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यूपी: प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की प्रगति का होगा नया आकलन सिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में इस समय गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। 20 मई से स्कूल बंद हैं और 15 जून तक बंद रहेंगे। 16 जून को सत्र का पहला दिन होगा। इस दिन स्कूलों में छात्र-छात्राओं का स्वागत तो होगा ही, नए शैक्षिक सत्र से परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित आकलन करने के लिए निपुण तालिका तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत लागू की जा रही यह व्यवस्था बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निपुण तालिका के माध्यम से शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की सीखने की प्रगति का रिकॉर्ड तैयार करना होगा। इसमें पढ़ना, लिखना, समझना तथा गणितीय दक्षताओं से संबंधित विभिन्न बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से छात्र निर्धारित दक्षताओं को प्राप्त कर चुके हैं और किन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अभिभावक अपने बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक प्रगति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इस व्यवस्था में परीक्षा परिणामों के बजाय बच्चों द्वारा अर्जित दक्षताओं के आधार पर प्रगति का आकलन किया जाएगा। 27 दिनों का दिया गया है ग्रीष्मकालीन अवकाश इस साल प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में 20 मई से 15 जून तक के लिए ही विद्यालय बंद रखे गए हैं। इस तरह इस बार छात्रों को कुल 27 दिन ग्रीष्मकालीन अवकाश मिले हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन्स और आधिकारिक आदेश के मुताबिक 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद 16 जून 2026 से सभी स्कूल दोबारा खोल दिए जाएंगे। इस दिन से बच्चे पहले की तरह नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में लौटेंगे। स्कूलों को इस शेड्यूल के हिसाब से तैयारी करने का आदेश दिया है। नए सत्र के लिए स्कूल परिसरों को पहले से साफ-सुथरा और व्यवस्थित कर लिया जाएगा। सत्र के पहले दिन हमेशा की तरह विद्यालय में विद्यार्थियों का स्वागत किया जाएगा। क्या बोले बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) धीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि निपुण तालिका के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर शिक्षक कमजोर छात्रों की पहचान कर उन पर विशेष ध्यान दे सकेंगे।

भीषण गर्मी में राहत, पीएचईडी के विशेष अभियानों से जलापूर्ति सुधरी

जयपुर  भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

लखनऊ पहले, इंदौर दूसरे, पटना तीसरे स्थान पर स्वच्छता फीडबैक रैंकिंग में

 पटना  स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत शहरों की साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं को लेकर लोगों से ऑनलाइन सिटिजन फीडबैक लिया जा रहा है। रविवार दोपहर तक जारी आंकड़ों में पटना ने सात लाख से भी अधिक सिटिजन फीडबैक के साथ देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। वहीं, बिहार के अन्य तीन स्मार्ट सिटी इस मामले में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। सबसे अधिक 9,03,240 सिटिजन फीडबैक के साथ लखनऊ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर इंदौर है, जहां से 8,63,752 लोगों ने अपनी राय दी है। पटना को अब तक 7,05,036 सिटिजन फीडबैक मिले हैं और वह देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि बिहार के शीर्ष-300 शहरों में पटना अकेला शहर है, जिसने उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज कराई है। पटना को छोड़ दें तो राज्य के अन्य तीन स्मार्ट सिटी नागरिक भागीदारी के मामले में काफी पीछे हैं। मुजफ्फरपुर को अब तक केवल 6,003 फीडबैक मिले हैं। भागलपुर में यह संख्या 4,828 रही, जबकि बिहारशरीफ की स्थिति सबसे कमजोर दिखी और वहां केवल 901 लोगों ने फीडबैक दिया। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के सिटीजन फीडबैक में पटना ने देशभर में चौथा स्थान हासिल किया था। रैंकिंग तय करने में अहम योगदान स्वच्छता सर्वेक्षण में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, सड़क सफाई और अन्य सुविधाओं पर लोगों की राय के आधार पर रैंकिंग तय की जाती है। पटना नगर निगम प्रशासन भी अधिक से अधिक लोगों से ऑनलाइन फीडबैक देने की अपील कर रहा है, ताकि शहर की वास्तविक स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तरीके से सामने आ सके। स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जा रहा है। वर्तमान में चल रहा फील्ड असेसमेंट निगम के लिए अहम माना जा रहा है। इस दौरान सिटीजन फीडबैक पोर्टल भी सक्रिय है। पोर्टल व एप के माध्यम से नागरिक दे सकते हैं फीडबैक पोर्टल cf.sbmurban.org या स्वच्छता एमओएचयूए एप के माध्यम से नागरिक फीडबैक दे सकते हैं। एक मोबाइल नंबर से केवल एक बार फीडबैक दर्ज होगा। केंद्रीय टीम के आन-फील्ड सत्यापन के दौरान भी नागरिकों से यही प्रश्न पूछे जा रहे हैं, जिसके अंक स्वच्छता सर्वेक्षण के कुल स्कोर में जोड़े जाएंगे। पूछे जा रहे 13 महत्वपूर्ण सवाल स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत शहरवासियों से साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े 13 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इनमें घर-दुकान से कचरा उठाव, सूखा-गीला कचरा पृथक्करण, नियमित सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) सेंटर की जानकारी तथा शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। 12,500 अंकों पर तय होगी नगर निकायों की रैंकिंग नगर निकायों की रैंकिंग कुल 12,500 अंकों के आधार पर तय होगी। इसमें ओडीएफ, वाटर प्लस एवं गार्बेज फ्री सिटी जैसे सर्टिफिकेशन के लिए 2,000 अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं, आन-ग्राउंड असेसमेंट को सबसे अधिक महत्व देते हुए इसके लिए 9,500 अंक तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नागरिकों की सहभागिता और संतुष्टि को ध्यान में रखते हुए सिटीजन फीडबैक के लिए 1,000 अंक निर्धारित किए गए हैं।

