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ईरान की Maham-3 नेवल माइन पर विवाद, होर्मुज में अमेरिकी तलाशी अभियान तेज

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है. इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है. वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स… जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा. माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है. हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

54 हजार 923 ग्रामों एवं 425 नगरीय निकायों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण

भोपाल  मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operation-HLO) का फील्ड कार्य 30 मई 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। राज्यभर में 01 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस व्यापक अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकानों तथा उनमें निवासरत परिवारों से निर्धारित जानकारी संकलित की गई। इस चरण में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों संबंधी जानकारी मोबाइल एप के जरिए डिजिटल रूप से एकत्रित की गई। जनगणना 2027 की यह प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यमों पर आधारित रही, जिसके अंतर्गत फील्ड कार्य की सतत मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से की गई। इससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित हुई। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में यह कार्य 55 जिलों, 425 नगरीय निकायों तथा 449 तहसीलों के अंतर्गत 54 हजार 923 ग्रामों में संपादित किया गया। मकान सूचीकरण ब्लॉकों में 1 लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 15 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक रिजर्व के रूप में तैनात किए गए थे। निर्धारित समयसीमा में पूरे प्रदेश में मकानों की गणना का कार्य पूर्ण होना प्रशासनिक समन्वय एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जनगणना के दौरान संकलित की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति-निर्माण, विकास योजनाओं के निर्माण तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित समय पर संबंधित आंकड़े जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण के पूर्व राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की गई थी। इस अवधि में प्रदेश के 7 लाख से अधिक परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की, जो नागरिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या की गणना (Population Enumeration-PE) का कार्य फरवरी 2027 में संपादित किया जाएगा। इस चरण में परिवारों के सभी सदस्यों से निर्धारित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाएगी। जनगणना अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रगणकों एवं प्रदेशवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया द्वारा जनजागरूकता और प्रचार-प्रसार में निभाई गई सक्रिय भूमिका से जनसहभागिता को व्यापक बल मिला। निदेशक जनगणना कार्य, मध्यप्रदेश  संजीव वास्तव एवं सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल एवं समयबद्ध संपादन पर प्रदेश के सभी नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले जनगणना के द्वितीय चरण में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा।  

सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

 सिद्धार्थनगर  बुद्ध की धरती की पहचान बन चुका कालानमक चावल अब वैश्विक बाजार में नई ऊंचाई छूने जा रहा है। अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध कालानमक चावल की जिले से पहली बार एक हजार टन की रिकॉर्ड खेप सिंगापुर भेजी जाएगी। अब तक सिंगापुर समेत अन्य देशों को अधिकतम 50 टन तक ही कालानमक का निर्यात हो सका था। ऐसे में यह न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे कालानमक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और हजारों किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। मधुवापार स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और सिंगापुर की संस्था जेन बुद्धा के बीच इसके लिए सहमति बन चुकी है। समझौते के तहत 20 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक चरणबद्ध तरीके से एक हजार टन कालानमक चावल सिंगापुर भेजा जाएगा। इसके लिए सिद्धार्थनगर के चार और महराजगंज के एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ भी समझौता हो चुका है। कालानमक को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई गति मिली है। बुद्ध की धरती की पहचान बने इस धान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक को सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल भेंट कर इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूती दी थी। जिले में बीते दो वर्षों के दौरान आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, कालानमक महोत्सव और विभिन्न प्रचार कार्यक्रमों ने भी इसकी मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कामन फैसिलिटी सेंटर संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों से 50 से 75 रुपये प्रति किलो तक की दर से धान खरीदा जाएगा। जो किसान चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध करा सकेंगे, उनके घर से सीधे खरीद की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को परिवहन और कुटाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कालानमक की मांग उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से जिले में खरीदारी कर रही हैं। कुशीनगर की प्रविधान कंपनी, टू ब्रदर्स और इंडिया गेट बासमती जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां भी यहां सक्रिय हैं। वर्तमान में 20 से अधिक कंपनियां जिले में कालानमक की खरीद के लिए काम कर रही हैं। ब्लॉकों में भेजे गए 200 क्विंटल बीज उधर कृषि विभाग भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि इस बार जिले के 14 ब्लाकों के बीज गोदामों पर 200 क्विंटल कालानमक बीज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 14 एफपीओ अपने सदस्य किसानों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं। निजी विक्रेताओं ने भी कालानमक बीज की मांग को देखते हुए पर्याप्त भंडारण किया है। जिले में 500 से अधिक किसान अपने संरक्षित बीज का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष कालानमक का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

