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बाल यौन शोषण पर सख्त रुख: सहमति का तर्क खारिज, दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश

 नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि व्यावसायिक यौन शोषण के लिए किसी नाबालिग की तस्करी की जाती है, तो दोषियों पर कठोर 'पोक्सो एक्ट' के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने एनजीओ 'प्रज्वला' की याचिका पर यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बाल यौन शोषण का हर मामला कानूनन गैर-सहमति वाला ही माना जाएगा। सहमति का तर्क पूरी तरह खारिज कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मानव तस्करी के मामलों में पीड़ित बच्ची की 'सहमति' का कोई अर्थ नहीं रह जाता, चाहे अपराधी ने डराने, धमकाने या बहलाने-फुसलाने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया हो या नहीं। कोर्ट का पूरा ध्यान अपराधियों की करतूतों और उनकी नीयत पर होना चाहिए। यदि पीड़ित को यह पता भी हो कि उसे वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है, तब भी वह पीड़ित ही रहेगी, क्योंकि काम के हालातों को लेकर उसे धोखे में रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाता है और यह अधिकार सरकार के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी लागू होता है पुनर्वास ही असल सशक्तिकरण सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों को किसी एक कानून के चश्मे से न देखें, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के साथ पोक्सो एक्ट का भी समग्रता से इस्तेमाल करें। पोक्सो लागू होने से पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करने और मेडिकल जांच की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील व सुरक्षित हो जाती है। कोर्ट ने पीड़ितों को सिर्फ 'बचाव का पात्र' मानने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके पुनर्वास पर जोर दिया, क्योंकि बिना पुनर्वास के वे दोबारा उसी दलदल में गिरने को मजबूर हो जाते हैं।

बिहार में शराबबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नया नेटवर्क उजागर

मुजफ्फरपुर बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद धंधेबाजों का नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। अब तस्करों का दायरा सिर्फ दूसरे राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे सीधे विदेशों से भी शराब की खेप मंगवाने से नहीं डर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई विदेशी शराब की एक बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की नींद उड़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नया ट्रेंड एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भूटान से बंगाल सीमा पार कर मुजफ्फरपुर पहुंची खेप उत्पाद विभाग ने मुजफ्फरपुर में छापेमारी कर भूटान निर्मित शराब के 115 कार्टन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज भूटान से चोरी-छिपे सीमा पार कर पहले पश्चिम बंगाल में दाखिल हुए थे। इसके बाद किशनगंज, फारबिसगंज, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा फोरलेन के रास्ते होते हुए इस बड़ी खेप को मुजफ्फरपुर लाकर स्टॉक किया गया था। जांच टीम अब उस गाड़ी और उसके मालिक की पहचान करने में जुटी है, जिसके जरिए इतनी लंबी दूरी तय कर शराब यहाँ पहुँचाई गई। तीन बड़े धंधेबाज फरार, छापेमारी इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पीछे स्थानीय नेटवर्क का हाथ सामने आया है। मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले तीन कुख्यात धंधेबाजों—लखपत पासवान, सुशील झा और निखिल कुमार के नाम उजागर हुए हैं। शनिवार को जांच टीम ने इन फरार आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, हालांकि फिलहाल तीनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। 150 की बोतल को 1200 में बेचने का खेल पकड़े गए नेटवर्क से शराब तस्करी का एक बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि भूटान जैसे टैक्स-फ्री देश से महज 150 रुपये मूल्य की 750 एमएल शराब मंगवाई जाती थी। इसके बाद धंधेबाज इसमें पानी, रंग और जानलेवा स्पिरिट मिलाकर इसकी मात्रा को सवा से डेढ़ लीटर (यानी एक से दो बोतल) तक बढ़ा देते थे। इस मिलावटी शराब को असली दिखाने के लिए बोतलों पर रॉयल चैलेंज (Royal Challenge), रॉयल स्टैग (Royal Stag) और मैकडॉवेल नंबर वन (McDowells No. 1) जैसे नामी ब्रांड्स के नकली रैपर और स्टिकर चिपका दिए जाते थे। इसके बाद इस मिलावटी और जानलेवा शराब को बाजारों में 1200 रुपये प्रति बोतल तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। टैक्स-फ्री राज्य और देश निशाने पर उत्पाद विभाग के अनुसार, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट बिहार में सक्रिय है। हाल के दिनों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के तस्करों की गिरफ्तारियों से पता चला है कि अब शराब की बोतलों से बारकोड को खरोंचकर भेजा जा रहा है, ताकि जांच में उस दुकान का पता न चल सके जहाँ से शराब खरीदी गई। इसके अलावा, मुनाफे को अधिकतम करने के लिए धंधेबाज अब चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, दमन और दीव जैसे टैक्स-फ्री राज्यों को निशाना बना रहे हैं, जहां शराब बेहद सस्ती मिलती है। भूटान से शराब की खेप पकड़े जाने का बिहार में यह पहला मामला है, जो इसी रणनीति का हिस्सा है। अंधापन और मौत दे रही यह शराब शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाजों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही स्पिरिट मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विशेषज्ञ सह इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेज साइंस, प्रो. अरविंद कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि शराब में मिलाई जाने वाली स्पिरिट काफी घातक होती है। जब इसे मात्रा बढ़ाने के लिए डायलूट किया जाता है, तो यह 'मिथाइल अल्कोहल' का रूप ले लेती है। इसके सेवन से व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। यदि स्पिरिट की मात्रा थोड़ी भी अधिक हो जाए, तो व्यक्ति की मौके पर ही जान जाने का पूरा खतरा रहता है। भूटान से लाई गई शराब को डायलूट कर एक से दो बोतल बनाने का धंधा किया जा रहा था। तीन धंधेबाजों का नाम सामने आया है। जिनके विरुद्ध अभियोग दर्ज कर गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। दीपक कुमार सिंह, उत्पाद इंस्पेक्टर