बिल्डिंग मालिक का फूटा गुस्सा, TMC से मांगा मुख्यालय खाली करने का जवाब

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस का मुख्यायल जिस भवन में है, उसके मालिक ने पार्टी से जगह खाली करने के लिए कहा है। इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब टीएमसी में बगावत जारी है और विधायक पहले ही दो गुट तैयार कर चुके हैं। टीएमसी के मौजूद मुख्यालय का पता A/P-1/A कैनाल साउथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के संपत्ति मालिक मोंटू साहा है और वह चाहते हैं कि टीएमसी उनकी संपत्ति को खाली कर दे। उनका कहना है कि टीएमसी के साथ कराया गया समझौता साल 2025 में ही खत्म हो गया है और वह पार्टी से लंबे समय से जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस में शिकायत जगह खाली नहीं करने को लेकर जारी विवाद के बाद साहा अपने बेटे अमित के साथ रविवार को प्रॉपर्टी पर पहुंचे थे। वह टीएमसी नेताओं से बात करने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुलिस का रुख किया है। खबर है कि पिता पुत्र कुछ घंटों तक इंतजार करने के बाद पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। क्या है प्लान उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी को प्रॉपर्टी से बाहर निकालने के लिए कानूनी मदद ली जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अमित का कहना है, 'पिछले साल के आखिर में जब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने उनसे कई बार संपर्क किया और कहा कि हमें हमारी बिल्डिंग वापस चाहिए। इस बिल्डिंग में मरम्मत का काम होना है और हमें अपने बिजनेस के लिए भी इसकी जरूरत है।' अमित ने कहा, 'उन्होंने हमसे कहा था कि वे जुलाई तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन हमें यह अभी वापस चाहिए। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं है। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।' रिपोर्ट के अनुसार, टीएएमसी के एक नेता का कहना है कि साहा ने संपत्ति किराये पर देकर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में कई कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं। TMC हेडक्वार्टर्स खास बात है कि टीएमसी के असली मुख्यालय पर भी विवाद जारी है। तृणमूल भवन नाम से पहचाने वाली इस बिल्डिंग पर बागी विधायक जावेद खान ने अपना दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल भवन जिस जमीन पर बना हुआ है, वह उनके परिवार की है। उन्होंने कहा था, 'मेरे पास यह साबित करने के लिए पूरे सबूत हैं कि तोपसिया रोड प्लॉट मेरे परिवार का है।' दरअसल, यहां रिनोवेशन का काम शुरू होने के बाद टीएमसी 2022 में साहा की प्रॉपर्टी में शिफ्ट हुई थी। साहा परिवार का कहना है कि यह जगह टीएमसी को साल 2022 में किराये पर दी गई थी। इससे पहले साहा यहां अरब रेसीडेंसी नाम का होटल चलाते थे।

