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राज्यमंत्री गौर ने प्रतिमा का अनावरण कर अर्पित की पुष्पांजलि

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की जन्म जयंती पर मंगलवार को वार्ड 54 के साकेत नगर स्थित 'बाबूलाल गौर पार्क' में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान का स्मरण किया। राज्यमंत्री  कृष्णा गौर ने कहा कि श्रद्धेय 'बाबूजी' का संपूर्ण जीवन जनसेवा और प्रदेश के विकास के लिए समर्पित रहा। उन्होंने भोपाल और विशेषकर गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास को जो नई दिशा दी है, वह हम सभी के लिए एक महान आदर्श है। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि उनकी यह प्रतिमा हमें सदैव उनके द्वारा किए गए जन-कल्याणकारी कार्यों, उनके संघर्षपूर्ण जीवन और जमीन से जुड़े नेता के रूप में उनकी सादगी की प्रेरणा देती रहेगी। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि बाबूजी के सपनों का गोविंदपुरा क्षेत्र और एक उन्नत मध्यप्रदेश बनाने के लिए हम उनके बताए मार्ग पर निरंतर जनसेवा का कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्व. गौर जी ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों और आम जनता के उत्थान में लगा दिया। उनके यही विचार और जनहितैषी नीतियां हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्षदगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राज्यमंत्री  गौर ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की जयंती के अवसर पर भेल स्थित बाबूलाल स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय में आयोजित सेमिनार में शामिल हुईं। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इस दौरान उन्होंने स्व. बाबूलाल गौर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की स्मृति में पौधारोपण भी किया।  

सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को समुचित पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। गर्मी के मौसम और बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की सतत् निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि जहां जैसी आवश्यकता हो, वहां वैसी त्वरित व्यवस्थाएं की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर पानी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में पीएचई की मैदानी योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पत्तिया उइके ने बताया कि विभाग तेजी से अपनी लक्ष्य पूर्ति की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल के उद्देश्य से जल जीवन मिशन का काम पूरा कर लिया जायेगा। मिशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत् प्रतिशत कार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्य करने वाले ऐसे गांवों/ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन/सम्मानित किया जाये, जिन्होंने बेहतर तरीके से नल जल योजनाओं का संचालन/संधारण किया। मंत्री  उइके ने बताया कि बोरवेल में गिरने से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं/मृत्यु को रोकने के लिए प्रदेश में बोरवेल अधिनियम बनाया गया है। ऐसा अधिनियम बनाने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। उन्होंने विभागीय संरचना और गतिविधियों को अधिक बेहतर बनाने के लिए विभाग के सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एकीकृत करने का सुझाव दिया। मंत्री  उइके बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान- 2026 में डिंडोरी और मंडला जिले में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं पर काम पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस काम को 'कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर' अवधारणा से जोड़ा जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल समन्वय करें। केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन अन्तर्गत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल ने मध्यप्रदेश को यह आवंटन जारी करने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से राज्य में ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे कि सभी नलजल योजनाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल बचाने वाले और इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वालों का राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित करें। बताया गया कि विभाग द्वारा जल महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसमें प्रदेश में एकल एवं समूह नल जल योजना के संचालन एवं प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल महोत्सव कार्यक्रम को जल गंगा संर्वधन अभियान के साथ जोड़ने और जल बचाने के लिए अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत विभाग द्वारा ग्रामीण, शहरी एवं स्कूलों में स्थापित जल स्रोतों की वाटर टेस्टिंग की जा रही है। साथ ही हैंडपंपों की जांच एवं नल जल योजना के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल स्रोतों के लिए पीएचई केवल टयूबवेल जैसे माध्यम पर ही आश्रित न रहे। जल स्रोत के रूप में तालाब सरोवर निर्माण से कई लाभ होंगे। इससे जल संरक्षण के साथ जल स्तर में वृद्धि होगी। क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग बढ़ेगी। जल संग्रहण क्षमता बढ़ने के साथ ही नल-जल योजना के संचालन के लिए स्थायी जल संरचना भी उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (मैपकास्ट) की विशेषज्ञ सेवाओं का भी लाभ लें। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  मनीष सिंह ने बताया कि विभागीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया गया है। पेयजल आपूर्ति में आ रही समस्या की सूचना मिलते ही उसे तत्काल दूर किया जा रहा है। पेयजल से निर्माण कार्य करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि म.प्र. जल निगम के समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण खर्चे को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही हैं। पीएचई सोलर एण्ड विंड एनर्जी का बल्क यूजर है। प्रमुख सचिव  सिंह ने बताया कि प्रदेश में दिसम्बर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक  क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दिये गये, साथ ही 15 हजार 238 नवीन नलकूप/हैंडपंप भी स्थापित किये गये। प्रदेश के 14 हजार 200 गांवों में जल प्रदाय व्यवस्था का शत् प्रतिशत काम पूरा कर इन्हें हर घर जल घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत परिवारों को नल से जल के तहत कवर कर लिया गया है।   म.प्र. जल निगम के प्रबंध संचालक  वी.एस. कोलसानी ने बताया कि उज्जैन राजस्व संभाग की एकल ग्राम नल जल योजनाओं के काम पूरे कर लिये गये है। यहां 7 लाख 9 हजार 65 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दे दिए गये है। प्रदेश की 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से प्रमाणित करा लिया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं की उपयोगिता के आंकलन और हितग्राहियों से शिकायतें/सुझाव प्राप्त कर उनका निराकरण करने के लिए ऑनलाइन जल दर्पण पोर्टल भी तैयार किया गया है। उन्होंने बताया गया कि विभाग में प्रचलित प्रमुख विकास योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन का कार्य तेजी से … Read more