बिजली चोरी पर सख्ती: ट्रांसफार्मर-स्तरीय डेटा से होगी खपत और बिलिंग की निगरानी

पटना  बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अब अगले एक दशक तक ऊर्जा लेखांकन (इनर्जी अकाउंटिंग) का कार्य भी करना होगा। इसके लिए कंपनियां क्षेत्रवार निगरानी करेंगी और बिजली वितरण तथा खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगी। बिजली कंपनियों ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तकनीकी माध्यमों से बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। कैसे होती है इनर्जी अकाउंटिंग? बिजली कंपनियों ने प्रत्येक क्षेत्र में स्थापित पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर सिम आधारित विशेष उपकरण लगाए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से ट्रांसफार्मर से वितरित होने वाली बिजली की जानकारी सीधे बिजली कंपनी के सर्वर तक पहुंचती है। किसी क्षेत्र में मौजूद सभी ट्रांसफार्मरों से आपूर्ति की जा रही बिजली का नियमित डाटा उपलब्ध रहता है। इसके बाद उपभोक्ताओं की वास्तविक बिजली खपत और बिलिंग के आंकड़ों का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया को इनर्जी अकाउंटिंग कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि वितरित बिजली और बिलिंग के बीच कितना अंतर है। स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों को मिली जिम्मेदारी जिस क्षेत्र में जिस कंपनी ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए हैं, उसी कंपनी को वहां इनर्जी अकाउंटिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। संबंधित कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी ट्रांसफार्मर से जितनी बिजली वितरित हो रही है, उसके अनुरूप बिलिंग क्यों नहीं हो रही है। कंपनी ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ता के बिल और बिजली खपत का सूक्ष्म विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर वह बिजली कंपनी को रिपोर्ट सौंपेगी कि बिलिंग में कमी या असंगति कहां से उत्पन्न हो रही है। इस प्रक्रिया के जरिए बिजली चोरी में संलिप्त उपभोक्ताओं की पहचान करना आसान होगा। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी उपभोक्ता के यहां स्वीकृत या वास्तविक लोड अधिक होने के बावजूद उसका बिजली बिल अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं है। बिहार में 90 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगे बिहार में वर्तमान में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.22 करोड़ है। इनमें से लगभग 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान लगातार जारी है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों के जिम्मे इनर्जी अकाउंटिंग का दायरा भी लगातार बढ़ता जाएगा। बिजली कंपनियों का मानना है कि इससे बिजली चोरी पर लगाम लगाने के साथ-साथ वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

तबादला नीति के अंतिम दिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, अलीगढ़-वाराणसी समेत कई जिलों में बदले गए CMO

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति के तहत 31 मई यानी आज तक ही विभागीय तबादले होंगे। तबादलों की सूची जारी करने के कारण ही रविवार को भी सरकारी कार्यालय खोले गए हैं और सूची को अंतिम रूप दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी रविवार को लगभग दो दर्जन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का ट्रांसफर किया। कानपुर के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामनाथ सिंह को अलीगढ़ का नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है। अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. नीरज त्यागी को आगरा मंडल का संयुक्त निदेशक बनाया है। इनके साथ ही डॉ. प्रमोद कुमार सीएमओ अंबेडकर नगर, डॉ. मुकेश कुमार को सीएमओ वाराणसी, डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को सीएमओ गाजियाबाद, डॉ. हरिनंदन प्रसाद को सीएमओ जालौन, डॉ. रमेश कुमार मिश्रा को सीएमओ सोनभद्र, डॉ. रंजन गौतम का सीएमओ बाराबंकी, डॉ. अजय कुमार शर्मा को सीएमओ उन्नाव, डॉ. अभय नारायण राय को सीएमओ बलिया, डॉ. अलका शुक्ला को सीएमओ हमीरपुर, डॉ. उदयभान सिंह को सीएमओ फतेहपुर, डॉ. किशोर कुमार आहूजा को सीएमओ हापुड़, डॉ. गंगाराम गौतम को सीएमओ जौनपुर, डॉ. पंकज कुमार को सीएमओ मऊ, डॉ. भुवन चन्द्र पंत को सीएमओ पीलीभीत, डॉ. रमाकांत सागर को सीएमओ अमरोहा, डॉ. रामनाथ सिंह को सीएमओ अलीगढ़, डॉ. विकास चन्द्रा को सीएमओ कन्नौज, डॉ. विनय कुमार को सीएमओ महोबा, डॉ. वेद प्रकाश को सीएमओ हाथरस और डॉ. सुखरंजन समदर को सीएमओ सीतापुर के पद पर तैनात किया गया है  

