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महिला समूह को मिली जिम्मेदारी, 23 लाख पौधों का संरक्षण संभालेंगी ‘अमृत मित्र

भोपाल प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये इस वर्ष नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अमृत हरित महाअभियान चलाया है। अभियान में अब तक 10 संभागों में 23 लाख पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। नगरीय क्षेत्रों में जन भागीदारी से सामुहिक पौधरोपण के कार्यक्रम अभी भी निरंतर आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक यह पौधरोपण जबलपुर, शहडोल, भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, सागर एवं रीवा संभाग के नगरीय क्षेत्रो में व्यापक स्तर पर किया गया है। शहरी क्षेत्रों में लगाये गये पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी “वूमेन्स फॉर ट्री” अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी गयी है। प्रदेश में करीब 7 हजार 800 महिलाएं लगाये गये पौधों की 2 वर्ष तक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगी। अमृत महिला मित्रों को नगरीय निकायों द्वारा प्रशिक्षण के साथ आवश्यक किट भी उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश के कुछ नगरीय निकायों ने उनके नगरीय क्षेत्रों के पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी है। प्रदेश में अमृत हरित महाअभियान 5 जून 2025 को पर्यावरण दिवस से नगरीय निकायों की मदद से व्यापक स्तर पर शुरू किया गया था। राज्य में यह अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। सामुहिक पौधरोपण में जनभागीदारी में छात्र-छात्राओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों, विशेषकर महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को शामिल किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी पौधरोपण प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन के लिये नगरीय निकायों ने सामूहिक‍पौधरोपण के व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश को हराभरा बनाने तथा शहरी पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। पौधरोपण में मुख्य रूप से छायादार और फलदार वृक्षों का चयन किया गया है। आयुक्त की अपील नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से अपील है कि वृक्षारोपण को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधों का रोपण और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा के साथ करें। ऐसा करके ही हम सब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते है।  

मध्यप्रदेश: जल जीवन मिशन के तहत नल जल मेंटेनेंस में PHE लगेगा, लागत करीब 1200 करोड़

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत एकल नल जल योजनाओं के मेंटेनेंस का काम अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) द्वारा किया जाएगा। इस काम में सालाना करीब 1200 करोड़ रूपए का खर्च आएगा। जिसको लेकर पीएचई के अधिकारियों द्वारा पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश करने की तैयारी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें, एकल नल जल योजना उन गांवों के लिए है जहां छोटे जल स्रोत है और जहां स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति की जा सकती है। सरकार ने ऐसे 27990 गांवों के लिए एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की हैं। फैक्ट फाइल     27,990 ऐसे गांव जहां एकल नल जल योजनाओं की दी गई स्वीकृति     20,000 करोड़ खर्च कर गांव-गांव सुगम करेंगे पेयजल व्यवस्था जिम्मेदारी को लेकर कई माह से था पेंच एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी को लेकर पिछले कई माह से पेंच फंसा हुआ था। पहले मुख्य सचिव और मंत्री स्तर पर कई मर्तबा वार्ता हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले पर विस्तार से चर्चा करने के बाद यह फैसला लिया गया कि इसके मेंटेनेंस का काम पीएचई विभाग द्वारा ही देखा जाएगा। 2027 तक प्रदेश में काम पूरा करने का लक्ष्य जल जीवन मिशन के एकल नल जल योजना पर करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। ताकि गांवों में आने वाले सालों में सुगम रूप से पानी की सप्लाई हो सके। लेकिन मेटेंनेस की जिम्मेदारी तय नहीं होने से यह योजना खटाई में पड़ सकती थी। इसलिए सरकार द्वारा इस मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए जिम्मेदारी तय की गई है। बता दें प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 तक का रखा गया है। इमरजेंसी सेवा सेवा के लिए तैनात होंगे वाहन मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मिलने के बाद पीएचई विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा आगे की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग के मुताबिक प्रत्येक गांवों में इमरजेंसी वाहन तैनात किए जाएंगे। जो सभी जरूरी मशीनरी जैसे ट्राईपॉड, चैन-पुल्ली सहित अन्य संयंत्रों से लेस होंगे। किसी इमरजेंसी में फोन आते ही गांवों की तरफ मूवमेंट करेंगे।