मुंबई पुणे मिसिंग लिंक – बिना सरकारी बोझ के 6600 करोड़ की परियोजना! महाराष्ट्र के फाइनेंस मॉडल से सीख लेगा मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच को धरातल पर उतरने के लिए मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात अध्ययन यात्रा पर गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सड़क परियोजनाओं, उनके वित्तीय मॉडल, सड़क विकास की दीर्घकालीन रणनीति और भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से तैयार की गई डिजिटल गवर्नेंस तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों विस्तार से चर्चा की। मध्यप्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से यह अध्ययन यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है बताई जा रही है। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग  सुखबीर सिंह, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सिबी चक्रवर्ती, विभाग के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा एवं  एसआर बघेल तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच को धरातल पर उतारने का प्रयास अध्ययन दौरे का उद्देश्य केवल अन्य राज्यों की परियोजनाओं को देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि सड़कों को आर्थिक विकास, निवेश, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से कैसे जोड़ा जाए। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना आवश्यक है। पहला दिन : महाराष्ट्र में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का अध्ययन एवं मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट की। बैठक में अधोसंरचना विकास, बड़े प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  फडणवीस ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं की सफलता केवल धन उपलब्ध होने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, इनोवेटिव फाइनेंस मौडलिंग, तेज निर्णय प्रक्रिया और लगातार निगरानी आवश्यक होती है। बैठक में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले राज्य राजमार्गों और प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मिलकर सीमावर्ती मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद MSRDC के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. अनिलकुमार गायकवाड़, संयुक्त प्रबंध संचालक  राजेश पाटिल,  लक्ष्मीनारायण मिश्रा तथा  राजेश निघोट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुख्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेगा इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और फाइनैन्सिंग मॉडेल्स की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 3.5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मिलकर करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उन्हें "कोर रोड नेटवर्क" घोषित किया है। इन्हें वर्ष 2047 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। MSRDC ने बताया कि कोर रोड नेटवर्क को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है     ग्रोथ कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो उद्योग, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इन मार्गों पर बेहतर सड़कें बनने से उद्योगों तक कच्चा माल जल्दी पहुंचता है, किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचती है और नए निवेश आकर्षित होते हैं।     टूरिज्म कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अच्छी सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का विशेष अध्ययन किया क्योंकि मध्यप्रदेश में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है। समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण का केंद्र बैठक में महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं और उनके वित्तीय मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से समृद्धि महामार्ग के लिए अपनाई गई वित्तीय रणनीति ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के माध्यम से बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग कैसे किया जा सकता है। अटल सेतु का अध्ययन प्रतिनिधिमंडल अटल सेतु परियोजना के भ्रमण किया। समुद्र के ऊपर निर्मित यह पुल आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना की निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, रखरखाव व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय मॉडल की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने जाना कि इतनी बड़ी परियोजना में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित किया गया और समय-सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया। मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक : इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण अटल सेतु के बाद प्रतिनिधिमंडल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की मिसिंग लिंक परियोजना के अध्ययन के लिए पहुंचा। यह परियोजना देश की सबसे जटिल सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है। इसके साथ भारत का सबसे ऊंचा केवल-स्टे (Cable Stayed) पुल भी इस परियोजना का भाग है। परियोजना की कुल लागत लगभग 6600 करोड़ रुपये है। सबसे रोचक तथ्य यह रहा कि इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए महाराष्ट्र सरकार को अलग से वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। इसका पूरा वित्तीय प्रबंधन मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से प्राप्त टोल राजस्व के आधार पर किया गया। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने इसे एक अनुकरणीय मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए भी ऐसे नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक का भी भ्रमण किया। यहां अधिकारियों ने परियोजना के संचालन, रखरखाव, परिसंपत्ति … Read more

