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TMC के 20 बागी सांसदों को फिर मिली मोहलत, अब 8 अक्टूबर तक देना होगा जवाब

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में जाने वालीं सांसद सायोनी घोष समेत 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ी अर्जी पर जवाब देने के लिए लोकसभा सचिवालय ने एक बार फिर नरमी दिखाई है। लोकसभा सचिवालय ने इन सांसदों को जवाब दाखिल करने की समय-सीमा 15 दिन के लिए आगे बढ़ा दी है। लोकसभा सचिवालय ने अब TMC के बागी सांसदों से 8 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। उन्हें दी गई समय सीमा 22 सितंबर को खत्म हो गई थी। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से और एक महीने की मोहलत मांगी थी लेकिन स्पीकर ने 15 दिन का समय दिया है। इससे पहले 26 अगस्त को लोकसभा सचिवालय ने इन बागी सांसदों को पहले जवाब देने के लिए सात दिन की मोहलत मिली थी फिर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 22 सितंबर तक की मोहलत बढ़ा दी थी। अब एक बार फिर से इन बागी सांसदों को मोहलत मिली है। बता दें कि ममता गुट वाली TMC के अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई करने की मांग लोकसभा अध्यक्ष से की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी। SC ने भी दो दिन पहले दिए थे निर्देश दो दिन पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष से इन सांसदों के मामले पर तुरंत फैसला लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने बुधवार को उम्मीद जताई थी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्य करार देने की मांग वाली याचिका पर ''जल्द'' निर्णय लेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उन्हें पता है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकते, ''लेकिन हम महज उन्हें मामले के शीघ्र समाधान के लिए स्मरण कराना चाहते हैं।'' लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है यह याचिका पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी। सुनवाई शुरू होने पर, तृणमूल नेता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि बागी सांसदों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उन्होंने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है तथा और समय मांगा है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि अध्यक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। मेहता ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है। वह मामले की गंभीरता को समझते हैं।'' 20 में से 17 हो सकते हैं भाजपा में शामिल अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेने में हुई कथित देरी को चुनौती दी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने का निर्देश देने का न्यायालय से अनुरोध किया था। इस बीच, 20 सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

ममता बनर्जी को बड़ी राहत, TMC के बैंक अकाउंट का मिला एक्सेस

कलकत्ता चुनाव आयोग की तरफ से 'जोड़ाफूल' सिंबल फ्रीज किए जाने के झटके के बीच 'कालीघाट तृणमूल' (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव का बैंक खातों के इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने तीनों बैंक खातों का संचालन पूर्व आदेश के तहत ही करती रहेगी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा। कैसे निकाल सकेंगे बैंक अकाउंट से पैसा? हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट के संचालन के लिए तय की गई अंतरिम व्यवस्था को अब 29 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। पैसा निकालने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी: दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता: ममता तृणमूल गूट के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे। स्पेशल ऑफिसर की स्क्रूटनी: अदालत की तरफ से नियुक्त विशेष अधिकारी पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों की जांच करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी के बाद ही बैंक संबंधित राशि का भुगतान करेगा। जुलाई के अंतरिम आदेश को कोर्ट ने फिर बढ़ाया यह मामला सबसे पहले जुलाई में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने आया था, जब पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस समय हाईकोर्ट ने रिटायर जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 सितंबर तक खातों के अस्थायी प्रबंधन का आदेश दिया था। अब बेंच ने 9 जुलाई के उसी आदेश की अवधि को 29 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी को अपने दैनिक और कानूनी खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिलेगी। 28 साल पुरानी पार्टी दो धड़ों में बंटी, हाथ से छूटा 'जोड़ाफूल' ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) की नींव रखी थी। पिछले 28 वर्षों से 'जोड़ाफूल' (घास पर दो फूल) और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान का आधार रहा है। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने के भीतर ममता बनर्जी की बनाई यह पार्टी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और व्यावहारिक रूप से दो धड़ों में टूट चुकी है। ममता बनर्जी गुट (कालीघाट कैंप): चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह धड़ा आगामी उपचुनावों में 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी कैंप): इस धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है। पार्टी के नाम और 28 साल पुराने ऐतिहासिक चुनाव चिन्ह के छिन जाने के बाद ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