अमरबेल पर भोपाल में रिसर्च, पीलिया रोकने के गुणों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार

भोपाल  मध्य भारत के वनों और गांवों में बहुतायत से पाई जाने वाली लता अमरबेल पीलिया के इलाज में भी कारगर हो सकती है। भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान ने अपने शुरुआती अध्ययन में इसमें पीलियारोधी गुण पाया है। इसको वैज्ञानिक आधार देने के लिए संस्थान ने विस्तृत शोध की योजना तैयार की है। अमरबेल का वनस्पति विज्ञानी नाम कस्कूटा रिफ्लेक्सा है। यह बिना पत्तियों वाली परजीवी लता है जो दूसरे पेड़ों के ऊपर पनपती है। उन्हीं के तने से पोषण लेती है, इसकी वजह से इसमें उस पेड़ से संबंधित रसगुण आ जाते हैं। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघंटु आदि में इसके गुणों का विस्तृत वर्णन है। मधुमेह, खांसी, पाचन संबंधी विकारों, व त्वचा रोगों और रक्त दोष के उपचार के लिए इस लता को औषधि के तौर पर उपयोग किया जाता रहा है। कुछ समुदाय इसके काढ़े का उपयोग करते हैं आयुर्वेद संस्थान के अध्ययन में यह बात सामने आई कि कुछ समुदाय पीलिया के उपचार के लिए इसके काढ़े का प्रयोग करते हैं। इसकी पुष्टि के बाद इसके पीलियारोधी गुणों को वैज्ञानिक आधार देने के लिए विस्तृत शोध की योजना बनी है। इनमें इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने की क्षमता), एंटी-वायरल (वायरस से लड़ने वाली) और लीवर प्रोटेक्टिव (जिगर की रक्षा करने वाली) क्षमताओं को परखा जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अमरबेल रक्त शुद्धिकरण में किस हद तक मददगार है। संस्थान में द्रव्यगुण विभाग की प्रमुख डॉ. अंजली जैन ने बताया कि रिसर्च की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक करना है उद्देश्य     हमारा उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना है। शोध के नतीजे सामने आने के बाद अमरबेल आधारित दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी शामिल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज।  

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने जारी किए 1200 नोटिस, ब्लू लाइन निर्माण से प्रभावित होंगे मकान-दुकान

भोपाल   भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी। 700 मामलों में चल रही सुनवाई मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है। गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।

ग्वालियर में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव, पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: CM यादव