भारतीय राजनीति में पहली बार! डिप्टी सीएम अरुण साव बने विधायक दूल्हे की बैलगाड़ी के सारथी

भारतीय राजनीति में पहली बार "डिप्टी सीएम अरुण साव बने विधायक दूल्हे की बैलगाड़ी के सारथी छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव बने विधायक दीपेश साहू की बैलगाड़ी में निकली बारात के सारथी बेमेतरा/रायपुर  छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव निकले बैलगाड़ी में सारथी बनकर दूल्हे राजा हैं भाजपा विधायक दीपेश साहू। बेमेतरा में आयोजित सामूहिक मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में विवाह करने का फैसला किया और बारात के सारथी बनने राजधानी रायपुर से बेमेतरा पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव, बैलगाड़ी में निकली बारात के सारथी बने डिप्टी सीएम अरुण साव।

उच्च शिक्षा विभाग ने दी मंजूरी, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होंगी नई कक्षाएं

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 शासकीय महाविद्यालयों में नए संकाय एवं विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा, श्री अनुपम राजन ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश छह शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जाएगा। इसके अंतर्गत भौतिकी, रसायन विज्ञान, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति विज्ञान विषयों का संचालन किया जाएगा। जिन महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जा रहा है, उनमें शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर, केसली, रहली, गढ़ाकोटा, शाहगढ़ और जावर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शासकीय महाविद्यालय ढाना में स्नातक स्तर पर इतिहास विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बम्हनी में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, हिन्दी एवं समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय नईगढ़ी राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं समाजशास्त्र, शासकीय कन्या महाविद्यालय बासौदा में स्नातकोत्तर स्तर पर भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बंडा में स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र, हिन्दी, इतिहास, वनस्पति शास्त्र, प्राणी शास्त्र एवं रसायन शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय रहली स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय गढ़ाकोटा में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय शाहगढ़ में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं इतिहास, विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर उनका पलायन भी कम होगा। विभाग का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।  