कोलकाता में ED की ताबड़तोड़ रेड, TMC फंड केस में 5 ठिकानों पर कार्रवाई; अभिषेक बनर्जी की फ्लाइट पर उठे सवाल

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों और चुनावी चंदे में मचे घमासान के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें कोलकाता और उसके आसपास सॉल्ट लेक, राजारहाट और राधाबाजार समेत पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। ईडी के अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को साथ लेकर एक चार्टर्ड एविएशन कंपनी के डायरेक्टरों के घर और दफ्तरों को खंगाल रहे हैं। पूरा मामला टीएमसी के खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स जांच के दायरे में मंगलवार की सुबह ईडी की टीम सबसे पहले 'केयरवेल एविएशन' नाम की कंपनी के निदेशकों के घर पहुंची। जांच में यह बात सामने आई है कि इसी कंपनी के प्राइवेट विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य बड़े नेता दौरों के लिए करते रहे हैं। सॉल्ट लेक में रहने वाले कंपनी के दो निदेशकों, पवन जाजू और राजेश जाजू के घर पर टीम मौजूद है और उनसे बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही राजारहाट और राधाबाजार स्थित केयरवेल एविएशन के दफ्तरों पर भी छापेमारी चल रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या नेताओं के लिए बुक होने वाले इन महंगे चार्टर्ड विमानों का भुगतान टीएमसी के उन्हीं खातों से किया जा रहा था, जिन्हें लेकर शिकायत दर्ज है। पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद की थी बैंक खाते फ्रीज करने की मांग दरअसल, टीएमसी के इन बैंक खातों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद बैंक अधिकारियों को एक चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने खुद को पार्टी का अधिकृत कोषाध्यक्ष बताते हुए इन खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने और इन्हें फ्रीज करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा साइबर क्राइम ब्रांच में भी वित्तीय गबन को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से ही ये खाते केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। भाजपा विधायक की शिकायत पर पुलिस ने की थी कार्रवाई इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आया जब जयनगर से भाजपा विधायक ने निजी बैंक के तीन खातों में भारी गड़बड़ी और संदिग्ध लेन-देन का आरोप लगाते हुए बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में साफ कहा गया था कि इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का खेल चल रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बैंक को पत्र लिखकर तीनों खातों को तुरंत फ्रीज करवा दिया था, जिसकी कड़ियां जोड़ते हुए अब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। "चार्टर्ड फ्लाइट का किराया इसी संदिग्ध पैसे से दिया गया" पार्टी के भीतर और बाहर इस भारी खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रीतब्रत बनर्जी ने इस पूरे विवाद पर तीखा दावा करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए जो मोटी रकम पानी की तरह बहाई गई, वह इसी फंड से निकली थी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "हमारे लिए अब यह साबित कर पाना नामुमकिन है कि इस खाते में जमा किया गया करोड़ों रुपया किसी घोटाले, डकैती, जबरन वसूली या भ्रष्टाचार की कमाई का हिस्सा नहीं है। साफ दिख रहा है कि वीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स का लाखों-करोड़ों का किराया इसी संदिग्ध पैसे से चुकाया जा रहा था।" फिलहाल ईडी की टीमें दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में टीएमसी के कई बड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  

TMC Symbol Row: क्या ममता बनर्जी से छिन जाएगा पार्टी का चुनाव चिह्न? आज EC पहुंचेगा ऋतब्रत गुट

