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ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात।  पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया! सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।  पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है।  आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।  बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

आवास योजना में कट मनी विवाद, आरोपों के बाद TMC नेताओं ने लौटाई रकम

 कूचबिहार पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद 'आवास योजना' के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से 'कट मनी' यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे।  खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए।  आरोपों पर क्या बोले TMC नेता? पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे।  आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, "पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं।  TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

ममता बनर्जी ने कई नेताओं पर कार्रवाई की, यूथ विंग अध्यक्ष सायोनी घोष हटाई गईं

कोलकाता ममता बनर्जी की TMC के ज्यादातर विधायकों और सांसदों ने बगावत कर ली है और नया गुट बना लिया है। TMC बनने के बाद से ममता बनर्जी के ऊपर आया यह सबसे बड़ा संकट है। विधानसभा में करीब 64 विधायक अलग हो गए, जबकि लोकसभा में 20 सांसदों ने नया गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। जिन सांसदों ने बगावत की है, उसमें एक समय सबसे ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की करीबी नेता मानी जाने वाली सायोनी घोष भी शामिल हैं। अब ममता बनर्जी ने सायोनी को बड़ा झटका दिया है। उन्हें तृणमूल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष वही नेता हैं, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काबा-मदीना वाला गीत गाकर सुर्खियां बंटोरी थीं। टीएमसी की शनिवार को वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें जिन नेताओं ने विरोधी गुट का दामन थाम लिया था, उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया। सायोनी के अलावा, सुदीप बंद्दोपाध्याय को कोलकाता उत्तर के पार्टी प्रमुख पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, माला रॉय को भी वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक के बाद, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "यह वर्किंग कमेटी की बैठक थी। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, इसलिए दो पद खाली हो गए। सुदीप बंद्योपाध्याय, माला रॉय और एक और व्यक्ति, जो दूसरी तरफ चले गए हैं और अलग गुट बना रहे हैं, उन्हें वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय की जगह कुणाल घोष को कोलकाता उत्तर का अध्यक्ष बनाया गया है। सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। 4000 EVM का जलना एक गंभीर मामला है, हम इसे आगे उठाएंगे।" ममता के एक और सांसद हुए बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और ममता के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी हो गए। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उनके साथ पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय भी थीं। बंद्योपाध्याय और यादव की मुलाकात ने पार्टी के भीतर जारी संकट के बीच नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या वरिष्ठ सांसद बंद्योपाध्याय बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब बंद्योपाध्याय ने यादव से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कथित तौर पर मुलाकात की।

ममता बनर्जी ने संगठन में किया बदलाव, महिला मोर्चे की जिम्मेदारी बदली

पश्चिम बंगाल बंगाल में चुनाव के बाद टीएमसी में शुरू हुए बड़े संकट के बीच ममता बनर्जी पार्टी में बड़े बदलाव करने में जुटी हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान 'काबा-मदीना' और अन्य गीत गाकर जनता को लुभाने की कोशिश करने वाली सायोनी घोष को युवा मोर्चे के अध्यक्ष पद से हटा दिया है और यह जिम्मेदारी अर्णब बनर्जी को दे दी है। सायोनी घष जादवपुर से सांसद हैं। उन्हें एक सप्ताह पहले ही युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गाय था। सायोनी घोष भी बागी गुट में शामिल सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने महिाल मोर्चे की अध्यक्ष को भी बदल दिया है।कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब ममता बनर्जी ने नाडिया जिले की कालीगंज सीट से विधायक आलिफा अहमद को महिला मोर्चे का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि सायोनी और माला रॉय दोनों ही बागी नेताओं के साथ शामिल हो गई हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर अपने गुट को 'वास्तविक टीएमसी' घोषित करने का दावा पेश कर सकते हैं। लोकसभा में एनडीए के समर्थन को तैयार बागी गुट जानकारी के मुताबिक सांसद संदीप बंधोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल हो गए हैं। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसद हैं जिनमें से 20 बागी गुट में शमिल हैं। सांसद काकोली गोष दस्तीदार ने तो यहां तक कह दिया है कि उनके गुट को टीएमसी का तमगा मिलते ही वे संसद में बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का समर्थन कर देंगे। बता दें कि विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद ही ममता बनर्जी ने 5 जून को संगठन समिति में बदलाव किए थे। ममता बनर्जी ने पहले की सारी समितियों को भंग कर दिया था और एक नया स्टरक्चर बनाया था। वहीं ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा था। एक राज्यसभा सांसद ने कहा, ममता बनर्जी ने जिन लोगों को दूध और शहद खिलाया वही आज उनके लिए सांप बन गए हैं। बालाघाट से सांसद कुणाल घोष को पार्टी के उत्तर कोलकाता संगठन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पहले इस पद पर संदीप बंधोपाध्याय थे। चर्चा यह भी चल रही है कि ममता बनर्जी टीएमसी के कांग्रेस में विलय की घोषणा कर सकती हैं। हालांकि डेरेक ओ ब्रायन ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रायन ने कहा, 'मैं टीएमसी के किसी दूसरी पार्टी में विलय की इस फर्जी खबर को खारिज करना चाहता हूं। यह निराधार है। हां, मेरे दोस्त केसी वेणुगोपाल ने इसके लिए बिल्कुल सही शब्द इस्तेमाल किया है।'