टोल-फ्री कॉल, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे अपनी शिकायतें

रायपुर सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए। समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर          कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव  राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु          अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया। इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत           सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव  मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।

नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसाल

रायपुर पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर जब कोई किसान आधुनिक तकनीकों का हाथ थामता है, तो वह न सिर्फ अपनी तकदीर बदलता है बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज क्षेत्र में ऐसी ही एक अभिनव मिसाल बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरक (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) का लगातार उपयोग कर वे उन्नत और स्मार्ट खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। परिवहन के खर्च और मेहनत से मिली बड़ी राहत        कृषक शैलेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक बोरी वाले खादों को दुकान से खेत तक लाने (परिवहन) तथा उनके छिड़काव में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया था। कृषि विभाग की सलाह पर जब उन्होंने नैनो तकनीक को अपनाया, तो इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले और संतोषजनक रहे। शैलेंद्र बताते हैं कि नैनो उर्वरक बाजार में पारंपरिक खाद की तुलना में बेहद कम दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती के शुरुआती खर्च में ही बड़ी बचत हो जाती है। नैनो उर्वरक के प्रमुख व्यावहारिक लाभ         शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जहाँ पहले भारी-भरकम बोरियों को ढोने और संभालने में किसानों का पसीना छूट जाता था, वहीं अब महज आधे लीटर की छोटी बोतलें आसानी से जेब या थैले में रखकर खेत तक ले जाई जा सकती हैं। पानी में घोलकर फसलों पर सीधे छिड़काव करने से पौधों को पोषक तत्व सीधे और सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती। इस तकनीक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है और प्रति एकड़ पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष भी नैनो तकनीक पर ही भरोसा          अपनी इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर शैलेंद्र ने इस वर्ष भी अपनी फसलों में पूरी तरह से केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का ही उपयोग करने का निर्णय लिया है। लटुवा के इस जागरूक किसान की यह अनूठी पहल आज पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों को आधुनिक, कम लागत वाली और आत्मनिर्भर खेती की एक नई राह दिखा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की इस सफलता को रोल मॉडल के रूप में पेश कर अन्य ग्रामीण किसानों को नैनो तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में लगातार बढ़ रही भागीदारी, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कर रहे पंजीकरण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में अवसर दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित निःशुल्क आईएएस/ पीसीएस कोचिंग योजना युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस योजना के माध्यम से अपने सपनों को नई उड़ान देना चाहते हैं। महंगी कोचिंग की बाधा दूर कर रही योगी सरकार सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में योगी सरकार की निःशुल्क कोचिंग योजना इन युवाओं के लिए राहत लेकर आई है। योजना का उद्देश्य प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बनाना है। 865 सीटों पर मिलेगा प्रशिक्षण, 25 प्रतिशत सीटें लेटरल एंट्री के लिए समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में आईएएस/ पीसीएस कोचिंग के लिए कुल 865 सीटें निर्धारित हैं। इनमें से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके हैं। इससे उन अभ्यर्थियों को भी बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षा के प्रारंभिक चरण में सफलता प्राप्त कर ली है और मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन में युवाओं की बढ़ी भागीदारी योगी सरकार में युवाओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून तक कुल 5513 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 2848 अभ्यर्थियों ने अपनी आवेदन प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हुए फाइनल लॉक किया है। वहीं इच्छुक अभ्यर्थी 18 जून तक आवेदन कर सकते हैं इसके बाद 5 जुलाई को परीक्षा होगी। यह संख्या दर्शाती है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में युवा इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं। योगी सरकार में प्रतिभाओं को मिल रहा बेहतर मंच गौरतलब है कि समाज कल्याण विभाग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पूरी पारदर्शिता के साथ चयन प्रक्रिया और कक्षाएं संचालित करने की तैयारी कर रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के सपनों के आड़े न आए। इसी उद्देश्य से निःशुल्क कोचिंग, अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार की यह पहल न केवल युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोल रही है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक समावेशन को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