कोलकत्ता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा।  ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनका प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा और यह बताएगा कि असली तृणमूल कांग्रेस उनका गुट है. उन्होंने बताया कि 22 जून को विधानसभा के विशेष सत्र के बाद आयोग को पूरी घटना की जानकारी और सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे. अब आयोग ने उनकी बात सुनने के लिए समय दिया है।  यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच संगठन और राजनीतिक पहचान को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं।  58 विधायकों के साथ टीएमसी के बागी हैं ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद TMC में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 80 में से कमोबेश 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना ली और ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आ गए. इसके बाद बागी गुट ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना और 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी ऐलान किया।  तब से दोनों गुट पार्टी संगठन, विधायी दल और चुनावी पहचान पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं. इसी विवाद के चलते चुनाव आयोग की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है. माना जा रहा है कि आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा।  ऋतब्रत बनर्जी का टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि उनके गुट को चुनाव चिह्न पर अलग से दावा करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि असली तृणमूल कांग्रेस वही हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के ज्यादातर निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं।  अब सभी की नजर चुनाव आयोग की इस बैठक पर टिकी है. अगर विवाद गहराता है तो आयोग को यह तय करना पड़ सकता है कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' किस गुट के पास रहेगा. ऐसे में आज की बैठक पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 

ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात।  पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया! सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।  पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है।  आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।  बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

आवास योजना में कट मनी विवाद, आरोपों के बाद TMC नेताओं ने लौटाई रकम

 कूचबिहार पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद 'आवास योजना' के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से 'कट मनी' यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे।  खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए।  आरोपों पर क्या बोले TMC नेता? पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे।  आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, "पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं।  TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

ममता बनर्जी ने कई नेताओं पर कार्रवाई की, यूथ विंग अध्यक्ष सायोनी घोष हटाई गईं

कोलकाता ममता बनर्जी की TMC के ज्यादातर विधायकों और सांसदों ने बगावत कर ली है और नया गुट बना लिया है। TMC बनने के बाद से ममता बनर्जी के ऊपर आया यह सबसे बड़ा संकट है। विधानसभा में करीब 64 विधायक अलग हो गए, जबकि लोकसभा में 20 सांसदों ने नया गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। जिन सांसदों ने बगावत की है, उसमें एक समय सबसे ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की करीबी नेता मानी जाने वाली सायोनी घोष भी शामिल हैं। अब ममता बनर्जी ने सायोनी को बड़ा झटका दिया है। उन्हें तृणमूल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष वही नेता हैं, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काबा-मदीना वाला गीत गाकर सुर्खियां बंटोरी थीं। टीएमसी की शनिवार को वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें जिन नेताओं ने विरोधी गुट का दामन थाम लिया था, उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया। सायोनी के अलावा, सुदीप बंद्दोपाध्याय को कोलकाता उत्तर के पार्टी प्रमुख पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, माला रॉय को भी वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक के बाद, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "यह वर्किंग कमेटी की बैठक थी। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, इसलिए दो पद खाली हो गए। सुदीप बंद्योपाध्याय, माला रॉय और एक और व्यक्ति, जो दूसरी तरफ चले गए हैं और अलग गुट बना रहे हैं, उन्हें वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय की जगह कुणाल घोष को कोलकाता उत्तर का अध्यक्ष बनाया गया है। सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। 4000 EVM का जलना एक गंभीर मामला है, हम इसे आगे उठाएंगे।" ममता के एक और सांसद हुए बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और ममता के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी हो गए। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उनके साथ पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय भी थीं। बंद्योपाध्याय और यादव की मुलाकात ने पार्टी के भीतर जारी संकट के बीच नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या वरिष्ठ सांसद बंद्योपाध्याय बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब बंद्योपाध्याय ने यादव से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कथित तौर पर मुलाकात की।