TMC-Congress विलय की चर्चा पर बड़ा खुलासा, जानिए क्यों ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं है यह फैसला

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों का आपस में विलय की अटकलें शुरू हो गई. इन मुलाकातों के बाद कांग्रेस की ओर से अपने तमाम प्रदेश अध्यक्ष को मीटिंग के लिए बुलावा भेजे जाने के बाद टीएमसी का कांग्रेस में विलय की अटकलें और तेज हो गई. हालांकि टीएमसी की तरफ से इन अटकलों को खारिज कर दिया गया है और कांग्रेस ने भी प्रदेश अध्यक्षों के साथ अपनी बैठक को टाल दिया है. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच विलय को लेकर बातचीत में किसी बिंदु पर गतिरोध है. इन चर्चाओं के बीच विशेषज्ञों ने अपनी बात सामने रखी है. संविधान विशेषज्ञ का कहना है कि ममता बनर्जी के चाहने के बावजूद वह अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में नहीं कर पाएंगी।  सुप्रीम कोर्ट के वकील ने समझाया पार्टियों के विलय का पूरा समीकरण सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने कहा कि राजनीतिक दलों का विलेय दो तरह से होता है. एक विधायी विलय, जिसको हम लेजिस्लेटिव मर्जर कहते हैं. दूसरा होता है ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर, जिसको हम सांगठनिक विलय कहते हैं. दोनों परिस्थितियों में दो तिहाई बहुमत होना जरूरी है. जब आप विधायी विलय करते हैं तो लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा के दो तिहाई सदस्यों का सहमति पत्र होना चाहिए. वहीं सांगठनिक विलय में भी तमाम राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय पार्टी पदाधिकारियों का दो तिहाई समर्थन चाहिए।  उन्होंने कहा की तारीख में ममता बनर्जी पार्टी प्रमुख होने के नाते अगर टीएमसी का विलय करना भी चाहती हैं तो उन्हें सबसे पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को यह आश्वस्त करना होगा कि उनके इस फैसले के साथ पार्टी पदाधिकारी या सांसद-विधायकों में दो तिहाई समर्थन प्राप्त है।  वरिष्ठ अधिवक्ता इसके अलावा विलय के लिए दोनों दलों के मुख्य संगठन माने पार्टी हाईकमान आपस में औपचारिक विलय का प्रस्ताव पारित करते हैं. मूल पार्टी के कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति से विलय होता है. तभी एंटी डिफेक्शन लॉ (दल-बदल विरोधी कानून) और मर्जर क्लॉज कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी (विलय की संवैधानिक वैधता) कार्यान्वयन में मदद करेगा. इसके बिना लेजिसलेटिव मर्जर कर देते हैं और दो तिहाई सदस्य नहीं है तो वह भी नहीं माना जाएगा. संगठन का विलय कर देते हैं तो भी नहीं माना जाएगा।  उन्होंने समझाया कि विलय में यह भी देखना होगा कि जिन लोगों ने खुद को अलग गुट घोषित कर दिया है, वह कहां हैं. चुनाव आयोग को आश्वस्त होना पड़ेगा कि विलय के समय ब्लॉक से लेकर केंद्रीय स्तर के संगठन और उसके जो ऑफिस बियरर्स हैं वो किसके साथ है. क्योंकि वो रिप्रेजेंट करते हैं कितनी मेंबरशिप है. तभी यह ऐसा हो सकता है और हमने हाल ही में महाराष्ट्र के केस में दोनों पॉलिटिकल पार्टीज के केस में इलेक्शन कमीशन का फैसला देखा भी है. क्योंकि संगठन और विधायिका दोनों के मर्जर के बाद इलेक्शन कमिशन ने जो निर्णय लिया था।  