ग्वालियर की दो दिवसीय ‘रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव’, पर्यटन को देगी नई दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केंद्रीय मंत्री सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष तोमर भी होंगे शामिल प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फ़ैसल मलिक करेंगे संवाद निवेशक, पर्यटन व्यवसायी, टूर ऑपरेटर्स, होटल इंडस्ट्री के हितधारक होंगे शामिल दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 29 एवं 30 अगस्त को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी होंगे। प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फैसल मलिक विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। ग्वालियर–चंबल एवं सागर क्षेत्र की पर्यटन क्षमताओं को पहचानते हुए प्रदेश में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। “टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 11 से 13 अक्टूबर-2025 तक भोपाल में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जाएगा।   अनुबंध और साझेदारियों से होगा पर्यटन का विकास कॉन्क्लेव में पर्यटन विकास को गति देने के लिए कई अहम करार होंगे।  होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। पारंपरिक संगीतज्ञों, लोक कलाकारों और पर्यटक ग्रामों के कलाकारों की क्षमता निर्माण के लिए ग्वालियर की मान सिंह तोमर यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू होगा। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार के लिए याप डिजिटल, क्रायोन्स एडवरटाइजिंग, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजे़स लिमिटेड, कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन्स साथ अनुबंध होंगे। इन समझौतों से न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय और कलाकार भी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। नई परियोजनाओं का होगा शुभारंभ कॉन्क्लेव में नई परियोजनाओं की शुरुआत भी होगी। इनमें हस्तशिल्पों की मार्केटिंग में संस्था डेलबर्टो महत्वपूर्ण साझेदारी होगी। इस साझेदारी से हस्तशिल्प प्रेमी एक विशेष ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के जरिए सीधे हमारे कारीगरों से जुड़कर उनके द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट और प्रामाणिक उत्पाद घर बैठे ही खरीद सकेंगे। इंडिगो और आगा खां फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर के अंतर्गत ग्वालियर किले में संरक्षण, लैंडस्केपिंग और इल्युमिनेशन कार्यों का शिलान्यास होगा। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत ग्वालियर के फूल बाग में अनुभवात्मक पर्यटन परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। साथ ही मान सिंह तोमर म्यूजिक यूनिवर्सिटी में विकास कार्यों का शिलान्यास किया जायेगा।   विरासतों, धरोहरों और अनुभवात्मक पर्यटन की संभावनाओं पर होगा मंथन रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज – ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ़ एमपी” विषय पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन “ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग – इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें विरासत, लग्ज़री स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा। हितधारक पर्यटन व्यवसाय में निवेश की संभावनाओं पर करेंगे चर्चा रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में ट्रैवल ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच द्विपक्षीय संवाद और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। यह सत्र न केवल क्षेत्रीय पर्यटन के विकास के लिए, बल्कि राष्ट्रीय पर्यटन समृद्धि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। सांस्कृतिक संध्या में दिखेगा मध्य प्रदेश का गौरव रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के प्रथम दिवस सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश का गौरव देखने को मिलेगा। इस दौरान कलाकारों द्वारा लोककला की प्रस्तुति दी जाएगी। इसी प्रकार मैहर बैंड समां बांधेगा। इस कॉन्क्लेव में विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, होस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होमस्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे। यह प्रदर्शनी निवेशकों, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय उद्यमियों और आगंतुकों को एक मंच पर लाकर पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करने का अवसर देगी।   जुटेंगे इंफ्लुएंसर्स, हितधारक जानेंगे समृद्ध विरासत कॉन्क्लेव में इंफ्लुएंसर्स मीट भी होगी। इसमें ग्वालियर–चंबल क्षेत्र के इंफ्लुएंसर्स शामिल होंगे और उन्हें अभिनेता फैसल मलिक के साथ रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसी तरह ग्वालियर किले पर 30 एवं 31 अगस्त को सुबह 6:30 बजे से योग सत्र का आयोजन किया जाएगा। चयनित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए फैमिलियाराइज़ेशन टूर (FAM Tour) का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्वालियर एवं आसपास के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। इस विशेष भ्रमण के माध्यम से प्रतिनिधियों को क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व आदि का अनुभव कराया जाएगा, जिससे वे निवेश, प्रचार-प्रसार और पर्यटन विकास की दृष्टि से गहराई से जुड़ सकें।  