ममता बनर्जी ने संगठन में किया बदलाव, महिला मोर्चे की जिम्मेदारी बदली

पश्चिम बंगाल बंगाल में चुनाव के बाद टीएमसी में शुरू हुए बड़े संकट के बीच ममता बनर्जी पार्टी में बड़े बदलाव करने में जुटी हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान 'काबा-मदीना' और अन्य गीत गाकर जनता को लुभाने की कोशिश करने वाली सायोनी घोष को युवा मोर्चे के अध्यक्ष पद से हटा दिया है और यह जिम्मेदारी अर्णब बनर्जी को दे दी है। सायोनी घष जादवपुर से सांसद हैं। उन्हें एक सप्ताह पहले ही युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गाय था। सायोनी घोष भी बागी गुट में शामिल सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने महिाल मोर्चे की अध्यक्ष को भी बदल दिया है।कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब ममता बनर्जी ने नाडिया जिले की कालीगंज सीट से विधायक आलिफा अहमद को महिला मोर्चे का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि सायोनी और माला रॉय दोनों ही बागी नेताओं के साथ शामिल हो गई हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर अपने गुट को 'वास्तविक टीएमसी' घोषित करने का दावा पेश कर सकते हैं। लोकसभा में एनडीए के समर्थन को तैयार बागी गुट जानकारी के मुताबिक सांसद संदीप बंधोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल हो गए हैं। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसद हैं जिनमें से 20 बागी गुट में शमिल हैं। सांसद काकोली गोष दस्तीदार ने तो यहां तक कह दिया है कि उनके गुट को टीएमसी का तमगा मिलते ही वे संसद में बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का समर्थन कर देंगे। बता दें कि विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद ही ममता बनर्जी ने 5 जून को संगठन समिति में बदलाव किए थे। ममता बनर्जी ने पहले की सारी समितियों को भंग कर दिया था और एक नया स्टरक्चर बनाया था। वहीं ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा था। एक राज्यसभा सांसद ने कहा, ममता बनर्जी ने जिन लोगों को दूध और शहद खिलाया वही आज उनके लिए सांप बन गए हैं। बालाघाट से सांसद कुणाल घोष को पार्टी के उत्तर कोलकाता संगठन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पहले इस पद पर संदीप बंधोपाध्याय थे। चर्चा यह भी चल रही है कि ममता बनर्जी टीएमसी के कांग्रेस में विलय की घोषणा कर सकती हैं। हालांकि डेरेक ओ ब्रायन ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रायन ने कहा, 'मैं टीएमसी के किसी दूसरी पार्टी में विलय की इस फर्जी खबर को खारिज करना चाहता हूं। यह निराधार है। हां, मेरे दोस्त केसी वेणुगोपाल ने इसके लिए बिल्कुल सही शब्द इस्तेमाल किया है।'

TMC-Congress विलय की चर्चा पर बड़ा खुलासा, जानिए क्यों ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं है यह फैसला