राज्यसभा की दौड़ में नथवाणी की एंट्री, भाजपा नेताओं की मौजूदगी में भरा पर्चा

रांची. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार को उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। नामांकन के दौरान भाजपा के कई विधायक उनके साथ विधानसभा पहुंचे। झरिया से भाजपा विधायक रागिनी सिंह समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी ने उनके प्रति भाजपा के समर्थन के संकेत और मजबूत कर दिए। विधानसभा में नथवाणी को लेकर हटिया विधायक नवीन जायसवाल पहुंचे।  परिमल नथवाणी झारखंड से वर्ष 2008 और 2014 में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है और नथवाणी को समर्थन देने की रणनीति बनाई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के साथ-साथ सहयोगी दलों जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी उनके प्रस्तावक बनने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। हेमंत सोरेन से मुलाकात बनी चर्चा का विषय नामांकन से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिमल नथवाणी की मुलाकात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि दोनों पक्षों ने इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया है। वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नथवाणी के प्रस्तावक की भूमिका में नहीं है। बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नथवाणी के चाहने वाले झामुमो में भी हैं। कारण कि झारखंड के लिए उनका कार्यकाल अच्छा रहा है। मैं पुराना झारखंडी हूं … मैं पुराना झारखंडी हूं। मुझे विश्वास है कि मुझे जीत मिलेगी। सत्तापक्ष का भी साथ मिलेगा। मेरे दो कार्यकाल के काम को पूरा झारखंड देखा है। सबसे लेंगे सहयोग। सबसे मिलना आवश्यक है। हमने झारखंड के लिए जो काम किया है, उसके भरोसे वोट मांगेगे। -परिमल नथवाणी, राज्यसभा प्रत्याशी, झारखंड दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मीडिया सलाहकार प्रणव झा को मैदान में उतारा है। महागठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन कांग्रेस के विधायकों को एकजुट बनाए रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनाव के नतीजों पर इसका असर पड़ सकता है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिमल नथवाणी को भाजपा और उसके सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलता है, तो उनकी जीत की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं। उन्हें जीत के लिए केवल कुछ अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। नामांकन प्रक्रिया के साथ ही राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी गणित, संभावित क्रॉस वोटिंग और अंतिम समय में बनने वाले नए समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में और भी दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। स्थानीयता और राज्य के मुद्दे पर भी हैं.. नामांकन करना और जीतना दोनों अलग है। भाजपा के ही सभी विधायकों का भी उन्हें समर्थन मिलेगा, यह भी कहा नहीं जा सकता। स्थानीयता और राज्य के मुद्दे पर भी हैं। भाजपा ने किसी दलित को राज्यसभा नहीं भेजा?  -सुप्रियो भट्टाचार्य, महासचिव, झामुमो

19,024 फीट पर बिहार का परचम, शिवेंद्र का कमाल

बांकेबाजार गयाजी जिले के बांकेबाजार प्रखंड के फुलवरिया गांव निवासी शिवेंद्र वर्मा ने साहस, जुनून और दृढ़ संकल्प का अद्भुत परिचय देते हुए विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है. उन्होंने बाइक से कठिन हिमालयी मार्गों को पार कर दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रे उम्लिंग ला पास तक पहुंचने का गौरव हासिल किया है. पांच दिनों तक लगातार बाइक चलाकर हासिल की मंजिल शिवेंद्र वर्मा ने लगातार पांच दिनों तक बाइक से सफर करते हुए लेह-लद्दाख क्षेत्र की कई दुर्गम और ऊंची चोटियों को पार किया. 3 जून को उन्होंने समुद्र तल से लगभग 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उम्लिंग ला पास पहुंचकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रे तक बाइक से पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. BRO ने किया सम्मानित उनकी इस असाधारण उपलब्धि को मान्यता देते हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने उन्हें मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. यह सम्मान शिवेंद्र वर्मा की मेहनत, साहस और समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है. गांव से लेकर जिले तक खुशी का माहौल शिवेंद्र वर्मा की सफलता की खबर मिलते ही फुलवरिया गांव समेत पूरे बांकेबाजार और गया जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है. अमेरिकी कंपनी में हैं मैनेजर शिवेंद्र वर्मा वर्तमान में फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. पर्वतीय क्षेत्रों और साहसिक यात्राओं के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है. इसी जुनून और तैयारी के दम पर उन्होंने यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की. युवाओं के लिए बने प्रेरणा शिवेंद्र वर्मा की यह सफलता युवाओं को यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और निरंतर प्रयास के बल पर किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. उनकी उपलब्धि ने गया ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है.