डरावनी मौसम भविष्यवाणी: भारत में पड़ने वाली है हाड़ कंपाने वाली सर्दी

नई दिल्ली भारत में इस बार मानूसन पूरी तरह से मेहरबान रहा है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में लगातार नए सिस्‍टम डेवलप होने की वजह से मानसून लगातार मजबूत बना रहा. इसके वजह से उत्‍तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक जोरदार बारिश हुई. इसके लिए एक कारण सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार है – पैसिफिक रीजन (प्रशांत महासागर क्षेत्र) में अल-नीनो के बजाय ला-नीना का एक्टिव होना. ला-नीना का भारत में पड़ने वाली सर्दी पर भी व्‍यापक प्रभाव पड़ने की संभावना प्रबल है. अमेरका के नेशनल ओश‍िएनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिस्‍ट्रेशन (National Oceanic and Atmospheric Administration – NOAA) ला-नीना के प्रभावी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है. इससे इंडोनेशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक के क्षेत्र पर प्रभाव तो पड़ेगा ही, इंडियन सब-कॉन्टिनेंट पर भी इसका व्‍यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है. इस तरह भारत में इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है. NOAA ने बताया है कि सितंबर से नवंबर के बीच ला नीना विकसित होने की संभावना करीब 53% है, जबकि साल के अंत तक यह संभावना 58% तक पहुंच सकती है. एक बार शुरू होने पर यह क्‍लाइमेट पैटर्न सर्दियों के अधिकांश समय तक सक्रिय रह सकता है और शुरुआती वसंत तक असर डाल सकता है. ला नीना एक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific) का पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है. इसका असर ऊपरी वायुमंडलीय पैटर्न पर भी पड़ता है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है. इसके विपरीत एल नीनो के दौरान महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. दोनों ही स्थितियां उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में सबसे ज्यादा असर डालती हैं. इस बार आने वाली ला नीना अपेक्षाकृत कमज़ोर मानी जा रही है, जिसका मतलब है कि इसके प्रभाव हमेशा साफ़ तौर पर दिखाई नहीं देंगे. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम का एक ब्लूप्रिंट जरूर प्रदान करता है. ला-नीना मतलब तापमान में गिरावट ला-नीना एक जलवायु पैटर्न है जिसमें मध्य प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है. यह आमतौर पर भारत में तेज़ मानसून और भारी वर्षा लाता है, जबकि अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखे का कारण बनता है. यह वैश्विक तापमान को थोड़ा ठंडा भी करता है. इसके विपरीत अल नीनो के प्रभावी होने से तापमान बढ़ता है. इस तरह ला-नीना के एक्टिव होने से भारत समेत एशिया के अधिकांश देशों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना रहती है. अमेरिका के मौसम विज्ञानियों की मानें तो इस बार उसी तरह का माहौल बन सकता है. ला-नीना और अल-नीनो ला-नीना और उसका विपरीत चक्र एल-नीनो वैश्विक स्तर पर मौसम के पैटर्न को गहराई से प्रभावित करते हैं. जहां ला-नीना के दौरान प्रशांत महासागर का इंडोनेशिया से दक्षिण अमेरिका तक का हिस्सा सामान्य से ठंडा हो जाता है, वहीं एल-नीनो में यही समुद्री क्षेत्र ज्यादा गर्म हो जाता है. ला-नीना के असर से भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश होती है, लेकिन अफ्रीका के कई हिस्सों में सूखा और अटलांटिक क्षेत्र में तूफानों की तीव्रता बढ़ जाती है. दूसरी ओर, एल-नीनो भारत में भीषण गर्मी और सूखे की वजह बनता है, जबकि दक्षिणी अमेरिका में यह अतिरिक्त वर्षा लाता है. पिछले दशक की शुरुआत में 2020 से 2022 तक लगातार तीन साल ला-नीना सक्रिय रहा था, जिसे ट्रिपल डिप ला-नीना कहा जाता है. इसके बाद 2023 में एल-नीनो ने दस्तक दी. वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के चलते अब ला-नीना और एल-नीनो जैसी घटनाएं और ज्यादा बार और ज्यादा तीव्रता के साथ हो सकती हैं.