सूर्या चौहान केस: हत्या के बाद पुलिस कार्रवाई में मुख्य आरोपी ढेर

गाजियाबाद  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सूर्य चौहान की हत्या मामले ने जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में मुख्य आरोपी असद का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का बकरीद से पहले का एक बयान खासी चर्चा में है। बकरीद के मौके पर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए थे। खुले में नमाज पढ़ने और सार्वजनिक स्थल पर पशुओं की कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था। सीएम योगी ने इससे पहले महिलाओं की सुरक्षा के मामले पर यमराज वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बेटियों के साथ छेड़खानी और व्यापारियों के खिलाफ अपराध करने वालों को यह सोचना चाहिए कि अगले चौराहे पर यमराज इंतजार कर रहे होंगे। असद ने सीएम योगी की बात नहीं मानी। लगातार बढ़ी थी मांग सूर्या चौहान की हत्या के बाद से लगातार मामले में एक्शन की मांग हो रही थी। सूर्या की मां और भाई लगातार इस मामले में मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर की मांग कर रहे थे। इस बीच गाजियाबाद पुलिस ने कांड के मुख्य आरोपी असद को ढेर कर दिया। 17 वर्षीय छात्र सूर्य प्रताप चौहान उर्फ सूर्या के हत्यारों पर लगातार एक्शन जारी है। गाजियाबाद पुलिस की ओर से असद पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 28 मई को 17 वर्षीय किशोर पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसकी मौत हो गई थी। सूर्या की मौत के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के कड़े निर्देश के बाद भी हत्याकांड को अंजाम दिए जाने को लेकर चर्चा गरमाई। मामले में खोड़ा पुलिस पर भी सवाल खड़े हुए। हालांकि, मामले में सरकार की ओर से अपराधियों के खिलाफ सख्त एक्शन के निर्देश पहले ही जारी किए गए थे। ऐसे में पुलिस लगातार एक्शन में दिखी। सीएम ने लगातार दिया हैं संदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुंडे और माफियाओं को पिछले दिनों लगातार एक संदेश दिया है, अगर अपराध करोगे तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना होगा। सीएम योगी ने लखनऊ से लेकर मऊ तक के कार्यक्रमों के दौरान साफ तौर पर कहा कि प्रदेश में आज कोई बेटी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता है। प्रदेश में आज कोई व्यापारी से जबरन गुंडा टैक्स नहीं ले सकता है। प्रदेश में बेटियां नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। अगर कोई गुंडा बेटियों को छेड़ने का प्रयास करता है, तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने के लिए बैठे रहते हैं। यही बात उन्होंने अपराध करने वालों को भी कही थी। हालांकि, बकरीद के दिन सुनियोजित साजिश रचते हुए जिस प्रकार से असद ने अपने साथियों के साथ मिलकर सूर्या को मार डाला। यह एक प्रकार से सीएम योगी आदित्यनाथ की लगातार अपील को नजरअंदाज किए जाने के तौर पर देखा गया। अब इस मामले में योगी सरकार का सख्त एक्शन सामने आया है। असद के एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में आरोपी के एनकाउंटर के बाद पीड़ित परिवार संतोष जता रहा है। ब्रजेश पाठक का आया बयान सूर्या चौहान की हत्या मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सूर्या के हत्यारों को गिरफ्तार किया था। जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी मारा गया। डिप्टी सीएम ने कहा कि इस हत्याकांड और अपराध में शामिल हत्यारों एवं अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। रीना भाटी ने भी बोला हमला सूर्या केस में खोड़ा नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी ने कहा कि परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी। योगी सरकार ने कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखा। यह एनकाउंटर एक कट्टरपंथी सोच वाले व्यक्ति के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर कोई भी ऐसी विचारधारा पर चलेगा, तो उसका भी यही हश्र होगा।  

2033 से शामिल होंगी नई सबमरीन, हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की समुद्री ताकत