वनमंत्री केदार कश्यप ने मर्दापाल में विकास कार्यों का किया लोकार्पण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मर्दापाल अंचल की 23 ग्राम पंचायतों में 4 करोड़ 6 लाख 67 हजार रूपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर इन बुनियादी विकास कार्यों का विधि-विधान से भूमिपूजन किया। इन स्वीकृत विकास कार्यों में मुख्य रूप से सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, रंगमंच और अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय ग्रामीणों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई गति प्राप्त होगी। ग्रामवार विकास कार्यों का विवरण ग्राम चांगे लगभग 77.96 लाख रूपए की लागत से पुलिया, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सीसी सड़क, रंगमंच और सामुदायिक भवन निर्माण। ग्राम मूलनार में लगभग 90.79 लाख रूपए की लागत से पुलिया, बाउंड्रीवाल, सीसी सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचागत विकास, ग्राम बड़ेकुरुषनार लगभग 88.14 लाख रूपए की लागत से पुलिया, रंगमंच, आहाता, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सांस्कृतिक भवन और पंचायत भवन का निर्माण, ग्राम बेचा लगभग 21.79 लाख की लागत से रंगमंच एवं माध्यमिक शाला भवन का भूमिपूजन और लोकार्पण, अन्य ग्राम पंचायतें रानापाल, कोंगेरा, मुंगवाल और चेरंग में 28 लाख रूपए तथा हथकली, मटवाल, पेरमापाल, नरिहा और आदनार में लगभग 1 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक भवन, सीसी सड़क, शाला भवन और पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया, शामिल है। गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता- वनमंत्री इस अवसर पर वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सुदूर गांवों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सड़क, शिक्षा, सामुदायिक अधोसंरचना और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। श्अटल डिजिटल सुविधा केंद्रोंश् के माध्यम से अब ग्रामीणों को सभी जरूरी शासकीय सेवाओं का लाभ उनके अपने गांव में ही मिल सकेगा। उन्होंने आगे जोड़ा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि सुशासन के माध्यम से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाकर हर गांव को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है।

विरासत की वस्तुएं विदेश कैसे पहुंचीं? MLA हॉस्टल फर्नीचर नीलामी मामले में जांच के आदेश