अश्विनी दुबे ने बताया कि अयोग्यता केवल लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा सदस्यों का कहा सकता है. लेकिन संगठन के लोगों का डिसक्वालीफिकेशन नहीं हो सकता है. दूसरी पार्टी की मान्यता तब मिलेगी जब उसमें भी दो तिहाई सदस्य जो पार्टी के सदस्य हैं वो वो तैयार हो जाएं करें।  उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट और एनसीपी की टूट सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया था कि सिर्फ अगर विधायक चाहे और सांसद चाहें तो वो अपने हिसाब से पार्टी को ले जाकर मर्ज नहीं कर सकते. अलग पार्टी नहीं बना सकते तो वो विलय भी नहीं कर सकते।  कहा कि चाहे लोकसभा हो, चाहे राज्यसभा हो, चाहे विधानसभा हो, इनसाइड द हाउस तो बागी गुट अपना नेता चुन सकता है अपने फैसले ले सकता है, लेकिन पार्टी का वो रिप्रेजेंटेटिव नहीं माना जाएगा. ये नहीं माना जाएगा कि बाहर भी वो पार्टी का रिप्रेजेंटेटिव है. लेकिन जैसे लोकसभा के अंदर विधानसभा के अंदर जो तो तिहाई बहुमत वो बहुमत अगर पार्टी जो मूल पार्टी है मूल पार्टी पर दावा करते हैं कि हम ही यहां विधानसभा या लोकसभा में रिप्रेजेंट करते हैं. कहेंगे कि ये हमारे चुनाव में जीते हुए लोगों के नंबर हैं, तो वहां उनकी वैद्यता मानी जाएगी. लेकिन बाहर संगठन में वो रिप्रेजेंट नहीं कर सकते. संगठन के रिप्रेजेंटेशन के लिए संगठनिक विलय और संगठनिक विलय के लिए ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर के लिए वह जो सदस्यों की संख्या है वो इंश्योर करना जरूरी है रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के मुताबिक तो अंदर वो कर सकते हैं बाहर नहीं और यही सुप्रीम कोर्ट में अभी मामला पेंडिंग है।  . कहां से शुरू हुई टीएमसी और कांग्रेस के विलय की खबरें बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के महज 80 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी में भगदड़ मच गई है. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 विधायकों ने बागी गुट बना लिया और पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपनी अलग मान्यता प्राप्त कर ली है. उनका दावा है कि उनके बागी गुट में अब तक तृणमूल कांग्रेस 65 विधायक आ चुके हैं. लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 सांसदों की सूची स्पीकर ओम बिरला को सौंपे जाने का दावा किया गया है. दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के इन बागी सांसदों ने एनडीए सरकार का सपोर्ट करने की बात कही है. उधर, राज्य सभा में अब तक टीएमसी के तीन सांसदों सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।  इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्षी दलों के संगठन इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कीं. इसके अलावा टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद खबरें उड़ने लगी कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है. हालांकि करीब 24 घंटे बाद कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने ऐसे किसी विलय से इनकार कर दिया है।   

ममता को एक और बड़ा झटका? देर रात बागी नेताओं ने शुभेंदु से की मुलाकात, सायोनी घोष की मौजूदगी से बढ़ी चर्चा