अगर भारत ने माना PM मोदी का संदेश, तो हिल जाएंगी 30 अमेरिकी कंपनियां

नई दिल्ली अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया है. भारत ने इसे अनुचित करार दिया है. अमेरिका के इस कदम का अब भारत में विरोध हो रहा है. क्योंकि अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी दुश्मन चीन है, जिसपर अमेरिका ने अधिकतम 34% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर जबरन 50% टैरिफ लगा दिया गया है, जो कि सरासर गलत है.  इस बीच अब स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से अपील की है कि विदेशी ब्रांड के मुकाबले देसी प्रोडक्ट्स खरीदें, जिससे भारत पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनेगा. अगर देश की 140 करोड़ जनता ने चाह लिया तो कुछ भी संभव है, केवल एक आदमी के स्वदेशी अपनाने से अमेरिका जैसी ताकत को कोई असर नहीं होगा. लेकिन अगर हर किसी ने आज से अमेरिकी प्रोडक्ट्स का बहिष्कार शुरू कर दिया, तो कुछ ही दिन में डोनाल्ड ट्रंप भी रास्ते पर आ जाएंगे. क्योंकि इससे भारत में मौजूद अमेरिका कंपनियों पर आर्थिक चोट पहुंचेगी और इसका नुकसान अमेरिका को उठाना पड़ेगा. लेकिन ये सब तब संभव होगा, जब हर भारतीय स्वदेशी अपनाएगा.   हर भारतीय को करना होगा फैसला लेकिन अब सवाल उठता है कि भारतीय उपभोक्ता और उद्योग जगत कैसे अमेरिका का विरोध करें? क्योंकि केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय रणनीतिक कदम उठाना जरूरी है. दरअसल, आज की तारीख में सैकड़ों अमेरिकी कंपनियां भारत में मौजूद हैं. हर घर में अमेरिका प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हो रहा है, रसोई से लेकर बर्गर-पिज्जा, चिप्स, मैगी, कपड़े, जूते, घड़ी और शराब की बड़ी से बड़ी कंपनियां भारतीय बाजार में मौजूद हैं. आप जब इन कंपनियों को इग्नोर करेंगे, तो आर्थिक चोट अमेरिका को पहुंचेगी.  इसके लिए सबसे पहले हर भारतीय अमेरिकी ब्रांड्स के बजाय भारतीय प्रोडक्ट्स खरीदे. देश के डिस्ट्रिब्यूटर्स और रिटेलर्स अमेरिकी प्रोडक्ट्स की बिक्री कम करके दूसरी कंपनियों को प्राथमिकता दें. साथ ही अमेरिकी आयात पर निर्भरता को घटाना होगा, इसके लिए स्वदेशी और दूसरे देशों के सस्ते प्रोडक्ट्स को अपनाएं. भारत काउंटर टैरिफ के तौर पर अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैरिफ लगाने जैसे कदम उठा सकता है. अगर भारत ने लिया बदला… मौजूदा समय में देखें तो हर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी है, अगर भारत ने बदला लेना शुरू किया तो अमेरिका को तगड़ा झटका लगेगा. आज हम आपको 30 अमेरिकी कंपनियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका भारत में बड़ा कारोबार है. अगर भारत ने इन कंपनियों को आर्थिक चोट पहुंचाई तो सीधा दर्द अमेरिकी इकोनॉमी को होगा.  अमेरिका की 30 प्रमुख कंपनियों की लिस्ट (अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडिया की रिपोर्ट)-  1. Amazon India: ये अमेरिकी कंपनी ई-कॉमर्स सेंगमेट में सबसे बड़ी प्लेयर है, यह कंपनी भारत में 97% पिनकोड तक पहुंचती है. यानी करीब-करीब हर घर तक अमेजन की पहुंच है, लेकिन इस कंपनी को जो मुनाफा होता है, वो अमेरिका तक पहुंचता है. अगर आपने इस कंपनी का विरोध किया तो सीधा असर अमेरिका को होगा.  2. Apple Inc: आज की तारीख में भारत iphone के लिए बड़ा बाजार है. लेकिन आईफोन को बनाने वाली कंपनी अमेरिकी है. यह कंपनी भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन का प्रोडक्शन और बिक्री करती है. अगर इस कंपनी को भारत में दिक्कत हुई तो उसका असर अमेरिका तक दिखेगा. ये कंपनियां भारत में बड़ा कारोबार करके अमेरिकी इकोनॉमी में भी योगदान दे रही हैं.  3. Google (Alphabet Inc.): ये अमेरिकी कंपनी सर्च इंजन, विज्ञापन, एंड्रॉइड और क्लाउड सेवाएं देती हैं, हर कोई गूगल के बारे में जानता है और इसका उपयोग करता है. भारत में गूगल का बड़ा डेटा सेंटर है. कंपनी का भारत बड़ा कारोबार है, लेकिन ट्रंप को लगता है कि अमेरिकी कंपनियों को भारत में कारोबार करने से रोकी जाती हैं.  4. Microsoft: सॉफ्टवेयर, क्लाउड (Azure) और आईटी सर्विस में इस कंपनी का भारत में कारोबार फैला हुआ है. हर कंप्यूटर और लैपटॉप में Microsoft का साफ्टवेयर होता है. ये जो कंपनियां भारत में कमाई करती हैं, उसका कुछ हिस्सा अमेरिका भी ट्रांसफर होता है. यानी अगर भारत में इन कंपनियों के लिए मुश्किलें हुईं तो अमेरिका को भी आर्थिक तौर पर नुकसान होगा.  5. X and Meta: आप दिनभर जिस सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर यानी X पर समय बिताते हैं, वो भी अमेरिकी कंपनियों के द्वारा ही संचालित की जाती हैं.   Fast-Moving Consumer Goods (FMCG) सेगमेंट में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जो उपभोक्ता उत्पादों जैसे खाद्य, पेय, व्यक्तिगत देखभाल, और घरेलू उत्पादों में कारोबार करती हैं. बाजार पर प्रभाव की बात करें, तो देश में जंक फूड बाजार $30 बिलियन का है, जिसमें अमेरिकी कंपनियां जैसे PepsiCo, Coca-Cola, और McDonald’s प्रमुख खिलाड़ी हैं.  6. Coca-Cola India: कोका कोला भारत में पेय पदार्थों की अग्रणी कंपनी है, जो कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (कोक, थम्स अप, स्प्राइट), जूस (माज़ा), और बोतलबंद पानी (किनले) जैसे प्रोडक्ट्स बेचती हैं. कंपनी 1960 के दशक से भारत में मौजूद है.  7. PepsiCo India: पेप्सी, 7अप, मिरिंडा, कुरकुरे, और लेज जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स PepsiCo भी अमेरिकी कंपनी है. भारत में पेय और स्नैक्स के क्षेत्र में अग्रणी है, जो . कंपनी 1989 से भारत में सक्रिय है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जैसे सामाजिक पहलों में निवेश करती है.  8. Procter & Gamble Hygiene and Health Care Ltd (P&G India): व्हिस्पर (सैनिटरी पैड), टाइड (डिटर्जेंट) और विक्स जो आप इस्तेमाल करते हैं, वो अमेरिकी कंपनी P&G बनाती है, यह कंपनी 1964 से भारत में सक्रिय है.  9. Colgate-Palmolive (India) Ltd: कोलगेट घर-घर में मशहूर है, लेकिन कंपनी अमेरिकी है, कोलगेट के टूथपेस्ट और टूथब्रश खूब बिकती हैं और हर घर में आम है.  10. Johnson & Johnson Pvt. Ltd: Johnson & Johnson के प्रोडक्टस् भारत में साबून, पाउडर और सैंपू मौजूद हैं. जॉनसन बेबी प्रोडक्ट्स की खूब डिमांड है, इस कंपनी की साल 1886 से ही भारत में मौजूदगी है.  11. Nestlé India Limited: मैगी, नेस्कैफे, किटकैट, मिल्कमेड बनाने और बेचने वाली कंपनी Nestlé अमेरिकी है. मैगी नूडल्स और किटकैट चॉकलेट्स बेहद लोकप्रिय हैं. 1959 से भारत में सक्रिय, कंपनी ने हाल ही में बिना रिफाइंड शुगर वाले सेरेलैक जैसे नए उत्पाद भी लॉन्च किए हैं. 12. Kimberly-Clark Lever Pvt Ltd: आप जो बच्चों के लिए … Read more