नई दिल्ली  भारत ने पनडुब्बी क्षमता में अपने पड़ोसी देशों को मात देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना ने जर्मनी के साथ एक डील को लेकर अच्छी खबर दी है। भारतीय नौसेना के मुताबिक भारत और जर्मर्नी के बीच 6 नए कन्वेंशनल सबमरीन के निर्माण के लिए अब कुछ ही महीनों में कॉन्ट्रैक्ट की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान टेक्नोलॉजी का भी ट्रांसफर किया जाएगा। इस डील के फाइनल होने से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। पूर्व नौसेना प्रमुख के मुताबिक भारत के मजगांव डॉक और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के बीच अनुबंध को पूरा होने में बस कुछ और महीने ही लगेंगे। पहली पनडुब्बी के 2033 में शामिल होने की उम्मीद है, जिसके बाद 2038 तक हर साल एक पनडुब्बी शामिल की जाएगी। इस मामले पर अब पूर्व नौसेना प्रमुख रहे एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बयान दिया है। उन्होंने इस डील की पूरी कहानी बताई है। सबसे पहले इस पनडुब्बी की खासियत इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी AIP तकनीक है, जिसके कारण इन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार पानी की सतह पर नहीं आना पड़ेगा। ये पनडुब्बी 2 से 3 सप्ताह तक लगातार पानी के भीतर छिपी रह सकती हैं। इन्हें आधुनिक टॉरपीडो और भारी मारक क्षमता वाली मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस-एनजी) से लैस किया जाएगा। ये खामोश और अत्याधुनिक पनडुब्बियां हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की समुद्री चुनौतियों का मुकाबला करने में भारतीय नौसेना को एक बड़ी रणनीतिक बढ़त देंगी। होर्मुज जैसे संकट के लिए तैयार रहना जरूरी: नौसेना प्रमुख पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू देते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संरक्षा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। नौसेना की तात्कालिक प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापक अरब सागर में उपस्थिति, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा प्रदान करके सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना रही है। इन समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने की हमारी दीर्घकालिक योजना किसी एक निश्चित समाधान पर निर्भर रहने के बजाय समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, परिचालन क्षमता और साझेदारी को मजबूत करना है। हम महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्गों पर निरंतर उपस्थिति बनाए रखते हैं, जैसे कि 2008 से समुद्री डाकुओं से बचाव के लिए अदन की खाड़ी में एक जहाज की निरंतर तैनाती। हमारे सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) ने परिचालन प्रतिक्रियाओं के समन्वय के लिए सहयोगी देशों के साथ संबंध स्थापित किए हैं। नौसेना प्रमुख बोले- हमारा लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा करना पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना के प्रयास किसी विशिष्ट राष्ट्र को लक्षित नहीं करते, न ही हम अपने उद्देश्यों को केवल क्षेत्र पर "वर्चस्व" स्थापित करने तक सीमित रखते हैं। हमारा सर्वोपरि लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक स्थिर, स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देना है। हम कई रणनीतिक कदमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं – पहला, हम अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं और 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर हैं। दूसरा, हमने मिशन-आधारित तैनाती और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के माध्यम से निरंतर परिचालन पहुंच बनाए रखी है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और हिंद महासागर क्षेत्र में अपने जहाजों और विमानों की लगभग निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित की है; और अंत में, भारत ने महासागर की परिकल्पना के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को काफी मजबूत किया है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित “गोरस” मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध, पशुपालक और किसान आसानी से कर सकेंगे डाउनलोड

