण हो गया है। नौवें स्थान पर गोपालगंज एवं दसवें स्थान पर किशनगंज है। यहां क्रमशः 10.28 फीसदी एवं 9.29 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सभी 38 जिलों में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़, 59 लाख, 88 हजार 935 है। तीन दिन में सभी जिलों में कुल 23 लाख 08 हजार 574 जमाबंदी प्रति का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। ये कुल जमाबंदी का 6.41 फीसदी है। इस अभियान के तहत गांव–गांव जाकर राजस्व विभाग की टीमें लोगों को उनकी जमीन से जुड़ी जमाबंदी की प्रति उपलब्ध करा रही है। टीम द्वारा जमाबंदी की प्रति के साथ–साथ आवश्यक आवेदन प्रपत्र भी मौके पर  उपलब्ध कराई जा रही है। इस राजस्व महा–अभियान के दौरान जमीन के अभिलेखों की अशुद्धियों का त्वरित सुधार, बंटवारा नामांतरण, उत्तराधिकार   नामांतरण और छूटी हुई   जमाबंदियों को ऑनलाइन करने का काम हो रहा है। इस महा–अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को अपने कागजात में सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है।

सपा नेता को कार से खींचकर पीटा गया, प्लाजा कर्मियों पर बढ़ा गुस्सा

बाराबंकी यूपी में टोलकर्मियों की गुंडई लगातार सामने आ रही है। पहले मेरठ में सेना को पीटा गया अब बाराबंकी जिले में सपा नेता की पिटाई हुई है। जिसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस में दर्ज कराई है। आपको बता दें कि यह मामला लखनऊ बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग के शहाबपुर टोल प्लाजा का है। बूढ़ीपट्टी ग्राम प्रधान और सपा नेता देवेंद्र यादव घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान टोल गेट से VIP मूमेंट हो रहा था। जिससे शहाबपुर टोल प्लाजा पर वाहनों की लम्बी कतारें लगी हुई थी, वीआईपी वाहन पास होने के बाद भी टोल गेट को चालू न करने पर सपा नेता ने टोलकर्मी से वाहन पास करने के गेट खोलने को कहा तो टोल कर्मियों से बहस शुरू हो गई। कुछ समय में टोल कर्मी आग बबूला होकर सपा नेता पर टूट पड़े। आरोप है कि सपा नेता को कार से खींच कर जमकर लात-घुसों से पिटाई कर दी। पीड़ित प्रधान ने थाना मसौली मे टोलकर्मियों के विरुद्ध मारपीट की तहरीर दी है।

राशन कार्ड धारकों के लिए नई व्यवस्था, मुफ्त गेहूं अब मशीनों के जरिए मिलेगा

लुधियाना  पंजाब में मुफ्त गेहूं पाने वाले राशन कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राशन डिपो पर लाभार्थी परिवारों को वितरित किया जा रहा गेहूं फिलहाल केवल उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है जिन्होंने ई-के.वाई.सी. करवाया है क्योंकि ई-पॉश मशीन से केवल उनकी ही पर्चियां जारी हो रही हैं। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' से जुड़े परिवारों को दिए जा रहे मुफ्त गेहूं में लंबे समय से चल रहे घोटाले को रोकने के लिए सख्त रवैया अपनाया है, ताकि सरकारी अनाज की लगातार हो रही कालाबाजारी को रोका जा सके। सरकार ने इस योजना से जुड़े हर सदस्य को आदेश दिया है कि राशन कार्ड धारक अपने क्षेत्र के नजदीकी राशन डिपो पर जाकर मुफ्त में अपना ई-के.वाई.सी. करवा लें, अन्यथा उन्हें राशन डिपो से मिलने वाला मुफ्त गेहूं नहीं मिलेगा। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि इस मौजूदा चरण के दौरान, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से जुड़े लाभार्थी परिवारों को जुलाई से सितंबर तक 3 महीने के लिए मुफ्त गेहूं वितरित कर रही है।