उपमुख्यमंत्री साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन

रायपुर उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने एवं आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु प्रदेश में सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। इसी तारतम्य में आज  कोरबा जिले के विकासखण्ड पाली के ग्राम डोंगानाला में सुशासन तिहार के अंतर्गत जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन हुआ। उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग तथा नगरीय प्रशासन व विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  अरुण साव शामिल हुए। उन्होंने शिविर में 159 करोड़ 63 लाख 14 हजार की राशि के 18 विकास कार्याे की सौगात दी। जिसके अंतर्गत 153 करोड़ 66 लाख 61 हजार के कुल 8 कार्याे का भूमिपूजन, 5 करोड़ 96 लाख 53 हजार के 10 विकास कार्याे का लोकार्पण शामिल है। उन्होंने जिलेवासियों को विकास कार्याे के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम  मंत्री  लखन लाल देवांगन, विधायक पाली तनाखार  तुलेश्वर मरकाम, विधायक कटघोरा  प्रेमचंद पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत मती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य मती माया रूपेश कंवर, महापौर मती संजू देवी राजपूत, नगर पंचायत अध्यक्ष पाली  अजय जायसवाल, कलेक्टर  कुणाल दुदावत, प्रभारी पुलिस अधीक्षक  लखन पटले,  वनमण्डलाधिकारी कटघोरा  कुमार निशांत, डीएफओ कोरबा मती प्रेमलता यादव, निगमायुक्त  आशुतोष पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि  विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को तेजी से आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा विकास के कार्यों को दुगनी गति से पूरा किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री  साव ने कहा कि सरकार गठन के साथ ही 18 लाख  पीएम आवास निर्माण की  स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार द्वारा 2 साल के धान का बकाया बोनस,  3100 रुपए प्रति क्विंटल व 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी कर किसानों का मान बढ़ाया। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को प्रति माह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। अब महिलाएं लखपति दीदी बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है। उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन उन्होंने कहा कि कोरबा जिला सहित पाली तानाखार क्षेत्र में विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। पाली तानाखार विधानसभा में सभी प्रकार के निर्माण व अन्य प्रशासनिक काम तेजी से हो रहा है। अनेक विकास कार्याे के लिए डीएमएफ से पर्याप्त राशि क्षेत्र को मिल रहा है।  साव ने कहा सरकार द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की चिंता की जा रही है, इस हेतु जनता की समस्याओं का जनता के द्वार पर समाधान कर लाभ दिलाने शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में विभागीय अधिकारी उपस्थित होकर आमजनों को योजनाओं की जानकारी प्रदान कर रहे एवं उनकी समस्याओं का निराकरण भी कर रहे। इससे अधिकारियों की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने नही पड़ रहे। उन्होंने आमजनों से योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। कैबिनेट मंत्री  देवांगन ने कहा कि सरकार जनता के हित मे लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर विकास की नई ऊंचाईयों में पहुचाने का काम कर रही है। 01 मई से जगह जगह सुसाशन तिहार का आयोजन कर आमजनों को राहत पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही सरकार के कार्याे का फीडबैक भी लिया जा रहा। सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगो को मुफ्त राशन,  टेपनल के माध्यम से हर घर जल, शौचालय , सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है।  देवांगन ने कहा कि शिविरों में आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। जिससे कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाना नहीं पड़ रहा।  देवांगन ने डीएमएफ राशि के उपयोग की सुविधा देने हेतु प्रधानमंत्री  मोदी एवं मुख्यमंत्री  साय का धन्यवाद देते हुए कहा कि जिले में डीएमएफ की राशि से लगातार पिछड़े क्षेत्रों व आवश्यक स्थानों में अनेक पुल, पुलिया, सड़क, भवन सहित अन्य आवश्यक चीजों का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन व अधोसंरचना सुविधा का तेजी से विकास हुआ है। आगे भी शासन प्रशासन द्वारा जनहित में सदैव कार्य किया जाएगा। विधायक पाली तानाखार  मरकाम ने कहा कि लोगों को कार्यालयों का चक्कर लगाने की परेशानी से बचाने के लिए शिविरों का आयोजन हो रहा है। जहां जिला व खण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित होकर आमजनो की समस्याओं को गम्भीरता से सुनते व निराकृत करते है। ऐसे आयोजनों से आम जनता का शासन पर विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने बताया कि पाली तानाखार विधानसभा में मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। डीएमएफ से स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस भवन , पुल-पुलिया निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिससे दूर दराज के लोगों को निश्चित रूप से  लाभ मिलेगा। कलेक्टर  दुदावत ने कहा कि राज्य शासन के मंशानुरूप प्रशासन द्वारा आमजनों की परेशानियों का समाधान एवं योजनाओं से लाभान्वित करने जिले में नियमित रूप से शिविर आयोजित किए जा रहे है। शिविरों में विभागीय अधिकारी आमजनों की समस्याओं की गम्भीरता से सुनते है एवं उन्हें विभागीय योजनाओं से लाभांवित करते है। शिविरों में प्राप्त आवेंदनो में से निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को लाभ दिलाया जा रहा है। साथ ही मांग एवं शिकायत से सम्बन्धित आवेंदनो का पूर्ण परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से अनेक जनहित के कार्य को गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री  साव ने की अनेक विकास कार्याे की घोषणा शिविर में क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु उपमुख्यमंत्री  साव द्वारा अनेक विकास कार्याे का घोषणा भी गई जिसमें प्रमुख रूप से पाली ब्लाक के मुनगाडीह व दमिया में स्कूल भवन निर्माण, दमिया में आंगनबाड़ी भवन, पाली के स्वामी आत्मानंद … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया निर्माणाधीन महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर का निरीक्षण