चंडीगढ़. चंडीगढ़ स्थित पंजाब एमएलए हॉस्टल से जुड़े हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका में हाल ही में नीलाम होने के मामले में विधानसभा स्पीकर की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं। जानकारी अनुसार चंडीगढ़ स्थित पंजाब एमएलए हॉस्टल से जुड़ा हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका के शिकागो में 72,720 डॉलर में नीलाम हुआ है, जिसक भारतीय मूल्य 59 लाख के करीब बताया गया है और इसकी नीलामी आगे भी जारी है। आगे से आगे नीलाम हो रहे इस फर्नीचर में दो हेरिटेज कुर्सियां और चार स्टूल शामिल हैं। इस मामले को लेकर चंडीगढ़ में हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल से जुड़े अजय जग्गा ने पंजाब मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर को शिकायत दी है, जिसके बाद विधानसभा स्पीकर की ओर से मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। अजय जग्गा के अनुसार एमएलए हॉस्टल से जुड़ी दो कुर्सियां 42 लाख और स्टूल 17 लाख में नीलाम हुईं। उन्होंने कहा कि मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स के कड़े निर्देशों के बावजूद चंडीगढ़ से जुड़े हेरिटेज फर्नीचर की विदेश में लगातार नीलामी हो रही है। नीलामी रोकने को लेकर चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से विशेष हेरिटेज कमेटी भी गठित की गई, जिसने इस मामले में कई बार केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को भी पत्र लिखा है, लेकिन हेरिटेज फर्नीचर की विदेश में नीलामी लगातार जारी है। अजय की ओर से पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की गई है, साथ ही उन्होंने पत्र में बताया कि हेरिटेज स्थल को चंडीगढ़ के चीफ सेक्रेटरी हेड करते हैं। पंजाब एमएलए हॉस्टल से जुड़े फर्नीचर को अब अमेरिका स्थित ऑक्शन हाउस राइट की ओर से नीलाम किया जा रहा है। ऑक्शन के लिए वेबसाइट पर डाला गया इस फर्नीचर को ऑक्शन के लिए संबंधित हाउस की ओर से वेबसाइट पर भी डाला गया है। इस मामले में पंजाब स्पीकर की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच करेंगे। जो हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका में नीलम हुआ है, वह कैपिटल प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इस नीलामी के बाद फिर से चंडीगढ़ के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा विधानसभा और एमएलए हाउस में रखे हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य एडवोकेट अजय जगह ने कहा कि भारत सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हेरिटेज फर्नीचर को सुरक्षित रखने के लिए विशेष तौर पर फर्नीचर की टैगिंग भी की गई है, जिसमें 12000 हेरिटेज फर्नीचर आइटम शामिल है। 500 करोड़ से अधिक का हेरिटेज फर्नीचर नीलाम चंडीगढ़ से जुड़ा हेरिटेज फर्नीचर विदेश में लगातार नीलाम हो रहा है। बीते 10 सालों में 500 करोड़ से अधिक के हेरिटेज आइटम अमेरिका सहित अन्य देशों में नीलाम किया जा चुके हैं। यह फर्नीचर कई वर्ष पहले चंडीगढ़ से चोरी छिपे विदेश में ले जाया गया। हेरिटेज फर्नीचर चंडीगढ़ का निर्माण करने वाले ली कार्बिजियर और उनके सहयोगी द्वारा तैयार किया गया था। हेरिटेज फर्नीचर से जुड़ा काफी आइटम पंजाब और हरियाणा विधानसभा हाई कोर्ट के अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा हुआ है।

0-2 की शर्मनाक हार के बाद PCB का बड़ा एक्शन, यूनुस खान बन सकते हैं नए टेस्ट कोच

नई दिल्ली बांग्लादेश के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में 0-2 की शर्मनाक हार ने पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल ला दिया है. जिस टीम के खिलाफ जीत की उम्मीद की जा रही थी, उसी के हाथों क्लीन स्वीप होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अब बड़े बदलावों की तैयारी में जुट गया है़. हालात ऐसे हैं कि टेस्ट कप्तान शान मसूद और मुख्य कोच सरफराज अहमद दोनों की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी इस हार से बेहद नाराज हैं और टेस्ट टीम में व्यापक बदलाव चाहते हैं. बोर्ड अब सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा नहीं कर रहा, बल्कि टीम की पूरी नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रहा है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पूर्व कप्तान यूनुस खान और मोहम्मद हफीज से संपर्क किया है. दोनों से राष्ट्रीय टीम में अहम जिम्मेदारियां संभालने को लेकर बातचीत की गई है. सूत्रों के मुताबिक पीसीबी के भीतर यह प्रस्ताव रखा गया है कि सरफराज अहमद को टेस्ट टीम के मुख्य कोच पद से हटाकर फिर से अंडर-19 और पाकिस्तान 'ए' टीम की जिम्मेदारी दी जाए. सरफराज को बांग्लादेश दौरे से ठीक पहले टेस्ट टीम का कोच बनाया गया था, लेकिन टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. एक सूत्र ने बताया, 'यूनुस खान और मोहम्मद हफीज दोनों की पीसीबी अधिकारियों से बातचीत हुई है. हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. …तो ये दिग्गज बनेगा नया टेस्ट कोच! पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल यूनुस खान को टेस्ट टीम का अगला कोच बनाने की तैयारी है. हालांकि बताया जा रहा है कि उन्होंने पीसीबी के सामने कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं और जब तक उन पर सहमति नहीं बनती, कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होगी. पीसीबी का मानना है कि टीम को फिर से मजबूत टेस्ट यूनिट बनाने के लिए ऐसे व्यक्ति की जरूरत है, जिसके पास अनुभव भी हो और खिलाड़ियों पर प्रभाव भी. सिर्फ कोच सरफराज अहमद ही नहीं, कप्तान शान मसूद का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है. बांग्लादेश के खिलाफ मिली हार के बाद उनकी कप्तानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि मसूद ने आगामी वेस्टइंडीज और इंग्लैंड सीरीज तक खुद को मौका देने की अपील की है, लेकिन बोर्ड के भीतर बदलाव की मांग लगातार मजबूत होती जा रही है. ऐसे में उनकी कप्तानी पर फैसला जल्द लिया जा सकता है. पूर्व कप्तान मोहम्मद हफीज को मुख्य चयनकर्ता और इंटरनेशनल क्रिकेट डिपार्टमेंट का प्रमुख बनाने पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि पीसीबी के कुछ अधिकारी इस फैसले को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. दरअसल, हफीज पिछले कुछ महीनों में टीम और बोर्ड की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं. ऐसे में उनके बोर्ड से जुड़ने पर नई बहस छिड़ सकती है. बोर्ड ने इस बीच राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में 49 खिलाड़ियों के लिए रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल कैम्प का भी ऐलान किया है. पीसीबी का कहना है कि यह कैम्प आने वाली अंतरराष्ट्रीय और घरेलू चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. खिलाड़ियों को फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही कोचों और मेडिकल स्टाफ के साथ व्यक्तिगत सत्र भी आयोजित किए जाएंगे.