नई दिल्‍ली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तिनका-तिनका होती नजर आ रही है. विधायकों के एक बड़े ग्रुप के ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाने के बाद अब टीएमसी लोकसभा सांसदों का एक ग्रुप भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने जा रहा है, जल्‍द ही इसका ऐलान हो सकता है. बीती रात टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सायोनी घोष केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे, जिससे नई अटकलों का दौर शुरू हो गया है. क्‍या टीएमसी के बागी लोकसभा सदस्‍य बीजेपी का हाथ थामने जा रहे हैं? भूपेंद्र यादव के घर एक घंटा चली बागी TMC सांसदों की बैठक  भूपेंद्र यादव के घर मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई बागी टीएमसी सांसदों की बैठक में क्‍या बात हुई, ये तो सामने नहीं आई है. लेकिन इतने जरूर संकेत मिल रहे हैं कि टीएमसी बिखर रही है और जल्‍द ही कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. बताया जा रहा है कि सायोनी घोष समेत 4 से 5 टीएमसी सांसद इस बैठक में शामिल हुए. ये बैठक लगभग एक घंटे तक चली. हैरानी की बात ये रही कि इस बैठक में टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों का नेतृत्‍व करने का दावा कर रहीं काकोली घोष इस बैठक में नहीं पहुंचीं. सूत्रों की मानें तो अब टीएमसी के बागी ग्रुप में ज्‍यादा से ज्‍यादा समर्थन जुटाने पर जोर है. टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 19 बागी हो गए हैं।  बागियों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम!   सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में बीजेपी संग टीएमसी नेताओं की और भी बैठकें हो सकती हैं. बता दें कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को हस्ताक्षर करके एक पत्र भी सौंपा है, जिसमें 19 सांसदों के नाम हैं. इन नामों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम है. काकोली घोष इस बागी सांसदों के ग्रुप का नेतृत्‍व कर रही हैं. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसी कोई लिस्‍ट जारी नहीं की गई है, जिसमें ये कहा गया हो कि उनकी पार्टी के सांसद बागी हो रहे हैं।  ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था।  क्‍या TMC का कांग्रेस में होने जा रहा विलय? ममता बनर्जी की दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से हुई मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं. इसी बीच टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने इन चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास 64 विधायक है और आगे ये संख्या बढ़ेगी, लेकिन कोई भी कांग्रेस में शामिल होने वाले नहीं है. ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हुई बैठक और बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अभिषेक बनर्जी की अलग से हुई बैठक के बाद टीएमसी के कांग्रेस में पुनर्विलय की अटकलों को बल मिला. ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चली गईं। 

एक-एक कर छूटते गए साथी, क्या ममता बनर्जी की पकड़ TMC पर कमजोर पड़ गई है?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ममता बनर्जी का सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. टीएमसी विधायक से लेकर सांसद तक एक-एक कर ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. अब हालत यह हो गई है कि सयानी घोष से लेकर युसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी बागी खेमे के साथ खड़े हो गए हैं।  15 साल तक बंगाल में एकछत्र राज करने के बाद सत्ता हाथ से निकलते ही टीएमसी में असंतोष फूट पड़ा है. टीएमसी में तमाम बड़े सिपहसलार अलग राह पर चल पड़े हैं, जिससे ममता बनर्जी के हाथों से पार्टी निकलती जा रही है।      टीएमसी के 19 बागी सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, जो काकोली घोष दस्तीदार के अगुवाई में अलग गुट बनाने का फैसला किया है. इस फेहरिश्त में उन सभी नेताओं के नाम है, जिन्हें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में ममता के पास कितनी ताकत बची है?  TMC के बड़े सितारे छोड़ गए ममता का साथ बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी ने एक जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. इसके बाद 13 साल तक ममता बनर्जी संघर्ष कर साढे तीन दशक से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उखाड़ फेका था. ममता के इस सियासी संघर्ष के रहे तमाम टीएमसी नेता धीरे-धीरे साथ छोड़ गए. अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी ने कई नए चेहरों को सियासत में लाए और सियासी पहचान दी, लेकिन सत्ता बदलते ही उनके मोहभग हो गए।  काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीउर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ मौमिक, बापी हलधर, सायोनी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी शामिल है. ये ऐसे नाम है, जिनकी राजनीतिक को ममता बनर्जी ने सियासी पहचान दी, लेकिन अब बीजेपी खेमे के साथ खड़े होने के लिए बेताब है।  ममता बनर्जी के पास कितने सांसद बचे 2024 के लोकसभा चुनावों में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में 29 पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 12 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी, चुनावों के बाद टीएमसी के बशीरहाट से ससद हाजी नुरुल इस्लाम की मौत हो गई थी. टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद है, जिसमें से 19 सांसद बागी हो गई है. इसके बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं।  ममता बनर्जी के पास बचे टीएमसी लोकसभा सांसदों में फिलहाल कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, सुदीप बंधोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद हैं।  टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिसमें  दो सांसदों ने इस्तीफा दिया है. सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों के अब बीजेपी से राज्यसभा जाने की चर्चा. इस तरह 11 राज्यसभा सांसद बच रहे हैं, लेकिन उनसे में से भी कितने सांसद ममता के साथ रहेंगे, ये कहना मुश्किल है।  ममता बनर्जी के पास कितने विधायक बचे पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव चुनाव में टीएमसी के टिकट पर 80 विधायक जीतकर आए, जिसमें से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को ममता बनर्जी ने बाहर कर दिया था. इसके बाद  टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया और अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया. टीएमसी के कुछ अन्य विधायकों ने भी साथ छोड़ा है।  ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि अब उनके पास 64 विधायकों का समर्थन है और एक विधायक के हमारे साथ जुड़ने के बाद संख्या 65 हो जाएगी. इस तरह 80 में से 65 विधायक अब ममता बनर्जी से अलग होकर अपना अलग गुट बना लिया है और  ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है. टीएमसी के 65 विधायकों के बागी होने के बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 15  विधायक ही बच रहे हैं. इसके अलावा बंगाल के तमाम बड़े शहरों के मेयर अपना इस्तीफा दे दिए हैं। 