नगर निगम की बड़ी पहल: अवैध कॉलोनियां हुईं नियमित, विकास शुल्क वसूली अभी भी चुनौती

 इंदौर  इंदौर नगर निगम शहर की अवैध कॉलोनियों को नियमित तो कर रहा है, लेकिन इन कॉलोनियों के रहवासियों से विकास शुल्क वसूलने का उसके पास कोई सिस्टम ही नहीं है। हालत यह है कि निगम अब तक 150 से ज्यादा कॉलोनियों को नियमित कर चुका है, लेकिन विकास शुल्क किसी भी कॉलोनी का जमा नहीं हुआ। दरअसल जिन कॉलोनियों को नियमित किया गया है, उनमें से ज्यादातर पहले से विकसित हैं। उनमें बिजली, पानी और सड़क की सुविधा उपलब्ध है। ज्यादातर भूखंडों पर बगैर नक्शा पास कराए निर्माण भी हो चुका है। सवाल उठ रहा है कि ऐसी स्थिति में रहवासी विकास शुल्क क्यों जमा कराएंगे जबकि उनकी कॉलोनी में कोई विकास होना ही नहीं है। नगर निगम का कहना है कि कॉलोनी नियमित होने और विकास शुल्क जमा कराने के बाद रहवासी नक्शा पास कर वैध तरीके से निर्माण कर सकेंगे, लेकिन जो पहले से निर्मित हैं, उनका क्या होगा, इस बारे में निगम मौन है। तीन चरणों में 150 कॉलोनियां हुई नियमित शहर की अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मुहिम करीब ढाई वर्ष पहले शुरू हुई थी। नगर निगम अब तक तीन चरणों में 150 से अधिक कॉलोनियों को नियमित कर चुका है। कॉलोनियों को नियमित करने के एवज में रहवासियों को एक निश्चित विकास शुल्क नगर निगम में जमा कराना था। यह राशि पांच रुपये वर्गफीट से लेकर 150 रुपये वर्गफीट तक है। इस राशि को जमा कराने के लिए कोई सिस्टम ही नगर निगम ने नहीं बनाया। कॉलोनी नियमित करते हुए बताया गया था कि इसके बाद नक्शे पास हो सकेंगे, निर्माण के लिए बैंकों से ऋण मिल सकेगा, लेकिन समस्या यह है कि नियमित हुई ज्यादातर कॉलोनियों में पहले ही से मकान बने हुए हैं। इतना ही नहीं, इन कॉलोनियों में सड़क, पानी और बिजली की सुविधा भी पहले से उपलब्ध है। कुल मिलाकर देखें तो ये कालोनियां पहले से विकसित हैं। इन्हें अतिरिक्त विकास की कोई आवश्यकता ही नहीं है। ऐसे में इन कॉलोनियों के रहवासी निगम में विकास शुल्क क्यों जमा कराएंगे, इसका कोई जवाब निगम के पास नहीं है। अवैध से नियमित की गई किसी भी कॉलोनी के शत-प्रतिशत रहवासियों ने अब तक निगम में विकास शुल्क जमा नहीं कराया है। समझाने का प्रयास करेंगे     कॉलोनियों से विकास शुल्क जमा हो जाए, इसके लिए सिस्टम बनाएंगे। एक तय समय सीमा में विकास शुल्क जमा नहीं होने की स्थिति में कॉलोनी को नियमित करने के निर्णय पर पुनर्विचार का प्रस्ताव भी करेंगे। रहवासियों को यह बात समझाने का प्रयास करेंगे कि विकास शुल्क जमा करने का फायदा उन्हीं को मिलेगा। – राजेश उदावत, कॉलोनी सेल प्रभारी, नगर निगम इंदौर  