सियासी बयानबाजी तेज! स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस को घेरा, नेता प्रतिपक्ष महंत ने किया पलटवार

रायपुर. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कवायद शुरू हो गई है. पद के लिए कई दावेदार हैं, कुछ मुखर हैं, तो कुछ पर्दे के पीछे गुप-चुप तरीके से अपने काम में जुटे हैं. प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल के इस अहम पद को लेकर जहां भाजपा नेता और मंत्री तंज कस रहे हैं, तो कांग्रेस नेता भी उसी तंज भरे लहजे में जवाब दे रहे हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में कई और नेता शामिल होने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि पिछले 3 सालों से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का मुद्दा प्रदेश में घूम रहा है. अब यह बोरिंग चेप्टर हो चुका है. कांग्रेस को पूरे प्रदेश ने ही भुला दिया है. कांग्रेस की गतिविधियों को याद रखना, बुद्धिमानी वाला काम नहीं है. जब से मैने होश संभाला है, देख रहा कि इनमे आपसी मतभेद ही रहता है. कांग्रेस की परम्परा और संस्कार में ही गुटबाजी है. यहीं समय- समय पर उभरता है. स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि हमारे में तो ऐसा नहीं है. वो अभी – अभी आए हैं, इनको कहाँ से पता लग गया. कांग्रेस में सब ठीक चल रहा है. उन्होंने कहा कि हम जो चार-पांच लोग अगुवाई कर रहे हैं, उनमें सब ठीक है. सामूहिक नेतृत्व में हम विश्वास करते हैं. चुनाव भी सामूहिक नेतृत्व में होगा. कांग्रेस में कुछ भी निर्णय होता है, तो सामूहिक नेतृत्व के आधार पर होता है. डॉ. महंत ने कहा कि आने वाले समय में जिन – जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, उनमें प्रदेश अध्यक्ष बदलने की पूरी संभावना है. छत्तीसगढ़ के बारे में भी चर्चा है. लेकिन जब तक राहुल गांधी का यहां दौरा और जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण नहीं हो जाता, तब तक इसकी कोई जरूरत नहीं है. खाद-बीज को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन चरण दास महंत ने इसके साथ खाद-बीज को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि सरकार का सब ठीक है, कहना उचित नहीं है. निचले स्तर पर समस्या अभी भी है, गांव में तकलीफ है. गांव में काम नहीं हो रहा है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप है. इसकी चिंता सबको है, लेकिन मंत्रीगणों को नहीं दिख रहा है. इसमें गंभीरतापूर्वक मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए जो आज की जरूरत है. देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात इंडियन एलायंस की बैठक पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि आज दिल्ली में इंडिया एलायंस की बैठक है. देश में महंगाई, डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस और खाद्य सामग्री के बढ़ते दामों पर चर्चा होगी. देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका और आगे की रणनीति पर मंथन होगा.