अंडे-पत्थर फेंकने की घटना पर विवाद, सोनारपुर हमले की जांच में जुटी पुलिस

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर सियासत गर्म हो गई है. एक तरफ टीएमसी इसे बीजेपी का सुनियोजित हमला बता रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने पलटवार करते हुए इसे टीएमसी के अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा बताया है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है. दरअसल, शनिवार को अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे. इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनके काफिले को रोक लिया. उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए. मौके पर मौजूद लोगों ने 'चोर-चोर' के नारे भी लगाए. हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षा घेरे में लिया. इस दौरान अभिषेक क्रिकेट हेलमेट पहने भी नजर आए. घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता उन्हें जान से मारने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. TMC ने BJP पर लगाया सुनियोजित हमले का आरोप घटना के तुरंत बाद टीएमसी ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की. पार्टी का दावा है कि बीजेपी के मंडल अध्यक्ष अभिजीत बिस्वास खुद मौके पर मौजूद रहकर भीड़ को उकसा रहे थे. टीएमसी ने यह सवाल उठाया कि अगर यह जनता का स्वाभाविक गुस्सा था, तो फिर इतनी भीड़ किसने जुटाई? यह हमला आखिर किसके इशारे पर हुआ? पार्टी ने बाद में एक और तस्वीर जारी करते हुए आकाश गयान नाम के एक शख्स को हमलावर बताया. टीएमसी का दावा है कि वह बीजेपी से जुड़ा कार्यकर्ता है. पार्टी ने सोशल मीडिया गतिविधियों का हवाला देते हुए बीजेपी पर हमला करवाने का आरोप दोहराया. BJP का पलटवार, बोली- यह अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने टीएमसी के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने दावा किया कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोग पहले टीएमसी की पूर्व विधायक लवली मैत्रा के करीबी रहे हैं. मालवीय ने सवाल उठाया कि कहीं यह टीएमसी की अंदरूनी खींचतान का मामला तो नहीं. वहीं, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं स्वस्थ समाज के लिए ठीक नहीं हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कई सालों से परेशान स्थानीय लोगों के गुस्से का नतीजा हो सकता है. पुलिस क्या कह रही है? पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद रातभर छापेमारी की गई और वीडियो फुटेज के आधार पर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है. अब तक न तो अभिषेक बनर्जी और न ही टीएमसी की तरफ से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी. पुलिस ने अपने स्तर पर मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है.

महाराष्ट्र में बड़ा अपडेट: e-KYC सख्ती के बाद घटकर 1.66 करोड़ हुई लाभार्थियों की संख्या

महाराष्ट्र महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना आगे भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल e-KYC की समयसीमा को आगे बढ़ाने या नए लाभार्थियों को जोड़ने की कोई योजना नहीं है। सरकार द्वारा चलाए गए एक सत्यापन अभियान के बाद लाभार्थियों की सूची में 80 लाख नाम काट दिए गए हैं। योजना के शुरुआती दौर में लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, जो अब घटकर 1.66 करोड़ रह गई है। दस्तावेजों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए चलाई गई e-KYC मुहिम 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जिन महिलाओं की e-KYC अधूरी रह गई थी, उनकी अपीलों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार के पास e-KYC की समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाभार्थियों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके अलावा वर्तमान में नए लाभार्थियों को जोड़ने का भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।" क्यों कटे 80 लाख महिलाओं के नाम? आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं। तय समयसीमा तक e-KYC पूरा न करना या रिकॉर्ड अपडेट न कर पाना, दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना, योजना की तय पात्रता और आय मानदंडों को पूरा न कर पाना और व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी होना। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नवंबर 2025 से दस्तावेज अपडेट करने की समयसीमा को कई बार बढ़ाया था और 30 अप्रैल को अंतिम तारीख घोषित किया गया था। महिलाओं में नाराजगी सूची से नाम हटाए जाने के कारण प्रभावित महिलाओं को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पुणे जिले की रहने वाली माया वाघमारे ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, "मैंने अपने दस्तावेज जमा किए थे और मुझे आश्वासन दिया गया था कि सिस्टम अपडेट हो जाएगा। लेकिन मेरा नाम ही हटा दिया गया। वह मासिक सहायता मेरे घर के खर्चों के लिए बहुत जरूरी थी।" एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई महिलाओं को लग रहा था कि सरकार पहले की तरह इस बार भी तारीख आगे बढ़ा देगी। इस लापरवाही के कारण अब उनकी मासिक किस्तें अचानक रुक गई हैं। विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई यह स्पष्टीकरण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के उन आश्वासनों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस योजना को बंद कर दिया जाएगा। शिंदे ने हाल ही में दोहराया कि सरकार महिलाओं और किसानों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और इस पहल के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। साल 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई 'लाड़की बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। महायुति सरकार की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ आता है।