आसमान में भारत ने रचा चक्रव्यूह, F-35 रह गया सिर्फ परिंदा

नई दिल्ली भारत ने देसी एयर डिफेंस सिस्‍टम को डेवलप करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा लिया है. देसी वायु रक्षा प्रणाली फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है. आने वाले समय में इस ‘सुदर्शन चक्र’ के इस तरह कि डेवलप किया जाएगा कि F-35 जैसे जेट भी महज परिंदा बनकर रह जाएंगे. इस पूरे सिस्‍टम को तीन लेयर में तैयार किया गया है, ताकि यदि किसी एक चक्र से दुश्‍मनों का वार बच भी जाए तो दूसरे और तीसरे लेयर में वह फंस कर रह जाए. दरअसल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 अगस्त को ओडिशा तट से Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) का सफलतापूर्वक पहला परीक्षण किया था. यह भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड है. यह शील्‍ड मिसाइलों, फाइटर जेट्स और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को एक साथ निष्क्रिय करने में सक्षम है. टेस्ट डेमो में IADWS ने एक ही समय में तीन टारगेट (दो हाई-स्पीड UAVs और एक मल्टीकॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग ऊंचाइयों और रेंज पर मार गिराया. यह भारत की मल्‍टीलेयर वायु-रक्षा क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है. तीन लेयर का सुरक्षा चक्र यह प्रणाली तीन प्रमुख स्वदेशी तकनीकों को इंटीग्रेट करती है. QRSAM (Quick Reaction Surface-to-Air Missile): 25-30 किमी रेंज और 10 किमी ऊंचाई तक टारगेट हिट करने में सक्षम. 8×8 मोबाइल व्हीकल्स पर माउंटेड, यह फायर-ऑन-द-मूव क्षमता देता है. VSHORADS (Very Short Range Air Defence System): लो-एल्टीट्यूड खतरों को टैकल करने वाला पोर्टेबल और फील्ड-डिप्लॉयबल सिस्टम. Directed Energy Weapon (DEW): 30 किलोवॉट लेजर जो 3.5 किमी तक ड्रोन, हेलिकॉप्टर और मिसाइल को ध्वस्त कर सकता है. ये सभी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से नियंत्रित होते हैं, जिसे DRDL ने विकसित किया है. ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख यह सफलता मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में अहम मानी जा रही है, जब भारतीय रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को निष्क्रिय किया था. उसी ऑपरेशन ने स्वदेशी एयर शील्ड की तात्कालिक जरूरत को उजागर किया. स्टार वॉर टेक्नोलॉजी रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के पास पहले से ही इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जो अमेरिकी एयर पावर को एक निश्चित दूरी पर रोकते हैं. IADWS उसी रणनीति का भारतीय संस्करण है, जो विशेष रूप से क्षेत्रीय खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने कहा, ‘यह सिर्फ शुरुआत है. हम हाई-एनर्जी माइक्रोवेव्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स जैसी तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं, जो हमें स्टार वॉर्स जैसी क्षमता देंगे.’ इंजन की कमी यह उपलब्धि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Indigenisation) की दिशा में बड़ी छलांग है. हालांकि, देश फाइटर जेट इंजन टेक्‍नोलॉजी में भारत अब भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है. कावेरी इंजन पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च के बावजूद सफलता नहीं मिली. तेजस और AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स आज भी अमेरिकी, फ्रांसीसी और रूसी इंजनों पर टिके हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से आह्वान किया था कि देश को स्वदेशी जेट इंजन विकसित करना होगा. मिसाइल और रडार में प्रगति के बावजूद यह कमी भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनी हुई है.