कुशीनग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 450 करोड़ से बनने वाला यह विश्वविद्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और उनकी आय बढ़ाने में मील का पत्थऱ साबित होगा। सरकार की मंशा है कि विश्वविद्यालय समय पर बने और चले। इस प्रोजेक्ट को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। उम्मीद है कि सितंबर-अक्टूबर में इसके उद्घाटन के लिए आएंगे। उससे पहले कृषि मंत्री सत्र प्रारंभ करने के लिए सभी औपचारिकताओं को पूरा करने यहां आएंगे, जिससे कुशीनगर में भी कृषि विश्वविद्यालय प्रारंभ हो सके।  इस सत्र से प्रारंभ करेंगे प्रवेश  मुख्यमंत्री योगी ने कृषि विश्वविद्यालय के निरीक्षण के उपरांत कहा कि सत्र शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस सत्र से यहां प्रवेश प्रारंभ करेंगे। दो-तीन महीने के लिए किराए पर भवन या स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन के सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था देंगे। यह विश्वविद्यालय न केवल किसान को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, बल्कि लागत कम-उत्पादन अधिक के साथ ही उसकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा।  कुशीनगर अब विकास के नए प्रतिमान को स्थापित कर रहा है मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशीनगर अब पिछड़ा जनपद नहीं है, बल्कि यह बीमारी, उपद्रव, अराजकता से मुक्त है। यहां आपराधिक गतिविधियां व माफियागिरी बंद हुई है। यहां इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह समाप्त किया जा चुका है। कुशीनगर अब उत्सवपूर्ण माहौल में विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित कर रहा है।  अनंत संभावनाओं को लेकर चल रहा कुशीनगर  मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां मेडिकल कॉलेज, प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, नए हाईवे, फोरलेन-टूलेन सड़कों का निर्माण हो रहा है। गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग भी कुशीनगर होते हुए निकल रहा है। कुशीनगर विकास की अनंत संभावनाओं को लेकर चल रहा है। देवरिया-कुशीनगर फोरलेन को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। नार्थ-साउथ कॉरिडोर के तहत पडरौना से लेकर केवल कसया व देवरिया ही नहीं, बल्कि प्रयागराज व उससे आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। लखनऊ की दूरी भी अब कम हो चुकी है।  कुशीनगर में है अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट  सीएम योगी ने कहा कि जब गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग जुड़ेगा तो गोरखपुर से शामली तक भी इकॉनामिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने के साथ ही यहां सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर की बेहतरीन स्थिति हुई है। यहां पहले ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट उपलब्ध कराया जा चुका है। नए एयरक्राफ्ट आने के साथ ही यहां वायुसेवा भी प्रारंभ होगी।  पत्रकारवार्ता के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कुशीनगर के सांसद विजय दुबे, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, विधायक मोहन वर्मा, विवेकानंद पांडेय आदि मौजूद रहे।