भोपाल  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं के संतुलित आहार प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पशुपालन एवं डेयरी विभाग निरंतर नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस ऐप के उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। प्रदेश के पशुपालक एवं किसान गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप विकसित करने का उद्देश्य मध्यप्रदेश में दो करोड़ से अधिक गायों और भैंसों का पालन किया जाता है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से संतुलित पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में 20 से 30% तक की कमी आती हैं। पशुपालकों की इन समस्याओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी, जैसे नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, दुग्ध उत्पादन का चरण तथा वर्तमान पशु आहार आदि दर्ज करेंगे, ऐप उनके पशु के लिए संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही ऐप यह भी बताएगा कि आहार प्रबंधन में सुधार करने पर एक ब्यांत के दौरान पशुपालक को कितना आर्थिक लाभ हो सकता है। ऐप वर्तमान में दिए जा रहे आहार के कारण होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित "गोरस" मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है। पशुपालक एवं किसान इसे अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप की प्रमुख विशेषताएं यह ऐप पूरी तरह से हिंदी भाषा में विकसित है, जो गाय एवं भैंसों के लिए संतुलित आहार संबंधी सुझाव प्रदान करता है। साथ ही, उपलब्ध चारे के संयोजन के आधार पर अधिकतम दुग्ध उत्पादन और न्यूनतम लागत का दर्शाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी यह कार्य करने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि ये ऐप 28 से अधिक स्थानीय चारे की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। मौसम विशेषकर गर्मी तथा गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार स्वचालित सुझाव देता है। गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इसके अलावा पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ का आकलन प्रदान करता है और अवर्णित गायों एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार संबंधी सलाह देता है। ऐसे करें डाउनलोड "गोरस" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां "गोरस ऐप" सर्च करें। ऐप दिखाई देने पर उसे डाउनलोड करें। डाउनलोड होने के बाद इंस्टॉलेशन की अनुमति दें और "इंस्टॉल" विकल्प पर क्लिक करें। आवश्यक सुरक्षा अनुमति प्रदान करने के बाद ऐप को खोलकर उपयोग किया जा सकता है। विभाग द्वारा विकसित किया गया ऐप पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने तथा वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा "गोरस" मोबाइल ऐप विकसित कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह ऐप सरल एवं सहज हिंदी भाषा में तैयार किया गया है और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। पशुपालक एवं किसान इसे आसानी से डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकते हैं।  

फ्यूल सरचार्ज से महंगी हुई बिजली, बढ़कर आएगा बिल

 लखनऊ  बढ़ती महंगाई की मार से परेशान बिजली उपभोक्ताओं को जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिल भी देना होगा। भीषण गर्मी के चलते मई में कहीं अधिक बिजली का उपभोग होने से उपभोक्ताओं का वैसे ही जून में बढ़कर बिल आना था। अब बिजली कंपनियां मार्च माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) के लिए मई के बिल के साथ जून में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली भी करेंगी। इस संबंध में पावर कारपोरेशन ने आदेश जारी किया है। उपभोक्ताओं को जुलाई में भी जून के बिल के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। चूंकि विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित किया है और पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने 5.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला है, इसलिए विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ तथा ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से अधिभार शुल्क के तौर पर बिजली के बिल में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कंपनियों से दो वर्ष पुराने बकाए को जोड़ते हुए बिल तैयार कराया है। इसमें पुराने बकाए का 1400 करोड़ रुपये शामिल है। संबंधित आदेश में लिखा है कि अधिभार 20 प्रतिशत वसूला जाना चाहिए, जिससे यह लगता है कि जुलाई में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलना जा सकता है। वर्मा ने आयोग से मांग की है कि ईंधन अधिभार वसूलने पर रोक लगे। उन्होंने कहा है कि मार्च में महंगी बिजली खरीदने की विस्तृत जांच हो। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है। ऐसे में ईंधन अधिभार बढ़ाने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर भार डालने के बजाय उसे सरप्लस से ही समायोजित (एडजस्ट) किया जाए। उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने के मामले को वह जल्द ही आयोग के समक्ष उठाएंगे। वह ईंधन अधिभार निर्धारण संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करेंगे। उल्लेखनीय है कि मई में ईंधन अधिभार के एवज में 1.52 प्रतिशत बिजली का बिल कम हुआ था। इससे पहले अप्रैल में 2.14 प्रतिशत अधिक बिल देना पड़ा था।  

भीषण गर्मी का असर, कई बांध सूखे के कगार पर; दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर

 नई दिल्ली  भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के सामने एक नई और गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, मई महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर बेहद तेजी से नीचे आया है। महज 22 दिनों के भीतर इनमें पानी का स्टॉक 12% तक कम हो गया है, जिसके बाद अब कुल क्षमता का केवल 25% पानी ही शेष बचा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के आखिरी हफ्ते तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर पर सिमट गया है। मई महीने में आई भारी गिरावट मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो इनकी कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा अर्थ यह है कि कड़कती धूप और पानी की भारी मांग के कारण एक महीने के भीतर ही मुख्य जल स्रोतों से लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई है, जिसने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन जिस रफ्तार से बांध खाली हो रहे हैं, वे आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती हैं। संकटग्रस्त बांधों की बढ़ती संख्या मई की शुरुआत में जब गर्मी का असर कम था, तब देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ा, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। अत्यधिक गर्मी के कारण महीने के अंत तक कई जलाशय खाली हो चुके हैं, जिससे गंभीर संकट का सामना कर रहे बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। सतारा का कोयना बांध भी इस समय गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। पानी की किल्लत की सबसे भयावह और डरावनी तस्वीर दक्षिण भारतीय राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर मात्र 17.55% रह गया है। इसके कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गई है। देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे बड़े जलाशय मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया। बिजली उत्पादन पर संकट पानी की इस भारी कमी का सीधा असर देश के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 में मई की शुरुआत में ही पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे चला गया था, और अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57% से घटकर 26.60% और पश्चिमी भारत में 42.36% से कम होकर 28.53% पर आ गया है, जबकि साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में पानी का भारी अकाल साफ देखा जा सकता है। इस भीषण संकट के बीच अब सभी की निगाहें केवल आने वाले मानसून पर टिकी हैं।

गोरखपुर में पर्यटन को नई उड़ान: रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक नया टूरिस्ट स्पॉट तैयार है। सीएम योगी आदित्यनाथ दो जून को इसका लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 20.39 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए चिलुआताल के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण के काम का लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर के दक्षिणी छोर में रामगढ़ताल योगी सरकार द्वारा कराए गए कायाकल्प से गोरखपुर के टूरिज्म का हॉट स्पॉट बना हुआ है तो अब उत्तरी छोर पर चिलुआताल पर्यटकों को लुभा रहा है। चिलुआताल घाट के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के मुताबिक चिलुआताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 20 करोड़ 39 लाख रुपये की परियोजना को मूर्त रूप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि चिलुआताल भी रामगढ़ताल की तरह दशकों से उपेक्षित पड़ा रहा। योगी सरकार ने पहले रामगढ़ताल का कायाकल्प कर उसे वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया तो अब चिलुआताल को संवारा गया है। कार्यदायी संस्था के रूप में यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से कराए गए कार्यों में 570 मीटर पाथवे निर्माण, घाट की सीढ़ियों का निर्माण, ताल किनारे रेलिंग, सोलर लाइट, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, बेंच, 400 मीटर एप्रोच रोड, 500 मीटर साइड वाल एवं नाली निर्माण, गेट के सुपर स्ट्रक्चर का कार्य, कैरेट बोल्डर और स्टोन पिचिंग, दुकान, टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण आदि शामिल है। रामगढ़ताल के नौका विहार की तरफ विकसित होने से चिलुआताल की आभा निखरकर सामने आ रही है। लोग सुबह-शाम टहलने के लिए आना शुरू कर दिए हैं। सीएम योगी के विजन से विकसित चिलुआताल टूरिस्ट स्पॉट मनोरंजन के साथ रोजगार का केंद्र भी बनेगा। सात दुकानें यहां बनकर तैयार हो गईं हैं। घाट पर एक तरफ लोग सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर मनोरंजन करेंगे वहीं लोग यहां लगी दुकानों पर जायके का आनंद भी ले सकेंगे। यही नहीं, चिलुआताल में भी रामगढ़ताल की तर्ज पर लोगों को बोटिंग करने की सुविधा मिलेगी।