ममता बनर्जी को बड़ा झटका? 20 बागी सांसदों का ओम बिरला को पत्र, NDA में एंट्री की चर्चाएं तेज

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के बाद नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट होने का प्रोसेस शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के 20 असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा है और उन्होंने अलग गुट बनाने का प्रस्ताव दिया है. बताया जा रहा है कि इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह बगावत ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी नई दिल्ली में ही मौजूद हैं. उनके साथ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हैं. इन सांसदों के पास दो विकल्प हैं. या तो ये टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाएं या फिर विधानसभा की तरह अलग गुट बनाकर अलग हों।  तृणमूल कांग्रेस में बड़ी हलचल की खबर आ रही है. रिपोर्ट के अनुसार अब दिल्ली में भी टीएमसी में बड़ी टूट की आशंका है. टीएमसी  तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद अलग गुट बनाएंगे. ये 20 सांसद तृणमूल कांग्रेस से जल्द अलग होंगे. इस बाबत आज दिल्ली में अहम गतिविधियां हुईं. ये सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले की जानकारी देंगे. लेकिन स्पीकर अभी दिल्ली में मौजूद नहीं हैं, लोकसभा स्पीकर अभी चंडीगढ़ में हैं।  लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं. पार्टी में टूट के लिए कम से कम दो तिहाई सांसदों की जरूरत है. ये संख्या 19 होती है. इस बीच टीएमसी के बागी गुट ने 20 सांसदों के अपने साथ होने का दावा किया है।  इन बागी सांसदों का कहना है कि लोकसभा में वे अपने नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी को नहीं बल्कि काकोली घोष को चाहते हैं।  बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजने से पहले दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग पर स्थित केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर सोमवार को एक बेहद गोपनीय बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।  बागी सांसद शाम 6.30 बजे टीएमसी एमपी शताब्दी राय के घर एक और मीटिंग करेंगे।   इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है. ये मुलाकात बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर हुई है. पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे हैं. सूत्रों के अनुसार इस मीटिंग में टीएमसी के लोकसभा के 14 सांसद मौजूद थे. इस मुलाकात में बीजेपी नेता और पूर्व त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे।  सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के 5 बागी सांसद सोमवार सुबह से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मौजूद थे. इन पांच सांसदों के नाम बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सांसद अरूप चक्रवर्ती हैं. दोपहर 12.00 बजे के बाद बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उनके घर गए. इस बीच सूत्रों ने बताया कि लोकसभा के कुल 14 टीएमसी सांसदों ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की. दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी भूपेन्द्र यादव के घर से निकले।  इधर इस घटनाक्रम से पहले TMC से इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर से मिलने के लिए पार्टी के 5 सांसद पहुंचे. ये मुलाकात दिल्ली में हुई. सुखेंदु शेखर से मिलने आए सांसदों में बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सासंद अरूप चक्रवर्ती शामिल थे।  रिपोर्ट के अनुसार TMC के बागी सांसद लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के बजाय काकोली घोष को पार्टी का नेता चाहते हैं।  बता दें कि राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने आज (सोमवार) ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दिया है. इस बीच उनसे टीएमसी के पांच सांसद मिलने पहुंचे थे. इससे टीएमसी की राजनीति को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं।  बता दें कि TMC सांसदों में पहले ही विभाजन हो चुका है. तृणमूल कांग्रेस के विधायकों पर ममता बनर्जी की पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब पार्टी के संसदीय खेमे को भी एक और झटका लगा है।  ममता के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट फिरहाद हकीम ऋतब्रत से मिले इस बीच कोलकाता से खबर है कि ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने बागी विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. ये मुलाकात विधानसभा में भी हुई है. फिरहाद हकीम ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है. फिरहाद हकीम ने कुछ दिन पहले ही कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया है।    आज सुखेंदु बोले, कल दूसरे ही बोलेंगे-ऋतब्रत वहीं राज्यसभा में एक दशक से ज़्यादा समय तक पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद और पार्टी, दोनों पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है. और पार्टी के 5 सांसदों से मुलाकात की है।  वहीं बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने कई विधायकों से मुलाकात की है।  नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे और टीएमसी के राजनीतिक घटनाक्रम पर कहा कि, "यह सिर्फ़ सुखेंदु की बात नहीं है. असल में मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है. लेकिन उन्होंने जो कुछ भी कहा, मैं उससे ज़्यादातर सहमत हूं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर. उनकी बातें बिल्कुल सही थीं. संसद कोई क्विज़ शो की जगह नहीं है. सुखेंदु जो बता रहे हैं, उसका अनुभव मैंने खुद किया है. उनके जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया जाना निराशाजनक था, आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।  ये हो सकते हैं बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे गए पत्र में जगदीश चंद्र बसुनिया, अरुप चक्रवर्ती, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और खलीलुर रहमान जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. वहीं काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, अभिनेता-राजनेता देव और जून माल्या को लेकर भी असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं।  तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की … Read more