गोल्डन टाइम की शुरुआत: नीचभंग राजयोग से चमकेंगी इन 3 राशियों की किस्मत

वैदिक ज्योतिष मुताबिक कुंडली में कुछ ऐसे योग होते हैं, जो व्यक्ति को जीवन में सभी भौतिक सुख प्रदान करते हैं। साथ ही व्यक्ति को धन- दौलत की प्राप्ति कराते हैं। आपको बता दें कि अक्टूबर में वैभव के दाता शुक्र ग्रह अपनी नीच राशि कन्या में संचरण करने जा रहे हैं। जिससे नीचभंग राजयोग का निर्माण होगा। जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। लेकिन 3 राशियां ऐसी हैं, जिनके इस समय अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं। साथ ही इन लोगों को आकस्मिक धनलाभ और करियर- कारोबार में तरक्की के योग बन रहे हैं। वहीं फंसा हुआ धन मिल सकता है। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं… मिथुन राशि (Mithun Zodiac) नीचभंग राजयोग का बनना मिथुन राशि के लोगों को सकारात्मक सिद्ध हो सकता है। क्योंकि शुक्र ग्रह आपकी गोचर कुंडली से चतुर्थ स्थान पर संचऱण करेंगे। इसलिए इस दौरान आपकी सुख- सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है। साथ ही  धन प्राप्ति के नए नए मार्ग मिलेंगे और कारोबार में सफलता प्राप्त करने में कामयाब भी होंगे। वहीं इस समय उन लोगों को अच्छा लाभ हो सकता है। जिनका व्यापार प्रापर्टी, जमीन- जायदाद और रियल स्टेट से जुड़ा हुआ है। वहीं इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने या नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए यह समय अनुकूल है। रिश्तों में भी सामंजस्य रहेगा और आप अपने पार्टनर के साथ गहरे भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव करेंगे। मकर राशि (Makar Zodiac) आप लोगों के लिए नीचभंग राजयोग अनुकूल सिद्ध हो सकता है। क्योंकि शुक्र ग्रह आपकी राशि से भाग्य और विदेश भाव पर संचरण करने जा रहे हैं। इसलिए इस समय आपको किस्मत का साथ मिलेगा। साथ ही इस अवधि में  समाज में आप अपनी अलग पहचान बना पाने में कामयाब होंगे। वहीं आप देश- विदेश की यात्रा भी कर सकते हैं। साथ ही आप कोई धार्मिक या मांगलिक कार्यक्र में शामिल हो सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताना आपके लिए आनंददायक रहेगा। यह समय अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने और जीवन के हर पल का आनंद लेने का है। वहीं इस समय प्रतियोगी छात्रों को किसी परीक्षा में सफलता मिल सकती है।  धनु राशि (Dhanu Zodiac) आप लोगों के लिए नीचभंग राजयोग करियर और कारोबार के लिहाज से लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। क्योंकि यह राजयोग आपकी राशि से कर्म भाव पर बनने जा रहा है। इसलिए इस समय आपको काम- कारोबार में विशेष तरक्की मिल सकती है। साथ ही नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं कला, लेखन, संगीत या प्रदर्शन जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में आपकी प्रतिभा चमकेगी और आपको सफलता मिलेगी। कार्यस्थल पर आपकी रचनात्मकता और नेतृत्व कौशल की प्रशंसा होगी और आपको नई जिम्मेदारियां या तरक्की के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही व्यापारियों को अच्छा धनलाभ हो सकता है।