हाईकोर्ट में जज साहब क्यों भड़के? बोले- अदालत के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

प्रयागराज  कोर्ट की अवमानना से जुड़े एक मामले में की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत पर मामलों के बोझ की बात कही है। कोर्ट का कहना है कि कार्यवाहियों को पूरा होने में समय लगता है, लेकिन इस दौरान पक्षों को अदालत के आदेशों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसके खिलाफ सीधी चेतावनी दे दी है। याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा है कि कई बार अदालतों में एक दिन में 800 से ज्यादा केस आते हैं। जस्टिस शैलेंद्र ने कहा, '“इलाहाबाद उच्च न्यायालय जैसे अत्यधिक बोझ से दबे संवैधानिक न्यायालयों में जहां हर दिन प्रत्येक न्यायाधीश के समक्ष लगभग 400, 500, 600 और कभी कभी 800 से अधिक मामले सूचीबद्ध होते हैं, न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में काफी समय लग सकता है। कभी-कभी वर्ष और कभी-कभी दशक भी। फिर भी लोग ऐसे अत्यधिक कार्यभार वाले न्यायाधीशों से हमेशा काम करने वाले सुपर रोबोट, सुपर कंप्यूटर या सुपरह्यूमन बनने की उम्मीद करते हैं।' दे दी चेतावनी उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि इस लंबित प्रक्रिया के दौरान कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। जज ने कहा, 'कानून ऐसी हिम्मत को बर्दाश्त नहीं करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति की अनुमति दी गई, तो न्याय प्रशासन अराजकता में चला जाएगा। क्या था मामला दरअसल, कोर्ट एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोप थे कि शिक्षक की सैलरी से जुड़े आदेश को लागू नहीं किया गया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर जिला विद्यालय निरीक्षक ने 18 अप्रैल 2022 को जारी एक आदेश को लागू नहीं किया था। इसपर राज्य ने कहा कि उनकी तरफ से कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक आवेदन दिया गया है, जिसके चलते आदेश का पालन नहीं हुआ। भड़क गया कोर्ट अब राज्य की तरफ से मिले इस जवाब पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक अदालत का आदेश सिर्फ एडवाइजरी नहीं है और न ही सिर्फ कागज का टुकड़ा है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा, 'इसके साथ संविधान की पूरी शक्ति और कानून के शासन का गंभीर आदेश जुड़ा होता है। जिस पल मुकदमों में शामिल पक्षों को अदालती आदेशों को अपनी मर्जी या विकल्प के तौर पर मानने की छूट दे दी जाएगी, उसी पल संवैधानिक शासन की बुनियाद कमजोर होने लगेगी।' कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी हुई है, वह तय नहीं कर सकता कि इसका पालन करना है या नहीं। बेंच ने कहा कि इस तरह के आवेदन अदालत के आदेश को कमजोर नहीं कर सकते। महात्मा गांधी का किया जिक्र कोर्ट ने कहा कि यह न्यायपालिका की अथॉरिटी पर हमला करने जैसा है। इ दौरान अदालत ने महात्मा गांधी 'My Experiments with Truth' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी की एक मशहूर बात है, जो उन्होंने अपनी किताब 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में लिखी थी कि 'आपकी इजाजत के बिना कोई आपका अपमान नहीं कर सकता।' यह बात कोर्ट की अवमानना के मामले में भी पूरी तरह लागू होती है। एक बड़े कोर्ट ने जो आदेश दे दिया, जब तक वह लागू है और रद्द नहीं हुआ है, तब तक उसे मानना ही पड़ेगा और उसका पूरा सम्मान करना होगा। अगर ऐसे आदेश को खुलेआम ताक पर रख दिया जाए और कोर्ट सिर्फ इसलिए चुप रह जाए या कोई कार्रवाई न करे क्योंकि उस आदेश को बदलने या हटाने की कोई अर्जी अभी कोर्ट के सामने पेंडिंग है, तो इससे कोर्ट की जो साख और ताकत कम होगी, उसके लिए सिर्फ आदेश तोड़ने वाला ही जिम्मेदार नहीं माना जाएगा।' क्या हुआ फैसला चार सालों तक आदेश लागू नहीं होने के मद्देनजर अदालत ने विद्यालय निरीक्षक को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया। साथ ही 8 जुलाई को आरोप तय किए जाने की बात कही है। कोर्ट ने कहा कि वह चाहें तो अभी भी साल 2022 के अदालती आदेश का पालन कर सकता है। वह ऐसा करके खुद को कोर्ट की अवमानना के आरोप से बचा सकता है।