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों का आपस में विलय की अटकलें शुरू हो गई. इन मुलाकातों के बाद कांग्रेस की ओर से अपने तमाम प्रदेश अध्यक्ष को मीटिंग के लिए बुलावा भेजे जाने के बाद टीएमसी का कांग्रेस में विलय की अटकलें और तेज हो गई. हालांकि टीएमसी की तरफ से इन अटकलों को खारिज कर दिया गया है और कांग्रेस ने भी प्रदेश अध्यक्षों के साथ अपनी बैठक को टाल दिया है. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच विलय को लेकर बातचीत में किसी बिंदु पर गतिरोध है. इन चर्चाओं के बीच विशेषज्ञों ने अपनी बात सामने रखी है. संविधान विशेषज्ञ का कहना है कि ममता बनर्जी के चाहने के बावजूद वह अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में नहीं कर पाएंगी।  सुप्रीम कोर्ट के वकील ने समझाया पार्टियों के विलय का पूरा समीकरण सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने कहा कि राजनीतिक दलों का विलेय दो तरह से होता है. एक विधायी विलय, जिसको हम लेजिस्लेटिव मर्जर कहते हैं. दूसरा होता है ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर, जिसको हम सांगठनिक विलय कहते हैं. दोनों परिस्थितियों में दो तिहाई बहुमत होना जरूरी है. जब आप विधायी विलय करते हैं तो लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा के दो तिहाई सदस्यों का सहमति पत्र होना चाहिए. वहीं सांगठनिक विलय में भी तमाम राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय पार्टी पदाधिकारियों का दो तिहाई समर्थन चाहिए।  उन्होंने कहा की तारीख में ममता बनर्जी पार्टी प्रमुख होने के नाते अगर टीएमसी का विलय करना भी चाहती हैं तो उन्हें सबसे पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को यह आश्वस्त करना होगा कि उनके इस फैसले के साथ पार्टी पदाधिकारी या सांसद-विधायकों में दो तिहाई समर्थन प्राप्त है।  वरिष्ठ अधिवक्ता इसके अलावा विलय के लिए दोनों दलों के मुख्य संगठन माने पार्टी हाईकमान आपस में औपचारिक विलय का प्रस्ताव पारित करते हैं. मूल पार्टी के कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति से विलय होता है. तभी एंटी डिफेक्शन लॉ (दल-बदल विरोधी कानून) और मर्जर क्लॉज कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी (विलय की संवैधानिक वैधता) कार्यान्वयन में मदद करेगा. इसके बिना लेजिसलेटिव मर्जर कर देते हैं और दो तिहाई सदस्य नहीं है तो वह भी नहीं माना जाएगा. संगठन का विलय कर देते हैं तो भी नहीं माना जाएगा।  उन्होंने समझाया कि विलय में यह भी देखना होगा कि जिन लोगों ने खुद को अलग गुट घोषित कर दिया है, वह कहां हैं. चुनाव आयोग को आश्वस्त होना पड़ेगा कि विलय के समय ब्लॉक से लेकर केंद्रीय स्तर के संगठन और उसके जो ऑफिस बियरर्स हैं वो किसके साथ है. क्योंकि वो रिप्रेजेंट करते हैं कितनी मेंबरशिप है. तभी यह ऐसा हो सकता है और हमने हाल ही में महाराष्ट्र के केस में दोनों पॉलिटिकल पार्टीज के केस में इलेक्शन कमीशन का फैसला देखा भी है. क्योंकि संगठन और विधायिका दोनों के मर्जर के बाद इलेक्शन कमिशन ने जो निर्णय लिया था।  अश्विनी दुबे ने बताया कि अयोग्यता केवल लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा सदस्यों का कहा सकता है. लेकिन संगठन के लोगों का डिसक्वालीफिकेशन नहीं हो सकता है. दूसरी पार्टी की मान्यता तब मिलेगी जब उसमें भी दो तिहाई सदस्य जो पार्टी के सदस्य हैं वो वो तैयार हो जाएं करें।  उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट और एनसीपी की टूट सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया था कि सिर्फ अगर विधायक चाहे और सांसद चाहें तो वो अपने हिसाब से पार्टी को ले जाकर मर्ज नहीं कर सकते. अलग पार्टी नहीं बना सकते तो वो विलय भी नहीं कर सकते।  कहा कि चाहे लोकसभा हो, चाहे राज्यसभा हो, चाहे विधानसभा हो, इनसाइड द हाउस तो बागी गुट अपना नेता चुन सकता है अपने फैसले ले सकता है, लेकिन पार्टी का वो रिप्रेजेंटेटिव नहीं माना जाएगा. ये नहीं माना जाएगा कि बाहर भी वो पार्टी का रिप्रेजेंटेटिव है. लेकिन जैसे लोकसभा के अंदर विधानसभा के अंदर जो तो तिहाई बहुमत वो बहुमत अगर पार्टी जो मूल पार्टी है मूल पार्टी पर दावा करते हैं कि हम ही यहां विधानसभा या लोकसभा में रिप्रेजेंट करते हैं. कहेंगे कि ये हमारे चुनाव में जीते हुए लोगों के नंबर हैं, तो वहां उनकी वैद्यता मानी जाएगी. लेकिन बाहर संगठन में वो रिप्रेजेंट नहीं कर सकते. संगठन के रिप्रेजेंटेशन के लिए संगठनिक विलय और संगठनिक विलय के लिए ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर के लिए वह जो सदस्यों की संख्या है वो इंश्योर करना जरूरी है रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के मुताबिक तो अंदर वो कर सकते हैं बाहर नहीं और यही सुप्रीम कोर्ट में अभी मामला पेंडिंग है।  . कहां से शुरू हुई टीएमसी और कांग्रेस के विलय की खबरें बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के महज 80 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी में भगदड़ मच गई है. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 विधायकों ने बागी गुट बना लिया और पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपनी अलग मान्यता प्राप्त कर ली है. उनका दावा है कि उनके बागी गुट में अब तक तृणमूल कांग्रेस 65 विधायक आ चुके हैं. लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 सांसदों की सूची स्पीकर ओम बिरला को सौंपे जाने का दावा किया गया है. दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के इन बागी सांसदों ने एनडीए सरकार का सपोर्ट करने की बात कही है. उधर, राज्य सभा में अब तक टीएमसी के तीन सांसदों सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।  इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्षी दलों के संगठन इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कीं. इसके अलावा टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद खबरें उड़ने लगी कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है. हालांकि करीब 24 घंटे बाद कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने ऐसे किसी विलय से इनकार कर दिया है।   