मेमोरेंडम जमा करने की डेडलाइन बढ़ी, 8वें पे कमीशन को लेकर बढ़ी गतिविधियां

 नई दिल्ली 8वें वित्त आयोग को लेकर इस समय खूब चर्चाएं कर्मचारियों के बीच हो रहा है। इस बीच अच्छी खबर आई है। कोलकाता में 8वें पे कमीशन की एक बड़ी बैठक होने जा रही है। जिसकी तारीखों का ऐलान हो गया है। पे कमीशन 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में मीटिंग करेगा। इस मीटिंग में आयोग के सदस्य केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े संगठन सहित अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करेगा। बता दें, इसके अलावा मोमेरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख 31 मई 2026 से बढ़कर 15 जून 2026 कर दी गई है। 29 मई जारी किए गए नोटिस में साफ कर दिया गया है कि आगे डेडलाइन में कोई भी इजाफा नहीं किया जाएगा। क्यों जरूरी हैं मोमेरेंडम जमा करना अगर आप भी कोलकाता में होने जा रहे पे कमीशन की मीटिंग हिस्सा लेना चाहते हैं तो आपको मोमेरेंडम जमा करना होगा। पे कमीशन ने कहा है कि 8वें वित्त आयोग की वेबसाइट पर मोमेरेंडम जमा करने के के बाद एक यूनिक मेमो आईडी बनेगी। उसे भी पे कमीशन के पास जमा करवाना होगा। कौन ले सकता है मीटिंग में हिस्सा? 8वें वित्त आयोग की कोलकाता मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े संगठन, इंस्टीट्यूशंस, यूनियन और बंगाल में मौजूदा एसोसिएशन हिस्सा ले सकते हैं। लेकिन उन्हें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। बिना मेमोरेंडम जमा किए वो इस मीटिंग का हिस्सा नहीं हो सकते हैं। बता दें, मेमोरेंडम सिर्फ 8वें पे कमीशन की वेबसाइट पर जाकर ही जमा करवाया जा सकता है। आयोग ने कहा है कि स्थान आदि की चर्चा जल्द ही साझा कर दिया जाएगा। जून में कहां-कहां 8वें वित्त आयोग की मीटिंग श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर में 1 जून से 4 जून 2026 तक 8वें वित्त आयोग की मीटिंग होगी। लद्दाख में पे कमीशन की मीटिंग 8 जून 2026 को प्रस्तावित है। आयोग के पास 18 महीने का समय 8वें वित्त आयोग का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। आयोग की ही रिपोर्ट के आधार पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी आदि का फैसला सरकार लेगी। यही वजह है कि आयोग देश के अलग-अलग हिस्सो में समाज के सभी वर्गों से लगातार बातचीत कर रहा है। जिससे रिपोर्ट में सभी के विचार समाहित रहें। 8वें वित्त आयोग की मांग सरकारी कर्मचारी लम्बे समय से कर रहे थे। अंततः उनकी मांग को सरकार ने मान लिया है। अब देखना है कि इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर आयोग तय करता है। बता दें, फिटमेंट फैक्टर के ही आधार पर सैलरी आदि का फैसला होता है।