सोशल मीडिया पर नाबालिगों की एंट्री पर रोक, मलेशिया ने लागू किए सख्त नियम

कुआलालंपुर  मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने वाले नए नियम लागू करना शुरू कर दिया है. यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की ग्लोबल कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि इस फैसले को लेकर सभी लोग सहमत नहीं हैं और कुछ लोगों ने डेटा सुरक्षा तथा संभावित निगरानी को लेकर चिंता भी जताई है. नए नियमों के तहत मलेशिया में कम से कम 80 लाख यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उम्र की जांच करने वाली व्यवस्था लागू करनी होगी. इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे नया अकाउंट न बना सकें।  मलेशिया सरकार ने जारी किए निर्देश मलेशिया के कम्युनिकेशन और मल्टीमीडिया कमीशन के अनुसार मौजूदा यूजर्स की उम्र का सत्यापन अगले 6 महीनों के भीतर शुरू किया जाएगा. जिन यूजर्स की उम्र 16 साल से कम है, उन्हें अपने फोटो, वीडियो और अन्य डेटा डाउनलोड या ट्रांसफर करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद उनके अकाउंट पर प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई लागू की जा सकती है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 1 करोड़ रिंगिट यानी लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं यदि कोई बच्चा नियमों को दरकिनार कर अकाउंट बनाने में सफल हो जाता है, तो उसके माता-पिता के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी।  मलेशिया के अलावा अन्य देशों में बैन मलेशियाई सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य मकसद बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाना है. सरकार का मानना है कि कुछ प्लेटफॉर्म फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ सकता है. दुनिया के कई अन्य देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र आधारित नियम लागू किए हैं या उनकी घोषणा की है. वहीं ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह की नीतियों पर विचार कर रहे हैं।  सोशल मीडिया को बैन करने का खास मकसद क्या है? मलेशिया के रेगुलेटरी बोर्ड ने कहा है कि इन नियमों का मकसद बच्चों को डिजिटल तकनीक से दूर करना नहीं है. बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर सुरक्षा बढ़ाने, अत्यधिक उपयोग को रोकने और कम उम्र के यूजर्स व नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए बाध्य करना है. हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वे इन नियमों का पालन किस तरह करेंगी. इस बीच, क्लारा कोह ने चेतावनी दी है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पूरी तरह रोक लगाने से उल्टा असर भी हो सकता है. उनके अनुसार इससे किशोर सुरक्षित और नियंत्रित प्लेटफॉर्म छोड़कर इंटरनेट के ऐसे हिस्सों की ओर जा सकते हैं, जहां निगरानी और सुरक्षा के उपाय कम होते हैं।  ऑस्ट्रेलिया समेत इंडोनेशिया में सोशल मीडिया पर बैन ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है. यह नियम 10 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुआ. इसके बाद इंडोनेशिया ने 28 मार्च 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कानूनी रोक लागू की. फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का विधेयक निचले सदन से पारित हो चुका है, हालांकि इसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है. डेनमार्क भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की योजना पर काम कर रहा है।  दुनिया के कई देशों में बैन ग्रीस ने जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीं स्पेन, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, स्लोवेनिया, तुर्की और ब्रिटेन जैसे देश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए नए नियमों और संभावित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं. इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है. फ्रांस में पहले से लागू नियमों के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है. जर्मनी में भी 13 से 16 साल की उम्र के बीच के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है।