ममता को एक और बड़ा झटका? देर रात बागी नेताओं ने शुभेंदु से की मुलाकात, सायोनी घोष की मौजूदगी से बढ़ी चर्चा

नई दिल्‍ली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तिनका-तिनका होती नजर आ रही है. विधायकों के एक बड़े ग्रुप के ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाने के बाद अब टीएमसी लोकसभा सांसदों का एक ग्रुप भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने जा रहा है, जल्‍द ही इसका ऐलान हो सकता है. बीती रात टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सायोनी घोष केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे, जिससे नई अटकलों का दौर शुरू हो गया है. क्‍या टीएमसी के बागी लोकसभा सदस्‍य बीजेपी का हाथ थामने जा रहे हैं? भूपेंद्र यादव के घर एक घंटा चली बागी TMC सांसदों की बैठक  भूपेंद्र यादव के घर मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई बागी टीएमसी सांसदों की बैठक में क्‍या बात हुई, ये तो सामने नहीं आई है. लेकिन इतने जरूर संकेत मिल रहे हैं कि टीएमसी बिखर रही है और जल्‍द ही कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. बताया जा रहा है कि सायोनी घोष समेत 4 से 5 टीएमसी सांसद इस बैठक में शामिल हुए. ये बैठक लगभग एक घंटे तक चली. हैरानी की बात ये रही कि इस बैठक में टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों का नेतृत्‍व करने का दावा कर रहीं काकोली घोष इस बैठक में नहीं पहुंचीं. सूत्रों की मानें तो अब टीएमसी के बागी ग्रुप में ज्‍यादा से ज्‍यादा समर्थन जुटाने पर जोर है. टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 19 बागी हो गए हैं।  बागियों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम!   सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में बीजेपी संग टीएमसी नेताओं की और भी बैठकें हो सकती हैं. बता दें कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को हस्ताक्षर करके एक पत्र भी सौंपा है, जिसमें 19 सांसदों के नाम हैं. इन नामों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम है. काकोली घोष इस बागी सांसदों के ग्रुप का नेतृत्‍व कर रही हैं. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसी कोई लिस्‍ट जारी नहीं की गई है, जिसमें ये कहा गया हो कि उनकी पार्टी के सांसद बागी हो रहे हैं।  ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था।  क्‍या TMC का कांग्रेस में होने जा रहा विलय? ममता बनर्जी की दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से हुई मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं. इसी बीच टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने इन चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास 64 विधायक है और आगे ये संख्या बढ़ेगी, लेकिन कोई भी कांग्रेस में शामिल होने वाले नहीं है. ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हुई बैठक और बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अभिषेक बनर्जी की अलग से हुई बैठक के बाद टीएमसी के कांग्रेस में पुनर्विलय की अटकलों को बल मिला. ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चली गईं।