बिल्डिंग मालिक का फूटा गुस्सा, TMC से मांगा मुख्यालय खाली करने का जवाब

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस का मुख्यायल जिस भवन में है, उसके मालिक ने पार्टी से जगह खाली करने के लिए कहा है। इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब टीएमसी में बगावत जारी है और विधायक पहले ही दो गुट तैयार कर चुके हैं। टीएमसी के मौजूद मुख्यालय का पता A/P-1/A कैनाल साउथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के संपत्ति मालिक मोंटू साहा है और वह चाहते हैं कि टीएमसी उनकी संपत्ति को खाली कर दे। उनका कहना है कि टीएमसी के साथ कराया गया समझौता साल 2025 में ही खत्म हो गया है और वह पार्टी से लंबे समय से जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस में शिकायत जगह खाली नहीं करने को लेकर जारी विवाद के बाद साहा अपने बेटे अमित के साथ रविवार को प्रॉपर्टी पर पहुंचे थे। वह टीएमसी नेताओं से बात करने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुलिस का रुख किया है। खबर है कि पिता पुत्र कुछ घंटों तक इंतजार करने के बाद पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। क्या है प्लान उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी को प्रॉपर्टी से बाहर निकालने के लिए कानूनी मदद ली जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अमित का कहना है, 'पिछले साल के आखिर में जब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने उनसे कई बार संपर्क किया और कहा कि हमें हमारी बिल्डिंग वापस चाहिए। इस बिल्डिंग में मरम्मत का काम होना है और हमें अपने बिजनेस के लिए भी इसकी जरूरत है।' अमित ने कहा, 'उन्होंने हमसे कहा था कि वे जुलाई तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन हमें यह अभी वापस चाहिए। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं है। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।' रिपोर्ट के अनुसार, टीएएमसी के एक नेता का कहना है कि साहा ने संपत्ति किराये पर देकर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में कई कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं। TMC हेडक्वार्टर्स खास बात है कि टीएमसी के असली मुख्यालय पर भी विवाद जारी है। तृणमूल भवन नाम से पहचाने वाली इस बिल्डिंग पर बागी विधायक जावेद खान ने अपना दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल भवन जिस जमीन पर बना हुआ है, वह उनके परिवार की है। उन्होंने कहा था, 'मेरे पास यह साबित करने के लिए पूरे सबूत हैं कि तोपसिया रोड प्लॉट मेरे परिवार का है।' दरअसल, यहां रिनोवेशन का काम शुरू होने के बाद टीएमसी 2022 में साहा की प्रॉपर्टी में शिफ्ट हुई थी। साहा परिवार का कहना है कि यह जगह टीएमसी को साल 2022 में किराये पर दी गई थी। इससे पहले साहा यहां अरब रेसीडेंसी नाम का होटल चलाते थे।