दक्षिणी लेबनान में तनाव चरम पर, इजरायली सेना ने रणनीतिक पहाड़ी पर किया कब्जा

लेबनान इजरायली सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में रणनीतिक रूप से अहम पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है जिसके शीर्ष पर ब्यूफोर्ट किला स्थित है। इस फोर्ट पर लगभग 44 साल बाद इजरायली झंडा लहराया है। यह 26 वर्ष से अधिक समय में लेबनान में इजराइली सेना का सबसे भीतर किया गया कब्जा है। इजराइली सेना ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। बताया गया कि इजइराली सेना ने नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर आसपास के गांवों में कई दिन तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद कब्जा किया। इजराइली सैनिकों ने इन गांवों के दुर्गम इलाके में हिजबुल्ला सदस्यों से लड़ाई लड़ी किले पर कब्जा करना मार्च की शुरुआत में इजराइल-हिजबुल्ला के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब 1948 में इजराइल के गठन के बाद से युद्ध की स्थिति में रहे दोनों देश वाशिंगटन में सीधी वार्ता कर रहे हैं। इजरायल की यह कार्रवाई 17 अप्रैल से लागू नाममात्र के संघर्षविराम के बावजूद हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अगले दौर की वार्ता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में होनी है। इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अवीचाय अद्राई ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की जिसमें इजराइली सैनिक किले के बाहर चलते दिख रहे हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा कि सैनिकों ने किले पर इजरायल का ध्वज फहरा दिया है। इससे पहले 1982 में इजराइली सैनिकों ने इस किले पर कब्जा किया था और 2000 में लेबनान से वापसी तक इस पर उनका कब्जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने कुछ दिन पहले ब्यूफोर्ट रिज और उससे आगे दक्षिण में सुलुकी घाटी में अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला के ढांचे को नष्ट करना और 'इजराइली नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष खतरों' को दूर करना था। बयान में कहा गया कि सेना जरूरत पड़ने पर अपने 'अभियान का विस्तार करने' के लिए तैयार है। हाल के दिनों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियानों का दायरा बढ़ा दिया है। इसने वास्तविक सीमा रेखा की तरह काम करने वाली लितानी नदी के पार सैनिक भेजे हैं और दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से से निवासियों को हटने को कहा है।

टिकाऊ और सुरक्षित करेंसी की ओर बढ़ रहा भारत, कागजी नोटों की जगह पॉलीमर नोट संभव

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक देश में फटे-पुराने नोटों की समस्या को समाप्त करने और बार-बार नोट छापने पर आने वाली भारी लागत को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी मुद्रा के स्थान पर प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की योजना पर विचार कर रहा है। वित्तीय बाजार और आम जनता के लिए इस बदलाव के फायदे और चुनौतियां दोनों ही काफी महत्वपूर्ण हैं। क्या हैं प्लास्टिक नोट? प्लास्टिक नोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक पदार्थ से तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक सूती धागे से बने कागजी नोटों की तुलना में ये बेहद लचीले, हल्के और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। मौजूदा समय में चलने वाले कागजी नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और पानी या पसीने के संपर्क में आते ही खराब हो जाते हैं। इस वजह से केंद्रीय बैंक को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोटों की छपाई पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने पड़ते हैं। प्लास्टिक नोट आने से इस बार-बार होने वाले खर्च में बहुत बड़ी बचत होगी। प्लास्टिक करेंसी के मुख्य लाभ इन नोटों का सबसे बड़ा गुण इनका टिकाऊपन है। पॉलीमर से बने ये नोट सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पूरी तरह से वॉटरप्रूफ होते हैं, जिसके कारण ये पानी, गंदगी या पसीने से सुरक्षित रहते हैं और मुड़ने या फटने से बचे रहते हैं। इसके अलावा, इनकी सतह गैर-छिद्रपूर्ण होती है, जिसके कारण इन पर धूल, मिट्टी या बैक्टीरिया आसानी से नहीं चिपकते। इस वजह से ये नोट इस्तेमाल करने में कहीं अधिक स्वच्छ और हाइजीनिक रहते हैं। जाली नोटों के धंधे पर लगेगी लगाम प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने का एक बड़ा फायदा नकली मुद्रा पर रोक लगाना भी है। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे आधुनिक उपाय शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होगा। इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, विशेष होलोग्राम और कई अन्य एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं, जिससे जाली नोटों के कारोबार को पूरी तरह ठप किया जा सकता है। नई तकनीक के रास्ते में मौजूद चुनौतियां फायदों के बावजूद इस नई व्यवस्था को लागू करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। शुरुआत में प्लास्टिक नोटों को छापने का खर्च सामान्य कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसके अतिरिक्त, ये नोट थोड़े चिकने होते हैं, जिससे हाथ से गिनते समय इनके फिसलने की समस्या हो सकती है। अत्यधिक तापमान या तेज गर्मी में इनके सिकुड़ने की आशंका भी बनी रहती है। सबसे बड़ी चुनौती देश भर के एटीएम नेटवर्क को लेकर है, क्योंकि इन नोटों के हिसाब से सभी मशीनों को अपग्रेड करना पड़ेगा। दुनिया भर में प्लास्टिक नोटों का चलन वैश्विक स्तर पर देखें तो प्लास्टिक करेंसी का प्रयोग कोई नया प्रयोग नहीं है। वर्तमान में दुनिया के 60 से भी अधिक देशों में आंशिक या पूर्ण रूप से प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक को सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनाया था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और रोमानिया जैसे कई बड़े देशों ने भी अपनी अर्थव्यवस्था में इसे शामिल किया है।