TMC में फिर उठे असंतोष के सुर, दिल्ली तक पहुंचा विवाद; ममता बनर्जी की बढ़ सकती है मुश्किल

कलकत्ता ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुई बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के सांसदों को लेकर भी हलचल तेज हो गई है. चर्चा यह है कि विधानसभा के बाद अब लोकसभा-राज्यसभा में भी बगावत की आहट सुनाई दे सकती है. यही वजह है कि डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी नेतृत्व पूरी तरह एक्टिव हो गया है।  दरअसल, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 विधायकों के अलग होने के बाद TMC पहली बार इतने बड़े अंदरूनी संकट से जूझती दिख रही है. विधानसभा में यह बगावत इतनी बड़ी रही कि स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता भी मान्यता दे दी. अब सवाल उठ रहा है कि क्या यही सियासी हलचल संसद तक भी पहुंचेगी? न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस आशंका को खुलकर सामने रखा है. उन्होंने कहा कि जिस तरह इतने कम समय में बड़ी संख्या में विधायक अलग हुए हैं, वैसी प्रतिक्रिया लोकसभा में भी देखने को मिल सकती है. हालांकि, उन्होंने राज्यसभा को लेकर साफ भविष्यवाणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  दूसरी तरफ, सीनियर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में किसी भी बड़ी टूट के दावे को सिरे से खारिज किया है. उनका आरोप है कि बीजेपी संसद के भीतर भी वही खेल दोहराने की फिराक में है जो उसने बंगाल विधानसभा में किया. हालांकि, उन्हें पूरा भरोसा है कि ममता बनर्जी पहले भी ऐसे कई मुश्किल हालात से बखूबी निकली हैं व इस बार भी शानदार वापसी करेंगी।  सबसे ज्यादा चर्चा बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लेकर हो रही है. पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी पहले से चर्चा में रही है. लोकसभा में चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कई बार नेतृत्व को लेकर नाराजगी जाहिर की. यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में उनके नाम की चर्चा तेज है, हालांकि उन्होंने खुद किसी बगावत की पुष्टि नहीं की है. सूत्रों की मानें तो हालात संभालने के लिए ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में कई नाराज विधायकों और सांसदों से खुद बात की. पार्टी की कोशिश है कि मामला आगे बढ़ने से पहले ही सुलझा लिया जाए. संसद में भी दो सबसे भरोसेमंद सांसदों को बाकी सहयोगियों से लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  फिलहाल TMC के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. दलबदल कानून के तहत अगर दो-तिहाई सांसद किसी अलग गुट के साथ जाते हैं, तो उनकी सदस्यता बच सकती है. इसी वजह से दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं. पहली, 'ऋतब्रत मॉडल', जिसमें सांसद अलग गुट बनाकर खुद को असली TMC बताने की कोशिश करें. दूसरी, किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय का रास्ता।  हालांकि, पार्टी का चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा सिर्फ सांसदों या विधायकों की संख्या से तय नहीं होगा. इसके लिए चुनाव आयोग के सामने यह साबित करना होगा कि संगठन के भीतर असली बहुमत किसके साथ है. अभी के लिए इतना साफ है कि बंगाल की लड़ाई अब सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं दिख रही।